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	<title>Jalabhishek &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Jalabhishek &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>बिना तामझाम पार्श्वनाथ भगवान के जलाभिषेक और पाठशाला के बच्चों संग मनाया अजीत कोठिया ने जन्मदिन : धार्मिक श्रद्धा, पारिवारिक आशीर्वाद और सामाजिक सरोकारों के बीच सादगीपूर्ण ढंग से मनाया विशेष दिन </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 17:46:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ सामाजिक कार्यकर्ता एवं महावीर इंटरनेशनल के इंटरनेशनल डायरेक्टर नॉलेज शेयरिंग अजीत कोठिया ने अपना जन्मदिन पार्श्वनाथ भगवान के जलाभिषेक तथा दिगंबर जैन पाठशाला के बच्चों के साथ सादगी और श्रद्धा के साथ मनाया। उन्हें देशभर से शुभकामनाएं प्राप्त हुईं। पढ़िए अजीत कोठिया की खबर बांसवाड़ा ।आजकल जहां जन्मदिन समारोह भव्य आयोजनों और तामझाम के बीच मनाए [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> सामाजिक कार्यकर्ता एवं महावीर इंटरनेशनल के इंटरनेशनल डायरेक्टर नॉलेज शेयरिंग अजीत कोठिया ने अपना जन्मदिन पार्श्वनाथ भगवान के जलाभिषेक तथा दिगंबर जैन पाठशाला के बच्चों के साथ सादगी और श्रद्धा के साथ मनाया। उन्हें देशभर से शुभकामनाएं प्राप्त हुईं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए अजीत कोठिया की खबर</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बांसवाड़ा</strong> ।आजकल जहां जन्मदिन समारोह भव्य आयोजनों और तामझाम के बीच मनाए जाते हैं, वहीं सामाजिक कार्यकर्ता, महावीर इंटरनेशनल के इंटरनेशनल डायरेक्टर नॉलेज शेयरिंग एवं ई-चौपाल तथा फेडरेशन ऑफ हूमड़ जैन समाज के संस्थापक सदस्य अजीत कोठिया ने अपना जन्मदिन धार्मिक आस्था और सादगी के साथ मनाकर एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया।</p>
<p><strong>पार्श्वनाथ भगवान का किया जलाभिषेक</strong></p>
<p>अपने जन्मदिवस की शुरुआत अजीत कोठिया ने डडूका स्थित पार्श्वनाथ जिनालय में मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ के जलाभिषेक से की। भगवान की भक्ति और पूजा-अर्चना के माध्यम से उन्होंने जीवन में सुख, शांति और समाज सेवा के लिए शक्ति की कामना की।</p>
<p><strong>पाठशाला के बच्चों के साथ बांटी खुशियां</strong></p>
<p>जन्मदिन के अवसर पर कोठिया ने दिगंबर जैन पाठशाला डडूका के बच्चों के साथ समय बिताया। बच्चों के बीच रहकर उन्होंने अपने विशेष दिन को यादगार बनाया और उन्हें संस्कार, शिक्षा एवं धर्म से जुड़े रहने का संदेश दिया।</p>
<p><strong>माता-पिता से लिया आशीर्वाद</strong></p>
<p>प्रातःकाल अजीत कोठिया ने अपनी माताजी कमला देवी कोठिया एवं पिताजी बदामीलाल जी कोठिया से दीर्घायु एवं स्वस्थ जीवन का आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद संयुक्त परिवार के सभी सदस्यों ने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं देकर उज्ज्वल भविष्य की कामना की।</p>
<p><strong>परिवारजनों ने दी शुभकामनाएं</strong></p>
<p>इस अवसर पर अशोक, सरिता, राजेंद्र, निशा, अनिल, रजनी, अविन कोठिया, हीना, अहाना कोठिया, अंकिता, वरुण सारगिया, दियाना, कवीर, पूर्वी, हितेन जैन, पहल, रौनक जैन, दिशांत, शुभी, आयुष, निशि, डॉ. नमन, अर्निका, जैनी एवं प्रतिनव सहित परिवार के सभी सदस्यों ने उन्हें शुभकामनाएं प्रेषित कीं।</p>
<p><strong>देशभर से मिला बधाइयों का सिलसिला</strong></p>
<p>अजीत कोठिया को महावीर इंटरनेशनल के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष वीर सीए अनिल जैन, महासचिव सोहनलाल वैद्य, अंतरराष्ट्रीय कोषाध्यक्ष वीर सुधीर जैन सहित पुरुषोत्तम भंडारी, वंदना बक्षी, गौतम राठौड़, दीपा शिसोदिया, रवींद्र जैन, महेश कुमार मूंड, प्रदीप टोंग्या एवं राज भार्गव ने जन्मदिन की शुभकामनाएं भेजीं।</p>
<p><strong>सामाजिक संस्थाओं ने भी दी बधाई</strong></p>
<p>एसबीआई पेंशनर्स एसोसिएशन बांसवाड़ा, जैन युवा समिति डडूका, महावीर इंटरनेशनल डडूका, गढ़ी-परतापुर, ग्रामीण विकास नवयुवक मंडल डडूका तथा फेडरेशन ऑफ हूमड़ जैन समाज के पदाधिकारियों और सदस्यों ने भी अजीत कोठिया को जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके स्वस्थ, सफल और दीर्घ जीवन की कामना की।</p>
<p><strong>सेवा और संस्कारों का संदेश</strong></p>
<p>जन्मदिन के इस सादगीपूर्ण आयोजन ने यह संदेश दिया कि जीवन के विशेष अवसरों को धार्मिक आस्था, पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक सरोकारों के साथ भी सार्थक बनाया जा सकता है। अजीत कोठिया का यह प्रयास समाज के लिए प्रेरणादायी रहा।</p>
