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	<title>Gyansagar Maharaj &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>Gyansagar Maharaj &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>समाधिस्थ संत ज्ञान सागर जी महाराज की प्रेरणा से जैन साध्वी आर्षमति माता जी का रहेगा सानिध्य : 29 अक्टूबर को करियर काउंसलिंग एवं 30 को आगरा में होगा जैन समाज की प्रतिभाओं का सम्मान </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/career_-counseling_-will_-be_-held_-on_-29th_-october_-and_-talents_-of_-jain-community-will_-be_-honored_-in_-agra_-on_-30th/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संपादक]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Oct 2023 07:52:50 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सारांश जैन समाज के प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं को एक मंच पर लाकर उनका सम्मान कार्यक्रम 30 अक्टूबर को ताज नगरी आगरा में समाधिस्थ संत ज्ञान सागर जी महाराज की प्रेरणा से जैन साध्वी आर्षमती माता जी के सानिध्य में सकल जैन समाज द्वारा आयोजित किया जाएगा। इसकी तैयारियां इन दिनों भव्य स्तर पर जारी हैं। पढ़िए [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>सारांश<br />
जैन समाज के प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं को एक मंच पर लाकर उनका सम्मान कार्यक्रम 30 अक्टूबर को ताज नगरी आगरा में समाधिस्थ संत ज्ञान सागर जी महाराज की प्रेरणा से जैन साध्वी आर्षमती माता जी के सानिध्य में सकल जैन समाज द्वारा आयोजित किया जाएगा। इसकी तैयारियां इन दिनों भव्य स्तर पर जारी हैं। पढ़िए अजय जैन की रिपोर्ट&#8230;</p>
<p>आगरा। संपूर्ण जैन समाज के प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं को एक मंच पर लाकर उनका सम्मान कार्यक्रम 30 अक्टूबर को ताज नगरी आगरा में समाधिस्थ संत ज्ञान सागर जी महाराज की प्रेरणा से जैन साध्वी आर्षमति माता जी के सानिध्य में सकल जैन समाज द्वारा आयोजित किया जाएगा। इसकी तैयारियां इन दिनों भव्य स्तर पर जारी हैं। इससे पहले 29 अक्टूबर को प्रतिभाओं के मार्गदर्शन के लिए करियर काउंसलिंग का कार्यक्रम दोपहर 2:00 बजे आयोजित किया जाएगा, जिसमें विमल जैन सीए, रीतेश जैन गाजियाबाद, तनू जैन आइएएस प्रमुख रूप से उपस्थित रहेंगे। इसी दिन प्रसिद्ध भजन गायक विक्की पारिख भजन संध्या में भक्ति संगीत की प्रस्तुति देंगे।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-50748" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/2121-1024x656.jpeg" alt="" width="1024" height="656" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/2121-1024x656.jpeg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/2121-300x192.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/2121-768x492.jpeg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/2121-990x634.jpeg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/2121.jpeg 1080w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" />जैन समाज की प्रतिभाओं को पहचाना</strong></p>
<p>जैन साध्वी आर्षमति माताजी ने संदेश देते हुए कहा है कि यह प्रतिभा सम्मान एक ऐसा मंच है जो देशभर की जैन समाज के छात्र-छात्राओं की प्रतिभा को पहचानता है। इस आयोजन के माध्यम से हजारों छात्र छात्राओं एवं अन्य सफल प्रतिभागियों को सम्मानित किया जाना है। यह कार्यक्रम युवा दिमागों को अपना जुनून विकसित करने और युवा नेतृत्व में एक इतिहास बनाने के लिए प्रोत्साहित करने के तरीके में से एक है। ज्ञानार्ष भक्त परिवार की कंचन दीदी ने बताया कि पिछले वर्षों की भांति इस वर्ष भी परम पूज्य गुरुदेव सराकोद्धारक षष्ट पट्टाचार्य श्री 108 ज्ञानसागर जी महाराज की प्रेरणा एवं सप्तम पट्टाचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज के आशीर्वाद से गुरु मां गणिनी आर्यिका 105 आर्षमति माताजी के निर्देशन में “आचार्य ज्ञानसागर अखिल भारतीय प्रतिभा सम्मान समारोह का यह आयोजन होगा।</p>
<p><strong>प्रतिभाशाली छात्र-छात्राएं करें आवेदन</strong></p>
<p>जानकारी के मुताबिक प्रतिभा सम्मान समारोह में सम्पूर्ण भारतवर्ष के सम्रग जैन सम्प्रदायों के प्रतिभाशाली जैन छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया जाएगा। जिसमें इस वर्ष जिन जैन छात्र-छात्राओं ने कक्षा 10वीं या कक्षा 12वीं में 90 % या इससे अधिक अंक प्राप्त किये हैं अथवा यूपीएससी, सीए, आईआईटी, क्लेट, नीट अथवा उनका किसी भी उच्च प्रसाशनिक सेवा में चयन हुआ है अथवा किसी विशेष क्षेत्र में पुरस्कार/सम्मान प्राप्त किया हो, वे सभी प्रतिभाशाली छात्र-छात्राएं निर्धारित समय में निर्धारित प्रारूप में अपना आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। आयोजकों में शामिल सोनू जैन वराहने वालों ने बताया कि समारोह में सम्मिलित होने वाले सभी चयनित छात्रों को एवं उनके साथ आने वाले एक अभिभावक को मार्गव्यय ( ऐच्छिक ), आवास एवं भोजन की सुविधा प्रदान की जाएगी साथ ही प्रतिभाशाली बच्चों को स्मृति चिन्ह, प्रशस्ति पत्र, मैडल, बैग आदि देकर सम्मानित किया जाएगा। इस समारोह में सम्पूर्ण भारतवर्ष से हजारों की संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं।</p>
