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	<title>Haridwar &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>टीएमयू में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्प्यूटिंग में वर्चुअली इंटरनेशनल सेमिनार : टैगिंग, सेंसरिंग, सिंकिंग और थिंकिंग सरीखे आधुनिक कम्प्यूटिंग के मूल सिद्धांतों पर प्रकाश डाला  </title>
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		<pubDate>Tue, 23 Dec 2025 10:21:47 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार के रजिस्ट्रार प्रो. (डॉ.) विपुल शर्मा ने आधुनिक एंटीना तकनीक और वायरलेस संचार पर बोलते हुए वायरलेस ट्रांसमिशन के सिद्धांत, एंटीना संरचनाओं वायर, डाइपोल, लूप, मोनोपोल और उनके अनुप्रयोगों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने मेटामटेरियल्स, नेगेटिव रीफ्रेक्टिव इंडेक्स, स्प्लिट-रिंग रेज़ोनेटर और सियरपिंस्की गैस्केट जैसी फ्रैक्टल ज्योमेट्री जैसे उन्नत विषयों का [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार के रजिस्ट्रार प्रो. (डॉ.) विपुल शर्मा ने आधुनिक एंटीना तकनीक और वायरलेस संचार पर बोलते हुए वायरलेस ट्रांसमिशन के सिद्धांत, एंटीना संरचनाओं वायर, डाइपोल, लूप, मोनोपोल और उनके अनुप्रयोगों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने मेटामटेरियल्स, नेगेटिव रीफ्रेक्टिव इंडेक्स, स्प्लिट-रिंग रेज़ोनेटर और सियरपिंस्की गैस्केट जैसी फ्रैक्टल ज्योमेट्री जैसे उन्नत विषयों का परिचय कराया। <span style="color: #ff0000">मुरादाबाद से पढ़िए, प्रो.श्यामसुंदर भाटिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरादाबाद।</strong> गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार के रजिस्ट्रार प्रो. (डॉ.) विपुल शर्मा ने आधुनिक एंटीना तकनीक और वायरलेस संचार पर बोलते हुए वायरलेस ट्रांसमिशन के सिद्धांत, एंटीना संरचनाओं वायर, डाइपोल, लूप, मोनोपोल और उनके अनुप्रयोगों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने मेटामटेरियल्स, नेगेटिव रीफ्रेक्टिव इंडेक्स, स्प्लिट-रिंग रेज़ोनेटर और सियरपिंस्की गैस्केट जैसी फ्रैक्टल ज्योमेट्री जैसे उन्नत विषयों का परिचय कराते हुए डेटा रेट पर स्प्रेड और इम्पल्स के प्रभाव एवं हाई-फ्रीक्वेंसी स्विचिंग में माइक्रोवेव डायोड की भूमिका भी समझाई। प्रो. विपुल तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद में कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार अभियांत्रिकी विभाग की ओर से आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्प्यूटिंग में प्रगति पर ऑनलाइन आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे। फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग के डीन प्रो. आरके द्विवेदी ने उद्घाटन भाषण में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एआई तीव्र गति से सभी इंजीनियरिंग क्षेत्र में अपने पैर जमा रही है। उन्होंने टैगिंग, सेंसरिंग, सिंकिंग और थिंकिंग सरीखे आधुनिक कम्प्यूटिंग के मूल सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए छात्रों को उभरती तकनीकों से जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया।</p>
