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	<title>Jabalpur Area &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>Jabalpur Area &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>भगवान और गुरु के सामने हम तो धूल बराबर : मुनि श्री सुधासागर जी ने प्रवचन से दिया दिव्य संदेश  </title>
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		<pubDate>Sat, 24 May 2025 17:10:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री सुधासागर जी इन दिनों विहार के दौरान विश्राम के दौरान धर्मसभा को संबोधित कर रहे हैं। उनके दिव्य प्रवचनों से श्रावक-श्राविकाएं धर्म लाभ और पुण्य अर्जित कर रहे हैं। शनिवार को भी उन्होंने धर्म सभा संबोधित की। जबलपुर से पढ़िए, राजीव सिंघई और शुभम पृथ्वीपुर की यह खबर&#8230; जबलपुर। मुनिश्री सुधासागर जी महाराज [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>मुनि श्री सुधासागर जी इन दिनों विहार के दौरान विश्राम के दौरान धर्मसभा को संबोधित कर रहे हैं। उनके दिव्य प्रवचनों से श्रावक-श्राविकाएं धर्म लाभ और पुण्य अर्जित कर रहे हैं। शनिवार को भी उन्होंने धर्म सभा संबोधित की। <span style="color: #ff0000">जबलपुर से पढ़िए, राजीव सिंघई और शुभम पृथ्वीपुर की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जबलपुर।</strong> मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने शनिवार को धर्मसभा में कहा कि आप लोक व्यवहार में देखिए जितना व्यक्ति बड़ा बड़ा सेठ होता जाएगा, उसकी जिंदगी पराधीन होती जाएगी। कलेक्टर अपनी गाड़ी नहीं चला सकता। उसकी जिंदगी एक ड्राइवर के हाथ में होती है, चूक जाए तो जिंदगी बर्बाद हो सकती है। एक सेठानी की जिंदगी एक 10 हजार रुपये के रसोइए के हाथ में है, वह चाहे तो जहर खिला दे, यदि काश वो गरीब होती तो अपने लिए अपने पेट की रोटी अपने हाथ से बनाकर खा लेती, वो जिंदा रह जाती। बड़े आदमी के बेटे को मां के हाथ की रोटी नहीं मिलती, नौकर के हाथ की मिलती है और एक जिसकी मां गरीब है, उस बेटे को जिंदगी भर मां के दुलार की रोटी मिलती है, प्यार मिलता है, वो स्वाधीन है क्योंकि, गरीब है उसकी मां। आप राष्ट्रपति को देखिए स्वयं की सुरक्षा के लिए एक रायफल भी नहीं रख सकता। कहां अनमोल तुम्हारा गुरु और तुम दो कौड़ी के, उनके चरणों की धूल हो। भगवान और गुरु के सामने हम तो धूल बराबर हैं, यही अहोभाग्य है। जगत पूज्य आचार्य, उपाध्याय, साधु परमेष्ठी की जिंदगी तुम्हारे हाथ में है, उनकी चर्या, उनका रत्नत्रय का पालन तुम्हारे हाथ में है, आहार नहीं होगा तो वो जिंदा नहीं रह पाएंगे।</p>
<p><strong>अहंकार मत करो मुझे किसी की जरूरत नहीं</strong></p>
<p>संसार में क्या पता कब कौन सा जीव काम में आ जाए, मत समझो कि वह चूहा है, कभी जंगल के राजा को भी चूहा की जरूरत पड़ सकती है। अहंकार मत करो कि मुझे किसी की जरूरत नहीं है। एक हवा की जरूरत पड़ जाए, मत कहो कि ये पानी है, एक बूँद को तरस जाओ। मत कहो कि ये चींटी है, चींटी में भी बहुत बड़ी ताकत है, हाथी के भी प्राण ले लेती है, इसलिए धर्म ने आकर कहा कि तू मैत्रीपन, वात्सल्य मना, अनुकंपा व दया कर। सांप बिच्छू पर भी दया कर, वो भी कभी काम आएंगे। पारसनाथ ने नाग नागिन को बचाया था, उसी ने आकर पारसनाथ का उपसर्ग दूर किया था, इसलिए सबसे बना कर चलो क्योंकि तुम्हारी जिंदगी पराधीन है।</p>
<p><strong>आपको धर्म करने की जरूरत है</strong></p>