<p><strong>23 वर्षों से लगातार</strong></p>
<p>परम् पूज्य गुरुदेव सराकोद्धारक समाधिस्थ आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के सान्निध्य में लगभग 23 वर्षों से यह प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन अनवरत होता आ रहा है। पूज्य गुरुदेव की समाधि के पश्चात उनकी अंतिम दीक्षित शिष्या पूज्य गुरुमां गणिनी आर्यिका 105 आर्षमति माताजी ससंघ ने इस समारोह के आयोजन का बीड़ा उठाया है। माताजी के सान्निध्य में प्रथम आयोजन सिहोनियां जी में अपार सफलता के साथ सम्पन्न हुआ था व द्वितीय आयोजन 13 नवंबर, 2022 को ग्वालियर में भी एक अमिट छाप छोड़ते हुए एक अनुपम ऊंचाइयों को प्राप्त हुआ था।</p>
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		<title>ब्रह्मचारी नवीन भैया की बिनोली यात्रा निकाली गई : 16 दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान हर्षोल्लास के साथ हुआ सम्पन्न </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 04 Jun 2023 12:46:26 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[विधानों वाले मंदिर नाम के सुप्रसिद्ध मंदिर जी श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, शालीमार एनक्लेव, कमला नगर में चल रहे 16 दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान के अंतिम दिन विधान पुण्यार्जक बनने का सौभाग्य राजू गोधा, संजू गोधा परिवार को मिला। इसमें समस्त शालीमार मंदिर परिवार ने हर्षोल्लास के साथ भाग लिया। पढ़िए राहुल जैन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>विधानों वाले मंदिर नाम के सुप्रसिद्ध मंदिर जी श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, शालीमार एनक्लेव, कमला नगर में चल रहे 16 दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान के अंतिम दिन विधान पुण्यार्जक बनने का सौभाग्य राजू गोधा, संजू गोधा परिवार को मिला। इसमें समस्त शालीमार मंदिर परिवार ने हर्षोल्लास के साथ भाग लिया। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राहुल जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> विधानों वाले मंदिर नाम के सुप्रसिद्ध मंदिर जी श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, शालीमार एनक्लेव, कमला नगर में चल रहे 16 दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान के अंतिम दिन विधान पुण्यार्जक बनने का सौभाग्य राजू गोधा, संजू गोधा परिवार को मिला। इसमें समस्त शालीमार मंदिर परिवार ने हर्षोल्लास के साथ भाग लिया।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-45502" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230604-WA0032.jpg" alt="" width="1600" height="901" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230604-WA0032.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230604-WA0032-300x168.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230604-WA0032-1024x577.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230604-WA0032-768x432.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230604-WA0032-1536x865.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230604-WA0032-990x557.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230604-WA0032-1320x743.jpg 1320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230604-WA0032-470x264.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230604-WA0032-640x360.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230604-WA0032-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230604-WA0032-414x232.jpg 414w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" /></p>
<p><strong>दीक्षा पूर्व संस्कार हुए</strong></p>
<p>इस पावन अवसर पर मंदिर के प्रेरणा स्त्रोत परम पूज्य षष्ठम पट्टाचार्य श्री 108 ज्ञानसागर जी महाराज के सुयोग्य शिष्य परम पूज्य सप्तम पट्टाचार्य श्री 108 ज्ञेयसागर जी महाराज के कर कमलों से आगामी 23 जून को ज्ञानतीर्थ मुरैना में होने वाली भव्य जैनेश्वरी मुनि दीक्षा में दीक्षा प्राप्त करने वाले बाल ब्रह्मचारी नवीन भैया की बिनोली यात्रा निकाली गई। तत्पश्चात उनकी गोद भराई समस्त समाज द्वारा की गई। आगरा नसियां जी मानस्तंभ पंचकल्याणक महोत्सव के अंतर्गत पंचकल्याणक में बने राजा नाभिराय और माता मरुदेवी की गोद भराई एवं पंचकल्याणक में बने सभी पात्रों का भी सम्मान किया गया। इस अवसर समस्त आगरा जैन समाज के गणमान्य श्रेष्ठी जन के साथ राजकुमार गुड्डू, राजू गोधा, अनिल अहिंसा, अजय जैन, शैलेंद्र रपरिया, संजू गोधा, मुकेश रपरिया, अंकेश जैन एवं शालीमार जैन महिला मण्डल के सभी सदस्य के साथ मीडिया प्रभारी समकित जैन, राहुल जैन आदि उपस्थित रहे। इस अवसर बिनोली यात्रा की व्यवस्था ज्ञानोदय क्लब आगरा ने संभाली एवं साथ ही समस्त ग्रेटर कमला नगर, आगरा के लोग उपस्थित रहे।</p>
