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	<title>jain monk &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>jain monk &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>णमोदय तीर्थ के उदय के साथ मुंगावली को मिलेगी नई पहचान : अथाईखेड़ा गांव में बनेगा भव्य जिनालय  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 11:43:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कष्ट दुःख असाता को भी समता भाव पूर्वक सहन करने से साता वेदनी कर्म का ही वंद होता है। ऐसा नहीं है कि आप दुख दारुणय कष्टों को समता भाव पूर्वक सहते जा रहे हैं फिर भी कष्ट ही आए समता से आगे चलकर साता का ही उदय आएगा। यह उद्गार मुनि श्री सुधासागरजी महाराज [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>कष्ट दुःख असाता को भी समता भाव पूर्वक सहन करने से साता वेदनी कर्म का ही वंद होता है। ऐसा नहीं है कि आप दुख दारुणय कष्टों को समता भाव पूर्वक सहते जा रहे हैं फिर भी कष्ट ही आए समता से आगे चलकर साता का ही उदय आएगा। यह उद्गार मुनि श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। वे जिज्ञासा समाधान में बोल रहे थे। <span style="color: #ff0000">मुंगावली से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुंगावली।</strong> कष्ट दुःख असाता को भी समता भाव पूर्वक सहन करने से साता वेदनी कर्म का ही वंद होता है। ऐसा नहीं है कि आप दुख दारुणय कष्टों को समता भाव पूर्वक सहते जा रहे हैं फिर भी कष्ट ही आए समता से आगे चलकर साता का ही उदय आएगा। यह उद्गार मुनि श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। वे जिज्ञासा समाधान में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि दुःख का यदि हम दुःख ना माने तो सुख जरूर आएगा। ये प्रकृति का नियम है कि यदि कष्ट दुःख आने पर अपना आपा खो दे तो दुःख ही बढ़ेगा सुख नहीं मिल सकता। सुख पाने के लिए तो दुःख को भी हंसी-हंसी में झेलना ही होगा। फिर देखो सुख आपके पीछे पीछे दौड़ा आएगा। मुनिश्री ने कहा कि अब आपके नगर को एक नई पहचान मिलने जा रही है। अब लोग णमोदय तीर्थ के करने आएंगे। इससे मुंगावली को एक नई पहचान मिलेगी।</p>
<p><strong>मंदिर निर्माण में सहयोग करने का किया वादा</strong></p>
<p>इसके पहले जैन समाज अशोक नगर अध्यक्ष राकेश कांसल के साथ अथाईखेड़ा जैन समाज ने मुनिश्री सुधासागरजी से अथाईखेड़ा गांव में नए जिनालय के निर्माण का निवेदन किया। निर्मल जैन ने कहा कि हम वर्षाें से आपके आगमन का इंतजार कर रहे हैं। जिससे मंदिर का निर्माण हो। जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि अथाईखेड़ा वाले आज अशोक नगर की पूरी कमेटी को साथ लाए हैं। ये किशनगढ़ बिजोलिया आबा हर जगह गए। यहां खनियाधाना गोला कोट के बाद आस जगी कि आपके चरण इस ओर बढ़ सकते हैं और आज अथाईखेड़ा की उम्मीद जगी है। आपका मार्ग दर्शन और आशीर्वाद चाहिए। प्रदीप भैया भूमि का अवलोकन कर लें और भूमिका पूरी बन जाए। इस दौरान जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई सहित पूरी कमेटी ने अथाईखेड़ा मंदिर निर्माण में सहयोग का निवेदन किया।</p>
<p><strong>भू-दान के साथ मंदिर निर्माण का लिया संकल्प</strong></p>
<p>मुनि श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य में नगर के श्रावक श्रेष्ठी निर्मलकुमार अथाईखेडा एवं उनकी जीवन संगनी ने दो बीघा ज़मीन के साथ मंदिर निर्माण के साथ प्रभु की विशाल प्रतिमा स्थापित करने की भावना रखी तो जैन समाज के पूर्व महामंत्री गिरीश अथाईखेडा ने कहा कि हम सब मिलकर भव्य जिनालय को आकार देने के लिए कृतसंकल्पबद्ध हो रहे हैं। आपके चरण चालीस वर्ष पूर्व पड़े। अब अथाईखेड़ा पधारें पर मंदिर निर्माण का संकल्प पूरा कराएं इस दौरान अजित बरोदिया, प्रदीप तारई, शैलेंद्र श्रागर, पत्रकार अरविंद कचनार, सांसद प्रतिनिधि संजीव भारिल्य, विपिन सिंघई, शैलेंद्र दददा, हेमंत टडैया, मनीष सिंघई, रिंकेश कांसल, मुनेश विजयपुरा, मुन्ना बांझल, टिंकल जैन, पवन जैन अथाईखेड़ा उपस्थित थे।</p>
<p><strong>धर्मशाला के साथ विस्तार भू-भाग व संत शाला हो </strong></p>
<p>इस दौरान मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि जब भी कोई नवीन योजना बनती है तो भविष्य को भी ध्यान में रखकर कार्य करना चाहिए। मंदिर निर्माण वर्षाें में कभी हो पाते हैं। ये निर्मल गिरीश बहुत पुराना भक्त है। अथाईखेड़ा परिवार मंदिर निर्माण के साथ एक अच्छी धर्मशाला व संत निवास का भी निर्माण हो तो सभी आवश्यकताओं की धीरे धीरे पूर्ति हो जाएगी। बहुत दिनों से निवेदन चल रहा है ये कार्य भी जल्दी पूरा हो। मेरी भी भावना आपके साथ शामिल हो रही है। इस दौरान उन्होंने कहा कि स्वयं का आंकलन करते रहना चाहिए तब ही आपका पुरुषार्थ सफल होगा और सफलता भी मिलती चली जाएगी। हमारे मन वचन काय की चेष्टाओ से ही तो कर्मांे का आस्त्रव होता है। इनको रोकने का नाम ही संवर कहलाता है। सांसकारिक दशा में कर्मबंधता नहीं कर्मबंध किया जाता है। जब तक कषाय को नहीं रोकेंगे तो कर्म तो बंधते ही रहेंगे। कषाय को मंद करने के लिए बाहरी वातावरण को तो रोकना ही होगा। अंदर मन वचन काय की चेष्टाओं को भी शांत करना होगा।</p>
