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	<title>initiation  श्रीफल जैन न्यूज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>महावीर जयंती पर दीक्षा और महावीर निर्वाण पर देह-निर्वाण : तप, त्याग और राष्ट्र चेतना के प्रेरक संत आचार्य श्री ज्ञानसागर जी </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 29 Mar 2026 08:51:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[खंदार क्षेत्र को साधना से तीर्थ बनाने वाले तपस्वी आचार्य श्री ज्ञानसागर जी ने विश्व हिंदू परिषद की सर्वधर्म यात्रा में दिल्ली दरवाजा पर ऐतिहासिक देशना देकर हजारों श्रद्धालुओं में राष्ट्रीय गौरव और धर्म चेतना का संचार किया। पढ़िए जयेन्द्र जैन ‘निप्पू चन्देरी’ का विशेष आलेख भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और संतों का योगदान भारत की [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>खंदार क्षेत्र को साधना से तीर्थ बनाने वाले तपस्वी आचार्य श्री ज्ञानसागर जी ने विश्व हिंदू परिषद की सर्वधर्म यात्रा में दिल्ली दरवाजा पर ऐतिहासिक देशना देकर हजारों श्रद्धालुओं में राष्ट्रीय गौरव और धर्म चेतना का संचार किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए जयेन्द्र जैन ‘निप्पू चन्देरी’ का विशेष आलेख</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और संतों का योगदान</strong></p>
<p>भारत की आध्यात्मिक परंपरा सदैव महान संतों और तपस्वियों की तपस्या से आलोकित रही है। जब-जब समाज को दिशा की आवश्यकता हुई, तब-तब संतों ने अपने त्याग, तप और ज्ञान से जनमानस को प्रेरित किया। दिगंबर जैन परंपरा के महान तपस्वी आचार्य श्री ज्ञानसागर जी का जीवन भी ऐसी ही प्रेरणादायक गाथा है, जिसमें धर्म, तपस्या, समाज जागरण और राष्ट्र चेतना का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है।</p>
<p><strong>महावीर जयंती पर दीक्षा &#8211; एक अद्भुत संयोग</strong></p>
<p>उनके जीवन का एक अत्यंत विलक्षण संयोग यह रहा कि उन्होंने भगवान महावीर जयंती के पावन दिवस पर दिगंबर मुनि दीक्षा ग्रहण की। जैन धर्म में यह दिन अत्यंत पवित्र माना जाता है, क्योंकि इसी दिन भगवान महावीर का जन्म हुआ था, जिन्होंने संसार को अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और आत्मसंयम का महान संदेश दिया। ऐसे पावन दिवस पर दीक्षा लेना मानो भगवान महावीर के आदर्शों को अपने जीवन में पूर्ण रूप से आत्मसात करने का संकल्प था।</p>
<p><strong>तप, त्याग और सादगीपूर्ण जीवन</strong></p>
<p>आचार्य ज्ञानसागर जी ने दीक्षा के बाद अपने जीवन को पूर्णतः तप और साधना के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने वैराग्य, संयम और त्याग का ऐसा आदर्श प्रस्तुत किया, जो आज भी साधकों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनका जीवन अत्यंत सादगीपूर्ण था, परंतु उनकी आत्मिक शक्ति और आध्यात्मिक प्रभाव असाधारण था।</p>
<p><strong>खंदार क्षेत्र &#8211; निर्जन वन से पावन तीर्थ तक की यात्रा</strong></p>