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		<title>श्री दि.जैन ज्ञानतीर्थ क्षेत्र मुरैना के हैं प्रणेता : सराकोद्धारक आचार्य ज्ञानसागर महाराज के अवतरण दिवस पर विशेष </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 30 Apr 2023 09:40:24 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[धर्म नगरी मुरैना में ही 01 मई 1957 को श्री शांतिलाल जैन (विचपुरी वाले) के घर माता श्रीमती अशर्फी देवी जैन की कोख से बालक उमेश का जन्म हुआ। पूज्य गुरुदेव भगवान महावीर निर्वाण दिवस 15 नवम्बर 2020 को अतिशय क्षेत्र बारां (कोटा) में समाधि को प्राप्तकर मोक्षगामी हो गए। गुरुदेव के अवतरण दिवस पर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>धर्म नगरी मुरैना में ही 01 मई 1957 को श्री शांतिलाल जैन (विचपुरी वाले) के घर माता श्रीमती अशर्फी देवी जैन की कोख से बालक उमेश का जन्म हुआ। पूज्य गुरुदेव भगवान महावीर निर्वाण दिवस 15 नवम्बर 2020 को अतिशय क्षेत्र बारां (कोटा) में समाधि को प्राप्तकर मोक्षगामी हो गए। <span style="color: #ff0000;">गुरुदेव के अवतरण दिवस पर पढ़िए मनोज जैन नायक का विशेष आलेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> चम्बल की धरा यूं तो खूंखार डकैतों की बजह से काफी बदनाम रही है लेकिन समय सब कुछ बदल देता है। मध्यप्रदेश के चम्बल अंचल में ऐतिहासिक सम्पदा का भंडार है। ककनमठ शिव मंदिर, बटेश्वर, मितावली, जैन मंदिर सिहोनियां, जैन मंदिर टिकटोली, करह वाले बाबा का मंदिर, घरोना हनुमान मंदिर, विश्व प्रसिद्ध शनि मंदिर जैसे अनेकों पुरात्तव की धरोहर के साथ अनेकों सुप्रसिद्ध तीर्थ एवं मन्दिर इस चम्बल की धरती पर विद्यमान हैं।</p>
<p><strong>षष्ट पट्टाचार्य पद से हुए सुशोभित</strong></p>
<p>चम्बल के आंचल में नगर मुरैना समाया हुआ है। इसी पावन सरजमीं पर धर्म नगरी मुरैना में ही 01 मई 1957 को श्री शांतिलाल जैन (विचपुरी वाले) के घर माता श्रीमती अशर्फी देवी जैन की कोख से बालक उमेश का जन्म हुआ। बालक उमेश बचपन से ही आध्यात्म में रुचि रखते थे। उन्हें यह सांसारिक सुख घर में बांधकर नहीं रख पाया। बालक उमेश ने मात्र 17 साल की अल्पायु में आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत लेकर संयम के मार्ग पर चलने का दृढ़ संकल्प लिया और परम पूज्य मसोपवासी आचार्य श्री सुमतिसागर जी महाराज से 05 नबम्बर 1976 में क्षुल्लक दीक्षा एवं 31 मार्च 1988 को श्री सिद्धक्षेत्र सोनागिर जी में मुनि दीक्षा ग्रहण की और मुनिश्री ज्ञानसागर महाराज नामकरण हुआ। 30 जनवरी 1989 को सरधना (मेरठ) में आपको उपाध्याय एवं 27 मई 2013 को अतिशय क्षेत्र बड़ागांव (बागपत) में आचार्य एवं छाणी परम्परा के षष्ट पट्टाचार्य पद से सुशोभित किया गया। पूज्य गुरुदेव भगवान महावीर निर्वाण दिवस 15 नवम्बर 2020 को अतिशय क्षेत्र बारां (कोटा) में समाधि को प्राप्तकर मोक्षगामी हो गए।</p>
<p><strong>जैन मंदिर का कराया निर्माण</strong></p>
<p>संस्कारधानी, धर्म नगरी मुरैना की पावन धरा पर अवतरित हुए परम पूज्य सराकोद्धारक षष्ट पट्टाचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की पावन प्रेरणा एवं आशीर्वाद से ए. बी. रोड (धौलपुर-आगरा) हाइवे पर एक विशाल एवं भव्य जैन तीर्थ (जैन मंदिर) का निर्माण कराया गया है। सूत्र बताते हैं कि लगभग 15 बर्ष पूर्व इस जैन तीर्थ की कल्पना पूज्य गुरुदेव श्री ज्ञानसागर जी महाराज ने की थी। उनकी कल्पना को साकार करने के लिए उनके भक्तों ने जमीन खरीदी। इस जैन मंदिर का निर्माणकार्य लगभग 12 वर्ष पूर्व प्रारंभ हुआ था, जो आज पूर्णता की ओर है।</p>
<p><strong>भगवान आदिनाथ की विशाल मूर्ति</strong></p>
<p>लगभग 14 बीघा के विशाल प्रांगड़ में 55 फुट के कैलाश पर्वत की संरचना की गई है । इस पर्वत के ऊपर 7 फुट की वेदिका पर 3 फुट ऊंचे कमल सिंहासन पर साढे तेरह फुट ऊंची जैन धर्म के प्रवर्तक, प्रथम तीर्थंकर श्री 1008 भगवान आदिनाथ की पद्माशन प्रतिमा 14 जुलाई 2016 में विराजमान की गई है। प्रतिमा के पीछे सुंदर आकर्षक कल्पवृक्ष बनाया गया है। भगवान आदिनाथ की विशाल, भव्य एवं आकर्षक मूर्ति दिल्ली निवासी श्री बकीलचन्द जैन ने प्रदान की है।पर्वत के नीचे प्रथम तल पर जिनालय में भगवान आदिनाथ, भगवान मुनिसुव्रतनाथ, भगवान चन्द्रप्रभु, भगवान शांतिनाथ, भगवान पार्श्वनाथ, भगवान महावीरस्वामी की प्रतिमाएं विराजमान रहेंगी।</p>
<p><strong>भोजनशाला और आवसीय भवन का निर्माण</strong></p>
