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	<title>Jaineshwari Deeksha श्रीफल जैन न्यूज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>निकाली गई भव्य शोभायात्रा : वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी ने दीं रत्नत्रय की प्रतीक 3 दीक्षाएं </title>
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		<pubDate>Sat, 07 Sep 2024 08:08:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांतिसागरजी की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परम्परा के पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी वर्ष 2024 का वर्षायोग पारसोला में कर रहे हैं। इस बेला में 6 सितंबर को ब्रह्मचारी प्रदीप जीमुनि श्री प्रणित सागर जी , ब्रह्मचारिणी शकुंतला किकावत आर्यिका श्री प्रेक्षा मति, दिलीप जी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांतिसागरजी की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परम्परा के पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी वर्ष 2024 का वर्षायोग पारसोला में कर रहे हैं। इस बेला में 6 सितंबर को ब्रह्मचारी प्रदीप जीमुनि श्री प्रणित सागर जी , ब्रह्मचारिणी शकुंतला किकावत आर्यिका श्री प्रेक्षा मति, दिलीप जी अलासे क्षुल्लक श्री प्राप्त सागर जी बने। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश पंचोलिया की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पारसोला।</strong> प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांतिसागरजी की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परम्परा के पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी वर्ष 2024 का वर्षायोग पारसोला में कर रहे हैं। इस बेला में 6 सितंबर को ब्रह्मचारी प्रदीप जीमुनि श्री प्रणित सागर जी , ब्रह्मचारिणी शकुंतला किकावत आर्यिका श्री प्रेक्षा मति, दिलीप जी अलासे क्षुल्लक श्री प्राप्त सागर जी बने। श्रीमद् जैन धर्म की यही विशेषता है कि इस धर्म में सम्यक दर्शन सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र को धारण कर कर सिद्ध अवस्था को प्राप्त किया जा सकता है। सम्यक दर्शन और सम्यक ज्ञान के बाद चारित्र अर्थात साधु जीवन अपनाना जरूरी है चर्या में परिवर्तन करना ही दीक्षा है, संसार की दौड़ से दूर होना दीक्षा है ।संसारी प्राणी इच्छाओं से ग्रसित है संसार रुलाता है दीक्षा लेकर शिष्य को गुरु संगति में रहना चाहिए ।</p>
<p>जैन धर्म तीर्थंकर भगवान द्वारा प्रतिपादित, अनुमोदित, धारित श्रमण धर्म है। प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज ने अपने संयम पुरुषार्थ से श्रमण परंपरा को पुनर्स्थापित किया ।उत्तर भारत में चातुर्मास कर धर्म प्रभावना ,धर्म जागृति ,और सुप्त हो रही समाज को जागृत किया। आज सभी दीक्षार्थी गुरु और परिवार परंपरा अनुसार दीक्षा ले रहे हैं ब्रह्मचारी प्रदीप जी के गृहस्थ अवस्था के पिता,माता,बहन क्षुल्लक समाधि सागर बने ,उनकी माता ने हमसे दीक्षा लेकर आर्यिका मूर्तिमति बनी और बहन भी दीक्षा लेकर आर्यिका सुवैभव मति बनी।</p>
<p>ब्रह्मचारिणी शकुंतला जी के ग्रहस्थ अवस्था के पति ने भी हमसे दीक्षा लेकर मुनी पदम कीर्ति सागर बने और दिलीप जी के बड़े भाई ने भी हमसे दीक्षा लेकर मुनि परमानंद सागर बने तथा पत्नी भी दीक्षा लेकर संघ में आर्यिका विनम्रवती के रूप में है। शिष्य को दीक्षा लेकर गुरु के प्रति कृतज्ञता को दिल में समर्पण भाव के साथ धारण करने से साधना में सफलता मिलती है । यह धर्म देशना आचार्य वर्धमान सागर जी ने दीक्षा के अवसर पर प्रकट की। राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य श्री ने उपदेश में बताया कि यह संसार प्रतिकूल है संयम से संसार को अनुकूल बनाया जाता है और इंद्रियों की दासता दूर की जाती है। शिष्य को गुरु को अपना जीवन समर्पित करना चाहिए ख्याति नाम यश पूजा से दूर रहना चाहिए ।