<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>heritage श्रीफल जैन न्यूज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/heritage-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AB%E0%A4%B2-%E0%A4%9C%E0%A5%88%E0%A4%A8-%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%9C/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Tue, 18 Apr 2023 17:28:39 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>heritage श्रीफल जैन न्यूज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>विश्व विरासत दिवस विशेष : शांतिनाथ अतिशय क्षेत्र सिहोनिया को संरक्षण की जरूरत  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/shantinath_atishay_kshetra_sihoniya_needs_protection/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/shantinath_atishay_kshetra_sihoniya_needs_protection/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 18 Apr 2023 17:28:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[conservation]]></category>
		<category><![CDATA[heritage श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[jain dharm]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain samaj]]></category>
		<category><![CDATA[jain temple]]></category>
		<category><![CDATA[Jainism]]></category>
		<category><![CDATA[Morena Ambah]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Sihoniyaji]]></category>
		<category><![CDATA[world heritage day]]></category>
		<category><![CDATA[जैन धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मंदिर]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[धरोहर]]></category>
		<category><![CDATA[मुरैना अंबाह]]></category>
		<category><![CDATA[विश्व विरासत दिवस]]></category>
		<category><![CDATA[संरक्षण]]></category>
		<category><![CDATA[सिहोनियाजी]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=42485</guid>

					<description><![CDATA[आज भी बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं जहां बहुत सी ऐतिहासिक धरोहर और विरासत मौजूद हैं। जहां सरकार बिल्कुल ध्यान नहीं दे पा रही है। मुरैना जिले के अंबाह तहसील के अंतर्गत सिहोनिया गांव में 11वीं शताब्दी की बनी भगवान शांतिनाथजी (16 फीट), भगवान अरहनाथ जी (10 फीट), भगवान कुंथुनाथजी (10 फीट) की खड्गासन पत्थर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आज भी बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं जहां बहुत सी ऐतिहासिक धरोहर और विरासत मौजूद हैं। जहां सरकार बिल्कुल ध्यान नहीं दे पा रही है। मुरैना जिले के अंबाह तहसील के अंतर्गत सिहोनिया गांव में 11वीं शताब्दी की बनी भगवान शांतिनाथजी (16 फीट), भगवान अरहनाथ जी (10 फीट), भगवान कुंथुनाथजी (10 फीट) की खड्गासन पत्थर की मूर्तियां यहां स्थापित हैं। इनके भी संरक्षण की आवश्यकता है। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए मनोज नायक की यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अम्बाह।</strong> आज भी बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं जहां बहुत से ऐतिहासिक धरोहर और विरासत मौजूद हैं। जहां सरकार बिल्कुल ध्यान नहीं दे पा रही है। जिस पर सरकार को ध्यान देने की जरूरत है। सौरभ जैन वरेह वाले अंबाह वाले के मुताबिक मुरैना जिले के अंबाह तहसील के अंतर्गत सिहोनिया गांव में 11वीं शताब्दी की बनी भगवान शांतिनाथजी (16 फीट), भगवान अरहनाथ जी (10 फीट), भगवान कुंथुनाथजी (10 फीट) की खड्गासन पत्थर की मूर्तियां यहां स्थापित हैं। ये मूर्तियां ब्रह्मचारी गुमानी लाल के स्वप्न में आती थीं। तब उन्होंने यहां खुदाई कराई और अतिशय कारी प्रतिमा प्राप्त हुई। आज वर्तमान में भी गांवों में खुदाई के दौरान मूर्तियां प्राप्त होती रहती हैं। मंदिर में ऐसी मूर्तियों के लिए विशेष संग्रहालय है। हाल ही में पता चला कि चतुर्थ काल में 14 मंदिर थे। इसके अलावा खजुराहो पैटर्न पर बने शिव हनुमान दुर्गा के ककनमठ मंदिर भी हैं। 9 जुलाई 2006 को खुदाई के दौरान शिव मंदिर में जैन मूर्ति मिली थी। वार्षिक मेला क्वार वादी दोज और जेठ वादी 14 निर्वाण दिवस पर लगता है। समवशरण और चौबीसी का भव्य मंदिर है। जबकि मानस्तंभ का निर्माण कार्य प्रगति पर है। नया कमल के आकार का मंदिर बन के तैयार हो चुका है, जो जल्द ही पंचकल्याणक प्रतिष्ठा होने के बाद दर्शन के लिए खोल दिया जाएगा। मंदिरों की संख्या: 05 है। बड़ी धर्मशाला, भोजनशाला है। जहां पर पूजा विधान करने और रुकने की उचित व्यवस्था है।</p>
