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	<title>Jain Culture श्रीफल जैन न्यूज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>आत्मचिंतन से शाश्वत प्रेरणा तक स्वामी जी का संदेश : अक्षर कलश और बाहुबली की प्रतिमा है आध्यात्मिक विचारों और संस्कृति का संगम </title>
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		<pubDate>Thu, 12 Dec 2024 00:30:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[हमारे जीवन में स्वाध्याय और आत्मचिंतन (अक्षर कलश) को शामिल करना अत्यंत आवश्यक है। वर्तमान समय में जब हम भौतिकता के दौर में जी रहे हैं, आत्मिक शांति और ज्ञान की खोज के लिए हमें समय निकालना चाहिए। परम पूज्य जगतगुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक महास्वामी जी ने इस बात पर जोर दिया कि केवल [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>हमारे जीवन में स्वाध्याय और आत्मचिंतन (अक्षर कलश) को शामिल करना अत्यंत आवश्यक है। वर्तमान समय में जब हम भौतिकता के दौर में जी रहे हैं, आत्मिक शांति और ज्ञान की खोज के लिए हमें समय निकालना चाहिए। परम पूज्य जगतगुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक महास्वामी जी ने इस बात पर जोर दिया कि केवल पूजा या परिवारिक जिम्मेदारियों से नहीं, बल्कि अक्षर कलश के माध्यम से ही हम अपने जीवन को सही दिशा दे सकते हैं और जैन परंपराओं को आने वाली पीढ़ियों तक संरक्षित रख सकते हैं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए संपादक रेखा संजय जैन की विशेष रिपोर्ट&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> वर्ष 2006 के महामतकाभिषेक के दौरान परम पूज्य जगतगुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक महास्वामी जी ने श्रवणबेलगोला में भगवान बाहुबली की विशाल प्रतिमा और अक्षर कलश के बीच गहरे संबंध का उल्लेख किया था। स्वामी जी के इस बयान ने उपस्थित विद्वानों और भक्तों को आत्मचिंतन करने के लिए प्रेरित किया और इस प्राचीन अवधारणा के बारे में गंभीरता से सोचने का मौका दिया।</p>
<p><iframe title="Evening bulletin 41।अक्षर कलश से श्रवणबेलगोला के भगवान बाहुबली की प्रतिमा का निर्माण ।" width="1320" height="743" src="https://www.youtube.com/embed/GnR3cdPheoc?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" referrerpolicy="strict-origin-when-cross-origin" allowfullscreen></iframe></p>
<p><strong>अक्षर कलश का अर्थ: आत्मचिंतन का मार्ग</strong></p>
<p>स्वामी जी ने अपने भाषण में अक्षर कलश के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि स्वाध्याय (आध्यात्मिक अध्ययन) और आत्मविचार (आत्मचिंतन) ही वास्तविक अक्षर कलश हैं। अक्षर शब्द का अर्थ &#8216;अक्षय&#8217; या &#8216;अमर&#8217; है, और यह उस ज्ञान और शांति की ओर इशारा करता है, जो आत्मा को शाश्वत सत्य से जोड़ता है। स्वामी जी ने यह भी कहा कि जो व्यक्ति अक्षर कलश करता है, वह &#8216;सरस्वती पुत्र&#8217; के समान होता है और ज्ञान की ओर अग्रसर होता है।</p>
<p><strong>अक्षर कलश और बाहुबली की प्रतिमा का संबंध</strong></p>
<p>स्वामी जी ने अक्षर कलश और बाहुबली की प्रतिमा के निर्माण के बीच गहरे संबंध को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि चामुंडराय की माता ने *आदिपुराण* के स्वाध्याय के माध्यम से भगवान बाहुबली की प्रतिमा के दर्शन करने का संकल्प लिया था। इस संकल्प के परिणामस्वरूप ही अद्वितीय बाहुबली प्रतिमा का निर्माण हुआ। जैसा कि जल कलश पूजा में आवश्यक होता है, उसी प्रकार अक्षर कलश, यानी आत्मचिंतन, जीवन के निर्माण और आत्मिक शांति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस प्रक्रिया ने एक साधारण शिलाखंड को एक विश्व प्रसिद्ध प्रतिमा में बदल दिया।</p>
