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	<title>Jain Unity श्रीफल जैन न्यूज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Jain Unity श्रीफल जैन न्यूज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>जैन समन्वय समिति बने, जैन मीडिया निभाए भागीदारी   :  समाज में इलेक्शन नहीं, सिलेक्शन हो </title>
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		<pubDate>Tue, 26 Mar 2024 23:42:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज ने सवाल उठाया है एक व्यक्ति, एक संस्था और एक पद को लेकर&#8230;मैं इससे सहमत हूं। एक व्यक्ति, एक पद और एक संस्था होनी चाहिए। एक आदमी को अनेक पद देने से न्याय नहीं हो पाता। वह समय नहीं दे पाता। सबको अवसर भी नहीं मिलता। लेकिन अभी पद चाहने वाले ज्यादा [&#8230;]]]></description>
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<p dir="ltr">श्रीफल जैन न्यूज ने सवाल उठाया है एक व्यक्ति, एक संस्था और एक पद को लेकर&#8230;मैं इससे सहमत हूं। एक व्यक्ति, एक पद और एक संस्था होनी चाहिए। एक आदमी को अनेक पद देने से न्याय नहीं हो पाता। वह समय नहीं दे पाता। सबको अवसर भी नहीं मिलता। लेकिन अभी पद चाहने वाले ज्यादा हैं और काम करने वाले कम&#8230;.<span style="color: #ff0000"><strong>गेस्ट राइटर डी. ए. पाटिल, दक्षिण भारत महासभा</strong></span></p>
<hr />
<p>श्रीफल जैन न्यूज ने सवाल उठाया है एक व्यक्ति, एक संस्था और एक पद को लेकर&#8230;मैं इससे सहमत हूं। एक व्यक्ति, एक पद और एक संस्था होनी चाहिए। एक आदमी को अनेक पद देने से न्याय नहीं हो पाता। वह समय नहीं दे पाता। सबको अवसर भी नहीं मिलता। लेकिन अभी पद चाहने वाले ज्यादा हैं और काम करने वाले कम। देश में जैनों को प्रबोधन की बहुत आवश्यकता है। सामाजिक रूप से जागरूकता लानी है। धर्म के कामों में कभी पंचकल्याण होता है, साधु आते हैं तो लोग प्रवचन सुनते हैं लेकिन उस पर अमल कोई नहीं करता। मुझे लगता है कि हमें स्वार्थ छोड़कर, आत्म केंद्रीय न बनकर समाज केंद्रीय बनना चाहिए, धर्म केंद्रीय बनना चाहिए। सोशल नॉर्म्स हम लोगों को पढ़ना चाहिए, समझना चाहिए लेकिन समझते नहीं, यह प्रबोधन के माध्यम से ही हो पाएगा। उसमें सबसे बड़ा योगदान चैनल वालों का रहेगा, जो कि एक इवेंट करके, संगोष्ठी करके, हर रोज एक संगोष्ठी डालें, जिससे जागरूकता उत्पन्न हो। समाज में जो भी यूट्यूब चैनल  या वेबसाइट चला रहे हैं, उनकी जिम्मेदारी बनती है की वो इसके लिए पहल करें।</p>
<p dir="ltr">आजकल साधु भी बंट गए हैं। तेरा संघ-मेरा संघ चल रहा है। इससे आदमी बंट रहा है। इस साधु का संघ आया है, उस साधु का संघ आया है। भक्त सोचता है कि मेरे साधु आए हैं तो वह आहारचर्या संभाल लेता है, वहीं दूसरे साधु आए हैं तो वह बिल्कुल भी हस्तक्षेप नहीं करता। यह कैसा धर्म है, कैसी जागरूकता है। देश के सभी साधु एकजुट हो जाएं तो हम देश में गिरनार जी जैसी और भी जो अन्य समस्याएं हैं, उनका निराकरण कर सकते हैं। हजारों स्क्वायर फीट प्रोजेक्ट तो लॉन्च हो रहे हैं लेकिन हमारे तीर्थ क्षेत्र कमेटी को कानूनी रूप से फंड के लिए बहुत लड़ाई लड़नी पड़ रही है।</p>