इसी पारसोला नगर में सन 1990 में मूलचंदजी घाटलिया ने मुनि दीक्षा लेकर मुनि ओम सागर जी बने आर्यिका पूर्वी मति भी इसी नगर की है साधु अपने जीवन में मृत्यु से भयभीत नहीं होता है साधु जीवन में साधना के बल पर मृत्यु पर विजय प्राप्त करता है ।प्रथमाचार्य आचार्य शांति सागर जी महाराज ने अपने संयम साधना से श्रमण साघु मार्ग को खोला और 36 दिन की सल्लेखना लेकर समाधि का आदर्श प्रस्तुत किया। आचार्य श्री ने बिसतुनिया ग्राम का जिक्र कर बताया कि इस नगर ग्राम में एक भी जैन परिवार नहीं है राजपूत समाज है उन्होंने मुनी पदम कीर्ति महाराज की समाधि के समय एक बीघा जमीन दान देकर समाधि स्थल बनाया है नगर के नागरिक हर माह संघ के दर्शन हेतु आते हैं।</p>
<p>इसके पूर्व दीक्षार्थियों की शोभा यात्रा श्री वर्द्धमान सागर सभागार में पहुंची । दिगंबर जैन दशा हूमड़ समाज एवं वर्षायोग समिति के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित दीक्षा समारोह श्यामा वाटिका कार्यक्रम सभागार में भगवान और पूर्वाचार्यों का चित्र अनावरण दीप प्रज्वलन दीक्षार्थी परिवार द्वारा किया गया। जयंतीलाल कोठारी अध्यक्ष एवं ऋषभ पचोरी अध्यक्ष चातुर्मास समिति ने बताया कि प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांति सागर जी एवम पूर्वाचार्यो को अर्ध्य समर्पित विभिन्न नगरों से पधारी समाज द्वारा किया गया।सौभाग्यशाली परिवार की 5 महिलाओं द्वारा चोक पूरण की क्रिया की गई। दीक्षार्थ्यों ने आचार्य श्री ने दीक्षा की याचना की तथा आचार्य श्री एवम समस्त साधुओं, दीदी- भैया, श्रावक-श्राविकाओं तथा समाज से क्षमा याचना की।वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी के पंचामृत से चरण प्रक्षालन का सौभाग्य तीनों दीक्षार्थी परिवार को मिला। इस बेला में आचार्य श्री के द्वारा दीक्षार्थी के पंच मुष्ठी केशलोच किये गए तथा दीक्षा संस्कार मस्तक तथा हाथों पर किये गए। इसके बाद आचार्य श्री ने नामकरण किया।7 प्रतिमा घारी 71 वर्षीय ब्रह्मचारी प्रदीप भैया दाहोद का दीक्षा उपरांत नूतन नाम मुनि श्री प्रणित सागर किया गया। सात प्रतिमा धारी 69 वर्षीय शकुंतला देवी का नाम दीक्षा के बाद आर्यिका श्री प्रेक्षा मति किया गया। 68 वर्षीय दिलीप अलासे का नूतन नाम क्षुल्लक श्री प्राप्त सागर जीकिया गया। पुण्यार्जक परिवार द्वारा पिच्छी कमंडल शास्त्र एवं कपड़े भेंट किये गए। कार्यक्रम का संचालन श्री पंडित कीर्ति पारसोला ने किया। आज दीक्षार्थी के केशलोच हो रहे थे, तब सभी वैराग्यमयी पलों से सभी द्रवित हो रहे थे। परिजनों के दोनों नेत्रों में एक नेत्र में खुशी के आंसू दूसरे नेत्र में दुख के आंसू भी थे। भक्तों के भजनों से वातावरण वैराग्य मय हो रहा था।</p>
<p>आचार्य श्री मुनि श्री हितेंद्र सागर जी एवं अन्य साधुओं ने दीक्षार्थी के केशलोचन किये। परिजनों एवं अन्य भक्त जिन्हें केशलोच झेलने का अवसर मिला। वह अपने को पुण्यशाली मान रहे थे। आज प्रातःकाल दीक्षार्थियों ने श्री जी के दर्शन कर पंचामृत अभिषेक पूजन किया, इसके पश्चात आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के दर्शन कर उनके चरणों का प्रक्षालन किया। शकुंतला देवी और श्री दिलीप जी दोनों के केशलोचन साधुओं ने किये। इसके पश्चात दीक्षार्थियों ने हल्दी लगाकर मंगल स्नान किया। आचार्य संघ सानिध्य में तीनों दीक्षार्थियों ने श्री जी का पंचामृत अभिषेक किया।आचार्य वर्धमान सागर जी एवं साधुओं को आहार दिया। साधुओं के आहार के बाद सन्मति भवन से आचार्य वर्धमान सागर जी के संघ सानिध्य में तीनों दीक्षार्थियों की शोभा यात्रा हजारों धर्मावलंबियों की उपस्थिति में नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई श्याम वाटिका में पहुंची।</p>