<p>उनकी साधना का एक महत्वपूर्ण केंद्र बुंदेलखंड की ऐतिहासिक नगरी चंदेरी के समीप स्थित पावन तीर्थ श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र खंदार जी रहा। आज यह स्थान जैन श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ है, परंतु एक समय ऐसा भी था जब यह क्षेत्र घने जंगलों और निर्जन वातावरण से घिरा हुआ था। चारों ओर ऊँचे वृक्ष, झाड़ियाँ और पथरीली भूमि थी। वहाँ सर्प, बिच्छू, तेंदुआ और अन्य जंगली जानवर विचरण करते थे। मधुमक्खियों के विशाल छत्ते भी भय का कारण बने रहते थे। सामान्य व्यक्ति के लिए वहाँ पहुँचना भी अत्यंत कठिन था, परंतु आचार्य ज्ञानसागर जी ने उसी निर्जन स्थान को अपनी साधना का केंद्र बना लिया।</p>
<p><strong>कठोर साधना और अडिग संकल्प</strong></p>
<p>उन्होंने वहाँ चातुर्मास कर उस क्षेत्र को धर्म साधना का केंद्र बना दिया। वर्षा ऋतु में उस क्षेत्र की स्थिति और भी विकट हो जाती थी। आसपास के डूब क्षेत्र जलमग्न हो जाते थे और पूरा स्थान पानी से भर जाता था। किन्तु गुरुदेव का संकल्प अडिग था। जब चारों ओर जलभराव हो जाता था, तब भी वे एक छोटे से ऊँचे स्थान पर बैठकर ध्यान और तप में लीन रहते थे। वही स्थान उनका तपस्थल बन जाता था और उसी सीमित स्थान पर वे रात्रि विश्राम भी करते थे।</p>
<p><strong>प्रकृति भी हुई तपस्या से प्रभावित</strong></p>
<p>श्रद्धालुओं के अनुसार, जब गुरुदेव ध्यान में लीन होते थे, तब आसपास के जंगलों से तेंदुआ, सर्प और अन्य वन्य जीव भी उनके समीप आकर शांत भाव से बैठ जाते थे। यह दृश्य अत्यंत अद्भुत होता था। ऐसा प्रतीत होता था मानो प्रकृति भी उस महान तपस्वी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त कर रही हो।</p>
<p><strong>धार्मिक केंद्र के रूप में खंदार का विकास</strong></p>
<p>आचार्य ज्ञानसागर जी की तपस्या और प्रेरणा के परिणामस्वरूप धीरे-धीरे उस निर्जन क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियाँ प्रारंभ हुईं। लोगों का भय दूर हुआ और श्रद्धालुओं का आगमन बढ़ने लगा। उनके मार्गदर्शन और आशीर्वाद से वहाँ मंदिरों के निर्माण की आधारशिला रखी गई और धीरे-धीरे वह स्थान एक प्रसिद्ध जैन तीर्थ के रूप में विकसित हो गया। आज खंदार क्षेत्र की प्रतिष्ठा का मुख्य श्रेय आचार्य ज्ञानसागर जी को ही दिया जाता है।</p>
<p><strong>राष्ट्र चेतना और सामाजिक समर्पण</strong></p>
<p>आचार्य ज्ञानसागर जी का व्यक्तित्व केवल आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं था। उनके भीतर समाज और राष्ट्र के प्रति भी गहरा समर्पण था। इसी कारण उनकी वाणी को विभिन्न धार्मिक और सामाजिक मंचों पर अत्यंत सम्मान के साथ सुना जाता था।</p>
<p><strong>दिल्ली दरवाजा पर ऐतिहासिक देशना</strong></p>
<p>विश्व हिंदू परिषद द्वारा आयोजित सर्वधर्म यात्रा के दौरान चंदेरी के ऐतिहासिक दिल्ली दरवाजा पर आचार्य ज्ञानसागर जी महाराज का ऐतिहासिक प्रवचन हुआ। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु, नागरिक और विभिन्न समाजों के लोग उपस्थित थे। उनकी देशना में केवल धार्मिक उपदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रप्रेम, सांस्कृतिक गौरव और नैतिक जीवन का प्रेरक संदेश भी समाहित था। उन्होंने स्पष्ट कहा कि धर्म का उद्देश्य केवल पूजा-अनुष्ठान नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर सत्य, अहिंसा, नैतिकता और राष्ट्रप्रेम की भावना को जागृत करना है।</p>