<p><strong>अक्षर कलश: जैन संस्कृति और इतिहास का संरक्षण</strong></p>
<p>स्वामी जी ने अक्षर कलश के माध्यम से जैन संस्कार, संस्कृति और इतिहास को संरक्षित करने के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वाध्याय के माध्यम से हमें हमारे पूर्वजों का ज्ञान और उनके आदर्श प्राप्त होते हैं। अक्षर कलश जीवन में ज्ञान और संस्कारों को सहेजने का एक प्रभावी तरीका है, जो हमारे अतीत को वर्तमान में जीवित रखता है।</p>
<p><strong>बाहुबली की प्रतिमा पर प्रमुख व्यक्तित्वों की टिप्पणियां</strong></p>
<p>बाहुबली की प्रतिमा न केवल आध्यात्मिक साधकों बल्कि विश्व के प्रमुख नेताओं और चिंतकों के लिए भी एक गहरी प्रेरणा का स्रोत बन गई है। इस प्रतिमा का प्रभाव कुछ प्रसिद्ध व्यक्तित्वों की टिप्पणियों से स्पष्ट होता है:</p>
<p><strong>जवाहरलाल नेहरू (7 सितम्बर 1951): </strong></p>
<p>&#8220;मैं यहां आया, मैंने दर्शन किए और मैं इस प्रतिमा की विशालता और सौंदर्य से विस्मित रह गया।&#8221;</p>
<p><strong>डॉ. राजेन्द्र प्रसाद:  </strong></p>
<p>&#8220;यह मूर्ति इतनी सुंदर रूप से बनाई गई है कि चाहे आप इसे दूर से देखें या पास से, हर अंग अपनी सही अनुपात में दिखाई देता है।&#8221;</p>
<p><strong>इंदिरा गांधी (21 फरवरी 1981):  </strong></p>
<p>&#8220;यह प्रतिमा शक्ति और सौंदर्य का प्रतीक है, और यह हम सबको प्रेरणा देती है कि हम अपने देश और समाज के गरीबों और निर्बल लोगों के लिए प्रार्थना करें।&#8221;</p>
<p><strong>डॉ. शंकर दयाल शर्मा (2 दिसम्बर 1993):  </strong></p>
<p>&#8220;गोम्मटेश्वर की यह प्रतिमा मूर्तिकला, प्रतीकार्थ और अभियांत्रिकी का एक आश्चर्य है।&#8221;</p>
<p><strong>पी.वी. नरसिंह राव (18 दिसम्बर 1993): </strong></p>
<p>&#8220;मैं भगवान बाहुबली के चरणों में त्याग का संदेश प्राप्त करने आया हूं, ताकि हमारे देश से गरीबी, अज्ञान और ऊंच-नीच के भेद को मिटाया जा सके।&#8221;</p>
<p><strong>आध्यात्मिक और कलात्मक दृष्टि से बाहुबली की प्रतिमा**</strong></p>
<p>प्रसिद्ध कलाप्रेमी और चिंतक हेनरिक जिमर ने बाहुबली प्रतिमा के बारे में कहा:</p>
<p>&#8220;यह मूर्ति यद्यपि मानवीय आकृति में है, तथापि यह मानवीय सीमा से परे, एक अमानवीय और अलौकिक रूप में प्रतीत होती है। यह मूर्ति एक स्थिर और शाश्वत ज्योतिस्तंभ के रूप में दिखती है, जो आत्मा की शुद्धता और शाश्वत ज्ञान की अभिव्यक्ति है। प्रतिमा के समक्ष खड़े होकर व्यक्ति को एक अनोखी शांति और दिव्यता का अनुभव होता है, जिसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता।&#8221;</p>
<p><strong>अक्षर कलश का जीवन में समावेश</strong></p>
<p>स्वामी जी के इन विचारों से यह स्पष्ट होता है कि हमारे जीवन में स्वाध्याय और आत्मचिंतन (अक्षर कलश) को शामिल करना अत्यंत आवश्यक है। वर्तमान समय में जब हम भौतिकता के दौर में जी रहे हैं, आत्मिक शांति और ज्ञान की खोज के लिए हमें समय निकालना चाहिए। स्वामी जी ने इस बात पर जोर दिया कि केवल पूजा या परिवारिक जिम्मेदारियों से नहीं, बल्कि अक्षर कलश के माध्यम से ही हम अपने जीवन को सही दिशा दे सकते हैं और जैन परंपराओं को आने वाली पीढ़ियों तक संरक्षित रख सकते हैं।</p>
<p>अतः स्वामी जी का संदेश यह है कि हम अपने जीवन में अक्षर कलश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए तन, मन और धन का उपयोग करें, ताकि हम अपने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर को सुरक्षित रख सकें।</p>
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		<title>मुरैना संस्कृत विद्यालय में ग्रीष्मकालीन शिविर :  श्रमण संस्कार शिक्षण शिविरों का आयोजन 21 मई से </title>