<p>जहां-जहां तुम्हे ये अनुभव में आ जाए कि ये गलत है लेकिन मुझे करना पड़ेगा, बस आपको धर्म करने की जरूरत है, आपको भगवान की, गुरु की, णमोकार मंत्र की, मंदिर की जरूरत है क्योंकि, आप सत्य को जानते हुए भी स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। उसके लिए कोई धर्म की जरूरत नहीं है जो यह जानता है कि यह गलत है, मैं इसी समय छोड़ता हूँ। हिंसा करना सही है या गलत? यदि गलत है तो क्या छोड़ सकते हो, नहीं तो बस आपको जरूरत है मन्दिर की। यदि आप बिना हिंसा की अपनी जिंदगी जी लेंगे तो आपको कोई धर्म करने की, गुरु, मंदिर, किसी चीज की जरूरत नहीं।</p>
<p><strong>हमें जरूरत है सुरक्षा कवच की</strong></p>
<p>आप पाप मान रहे हैं, फिर भी नहीं छोड़ रहे हैं, अब आपको धर्म करने की जरूरत है, नहीं तो तुम बर्बाद हो जाओगे। अन्यथा ये पांचों पाप मिलकर वो दशा करेंगे जो चक्रव्यूह में अभिमन्यु की दशा हुई। इस संसार के चक्र में यदि तुम्हारे साथ देव-शास्त्र-गुरु नहीं है, तुम्हारे पास णमोकार मंत्र नहीं है, तुमने अभिषेक का गंधोदक नहीं लिया, तुमने पूजा पाठ नहीं की, भक्तामर नहीं पढ़ा तो ये आठों कर्म मिलकर ऐसी दशा करेंगे, जैसे अभिमन्यु की मौत हुई थी। तीर्थंकरो को कोई नहीं मार सकता इसलिए उन्हें कोई जरूरत नहीं है णमोकार मंत्र की लेकिन हमें और आपको कोई भी मार सकता है, इसलिए हमें जरूरत है सुरक्षा कवच की।</p>
<p><strong>इज्जत के साथ जी रहे हो मरण भी इज्जत से हो</strong></p>
<p>हर जैनी का जन्म इज्जत के साथ हुआ है, जिनके माँ बाप की इज्ज़त है, शान सौगात है, सारे महाजन है, कम से कम तुम्हारी जिंदगी तुम्हारे हाथ में आए तो इज्जत के साथ जीना, ऐसा कोई कार्य नहीं करना, जिससे तुम्हारी जिंदगी की बेज्जती हो जाये। ऐसे धंधे मत करो, ऐसे कार्य मत करो, जहाँ कुल की परंपरा व जाति के विपरीत जाना पड़े। इज्जत के साथ जी रहे हो तो मरण भी इज्जत के साथ हो। तुम भी पाप करना लेकिन ऐसा पाप मत करना कि गंधोदक लाइलाज हो जाये। णमोकार मंत्र, भक्तामर, शांतिधारा, गुरु का आशीर्वाद लाइलाज हो जाये। कोई तो कहने वाला रहें- मत मारो, इसने धर्म भी किया है।</p>
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		<title>धर्म के कार्यों में कभी बचा हुआ धन समय मत देना : मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने धर्मशास्त्रों के आधार पर दी मंगल देशना </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 23 May 2025 07:46:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[मुनिश्री सुधासागर जी महाराज इन दिनों जबलपुर क्षेत्र में विहाररत हैं। वे रास्ते मे आने गांव, शहर में अपने मंगल प्रवचन से धर्म जागरण कर रहे हैं। गुरुवार को भी उन्होंने मंगल देशना दी है। जबलपुर से पढ़िए, राजीव सिंघई की यह खबर&#8230; जबलपुर। मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ने गुरुवार को धर्मसभा को संबोधित [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>मुनिश्री सुधासागर जी महाराज इन दिनों जबलपुर क्षेत्र में विहाररत हैं। वे रास्ते मे आने गांव, शहर में अपने मंगल प्रवचन से धर्म जागरण कर रहे हैं। गुरुवार को भी उन्होंने मंगल देशना दी है। <span style="color: #ff0000">जबलपुर से पढ़िए, राजीव सिंघई की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जबलपुर।