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		<title>शोभायात्रा के साथ श्री आदिनाथ पंचकल्याणक महोत्सव का शुभारंभ : एमडी इंटर कॉलेज ग्राउंड अयोध्या नगरी में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब  </title>
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		<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 11:31:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[धर्मनगरी आगरा एक बार फिर आस्था, भक्ति और उल्लास के रंग में रंगी नजर आई, जब श्री 1008 सर्वताभद्र जिनालय, आदर्श नगर बल्केश्वर के श्री आदिनाथ जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ 23 अप्रैल को अत्यंत भव्यता और धार्मिक गरिमा के साथ हुआ। आगरा से पढ़िए, यह खबर&#8230; आगरा। धर्मनगरी आगरा एक बार फिर आस्था, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>धर्मनगरी आगरा एक बार फिर आस्था, भक्ति और उल्लास के रंग में रंगी नजर आई, जब श्री 1008 सर्वताभद्र जिनालय, आदर्श नगर बल्केश्वर के श्री आदिनाथ जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ 23 अप्रैल को अत्यंत भव्यता और धार्मिक गरिमा के साथ हुआ। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> धर्मनगरी आगरा एक बार फिर आस्था, भक्ति और उल्लास के रंग में रंगी नजर आई, जब श्री 1008 सर्वताभद्र जिनालय, आदर्श नगर बल्केश्वर के श्री आदिनाथ जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ 23 अप्रैल को अत्यंत भव्यता और धार्मिक गरिमा के साथ हुआ। एम.डी. जैन इंटर कॉलेज, हरीपर्वत ग्राउंड स्थित अयोध्या नगरी के विशाल पांडाल में इस महोत्सव की शुरुआत प्रातःकाल जैन धर्मशाला, कचौड़ा बाजार बेलनगंज से निकली भव्य रथयात्रा, शोभायात्रा एवं घटयात्रा के साथ हुई। जिसने पूरे शहर को भक्तिमय वातावरण में सराबोर कर दिया। उपाध्याय श्री विहसंतसागरजी एवं मुनि श्री विश्वसाम्यसागर जी ससंघ के मंगल सानिध्य में निकली इस शोभायात्रा में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रातः 7 बजे आरंभ हुई यात्रा में बैंडबाजों की मधुर धुन, ढोल-नगाड़ों की गूंज, ऊंट-घोड़ों की आकर्षक उपस्थिति और विविध धार्मिक झांकियों ने सभी का मन मोह लिया। लगभग 500 मांगलिक महिलाएं सिर पर कलश धारण कर अनुशासित ढंग से घटयात्रा में शामिल हुईं, जो श्रद्धा और समर्पण का अद्भुत प्रतीक बनीं।</p>
<p>शोभायात्रा में भगवान के माता-पिता, सौधर्म इंद्र, महायज्ञनायक, कुबेर, यज्ञनायक सहित विभिन्न पात्रों की झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। 56 कुमारिकाएं, अष्ट देवियां, सौभाग्यवती महिलाएं एवं भगवान की सह-बुआओं के लिए विशेष सिटिंग प्लेटफॉर्म युक्त झांकियां सजाई गईं।</p>
<p><strong>आध्यात्मिक वातावरण ने श्रद्धालुओं को अभिभूत किया </strong></p>
<p>आगरा के प्राचीन घोड़े वाले रथ पर श्रीजी को विराजमान कर भव्यता के साथ मेला स्थल तक लाया गया। रथ के आगे पूज्य उपाध्याय श्री विहसंतसागरजी ससंघ स्वयं विहार करते हुए चल रहे थे। वहीं नगर के प्रमुख श्रेष्ठी, समाजसेवी एवं श्रद्धालु बड़ी संख्या में उनके साथ चल रहे थे। निर्धारित समय पर यह यात्रा अयोध्या नगरी स्थित पांडाल में पहुंची, जहां रोहित जैन अहिंसा एवं रचित जैन अहिंसा परिवार द्वारा विधिवत ध्वजारोहण किया गया। पंडाल का उद्घाटन डॉ. अरिंजय जैन द्वारा तथा मुख्य मंच का उद्घाटन निर्मल जैन मोठया एवं वीरेंद्र मोठया परिवार द्वारा किया गया। प्रतिष्ठाचार्य जयकुमार निशांत भैया जी एवं संदीप जैन शास्त्री के कुशल निर्देशन में आचार्य निमंत्रण, चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन हुए। इसके उपरांत दोपहर 1 बजे से संकल्प, प्रतिष्ठा विधान, मंडप प्रतिष्ठा, मंगल कलश स्थापना, जाप-अनुष्ठान एवं नित्य नियम जैसे मांगलिक कार्यक्रम हुए। भगवान का कलशाभिषेक कर विधिपूर्वक महोत्सव का शुभारंभ किया गया। विशाल पांडाल की आकर्षक सज्जा, सुव्यवस्थित व्यवस्थाएं और आध्यात्मिक वातावरण ने श्रद्धालुओं को अभिभूत कर दिया।</p>
<p><strong>चंपक कुमारिकाओं द्वारा 16 स्वप्नों का मनोहारी प्रदर्शन </strong></p>
<p>इस अवसर पर उपाध्याय श्री विहसंतसागर जी मुनिराज ने कहा कि पंचकल्याणक महोत्सव आत्मा के उत्थान और जीवन में संस्कारों के जागरण का महापर्व है। उन्होंने कहा कि भगवान के जीवन के पंच कल्याणक हमें त्याग, संयम, करुणा और अहिंसा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। महोत्सव के प्रथम दिवस दोपहर में सीमंतोन्नयन क्रिया (माता की गोद भराई) एवं नवीन प्रतिमाओं की सुगंधित द्रव्यों से आकार शुद्धि तथा गर्भ कल्याणक की पूजन विधि हुई। वहीं रात्रि में श्रीजी की महाआरती, गर्भकाल लाना एवं इन्द्रसभा की भव्य प्रस्तुति हुई। जिसमें अष्ट कुमारिकाओं द्वारा तीर्थंकर माता की सेवा तथा चंपक कुमारिकाओं द्वारा 16 स्वप्नों का मनोहारी प्रदर्शन किया गया। पहली बार विशाल एलइडी वॉल पर इंद्र दरबार एवं राजदरबार के जीवंत दृश्य प्रस्तुत किए गए, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।</p>