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		<pubDate>Wed, 26 Apr 2023 12:46:30 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर जयपुर द्वारा आयोजित संस्कृति गौरव रजत महोत्सव के अंतर्गत 21 मई से 28 मई 2023 तक ग्वालियर एवं चम्बल सम्भाग के विभिन्न शहरों में ग्रीष्मकालीन शिविरों का आयोजन एक साथ होने जा रहा है। पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट&#8230; मुरैना। श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविरों का आठ दिवसीय [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर जयपुर द्वारा आयोजित संस्कृति गौरव रजत महोत्सव के अंतर्गत 21 मई से 28 मई 2023 तक ग्वालियर एवं चम्बल सम्भाग के विभिन्न शहरों में ग्रीष्मकालीन शिविरों का आयोजन एक साथ होने जा रहा है। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविरों का आठ दिवसीय आयोजन 21 मई से 28 मई तक संस्कृत महाविद्यालय में होने जा रहा है। शिविर के क्षेत्रीय प्रभारी पंडित नवनीत शास्त्री, मुरैना ने बताया कि बच्चों को धार्मिक शिक्षा देने एवं संस्कारों का बीजारोपण करने के उद्देश्य से परम् पूज्य सन्त शिरोमणी आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद एवं मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज की पावन प्रेरणा से श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर जयपुर द्वारा आयोजित संस्कृति गौरव रजत महोत्सव के अंतर्गत 21 मई से 28 मई 2023 तक ग्वालियर एवं चम्बल सम्भाग के विभिन्न शहरों में ग्रीष्मकालीन शिविरों का आयोजन एक साथ होने जा रहा है।</p>
<p><strong>सामूहिक समापन मुरैना में</strong></p>
<p>सभी शिविरों का सामूहिक समापन समारोह 28 मई को रात्रि 8 बजे बड़ा जैन मंदिर, मुरैना में होगा। शिविर में पं. जयकुमार शास्त्री मुजफ्फरनगर, डॉ. शीतलचन्द शास्त्री जयपुर, पं. अरुण शास्त्री को विशेष रूप आमंत्रित किया गया है। शिविर में ब्र.संजय भैयाजी, ब्र.ब.अनीता दीदी, मंजुला दीदी, ललिता दीदी का सान्निध्य रहेगा। शिविर प्रभारी पं.विकास शास्त्री एवं पं.सतीश शास्त्री होंगे। श्री गोपाल दिगम्बर जैन सिद्धान्त संस्कृत महाविद्यालय मुरैना में आयोजित होने जा रहे शिक्षण शिविर हेतु मुख्य संयोजक वीरेंद्र जैन बाबा, सह संयोजक डॉ. मनोज जैन, अजय जैन गौसपुर, शुभम जैन पिंटू को मनोनीत किया गया है। श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन पंचायती बड़ा मन्दिर मुरैना के प्रांगण में 21 मई को प्रातः 07.30 बजे ध्वजारोहण के साथ शिविरों का शुभारंभ होगा।</p>
<p><strong>संस्कारों का बीजारोपण प्राथमिकता</strong></p>
<p>मुरैना शिविर के मुख्य संयोजक वीरेंद्र जैन बाबा ने बताया कि आधुनिकता की अंधी दौड़ में नैतिकता, आदर्श एवं परम्परा लुप्त होती जा रही है। ऐसी विषम परिस्थितियों में आगम परम्परा एवं लुप्त होते संस्कारों को पुनः स्थापना की पवित्र भावना के साथ धार्मिक शिक्षण शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इन शिविरों के माध्यम से निश्चित ही नौनिहालों में संस्कारों का बीजारोपण होगा। सभी शिविरों में प्रशिक्षित विद्वान, ब्रह्मचारी भैयाजी एवं ब्रह्मचारिणी दीदियां प्रशिक्षण देंगीं। सभी नगरों में एक साथ शिविरों का आयोजन होगा। जिसमें सुबह, दोपहर एवं शाम को ज्ञान दर्पण भाग 1 एवं 2, छ्हढाला, रत्नकरण्ड श्रावकाचार, तत्वार्थ सूत्र, भक्तामर स्त्रोत का अध्ययन कराया जाएगा। प्रतिदिन रात्रि को शास्त्र सभा के पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।</p>
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		<title>मंझार जैन मंदिर में प्रवचन दे रहे हैं मुनि श्री : स्वाधीन बनने से होगा आत्मा का कल्याण &#8211; सुधासागर जी महाराज </title>