<p>एचसीएल टेक्नोलॉजी, अमेरिका के सीनियर एआई आर्किटेक्ट सच्चिदानंद सेमवाल ने शैक्षणिक प्रयोगशालाओं में एआई की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि एआई प्रयोगशालाओं में कार्यों को स्वचालित करके, शुद्धता बढ़ाकर और छात्रों की रचनात्मक क्षमता को उभारकर प्रयोगशालाओं को बदल रही है। उन्होंने एआई सुसज्जय प्रयोगशालाओं, अद्यतन पाठ्यक्रम और बहुविषयक अधिगम की आवश्यकता पर जोर दिया। छात्रों के एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने स्पष्ट किया कि जीपीटी सरीखे उपकरण जिम्मेदारी से उपयोग किए जाएं तो अत्यंत लाभप्रद सिद्ध होते हैं। जीसीईटी, ग्रेटर नोएडा के सीनियर प्रोफेसर डॉ. अरुण राणा ने इंटरनेट ऑफ थिंग्स आईओटी विकास, संरचना एवं शोध उपकरण पर अपने अनुभव साझा किए। डॉ. राणा ने आईओटी के विकास, डिवाइस नोड्स, सेंसर, गेटवे, हार्डवेयर इंटरफेस और लोकल प्रोसेसिंग यूनिट्स पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने आईओटी की तीन-स्तरीय संरचना परसेप्शन लेयर, नेटवर्क लेयर और एप्लीकेशन लेयर को स्पष्ट रूप से समझाया। एलजी इलेक्टॉनिक्स, यूरोप के प्रोग्राम मैनेजमेंट-इंफोटेनमेंट अभिनव अग्रवाल ने बताया कि सॉफ्टवेयर डिफाइंड व्हीकल्स एसडीवीएस सॉफ्टवेयर आधुनिक परिवहन प्रणाली में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने पारंपरिक हार्डवेयर निर्भर वाहनों की तुलना निरंतर सॉफ्टवेयर अपडेट्स, बेहतर प्रदर्शन, अधिक सुरक्षा और उच्च कनेक्टिविटी प्रदान करने वाले एसडीवीएस से की। गुस्टो आईएनसी, अमेरिका के सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर विकास विश्नोई ने स्मॉल लैंग्वेज मॉडल्स एसएलएमएस और एज-एआई क्रांति पर बोलते हुए कम कंप्यूटिंग संसाधनों वाले उपकरणों के लिए डिज़ाइन किए गए एसएलएमएस के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला। आईआईटी बीएचयू के डॉ. श्याम कमल सिंह ने आधुनिक रोबोटिक प्रणालियों के मूल सिद्धांत पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने गणितीय प्रतिकरण, पैरामीटर पहचान, अवलोकन, नियंत्रण, स्थिरता विश्लेषण, डिजाइन और अनुकूलन सरीखे प्रमुख घटकों पर आधारित आधुनिक रोबोटिक्स की आधारभूत अवधारणाओं को समझाया। इंसिंकरो ऑस्ट्रेलिया प्रालि ऑस्ट्रेलिया के सॉल्यूशंस आर्किटेक्ट वर्घीस कोचुम्मेन ने आईओटी युग में प्रोजेक्ट नियंत्रण पर बोलते हुए कहा कि आईओटी रीयल-टाइम डेटा संग्रह, उपकरण उपयोग, सामग्री प्रवाह, कार्यबल गतिविधि और पर्यावरणीय स्थितियों की सतत निगरानी सक्षम करके प्रोजेक्ट प्रबंधन में क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है।</p>
<p>सेमिनार में ईसीई विभाग की एचओडी एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अलका वर्मा, राहुल विश्नोई, डॉ. विभोर कुमार भारद्वाज, प्रशांत कुमार, नीरज कौशिक के संग-संग छात्र समन्वयक- नवज्योत, अर्नव जैन, अभिषेक जैन, सक्षम जैन, विनिता और स्टाफ सदस्य अनुभव मेहरोत्रा, पुनीत एवं चंद्रपाल का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सेमिनार में 150 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया और सभी को ई-सर्टिफिकेट्स प्रदान किए गए। संचालन बीटेक ईसी की नवज्योत ने किया।</p>
