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	<title>Janam Kalyanak &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Janam Kalyanak &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>भगवान शांतिनाथ जी का पंच कल्याणक और प्रतिष्ठा महोत्सव मनाया: धार्मिक विधानों में समाजबंधुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया </title>
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		<pubDate>Fri, 21 Feb 2025 12:07:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दाहोद में भगवान श्री शांतिनाथ जी के नए जिनालय में पंच कल्याणक और प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन किया गया। इसमें आचार्य श्री सुनील सागर जी ससंघ के 108 से अधिक साधुओं का भव्य प्रवेश हुआ। उनकी अगवानी की गई। अभिषेक, शांतिधारा सहित विभिन्न विधान कराए गए। भजन संध्या और लेजर शो का भी आयोजन हुआ। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>दाहोद में भगवान श्री शांतिनाथ जी के नए जिनालय में पंच कल्याणक और प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन किया गया। इसमें आचार्य श्री सुनील सागर जी ससंघ के 108 से अधिक साधुओं का भव्य प्रवेश हुआ। उनकी अगवानी की गई। अभिषेक, शांतिधारा सहित विभिन्न विधान कराए गए। भजन संध्या और लेजर शो का भी आयोजन हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं मौजूद रहीं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए दाहोद से यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>दाहोद गुजरात।</strong> स्थानीय धर्म नगरी 16 से 21 फरवरी तक भगवान श्री शांतिनाथ के नए जिनालय में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन किया गया। इसमें प्रथम बार पधारे आचार्य श्री सुनील सागर जी ससंघ के 108 से अधिक साधुओं का भव्य प्रवेश करवाया गया। मंगल प्रवेश के बाद शोभायात्रा मुख्य इंद्र-इंद्राणी, यज्ञ नायक, कुबेर इंद्र, मूर्ति विराजमान कर्ता और ऐसे अनेक परिवारों को रथ में बैठाया गया। आचार्य श्री की अगवानी की गई। आचार्यश्री को महावीर नगर में निर्माण की गई हस्तिनापुर नगरी पर लाया गया। यहां ध्वजारोहण, पांडाल उद्घाटन के साथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में आचार्यश्री ने सभी भक्तों को संबोधित किया। कार्यक्रम की शुभकामनाएं देकर आशीर्वाद प्रदान किया। दोपहर को पूजा-विधि और विधान प्रारंभ किया गया।</p>
<p><strong>जैन धर्म जीवन जीने की कला है</strong></p>
<p>दोपहर में विशेष अतिथि के तौर पर 5 से ज्यादा सनातन धर्म के महामंडलेश्वर, अखिल भारतीय संत समिति के सदस्यगण और दाहोद जिले के जनजाति समाज में से ढाई सौ से अधिक साधु-संतों ने कार्यक्रम में उपस्थित रहकर आचार्यश्री को यह विश्वास दिलाया कि सनातन धर्म और जैन धर्म सदैव साथ-साथ थे और साथ-साथ रहेंगे। आचार्य श्री ने भी कहा कि जैन धर्म सनातन धर्म बिना अधूरा है और सनातन धर्म भी जैन धर्म बिना अधूरा है। जैन धर्म जीवन जीने की कला है। पूजन पद्धति में भिन्न है, लेकिन भारतीय दर्शन में संपूर्ण रूप से समान है।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-75099" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250221-WA0016-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1152" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250221-WA0016-scaled.jpg 2560w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250221-WA0016-300x135.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250221-WA0016-1024x461.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250221-WA0016-768x346.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250221-WA0016-1536x691.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250221-WA0016-2048x922.jpg 2048w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250221-WA0016-990x446.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250221-WA0016-1320x594.jpg 1320w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" />भगवान शांतिनाथ का गर्भकल्याणक मनाया</strong></p>
