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	<title>Jain Paper Editor&#8217;s Association &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>जैन धर्म और समाज के संरक्षण और विकास के लिए समाज में हो एकता :  राष्ट्रीय दिगंबर जैन समन्वय समिति का होना आवश्यक है- डॉ.अरविंद जैन </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 18 Jul 2023 12:56:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[डॉ. अरविन्द कुमार जैन जयपुर, सम्पादक, सर्वोदय महावीर संदेश, मासिक ई पत्रिका, अध्यक्ष, अ. भा. जैन पत्र सम्पादक संघ, राजस्थान प्रदेश का कहना है कि दिगम्बर जैन धर्म और समाज के संरक्षण और विकास के लिए सकल जैन समाज की एक राष्ट्रीय दिगम्बर जैन समन्वय समिति का होना अत्यन्त आवश्यक है जो दिगम्बर जैन समाज [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>डॉ. अरविन्द कुमार जैन जयपुर, सम्पादक, सर्वोदय महावीर संदेश, मासिक ई पत्रिका, अध्यक्ष, अ. भा. जैन पत्र सम्पादक संघ, राजस्थान प्रदेश का कहना है कि दिगम्बर जैन धर्म और समाज के संरक्षण और विकास के लिए सकल जैन समाज की एक राष्ट्रीय दिगम्बर जैन समन्वय समिति का होना अत्यन्त आवश्यक है जो दिगम्बर जैन समाज में प्रचलित संत, पंथ एवं ग्रंथगत भेद- प्रभेदों में समन्वय एवं सद्भावना पैदा कर राष्ट्रीय समस्याओं का एकजुट होकर समाधान कर सके। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> दिगम्बर जैन धर्म और समाज के संरक्षण और विकास के लिए सकल जैन समाज की एक राष्ट्रीय दिगम्बर जैन समन्वय समिति का होना अत्यन्त आवश्यक है, जो दिगम्बर जैन समाज में प्रचलित संत, पंथ एवं ग्रंथगत भेद- प्रभेदों में समन्वय एवं सद्भावना पैदा कर राष्ट्रीय समस्याओं का एकजुट होकर समाधान कर सके। समाज में धन है, शिक्षा है, यश है, तप है, व्रत है, स्वाध्याय है लेकिन समन्वय और सद्भावना नहीं है। सब चाहते हैं कि ऐसा हो परन्तु समन्यव एवं सद्भावना के आधार समझ में नहीं आ रहे हैं। कोई भी संस्था या संत अपनी मान्यता से बाहर नहीं आना चाहते हैं। एक साथ बैठकर बात करने का ना कोई मंच है, ना अवसर।</p>
<p><strong>दिखाई नई राह</strong></p>
<p>संल्लेखना एवं सम्मेद शिखरजी आन्दोलन ने एक नई राह दिखाई कि दिगम्बर एवं श्वेताम्बर- सकल जैन समाज एक होकर बैठ सकता है, बात कर सकता है एवं संघर्ष कर सकता है लेकिन हमारे समन्वय के आधार इतने कॉमन और मजबूत हों कि आपसी सद्भावना को ना बिगाड़ सके। सकल दिगम्बर जैन समाज की एकता के लिए समन्वय समिति इस प्रकार बनाई जा सकती है और अगर कोई पूर्व में समन्वय समिति है तो उसमें इन सूत्रों को सम्मिलित किया जा सकता है।</p>
<p><strong>राष्ट्रीय दिगम्बर जैन समन्वय समिति</strong><br />
यह समिति दिगम्बर जैन समाज द्वारा संचालित दिगम्बर जैन धर्म एवं समाज के हितों की रक्षा के लिए स्थापित संस्थाओं/समाज में समन्वय और सद्भावना का कार्य करेगी।</p>
<p><strong>उद्देश्य &#8211;</strong><br />
* भगवान् महावीर के मूल सिद्धान्तों एवं आचार्य कुन्दकुन्द की मूल आम्नाय की सुरक्षा एवं विकास के लिए कार्य करना।<br />
* सच्चे देव -शास्त्र- गुरु का श्रद्धान एवं सम्मान बनाये रखने के लिए कार्य करना।<br />
* दिगम्बर जैन समाज में प्रचलित पंथ, संत एवं ग्रंथगत मतभेदों में समन्वय स्थापित कर सद्भावना बनाये रखने का कार्य करना।<br />
* दिगम्बर जैन सिद्धान्त, तीर्थ, मन्दिर, साधु आदि के संरक्षण एवं विकास के कार्य करना।<br />