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		<title>दीक्षार्थी भाई श्रेयांश की निकली जयकार यात्रा : संयम जीवन में प्रवेश करो &#8211; साध्वी निखिलशीलाजी </title>
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		<pubDate>Fri, 22 Mar 2024 07:07:08 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ जैन दर्शन में संयम को मोक्ष पाने का राज मार्ग कहा गया है। हालांकि इस राज मार्ग पर चलने की हिम्मत कुछ विरले आत्मा कर पाती है। ऐसी ही एक मुमुक्षु आत्मा रतलाम निवासी श्रेयांश चौरड़िया के सत्कार बहुमान का शुभवस अर थांदला श्रीसंघ को प्राप्त हुआ। थांदला संघ ने सामूहिक नवकारसी के बाद श्रेयांश [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> जैन दर्शन में संयम को मोक्ष पाने का राज मार्ग कहा गया है। हालांकि इस राज मार्ग पर चलने की हिम्मत कुछ विरले आत्मा कर पाती है। ऐसी ही एक मुमुक्षु आत्मा रतलाम निवासी श्रेयांश चौरड़िया के सत्कार बहुमान का शुभवस अर थांदला श्रीसंघ को प्राप्त हुआ। थांदला संघ ने सामूहिक नवकारसी के बाद श्रेयांश भैया की जय-जयकार करते हुए जयकार यात्रा निकाली <span style="color: #ff0000">पढ़िए जीवन लाल जैन की रिपोर्ट..</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>थांदला।</strong> जैन दर्शन में संयम को मोक्ष पाने का राज मार्ग कहा गया है। हालांकि इस राज मार्ग पर चलने की हिम्मत कुछ विरले आत्मा कर पाती है। ऐसी ही एक मुमुक्षु आत्मा रतलाम निवासी श्रेयांश चौरड़िया के सत्कार बहुमान का शुभवस अर थांदला श्रीसंघ को प्राप्त हुआ। थांदला संघ ने सामूहिक नवकारसी के बाद श्रेयांश भैया की जय-जयकार करते हुए जयकार यात्रा निकाली जो नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई स्थानीय पौषध भवन पर विराजित साध्वी मंडल के सानिध्य में संयम अनुमोदना सभा में परिवर्तित हो गई।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-57521" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/03/IMG-20240322-WA0012.jpg" alt="" width="1200" height="1103" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/03/IMG-20240322-WA0012.jpg 1200w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/03/IMG-20240322-WA0012-300x276.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/03/IMG-20240322-WA0012-1024x941.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/03/IMG-20240322-WA0012-768x706.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/03/IMG-20240322-WA0012-990x910.jpg 990w" sizes="(max-width: 1200px) 100vw, 1200px" />धर्मसभा को किया संबोधित</strong></p>
<p>दीक्षार्थी भाई के संयम अनुमोदना में उपस्थित धर्मात्माओं को सम्बोधित करते हुए पूज्या श्री निखिलशीलाजी म.सा. ने कहा कि भव्य वातावरण में हाथी घोड़ों के साथ धूम धाम से दूल्हे राजा की बारात निकल रही थी तभी दूल्हे के कानों में मरण भय से पीड़ित मूक पशुओं का आक्रन्दन सुनाई दिया। उसका विवेक जागृत हुआ कि संसार की शुरुआत आश्रव से हो रही है तो आगे क्या होगा &#8230;? बस वही से उसने सभी प्राणियों को अभयदान देते हुए छःकाय प्रतिपाल बनने का निर्णय ले लिया। अनुपम साधना मार्ग को अपना कर वासुदेव श्रीकृष्ण के चचेरे भाई वे हमारे 22वें तीर्थंकर परम आराध्य भगवान अरिष्ट नेमिनाथ बन गए और धर्म की प्रभावना करते हुए यही