<p>प्रारम्भिक दौर में ज्ञानतीर्थ के निर्माण में स्व.श्री प्रेमचन्द जैन (तेल वाले) मेरठ, पंकज जैन मेरठ, रवि जैन गाजियाबाद, प्रमोद जैन बलबीर नगर, राकेश जैन दिल्ली के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। पूज्य गुरुदेव श्री ज्ञानसागर जी की समाधि के पश्चात निर्माण कार्य की गति को विराम सा लग गया था। तब गुरुभक्त सर्वश्री योगेश जैन (खतौली वाले) सूर्यनगर दिल्ली, आनन्द जी (खेकड़ा वाले), सतीश जी (प्रीति होजरी), राकेश जी आजाद नगर, आशीष जैन विकास नगर, जिनेन्द्र जैन (जेडी), राजेश जैन (हलुआ वाले), महेशचंद ठेकेदार, ब्रह्मचारिणी बहिन अनिता दीदी, मंजुला दीदी, ललिता दीदी एवं अन्य सभी गुरुभक्तों ने ज्ञानतीर्थ पर गुरुचरण स्थापित कर निर्माणकार्यों को गति प्रदान की। ज्ञानतीर्थ पर आगन्तुक महानुभावों के आवास के लिए एक विशाल एवं भव्य तीन मंजिला अथिति गृह का निर्माण किया गया है। उक्त आवासीय भवन को ज्ञान गेह नाम दिया गया है। जिसमें सर्व सुविधायुक्त 37 कमरे बनाये गए हैं। मुनिराजों, साधु-साध्वियों की आहारचर्या एवं त्यागी व्रतियों के भोजनादि हेतु विशाल एवं भव्य आहार शाला बनाई गई है, जिसे ज्ञान अहारं नाम दिया हुआ है। क्षेत्र पर प्रतिदिन दर्शनार्थ आने वाले बन्धुओं के लिए 5000 वर्गफुट में एक विशाल एवं भव्य भोजनशाला बनाई गई है, जिसमें 200 व्यक्ति एक साथ बैठकर भोजन कर सकते हैं। उक्त भोजनशाला को ज्ञान पोषणम नाम से जाना जाएगा।</p>
<p><strong>भव्य बगीचे का होगा निर्माण</strong></p>
<p>अभी ज्ञानतीर्थ क्षेत्र पर काफी निर्माण कार्य होना शेष हैं। जिसमें जिन मन्दिर, साधु-संतों के धर्मध्यान एवं विश्राम हेतु सन्त निवास, ज्ञानसागर गुरु मन्दिर एवं कीर्ति स्तम्भ एवं गौशाला का निर्माण प्रमुख रूप से होंगे। खाली जमीन पर भव्य बगीचे का निर्माण होगा, जिसमें सभी तरह के पुष्प एवं पौधे लगाए जाएंगे।</p>
<p><strong>गुरुभक्ति का दिया परिचय</strong></p>
<p>पूज्य गुरुदेव सराकोद्धारक छाणी परम्परा के षष्ट पट्टाचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की पावन प्रेरणा एवं आशीर्वाद से सप्तम पट्टाचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य एवं स्वस्तिधाम प्रणेत्री गुरुमां गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ससंघ के मुख्य निर्देशन में ज्ञानतीर्थ जैन मन्दिर प्राण प्रतिष्ठा हेतु 01 फरवरी से 06 फरवरी 2023 तक श्री जिनविम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं महामस्तिकाभिषेक महोत्सव का विशाल एवं भव्य आयोजन सानन्द हर्षोल्लास पूर्वक सम्पन्न हुआ। इस आयोजन में पट्टाचार्य श्री विनीतसागर जी महाराज, गणिनी आर्यिका सर्वश्री लक्ष्मीभूषण जी, सृष्टीभूषण जी, आर्षमति माताजी ससंघ सहित लगभग 50 साधु-संत सम्मिलित हुए थे। इस महोत्सव में देशभर से 50,000 से अधिक साधर्मी बन्धुओं ने सम्मिलित होकर गुरुभक्ति का परिचय दिया। पूज्य गुरुदेव के आशीर्वाद से ही आगरा हाइवे पर श्री ज्ञानतीर्थ जैन मंदिर का निर्माण हुआ है ।</p>
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		<title>मुनि श्री ज्ञानसागर का 36वां दीक्षा दिवस ज्ञानतीर्थ पर मनाया गया : महामस्तकाभिषेक, विधान सहित हुए अनेक कार्यक्रम </title>
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		<pubDate>Fri, 31 Mar 2023 14:16:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगम्बराचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का 36वां दीक्षा दिवस समारोह ज्ञानतीर्थ क्षेत्र जैन मंदिर में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। पढ़िए मनोज नायक की विशेष रिपोर्ट&#8230; मुरैना। दिगम्बराचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का 36वां दीक्षा दिवस समारोह ज्ञानतीर्थ क्षेत्र जैन मंदिर में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दिगम्बराचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का 36वां दीक्षा दिवस समारोह ज्ञानतीर्थ क्षेत्र जैन मंदिर में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए मनोज नायक की विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> दिगम्बराचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का 36वां दीक्षा दिवस समारोह ज्ञानतीर्थ क्षेत्र जैन मंदिर में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। ज्ञानतीर्थ क्षेत्र जैन मंदिर पर विराजमान ब्रह्मचारिणी बहिन मंजुला दीदी ने बताया कि उत्तर भारत के प्रथम दिगम्बराचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज (छाणी) परम्परा में मसोपवासी चर्या शिरोमणी आचार्य श्री सुमतिसागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य परम पूज्य गुरुदेव, ज्ञानतीर्थ प्रणेता, सराकोद्धारक समाधिस्थ षष्ट पट्टाचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का 36वां दीक्षा दिवस समारोह परम पूज्य गणिनी आर्यिका श्री अंतसमति माताजी ससंघ के पावन सान्निध्य में ज्ञानतीर्थ क्षेत्र पर मनाया गया।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-41232" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230331-WA0025.jpg" alt="" width="576" height="636" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230331-WA0025.jpg 576w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230331-WA0025-272x300.jpg 272w" sizes="(max-width: 576px) 100vw, 576px" /></p>