</strong> मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ने गुरुवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि ये व्यक्ति या वस्तु मेरी हो जाये, ये धन मेरा हो जाये, सारी दुनिया मेरे काम आवे, सभी लोगों की सहानुभूति मेरे साथ हो, भगवान की कृपा मेरे ऊपर बनी रहे, जितनी भी तुम क्रियाये कर रहे हो, सब में तुम्हारा कही न कही स्वार्थ जुड़ा हुआ है। धर्मशास्त्रों में धर्मात्मा अपराध करने के बाद गुरु के पास बिना बुलाये जाता है और अदालत में वॉरेंट जारी होता है तब जाता है। जो गलती करके स्वयं प्रायश्चित लेता है तो तपस्वी है, जिसे गलती के बाद सजा दी जाती है, वो अपराधी कहलाता है।</p>
<p><strong>णमोकार मंत्र पढ़ना है, यह मैं जपूंगा</strong></p>
<p>महानुभाव धर्म छोड़ने की बात जब कोई कहे, वो कोई भी हो, भगवान भी कहे कि तू मेरा नाम छोड़ दे तो तू बच जाएगा तो भी भगवान की बात मत मानना। कोई तुम्हे तीन लोक राजा बनाये, बस णमोकार छोड़ दो तो तुम कहना न मुझे भगवान बनना है न राजा, मुझे णमोकार मंत्र पढ़ना है, यह मैं जपूंगा। धर्मकार्य कोई छोड़ने की बात करें, समझ लेना उसकी नियत अच्छी नहीं है, इसलिए कभी भी धर्म को, गुरु को, भगवान को दांव पे मत लगाना। इनके बदले में तुम्हें कुछ भी मिले, चाहे भगवान का पद भी हो तो ठुकरा देना लेकिन देव-शास्त्र-गुरु को नही ठुकराना। सम्यकदृष्टि कहता है कि मैं दरिद्र बनूँ या मैं नरकों में पडूँ ये मंजूर है बस मेरा धर्म, मेरा व्रत नहीं छूटना चाहिए, ऐसी श्रद्धा होती है, तब सम्यकदर्शन होता है।</p>
<p><strong>सिद्धियाँ किसी मंत्र से नहीं</strong></p>
<p>तुमने माँ बाप से जन्म तो लिया है लेकिन तुम माँ बाप को सिद्ध नहीं कर पा रहे हो। कितनी कीमत है माँ बाप की, माँ बाप को तुम कितने में छोड़ देंगे कितने में उनकी उपेक्षा कर देंगे। वे खुद की दौलत में हिस्सा कम दे दे तो भी तुम उनकी उपेक्षा कर देते हो। कितने में छोड़ दोंगे धर्म, बस 2 मिनिट लगते है, थोड़ी सी परिस्थितियाँ आई या प्रतिकूलता हुई, मंदिर जाना बंद। बलिदान की बात कर रहा हूँ, तुम मंदिर जाओगे तो मौत होगी, करो घोषणा है, मुझे मंजूर है। कोई नियम छोटा बड़ा नहीं होता, बस उसके पीछे बलिदान क्या है तुम्हारा। सिद्धियाँ किसी मंत्र से नहीं, मंत्र से की हुई सिद्धियां दुर्गति का कारण है। बचे हुए धन से कभी पाप मत करना लेकिन बचे हुए धन को धर्म में देने का संकल्प भी मत करना।</p>
<p><strong>इसने अपने भोजन करने के पहले दिया है</strong></p>
<p>कभी धर्म के कार्यो में, अच्छे कार्यो में कभी भी ये भाषा प्रयोग मत करना- जैसा समय रहा तो कर लेंगे, बचेगा तो दान दूँगा। तुम्हारे खाने के बाद साधु को दोगे तो वह भीख है और महाराज के खाने के बाद खाओगे तो वो प्रसाद बना दिया। बचा हुआ धन, बची हुई रोटी भिखारी को दिया जाती है। इसी प्रकार धर्म के कार्यो में कभी मत कहना कि समय रहेगा तो आऊँगा। दुनिया मे हजारों लोगों को कोई खिला दे तो उसकी प्रशंसा नहीं की और यहाँ दिगम्बर मुनि को एक दाना, एक ग्रास देकर आ जाये तो गजब प्रशंसा की, कारण क्या है? कोई कारण नहीं, सवाल है इसने अपने भोजन करने के पहले दिया है, इसलिए उसमे अतिशय है।</p>
<p><strong>तुम्हारी सात पीढ़ियाँ सुरक्षित हो जाएगी</strong></p>
<p>कभी कोई बच्ची देखने जाओ, जिसके माँ बाप ने दहेज का धन दान में दे दिया हो, रात्रि में, आलू प्याज नहीं खाती हो, फैशनेबल कपड़े नहीं पहनती हो, भगवान के दर्शन के बिना भोजन नहीं करती हो तो ओ मेरे भक्तों उसे बहू को बहू मानकर मत लाना, देवी मानकर लाना, जाओ तुम्हारी सात पीढ़ियाँ सुरक्षित हो जाएगी।</p>
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