<p><strong>सर्वधर्म समभाव का अद्भुत उदाहरण</strong></p>
<p>चंदेरी नगर में उनके अनेक भक्त और शिष्य थे। प्रमुख श्रद्धालुओं में विनोद कठरया, कु. पद्म सिंह, कमलेश, हाथीशाह, मुनालाल और सुमन आदि के नाम उल्लेखनीय हैं। जैनेतर समाज से भी मजीद खान पठान और बाबू मुजाबर जैसे श्रद्धालुओं ने गुरुदेव का आशीर्वाद प्राप्त किया। यह दर्शाता है कि उनका व्यक्तित्व किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं था। उनकी करुणा और समत्व से सभी धर्मों के लोग प्रभावित होते थे।</p>
<p><strong>महावीर निर्वाण दिवस पर देह-निर्वाण</strong></p>
<p>आचार्य ज्ञानसागर जी के जीवन का एक और अद्भुत संयोग यह रहा कि जिस पावन पर्व महावीर जयंती पर उन्होंने दीक्षा ग्रहण की थी, उसी परंपरा से जुड़े महावीर निर्वाण दिवस पर उन्होंने देह-निर्वाण प्राप्त किया। यह संयोग उनके जीवन को और भी अधिक आध्यात्मिक और प्रेरणादायक बना देता है।</p>
<p><strong>प्रेरणादायक जीवन संदेश</strong></p>
<p>उनका जीवन यह संदेश देता है कि तप, संयम और आत्मबल से मनुष्य न केवल आत्मकल्याण कर सकता है, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकता है। आज जब श्रद्धालु खंदार क्षेत्र के दर्शन करते हैं, तो उन्हें यह स्मरण अवश्य करना चाहिए कि इस पावन तीर्थ के पीछे एक महान तपस्वी की कठिन साधना, त्याग और आध्यात्मिक शक्ति का योगदान है। आचार्य ज्ञानसागर जी का जीवन यह सिद्ध करता है कि यदि संकल्प दृढ़ हो और आत्मबल प्रबल हो, तो निर्जन वन भी धर्म और आस्था के महान केंद्र बन सकते हैं।</p>
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		<title>दीक्षार्थी बहिनों की निकली भव्य शोभायात्रा : नसियांजी जैन मंदिर में हुई गोद भराई </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 28 May 2023 11:59:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[उपरोचियां जैसवाल जैन समाज मुरैना की दो विदुषी महिलाएं ब्रह्मचारिणी बहिन मीना जैन एवं रामकली जैन गृह त्यागकर जैनेश्वरी आर्यिका दीक्षा ग्रहण करने जा रही हैं। दीक्षा से पूर्व दीक्षार्थियों के मेहंदी, हल्दी, विनोली यात्रा एवं गोद भराई के कार्यक्रम हुए। पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट&#8230; मुरैना। दीक्षार्थी बहिनों ब्रह्मचारिणी बहिन मीना जैन एवं रामकली [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>उपरोचियां जैसवाल जैन समाज मुरैना की दो विदुषी महिलाएं ब्रह्मचारिणी बहिन मीना जैन एवं रामकली जैन गृह त्यागकर जैनेश्वरी आर्यिका दीक्षा ग्रहण करने जा रही हैं। दीक्षा से पूर्व दीक्षार्थियों के मेहंदी, हल्दी, विनोली यात्रा एवं गोद भराई के कार्यक्रम हुए। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> दीक्षार्थी बहिनों ब्रह्मचारिणी बहिन मीना जैन एवं रामकली जैन की विनोली यात्रा एवं गोद भराई का कार्यक्रम हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। नगर के समाजसेवी अनिल जैन संजू (अझेड़ा वाले) ने बताया कि उपरोचियां जैसवाल जैन समाज मुरैना की दो विदुषी महिलाएं ब्रह्मचारिणी बहिन मीना जैन एवं रामकली जैन गृह त्यागकर जैनेश्वरी आर्यिका दीक्षा ग्रहण करने जा रही हैं। दीक्षा से पूर्व दीक्षार्थियों के मेहंदी, हल्दी, विनोली यात्रा एवं गोद भराई के कार्यक्रम होते हैं।</p>