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		<title>दिल्ली में इतिहास में पहली बार बही धर्म प्रभावना: आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी का हुआ मंगल प्रवेश </title>
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		<pubDate>Mon, 16 Jun 2025 17:17:32 +0000</pubDate>
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<p><strong>आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी ससंघ, उपाध्याय मुनि श्री पियूष सागरजी महाराज के संघ कुलचाराम तेलंगाना से नागपुर, कुंडलपुर, छतरपुर, सोनागिरजी, कानपुर, मुकतेश्वर, बद्रीनाथ, ऋषिकेश, हरिद्वार होते हुए लगभग 2800 किमी की अहिंसा संस्कार पदयात्रा पैदल पूरी कर राजधानी दिल्ली मे प्रवेश किया है। दिल्ली के इतिहास में प्रथम बार धर्म प्रभावना मंदिर में पैर रखने की जगह नहीं बची। पूरा मंदिर खचाखच भरकर विधान और अभिषेक में हिस्सा लिया और पूरा रोहिणी केसरिया मय हो गया। <span style="color: #ff0000">नईदिल्ली से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नई दिल्ली/ कोडरमा।</strong> आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी ससंघ, उपाध्याय मुनि श्री पियूष सागरजी महाराज के संघ कुलचाराम तेलंगाना से नागपुर, कुंडलपुर, छतरपुर, सोनागिरजी, कानपुर, मुकतेश्वर, बद्रीनाथ, ऋषिकेश, हरिद्वार होते हुए लगभग 2800 किमी की अहिंसा संस्कार पदयात्रा पैदल पूरी कर राजधानी दिल्ली मे प्रवेश किया है। आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज एवं उपाध्याय श्री पीयूष सागर जी महाराज ससंघ का सुबह का पदविहार श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, सेक्टर 16 अ, रोहिणी, दिल्ली से श्री 1008 महावीर दिगम्बर जैन मंदिर, जी3/53, पाकेट 1, सेक्टर 11 रोहिणी, दिल्ली से मंगल विहार करते हुए रोहिणी प्रीतमपुरा पहुंचे। जहां दिल्ली के इतिहास में प्रथम बार धर्म प्रभावना मंदिर में पैर रखने की जगह नहीं बची। पूरा मंदिर खचाखच भरकर विधान और अभिषेक में हिस्सा लिया और पूरा रोहिणी केसरिया मय हो गया।</p>
<p>इस अवसर पर उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री प्रसन्न सागर महाराज ने कहा की दिल्ली की भक्ति अपरंपार है। सभी लोग प्रातः 4 बजे से पहुंचकर जाप और दीप अर्चना करते हुए अभिषेकए पूजा-पाठ गुरु भक्ति में तत्पर लगे हुए हैं। इस भीषम गर्मी में भी भक्त एसी छोड़ गुरु सेवा में लगे हैं। सभी को बहुत बहुत आशीष देते हुए कहा कि रोज खुश और प्रसन्न रहना चाहते हो तो सुबह उठकर अपना चेहरा दर्पण में देखो और खुद को देखकर मुस्कुराओ।</p>
<p><strong>जब सोकर उठो तो माता पिता, गुरु और प्रभु को धन्यवाद दो</strong></p>
<p>आप अपनी सुबह की शुरुआत इस छोटे से कार्य से कर सकते हैं। जब सोकर उठो तो माता पिता, गुरु और प्रभु को धन्यवाद दो। फिर अपने आप से कहो कि मैं सौभाग्य शाली हूँ जो मुझे मनुष्य जीवन मिला, अच्छे माता पिता, धर्म और गुरु की शरण मिली। अन्यथा मैं जन्मों जन्मों से भटक रहा था। जन्म तो मिल रहा था लेकिन ना दिशा थी, ना बोध। मनुष्य जीवन में दिशा भी है, बोध भी है और अच्छा बुरा करने का विवेक भी है। इसलिए मनुष्य जीवन में कोई भी कार्य करो, तो कार्य करने के पहले उसके अन्जाम को देख लो फिर वह कार्य करो। जैसे &#8212;</p>