मार्ग सबको बताया। श्रेयांस भैया को भी परिवार ऐसे ही बंधन में बांधनें के प्रयास कर रहे थे किंतु जिनके मन में दृढ़ वैराग्य भाव होते हैं, वे बंधन से निकल जाते हैं। जैनाचार्य पूज्य श्री उमेश मुनिजी की प्रार्थना अब जय हो अपनी अपनी भी का आलम्बन लेते हुए पूज्याश्री ने कहा कि अपने को जो व्यवहार प्रिय लगे वैसा ही व्यवहार हमें सबसे करना चाहिए। जीवन में जब भी वैराग्य भाव आये, उसे पुष्ट करते रहे तो एक दिन हम भी ऐसी ही भव्यता को प्राप्त कर सकते हैं व फिर अपनी भी जयजयकार होने लगती है। पूज्या श्री प्रियशीलाजी म.सा. ने कहा कि आध्यात्म सार में वैराग्य भाव आने के तीन कारण बताए हैं, जो मिथ्यात्व आदि 5 कारण रूप भव भ्रमण के जंतुओं से अरुचि, विषयों से अरुचि व संसार की असारता का ज्ञान है। संसार की तुलना शमशान से करते हुए पूज्याश्री ने कहा कि श्मसान कि तरह संसार में तृष्णा का गड्ढा कभी भरता नही, यहां ही शोक रूपी अग्नि जलती ही रहती है फिर अपयश की राख भी आपकी कितनी भी अच्छाई हो उड़ती ही रहती है। ऐसे में ज्ञानी जनों ने वैराग्य भाव को प्राप्त कर मोक्ष के सुख को शाश्वत बतलाया है। इस अवसर पर पूज्याश्री दीप्तिजी म.सा. ने मंगल स्तवन के माध्यम से संयम की अनुमोदना की।</p>
<p><strong>भेंट किया अभिनन्दन पत्र</strong></p>
<p>धर्म सभा में श्रीसंघ अध्यक्ष भरत भंसाली ने सकल संघ की ओर से दीक्षार्थी भाई श्रेयांश को उनके आगामी संयम जीवन की खूब खूब अनुमोदना कर मंगल कामना व्यक्त की। थांदला संघ की ओर से संघ के पूर्वाध्य नगीनलाल शाहजी, रमेशचन्द्र चौधरी, प्रकाशचंद्र घोड़ावत, महेश व्होरा, जितेंद्र घोड़ावत, भरत भंसाली, कोषाध्यक्ष संतोष चपड़ौद, ललित जैन नवयुवक मंडल अध्यक्ष रवि लोढ़ा, चर्चिल गंग, संदीप शाहजी व धर्मलता महिला मंडल की ओर से अध्यक्ष पुष्पा घोड़ावत, गरिमा श्रीमाल, किरण श्रीमाल, मूर्ति पूजक संघ की ओर से कमल पीचा, तेरापंथ सभा से अरविंद रुनवाल आदि सहित अन्य संस्थाओं ने मुमुक्षु को शाल माला व अभिनन्दन पत्र व गुरुदेव का साहित्य भेंट कर बहुमान किया। सभा का संचालन संघ सचिव प्रदीप गादिया ने व प्रवक्ता पवन नाहर ने आभार माना।</p>
<p><strong> संयम अनुमोदना के लिए दिया धन्यवाद</strong></p>
<p>दीक्षार्थी भाई श्रेयांश ने संयम अनुमोदना में उनके बहुमान के लिए सभी का धन्यवाद करते हुए कहा कि धर्म नगरी थांदला में अनेक महापुरुषों ने दीक्षा ली है व आगे भी लेंगे। ऐसे में उनके आगे कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है। फिर भी कई लोग मुझसे पूछते हैं कि आपको वैराग्य कैसे आया तो मुझे समझ नहीं आया कि इसका क्या जवाब दू क्योंकि वैराग्य तो आत्मा का स्वभाव ही है। एक रूपक प्रस्तुत करते हुए मुमुक्षु भाई ने कहा कि यदि आपको पता चले कि आपके रास्ते में आगे चोर है जो आपको मारपीट कर आपके पास की सभी धन सामग्री चुरा लेंगे जिससे बचने के लिए सब पहले ही रख दो तो आगे वह सुरक्षित मिल जाएगी तो आप क्या करेंगे। यह धन &#8211; वैभव &#8211; परिवार सब छूटने ही वाला है इसलिए इसका स्वेच्छा से त्याग बाद के दुःख से बचने का सरल उपाय है फिर भगवान की वाणी पर भरोसा ही वैराग्य भाव को दृढ़ बनाता है। श्रेयांश ने कहा कि आप सभी इसी मार्ग पर चले व मुझे भी 28 अप्रैल को रतलाम में जिन शासन गौरव पूज्य श्री उमेश मुनिजी &#8220;अणु&#8221; के अंतेवासी शिष्य बुद्ध पुत्र पूज्य श्री जिनेन्द्र मुनि जी व अन्य संतों के सानिध्य में मेरी दीक्षा में आकर मेरे आत्म लक्ष्य प्राप्ति का मंगल आशीर्वाद प्रदान करें।</p>
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		<title>गणाचार्यश्री के शिष्य देश में जगह जगह कर रहे धर्म प्रभावना : श्रेयांसगिरि मे 6 दीक्षार्थियों को गणाचार्य श्री विरागसागर ने दिया दीक्षा का आशीर्वाद </title>