<p>दूसरे दिन भगवान शांतिनाथ के माता-पिता और उनकी इंद्र सभा लगी और वहां भगवान शांतिनाथ का गर्भकल्याणक महोत्सव मनाया गया। गर्व कल्याणक महोत्सव के बाद विधि-विधान और पूजन दिनभर किए गए। शाम को भी धार्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रम आरती और नृत्य नाटिका प्रस्तुत की गई। तीसरे दिन भगवान श्री शांतिनाथ का जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया गया। जिसमें भगवान शांतिनाथ के जन्म के बाद उन्हें हाथी पर बिठाकर 25 फीट ऊंचे समवशरण पांडुकशिला पर विराजमान किया गया।</p>
<p>पांडु्कशीला पर विराजमान करने के बाद सभी इंद्र समाज, सृष्टि समाज के सभी नागरिकों और आमंत्रित मेहमानों ने भगवान का जलाभिषेक कर उत्सव मनाया।</p>
<p><strong>जैन समाज के लोग भजनों का आनंद लेते रहे</strong></p>
<p>जलाभिषेक के समय भगवान के ऊपर पुष्प वर्षा भी की गई। विशेष हेलिकॉप्टर की व्यवस्था कमेटी ने की थी। भगवान के तप कल्याण और दीक्षा कल्याणक भी बड़े ही धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मनाए गए। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ सांस्कृतिक प्रोग्राम में भी राष्ट्रीय स्तर के प्रोग्राम यहां किए गए। जिसमें मशहूर गायक ऋषभ संभव का आर्केस्ट्रा ने जैन भजन का लाइव कंसर्ट पहली बार प्रस्तुत किया। देर रात तक जैन समाज के लोग भजनों का आनंद लेते रहे। दूसरे दिन भगवान शांति नाथ जी के 25 फीट ऊंची मूर्ति पर लेजर शो के माध्यम से जैन धर्म की जानकारी भगवान शांतिनाथ का जीवन चरित्र, आचार्य सन्मति सागर जी का जीवन चरित्र दर्शाया गया। आचार्य भगवान श्री सुनील सागर जी का संपूर्ण जीवन चरित्र लेजर शो के माध्यम से शहर के जैन समाज ही नहीं अपितु अन्य अनेक समाज के लोगों ने मंत्रमुग्ध होकर इस देखा।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-75098" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250221-WA0019-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1152" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250221-WA0019-scaled.jpg 2560w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250221-WA0019-300x135.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250221-WA0019-1024x461.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250221-WA0019-768x346.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250221-WA0019-1536x691.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250221-WA0019-2048x922.jpg 2048w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250221-WA0019-990x446.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250221-WA0019-1320x594.jpg 1320w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" />भगवान को नगर भ्रमण कराया</strong></p>
<p>प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतिम दिन दीक्षा कल्याणक में सुबह-सुबह भगवान का दीक्षा कल्याण मनाया गया। निर्वाण लाडू चढ़ाया गया। दक्षिण से आए विशाल रथ पर भगवान को विराजमान कर गजराज के माध्यम से नगर भ्रमण करवाया गया। नगर भ्रमण में अनेक इंद्र-इंद्राणी और समाज के श्रेष्ठीजन विराजमान हुए। यह शोभायात्रा नवीन विद्यालय में पहुंची। यहां पर आचार्य श्री ने सभी मूर्तियों को विराजमान कर मूर्तियों को प्रतिष्ठित कर उन्हें पूजनीय बनाया।</p>