<p><strong>आचार्य छत्तीसी विधान</strong></p>
<p>कार्यक्रम के प्रथम दिन प्रातः 08 बजे से श्री जिनेन्द्र प्रभु के अभिषेक, शांतिधारा, पूजन के पश्चात् आचार्य छत्तीसी विधान हुआ। जिसमें गुरुभक्त सधर्मी बन्धु, माता-बहिनें इंद्र-इंद्राणी ने जिनेन्द्र भगवान की आराधना करते हुए अर्घ्य समर्पित किये। दूसरे दिन प्रातः 08 बजे बड़े बाबा श्री आदिनाथ भगवान का महामस्तकाभिषेक, शांतिधारा, पूजन के पश्चात गुरुदेव आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के चरणों का पाद प्रक्षालन, महा अर्चना, अष्टद्रव्य से पूजन एवं महाआरती की गई। इस अवसर पर भजन, भक्ति नृत्य एवं बालिकाओं द्वारा सांस्क्रतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये गए। समारोह का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ हुआ। आये हुए अतिथियों द्वारा चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन किया गया। परम् पूज्य गणिनी आर्यिका श्री अंतसमति माताजी को शास्त्र एवं श्री आदिनाथ भगवान की शांतिधारा करने का सौभाग्य मदनचंद अजमेर, टीनू मीनू दिल्ली, बाबूलाल अमित जैन मुरैना एवं आचार्य श्री ज्ञानसागर महाराज के चरणों का पाद प्रक्षालन करने का सौभाग्य वकील चंद, नीरज, पंकज, राजीव विवेक विहार दिल्ली वालों को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर जयपुर, दिल्ली, अजमेर, मेरठ, आगरा, अम्बाह, बानमोर, जौरा सहित बड़ी संख्या में गुरुभक्त सधर्मी बन्धु उपस्थित थे। दीक्षा दिवस के अवसर पर सभी आगन्तुक महानुभावों के आवास एवं भोजनादि की व्यवस्था ज्ञानतीर्थ पर की गई थी।</p>
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		<title>सप्त प्रतिमाधारी भगवानदेवी जैन की विनयांजलि सभा : आत्मा को जानना ही धर्म है-पदमचंद जैन </title>
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		<pubDate>Fri, 31 Mar 2023 14:09:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[समाज सेवी मनोज जैन (नेकी की दीवार) की माताजी मुरेना जैन समाज की वयोवृद्ध त्यागिवर्ती, सप्तम प्रतिमाधारी श्रीमती भगवान देवी जैन के देवलोकगमन पर अग्रसेन पार्क जीबाजी गंज मुरैना में विनयांजलि सभा का आयोजन किया गया। पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट&#8230; मुरैना। जिसने जन्म लिया है, उसका मरण निश्चित है। आत्मा अजर व अमर है। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>समाज सेवी मनोज जैन (नेकी की दीवार) की माताजी मुरेना जैन समाज की वयोवृद्ध त्यागिवर्ती, सप्तम प्रतिमाधारी श्रीमती भगवान देवी जैन के देवलोकगमन पर अग्रसेन पार्क जीबाजी गंज मुरैना में विनयांजलि सभा का आयोजन किया गया। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> जिसने जन्म लिया है, उसका मरण निश्चित है। आत्मा अजर व अमर है। आत्मा कभी मरती या नष्ट नहीं होती। आत्मा तो केवल शरीर परिवर्तित करती है। आत्मा को पहचानना ही धर्म है। धन से, बाहरी आडम्बरों से, बाहर के क्रिया -कांडों से धर्म नहीं आता। हमें अपने आपको धर्म में, आत्मा स्वीकार करने से, आत्मा आने से वह धर्ममय कहलाता है। जीव कोई भी हो, उसे एक न एक दिन इस नश्वर संसार को त्यागना ही होता है। फिर हम उस जीव के जाने पर रोना-धोना क्यों करते हैं। यही हमारी अज्ञानता है। दुखों को मिटाने के लिए आत्मा को पहचानना जरूरी है। यह बात तत्ववेत्ता पंडित पदमचन्द जैन दानाओली लश्कर ने श्रीमती भगवानदेवी जैन के देवलोकगमन पर अग्रसेन पार्क, जीबाजी गंज मुरैना में आयोजित विनयांजलि सभा में कही।</p>
<p><strong>कर रही थीं संयम की साधना</strong></p>
<p>समाज सेवी मनोज जैन (नेकी की दीवार) की माताजी मुरेना जैन समाज की वयोवृद्ध त्यागिवर्ती, सप्तम प्रतिमाधारी श्रीमती भगवान देवी जैन के देवलोकगमन पर अग्रसेन पार्क जीबाजी गंज मुरैना में विनयांजलि सभा का आयोजन किया गया। विनयांजलि सभा में राजेन्द्र भण्डारी ने कहा कि श्रीमती भगवानदेवी जैन एक धार्मिक विदुषी महिला थीं। वह परिवार में रहकर भी संयम की साधना कर रही थीं। प्रतिदिन देव शास्त्र गुरु की भक्ति, आराधना एवं प्रार्थना करना उनकी दिनचर्या में शामिल था। विनयांजलि सभा में मुरैना विधायक राकेश मावई, भाजपा जिलाध्यक्ष योगेशपाल गुप्ता, अम्बाह नगर पालिका अध्यक्षा अंजली जिनेश जैन, नगर निगम आयुक्त संजीव जैन, पूर्व मंत्री मुंशीलाल, शिवमंगल सिंह तोमर, चंद्रप्रकाश शिवहरे, रमेशचंद विरला, गजेंद्र परमार, गोविंद बंसल, राजेन्द्र गोयल, मोहनलाल गर्ग, प्रकाश अग्रवाल सीए, श्याम, अग्रवाल सीए, विशनलाल गर्ग, केदार शिवहरे, श्याम खंडेलवाल, संदीप शर्मा एडवोकेट, रवि गुप्ता पत्रकार, अवधेश दंडोतिया पत्रकार, उपेंद्र गौतम, प्रदीप अवस्थी पत्रकार, देवेश शर्मा पत्रकार, श्रीनिवास शर्मा पत्रकार, अनिल गोयल अली, राजेश शर्मा बाबूजी सहित बहुतायत संख्या में नगर के समाजसेवी, उद्योगपति, पत्रकारबन्धु उपस्थित थे।</p>
