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	<title>jainmuni &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>जीवन में पाप कार्यों से बचना ही आर्जव धर्म : आचार्य निर्भय सागर : पर्यूषण पर्व पर जैन मंदिरों में पूजन-अभिषेक कर श्रद्धालुओं ने जताई आस्था </title>
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		<pubDate>Sat, 30 Aug 2025 17:56:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ललितपुर में पर्यूषण पर्व पर आयोजित धर्मसभा में आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज ने कहा कि जीवन में पाप कार्यों से बचना और मायाचारी का त्याग करना ही सच्चा आर्जव धर्म है। उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म काया में अपनी शक्ति न छिपाने और पुण्य कार्यों में अग्रणी रहने का आह्वान किया। जैन समाज के श्रावक-श्राविकाओं [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>ललितपुर में पर्यूषण पर्व पर आयोजित धर्मसभा में आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज ने कहा कि जीवन में पाप कार्यों से बचना और मायाचारी का त्याग करना ही सच्चा आर्जव धर्म है। उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म काया में अपनी शक्ति न छिपाने और पुण्य कार्यों में अग्रणी रहने का आह्वान किया। <span style="color: #ff0000">जैन समाज के श्रावक-श्राविकाओं ने विभिन्न मंदिरों में अभिषेक, पूजन और शांति धारा कर आस्था प्रकट की… पढ़िए पूरी रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर। </strong>पर्यूषण पर्व की धर्ममय वेला में जैन पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन अटा मंदिर में आचार्य श्री निर्भयसागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि –</p>
<p>“जीवन में जब अपेक्षा रहती है और कार्य पूरे नहीं होते, तभी मायाचारी जन्म लेती है। धर्म कार्यों में अपनी शक्ति को न छिपाएँ और न ही पाप कार्यों में लगाएँ। तभी आर्जव धर्म का विकास होगा और जीवन सार्थक बनेगा।”</p>
<p>आचार्य श्री ने स्पष्ट किया कि भगवान की भक्ति में कभी शिथिलता नहीं करनी चाहिए। यदि स्नान करने की शक्ति है तो अभिषेक में कोताही नहीं होनी चाहिए। पूजन की भावना ही धर्म का सच्चा मार्ग है। उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य पाप से डरे और पुण्य कार्यों में अग्रसर रहे तो आर्जव धर्म का प्रसार होगा तथा समाज में सुख-शांति का वातावरण स्थापित होगा।</p>
<p><strong>मुनियों का प्रवचन</strong></p>
<p>मुनि शिवदत्त सागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि माया संसार का भ्रम है। हम जैसे हैं, वैसे दिखें तो मायाचारी की आवश्यकता ही समाप्त हो जाएगी। इसी प्रकार अभिनंदनोदय तीर्थ में मुनि सुदत्त सागर एवं मुनि पदमदत्त सागर महाराज ने श्रद्धालुओं को शांति धारा और अभिषेक कराते हुए बताया कि आर्जव धर्म सरलता और निष्कपटता का संदेश देता है।</p>
<p><strong>नगरभर में धार्मिक उत्साह</strong></p>
<p>नगर के आदिनाथ बड़ा मंदिर, चन्द्रप्रभु मंदिर डोडाघाट, शांतिनगर मंदिर, गांधीनगर इलाइट जैन मंदिर तथा सिविल लाइन जैन मंदिरों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पूजन-अर्चन कर धर्मलाभ लिया। मध्यान्ह में तत्वार्थ सूत्र का वाचन आचार्य संघ के सानिध्य में हुआ, जहाँ श्रावकों को जीवनोपयोगी चिंतन प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>सांस्कृतिक कार्यक्रमों की छटा</strong></p>
<p>सायंकाल आरती और शास्त्र प्रवचन के पश्चात जैन अटा मंदिर में ब्रह्मचारिणी लवली दीदी ने कहा – “पुरुषार्थ के अनुसार ही गति मिलती है। क्षल-कपट से मुक्ति संभव नहीं। मायाचारी से बचना और लक्ष्य निर्धारित करना ही जीवन का कल्याण है।”</p>
<p>इसके उपरांत बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी का मन मोह लिया, जिनकी सराहना उपस्थित धर्मालुओं ने उत्साहपूर्वक की।</p>