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		<title>आचार्यश्री ज्ञानसागर जी का अवतरण दिवस मनाया : भक्ति और सेवा का उमड़ा सागर </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 02 May 2026 07:24:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्यश्री ज्ञानसागरजी का 69वां अवतरण दिवस श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर परेड में विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों के साथ हर्षाेल्लास और श्रद्धाभाव से मनाया गया। मुरैना में जन्मे आचार्य श्री के अवतरण दिवस पर पूरे परिसर में आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला। अंबाह से पढ़िए, यह खबर&#8230; अंबाह। आचार्यश्री ज्ञानसागरजी का 69वां अवतरण दिवस [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्यश्री ज्ञानसागरजी का 69वां अवतरण दिवस श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर परेड में विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों के साथ हर्षाेल्लास और श्रद्धाभाव से मनाया गया। मुरैना में जन्मे आचार्य श्री के अवतरण दिवस पर पूरे परिसर में आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला। <span style="color: #ff0000">अंबाह से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अंबाह।</strong> आचार्यश्री ज्ञानसागरजी का 69वां अवतरण दिवस श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर परेड में विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों के साथ हर्षाेल्लास और श्रद्धाभाव से मनाया गया। मुरैना में जन्मे आचार्य श्री के अवतरण दिवस पर पूरे परिसर में आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातःकालीन बेला में श्री जिनेंद्र प्रभु के जलाभिषेक एवं शांतिधारा के साथ हुआ। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजन कर आचार्य श्री के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। इसके पश्चात मंदिर परिसर में भक्ति और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिला। परेड मंदिर के प्रवेश द्वार पर आयोजित विशाल भंडारे के अंतर्गत अन्नदान किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में आमजन, श्रद्धालु एवं राहगीरों ने भोजन एवं शीतल पेय ग्रहण किया। भीषण गर्मी के बावजूद शीतल पेय एवं अन्न प्रसादी पाकर उपस्थित सभी लोगों ने संतोष और आनंद का अनुभव किया। सेवा भाव से परिपूर्ण इस आयोजन ने समाज में समरसता और करुणा का संदेश दिया। कार्यक्रम के शुभारंभ से पूर्व आचार्यश्री ज्ञानसागरजी महाराज के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्वलन किया गया। इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य जनों ने सामूहिक रूप से दीप प्रज्वलित कर प्रसादी वितरण का शुभारंभ किया।</p>
<p><strong>इनकी उपस्थिति में किया गया कार्यक्रम </strong></p>
<p>प्रमुख रूप से महेश चंद जैन शिक्षक, आनंद जैन टकसारी, शगुनचंद जैन दिल्ली, महेशचंद जैन एमपीईबी, अरुण जैन पार्षद, विमल जैन राजू, संतोष जैन, कुलदीप जैन, दिलीप जैन, उपेंद्र पटेल, अनिल जैन खरगोला, विकास जैन पांडे, ओपी जैन, पूरनचंद जैन, अमित जैन टकसारी, श्रेयांस जैन, विकास जैन एसके, लबली जैन, मनीष जैन, अजय जैन बबलू, डॉ. बी जैन, सोनू जैन, राहुल नायक एवं आकाश जैन उपस्थित रहे।</p>
<p><strong>सच्चा धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं </strong></p>
<p>इस अवसर पर प्रमुख वक्ता कुलदीप जैन ने आचार्य श्री के जीवन, विचार और समाज में उनके योगदान पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री का जीवन केवल एक साधु जीवन नहीं, बल्कि एक ऐसी प्रेरक धारा है, जिसने चंबल अंचल की धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा दी है। विमल जैन राजू ने कहा कि आचार्य श्री ने अपने तप, त्याग और संयम से यह सिद्ध किया है कि सच्चा धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि वह जीवन को संस्कारित करने की एक सतत प्रक्रिया है।</p>
<p><strong>मुरैना का नाम आध्यात्मिक धरोहर के रूप में स्थापित किया</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने समाज को अहिंसा, शाकाहार, अपरिग्रह और आत्मसंयम का मार्ग दिखाया। उनके प्रवचन केवल धार्मिक उपदेश नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला हैं। महेश जैन एमपीईबी ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी यदि उनके आदर्शों को अपनाए तो समाज में व्याप्त अनेक समस्याओं का समाधान स्वतः संभव है। उन्होंने विशेष रूप से यह बात कही कि आचार्य श्री ने चंबल अंचल को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई है और मुरैना का नाम आध्यात्मिक धरोहर के रूप में स्थापित किया है। कार्यक्रम में महेशचंद जैन शिक्षक ने भी आचार्य श्री के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जीवन संयम, त्याग, तपस्या और समाज सुधार की प्रेरणा देता है। उन्होंने बताया कि आचार्य श्री ने जैन दर्शन को जन-जन तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।</p>
<p><strong>आचार्य श्री की महाआरती की</strong></p>
<p>इसके पश्चात उपस्थित सभी गुरुभक्तों द्वारा पूज्य आचार्य श्री की महाआरती की गई। पूरा मंदिर परिसर “जयकारों” और भक्ति गीतों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भावविभोर होकर आचार्य श्री के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की। आयोजन समिति द्वारा सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया गया और इस बात पर जोर दिया गया कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में सेवा, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करते हैं।</p>