<p><strong>तीर्थंकर बालक का जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा</strong></p>
<p>पूरे आयोजन में अनुशासन, भव्यता और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। संचालन मनोज बाकलीवाल एवं उमेश जैन भिंड वाले द्वारा किया गया। मीडिया प्रभारी शुभम जैन ने बताया कि महोत्सव के दूसरे दिन 24 अप्रैल को प्रातः 6 बजे से अयोध्या नगरी में तीर्थंकर बालक का जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा। इस अवसर पर निर्मल मोठया,रोहित जैन अहिंसा, हीरालाल बैनाड़ा,रजत जैन, पंकज जैन, पारस जैन कंसल, राजीव जैन, सुमेर जैन पांड्या, नरेंद्र कुमार जैन, मनोज जैन बल्लो, प्रवीण कुमार जैन, पारसदास जैन, दीपक जैन, विशाल जैन, कमल जैन, विष्णु भगवान जैन, अंकेश जैन, आकाश जैन, मनीषराज जैन, अलंकृत जैन, उषा मारसंस, खुशबू जैन, बबीता जैन उपस्थित रहे।</p>
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		<title>टीडीएक्स स्पीकर सोनल गोयल ने दिए सफलता के तमाम टिप्स : तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी की लीडरशिप टॉक सीरीज का 19वां सत्र संपन्न  </title>
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		<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 12:47:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी की लीडरशिप टॉक सीरीज के 19वें सत्र में फ्रॉम प्रीप्रेशन टू पर्पज़ः लाइफ लेशंस फ्रॉम द सिविल सर्विस जर्नी में त्रिपुरा सरकार सचिव, प्रख्यात लेखिका और टीडीएक्स स्पीकर आईएएस सोनल गोयल ने कहा कि सफलता के लिए स्टुडेंट्स अपनाएं 5सी- क्लैरिटी, करेज, कंविक्शन, कंसिस्टेंसी और कंपैशन फॉर्मूला। मुरादाबाद से पढ़िए, प्रो. श्यामसुंदर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी की लीडरशिप टॉक सीरीज के 19वें सत्र में फ्रॉम प्रीप्रेशन टू पर्पज़ः लाइफ लेशंस फ्रॉम द सिविल सर्विस जर्नी में त्रिपुरा सरकार सचिव, प्रख्यात लेखिका और टीडीएक्स स्पीकर आईएएस सोनल गोयल ने कहा कि सफलता के लिए स्टुडेंट्स अपनाएं 5सी- क्लैरिटी, करेज, कंविक्शन, कंसिस्टेंसी और कंपैशन फॉर्मूला। <span style="color: #ff0000">मुरादाबाद से पढ़िए, प्रो. श्यामसुंदर भाटिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरादाबाद</strong>। त्रिपुरा सरकार में सचिव, प्रख्यात लेखिका और टीडीएक्स स्पीकर आईएएस सोनल गोयल ने कहा कि जीवन में असफलता से डरने की नहीं, बल्कि उसे स्वीकार करते हुए सीखने की जरूरत है। अक्नॉलेजमेंट और एनालिसिस के जरिए व्यक्ति अपनी गलतियों को समझ सकता है और उन्हें सुधार सकता है। असफलता को विकास का साधन बताते हुए बोलीं, जब तक आप खुद हार नहीं मानते, कोई आपको हरा नहीं सकता। उन्होंने स्टुडेंट्स को सफलता के लिए 5सी फॉर्मूला- क्लैरिटी, करेज, कंविक्शन, कंसिस्टेंसी और कंपैशन को अपनाने की सलाह दी। आईएएस गोयल बोलीं, जीवन का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि वह समाज की जरूरतों और अपेक्षाओं से भी जुड़ा होना चाहिए। लक्ष्य की स्पष्टता के साथ निरंतर प्रयास और मजबूत आत्मविश्वास ही सफलता की कुंजी है। आईएएस सोनल गोयल तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद की लीडरशिप टॉक सीरीज के 19वें सत्र में फ्रॉम प्रीप्रेशन टू पर्पज़ः लाइफ लेशंस फ्रॉम द सिविल सर्विस जर्नी पर बतौर मुख्य वक्ता बोल रहीं थीं। इससे पूर्व आईएएस सोनल गोयल, डीन एकेडमिक्स प्रो. मंजुला जैन, लॉ एंड लीगल स्टडीज के डीन प्रो. हरबंश दीक्षित, डीन स्टुडेंट वेलफेयर प्रो. एमपी सिंह, प्रो. सुशील कुमार, डॉ. अलका अग्रवाल आदि ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलित करके ऑडी में टॉक सीरीज का शंखनाद किया।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-105372" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260422-WA0011-300x181.jpg" alt="" width="300" height="181" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260422-WA0011-300x181.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260422-WA0011-1024x616.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260422-WA0011-768x462.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260422-WA0011-1536x924.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260422-WA0011-990x596.