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		<title>डिनर को लेकर अमेरिका और यूरोप में नया रुझान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 07 Oct 2022 08:27:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन मुनियों-संतों के सूर्यास्त से पहले भोजन के सिद्धान्तों पर लौटे चिकित्सा विशेषज्ञ प्रकाश श्रीवास्तव &#124;अब वही सच साबित हुआ जिसका उल्लेख हमारे ऋषि-मुनियों, विशेषकर जैन संतों ने अपने ग्रंथों में भोजन को लेकर किया है। दुनिया में लोग अब अपने स्वास्थ्य को लेकर फिर सचेत हुए हैं। चाहे वह लेट-नाइट कल्चर वाला अमेरिका हो [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>जैन मुनियों-संतों के सूर्यास्त से पहले भोजन के सिद्धान्तों पर लौटे चिकित्सा विशेषज्ञ</strong></p>
<p><strong>प्रकाश श्रीवास्तव |</strong>अब वही सच साबित हुआ जिसका उल्लेख हमारे ऋषि-मुनियों, विशेषकर जैन संतों ने अपने ग्रंथों में भोजन को लेकर किया है। दुनिया में लोग अब अपने स्वास्थ्य को लेकर फिर सचेत हुए हैं। चाहे वह लेट-नाइट कल्चर वाला अमेरिका हो या फिर डिनर आफ्टर थियेटर की जिन्दगी जीने वाला ब्रिटेन। अब लोगों के रात के खान के समय में भी बदलाव हुआ है ताकि खाना पच सके। जैन धर्म में नियम है कि सूर्यास्त से पहले भोजन कर लेना चाहिए। जैन धर्म में रात्रि में भोजन करना सख्त मना है। जैन मुनि जानते थे कि सही समय पर लंच या डिनर करना सेहत के लिए फायदेमंद होगा। रात में भोजन ग्रहण नहीं करने के दो कारण बताए थे- पहला अहिंसा और दूसरा बेहतर स्वास्थ्य। अब चिकित्साविज्ञान से जुड़े विशेषज्ञ भी खुलकर कहने लगे हैं कि सूर्यास्त से पहले भोजन करने से पाचन तंत्र ठीक रहता है क्योंकि रात्रि में हमारी पाचन शक्ति कमजोर पड़ जाती है। साथ ही सोने से पूर्व भोजन को पचने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है जिससे गैस,एसिडिटी एवं पेट में भारीपन आदि जैसे समस्याओं से बचा जा सकता है।</p>
<p>विशेषज्ञों के मुताबिक- सोने से कम से कम तीन घंटे पहले डिनर जरूर कर लेना चाहिए। ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर का एक आदर्श समय होता है। एक अन्य विशेषज्ञ के मुताबिक रात आठ बजे तक डिनर कर लेना चाहिए। इसके बाद कुछ नहीं खाना चाहिए। अगर आप डिनर नहीं कर पाए हैं तो कुछ हल्का फुल्का या सोने से पहले एक गिलास दूध का सेवन कर सकते हैं।<br />
कहने की जरूरत नहीं कि कोरोना काल के बाद लोगों का जीवन कई मामलों में बदला है, जीवनशैली बदली है। इन बदलावों ने लोगों की सामाजिकता और मानसिकता पर भी असर डाला है। स्वास्थ्य मामले में लोगों में जागरुकता बढ़ी है। दुनियाभर में लोग अपनी सेहत को लेकर जागरूक हुए। एक रिपोर्ट के मुताबिक यूरोप और अमेरिका में भी लोग जल्दी भोजन करने लगे हैं। उनकी देर तक जागने की आदत भी कम हुई।</p>
<p>कोविड काल के वर्क फ्रॉम होम कल्चर की बात करें तो जब लोगों का फिर दफ्तर जाना शुरू हुआ तो कंपनियों ने आफिस की टाइमिंग सुबह जल्दी कर दी। इसका असर यह हुआ कि लोग शाम को जल्दी दफ्तर के काम से फ्री होकर घर आने लगे और जल्दी डिनर के बाद सोने की आदत डाली। देर रात तक जागने की आदत में बदलाव आया। आंकड़े गवाह हैं कि यूरोप, अमेरिका और ब्रिटेन समेत कई देशों में अब रेस्तरां में शाम 5 बजे से ही डिनर के लिए लोग पहुंच रहे हैं और लगभग 8 बजे तक रेस्तरां खाली हो जाते हैं।</p>
<p><strong>आइए, जानते हैं रात में भोजन जल्दी करने और देर रात तक जागने की आदत में बदलाव के सेहतमंद फायदों के बारे में।</strong><br />
-जल्द डिनर से खाना पचने में आसानी। सही पाचन प्रक्रिया के कारण एसिडिटी जैसी समस्या नहीं।<br />
-सोने से तीन घंटे पहले खाना खाने से अपच की समस्या का दूर होना। इससे मोटापा तेजी से कम करने में मदद मिलती है। वजन का भी नियंत्रिण।<br />
-खाने का सही समय होने से सुबह का नाश्ता और लंच भी सही समय पर।<br />
-डिनर का वक्त होते होते तेज भूख और नींद भी बेहतर।<br />
-रात 8 बजे तक डिनर से हृदय मरीजों के स्वास्थ्य में सुधार।<br />
-डायबिटीज का खतरा भी कम।<br />
-ब्लड प्रेशर के मरीजों को लंच और डिनर सही समय पर करना चाहिए। इससे रक्तचाप की समस्या पर लगाम लगती है।<br />
-समय पर सोने से नींद भी पूरी। मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए नींद का पूरा होना बहुत जरूरी।<br />
-अनिद्रा की शिकायत से तनाव व अवसाद भी। आंखों में जलन, सिर दर्द की समस्या दूर।</p>
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