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		<pubDate>Mon, 13 Mar 2023 13:27:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मंझार जैन मंदिर में मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज, क्षुल्लक गंभीर सागर जी महाराज विगत एक माह से विराजमान हैं। अपने प्रवचन में मुनिश्री ने कहा कि महानुभाव पराधीन नहीं बनो। स्वाधीन बनो यही हमारी आत्मा का कल्याण करने वाला होगा। पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट&#8230; टीकमगढ़। शहर के मध्य में स्थित मंझार [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>मंझार जैन मंदिर में मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज, क्षुल्लक गंभीर सागर जी महाराज विगत एक माह से विराजमान हैं। अपने प्रवचन में मुनिश्री ने कहा कि महानुभाव पराधीन नहीं बनो। स्वाधीन बनो यही हमारी आत्मा का कल्याण करने वाला होगा। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टीकमगढ़।</strong> शहर के मध्य में स्थित मंझार जैन मंदिर में मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज, क्षुल्लक गंभीर सागर जी महाराज विगत एक माह से विराजमान हैं। उनके सानिध्य में धर्म की गंगा बह रही है। हजारों लोग धर्म लाभ ले रहे हैं। मुनि श्री के सानिध्य में श्री 1008 पारसनाथ धाम पंचायती मंदिर का शिलान्यास संपन्न हो चुका है। तीन मंजिला मंदिर का पाषाण से निर्माण होगा। मंदिर में पाषाण से निर्मित चौबीसी भी बनाई जाएगी। सोमवार को प्रातः 8:30 मुनि श्री मंच पर विराजमान हुए।</p>
<p><strong>अपनी जिंदगी की डोर अपने हाथ में</strong></p>
<p>मुनि श्री के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट के बाद मुनि श्री के प्रवचन शुरू हुए। उन्होंने अपने प्रवचनों के माध्यम से कहा कि हर व्यक्ति यह चाहता है कि मेरे अंदर ऐसी शक्ति सामर्थ्य जाग जाए कि मुझे किसी के अधीन ना होना पड़े। मुनि श्री ने कहा कि आप लोगों को स्वाधीन बनना है किसी के पराधीन होकर अपना जीवन नहीं खपाना है। श्रेष्ठतम व्यक्ति वह नहीं है जिसके साथ दुनिया है। जिसके साथ जितने लोग हैं समझ लेना वह व्यक्ति उतना कमजोर है।</p>
<p>किसी भी तरफ से देखो, जितने ज्यादा लोग उसके आगे पीछे होंगे, समझ लेना यह कमजोर व्यक्ति की निशानी है। और यह बहुत बड़ी कमजोरी भी है।</p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि जैसे राष्ट्रपति देश के सर्वोच्च पद वाला व्यक्ति होता है। उनकी सुरक्षा दूसरों के हाथ में होती है। वह अपनी सुरक्षा स्वयं नहीं कर सकते। तुम श्रावक लोग तो लाइसेंसी लेकर बंदूक रख सकते हो, राइफल रख सकते हो, डंडा भी अपनी सुरक्षा के लिए ले सकते हो। लेकिन राष्ट्रपति तो कोई लाइसेंसी बंदूक भी नहीं रख सकते। यानी अपनी जान बचाने के लिए भी अधिकार नहीं है। उनकी जान तो पुलिस वाले बचाएंगे, उनका प्रोटोकॉल बचाएगा। उनकी सुरक्षा में लगे सैनिक बचाएंगे। यह कहां तक सुरक्षित है। यह विचारणीय विषय है कि हम विचार करते हैं वह बड़ा आदमी है, इनके पास कितनी सुरक्षा है कितना बड़ा प्रोटोकॉल होगा। मुनि श्री ने कहा कि साइकिल चलाने वाले की जिंदगी स्वयं इसके हाथ में होती है लेकिन करोड़ों की कीमत वाली गाड़ी में बैठने वाली की जिंदगी दूसरों के हाथ में होती है। वह मालिक तो करोड़ों की गाड़ी का है लेकिन उसकी जिंदगी ड्राइवर के हाथ में होती है। मुनि श्री ने कहा कि भौतिकवाद की चकाचौंध तुम्हें पराधीन बनाती है और धर्म हमें स्वाधीन बनाता है।मुनिश्री ने कहा कि महानुभाव पराधीन नहीं बनो। स्वाधीन बनो यही हमारी आत्मा का कल्याण करने वाला होगा।</p>
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