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260422-WA0011-1320x794.jpg 1320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260422-WA0011.jpg 1600w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p>प्रख्यात लेखिका एवम् आईएएस सोनल गोयल ने अपने अनुभव साझा करते हुए त्रिपुरा में दूरदराज के इलाकों में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के प्रयास भी विस्तार से बताए। सीमित संसाधनों के बावजूद सहयोग और स्पष्ट उद्देश्य से सकारात्मक बदलाव संभव है। महिला सशक्तिकरण पर कहा, आज भी महिलाओं की राह आसान नहीं है। स्टुडेंट्स को सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का संतुलित उपयोग करने की सलाह देते हुए कहा, इनका इस्तेमाल सहायक उपकरण के रूप में करें, न कि पूरी तरह निर्भर हो जाएं। समय प्रबंधन, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य, आत्मविश्लेषण और अनुशासन को सफलता का आधार बताते हुए उन्होंने युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें समाज सेवा से जोड़ने का आह्वान किया। अंत में उन्होंने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का उल्लेख करते हुए कहा कि छोटा लक्ष्य रखना एक अपराध है। लॉ एंड लीगल स्टडीज के डीन प्रो. हरबंश दीक्षित ने कहा, जीवन को जिस नजरिए से हम लेते हैं, वही हमें लौटकर मिलता है। अगर हम जिंदगी को गंभीरता से लेंगे, तो जिंदगी भी हमें गंभीरता से लेगी, और अगर हम इसे हल्के में लेंगे, तो परिणाम भी वैसा ही होगा। उन्होंने बताया, किताबों से ज्ञान तो मिलता है, लेकिन व्यावहारिक समझ नहीं मिलती। यह सत्र स्टुडेंट्स के लिए वास्तविक जीवन के मार्गदर्शन जैसा है। टॉक सीरीज में टिमिट, लॉ कॉलेज, फिजिकल एजुकेशन और फाइन आर्ट्स कॉलेज के स्टूडेंट्स आदि मौजूद रहे। संचालन असिस्टेंट डायरेक्टर एकेडमिक्स डॉ. नेहा आनंद ने किया।</p>
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		<title>भक्ति और उल्लास से मनाया गया भगवान अभिनंदननाथ का मोक्ष कल्याणक : पीठ दिगंबर जैन मंदिर में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब </title>
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		<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:50:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मोक्ष गए प्रभु अभिनंदन स्वामी, चरणों में वंदन बारंबार&#8230;इन भक्तिमय पंक्तियों और जयकारों के साथ ग्राम पीठ स्थित दिगंबर जैन मंदिर में जैन धर्म के चतुर्थ तीर्थंकर भगवान अभिनंदननाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव बड़ी श्रद्धा और हर्षाेल्लास के साथ मनाया गया। पीठ से पढ़िए, यह खबर&#8230; पीठ (डूंगरपुर)। मोक्ष गए प्रभु अभिनंदन स्वामी, चरणों में [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मोक्ष गए प्रभु अभिनंदन स्वामी, चरणों में वंदन बारंबार&#8230;इन भक्तिमय पंक्तियों और जयकारों के साथ ग्राम पीठ स्थित दिगंबर जैन मंदिर में जैन धर्म के चतुर्थ तीर्थंकर भगवान अभिनंदननाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव बड़ी श्रद्धा और हर्षाेल्लास के साथ मनाया गया। <span style="color: #ff0000">पीठ से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पीठ (डूंगरपुर)</strong>। मोक्ष गए प्रभु अभिनंदन स्वामी, चरणों में वंदन बारंबार&#8230;इन भक्तिमय पंक्तियों और जयकारों के साथ ग्राम पीठ स्थित दिगंबर जैन मंदिर में जैन धर्म के चतुर्थ तीर्थंकर भगवान अभिनंदननाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव बड़ी श्रद्धा और हर्षाेल्लास के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लेकर पुण्य अर्जन किया।</p>
<p><strong>अभिषेक और शांतिधारा से हुआ मंगल प्रारंभ</strong></p>
<p>कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः काल भगवान के मंगल अभिषेक और शांतिधारा के साथ हुई। भक्तों ने पवित्र मंत्रोच्चार के बीच भगवान की प्रतिमा पर जलार्पण किया। वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया जब श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से भगवान अभिनंदननाथ का पूजन कर अष्टद्रव्यों से अर्घ्य समर्पित किए।</p>
<p><strong>निर्वाण लाडू अर्पित कर मांगी सुख-समृद्धि</strong></p>
<p>महोत्सव का मुख्य आकर्षण भगवान को निर्वाण लाडू अर्पित करना रहा। समाज के अध्यक्ष राजकुमार डेचिया ने जानकारी दी कि तीर्थंकर प्रभु के मोक्ष गमन के प्रतीक स्वरूप भव्य ‘निर्वाण लाडू’ की रचना की गई थी। ढोल-नगाड़ों और जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने पालकी और थाल में लाडू सजाकर भगवान के चरणों में अर्पित किए और जगत के कल्याण व सुख-समृद्धि की कामना की। शाम को भगवान की महाआरती की गई, जिसमें समूचा पीठ गांव धर्म की गंगा में सराबोर नजर आया।</p>
<p><strong>समाज के प्रबुद्ध जनों की गरिमामयी उपस्थिति</strong></p>
<p>इस पुनीत अवसर पर दिगंबर जैन समाज के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान चंद्रकांत शाह, महेंद्र डेचिया, डॉ. देवीलाल, कोदरलाल डेचिया, रोशन भूता और लक्ष्मीलाल टोकर वाले सहित कई प्रमुख श्रावकों ने अपनी सक्रिय सहभागिता निभाई। अध्यक्ष राजकुमार डेचिया ने बताया कि भगवान अभिनंदननाथ का जीवन हमें संयम और आत्म-कल्याण का मार्ग दिखाता है। इस तरह के आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और संस्कारों से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को प्रभावना वितरित की गई।</p>
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		<title>माजी विद्यार्थियों का समंतभद्र विद्या मंदिर वेरुल एलोरा में हुआ सम्मान : 700 से अधिक माजी विद्यार्थियों ने एलोरा में एकत्र होकर इस स्वर्णिम क्षण का एहसास किया। </title>