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		<title>णमोकार महामंत्र से सभी आत्माओं का कल्याण होता है: तेरहपंथी जैन मंदिर में जलाभिषेक, शांतिधारा भक्ति भाव से हुई </title>
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		<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 11:45:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के आज्ञानुवर्ती शिष्य उपाध्याय मुनि श्री विकसंत सागर जी महाराज के सानिध्य मे धाटीकुआं स्थित तेरहपंथी जैन मंदिर में जलाभिषेक, शांतिधारा भक्ति भाव से करवाई गई। कुचामनसिटी से सुभाष पहाड़िया की रिपोर्ट&#8230;  कुचामनसिटी। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के आज्ञानुवर्ती शिष्य उपाध्याय मुनि श्री विकसंत सागर जी महाराज के सानिध्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के आज्ञानुवर्ती शिष्य उपाध्याय मुनि श्री विकसंत सागर जी महाराज के सानिध्य मे धाटीकुआं स्थित तेरहपंथी जैन मंदिर में जलाभिषेक, शांतिधारा भक्ति भाव से करवाई गई। <span style="color: #ff0000">कुचामनसिटी से सुभाष पहाड़िया की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> कुचामनसिटी।</strong> आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के आज्ञानुवर्ती शिष्य उपाध्याय मुनि श्री विकसंत सागर जी महाराज के सानिध्य मे धाटीकुआं स्थित तेरहपंथी जैन मंदिर में जलाभिषेक, शांतिधारा भक्ति भाव से करवाई गई। शांतिधारा के पुण्यार्जक गुणमाला देवी कैलाश चन्द, निर्मल कुमार, अमित, उमंग अरिहंत पांड्या परिवार रहे। धर्मसभा का मंगलाचरण किरणदेवी मुन्नी देवी झांझरी ने किया। संतोष कुमार, प्रवीण, विपिन, चिन्मय, दिव्य पहाडिया परिवार ने शास्त्र भेंट किया। ललितकुमार, चिरंजी लाल, लेखराज, निखिल पहाडिया परिवार ने पाद प्रक्षालन किया। आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज के फोटो के सामने लालचंद, संतोष, ज्ञानचंद, अशोक पहाडिया पुरणमल, विनोद झांझरी, अशोक अजमेरा, सुरेश कुमार, प्रकाशचंद, मोनू पाटोदी, निखिल जैन ने दीप प्रज्वलन किया।</p>
<p>उपाध्याय श्री ने अपने प्रवचन में धार्मिक वही है जो दुसरो को दुख देने का जरा सा ही भाव नहीं करें। सभी आत्माएं एक समान हैं। मृत्यु व वैराग्य की कोई उम्र नहीं होती है। सभी आत्माओं की सम्मान और कल्याण की भावना करनी चाहिए। णमोकार महामंत्र की महिमा में बताया कि नाग नागीन को मरते समय णमोकार सुनाने से जीव देवगती जाकर अपना कल्याण किया। यह महामंत्र अनाघि अंनत व सबके लिए मंगलकारी है। प्रवचन के बाद सभी के लिए संतोष देवी संतोष पहाडिया परिवार ने अल्पाहार रखा।</p>
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		<title>आदिनाथ जन्म कल्याणक महोत्सव में हुआ आदिनाथ महामंडल विधान : श्रद्धालुओं ने भगवान का जलाभिषेक कर पुण्य अर्जित किया </title>
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		<pubDate>Wed, 11 Mar 2026 11:22:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नॉर्थ ईदगाह कॉलोनी स्थित श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में मुनिश्री विलोकसागर जी महाराज एवं मुनिश्री विबोधसागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में भगवान आदिनाथ जन्म कल्याणक एवं रथोत्सव के दूसरे दिन बुधवार को श्री आदिनाथ महामंडल विधान किया गया।आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह रिपोर्ट&#8230; आगरा। नॉर्थ ईदगाह कॉलोनी स्थित श्री आदिनाथ दिगंबर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नॉर्थ ईदगाह कॉलोनी स्थित श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में मुनिश्री विलोकसागर जी महाराज एवं मुनिश्री विबोधसागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में भगवान आदिनाथ जन्म कल्याणक एवं रथोत्सव के दूसरे दिन बुधवार को श्री आदिनाथ महामंडल विधान किया गया।<span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> नॉर्थ ईदगाह कॉलोनी स्थित श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में मुनिश्री विलोकसागर जी महाराज एवं मुनिश्री विबोधसागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में भगवान आदिनाथ जन्म कल्याणक एवं रथोत्सव के दूसरे दिन बुधवार को श्री आदिनाथ महामंडल विधान किया गया।कार्यक्रम की शुरुआत प्रातःकाल भगवान आदिनाथ के अभिषेक एवं शांतिधारा के साथ हुई। श्रद्धालुओं ने भगवान का जलाभिषेक कर पुण्य अर्जित किया और भक्तिभाव से आराधना की। इसके पश्चात बाल ब्रह्मचारी नितिन भैया के मार्गदर्शन में विधान का ध्वजारोहण निर्मल कुमार मोठया एवं हीरालाल बैनाड़ा तथा बीना बैनाड़ा परिवार द्वारा श्रद्धाभाव के साथ संपन्न कराया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने विधि-विधानपूर्वक आदिनाथ महामंडल विधान में भाग लेकर भगवान की आराधना की। कार्यक्रम के दौरान मुनिश्री के समक्ष श्रद्धालुओं द्वारा शास्त्र भेंट की प्रेरणादायी परंपरा भी निभाई गई।</p>