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		<pubDate>Sun, 06 Aug 2023 13:12:47 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[मंगल प्रवेश]]></category>
		<category><![CDATA[विभव सागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[श्रेयांसगिरि]]></category>
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					<description><![CDATA[श्रेयांसगिरि में चातुर्मासरत गणाचार्य श्री विरागसागर जी महाराज ने छिंदवाड़ा से आए श्रमणाचार्य श्री 108 विभव सागर जी महाराज के संघस्थ 6 ब्रह्मचारिणी दीदी व भैया को दीक्षा की स्वीकृति देकर आशीर्वाद दिया। इसी पावन अवसर पर सभी दीक्षार्थी ब्र. भैया व बहिनों की गोद भराई संपन्न हुई। पढ़िए राजेश रागी / रत्नेश जैन की [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>श्रेयांसगिरि में चातुर्मासरत गणाचार्य श्री विरागसागर जी महाराज ने छिंदवाड़ा से आए श्रमणाचार्य श्री 108 विभव सागर जी महाराज के संघस्थ 6 ब्रह्मचारिणी दीदी व भैया को दीक्षा की स्वीकृति देकर आशीर्वाद दिया। इसी पावन अवसर पर सभी दीक्षार्थी ब्र. भैया व बहिनों की गोद भराई संपन्न हुई। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजेश रागी / रत्नेश जैन की रिपोर्ट&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पन्ना।</strong> जिले के सलेहा के समीपवर्ती अतिप्राचीन जैन तीर्थ श्रेयांसगिरि में चातुर्मासरत गणाचार्य श्री विरागसागर जी महाराज ने छिंदवाड़ा से आए श्रमणाचार्य श्री 108 विभव सागर जी महाराज के संघस्थ 6 ब्रह्मचारिणी दीदी व भैया को दीक्षा की स्वीकृति देकर आशीर्वाद दिया। इसी पावन अवसर पर सभी दीक्षार्थी ब्र. भैया व बहिनों की गोद भराई संपन्न हुई। ये दीक्षार्थी देश के विभिन्न नगरों के निवासी हैं।</p>
<p>सभी दीक्षार्थी संसार से विरक्ति धारण कर जल्द ही आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज के कर कमलों से दीक्षा धारण कर कठिन व्रतों का पालन कर कर्मों की निर्जरा करेंगे। पूज्य गणाचार्य श्री के दर्शन कर सभी दीक्षार्थी गद्गद् थे, सभी ने गुरु महिमा बतलाते हुए कहा कि हम धन्य हैं कि हमें पूज्य गणाचार्यश्री जैसे गुरु प्राप्त हुए हैं और गुरु चरणों में यही भावना भाते हैं कि हम भी आपके पद चिह्नों पर चलकर एक दिन मोक्ष को प्राप्त करें।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-50360" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/08/IMG-20230806-WA0015.jpg" alt="" width="1070" height="1280" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/08/IMG-20230806-WA0015.jpg 1070w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/08/IMG-20230806-WA0015-251x300.jpg 251w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/08/IMG-20230806-WA0015-856x1024.jpg 856w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/08/IMG-20230806-WA0015-768x919.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/08/IMG-20230806-WA0015-990x1184.jpg 990w" sizes="(max-width: 1070px) 100vw, 1070px" /></p>
<p><strong>350 से अधिक शिष्य देश में कर रहे धर्म प्रभावना </strong></p>