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		<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 08:26:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री गुरुदेव समंतभद्र विद्या मंदिर वेरुल (एलोरा) की पहचान लेनी एवं भगवान भोलेनाथ का मंदिर 12वें ज्योतिर्लिंग घृष्णेश्वर समूचे विश्व में हुई हैं। श्री महावीर ब्रह्मचर्य आश्रय गुरुकुल के माजी विद्यार्थियों का एक दिवसीय स्नेह सम्मेलन पूरे उत्साह के साथ हुआ। इस कार्यक्रम को आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का अशीष मिला था तो आचार्यश्री समयसागरजी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री गुरुदेव समंतभद्र विद्या मंदिर वेरुल (एलोरा) की पहचान लेनी एवं भगवान भोलेनाथ का मंदिर 12वें ज्योतिर्लिंग घृष्णेश्वर समूचे विश्व में हुई हैं। श्री महावीर ब्रह्मचर्य आश्रय गुरुकुल के माजी विद्यार्थियों का एक दिवसीय स्नेह सम्मेलन पूरे उत्साह के साथ हुआ। इस कार्यक्रम को आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का अशीष मिला था तो आचार्यश्री समयसागरजी ने भी आशीर्वाद प्रदान किया था। <span style="color: #ff0000">एलोरा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>एलोरा</strong>। श्री गुरुदेव समंतभद्र विद्या मंदिर वेरुल (एलोरा) की पहचान लेनी एवं भगवान भोलेनाथ का मंदिर 12वें ज्योतिर्लिंग घृष्णेश्वर समूचे विश्व में हुई हैं। श्री महावीर ब्रह्मचर्य आश्रय गुरुकुल के माजी विद्यार्थियों का एक दिवसीय स्नेह सम्मेलन पूरे उत्साह के साथ हुआ। इस कार्यक्रम को आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का अशीष मिला था तो आचार्यश्री समयसागरजी ने भी आशीर्वाद प्रदान किया था। पूरे विश्व से अलग-अलग देश, राज्य प्रांत विभाग, ज़िला में स्थित सात सौ से अधिक माजी विद्यार्थियों ने एलोरा में एकत्र होकर इस स्वर्णिम क्षण का एहसास किया। इस कार्यकम को कई दिगंबर संतों ने आशीर्वाद प्रदान किया तो कार्यक्रम मुनिश्री नियमसागरजी, मुनिश्री सुपार्श्वसागरजी के सान्निध्य में मुख्य अतिथि विभागीय आयुक्त छत्रपति संभाजी नगर जितेंद्र पापड़कर, सतीशजी संघई अध्यक्ष म.ब्र.जैन गुरुकुल करंजा लाड, अध्यक्ष दिनेश गंगवाल, सचिव डॉ. प्रेमचंद पाटनी, स्कूल समिति अध्यक्ष वर्धमान पांडे, मुख्याध्यापक गुलाबचंद बोरालकर, राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित गुरुकुल के माजी विद्यार्थी स्कूल के माजी मुख्य अध्यापक निर्मलकुमार ठोले सर के साथ ही वाशिम के पूर्व छात्र प्राचार्य प्रशांत गड़ेकर, प्रा. पंकज बांदे को मंच पर स्थान मिला। इस कार्यक्रम को यशस्वी करने के लिए स्कूल, गुरुकुल के सभी कर्मचारियों ने अथक परिश्रम किया। सन 1962 से लेकर अब तक के सभी माजी विद्यार्थियों का स्नेहसम्मेलन प्रेरणा का विषय बना।</p>
<p><strong>सम्मान पत्र देकर गुरुकुल की पुरानी यादों को समेटा गया</strong></p>
<p>अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर गुरुकुल के एक बच्चे को दत्तक लेकर प्रशांत गडेकर ने संकल्पित दान पूर्ति के साथ ही गुरु आज्ञा का पालन किया। इस कार्यक्रम में गुरुकुल के छात्रों के लिये नूतन जैन मंदिर के प्रथम शीला को रखने का मान 1090 बैच के छात्रों को प्राप्त हुआ। स्कूल की ओर से भी उपस्थित माजी छात्रों को मान वंदना देकर विशेष सम्मान किया गया। आने वाले सभी हिमाचल माजी विद्यार्थियों को सम्मान पत्र देकर गुरुकुल, स्कूल की पुरानी यादों को समेटा गया। अब स्कूल को वर्ग में 1 अ दर्जा प्राप्त, आद्यावत डिजिटल स्कूल के साथ भव्य प्ले ग्राउंड के साथ ही नूतन जिन मंदिर के साथ ही सुसज्य स्टेज का निर्माण की अध्यक्ष दिनेश गंगवाल के कलात्मक सोच की प्रशंसा की। साथ ही अध्यक्ष, महामंत्री राम लक्ष्मण की जोड़ी के कारण गुरुकुल, स्कूल का विकास संभव हो पाया। इसकी भी चर्चा रही।</p>
<p><strong>सुनहरी यादों को समेटे एक समाज को प्रेरणा देने वाला आयोजन</strong></p>
<p>इस कार्यक्रम की धार्मिक विधि बाल ब्रह्मचारी मनीष भैया के माध्यम से पूर्ण की गई। अक्षय तृतीया के पावन दिनपर जैन धर्म में दान का अनन्य महत्व विविध माध्यम से दान कर गुरुकुल के सभी छात्रों ने धर्म प्रभावना की। श्याम के भोजन के पश्चात सैकड़ों माजी छात्र जिनकी उम्र लगभग 70/76के ऊपर थी, आंखे नम थी। भाव विभोर होकर अच्छी सुनहरी यादों को समेटे एक समाज को प्रेरणा देने वाला आयोजन स्कूल, गुरुकुल ने कर सबको नवीन ऊर्जा देने का कार्य किया। राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त माझी मुख्याध्यापक के साथ ही गुरुकुल के माजी छात्र प्रशांत गड़ेकर तीन युग का मिलन हुआ। गुरु$शिष्य, मुख्य अध्यापक$विद्यार्थी और दोनों ही गुरुकुल माजी विद्यार्थी एक मंच पर शामिल हुए।</p>
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		<title>दिखावे की दुनिया में खोता हुआ असली ‘मैं’ : वर्तमान समय में दिखावे का आकर्षण प्रबल हो गया है  </title>