<p><strong>तीर्थंकरों के कल्याणक केवल उत्सव नहीं</strong></p>
<p>मुनिश्री विलोकसागर जी महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में भगवान आदिनाथ के जन्म कल्याणक का आध्यात्मिक महत्व बताते हुए कहा कि तीर्थंकरों के कल्याणक केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और धर्ममार्ग पर चलने की प्रेरणा के अवसर होते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में ऐसे धार्मिक आयोजनों में सम्मिलित होकर अपने जीवन को धर्ममय बनाने का आह्वान किया।</p>
<p><strong>जीवन को धर्ममय बनाने का संकल्प</strong></p>
<p>पूरे दिन मंदिर परिसर भक्ति और आस्था के वातावरण से सराबोर रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान आदिनाथ के चरणों में नमन कर अपने जीवन को धर्ममय बनाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर अशोक जैन,अमित जैन बॉबी,दिनेश जैन,राजेश जैन, अजय जैन,संजीव जैन,राजेश जैन बल्ले, विनोद जैन,अखिल जैन,सत्येंद्र जैन सहित नॉर्थ ईदगाह कॉलोनी जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।</p>
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		<title>सुपार्श्वनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक 8 फरवरी को : श्री सुपार्श्वनाथ जैन मंदिर में होंगे कई कार्यक्रम </title>
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		<pubDate>Fri, 06 Feb 2026 12:28:44 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन समाज के सातवें तीर्थंकर भगवान सुपार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक 8 फरवरी रविवार को बड़े भक्ति भाव और हर्षाेल्लास से मनाया जाएगा। सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230; सनावद। जैन समाज के सातवें तीर्थंकर भगवान सुपार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक 8 फरवरी रविवार को बड़े भक्ति भाव और हर्षाेल्लास से मनाया जाएगा। सन्मति जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन समाज के सातवें तीर्थंकर भगवान सुपार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक 8 फरवरी रविवार को बड़े भक्ति भाव और हर्षाेल्लास से मनाया जाएगा। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> जैन समाज के सातवें तीर्थंकर भगवान सुपार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक 8 फरवरी रविवार को बड़े भक्ति भाव और हर्षाेल्लास से मनाया जाएगा। सन्मति जैन काका ने बताया कि इस अवसर पर श्री सुपार्श्वनाथ जैन मंदिर में कई कार्यक्रम किए जाएंगे।</p>
<p>इस मंगल अवसर पर संतोष बाकलीवाल ने बताया कि जिसमें प्रातः 7 बजे श्रीजी का जलाभिषेक, शांतिधारा, संगीतमय पूजन के बाद प्रातः 8बजे सुपार्श्वनाथ मंडल विधान होगा साथ ही निर्वाण लाडू चढ़ाया जाएगा। रात्रि में आरती की जाएगी। इस अवसर पर श्री सुपार्श्वनाथ भक्त मंडल ने सभी समाजजनों से कार्यक्रम में अपनी सहभागिता दर्ज करवाने का निवेदन किया है।</p>
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		<title>अवधपुरी में हुआ श्री पदमप्रभु विधान का दिव्य आयोजन : आत्मकल्याण, सम्यक भावना और अंतर्मन की शांति प्राप्त करने का अनुपम अवसर </title>
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		<pubDate>Sun, 30 Nov 2025 11:01:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बोदला स्थित अवधपुरी के श्री पदमप्रभु जिनालय में 30 नवंबर को श्रद्धा,भक्ति और आध्यात्मिक उत्साह से ओतप्रोत श्री पदमप्रभु विधान सानंद हुआ। सुबह 7 बजे श्रीजी के जलाभिषेक और शांतिधारा के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह खबर&#8230; आगरा। बोदला स्थित अवधपुरी के श्री पदमप्रभु जिनालय में 30 नवंबर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बोदला स्थित अवधपुरी के श्री पदमप्रभु जिनालय में 30 नवंबर को श्रद्धा,भक्ति और आध्यात्मिक उत्साह से ओतप्रोत श्री पदमप्रभु विधान सानंद हुआ। सुबह 7 बजे श्रीजी के जलाभिषेक और शांतिधारा के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> बोदला स्थित अवधपुरी के श्री पदमप्रभु जिनालय में 30 नवंबर को श्रद्धा,भक्ति और आध्यात्मिक उत्साह से ओतप्रोत श्री पदमप्रभु विधान का पावन आयोजन सानंद हुआ। सुबह 7 बजे श्रीजी के जलाभिषेक और शांतिधारा के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। जिसमें बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे। शांत संगीत, मंत्रोच्चारण और भक्तिमय वातावरण ने संपूर्ण परिसर को दिव्यता से भर दिया। अभिषेक के पश्चात विधान की विभिन्न पूजन-विधियों, मंगलाष्टकों और आराधना का क्रम अत्यंत विधि पूर्वक किया गया। श्रद्धालुओं ने इसे आत्मकल्याण, सम्यक भावना और अंतर्मन की शांति प्राप्त करने का अनुपम अवसर बताया। प्रातःकालीन समय से ही अनेक साधर्मी परिवार जिनालय में पहुंचकर प्रभु पदमप्रभु की कृपा का वरण करते रहे।</p>