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		<title>आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के दीक्षा दिवस 31 मार्च पर विशेष :  सराकोद्धारक व सराको के राम नाम से हुए प्रसिद्ध </title>
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		<pubDate>Thu, 30 Mar 2023 10:38:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुरैना में 01 मई 1957 को श्री शांतिलाल जैन (विचपुरी वाले) के घर मां श्रीमती अशर्फी देवी की कुक्षी से एक बालक का जन्म हुआ। पंडित जी ने बालक की कुंडली बनाकर नाम रखा उमेश। यही उमेश आगे चलकर आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के नाम से प्रसिद्ध हुए। आपने भगवान महावीर स्वामी जन्मकल्याणक के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>मुरैना में 01 मई 1957 को श्री शांतिलाल जैन (विचपुरी वाले) के घर मां श्रीमती अशर्फी देवी की कुक्षी से एक बालक का जन्म हुआ। पंडित जी ने बालक की कुंडली बनाकर नाम रखा उमेश। यही उमेश आगे चलकर आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के नाम से प्रसिद्ध हुए। आपने भगवान महावीर स्वामी जन्मकल्याणक के पावन अवसर पर चैत सुदी तेरस 31 मार्च, 1988 को श्री सिद्धक्षेत्र सोनागिर जी में आचार्य श्री सुमतिसागर जी महाराज से मुनि दीक्षा ग्रहण की। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए मनोज जैन नायक का यह विशेष आलेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना, मनोज जैन नायक।</strong> चम्बल अंचल की पावन व पवित्र वसुन्धरा पर संस्कारधानी धर्म नगरी मुरैना में 01 मई 1957 को श्री शांतिलाल जैन (विचपुरी वाले) के घर मां श्रीमती अशर्फी देवी की कुक्षी से एक बालक का जन्म हुआ। पंडित जी ने बालक की कुंडली बनाकर नाम रखा उमेश। बालक उमेश प्रारम्भ से ही धार्मिक संस्कारों से प्रभावित रहे। आप शुरू से ही देव- शास्त्र -गुरु की भक्ति में मग्न रहते थे।</p>
<p><strong>विरासत में मिली प्रेरणा</strong></p>
<p>आपको संयम के मार्ग पर चलने की प्रेरणा विरासत में ही मिली थी। आपके बाबा शंकरलाल जी (क्षुल्लक वर्धमान सागर) एवं मुरैना के श्री गोपाल दिगम्बर जैन संस्कृत महाविद्यालय से प्राप्त शिक्षा व संस्कारों का ऐसा प्रभाव रहा कि आपको आधुनिक भौतिक परिवेश व सांसारिक सुख भी प्रभावित नहीं कर सका। मात्र 19 वर्ष की अल्पआयु में गृह त्यागकर संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से ग्राम वीरमपुर-अजमेर में सन 1974 में आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत अंगीकार कर संयम के मार्ग पर चलने का दृढ़ संकल्प लिया।</p>
<p>आपके दृढ़ निश्चय को देखते हुए 5 नवम्बर, 1976 को श्री सिद्धक्षेत्र सोनागिर जी में आचार्य श्री सुमतिसागर जी महाराज ने आपको क्षुल्लक दीक्षा प्रदान की और नाम रखा क्षुल्लक गुण सागर जी महाराज। दीक्षा लेने के बाद अपने जैन शास्त्रों का गहन अध्ययन किया। आपकी क्षुल्लक अवस्था की उत्कृष्ट साधना से अनेक धर्मानुरागी बन्धु प्रभावित हुए।</p>
<p>उनमें से जयकुमार एवं वीरेंद्र जी ने तो आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से मुनिदीक्षा ग्रहण की और मुनिश्री सुधासागर जी व मुनिश्री क्षमासागर जी महाराज के रूप में साधनारत हैं। दीक्षा लेने के बाद सन 1979 में मानस्तम्भ पंचकल्याणक महोत्सव के अवसर पर आचार्य श्री विद्यासागर जी के साथ एक दिन के अल्पप्रवास पर आप मुरैना आये थे। क्षुल्लक अवस्था में आपने कभी भी वाहन का उपयोग नहीं किया और न ही कभी दुपट्टे का उपयोग किया।</p>
<p><strong>दुर्गम स्थानों पर पद विहार</strong></p>
<p>भगवान महावीर स्वामी जन्मकल्याणक के पावन अवसर पर चैत सुदी तेरस 31 मार्च, 1988 को श्री सिद्धक्षेत्र सोनागिर जी में आचार्य श्री सुमतिसागर जी महाराज से मुनि दीक्षा ग्रहण की। नाम रखा गया मुनिश्री ज्ञानसागर जी महाराज। पूज्य गुरुदेव ने आपकी प्रतिभा को देखते हुए आपको उपाध्याय पद से विभूषित किया। आपने दुर्गम स्थानों में पद विहार करते हुए जैन धर्म से विमुख हुए सराक बन्धुओं को पुनः समाज की धारा में लाने का सतत प्रयास किया। इसी कारण आप सराकोद्धारक व सराको के राम नाम से प्रसिद्ध हुए। श्री अतिशय क्षेत्र बड़ागांव (बागपत) त्रिलोकतीर्थ धाम में 27 मई 2013 में आपको आचार्य श्री शांतिसागर (छाणी) परम्परा के षष्ट पट्टाचार्य के रूप में आचार्य पद पर प्रतिष्ठित किया गया।</p>
<p><strong>ऐसा हुआ ज्ञानतीर्थ का निर्माण</strong></p>