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		<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 06:38:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आज का मनुष्य सफलता को एक ही तराजू में तौलता है- धन। उसके लिए उपलब्धि का अर्थ है अधिक से अधिक पैसा कमाना, ऊंचा पद पाना और समाज में अपनी एक चमकदार छवि बनाना। वह मान बैठा है कि यदि उसके पास अपार धन है और लोग उसके बारे में अच्छा सोचते हैं तो वही [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आज का मनुष्य सफलता को एक ही तराजू में तौलता है- धन। उसके लिए उपलब्धि का अर्थ है अधिक से अधिक पैसा कमाना, ऊंचा पद पाना और समाज में अपनी एक चमकदार छवि बनाना। वह मान बैठा है कि यदि उसके पास अपार धन है और लोग उसके बारे में अच्छा सोचते हैं तो वही उसकी असली पहचान है परंतु, इस दौड़ में वह एक बेहद महत्वपूर्ण प्रश्न को भूल जाता है-मैं वास्तव में कौन हूँ? <span style="color: #ff0000">मुरैना/सांगानेर से अंशुल जैन शास्त्री का आलेख को प्रस्तुत किया है मनोज जैन नायक ने, पढ़िए&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना/सांगानेर</strong>। आज का मनुष्य सफलता को एक ही तराजू में तौलता है- धन। उसके लिए उपलब्धि का अर्थ है अधिक से अधिक पैसा कमाना, ऊंचा पद पाना और समाज में अपनी एक चमकदार छवि बनाना। वह मान बैठा है कि यदि उसके पास अपार धन है और लोग उसके बारे में अच्छा सोचते हैं तो वही उसकी असली पहचान है परंतु, इस दौड़ में वह एक बेहद महत्वपूर्ण प्रश्न को भूल जाता है-मैं वास्तव में कौन हूँ? ‎वर्तमान समय में दिखावे का आकर्षण इतना प्रबल हो गया है कि व्यक्ति अपने वास्तविक भावों को दबाकर एक कृत्रिम व्यक्तित्व गढ़ने में लगा रहता है। चाहे भीतर कितना ही दुःख, तनाव या खालीपन क्यों न हो, बाहर वह स्वयं को प्रसन्न और सफल दिखाने का प्रयास करता है। यह एक ऐसा मुखौटा है जिसे पहनकर वह समाज के सामने खड़ा होता है, लेकिन इस मुखौटे के पीछे उसका असली ‘स्व’ कहीं खो जाता है। ‎मनुष्य यह जानता है कि उसके भीतर एक गहरा असंतोष है, फिर भी वह उसे अनदेखा करता है। वह यह स्वीकार करने से डरता है कि उसकी सारी भौतिक उपलब्धियाँ भी उसे सच्चा सुख नहीं दे पा रहीं। यही कारण है कि वह बाहरी प्रशंसा और मान्यता के पीछे भागता रहता है, क्योंकि उसे लगता है कि शायद वहीं उसे संतोष मिलेगा। परंतु यह संतोष क्षणिक होता है, और फिर वही खालीपन लौट आता है।</p>
<p>‎ ‎असल में, धन और प्रतिष्ठा जीवन के साधन हो सकते हैं, लेकिन वे जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं हो सकते। सच्चा सुख बाहरी वस्तुओं में नहीं, बल्कि आत्म-चिंतन और आत्म-ज्ञान में निहित है। जब तक मनुष्य अपने भीतर झांककर यह नहीं समझेगा कि उसकी असली पहचान क्या है, तब तक वह भटकता ही रहेगा। ‎आवश्यकता इस बात की है कि हम थोड़ी देर रुकें, अपने भीतर उतरें और स्वयं से प्रश्न करें-क्या हम जो बन गए हैं, वही बनना चाहते थे? क्या हमारी खुशियाँ सच में हमारी हैं या केवल दूसरों को दिखाने के लिए हैं? जब हम इन प्रश्नों के उत्तर खोजने लगेंगे, तभी हमें अपने अस्तित्व का वास्तविक अर्थ समझ में आएगा। अंततः, जीवन का उद्देश्य केवल धन अर्जित करना नहीं, बल्कि अपने ‘स्व’ को पहचानना है क्योंकि, जब हम स्वयं को जान लेते हैं, तभी हम सच्चे अर्थों में सुख और शांति का अनुभव कर पाते हैं।</p>
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		<title>मुनिराजों का ज्योति नगर में हुआ भव्य मंगल प्रवेश : मंगल प्रवेश के अवसर पर मंदिर परिसर में अलौकिक धार्मिक वातावरण  </title>
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		<pubDate>Tue, 21 Apr 2026 13:39:56 +0000</pubDate>
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<p><strong>जैन समाज के लिए अत्यंत हर्ष और श्रद्धा का विषय है कि मुनि श्री विलोक सागर जी एवं मुनि श्री विबोध सागर जी का मंगल प्रवेश मंगलवार प्रातः ज्योति नगर स्थित श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर में हुआ। प्रातः धुलियागंज से प्रारंभ हुआ मंगल विहार श्रद्धालुओं की विशाल उपस्थिति के बीच ज्योति नगर पहुंचा। जहां भक्तों ने भावपूर्ण स्वागत किया। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>आगरा।</strong> जैन समाज के लिए अत्यंत हर्ष और श्रद्धा का विषय है कि मुनि श्री विलोक सागर जी एवं मुनि श्री विबोध सागर जी का मंगल प्रवेश मंगलवार प्रातः ज्योति नगर स्थित श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर में हुआ। प्रातः धुलियागंज से प्रारंभ हुआ मंगल विहार श्रद्धालुओं की विशाल उपस्थिति के बीच ज्योति नगर पहुंचा। जहां भक्तों ने भावपूर्ण स्वागत किया। मंगल प्रवेश के अवसर पर मंदिर परिसर में धार्मिक वातावरण देखते ही बन रहा था। श्रद्धालुजन हाथों में ध्वज, मंगल कलश एवं पुष्प लेकर मुनिराजों के स्वागत में उमड़ पड़े। जय जिनेंद्र के उद्घोष एवं भक्ति गीतों के साथ संपूर्ण क्षेत्र धर्ममय हो गया। महिलाओं, युवाओं एवं बच्चों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लेते हुए अपनी आस्था प्रकट की। मंदिर पहुंचने पर विधिवत वंदना, पूजन एवं मंगलाचरण के साथ मुनिराजों का स्वागत किया गया। इस दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने मुनिराजों के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और अपने जीवन को धर्ममय बनाने का संकल्प लिया। आयोजन समिति द्वारा समस्त व्यवस्थाएं सुचारू रूप से की गई थीं, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण वातावरण में हुआ।</p>