<p>पूरे आयोजन के दौरान श्रीजी के समक्ष निरंतर भक्ति, आराधना और शुभेच्छाओं की धारा प्रवाहित होती रही। समाजजनों ने ऐसे पावन आयोजनों को समुदाय में संस्कार, सात्त्विकता और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रसारित करने वाला बताया। कार्यक्रम में प्रवीणकुमार जैन, विवेक जैन, इंद्रप्रकाश जैन, रवि जैन, नरेंद्रकुमार जैन, जितेन्द्र जैन, मनीष जैन, धवल जैन, राकेश जैन,शुभम जैन, रीता जैन, करुणा जैन, पुष्पा जैन, सीमा जैन, सुनीता जैन, शालू जैन सहित समस्त अवधपुरी जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।</p>
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		<title>सिद्धचक्र महामंडल विधान के समापन पर उमड़े समाजजन: मंदिर में स्वर्ण कलशों से श्री जी का जलाभिषेक किया </title>
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		<pubDate>Fri, 21 Nov 2025 11:00:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सिद्धचक्र महामंडल विधान के समापन की बेला में विश्व शांति एवं कल्याण की पावन भावना के साथ महायज्ञ कर विशाल रथयात्रा निकाली गई। आठ दिनों तक सिद्धों की आराधना पूजा भक्ति के पश्चात अंतिम दिन महायज्ञ एवं रथयात्रा के पावन अवसर पर जैन मंदिर में उल्लासपूर्ण, भक्तिमय जैसा वातावरण था। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सिद्धचक्र महामंडल विधान के समापन की बेला में विश्व शांति एवं कल्याण की पावन भावना के साथ महायज्ञ कर विशाल रथयात्रा निकाली गई। आठ दिनों तक सिद्धों की आराधना पूजा भक्ति के पश्चात अंतिम दिन महायज्ञ एवं रथयात्रा के पावन अवसर पर जैन मंदिर में उल्लासपूर्ण, भक्तिमय जैसा वातावरण था। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> सिद्धचक्र महामंडल विधान के समापन की बेला में विश्व शांति एवं कल्याण की पावन भावना के साथ महायज्ञ कर विशाल रथयात्रा निकाली गई। श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के विधानाचार्य पंडित राजेंद्र शास्त्री मंगरोनी ने बताया कि निरंतर आठ दिनों तक सिद्धों की आराधना पूजा भक्ति के पश्चात अंतिम दिन महायज्ञ एवं रथयात्रा के पावन अवसर पर जैन मंदिर में उल्लासपूर्ण, भक्तिमय जैसा वातावरण था। विधान में सिद्धों की आराधना करने वाले समस्त इंद्र इंद्राणी, श्रावक श्राविकाएं अपने विशेष परिधान में हार मुकुट से सुसज्जित महायज्ञ के कुण्डों के इर्द गिर्द बैठकर मंत्रों के साथ विश्व शांति एवं कल्याण की भावना के सहित कुंडों में आहुति दे रहे थे। महायज्ञ में सुगंधित धूप, घी एवं जड़ी बूटियों की आहुति से उत्पन्न सुगंधित धुएं से मंडप में विराजमान श्रद्धालु आनंदित महसूस कर रहे थे।</p>
<p><strong>विशाल एवं भव्य रथयात्रा ने किया नगर भ्रमण</strong></p>
<p>महायज्ञ के बाद मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज एवं मुनिश्री विबोधसागरजी महाराज के पावन सान्निध्य में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। सर्वप्रथम श्री जिनेंद्र प्रभु की प्रतिमा को रथ पर विराजमान किया गया। बैंडबाजों और घोड़ा बग्घी के साथ बड़े जैन मंदिर से रथयात्रा प्रारंभ होकर शंकर बाजार, महादेव नाका, स्टेशन रोड, हनुमान चौराहा, सराफा बाजार, लोहिया बाजार भ्रमण करती हुई बड़े जैन मंदिर पहुंची। शोभायात्रा में युगल मुनिराज श्री जिनेंद्र प्रभु के रथ के आगे आगे चल रहे थे। तीन लोक के नाथ के रथ को युवा साथी अपने हाथों से खींच रहे थे। शोभायात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर श्री जी की आरती एवं पूज्य युगल मुनिराजों का पाद प्रक्षालन कर भव्य अगवानी की गई। भव्य शोभायात्रा में आगे-आगे चल रहीं घोड़ा बग्गियों में सिद्धचक्र विधान के विशेष इंद्र-इंद्राणी विराजमान थे। बड़े जैन मंदिर में प्रतिष्ठाचार्य पंडित राजेंद्र शास्त्री मंगरोनी के निर्देशन में स्वर्ण कलशों द्वारा श्री जी का जलाभिषेक किया गया। कलशों से निकली जलधारा जैसे ही जिनेंद्र प्रभु के सिर पर आई, वैसे ही पूरा पंडाल करतल ध्वनि के साथ भगवान की जय जयकार करने लगा। सभी उपस्थित साधर्मी बंधुओं माताओं बहिनों ने श्री जिनेंद्र प्रभु की आरती कर पुण्यार्जन किया।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-94940" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251121-WA0230.jpg" alt="" width="1600" height="836" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251121-WA0230.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251121-WA0230-300x157.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251121-WA0230-1024x535.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251121-WA0230-768x401.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251121-WA0230-1536x803.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251121-WA0230-990x517.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251121-WA0230-1320x690.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />पुण्यार्जक परिवार ने प्रभु एवं युगल मुनिराजों से की क्षमा याचना</strong></p>