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		<title>द्वितीय तीर्थंकर भगवान अजितनाथ का 6 को तप और 7 फरवरी को जन्म कल्याणकः तप और जन्म कल्याणक पर जिनालयों में होंगे विविध धार्मिक आयोजन </title>
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		<pubDate>Thu, 06 Feb 2025 14:22:30 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भगवान अजितनाथ जैन धर्म के दूसरे तीर्थंकर हैं और भगवान अजितनाथ जी का तप कल्याणक माघ शुक्ल नवमीं को है। यह तिथि इस बार 6 फरवरी गुरुवार को आ रही है। इसके ठीक एक दिन बाद भगवान का जन्म कल्याणक भी आ रहा है। यानि 7 फरवरी शुक्रवार को माघ शुक्ल 10 को भगवान का [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भगवान अजितनाथ जैन धर्म के दूसरे तीर्थंकर हैं और भगवान अजितनाथ जी का तप कल्याणक माघ शुक्ल नवमीं को है। यह तिथि इस बार 6 फरवरी गुरुवार को आ रही है। इसके ठीक एक दिन बाद भगवान का जन्म कल्याणक भी आ रहा है। यानि 7 फरवरी शुक्रवार को माघ शुक्ल 10 को भगवान का जन्म कल्याणक मनाया जाएगा। बता दें कि विगत 10 जनवरी को ही भगवान अजितनाथ का ज्ञान कल्याणक मनाया गया है। <span style="color: #ff0000">इस बार भी श्रीफल जैन न्यूज की ओर से यह स्पेशल रिपोर्ट उपसंपादक प्रीतम लखवाल के संयोजन से। </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> भगवान अजितनाथ जैन धर्म के 24 तीर्थकरों की दिव्य श्रृंखला के द्वितीय सौपान के रूप में पूजित, वंदित और अभिनंदित हैं। दूसरे तीर्थंकर के रूप में भगवान अजितनाथ का जन्म माघ शुक्ल 10 को अयोध्या के इक्ष्वाकु वंशीय क्षत्रिय राज परिवार में हुआ था। भगवान का दीक्षा कल्याणक यानि तप कल्याणक माघ शुक्ल 9 को हुआ। अयोध्या नगरी के सेहतुक वन में भगवान का तप कल्याणक हुआ। भगवान के मंदिरों में अभिषेक और शांतिधारा सहित महामस्तकाभिषेक के धार्मिक आयोजन पूरी भक्ति भावना से किए जाते हैं। देश के विभिन्न प्रांतों में विद्यमान दिगंबर जैन मंदिरों में भगवान के तप और जन्म कल्याणक पर धार्मिक विधान होंगे। जैन धर्म ग्रंथों में वर्णित संदर्भों के अनुसार भगवान अजितनाथ ने जैन धर्म को आगे बढ़ाते हुए अपने संदेशों और उपदेशों के माध्यम से देशनाएं दी। ज्ञात स्रोतों के अनुसार भगवान अजितनाथ के पिता जितशत्रु थे और माता विजया देवी थीं। इनका चिन्ह हाथी है। भगवान अजितनाथ की आयु 72 लाख पूर्व की वर्णित है।</p>
<p><strong>देवों ने किया जन्माभिषेक कल्याणक</strong></p>
<p>जेठ महीने की अमावस पर जब रोहिणी नक्षत्र का कला मात्र से अवशिष्ट चंद्रमा के साथ संयोग था तब ब्रह्म मुहूर्त के पहले महारानी विजयसेना ने चौदह स्वप्न देखे थे। महा रानी विजया ने देखा कि हमारे मुख कमल में एक मदोन्मत्त हाथी प्रवेश कर रहा है। सुबह महारानी ने जित शत्रु महाराज से स्वप्नों का फल पूछा उन्होंने उनका फल बतलाया कि तुम्हारे स्फटिक समान निर्मल गर्भ में विजय विमान से तीर्थंकर पुत्र अवतीर्ण हुआ है। वह पुत्र, निर्मल तथा पूर्वभव से साथ आने वाले मति-श्रुत-अवधिज्ञान रूपी तीन नेत्रों से देदीप्यमान है। भगवान् आदिनाथ के मोक्ष चले जाने के बाद जब 50 लाख करोड़ सागर वर्ष बीत चुके तब द्वितीय तीर्थंकर का जन्म हुआ था। जन्म होते ही सुंदर शरीर धारक तीर्थंकर भगवान् का देवों ने मैरू पर्वत पर जन्माभिषेक कल्याणक किया और इनका नाम अजितनाथ नाम रखा।</p>
<p><strong>एक हजार तपस्वियों के साथ अंतिम ध्यान किया</strong></p>
<p>उन्होंने बाह्य और अभ्यंतर के सभी शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर ली थी। जब उनके अंतिम क्षण निकट आ रहे थे। भगवान अजितनाथ सम्मेद शिखर पर चले गए। एक हजार अन्य तपस्वियों के साथ उन्होंने अपना अंतिम ध्यान आरंभ किया। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को उन्हें निर्वाण प्राप्त हुआ। जब चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में था, प्रातःकाल के समय प्रतिमा योग धारण करने वाले भगवान अजितनाथ ने मुक्ति पद प्राप्त किया।</p>