<p>गाली गलौच का अन्जाम क्या होगा -?</p>
<p>मिर्ची ज्यादा खाने से अन्जाम क्या होगा -?</p>
<p>गलत करने का अन्जाम क्या होगा -?</p>
<p>10 मिनट विचारों से मुक्त होकर अपने आप को देखो, खुद से प्रेम करो और खुद की आवाज सुनो.. फिर खुद से कहो &#8212; अब ढोंग की नहीं, ढंग की जिन्दगी जीना है। दूसरों को नहीं, अब खुद को संभालना है।</p>
<p>दुनिया को सम्भालते और समझाते समझाते दांत ढ़ीले हो गए आंखें मिचमिची हो गई, कान बहरे हो गए। हाथ पैर लड़खड़ा गए लेकिन परिवर्तन नहीं आ पाया। अब स्वयं से शुरूआत करो दिन और परिवर्तन की।</p>
<p><strong>वो ऐसा है, वो वैसा है ये सब छोड़ो, ये देखो मैं कैसा हूँ&#8230;!!!</strong></p>
<p>प्रवचन के बाद गुरुदेव प्रतिदिन की भांति इस विषम गर्मी में धूप में बैठकर सामयिक और जाप कर रहे हैं। लोग गुरु की इस तपस्या को देख कर नमन कर रहे है। इस कार्यक्रम में समाज के साथ कई राजनीतिक हस्तियां भी दर्शन को पधार रही हैं। संघपति दिलीप जैन हुम्मड, हैदराबाद के मनोज जैन, कोलकोत्ता से विवेक जैन गंगवाल, कोडरमा से मनीष जैन सेठी, कोडरमा मीडिया प्रभारी राज कुमार जैन अजमेरा ने गुरुदेव के चरणों मे अपनी नमोस्तु अर्पित किया।</p>
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		<title>हरिद्वार में आध्यात्मिक समागम : पतंजलि विश्वविद्यालय में आचार्य प्रसन्नसागर जी का भव्य स्वागत </title>
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		<pubDate>Sat, 07 Jun 2025 15:12:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[तीर्थराज सम्मेदशिखर जी की पुण्यभूमि में ऐतिहासिक चातुर्मास और तप की चरम साधना पूर्ण करने के बाद, जैन धर्म के प्रखर चिंतक और दिगंबर परंपरा के तेजस्वी संत आचार्य श्री प्रसन्नसागर जी महाराज ने हजारों किलोमीटर की पदयात्रा पूर्ण कर बद्रीनाथ में भगवान आदिनाथ की निर्वाण स्थली का दर्शन किया। यात्रा के अगले चरण में [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>तीर्थराज सम्मेदशिखर जी की पुण्यभूमि में ऐतिहासिक चातुर्मास और तप की चरम साधना पूर्ण करने के बाद, जैन धर्म के प्रखर चिंतक और दिगंबर परंपरा के तेजस्वी संत आचार्य श्री प्रसन्नसागर जी महाराज ने हजारों किलोमीटर की पदयात्रा पूर्ण कर बद्रीनाथ में भगवान आदिनाथ की निर्वाण स्थली का दर्शन किया। यात्रा के अगले चरण में उनका आगमन हरिद्वार स्थित पतंजलि विश्वविद्यालय में हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजकुमार जैन अजमेरा की विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>हरिद्वार/कोडरमा (झारखंड)।</strong> तीर्थराज सम्मेदशिखर जी की पुण्यभूमि में ऐतिहासिक चातुर्मास और तप की चरम साधना पूर्ण करने के बाद, जैन धर्म के प्रखर चिंतक और दिगंबर परंपरा के तेजस्वी संत आचार्य श्री प्रसन्नसागर जी महाराज ने झारखंड, महाराष्ट्र, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश होते हुए हजारों किलोमीटर की पदयात्रा पूर्ण कर बद्रीनाथ में भगवान आदिनाथ की निर्वाण स्थली का दर्शन किया।</p>