<p>श्रेयांसगिरि मे चातुर्मास कर रहे बुंदेलखंड के प्रथमाचार्य, उपसर्ग विजेता, राष्ट्रसंत, भारत गौरव गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी महामुनिराज के लगभग 350 सुयोग्य शिष्य देश के 11 प्रांतों के 80 स्थानों पर उप संघ धर्म प्रभावना कर रहे हैं। भरत सेठ ने बताया कि पूज्य गणाचार्यश्री द्वारा 9 आचार्य, 7 उपाध्याय, 1 स्थविर, 1 गणधर, 1 प्रवर्तक, 123 मुनि, 5 गणिनी आर्यिका, 90 आर्यिका, 21 क्षुल्लक, 44 क्षुल्लिका सहित लगभग 350 दीक्षित साधु-साध्वी संपूर्ण देश के 80 स्थानों मे मध्य प्रदेश में 36, उत्तर प्रदेश में 8, दिल्ली में 3, झारखंड में 7, महाराष्ट्र में 4, गुजरात में 2, राजस्थान में 10, हरियाणा में 2, बंगाल में 1, बिहार में 3, असम में एक स्थान पर चातुर्मास कर आत्म व जन कल्याण के साथ धर्म प्रभावना रहे हैं। पूज्य गणाचार्यश्री अभी तक 140 मुनि व आर्यिकाओं को समाधि करा चुके है।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-50362" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/08/IMG-20230806-WA0016.jpg" alt="" width="1080" height="590" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/08/IMG-20230806-WA0016.jpg 1080w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/08/IMG-20230806-WA0016-300x164.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/08/IMG-20230806-WA0016-1024x559.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/08/IMG-20230806-WA0016-768x420.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/08/IMG-20230806-WA0016-990x541.jpg 990w" sizes="(max-width: 1080px) 100vw, 1080px" /></p>
<p><strong>दीक्षा के लिए निवेदन</strong></p>
<p>छिंदवाड़ा से आए श्रमणाचार्य श्री 108 विभव सागर जी महाराज के संघस्थ 6 ब्रह्मचारिणी दीदी एवं भैया जी ने पूज्य गणाचार्य श्री के चरण वंदना कर दीक्षा की स्वीकृति के लिए निवेदन किया गया। ज्ञातव्य है कि छह भैया-बहनों की दीक्षा की भावना देखते हुए गणाचार्य श्री ने सहर्ष स्वीकृति प्रदान कर मंगल आशीर्वाद दिया। इसी पावन अवसर पर सभी दीक्षार्थी भैया, बहनों की गोद भराई संपन्न हुई, ये दीक्षार्थी देशभर के विभिन्न नगरों के निवासी थे। सभी दीक्षार्थी संसार से विरक्ति धारण कर जल्द ही आचार्य विवो सागर जी के कर कमलों से दीक्षा धारण कर कठिन व्रतों का पालन कर कर्मों की निर्जरा करेंगे।पूज्य गणाचार्य श्री के दर्शन कर सभी दीक्षार्थी गण गदगद थे, सभी ने गुरु महिमा बतलाते हुए कहा कि हम धन्य हैं कि हमें पूज्य गणाचार्य श्री जैसे गुरुणाम् गुरु प्राप्त हुये और गुरु चरणों में यही भावना भाते हैं कि हम भी आपके पद चिह्नों पर चलकर एक दिन मोक्ष को प्राप्त करें।</p>
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		<title>ज्ञानतीर्थ पर होगी 23 जून को जैनेश्वरी मुनि दीक्षा : आगरा के नवीन पूणारावत बनेंगे दिगम्बर जैन संत </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Jun 2023 11:00:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[श्री ज्ञानतीर्थ क्षेत्र जैन मंदिर में प्रथमबार 23 जून को जैनेश्वरी दिगम्बर मुनि दीक्षा होने जा रही है। पट्टाचार्य 108 श्री ज्ञेयसागर जी महाराज के करकमलों द्वारा संघस्थ ब्रह्मचारी नवीन भैयाजी, आगरा जैनेश्वरी दिगम्बर मुनि दीक्षा ग्रहण करेंगे। पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट&#8230; मुरैना। श्री ज्ञानतीर्थ क्षेत्र जैन मंदिर में प्रथमबार 23 जून को जैनेश्वरी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री ज्ञानतीर्थ क्षेत्र जैन मंदिर में प्रथमबार 23 जून को जैनेश्वरी दिगम्बर मुनि दीक्षा होने जा रही है। पट्टाचार्य 108 श्री ज्ञेयसागर जी महाराज के करकमलों द्वारा संघस्थ ब्रह्मचारी नवीन भैयाजी, आगरा जैनेश्वरी दिगम्बर मुनि दीक्षा ग्रहण करेंगे।