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	<title>Gwalior श्रीफल जैन न्यूज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>25 मई से 2 जून तक नौतपा में बनेगा वर्षा आंधी का योग गुरु और शुक्र ग्रह के साथ सूर्य रहने से बनेगा त्रिग्रही योग  </title>
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		<pubDate>Fri, 17 May 2024 17:09:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ऐसा माना जाता है कि नौतपा जितना तपता है उतनी ही आगे अच्छी वर्षा होती है।लेकिन कुछ सालों से नौ तपा के पहले या मध्य में खूब बारिश हुई थी।तब भी वर्षा ऋतु में औसत वर्षा दर्ज हुई।वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि सूर्य ग्रह इस बार 25 मई की रात्रि 03:17 बजे [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>ऐसा माना जाता है कि नौतपा जितना तपता है उतनी ही आगे अच्छी वर्षा होती है।लेकिन कुछ सालों से नौ तपा के पहले या मध्य में खूब बारिश हुई थी।तब भी वर्षा ऋतु में औसत वर्षा दर्ज हुई।वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि सूर्य ग्रह इस बार 25 मई की रात्रि 03:17 बजे रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। रोहिणी नक्षत्र और वृष राशि के 10 अंशो पर सूर्य आता है ।तब नौतपा शुरू होता है।<span style="color: #ff0000">पढि़ए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट ……….</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ग्वालियर।</strong> ऐसा माना जाता है कि नौतपा जितना तपता है उतनी ही आगे अच्छी वर्षा होती है।लेकिन कुछ सालों से नौ तपा के पहले या मध्य में खूब बारिश हुई थी।तब भी वर्षा ऋतु में औसत वर्षा दर्ज हुई।वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि सूर्य ग्रह इस बार 25 मई की रात्रि 03:17 बजे रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। रोहिणी नक्षत्र और वृष राशि के 10 अंशो पर सूर्य आता है ।तब नौतपा शुरू होता है। वैसे तो रोहिणी नक्षत्र में सूर्य 14 दिनों तक रहते है। तब भीषण गर्मी और लू का समय रहता है, लेकिन पहले नौ दिन यानी 25 मई से 02 जून तक विशेष गर्मी रहेगी। इस बार वृष राशि गोचर में कर रहे गुरु और शुक्र ग्रह के साथ सूर्य रहने से त्रिग्रही योग भी बनेगा।</p>
<p>यही नहीं करीब 24 वर्ष बाद नौतपा की अवधि में गुरु और शुक्र दोनों ग्रह अस्त भी रहेंगे।इनके चलते कोई शुभ मुहूर्त भी नहीं है।जैन ने कहा कि शुक्र की वृष राशि में शुक्र के साथ नौतपा होने से नौतपा से पहले अनेक स्थानों पर वर्षा,अंधड़,ओले गिरने का योग है ।24,27,29 मई और 1,3 जून में भी आंधी, पानी के विशेष योग है।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-60720" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240517-WA0019.jpg" alt="" width="292" height="229" />नौतपा में रोहिणी नक्षत्र का वृष राशि में गोचर से पृथ्वी और सूर्य की दूरी कम होने से सीधी सूर्य की किरणें पृथ्वी पर आने से तेज गर्मी और लू चलती हैं।इस बार की खास बात यह रहेगी कि नौतपा बाद भी गर्मी कम नहीं होगी और पूरे 14 जून तक सूर्य के वृष राशि में रहने तक रहेगी।यानी नौतपा से ज्यादा गर्मी और लू जून माह में रहेगी।</p>
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		<title>गुरु का मित्र राशि से शत्रु राशि में होगा प्रवेश: राहु से त्रिकादश योग एवं शनि ग्रह से बनेगा केंद्र योग </title>