<p dir="ltr">अभी यह अच्छा हुआ है कि जो नए भट्टारकजी आए हैं, वह अपने हिसाब से अच्छा काम कर रहे हैं। सम्मेलन हो रहे हैं, जो भी समस्याएं सामने आ रही हैं, उन सब समस्याओं पर चिंतन हो रहा है। ऐसा साधुओं को भी करना चाहिए। संत जितने भी हैं ऐलक, क्षुल्लक, मुनि, आचार्य&#8230; सब एकजुट हो जाएं। देश में पहले अशोक कुमार जैन थे, जिनसे पूरा देश हिलता था। टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के अशोक जी तीर्थ क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष थे, तब सरकार भी उनकी सुनती थी, अब ऐसा एक आदमी नहीं है देश में। मुस्लिमों को जो आदेश जाता है, वह मौलवी की तरफ से जाता है। सिख वालों का आदेश गुरुद्वारे से निकलता है। इसी तरह से जैनों की भी एक ही संस्था होनी चाहिए। आनंद जी कल्याण जी ट्रस्ट श्वेतांबरों का भी एक ही कमेटी है, जहां से आदेश पारित होता है। वह पूरे श्वेतांबर समाज पर पूरे देश में लागू होता है। ऐसा ही हमारे अशोक जैन ने सोचा कि देश के 100 वर्ष के आगे के जितने भी सोशल इंस्टीट्यूट है, उनका फेडरेशन बनाया। 28 वर्ष हुए, उसकी सोशल अवेयरनेस निर्माण करने वाली जो रजिस्टर्ड संस्था है, इन्होंने 50 वर्ष के आगे से उनका एक संगठन बनाया। उनकी समन्वय संस्था का मैं अध्यक्ष हूं जो देश भर की समस्याओं पर चिंतन करते हैं। हर एक संस्था के माध्यम से यह एक समाधान हो गया है। तेरापंथ, बीस पंथ, मूर्ति पूजा सब इसमें है समन्वय समिति, इस देश में जैनों के लिए बहुत अच्छा काम कर रहा है। वर्ष 2014 में हमें अल्पसंख्यक का दर्जा मिला, वह सेंट्रल गवर्नमेंट से समन्वय समिति के माध्यम से हुआ। निर्मल कुमार जी सेठी, आरके जैन दिल्ली वालों ने, दक्षिण भारत जैन समाज इन सब ने अल्पसंख्यक का मुद्दा उठाया तो जीत भी हासिल की। वर्ष 2014 में हेगडे़ जी साहब ने माइनॉरिटी के हेड को और चक्रेश जी ने कपिल वकील जी को पकड़ा और सभी को पकड़ करने के बाद वह माइनॉरिटी हमें मिली। यह सब सर्वे हमको देना पड़ा, बताना पड़ा कि जैन समाज कितना पढ़ा-लिखा है। हम कम संख्या में सबसे ज्यादा इनकम टैक्स भरते हैं।</p>
<p dir="ltr">विद्यासागर जी महाराज के संघ में 400 से 500 साधु हैं तो अभी यह जो 16 अप्रैल को विद्यासागर जी महाराज की जगह जो महाराज जी को आचार्य पद की उपाधि मिलेगी, उसमें यह भी फैसला किया जाएगा कि अब साधुओं को छोटे-छोटे समूह में बांटना चाहिए क्योंकि जब 400 से 500 साधुओं का संघ होता है तो बहुत सारी समस्याएं होती हैं उनके आहारचर्या की, उनके दर्शन भी नहीं हो पाते हैं ढंग से और जो बड़े आचार्य होते हैं उनको तनाव भी रहता है इतने सारे साधुओं का और इन सब में राजनीति भी चलती है। दक्षिण भारत की बात करें तो हमारे यहां कई ऐसे गांव भी हैं, जहां पर 100% जैन समाज है, हमारे यहां झगड़ा नहीं है, एकता है। कोई भी कार्यक्रम करना हो तो एक पत्र, एक निवेदन देते हैं और लाखों लोग एकत्रित हो जाते हैं जबकि हमने उत्तर भारत में देखा है कि लोगों को इकट्ठा करने के लिए बसों की