<p>सराकोद्धारक षष्ट पट्टाचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के परम भक्त अनूप जैन भण्डारी मुरैना ने बताया कि दिगम्बर अवस्था में पूज्य गुरुदेव अपनी जन्मस्थली मुरैना में पहलीबार 26 जनवरी 2003 में अतिशय क्षेत्र सिहोनियां जी पंचकल्याक महोत्सव के निमित्त आये थे। तब पूज्य गुरुदेव की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से ए बी रोड मुरैना में ज्ञानतीर्थ जैन मंदिर निर्माण हेतु जमीन खरीदी गई और ज्ञानतीर्थ निर्माण की आधार शिला रखी गई। पूज्य आचार्य श्री के सान्निध्य में मुरेना नगर में श्री नन्दीश्वरदीप पंचकल्याणक 3 फरवरी 2006 में हुआ और ऐतिहासिक नगर गजरथ निकाला गया। वर्ष 2016 में पूज्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का ज्ञानतीर्थ मुरैना में चातुर्मास हुआ। गुरुदेव के ज्ञानतीर्थ आने से ज्ञानतीर्थ के निर्माणकार्य में गति आई। ज्ञानतीर्थ के शिखर पर बड़े बाबा श्री आदिनाथ की विशाल एवं भव्य पदमासन मूर्ति 14 जुलाई 2016 को विराजमान की गई। ज्ञानतीर्थ जैन मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के पूर्व ही गुरुदेव ने धर्म प्रभावना हेतु विहार कर दिया।</p>
<p><strong>साधना करते हुए मोक्षगामी</strong></p>
<p>विधि के विधान को कौन टाल सकता है। गुरुदेव विहार करते हुए कोटा के नजदीक अतिशय क्षेत्र वांरा (राज.) पहुंचे और वहीं पर अपने अंतिम वर्षायोग में साधना करते हुए भगवान महावीर निर्वाण दिवस की पावन बेला में कार्तिक कृष्ण अमावस्या 15 नबंवर 2020 को समाधि को प्राप्तकर मोक्षगामी हो गए। सप्तम पट्टाचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज, आचार्य श्री विनीत सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में एवं स्वस्तिधाम प्रणेत्री गुरुमां श्री स्वस्तिभूषण माताजी के पावन निर्देशन में 01 फरवरी से 06 फरवरी 2023 तक मुरैना ज्ञानतीर्थ जैन मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा सम्पन्न हुई। आज 31 मार्च को ऐसे पूज्य गुरुदेव श्री ज्ञानसागर जी महाराज के दीक्षा दिवस पर उनके चरणों में कोटि-कोटि नमन।</p>
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		<title>विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम होंगे आयोजित : आचार्य सन्मति सागर महाराज एवं ज्ञानसागर महाराज का दीक्षा समारोह 31 मार्च को </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 29 Mar 2023 14:08:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगम्बराचार्य श्री विद्याभूषण सन्मति सागर जी महाराज एवं श्री ज्ञानसागर जी महाराज का दीक्षा दिवस समारोह आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी ससंघ के पावन सान्निध्य में 31 मार्च को जैन बगीची, अंबाह में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लास पूर्वक मनाया जाएगा। पढ़िए अजय जैन की विशेष रिपोर्ट&#8230; अंबाह। दिगम्बराचार्य श्री विद्याभूषण सन्मति सागर जी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दिगम्बराचार्य श्री विद्याभूषण सन्मति सागर जी महाराज एवं श्री ज्ञानसागर जी महाराज का दीक्षा दिवस समारोह आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी ससंघ के पावन सान्निध्य में 31 मार्च को जैन बगीची, अंबाह में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लास पूर्वक मनाया जाएगा। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए अजय जैन की विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अंबाह।</strong> दिगम्बराचार्य श्री विद्याभूषण सन्मति सागर जी महाराज एवं श्री ज्ञानसागर जी महाराज का दीक्षा दिवस समारोह 31 मार्च को जैन बगीची, अंबाह में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लास पूर्वक मनाया जाएगा। श्री विश्वयशमती माता जी ने बताया कि चंबल अंचल के बरवाई गांव में जन्मे त्रिलोक तीर्थ प्रणेता परम पूज्य आचार्य श्री 108 विद्याभूषण सन्मति सागर जी महाराज एवं पूज्य गुरुदेव, ज्ञानतीर्थ प्रणेता, सराकोद्धारक समाधिस्थ षष्ट पट्टाचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का दीक्षा दिवस समारोह परम पूज्य गणिनी आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी ससंघ के पावन सान्निध्य में 31 मार्च को जैन बगीची क्षेत्र पर मनाया जायेगा।</p>
<p><strong>भगवान को होंगे अर्घ्य समर्पित</strong></p>
<p>कार्यक्रम के तहत श्री पारसनाथ मंदिर परेड चौराहा में श्री जिनेन्द्र प्रभु का अभिषेक, शांतिधारा, पूजन होगा, जिसमें गुरुभक्त सधर्मी बन्धु, माता-बहिनें जिनेन्द्र भगवान की आराधना करते हुए अर्घ्य समर्पित करेंगे। पूजन के पश्चात गुरुदेव आचार्य श्री सन्मति सागर जी महाराज एवं श्री ज्ञानसागर जी महाराज की महा अर्चना, पूजन एवं महाआरती होगी। मुख्य समारोह जैन बगीची में होगा। इस अवसर पर दोनों आचार्यों के जैन धर्म के प्रति योगदान पर व्याख्यानमाला के साथ-साथ जैन समाज में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए समस्त मंडलों का सम्मान आर्यिका माताजी सृष्टि भूषण के सानिध्य में किया जाएगा। इस अवसर पर भजन, भक्ति नृत्य एवं बालिकाओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये जायेंगे।</p>