<p><strong>इसलिए मनाया जाता है विश्व विरासत दिवस</strong></p>
<p>विश्व विरासत दिवस को मनाने का उद्देश्य ग्रह पर सांस्कृतिक विरासत और विविधता के बारे में लोगों के बीच जागरूकता फैलाना है। दुनिया भर में कई ऐसे ऐतिहासिक धरोहरें हैं, जो सालों से अपने अंदर न जाने कितने किस्से और कहानियों को संजोए हुए हैं। इन स्मारकों और स्थलों को देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। ऐसी विरासतों को संभाले रखने के लिए ही विश्व विरासत दिवस मनाया जाता है। हर साल 18 अप्रैल को आयोजित होने वाला यह एक अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षण है। दुनिया भर में इस दिन को स्मारकों और विरासत स्थलों की यात्रा करके, सम्मेलनों में शामिल होकर, राउंड टेबल और समाचार पत्रों के लेखों समेत कई अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है। यह दिन पहली बार 1983 में संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) द्वारा मनाया गया था। यूनेस्को के 22वें आम सम्मेलन के दौरान इसे विश्व आयोजन के रूप में मान्यता मिली थी। भारत में कुल 3691 ऐसे स्मारक और स्थल हैं, जिसमें से 40 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों के रूप में नामित हैं। इसमें ताजमहल, अजंता की गुफाएं और एलोरा की गुफाएं शामिल हैं। विश्व धरोहर स्थलों में असम में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान जैसे प्राकृतिक स्थल भी शामिल हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/shantinath_atishay_kshetra_sihoniya_needs_protection/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>विश्व विरासत दिवस विशेष : सिद्धाचल पर्वत पर प्राचीन जैन प्रतिमा और मंदिर को संरक्षित करने की जरूरत </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/need_to_preserve_ancient_jain_statue_and_temple_on_siddhachal_mountain/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/need_to_preserve_ancient_jain_statue_and_temple_on_siddhachal_mountain/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 18 Apr 2023 11:11:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Ambah]]></category>
		<category><![CDATA[conservation]]></category>
		<category><![CDATA[Gwalior]]></category>
		<category><![CDATA[heritage श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[jain dharm]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain samaj]]></category>
		<category><![CDATA[jain temple]]></category>
		<category><![CDATA[Jainism]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[siddhachal mountain]]></category>
		<category><![CDATA[world heritage day]]></category>
		<category><![CDATA[अंबाह]]></category>
		<category><![CDATA[ग्वालियर]]></category>
		<category><![CDATA[जैन धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मंदिर]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[धरोहर]]></category>
		<category><![CDATA[विश्व विरासत दिवस]]></category>
		<category><![CDATA[संरक्षण]]></category>
		<category><![CDATA[सिद्धाचल पर्वत]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=42448</guid>