<p><strong>शोभायात्रा निकाली        </strong></p>
<p>श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन पंचायती बड़ा मन्दिर कमेटी, मुरैना के अध्यक्ष एवं नगर के उद्योगपति महेशचंद जैन बंगाली (अझेड़ा वाले) के निज निवास से दोनों दीक्षार्थी बहिनों की भव्य एवं विशाल विनोली यात्रा प्रारंभ हुई। दोनों दीक्षार्थी महिलाओं को नवीन वस्त्र, मुकुटहार से सुज्जितकर घोड़ाबग्घी में सवार कर नगर भ्रमण कराया गया। शोभायात्रा पुल तिराहा, अम्बाह रोड, जैन बगीची सहित प्रमुख मार्गों से भ्रमण करती हुई श्री महावीर दिगम्बर जैन नसियां जी मन्दिर पहुंची। सधर्मी बन्धुओं ने अपने-अपने दरवाजे पर रंगोली बनाकर एवं पंचमेवा भेंटकर दीक्षार्थी बहिनों का स्वागत- सम्मान कर उनके पुण्य की अनुमोदना की। शोभायात्रा में भजनों की मधुर धुन पर महिलाएं एवं पुरुष भक्ति नृत्य कर रहे थे। बालिकाएं एवं युवा साथी हाथों में पचरंगा ध्वज लेकर श्री जिनेन्द्र प्रभु की जय-जयकार करते हुए चल रहे थे।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-45062" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/IMG-20230528-WA0013.jpg" alt="" width="1280" height="936" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/IMG-20230528-WA0013.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/IMG-20230528-WA0013-300x219.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/IMG-20230528-WA0013-1024x749.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/IMG-20230528-WA0013-768x562.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/IMG-20230528-WA0013-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/IMG-20230528-WA0013-990x724.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<p><strong> पुण्य की अनुमोदना की</strong></p>
<p>विनोली यात्रा के श्री नसियां जी मन्दिर में पहुंचने पर सर्वप्रथम विनोली यात्रा के पुण्यार्जक परिवार महेशचंद बंगाली, विजयकुमार, राकेशकुमार, अनिलकुमार संजू, अंशुल जैन सहित समस्त पाड़ियां परिवार (अझेड़ा वाले) ने पंच मेवा से दीक्षार्थी बहिनों की गोद भरकर उनके पुण्य की अनुमोदना की। तत्पश्चात अन्य उपस्थित त्यागिव्रतियों, सधर्मी बन्धुओं, माता-बहिनों ने गोद भरी। समारोह में अम्बाह नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष जिनेश जैन अम्बाह, सुनील जैन बन्धु आगरा, राजू जैन ग्वालियर, नगर के उद्योगपति मनोज अग्रवाल, अतुल महेश्वरी, किस्सू अग्रवाल, अजय बंसल सहित सैकड़ों की संख्या में पुरुष एवं महिलाएं उपस्थित थे। समारोह में उपस्थित सभी महानुभावों के वात्सल्य भोज की व्यवस्था विनोली यात्रा के पुण्यार्जक अझेड़ा परिवार की ओर से की गई थी।</p>
<p><strong>प्रदान की जाएगी क्षुल्लिका दीक्षा</strong></p>
<p>दोनों दीक्षार्थी बहिनों को परम पूज्य अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी आचार्य श्री वसुनन्दी जी महाराज की परम प्रभावक शिष्य गणिनी आर्यिका श्री सौम्यनन्दिनी माताजी द्वारा ग्राम हथिनी (दमोह) मध्यप्रदेश में 5 जून, 2023 को क्षुल्लिका दीक्षा प्रदान की जाएगी।</p>
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