<p>महायज्ञ से पूर्व प्रातःकालीन बेला में श्री जिनेंद्र प्रभु का अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन किया गया। महायज्ञ एवं रथयात्रा के साथ ही आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन हुआ विधान समापन पर सभी विधानकर्ताओं ने श्री जिनेंद्र प्रभु एवं युगल मुनिराजों के श्री चरणों में विधान के दौरान जाने अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा याचना की। समारोह के समापन पर विधान पुण्यार्जक परिवार कैलाशचंद राकेश जैन शानू जैन पूणारावत परिवार दिल्ली की ओर से प्रतिष्ठाचार्य पंडित राजेंद्र शास्त्री मंगरोनी, बाहर से आए हुए अतिथियों, पुजारीगण एवं भजन गायक व संगीतकार नीलेश जैन सागर का बहुमान किया गया।</p>
<p><strong>मुनिश्री विलोकसागरजी ने कहा-पाप कर्म किसी पर दया नहीं करता</strong></p>
<p>श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के समापन पर मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पाप कर्म किसी पर दया नहीं करता, वह अपना काम करके ही रहता है। कोई भी हो चाहे वह राजा हो, मंत्री हो, करोड़पति हो, भिखारी हो, पापकर्म बांधते समय आनंदित होता है, लेकिन, जब उसका परिणाम भुगतता है तो उसकी सारी हेकड़ी निकल जाती है। शुरू-शुरू में जब कोई व्यक्ति पाप करता है तो वह अपने आप को असहज महसूस करता है, पुनः पाप करते समय वह अपने आप को सहज महसूस करता है, फिर पाप करने में वह पाप की उपेक्षा करता है, पाप को नजर अंदाज करता है और पुनः पुनः बार पाप करने पर वह आनंद मनाता है अर्थात वह निर्लज्ज बन जाता है। इसके बाद में जब भी वह पाप करता है तब वह अपने आप को बहादुर समझने लगता है। जैसे जैसे पाप के संस्कार गहरे होते जाते है, तब उसे पाप करने में आनंद आता है और पाप करने में कोई दोष नजर नहीं आता है। यदि कोई उसे समझता है तो वह समझने वाले को ही मूर्ख समझता है। वह समझते हैं कि इसमें बुराई क्या है, यह तो मेरे पुण्य का फल है परन्तु, जब पुण्य क्षीण होता है और पाप का उदय होता है तब उनकी सारी अकड़ निकल जाती है क्योंकि, पाप किसी पर भी दया नहीं करता हैं।इसलिए पाप कर्म त्यागने योग्य है।</p>
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		<title>सिद्धचक्र महामंडल विधान में 19 नवंबर को 512 अर्घ्य समर्पित होंगे: मुनिश्री ने कहा किसी की आस्था सम्यक पर तो किसी की मिथ्यात्व पर होती है  </title>
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		<pubDate>Tue, 18 Nov 2025 10:06:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन समाज के आराध्य मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने शहर के बड़े जैन मंदिर में सिद्धचक्र महामंडल विधान के दौरान धर्मसभा में कहा कि आस्था और विश्वास पर ही संसार की सभी व्यवस्थाएं चल रही हैं। सभी की आस्था कहीं ना कहीं तो होती ही है।  मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230; मुरैना। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन समाज के आराध्य मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने शहर के बड़े जैन मंदिर में सिद्धचक्र महामंडल विधान के दौरान धर्मसभा में कहा कि आस्था और विश्वास पर ही संसार की सभी व्यवस्थाएं चल रही हैं। सभी की आस्था कहीं ना कहीं तो होती ही है।  <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>मुरैना।</strong> जैन समाज के आराध्य मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने शहर के बड़े जैन मंदिर में सिद्धचक्र महामंडल विधान के दौरान धर्मसभा में कहा कि आस्था और विश्वास पर ही संसार की सभी व्यवस्थाएं चल रही हैं। सभी की आस्था कहीं ना कहीं तो होती ही है। अंतर इतना है कि मिथ्यात्व पर होती है या सम्यक पर होती है। विश्वास तो करना ही पड़ता है। कुदेव पर कर लें, चाहे सच्चे देव पर कर लें। वस्तु के सही स्वरूप पर कर लें या विपरीत स्वरूप पर कर लें। वस्तु के सही स्वरूप पर विश्वास करने वाला व्यक्ति सम्यक दृष्टि होता है। विपरीत पर विश्वास करने वाला व्यक्ति मिथ्या दृष्टि होता है।</p>
<p><strong>मार्ग सब जानते हैं लेकिन&#8230;</strong></p>
<p>अध्यात्म में क्रिया का महत्व कम तथा श्रद्धा का महत्व अधिक होता है। आपकी श्रद्धा और आपका विश्वास कैसा है, वह कौन है। सम्यक दर्शन का कार्य सच्चाई से जोड़ना है। वह आभास दिलाता है और सत्य को पहचानता है। मार्ग सब जानते हैं लेकिन, मार्ग सच्चा है या झूठा यह कोई नहीं जानता। इस अवसर पर मुनिश्री विबोधसागरजी ने कहा कि राग को बढ़ाने से राग बढ़ता है। मोबाइल तो सबके पास है, खाली बैठे हैं तो रील आदि देखने लगते हैं। फिर थोड़ी देर बाद दोबारा देखने का मन हो गया तो राग बढ़ गया। इन सभी कारणों से हम आध्यात्म से दूर हो रहे हैं। हमें राग को बढ़ाना नहीं है, कम करना है। राग कम होगा तभी हम आध्यात्म से जुड़ पाएंगे और इस संसार के जन्म मृत्य के मोह जाल से निकलकर सिद्ध शिला की ओर बढ़ेंगे।</p>
<p><strong>आठ दिवसीय अनुष्ठान में पूजा भक्ति आराधना का समागम</strong></p>