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		<title>भगवान विमलनाथ जी का जन्म और तप कल्याणकः देश के विभिन्न तीर्थ स्थलों पर भगवान विमलनाथ जी के हैं अदभुत जिनालय </title>
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		<pubDate>Sat, 01 Feb 2025 10:28:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भगवान विमलनाथ जी का 2 फरवरी को जन्म और तप कल्याणक है। जब भगवान विमलनाथ जी का जन्म हुआ तब माघ महीने के शुल्क पक्ष की तृतीया तिथि थी। इस बार इस तिथि पर यह सुयोग बना है कि एक ओर भगवान विमलनाथ जी का जन्म और तप कल्याणक मनाया जाएगा तो दूसरी ओर वाग्देवी, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भगवान विमलनाथ जी का 2 फरवरी को जन्म और तप कल्याणक है। जब भगवान विमलनाथ जी का जन्म हुआ तब माघ महीने के शुल्क पक्ष की तृतीया तिथि थी। इस बार इस तिथि पर यह सुयोग बना है कि एक ओर भगवान विमलनाथ जी का जन्म और तप कल्याणक मनाया जाएगा तो दूसरी ओर वाग्देवी, विद्या की देवी सरस्वती का प्रकटोत्सव भी मनाया जाएगा। यह अद्भुत संयोग तो है ही इसी दिन से दशलक्षण व्रत भी आरंभ हो रहे हैं। भगवान विमलनाथ जी जैन धर्म के तेरहवें तीर्थंकर है और जैन धर्म को सही मार्ग पर ले जाने में उनकी देशनाएं जैन जन-जन तक बहुत गहराई से पहुंची है। <span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रृंखला के तहत भगवान विमलनाथ जी के जन्म और तप कल्याणक पर यह रिपोर्ट उप संपादक प्रीतम लखवाल की कलम से&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>इंदौर।</strong> भगवान विमलनाथ जी का 2 फरवरी को जन्म और तप कल्याणक है। जब भगवान विमलनाथ जी का जन्म हुआ, तब माघ महीने के शुल्क पक्ष की तृतीया तिथि थी। भगवान श्री विमलनाथ वर्तमान युग अवसरपिणीद्ध के तेरहवें तीर्थंकर थे। वे सिद्ध बन गए, एक मुक्त आत्मा जिसने अपने सभी कर्मों को नष्ट कर दिया है। भगवान श्री विमलनाथ का जन्म इक्ष्वाकु वंश के काम्पिल्य में राजा कृतवर्मा और रानी श्यामादेवी के यहां हुआ था। उनकी जन्म तिथि भारतीय कैलेंडर के माघ शुक्ल महीने की तीसरी तिथि है। बारहवें तीर्थंकर को मोक्ष पधारे हुए जब बहुत काल व्यतीत हो चुका था। तब माघ शुक्ल तृतीया के दिन तेरहवें तीर्थंकर श्री विमलनाथ जी का जन्म हुआ। कम्पिलपुर के राजा कृतवर्मा एवम उनकी महारानी श्यामादेवी को प्रभु के जनक-जननी होने का परम-सौभाग्य प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>राजपद का दायित्व भी वहन किया</strong></p>
<p>विमलनाथ जी ने यौवन में पदार्पण किया। माता-पिता ने अनेक सुंदर राजकन्याओं से उनका पाणिग्रहण कराया। पिता के बाद उन्होंने राजपद का दायित्व भी वहन किया। अपने विमल शासनकाल में विमलनाथ का विमल सुयश चतुर्दिक प्रशस्त हुआ।</p>
<p><strong>भगवान विमलनाथ जी का तप कल्याणक</strong></p>
<p>माघ शुक्ल चतुर्थी के दिन महाराज विमलनाथ मुनि विमलनाथ बने अर्थात प्रव्रजित हुए। तप और ध्यान की साधना में निमग्न रहते हुए दो वर्ष बाद पौष शुक्ल षष्ठी के दिन प्रभु केवली बने। तीर्थ की रचनाकर तीर्थंकर पद को उपलब्ध हुए। मंदर नामक मुनि प्रभु के ज्ये्ष्ठ शिष्य और प्रमुख गणधर थे। उनके अतिरिक्त चौपन गणधर और भी थे। धर्म-परिवार में 68 हजार साधु ,एक लाख 800 सौ साध्वियां ,दो लाख 8 हजार श्रावक एवं चार लाख 24 हजार श्राविकाए थीं। तृतीय बलदेव भद्र एवं स्वयंभू नामक वासुदेव प्रभु के अनन्य भक्त थे। आषाढ कृष्णा सप्तमी के दिन सम्मेद शिखर पर्वत से मोक्ष प्राप्त किया।</p>
<p><strong>भगवान के चिन्ह का महत्वः शूकर </strong></p>