<p>यात्रा के अगले चरण में उनका आगमन हरिद्वार स्थित पतंजलि विश्वविद्यालय में हुआ, जहां स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने उनका अत्यंत श्रद्धा और सम्मान के साथ स्वागत किया। यह अवसर आध्यात्मिक, दार्शनिक और धार्मिक संवाद का एक अनुपम दृश्य बन गया।</p>
<p><strong>गर्मी और कठिनाई के बावजूद तपस्वी संन्यासी का भारत भ्रम</strong></p>
<p>स्वामी रामदेव जी ने इस अवसर पर कहा, &#8220;यह हमारे पतंजलि परिवार का सौभाग्य है कि गुरुदेव के चरण यहाँ पड़े हैं। जैन संत इस भीषण गर्मी में भी नंगे पैर पूरे भारत में पदयात्रा करते हैं। यह त्याग और तपस्या की पराकाष्ठा है।&#8221;</p>
<p><strong>जैन मुनि ने योग-आयुर्वेद की प्रशंसा की</strong></p>
<p>इस अवसर पर आचार्य प्रसन्नसागर जी महाराज ने कहा, &#8220;स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण मानवता, स्वास्थ्य, सामाजिक समृद्धि और वैश्विक सद्भाव के लिए निस्वार्थ भाव से कार्य कर रहे हैं। उन्होंने ऋषियों की परंपरा में प्रकृति, संस्कृति और विकृति का समन्वय समझाया है।&#8221;</p>
<p><strong>उन्होंने आगे कहा,</strong></p>
<p>&#8220;यदि जीवन प्रकृति और संस्कृति के अनुरूप नहीं है तो विकृति में जीना ही दरिद्रता है।&#8221;</p>
<p><strong>&#8220;जैन धर्म, सनातन का शुद्धतम रूप&#8221; — स्वामी रामदेव</strong></p>
<p>स्वागत समारोह में बोलते हुए स्वामी रामदेव ने कहा, &#8220;आचार्य प्रसन्नसागर जी का आगमन केवल एक जैन संत का आगमन नहीं, बल्कि भारतीय दर्शन की शुद्धतम चेतना का प्रकटीकरण है। जैन धर्म तप, संयम, अहिंसा और आत्म-जागरूकता का मार्ग है। आचार्यश्री का जीवन विनम्रता, धैर्य और संयम की मिसाल है। दिगंबर बनना केवल वस्त्र त्याग नहीं, बल्कि समस्त भ्रमों का त्याग है।&#8221;</p>
<p><strong>संस्कृत में गूंजे श्लोक, भावविभोर हुआ मंच</strong></p>
<p>पंतजलि विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण ने आचार्यश्री के प्रति आभार प्रकट करते हुए संस्कृत में रचित आठ श्लोकों का वाचन किया। यह काव्यात्मक श्रद्धांजलि श्रोताओं के हृदय को छू गई और हॉल में भक्ति की तरंगें भर गईं।</p>
<p><strong>सम्मान और कृतज्ञता के पल</strong></p>
<p>इस अवसर पर जैन समुदाय की ओर से स्वामी रामदेव को प्रशंसा पत्र भेंट किया गया। कार्यक्रम में मनीष जैन भिड़, प्रदीप जैन (कानपुर), मनोज चौधरी (हैदराबाद), विवेक जैन (कोलकाता), शिवम सोनी, विकल्प सेठी, गणेश भाई, सत्यम जैन, डॉ. जैन, सुमित जैन समेत हजारों श्रद्धालु उपस्थित थे।</p>
<p><strong>दिल्ली में 8 जून को होगा भव्य मंगल प्रवेश</strong></p>
<p>हरिद्वार में संपन्न इस आध्यात्मिक मिलन के बाद आचार्यश्री का भव्य मंगल प्रवेश 8 जून को भारत की राजधानी दिल्ली में प्रस्तावित है, जिसकी तैयारियों में दिल्ली जैन समाज पूरी निष्ठा से जुटा हुआ है।</p>
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		<title>अष्टापद तीर्थ यात्रा एवं कश्मीर भ्रमण हेतु यात्रियों का दल रवाना 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाएंगे पर्यटन स्थलों पर  </title>