* आवश्यक होने पर आन्दोलन का संचालन, नेतृत्व एवं जिम्मेदारी उठाना। न्यायालय, राष्ट्रीय कार्य एवं अन्य विवादों में प्रतिनिधित्व तथा प्रवक्ता होना।<br />
* प्रत्येक दिगम्बर जैन मन्दिर, संस्था, समाज को जोड़कर संगठन बनाना एवं आपसी सद्भावना के अवसर पैदा करना।</p>
<p><strong>गतिविधियां &#8211;</strong><br />
गठित समन्वय समिति के निर्णयानुसार।</p>
<p><strong>दिगम्बर जैन समाज में-</strong><br />
समन्वय और सद्भावना के आधार सूत्र-<br />
* दिगम्बर जैन समाज में मुख्यरूप से दो ही भेद हैं- बीस पंथ एवं तेरापंथ। सभी की आचार्य कुन्दकुन्द आम्नाय है। मुनियों के 28 मूलगुण एवं श्रावक के 8 मूलगुण/11 प्रतिमायें समान हैं जिसमें शिथिलाचार मान्य नहीं हैं। सैद्धांतिक कोई भेद नहीं है केवल पूजन पद्धति में अन्तर है।<br />
* तेरापंथ एवं बीसपंथ दोनों की आम्नाय, आचार्य एवं शास्त्र पुराने हैं। दोनों में तपस्वी साधु हुए हैं। इनको मानने के लिए सब स्वतंत्र हैं। लेकिन मन्दिर/ तीर्थ की पुरानी मान्यता बनी रहे।<br />
* मुमुक्षु समाज दिगम्बर जैन तेरापंथ आम्नाय से है। इनके मन्दिर एवं शास्त्र मान्य हैं। मानने या नहीं मानने के लिए सब स्वतंत्र हैं। दोनों के लिए किसी को बाध्य नहीं किया जायेगा।<br />
* तारणपंथ दिगम्बर जैन हैं। इसके शास्त्र मान्य हैं। तारण स्वामी स्वयं दिगम्वर जैन मुनिराज थे।<br />
* महासभा, महासमिति दोनों, तीर्थ सुरक्षा कमेटी, कुन्दकुन्द तीर्थ सुरक्षा ट्रस्ट, शास्त्री परिषद्, तीनों विद्वत् परिषद् आदि राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त संस्थाओं की एक समन्वय समिति बने जो आगम के आलोक में आचार्यों से मार्गदर्शन प्राप्त कर व्यवस्था स्थापित करे।</p>
<p><strong>राष्ट्रीय दिगम्बर जैन समन्वय समिति &#8211; प्रारूप</strong><br />
समिति में निम्नलिखित प्रकार सदस्य हो सकते है &#8211;<br />
* दिगम्बर जैन महासमिति के अध्यक्ष, महामंत्री, कोषाध्यक्ष।<br />
* दिगम्बर जैन महासभा के अध्तक्ष ,महामंत्री, कोषाध्यक्ष।<br />
* भारत वर्षीय दिग. जैन तीर्थ सुरक्षा कमेटी मुम्बई के अध्यक्ष महामंत्री एवं कोषाध्यक्ष।<br />
* श्री दिगम्बर जैन महासमिति के अध्यक्ष, महामंत्री एवं कोषाध्यक्ष।<br />
* दक्षिण भारत महासभा के अध्यक्ष, महामंत्री एवं कोषाध्यक्ष।<br />
* शास्त्री परिषद के अध्यक्ष एवं महामंत्री।<br />
* विद्वत् परिषद् तीनों के अध्यक्ष एवं महामंत्री।<br />
* अन्य राष्ट्रीय विद्वत् संगठन एवं संस्थाओं के अध्यक्ष एवं महामंत्री।<br />
* दिगम्बर जैन राजनेता प्रतिनिधि &#8211; प्रत्येक राष्ट्रीय पार्टी का एक-एक .<br />
* विधिवेत्ता &#8211; दिगम्बर जैन न्यायाधीश -2, एडवोकेट -2<br />
* पत्रकार/ मीडिया प्रतिनिधि -2<br />
* आर्थिक सलाहकार-2<br />
* प्रशासनिक प्रतिनिधि &#8211; 2<br />
* इतिहास एवं पुरातत्व विशेषज्ञ-2<br />
* महिला प्रतिनिधि -2<br />
* युवा प्रतिनिधि -2<br />
* विज्ञान प्रौद्योगिकी प्रतिनिधि -1<br />
* कलाक्षेत्र प्रतिनिधि-1<br />
* क्रीड़ा क्षेत्र प्रतिनिधि-1<br />
* विदेश प्रतिनिधि -2<br />
इस प्रकार 51 सदस्यों की समन्वय समिति बनेगी। जो अपनी 5-7 सदस्यीय कार्यकारिणी बनायेगी। निर्णय समिति करेगी उसकी पालना कार्यकारिणी करेगी। यद्यपि यह कार्य एक पलडे़ में मेंढकों को तोलने के बराबर है। फिर भी अगर कोई साहू शान्तिप्रसादजी जैसा समन्वय का काम कर सके तो यह समाज पर उपकार होगा।</p>
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