व्यवस्था करनी पड़ती है, खाने की व्यवस्था करनी पड़ती है लेकिन हमारे यहां अगर 25 लाख लोग भी इकट्ठा हो जाएंगे तो हमारे यहां भोजन का कोई प्रावधान नहीं है। अगर भोजन की व्यवस्था समाज करेगा तो आप सोचो कितना पैसा खर्च होगा। तो यह सब चीज खत्म होनी चाहिए क्योंकि लोग खाने के लिए ज्यादा समय देते हैं, सुनने के लिए कोई समय नहीं देता है। हमें संस्थाओं में नए सिरे से बदलाव लाने होंगे। सुधा सागर जी महाराज जी ने भी कहा है कि समन्वय समिति में सबको जोड़ो, शामिल करो, इलेक्शन धर्म में नहीं चलेगा और ऐसा करना भी नहीं चाहिए।</p>
<p dir="ltr">हमारे नियमावली में इलेक्शन नहीं है, हमारे नियमावली में सिलेक्शन है। जो काम करता आएगा, उसको पद मिलेगा। 6 महीने के बाद काम करता हुआ नहीं दिखाई देता है तो उसको पद खाली करना पड़ेगा। इसी तरह से सभी भाषाओं में जैनों के पत्रक सबसे ज्यादा निकलते हैं, उसमें समाज के लिए कुछ भी नहीं लिखा जाता है तो उस पत्रक में प्रबोधन होना चाहिए। प्रबोधन मुख से होता है, भाषण से होता है, संगोष्ठी से होता है तो अगर उस पेपर में समाज की समस्याओं को लिया जाएगा तो वह कार्यकर्ता जैसा मार्गदर्शन करेगा।</p>
<p dir="ltr">एकता में बहुत बड़ी शक्ति होती है। चारुकीर्ति जी ने, हेगडे जी ने, श्वेतांबर समाज ने अल्पसंख्यक के लिए कदम उठाया तो आज दर्जा मिला है। अंत में यही कहूंगा कि जैनियों की भी एक संसद होनी चाहिए। अतः आवश्यकता है &#8220;समन्वय समिति&#8221; को ही संसद के रूप में लेकर उसमें ही सारे संस्थाओ से प्रश्न उठाये जाए व वही से निर्णय लेते हुए आदेश पारित किया जाए व वह आदेश पूरे भारत में, समस्त दिगम्बर जैन समाज माने।</p>
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		<title>जैन समाज के बंटने पर व्यक्त की पीड़ा : पारस नाथ तीर्थ क्षेत्र मधुबन को धार्मिक तीर्थ क्षेत्र ही नहीं, शिक्षा का तीर्थ भी बनना चाहिए- अनिल जैन </title>
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		<pubDate>Thu, 08 Feb 2024 09:03:10 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर के अनिल कुमार जैन ने पीड़ा व्यक्त की है कि समाज की सबसे बड़ी सच्चाई ये है कि हम कई टुकड़ों में बांट दिए गए हैं या बंटे हुए है।अखिल भारतीय या अखिल राज्य स्तरीय कोई संगठन नहीं है, जो सभी जैन समाज का प्रतिनिधित्व करता हो। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230; अनिल कुमार जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर के अनिल कुमार जैन ने पीड़ा व्यक्त की है कि समाज की सबसे बड़ी सच्चाई ये है कि हम कई टुकड़ों में बांट दिए गए हैं या बंटे हुए है।अखिल भारतीय या अखिल राज्य स्तरीय कोई संगठन नहीं है, जो सभी जैन समाज का प्रतिनिधित्व करता हो। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>अनिल कुमार जैन ने पीड़ा व्यक्त की है कि समाज की सबसे बड़ी सच्चाई ये है कि हम कई टुकड़ों में बांट दिए गए हैं या बंटे हुए है।