<p>यह मंगल प्रवेश जैन समाज के लिए अत्यंत पुण्यदायक एवं प्रेरणादायक अवसर है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग से यह आयोजन सफलतापूर्वक हो सका। ज्योति नगर क्षेत्र में आज का दिन धर्म, श्रद्धा और भक्ति के अद्भुत संगम के रूप में स्मरणीय बन गया, जहां हर श्रद्धालु ने इस पावन अवसर का लाभ उठाते हुए आत्मिक शांति एवं ऊर्जा का अनुभव किया।</p>
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		<title>हरीपर्वत पर श्री आदिनाथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव 23 अप्रैल से: पदाधिकारियों ने किया गया पत्रिका विमोचन </title>
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		<pubDate>Tue, 21 Apr 2026 13:38:40 +0000</pubDate>
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<p><strong>न्यू आदर्श नगर, बल्केश्वर स्थित नवनिर्मित श्री 1008 सर्वताभद्र जिनालय में आचार्यश्री विरागसागर जी महाराज एवं आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी महाराज के आशीर्वाद तथा उपाध्यायश्री विहसंत सागर जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में 23 से 27 अप्रैल तक एमडी जैन इंटर कॉलेज ग्राउंड अयोध्या नगरी में भव्य श्री आदिनाथ जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ होने जा रहा है। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> न्यू आदर्श नगर, बल्केश्वर स्थित नवनिर्मित श्री 1008 सर्वताभद्र जिनालय में आचार्यश्री विरागसागर जी महाराज एवं आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी महाराज के आशीर्वाद तथा उपाध्यायश्री विहसंत सागर जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में 23 से 27 अप्रैल तक एमडी जैन इंटर कॉलेज ग्राउंड अयोध्या नगरी में भव्य श्री आदिनाथ जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ होने जा रहा है। इसी क्रम में 21 अप्रैल को हरीपर्वत स्थित एम.डी.जैन इंटर कॉलेज परिसर के नारायण भवन में श्री आदिनाथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति द्वारा भव्य पत्रिका विमोचन एवं प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान विधिवत रूप से महोत्सव की आधिकारिक पत्रिका का विमोचन किया गया। पत्रिका विमोचन करते हुए समिति पदाधिकारियों ने महोत्सव की विस्तृत रूपरेखा साझा की और आयोजन की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। प्रेसवार्ता में मुख्य संयोजक मनोज जैन बाकलीवाल ने बताया कि यह महोत्सव 23 से 27 अप्रैल तक अत्यंत भव्य एवं धार्मिक गरिमा के साथ होगा। जिसमें जैन परंपरा अनुसार पंचकल्याणक की सभी मांगलिक क्रियाएं विधि पूर्वक आयोजित की जाएंगी।</p>
<p>उन्होंने जानकारी दी कि 23 अप्रैल को प्रथम दिवस गर्भकल्याणक महोत्सव के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ होगा। प्रातः6 बजे से कार्यक्रमों की श्रृंखला प्रारंभ होकर घटयात्रा, शोभायात्रा, भूमि शुद्धि, मंडप उद्घाटन, ध्वजारोहण, अभिषेक, पूजन एवं माता मरुदेवी की गोद भराई जैसी मांगलिक क्रियाएं होंगी। सायं कालीन कार्यक्रमों में आरती, प्रवचन एवं विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी। जिनमें 16 स्वप्नों का आकर्षक मंचन भी शामिल रहेगा।</p>
<p><strong>मोक्ष कल्याणक के साथ महोत्सव का समापन </strong></p>
<p>संयोजक रजत जैन ने बताया कि 24 अप्रैल को जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा, जिसमें तीर्थंकर बालक के जन्म के उपलक्ष्य में भव्य आयोजन, ऐरावत हाथी पर शोभायात्रा, पांडुकशिला अभिषेक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। इसके पश्चात 25 अप्रैल को तप कल्याणक महोत्सव, 26 को ज्ञान कल्याणक महोत्सव एवं 27 अप्रैल को मोक्ष कल्याणक के साथ महोत्सव का समापन होगा। जो श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक प्रेरणा का अद्वितीय अवसर बनेगा। संयोजक पंकज जैन ने बताया कि प्रतिष्ठा ब्रह्मचारी जयकुमार ‘निशांत’ टीकमगढ़ के निर्देशन में सभी धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे। साथ ही बाहर से आए कलाकारों द्वारा भक्ति संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियां दी जाएंगी, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय रहेगा।</p>
<p><strong>इनकी रही मौजूदगी </strong></p>