<p>आठ दिवसीय सिद्धों की आराधना में मंगलवार को 256 अर्घ्य समर्पित किए गए। बड़े जैन मंदिर में 8 दिवसीय सिद्धों की आराधना के भक्ति मय अनुष्ठान में प्रतिष्ठाचार्य पंडित राजेंद्र शास्त्री मंगरोनी ने विधान की पूजन कराते हुए एक-एक श्लोक का अर्थ समझाया। सिद्धों की आराधना करते हुए बुधवार को पांचवे दिन 512 अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे। विधान पूजन से पूर्व भगवान वासपूज्य स्वामी का जलाभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन किया गया। आचार्यश्री विद्यासागरजी एवं आचार्यश्री आर्जवसागरजी के चित्र का अनावरण किया गया। साथ ही दीप प्रज्वलन किया गया। मुनिराजों को शास्त्र भेंट श्रावक-श्रेष्ठियों ने किए।</p>
<p><strong>श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का महत्व </strong></p>
<p>प्रतिष्ठाचार्य पंडित राजेंद्र शास्त्री मंगरोनी ने बताया कि सिद्धचक्र विधान कराने से कोढ़ नामक बीमारी ठीक हुई थी। श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान सर्व प्रथम मैना सुंदरी ने किया था। मैना सुंदरी के पति श्रीपाल को कोढ़ की बीमारी थी। दिगंबर जैन मुनिराज ने मैना सुंदरी को बताया कि यदि तुम अपने पति का कोढ़ ठीक करना चाहती हो तो भक्ति एवं श्रद्धा के साथ श्री सिद्धचक्र विधान करो। मुनिराज के बताए अनुसार मैना सुंदरी ने विधान किया। विधान के दौरान श्री जिनेंद्र प्रभु का अभिषेक कोढ़ पर लगाया तो उसके पति का कोढ़ ठीक हो गया। तभी से श्री सिद्ध चक्र विधान का महत्व बढ़ गया और सभी लोग इस विधान को करने के लिए लालायित रहते हैं।</p>
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		<title>संयम साधना के बिना अनुष्ठान सार्थक नहीं – मुनिश्री विलोकसागर, सिद्धचक्र विधान का शुभारंभ : मुरैना बड़े जैन मंदिर में ध्वजारोहण, घटयात्रा और आठ अर्घ्यों के साथ आरंभ हुआ महाविधान </title>
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		<pubDate>Fri, 14 Nov 2025 09:57:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बड़े जैन मंदिर मुरैना में आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का शुभारंभ मुनिश्री विलोकसागरजी के प्रवचन, ध्वजारोहण और घटयात्रा के साथ हुआ। संयम साधना के महत्व पर विस्तृत संदेश दिए गए और प्रथम दिवस आठ अर्घ्य समर्पित किए गए। पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट… मुरैना के बड़े जैन मंदिर में श्री सिद्धचक्र महामंडल [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बड़े जैन मंदिर मुरैना में आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का शुभारंभ मुनिश्री विलोकसागरजी के प्रवचन, ध्वजारोहण और घटयात्रा के साथ हुआ। संयम साधना के महत्व पर विस्तृत संदेश दिए गए और प्रथम दिवस आठ अर्घ्य समर्पित किए गए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p>मुरैना के बड़े जैन मंदिर में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के शुभारंभ अवसर पर निर्यापक श्रमण मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जैन दर्शन में संयम साधना सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि संयमी व्यक्ति अपने व्यवहार और आचरण से सम्मान प्राप्त करता है, जबकि असंयमी व्यक्ति अपमानित होता है। धार्मिक अनुष्ठानों के सार्थक परिणाम तभी प्राप्त होते हैं जब व्यक्ति संयम का पालन करे। मुनिश्री ने स्पष्ट किया कि संयम का अर्थ केवल बाहरी नियंत्रण नहीं, बल्कि मन, इंद्रियों और भावनाओं पर स्व-नियंत्रण है। यह मनुष्य को शांति, विवेक और आत्मबल प्रदान करता है तथा मोक्ष मार्ग का आधार है।</p>
<p><strong>ध्वजारोहण और घटयात्रा के साथ अनुष्ठान की शुरुआत</strong></p>
<p>आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ महोत्सव का शुभारंभ मंगलाचरण, ध्वजारोहण और भव्य घटयात्रा के साथ हुआ। पुण्यार्जक परिवार कैलाशचंद राकेशकुमार जैन पूणारावत के निवास से पूजन सामग्री गाजेबाजे के साथ बड़े जैन मंदिर लाई गई। चांदी के हार, मुकुट और विशेष पूजन वस्त्रों से सुसज्जित इन्द्रों ने मंत्रोच्चारण करते हुए प्रारंभिक क्रियाओं को सम्पन्न किया। सौभाग्यवती महिलाओं ने कलशों में लाया गया शुद्ध जल भूमि एवं मंडप की शुद्धि हेतु उपयोग किया।</p>
<p><strong>भगवान पार्श्वनाथ के चरणों में श्रीफल समर्पित कर लिया आशीर्वाद</strong></p>
<p>प्रमुख प्रतिष्ठाचार्य पंडित राजेंद्र शास्त्री मंगरोनी के नेतृत्व में पुण्यार्जक परिवार ने बड़े जैन मंदिर के मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ के श्री चरणों में श्रीफल अर्पित कर विधान की स्वीकृति ग्रहण की तथा निर्विघ्न सम्पन्नता हेतु आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके पश्चात मुनिश्री विलोकसागरजी एवं मुनिश्री विबोधसागरजी महाराज के श्री चरणों में भी श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया गया।</p>
<p><strong>प्रथम दिवस आठ अर्घ्य समर्पित, दूसरे दिन होंगे 48 अर्घ्य</strong></p>