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		<pubDate>Wed, 01 May 2024 07:08:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सभी ग्रहों में गुरु ऐसा ग्रह है जो धर्म, अध्यात्म, शिक्षा, दीक्षा, धन समृद्धि के लिए विशेष भूमिका रखता है। यह ग्रह एक राशि में करीब एक वर्ष एक माह रहता है इसलिए हर राशि वालों पर अपना प्रभाव दिखाता है।वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि गुरु ग्रह 01 मई को अपने मित्र [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सभी ग्रहों में गुरु ऐसा ग्रह है जो धर्म, अध्यात्म, शिक्षा, दीक्षा, धन समृद्धि के लिए विशेष भूमिका रखता है। यह ग्रह एक राशि में करीब एक वर्ष एक माह रहता है इसलिए हर राशि वालों पर अपना प्रभाव दिखाता है।वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि गुरु ग्रह 01 मई को अपने मित्र मंगल की मेष राशि से निकल कर शत्रु शुक्र की वृष राशि में प्रवेश कर रहा है और 14 मई 2025 तक वहाँ रहने से हर राशि पर असर करेगा। <span style="color: #ff0000">पढि़ए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट ……</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ग्वालियर।</strong>सभी ग्रहों में गुरु ऐसा ग्रह है जो धर्म, अध्यात्म, शिक्षा, दीक्षा, धन समृद्धि के लिए विशेष भूमिका रखता है। यह ग्रह एक राशि में करीब एक वर्ष एक माह रहता है इसलिए हर राशि वालों पर अपना प्रभाव दिखाता है।वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि गुरु ग्रह 01 मई को अपने मित्र मंगल की मेष राशि से निकल कर शत्रु शुक्र की वृष राशि में प्रवेश कर रहा है और 14 मई 2025 तक वहाँ रहने से हर राशि पर असर करेगा। वहीं इसका पूरे वर्ष राहु से त्रिकादश योग एवं शनि ग्रह से केंद्र योग भी बना रहेगा। इस योग से पृथ्वी पर अधर्म, भ्रष्टाचार, अनीति, उपद्रव एवं महिलाओं पर अत्याचार भी बढ़ सकते हैं। किसी बड़ी पार्टियों के बड़े नेताओ के भ्रष्टाचार में लिप्त होने से बड़ी पार्टियों की साख कमजोर होगी। देश के नागरिक पाश्चात्य सभ्यता का अनुसरण करेंगे। किसी बड़े धार्मिक संत के अनैतिक कार्य में फँसने से लोगों की धर्म में आस्था कम होगी।</p>
<p><strong>राशियों पर प्रभाव:-</strong></p>
<p>मेष-परिवार में धन समृद्धि, मान-सम्मान एवं मंगल कार्य होगें अर्थात हर तरह से शुभ रहेगा।</p>
<p>वृष-वृष राशि वालों को लाभ काम, खर्च अधिक, रोजगार-व्यापार में विघ्न बाधाएं। स्वास्थ्य में कमी रहेगी।</p>
<p>मिथुन-मिथुन राशि वालों को संतान एवं शुभ कार्यों पर खर्च होगा। धन की वापसी नहीं होगी। किसी बड़ी घटना के कारण होने वाली मानसिक पीड़ा से बचें।</p>
<p>कर्क-कर्क राशि वालों के लिए नए आर्थिक लाभ के रास्ते खुलेंगे. धन, प्रतिष्ठा, अधिकार बढ़ेंगे। संतान सुख, वैभव एवं सफलता मिलेगी।</p>
<p>सिंह-सिंह राशि वालों के लिए मान-सम्मान एवं अधिकार तो बढ़ेंगे लेकिन अकारण वाणी के कारण अपनों से मतभेद भी होंगे।</p>
<p>कन्या-कन्या राशि वालों के लिए धर्म-कर्म अध्यात्म में रुचि बढ़ेगी। संतान, भाई बंधुओं से लाभ-सुख एवं व्यापार, समाज में उन्नति होगी।</p>
<p>तुला-तुला राशि वालों के लिए विपरीत परिस्थितियों से मानसिक पीड़ा, कष्ट, वाणी पर अनियंत्रण एवं क्रोध से हानि होगी।</p>
<p>वृश्चिक-वृश्चिक राशि वालों के लिए विवाह, पारिवारिक सुख समृद्धि. उन्नति एवं आर्थिक लाभ, कार्यों में सफलता मिलेगी।</p>
<p>धनु-धनु राशि वालों को संतान की चिंता ,स्वास्थ्य में कमी से मन विचलित रहेगा।</p>