<span style="color: #ff0000;"> पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> श्री ज्ञानतीर्थ क्षेत्र जैन मंदिर में प्रथमबार 23 जून को जैनेश्वरी दिगम्बर मुनि दीक्षा होने जा रही है। ज्ञानतीर्थ आराधक महा परिवार ने बताया कि छाणी परंपरा के षष्ट पट्टाचार्य सराकोद्धारक समाधिस्थ आचार्य 108 श्री ज्ञानसागर जी महाराज के प्रभावक शिष्य सप्तम पट्टाचार्य 108 श्री ज्ञेयसागर जी महाराज के करकमलों द्वारा संघस्थ ब्रह्मचारी नवीन भैयाजी, आगरा जैनेश्वरी दिगम्बर मुनि दीक्षा ग्रहण करेंगे। ज्ञानतीर्थ की पावनधरा पर प्रथमबार होने जा रही दिगम्बर मुनि दीक्षा के पावन अवसर पर मुनिश्री 108 ज्ञातसागर जी महाराज, बा. ब्र . जयकुमार निशांत टीकमगढ़, नितिन भैयाजी खुरई, प्रदीप पीयूष भैयाजी जबलपुर, संजय भैयाजी मुरैना, महावीर भैयाजी मुरैना, ब्र.ब.अनीता दीदी, मंजुला दीदी, ललिता दीदी अपना निर्देशन प्रदान करेंगी।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-46637" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-21-at-4.11.18-PM.jpeg" alt="" width="853" height="1280" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-21-at-4.11.18-PM.jpeg 853w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-21-at-4.11.18-PM-200x300.jpeg 200w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-21-at-4.11.18-PM-682x1024.jpeg 682w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-21-at-4.11.18-PM-768x1152.jpeg 768w" sizes="auto, (max-width: 853px) 100vw, 853px" /></p>
<p><strong>कौन हैं नवीन जैन</strong></p>
<p>दीक्षार्थी नवीन जैन मूलरूप से राजस्थान के राजाखेड़ा के निवासी हैं। वर्तमान में गुदड़ी मंसूर खां आगरा में निवासरत थे। जैसवाल जैन उपरोचियां समाज के पूणारावत गोत्रिय श्री नरेंद्र जैन -सुषमा जैन के परिवार में आपका जन्म 1 दिसंबर 1981 को आगरा में हुआ था। आपकी लौकिक शिक्षा 12वीं तक है। आपके एक भाई और तीन बहिनें हैं। आपने 22 दिसंबर 2021 को आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत लेकर गृह त्याग किया था। वैराग्य के भाव उमड़े तो नवीन जैन ने पूज्य गुरुदेव श्री ज्ञेयसागर जी महाराज को श्रीफल अर्पित कर दिगम्बरी मुनि दीक्षा  देने का निवेदन किया। पूज्य गुरुदेव ने उन्हें काफी समय तक अपने साथ रखकर संयम के मार्ग पर चलने का अभ्यास  कराया।</p>
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		<title>हथिनी (दमोह) में होगी दीक्षा : मीना-रामकली पांच जून को बन जाएंगी जैन साध्वी </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 04 Jun 2023 12:26:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[ दिगम्बर जैसवाल जैन उपरोचियां समाज की दो विदुषी महिलाएं मीना और रामकली जैन पांच जून को जैनेश्वरी क्षुल्लक आर्यिका दीक्षाएं ग्रहण करेंगी। सांसारिक सुख, पारिवारिक मोह माया एवं गृह त्यागकर समस्त प्राणिमात्र से क्षमायाचना कर जैनेश्वरी क्षुल्लक आर्यिका दीक्षा ग्रहण करने गुरुमां गणिनी आर्यिका सौम्य नन्दिनी माताजी के पास रवाना हो गईं। पढ़िए मनोज नायक [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong> दिगम्बर जैसवाल जैन उपरोचियां समाज की दो विदुषी महिलाएं मीना और रामकली जैन पांच जून को जैनेश्वरी क्षुल्लक आर्यिका दीक्षाएं ग्रहण करेंगी। सांसारिक सुख, पारिवारिक मोह माया एवं गृह त्यागकर समस्त प्राणिमात्र से क्षमायाचना कर जैनेश्वरी क्षुल्लक आर्यिका दीक्षा ग्रहण करने गुरुमां गणिनी आर्यिका सौम्य नन्दिनी माताजी के पास रवाना हो गईं। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> दिगम्बर जैसवाल जैन उपरोचियां समाज की दो विदुषी महिलाएं पांच जून को जैनेश्वरी क्षुल्लक आर्यिका दीक्षाएं ग्रहण करेंगी। सांसारिक सुख, पारिवारिक मोह माया एवं गृह त्यागकर समस्त प्राणिमात्र से क्षमायाचना कर जैनेश्वरी क्षुल्लक आर्यिका दीक्षा ग्रहण करने गुरुमां गणिनी आर्यिका सौम्य नन्दिनी माताजी के पास रवाना हो गईं। जिला दमोह स्थित हथिनी गांव में पांच जून को दोनों दीक्षार्थी बहिनों को दीक्षा प्रदान की जाएगी।