अखिल भारतीय या अखिल राज्य स्तरीय कोई संगठन नहीं है, जो सभी जैन समाज का प्रतिनिधित्व करता हो। समाज को जोड़ने के लिए, जैन धर्म मजबूत हो, समाज कल्याण मे अग्रणी भूमिका निभाए, के लिए मैं प्रयासरत हूं। मैंने केंद्र सरकार और राज्य सरकार से पत्राचार किया है। हम जैनी अखिल भारतीय जैन यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सीलेंस खोलना चाहते हैं। सरकार भी चाहती है शिक्षा के क्षेत्र में निवेश हो। वो अनुदान देने को भी तैयार है। लेकिन असली समस्या है कि जैन समाज में पत्राचार किससे करे? किस एड्रेस पर करे? उनके सवाल, पत्र का जवाब कौन देगा</p>
<p><strong>एकता की जरूरत</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि मुझे लगता है अब समय आ गया है। जिला स्तरीय, राज्य स्तरीय, अखिल भारतीय स्तरीय जैनों का प्रतिनिधि मण्डल होना चाहिए। वैसे मैं अच्छी तरह जानता हूं कि अभी के जैन को मरना मंजूर है पर झुकना मंजूर नहीं है। जैन समाज को एक करने का मतलब है जिंदा मेंढक को तराजू पर तौलना। लेकिन समय की जरूरत, मांग को समझते हुए आपसी सहमति, एकता की बहुत जरुरत है। आज ईसाई मिशनरियों से सीखने की जरुरत है। कैसे समाज कल्याण कर वो पूरे विश्व में फैल गए हैं। चर्च छोटा, स्कूल- कॉलेज बड़ा बनाते हैं।समस्या वहां भी होगी पर एक बात वो समझते हैं कि लड़ाई आपस में हो। लेकिन जब बाहर से हो तो हम सब एक हैं। क्या हम जैनी हर मंदिर के पंच कल्याणक के साथ एक जैन विद्यालय का शिलान्यास समारोह संपन्न नहीं कर सकते हैं? आज मुस्लिम समाज मस्जिद के साथ मदरसा बनाते हैं। बहुत ही अच्छा काम है। क्या हम जैनी सचमुच नासमझ हैं। इतने उदाहरण पड़े हैं। देखकर, पढ़कर हम लोग क्यों नहीं बदल रहे हैं?</p>
<p>शुरुआत कैसे करना चाहिए? पहले अपने में करो सुधार, फिर दूसरे को बताओ अपने विचार</p>
<p>पारसनाथ में एक उच्च स्तरीय जैन यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना करनी है।</p>
<p>1. इसके लिए एक गवर्निंग बॉडी बनानी होगी। जिसमें झारखण्ड जैन समाज के प्रबुद्ध लोग होंगे।</p>
<p>2. वर्किंग कमेटी बनानी होगी। जो उस यूनिवर्सिटी का संचालन करे। उसकी रूप रेखा तैयार करे।</p>
<p>3. एक ऑफिस एड्रेसहोना चाहिए। जहां लोग मिल सकें। पत्राचार कर सकें।</p>
<p>सरकार तैयार है पर क्या हम सचमुच एकजुट होने को तैयार हैं? जुड़ेगा जैन समाज तो आगे बढ़ेगा जैन समाज। नहीं तो अपना अस्तित्व समाप्त कर लेगा जैन समाज।</p>
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		<title>भारत के अलग-अलग प्रांतों की संस्कृति दिखाई : इण्डियन कल्चर थीम पर सोशल ग्रुप एक्सीलेंट की मीटिंग </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 Mar 2023 07:58:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगम्बर जैन सोशल ग्रुप एक्सीलेंट, इन्दौर की इण्डियन कल्चर एवं फाग उत्सव पर आधारित थीम मीटिंग केटरोड स्थित पुण्य गार्डन पर सम्पन्न हुई, जिसमें ग्रुप के सभी सदस्यों का भारत की अलग-अलग प्रान्त की वेशभूषा में आगमन हुआ। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230; इंदौर। दिगम्बर जैन सोशल ग्रुप एक्सीलेंट, इन्दौर की इण्डियन कल्चर एवं [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दिगम्बर जैन सोशल ग्रुप एक्सीलेंट, इन्दौर की इण्डियन कल्चर एवं फाग उत्सव पर आधारित थीम मीटिंग केटरोड स्थित पुण्य गार्डन पर सम्पन्न हुई, जिसमें ग्रुप के सभी सदस्यों का भारत की अलग-अलग प्रान्त की वेशभूषा में आगमन हुआ। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> दिगम्बर जैन सोशल ग्रुप एक्सीलेंट, इन्दौर की इण्डियन कल्चर एवं फाग उत्सव पर आधारित थीम मीटिंग केटरोड स्थित पुण्य गार्डन पर सम्पन्न हुई, जिसमें ग्रुप के सभी सदस्यों का भारत की अलग-अलग प्रान्त की वेशभूषा में आगमन हुआ। कोई राजस्थानी तो कोई गुजराती, पंजाबी एवं साऊथ इण्डियन थीम अनुरूप ड्रेसकोड में उपस्थित हुए। दोपहर से रात तक हुई इस मीटिंग में सभी सदस्यों ने विभिन्न राज्यों के कल्चर होने के बाद भी भारत की एकता को दर्शाया। रात्रि में ग्रुप सचिव शरद वेद द्वारा फिल्मी गीतों पर आधारित विभिन्न राउण्ड के माध्यम से अन्ताक्षरी का आयोजन हुआ, जिसमें राजस्थानी रंगीले, गुजराती गवैया, पंजाबी परवाने तथा साउथ इंडियन सुरीले टीम के ग्रुप सदस्यों ने भाग लिया।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-40520" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230323-WA0017.jpg" alt="" width="1500" height="1000" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230323-WA0017.jpg 1500w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230323-WA0017-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230323-WA0017-1024x683.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230323-WA0017-768x512.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230323-WA0017-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230323-WA0017-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230323-WA0017-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230323-WA0017-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230323-WA0017-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230323-WA0017-990x660.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230323-WA0017-1320x880.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1500px) 100vw, 1500px" /></p>
<p>निर्णायक के रूप में महु के जाने-माने टीवी कलाकार शंशाक जैन एवं इन्दौर के अनुराग जैन उपस्थित हुए। मीटिंग का संचालन राजीव &#8211; अर्चना लुहाडिया, सुनिल- ममता बिलाला, राकेश- सरिता जैन एवं संजय- किरण अजमेरा द्वारा किया गया। ग्रुप के सभी सदस्यों के आगमन पर हाई टी का आयोजन किया गया। थीम अनुरूप चारों प्रांत के शानदार सेल्फी पॉइंट बनाए गए, जिसका सम्पूर्ण ग्रुप सदस्यों ने लगभग 450 फोटो शूट करवाए। विभिन्न गेम के पश्चात फाग उत्सव का आनंद लिया, बचपन से पचपन तक सभी उम्र के साथी फाग गीतों पर झूम उठे। कार्यक्रम का समापन अन्ताक्षरी के साथ हुआ। आभार ग्रुप अध्यक्ष निलेश कासलीवाल ने व्यक्त किया।</p>
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