<p>अनुष्ठान के प्रथम दिवस प्रातःकालीन बेला में जलाभिषेक, शांतिधारा और नित्य महापूजन के पश्चात प्रारंभिक विधान क्रियाएं सम्पन्न की गईं। सिद्धों की आराधना में आठ अर्घ्य समर्पित किए गए। विधान के दूसरे दिन सोलह और बत्तीस मिलाकर कुल अड़तालीस अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-94388" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251114-WA0021.jpg" alt="" width="1599" height="899" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251114-WA0021.jpg 1599w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251114-WA0021-300x168.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251114-WA0021-1024x576.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251114-WA0021-768x432.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251114-WA0021-1536x864.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251114-WA0021-990x557.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251114-WA0021-1320x742.jpg 1320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251114-WA0021-470x264.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251114-WA0021-640x360.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251114-WA0021-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251114-WA0021-414x232.jpg 414w" sizes="(max-width: 1599px) 100vw, 1599px" />भक्ति संगीत से गूंजा मंदिर परिस</strong></p>
<p>भोपाल के प्रसिद्ध भजन गायक नीलेश जैन एंड पार्टी ने अपनी मधुर भक्ति प्रस्तुतियों से उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरे परिसर में आध्यात्मिक वातावरण और भक्ति रस की धारा बहती रही।</p>
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		<title>भगवान महावीर 2552वां निर्वाण महोत्सव कुचामन सिटी में धूमधाम से मनाया : सकल जैन समाज ने जीवो और जीने दो के संदेश के साथ किया दीपोत्सव आयोजन </title>
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		<pubDate>Wed, 22 Oct 2025 05:09:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कुचामन सिटी में सकल जैन समाज ने 2552वां भगवान महावीर निर्वाण महोत्सव भक्ति, उत्साह और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ मनाया, जिसमें शांतिधारा, जलाभिषेक, स्नेह मिलन और लक्की ड्रा जैसे विविध आयोजन हुए। पढ़िए सुभाष पहाड़िया की रिपोर्ट… सकल जैन समाज कुचामन सिटी द्वारा वर्तमान शासन नायक “जीवो और जीने दो” के संदेश तथा अहिंसा, संयम [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>कुचामन सिटी में सकल जैन समाज ने 2552वां भगवान महावीर निर्वाण महोत्सव भक्ति, उत्साह और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ मनाया, जिसमें शांतिधारा, जलाभिषेक, स्नेह मिलन और लक्की ड्रा जैसे विविध आयोजन हुए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सुभाष पहाड़िया की रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p>सकल जैन समाज कुचामन सिटी द्वारा वर्तमान शासन नायक “जीवो और जीने दो” के संदेश तथा अहिंसा, संयम और करुणा मार्ग के प्रतिपादक श्री 1008 भगवान महावीर का 2552वां निर्वाण महोत्सव 21 अक्टूबर 2025 अमावस्या को बड़े ही धूमधाम और भक्ति भाव से मनाया गया।</p>
<p>प्रातःकाल सभी जैन जिनालयों में भगवान महावीर के कलशाभिषेक, शांतिधारा और पूजन-विधान में श्रावक-श्राविकाओं ने अत्यंत उत्साह और भक्ति के साथ भाग लिया। समाज के सचिव सुभाष पहाड़िया के अनुसार कुचामन के बड़े बाबा श्री 1008 भगवान महावीर की सवा सात फुट ऊँची प्रतिमा का सैकड़ों श्रावकों ने जलाभिषेक और शांतिधारा कर धर्मलाभ प्राप्त किया।</p>
<p>समाज के अध्यक्ष सोभागमल गंगवाल ने बताया कि प्रतिवर्ष की भांति इस बार भी सकल समाज का सामूहिक स्नेह मिलन समारोह प्रातः 11 बजे वृंदावन गार्डन में आयोजित किया गया, जिसमें लक्की ड्रा, हाउजी, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं सम्मान समारोह का भव्य आयोजन हुआ।</p>
<p>लक्की ड्रा एवं हाउजी के पुरस्कार वितरणकर्ताओं में श्रीमान विमल कुमार, नवीन कुमार, प्रबल, दर्शन, चिरंजीलाल पाटोदी, लालचंद, पुष्पा अजमेरा परिवार इन्दोखा वाला, देवेंद्र, जयकुमार, महेंद्र विकास पहाड़िया, बिनोद झांझरी, प्रमोद पांड्या तथा सुभाष रांवका शामिल रहे, जिन्होंने तिलक, माला और साफा पहनाकर सम्मान प्रदान किया।</p>
<p><strong>हाउजी विजेताओं का मारवाड़ी धुनों पर नृत्य</strong></p>
<p>रानी पाटनी और गुंजन गंगवाल ने हाउजी विजेताओं को मारवाड़ी धुनों पर नृत्य करवाकर माहौल को और अधिक उत्साहपूर्ण बना दिया।</p>
<p>कार्यक्रम में तेज कुमार बडजात्या, राजकुमार सेठी, अभिषेक पाटनी, अमित पहाड़िया, सचिन गंगवाल, माणक काला, पवन गोधा, अशोक एवं सुरेश जैन सहित अनेक समाजजनों का सराहनीय सहयोग रहा।</p>
<p>अंत में समाज के सचिव सुभाष पहाड़िया ने सभी सहयोगकर्ताओं और श्रावकों के प्रति आभार व्यक्त किया।</p>
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