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		<title>ज्ञानसागर का दीक्षा समारोह ज्ञानतीर्थ पर 31 मार्च को : महामस्तकाभिषेक, विधान सहित होंगे अनेक कार्यक्रम </title>
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		<pubDate>Mon, 27 Mar 2023 13:59:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगम्बराचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का 36वां दीक्षा दिवस समारोह 31 मार्च को ज्ञानतीर्थ क्षेत्र पर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लास पूर्वक मनाया जाएगा। इस अवसर पर अनेक कार्यक्रम आयोजित होंगे। पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट&#8230; मुरैना। दिगम्बराचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का 36वां दीक्षा दिवस समारोह 31 मार्च को ज्ञानतीर्थ क्षेत्र पर विभिन्न [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दिगम्बराचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का 36वां दीक्षा दिवस समारोह 31 मार्च को ज्ञानतीर्थ क्षेत्र पर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लास पूर्वक मनाया जाएगा। इस अवसर पर अनेक कार्यक्रम आयोजित होंगे। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> दिगम्बराचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का 36वां दीक्षा दिवस समारोह 31 मार्च को ज्ञानतीर्थ क्षेत्र पर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लास पूर्वक मनाया जाएगा। ज्ञानतीर्थ क्षेत्र जैन मंदिर पर विराजमान ब्रह्मचारिणी बहिन मंजुला दीदी के अनुसार उत्तर भारत के प्रथम दिगम्बराचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज (छाणी) परम्परा में मसोपवासी चर्या शिरोमणी आचार्य श्री सुमतिसागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य परम पूज्य गुरुदेव, ज्ञानतीर्थ प्रणेता, सराकोद्धारक समाधिस्थ षष्ट पट्टाचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का 36वां दीक्षा दिवस समारोह परम पूज्य गणिनी आर्यिका श्री अंतसमति माताजी ससंघ के पावन सान्निध्य में 30 एवं 31 मार्च को ज्ञानतीर्थ क्षेत्र पर मनाया जा रहा है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-40923" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230327-WA0030.jpg" alt="" width="605" height="645" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230327-WA0030.jpg 605w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230327-WA0030-281x300.jpg 281w" sizes="auto, (max-width: 605px) 100vw, 605px" /></p>
<p><strong>छत्तीसी विधान के साथ होंगे कई कार्यक्रम</strong></p>
<p>कार्यक्रम के प्रथम दिन गुरुवार, 30 मार्च को प्रातः 8 बजे से श्री जिनेन्द्र प्रभु के अभिषेक, शांतिधारा, पूजन के पश्चात आचार्य छत्तीसी विधान होगा। जिसमें गुरुभक्त सधर्मी बन्धु, माता-बहिनें इंद्र-इंद्राणी स्वरूप जिनेन्द्र भगवान की आराधना करते हुए अर्घ्य समर्पित करेंगे। दूसरे दिन शुक्रवार को प्रातः 8 बजे बड़े बाबा श्री आदिनाथ भगवान का महामस्तकाभिषेक, शांतिधारा, पूजन के पश्चात गुरुदेव आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के चरणों का पाद प्रक्षालन, महा अर्चना, अष्टद्रव्य से पूजन एवं महाआरती होगी। इस अवसर पर भजन, भक्ति नृत्य एवं बालिकाओं द्वारा सांस्क्रतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये जायेंगे।</p>
<p><strong>महावीर जन्मकल्याणक पर ली थी दीक्षा</strong></p>
<p>ज्ञातव्य हो कि मुरैना में वैशाख सुदी द्वितीया 01 मई 1957 को जन्मे उमेश जैन ने आज से 36 वर्ष पूर्व भगवान महावीर जन्मकल्याणक के पावन अवसर पर चैत्र सुदी त्रियोदशी 31 मार्च 1988 को श्री सिद्धक्षेत्र सोनागिर (दतिया) में आचार्य श्री सुमतिसागर जी महाराज से जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण की थी। मुनि श्री ज्ञानसागर जी महाराज निरन्तर जैन धर्म के सिद्धांतों का प्रचार प्रसार करते हुये संयम की साधना करते रहे। आपकी प्रतिभा को देखकर गुरुदेव ने आपको उपाध्याय पद से विभूषित किया। श्री अतिशय क्षेत्र बड़ागांव (बागपत) में ज्येष्ठ वदी तृतीया 27 मई, 2013 को आचार्य पद से विभूषित कर आपको छाणी परम्परा का षष्ट पट्टाचार्य बनाया गया। आपकी समाधि भगवान महावीर निर्वाण दिवस पर कार्तिक कृष्ण अमावस्या 15 नबम्बर 2020 को श्री अतिशय क्षेत्र वांरा (कोटा) राजस्थान में हुई।</p>
<p>दीक्षा दिवस के अवसर पर सभी आगन्तुक महानुभावों के आवास एवं भोजनादि की व्यवस्था ज्ञानतीर्थ पर की गई है । ज्ञानतीर्थ आने जाने हेतु मुरेना से वाहन व्यवस्था उपलब्ध रहेगी ।</p>
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