<p>भगवान विमलनाथ के चरणों में शूकर का प्रतीक पाया जाता है। शूकर प्रायः मलिनता का प्रतीक है। ऐसे मलिन वृत्ति वाला पशु विमलनाथ भगवान के चरणों में जाकर आश्रय लेता है तो वह शुकर ‘वराह‘ कहलाने लगता है। एक समय ऐसा आता है, जब भगवान विष्णु भी वराह का रूप धारण कर दुष्ट राक्षसों का संहार करने लगते हैं। यह प्रभु का रूप स्वयं विष्णु धारण करते हैं। शूकर के जीवन से हमें दृढता एवं सहिष्णुता का गुण ग्रहण करना चाहिए।</p>
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<p>शुकल माघ तुरी तिथि जानिये, जनम मंगल तादिन मानिये।</p>
<p>हरि तबै गिरिराज विषै जजे, हम समर्चत आनन्द को सजे।</p>
<p>ॐ ह्रीं माघशुक्लाचतुर्थ्यां जन्ममंगलप्राप्ताय श्रीविमल अर्घ्यं नि। .</p>
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<p>तप धरे सित माघ तुरी भली, निज सुधातम ध्यावत हैं रली।</p>
<p>हरि फनेश नरेश जजें तहां, हम जजें नित आनन्द सों इहां।</p>
<p>ॐ ह्रीं माघशुक्लाचतुर्थ्यां तपोमंगल प्राप्ताय श्रीविमल0 अर्घ्यं नि।</p>
<p>-ःविद्या वाचस्पति डॉ. अरविंद प्रेमचंद जैन, संरक्षक, शाकाहार परिषद्</p>
<p><strong>भगवान के प्रसिद्ध मंदिर</strong></p>
<p>काम्पिल्य जैन मंदिर, काम्पिल्य, उत्तरप्रदेश, ये 1800 साल पुराने हैं। जिनमें भगवान विमलनाथ की मूर्ति लगभग 2600 साल पुरानी है। दुबई में जैन देरासर, महाराष्ट्र धुले में श्री विमलनाथ भगवान तीर्थ स्थित हैं।</p>
<p>स्रोतः-इंटरनेट और जैन गजेट</p>
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		<title>तीर्थंकर आदिनाथ का जन्म कल्याणक 3 अप्रेल को: समोशरण मंदिर कंचन बाग में मनाया जाएगा मुख्य समारोह </title>
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		<pubDate>Tue, 02 Apr 2024 08:38:21 +0000</pubDate>
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<p><strong>जैन धर्म के प्रवर्तक एवं प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान का जन्म कल्याणक चैत्र वदी नवमी बुधवार 3 अप्रैल को जैन धर्मावलंबी देशभर में मनाएंगे। इस उपलक्ष्य में जैन मंदिरों में विविध धार्मिक कार्यक्रम प्रभात फेरी, अभिषेक, शांति धारा, श्रीजी की पूजन, शोभा यात्रा, भक्तांबर पाठ आदि कार्यक्रम होंगे। <span style="color: #ff0000">पढि़ए राजेश जैन दद्दू की पूरी रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>इंदौर।</strong> जैन धर्म के प्रवर्तक एवं प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान का जन्म कल्याणक चैत्र वदी नवमी बुधवार 3 अप्रैल को जैन धर्मावलंबी देशभर में मनाएंगे। इस उपलक्ष्य में जैन मंदिरों में विविध धार्मिक कार्यक्रम प्रभात फेरी, अभिषेक, शांति धारा, श्रीजी की पूजन, शोभा यात्रा, भक्तांबर पाठ आदि कार्यक्रम होंगे। मुख्य समारोह प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी दिगंबर जैन समवशरण मंदिर तुकोगंज ट्रस्ट एवं दिगंबर जैन श्राविकाश्रम ट्रस्ट कंचन बाग के संयुक्त तत्वाधान एवं पंडित रतनलाल जी शास्त्री के निर्देशन में समवशरण मंदिर में होगा। कार्यक्रम के अंतर्गत मंदिर में प्रात: 6:30 बजे नित्य, नियम अभिषेक, शांति धारा होगी।</p>
<p>तत्पश्चात प्रात: 7:30 बजे समव शरण मंदिर से श्री जी की शोभा यात्रा का जुलूस प्रारंभ होकर कंचन बाग एवं रतलाम कोठी होते हुए वापस समवशरण मंदिर आएगा। जहां प्रवचन एवं अभिषेक शांति धारा होगी एवं प्रभावना वितरित की जाएगी। जुलूस में आश्रम की ब्रह्मचारी बहनें एवं ब्रह्मचारी भैयाजी भी सम्मिलित होंगे। महिलाएं केसरिया वस्त्र एवं महिला मंडल अपने यूनिफॉर्म में और पुरुष वर्ग श्वेत वस्त्र में सम्मिलित हों बैंड-बाजों की धुन पर मंगल गीत गाते और जयकारा लगाते हुए पैदल चलेंगे। संध्या 7:30 बजे आरती एवं 8:00 बजे से भजन संध्या होगी। समाज नेत्री रानी दोशी ने समाज जनों से जन्म जयंती समारोह में सम्मिलित होने की अपील की है।</p>
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