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		<pubDate>Tue, 28 May 2024 15:38:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अष्टापद तीर्थ यात्रा एवं कश्मीर एवं पर्यटन स्थल पर यात्रा हेतु 51 यात्रियों का दल रवाना हुआ ।इस यात्रा दल में वागड़ के नौगामा ,परतापुर ,आजना, अरथुना के यात्रियों का दल यात्रा कर रहे हैं यात्री दल प्रसिद्ध तीर्थ क्षेत्र पदमपुर सांगानेर, रानीला तीर्थ क्षेत्र की यात्रा करते हुए अमृतसर स्वर्ण मंदिर ,जलियांवाला बाग, वाघा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अष्टापद तीर्थ यात्रा एवं कश्मीर एवं पर्यटन स्थल पर यात्रा हेतु 51 यात्रियों का दल रवाना हुआ ।इस यात्रा दल में वागड़ के नौगामा ,परतापुर ,आजना, अरथुना के यात्रियों का दल यात्रा कर रहे हैं यात्री दल प्रसिद्ध तीर्थ क्षेत्र पदमपुर सांगानेर, रानीला तीर्थ क्षेत्र की यात्रा करते हुए अमृतसर स्वर्ण मंदिर ,जलियांवाला बाग, वाघा बॉर्डर होते हुए पहलगाम, श्रीनगर लाल चौक ,गुलमर्ग, सोनमार्ग की यात्रा करते हुये पर्यटन स्थलों का आनंद लेकर चंडीगढ़, ऋषिकेश, हरिद्वार ,उत्तराखंड का खूबसूरत अष्टापद बद्रीनाथ एवं भारत का प्रथम गांव माणा मसूरी होते हुए हस्तिनापुर ,तिजारा, बड़ागांव ,जहाजपुर की यात्रा करेंगे। <span style="color: #ff0000">पढि़ए सुरेश चंद्र गांधी की रिपोर्ट ……</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> नौगामा।</strong> 28 मई को अष्टापद तीर्थ यात्रा एवं कश्मीर एवं पर्यटन स्थल पर यात्रा हेतु 51 यात्रियों का दल रवाना हुआ इस यात्रा दल में वागड़ के नौगामा ,परतापुर ,आजना, अरथुना के यात्रियों का दल यात्रा कर रहे हैं यात्री दल प्रसिद्ध तीर्थ क्षेत्र पदमपुर सांगानेर, रानीला तीर्थ क्षेत्र की यात्रा करते हुए अमृतसर स्वर्ण मंदिर ,जलियांवाला बाग, वाघा बॉर्डर होते हुए पहलगाम, श्रीनगर लाल चौक ,गुलमर्ग, सोनमार्ग की यात्रा करते हुये पर्यटन स्थलों का आनंद लेकर चंडीगढ़, ऋषिकेश, हरिद्वार ,उत्तराखंड का खूबसूरत अष्टापद बद्रीनाथ एवं भारत का प्रथम गांव माणा मसूरी होते हुए हस्तिनापुर ,तिजारा, बड़ागांव ,जहाजपुर की यात्रा करेंगे। इस अवसर पर आज महावीर इंटरनेशनल शाखा नौगामा एवं जैन समाज ने सभी यात्रियों को शुभ यात्रा हेतु शुभकामनाएं प्रेषित की एवं सभी यात्रियों को तिलक लगाकर ऊपरना ओढ़ाकर सम्मान किया गया।</p>
<p>इस अवसर पर महावीर इंटरनेशनल के अध्यक्ष सुरेश चंद्र गांधी, शाखा सचिव कैलाश पंचोली, विधानाचार्य रमेश चंद्र गांधी, संरक्षक डॉक्टर अजीत गांधी, संरक्षक सुरेश चंद्र मोदी ,डॉ पद्मेंद्र पंचोली ,राजेंद्र गांधी, समाजसेवी प्रदीप पिंदरमिया, कल्पेश मोदी ,प्रदीप शाह डॉ उज्जवल ,दीपेश जैन, विकेश गांधी आदि उपस्थित थे। इस अवसर पर महावीर इंटरनेशनल शाखा नौगामा के अध्यक्ष सुरेश चंद्र गांधी ने बताया कि सभी यात्री दल पर्यटक स्थलों पर पर्यटन करते हुए 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस इन पर्यटन स्थलों पर ही मनाएंगे</p>
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