<p>मकर-मकर राशि वालों के लिए बुद्धि, विवेक एवं तर्क शक्ति से प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता, अचानक आर्थिक लाभ, कार्य क्षेत्र में उन्नति एवं आनंद में वृद्धि होगी।</p>
<p>कुंभ-कुंभ राशि वालों के लिए घरेलू अशांति, स्थान परिवर्तन, क्लेश एवं शत्रुओं से कष्ट रहेगा।</p>
<p>मीन-मीन राशि वालों को लाभ में कमी, यात्राओं में खर्च एवं भाई बंधुओ में आपसी तनाव से विवाद बढ़ सकते है।</p>
<p><strong>व्यापारिक वस्तुओ पर इसका असर </strong></p>
<p>चांदी ,तेल ,घी, रस पदार्थ महंगे रहेंगे। 07 मई को अस्त होने से अनाजों में तेजी बनेगी। 01 जून को ज्येष्ठ माह में उदय होने से कहीं सूखे की स्थिति एवं पश्चिम प्रांतों में बाढ़ के कारण हानि होगी। 12 जून से रोहिणी नक्षत्र के प्रथम चरण में जाने से सोना, चांदी में मंदी, 27 जून से दूसरे चरण से हल्दी, सरसों, रुई में मंदी, 09 अक्टूबर से गुरु के वृष राशि में वक्री होने से सोना, चांदी, तेल, घी और महंगे होंगे।</p>
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		<title>सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग में मनाया जाएगा भगवान महावीर जन्म कल्याणक: इस बार की महावीर जयंती जनमानस के विशेष लाभ कारी रहेगी </title>
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		<pubDate>Sat, 20 Apr 2024 08:24:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भगवान महावीरजी का जन्म चैत्र शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि में हुआ था। भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव 21 अप्रेल को सम्पूर्ण विश्व में मनाया जाएगा। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि इस बार 21 अप्रेल रविवार को त्रियोदशी तिथि 20 अप्रेल को रात्रि 10:41 बजे से प्रारंभ होकर 21 अप्रेल रवि को रात्रि [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>भगवान महावीरजी का जन्म चैत्र शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि में हुआ था। भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव 21 अप्रेल को सम्पूर्ण विश्व में मनाया जाएगा। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि इस बार 21 अप्रेल रविवार को त्रियोदशी तिथि 20 अप्रेल को रात्रि 10:41 बजे से प्रारंभ होकर 21 अप्रेल रवि को रात्रि 01:11 बजे तक रहने से तिथि मान पूर्ण होकर पूरे दिन रहेगा। इस दिन पूरे दिन रात सर्वार्थ सिद्धि योग,रहेगा शाम को 05:07 बजे से साथ में रात भर अमृत सिद्धि योग भी चलेगा।<span style="color: #ff0000"> पढि़ए मनोज जैन नायक की पूरी रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ग्वालियर।</strong> भगवान महावीरजी का जन्म चैत्र शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि में हुआ था। भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव 21 अप्रेल को सम्पूर्ण विश्व में मनाया जाएगा। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि इस बार 21 अप्रेल रविवार को त्रियोदशी तिथि 20 अप्रेल को रात्रि 10:41 बजे से प्रारंभ होकर 21 अप्रेल रवि को रात्रि 01:11 बजे तक रहने से तिथि मान पूर्ण होकर पूरे दिन रहेगा। इस दिन पूरे दिन रात सर्वार्थ सिद्धि योग,रहेगा शाम को 05:07 बजे से साथ में रात भर अमृत सिद्धि योग भी चलेगा। नक्षत्र इस वार उत्तराफाल्गुनी वही है जो भगवान महावीर जी के जन्म के समय था। इसलिए इस बार की महावीर जयंती जनमानस के विशेष लाभ कारी रहेगी पूरे वर्ष भर धर्म, संयम की तरफ जनता बढ़ेगी।</p>