<p>महोत्सव के विशेष आकर्षणों में 25 अप्रैल की रात्रि को प्रसिद्ध कवयित्री अनामिका जैन ‘अंबर’ द्वारा कवि सम्मेलन तथा 26 अप्रैल को सुप्रसिद्ध गायक रूपेश जैन द्वारा संगीतमय भजन संध्या का आयोजन शामिल है। समिति द्वारा मीडिया प्रतिनिधियों से अनुरोध किया गया कि इस भव्य धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन को अधिक से अधिक जन-जन तक पहुंचाने में सहयोग प्रदान करें। इस मौके पर रजत जैन, पंकज जैन, मनोज जैन बाकलीवाल, पारस जैन कंसल, सुमेर जैन, नरेंद्र जैन, राजीव बैंक, विशाल जैन, दिलीप जैन, विष्णु भगवान जैन, प्रवीण जैन नेताजी, कमल जैन, आकाश जैन, अंकेश जैन, मनीष जैन, शुभम जैन, समस्त श्री आदिनाथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति बलकेश्वर के पदाधिकारी मौजूद रहे।</p>
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		<title>ऋषभदेव पखवाड़े के विजेताओं को किया पुरस्कृत: पखवाड़े में पोस्टर, निबंध, रंगोली, स्लोगन, प्रतियोगिता हुईं </title>
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		<pubDate>Tue, 21 Apr 2026 11:03:21 +0000</pubDate>
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<p><strong>नाभिराय जी पिता तुम्हारे माता मरु देवी तुम हो विघ्न विनाशक पार करो खेबा की पंक्तियों के साथ महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय कलेक्ट्री झालावाड़ में तीर्थंकर ऋषभदेव पखवाड़े में पोस्टर, निबंध, रंगोली, स्लोगन, प्रतियोगिता हुईं। इसमें विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। <span style="color: #ff0000">झालरापाटन से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong> झालरापाटन</strong>। नाभिराय जी पिता तुम्हारे माता मरु देवी तुम हो विघ्न विनाशक पार करो खेबा की पंक्तियों के साथ महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय कलेक्ट्री झालावाड़ में तीर्थंकर ऋषभदेव पखवाड़े में पोस्टर, निबंध, रंगोली, स्लोगन, प्रतियोगिता में प्रथम आने पर हर्षाली, मनीषा, गणिका, सृष्टि, राहीन, मेहनीन, शरिया, आर्या साक्षी को उप प्रधानाचार्य जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान झालरापाटन एवं जिला कार्यक्रम संयोजक सुरेंद्रकुमार जैन ने पुरस्कृत किया। प्रधानाचार्य बालचंद नागर ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम होने से विद्यार्थियों के संपूर्ण व्यक्तित्व का विकास होता है। उप प्रधानाचार्य रमेश यादव ने कहा कि इन कार्यक्रम से विद्यार्थियों के नैतिक ज्ञान में वृद्धि होती है। कार्यक्रम में रवि लता पारीक, समीना खान, समीना बेगम, सनी वर्मा, लक्ष्मी कुमावत, मीनूसिंह तंवर ने भी अपने विचार व्यक्त किए।</p>
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		<title>संस्कार श्रद्धा उत्सव का अदभुत समागम दृष्टिगत : विमल परिवार के आंगन में सजी माता मरुदेवी की मंगलमयी गोद भराई </title>
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		<pubDate>Tue, 21 Apr 2026 08:41:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री आदिनाथ जिनविंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव की पावन श्रृंखला के अंतर्गत ट्रांस यमुना कॉलोनी स्थित सतीशचंद्र जैन, विप्लव जैन एवं विपुल जैन (विमल परिवार) के निवास पर सोमवार को भव्य गोद भराई एवं सम्मान समारोह श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ हुआ। आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की रिपोर्ट&#8230; आगरा। श्री आदिनाथ जिनविंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री आदिनाथ जिनविंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव की पावन श्रृंखला के अंतर्गत ट्रांस यमुना कॉलोनी स्थित सतीशचंद्र जैन, विप्लव जैन एवं विपुल जैन (विमल परिवार) के निवास पर सोमवार को भव्य गोद भराई एवं सम्मान समारोह श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ हुआ। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> श्री आदिनाथ जिनविंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव की पावन श्रृंखला के अंतर्गत ट्रांस यमुना कॉलोनी स्थित सतीशचंद्र जैन, विप्लव जैन एवं विपुल जैन (विमल परिवार) के निवास पर सोमवार को भव्य गोद भराई एवं सम्मान समारोह श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ हुआ। कार्यक्रम में तीर्थंकर बालक के पिता पारसदास जैन एवं माता स्नेहालता जैन का विशेष रूप से सम्मान किया गया। इस अवसर पर समाज के गणमान्यजनों एवं श्रद्धालुओं ने उन्हें शुभकामनाएं प्रदान कीं। समारोह के दौरान माता मरुदेवी जी की गोद भराई की मांगलिक क्रियाएं पारंपरिक रीति-रिवाजों एवं मंत्रोच्चार के साथ विधिवत की गईं। भक्ति गीतों और मंगल ध्वनियों से पूरा वातावरण धर्ममय हो गया, जिससे उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।</p>
<p>आयोजन में बड़ी संख्या में समाजजनों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिन्होंने सहभागिता कर धर्म लाभ अर्जित किया। पूरे कार्यक्रम में उल्लास, श्रद्धा और संस्कारों की सुंदर झलक देखने को मिली। सभी ने आगामी पंचकल्याणक महोत्सव की सफलता के लिए मंगल कामनाएं व्यक्त कीं। कार्यक्रम में प्रीति जैन, शर्मिष्ठा जैन, पायल जैन, खुशबू जैन, शिखा जैन, आशा जैन, सरोज जैन, श्वेता जैन, बेबी जैन, पूजा जैन, वृत्ति जैन एवं आराध्या जैन की सहभागिता रही।</p>
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