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-45484" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230528-WA0014.jpg" alt="" width="486" height="586" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230528-WA0014.jpg 486w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230528-WA0014-249x300.jpg 249w" sizes="auto, (max-width: 486px) 100vw, 486px" /></p>
<p><strong>अंतिम लक्ष्य जैनेश्वरी दीक्षा</strong></p>
<p>जैन कुल में जन्म लेने अथवा जैन धर्म को स्वीकार करने के बाद श्रावक का अंतिम लक्ष्य जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण करना होता है। जैन श्रावक-श्राविकाएं जो संयम के मार्ग की ओर अग्रसर होते हैं। वे प्रारम्भ से हो कठोर चर्या का पालन करते हैं। मुरैना नगर की दो विदुषी महिलाएं मीना जैन एवं रामकली जैन ने गृहत्याग से पूर्व समस्त प्राणिमात्र से सम्पूर्ण जीवनकाल में हुई गलतियों के लिये क्षमा याचना की और अपनी ओर से सभी को क्षमा किया। दोनों दीक्षार्थी बहिनों की मुरैना, अशोकनगर, अम्बाह, हिंडौनसिटी, ज्ञानतीर्थ मुरेैना सहित विभिन्न स्थानों पर हल्दी, मेहंदी, विनोली यात्रा एवं गोद भराई के कार्यक्रम हुए।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-45483" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230604-WA0026.jpg" alt="" width="851" height="431" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230604-WA0026.jpg 851w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230604-WA0026-300x152.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230604-WA0026-768x389.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 851px) 100vw, 851px" /></p>
<p><strong>आर्यिका श्री सौम्य नन्दिनी माताजी देंगी दीक्षा</strong></p>
<p>परम पूज्य अभिक्ष्ण ज्ञानोपयोगी आचार्य श्री वसुनन्दी जी महाराज की परम प्रभावक शिष्या गुरुमां गणिनी आर्यिका श्री सौम्य नन्दिनी माताजी पांच जून ग्राम हथिनी (दमोह) में दोपहर 12.30 बजे दोनों बहिनों के दीक्षा के संस्कार करेंगी। गुरुमां वहां उपस्थित जनसमुदाय, सधर्मी बन्धुओं, रिश्तेदारों एवं सभी परिजनों की सहमति लेकर उन्हें जैनेश्वरी क्षुल्लक आर्यिका दीक्षा देकर उनका नामकरण करेंगी। दीक्षा से पूर्व दोनों दीक्षार्थी बहिनें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हुई त्रुटियों के लिए सभी से क्षमायाचना करते हुए सभी को क्षमा करेंगीं। दीक्षा के उपरांत वे आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करते हुए करपात्र में आहार (भोजन) ग्रहण करेंगी एवं चौबीस घण्टे में एकबार-एकसमय ही अन्न जल ग्रहण करेंगी । उनका अपने परिजनों, रिश्तेदारों से कोई सम्बन्ध नहीं रहेगा । वे आजीवन आर्यिका संघ में रहकर संयम की साधना करेंगी।</p>
<p style="text-align: left;"><strong>ये रहेंगे साक्षी</strong></p>
<p>दोनों बहिनों के जैन साध्वी बनने के अनमोल क्षणों के साक्षी बनने के लिए मुरैना, अम्बाह, राजाखेड़ा, मनियां, शमशाबाद, अजमेर, आगरा, धौलपुर, पोरसा, ग्वालियर सहित विभिन्न शहरों से सैकड़ों की संख्या में सधर्मी बन्धु पहुंच रहे हैं। मुरैना से दो स्लीपर एसी बसों, आठ चार पहिया वाहनों एवं ट्रेन से लगभग 200 सधर्मी बन्धु दीक्षा समारोह के लिए हथिनी (दमोह) के लिए रवाना हो चुके हैं।</p>
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