					<description><![CDATA[आज भी बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं जहां बहुत सी ऐतिहासिक धरोहर और विरासत मौजूद हैं। जहां सरकार बिल्कुल ध्यान नहीं दे पा रही है। ग्वालियर के कोटेश्वर रोड किला पर सिद्धाचल पर्वत पर प्राचीन अनेक जैन प्रतिमा और मंदिर हैं। इसके भी संरक्षण की आवश्यकता है। पढ़िए ये विशेष रिपोर्ट&#8230; ग्वालियर। आज भी बहुत [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आज भी बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं जहां बहुत सी ऐतिहासिक धरोहर और विरासत मौजूद हैं। जहां सरकार बिल्कुल ध्यान नहीं दे पा रही है। ग्वालियर के कोटेश्वर रोड किला पर सिद्धाचल पर्वत पर प्राचीन अनेक जैन प्रतिमा और मंदिर हैं। इसके भी संरक्षण की आवश्यकता है। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए ये विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ग्वालियर।</strong> आज भी बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं जहां बहुत सी ऐतिहासिक धरोहर और विरासत मौजूद हैं। जहां सरकार बिल्कुल ध्यान नहीं दे पा रही है। जिस पर सरकार को ध्यान देने की जरूरत है। सौरभ जैन वरेह वाले अंबाह ने बताया कि ग्वालियर के कोटेश्वर रोड किला पर सिद्धाचल पर्वत पर प्राचीन अनेक जैन प्रतिमा और मंदिर हैं। जिस मे सिद्धाचल गुफाओं और गोपाचल रॉक कट स्मारकों (ग्वालियर) में सैकड़ों जैन मूर्तियों को इस्लामिक आक्रमणरियों ने नष्ट कर दिया।</p>
<p>अधिकांश जैन मूर्तियां 15 वी शताब्दी के दौरान की हैं, हालांकि कुछ सातवीं शताब्दी की भी हैं। 15 वी शताब्दी के दौरान नक्काशी की गई मूर्तियां तोमर राजा डूंगर सिंह और उनके बेटे कीर्ति सिंह के शासनकाल के दौरान बनाई गई थी। गोपाचल रॉक कट स्मारकों में जैन तीर्थंकरों की लगभग 1500 मूर्तियां हैं और सिद्धाचल गुफाओं में लगभग 31 जैन मंदिर हैं। गोपाचल रॉक कट स्मारकों को सिद्धाचल गुफाओं की तुलना में पहले दिनांकित किया गया है।</p>
<p>स्मारकों के पास पाए गए शिलालेख उन्हें 1440 से 1453 ईस्वी तक तोमर राजाओं को श्रेय देते हैं। 1527 के आसपास बाबर (मुगल सम्राट) ने उनके विनाश का आदेश दिया और इन दोनों स्मारकों को हटा दिया गया। विश्व की सबसे बड़ी अद्वितीय प्रतिमा 21 वे तीर्थंकर भगवान नमिनाथ की अतिशयकारी पद्मासन अवस्था में गुफा नंबर 2 में है। जिसकी अवगाहना लगभग 6 मीटर है।</p>
<p>सिद्धाचल पर्वत ग्वालियर रेलवे स्टेशन से लगभग 5 किलोमीटर दूर और गोपाचल पर्वत (भगवान पार्श्वनाथ की 42 फुट ऊंची प्रतिमा, एक पत्थर की बावडी) फूलबाग से लगभग 3 किलोमीटर दूर है। शिंदे की छावनी होते हुए उरवाई गेट से आगे ढोडापुर गेट की ओर कोटेश्वर रोड पर कोटेश्वर महादेव मंदिर के सामने से रास्ता हैं। उरवाई गेट पर भी त्रिशलागिरी पर्वत है। जिस पर माता त्रिशला और भगवान महावीर के पांच कल्याणक को दर्शाती प्रतिमाएं सहित अनेक तीर्थंकर प्रतिमाएं विराजमान हैं।</p>
<p><strong>इसलिए मनाया जाता है विश्व विरासत दिवस</strong></p>
<p>विश्व विरासत दिवस को मनाने का उद्देश्य ग्रह पर सांस्कृतिक विरासत और विविधता के बारे में लोगों के बीच जागरूकता फैलाना है। दुनिया भर में कई ऐसे ऐतिहासिक धरोहरें हैं, जो सालों से अपने अंदर न जाने कितने किस्से और कहानियों को संजोए हुए हैं। इन स्मारकों और स्थलों को देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। ऐसी विरासतों को संभाले रखने के लिए ही विश्व विरासत दिवस मनाया जाता है। हर साल 18 अप्रैल को आयोजित होने वाला यह एक अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षण है।</p>
<p>दुनिया भर में इस दिन को स्मारकों और विरासत स्थलों की यात्रा करके, सम्मेलनों में शामिल होकर, राउंड टेबल और समाचार पत्रों के लेखों समेत कई अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है। यह दिन पहली बार 1983 में संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) द्वारा मनाया गया था। यूनेस्को के 22वें आम सम्मेलन के दौरान इसे विश्व आयोजन के रूप में मान्यता मिली थी।</p>
<p>भारत में कुल 3691 ऐसे स्मारक और स्थल हैं, जिसमें से 40 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों के रूप में नामित हैं। इसमें ताजमहल, अजंता की गुफाएं और एलोरा की गुफाएं शामिल हैं। विश्व धरोहर स्थलों में असम में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान जैसे प्राकृतिक स्थल भी शामिल हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/need_to_preserve_ancient_jain_statue_and_temple_on_siddhachal_mountain/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