<p>भगवान महावीर ने जियो और जीने दो का संदेश विश्व के लिए दिया था कहा कर्म ही पूजा है। इस के अलावा हिंसा, झूठ,चोरी, कुशील, परिग्रह इन पांच पापों से मनुष्य को सर्वथा दूर रहने को कहा। भगवान महावीर जी का जन्म मकर लग्न में हुआ लग्न में उच्च राशि का मंगल, केंद्र दशम में शनि उच्च राशि में गुरु सप्तम केंद्र में उच्च कर्क राशि में सूर्य केंद्र चतुर्थ स्थान में उच्च राशि में थे अर्थात् चारों केंद्रों में चार ग्रह अपनी उच्च राशि में थे।</p>
<p>इस बार भी सूर्य अपनी मेष उच्च राशि में है। सभी केंद्रों में उच्च ग्रहों ने उन्हें तीर्थंकर होने का निमित्त प्रदान किया।वे राज कुल में माता त्रिशला देवी पिता सिद्धार्थ के घर कुंडल पर वैशाली नगरी में जन्मे। राजा के घर जन्म लेकर भी और उनकी पत्रिका में राज योग, रुचक योग,हंस योग, शशयोग,पंचमहापुरुष योग, राजराजेश्वर योग जैसे अनेक राज योग होने के बाद भी वैराग्य योग ने उन्हें राज्य नहीं करने दिया और वे राज पाट सब छोडक़र मात्र 30 वर्षों की आयु में ही शाल वृक्ष के नीचे दीक्षा लेकर 12 वर्षो तक घोर तप किया उसी वृक्ष के नीचे 12 वर्ष बाद वैशाख शुक्ल दशमी के दिन मात्र 42 वर्ष में ही उन्हें ज्ञान प्राप्ति हो गई थी बाद में उन्होंने 30 वर्षो तक भ्रमण करते हुए धर्म उपदेश दिए उनके उपदेश के समय चारों तरफ शांति ही शांति थी। गाय और शेर भी एक घाट पर पानी पीते थे। आज हर बच्चा बच्चा भगवान महावीर के नाम को उनके सिद्धांत को जानता है कि जियो और जीने एवं दो कर्म ही पूजा है विश्व में शांति के लिए आज भी भगवान महावीर के जियो और जीने दो की जरूरत है।</p>
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		<title>होलाष्टक 17 मार्च से 24 तक, नहीं होंगे शुभ कार्य : नहीं होंगे शुभ कार्य 17 मार्च से 24 मार्च तक, लगा होलाष्टक </title>
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		<pubDate>Mon, 11 Mar 2024 16:40:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ज्योतिष शास्त्रानुसार प्रत्येक कार्य शुभ मुहूर्तों का शोधन करके करना चाहिए। यदि कोई भी कार्य शुभ मुहूर्त में किया जाता है, तो वह उत्तम फल प्रदान करता है। इस प्रकार प्रत्येक कार्य की दृष्टि से उसके शुभ समय का निर्धारण किया गया है। फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा होली से पहले के आठ दिन होलाष्टक कहलाते हैं। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>ज्योतिष शास्त्रानुसार प्रत्येक कार्य शुभ मुहूर्तों का शोधन करके करना चाहिए। यदि कोई भी कार्य शुभ मुहूर्त में किया जाता है, तो वह उत्तम फल प्रदान करता है। इस प्रकार प्रत्येक कार्य की दृष्टि से उसके शुभ समय का निर्धारण किया गया है। फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा होली से पहले के आठ दिन होलाष्टक कहलाते हैं। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया पंचांग के अनुसार, इस साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का प्रारंभ 16 मार्च को रात 09: 38 बजे से होगा, जिसका समापन 17 मार्च को रात 09:52 बजे पर होगा। ऐसे में होलाष्टक 17 मार्च से लगेगा और 24 मार्च को समाप्त होगा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट……</span></strong></p>
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<p><strong>ग्वालियर।</strong> फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा होली से पहले के आठ दिन होलाष्टक कहलाते हैं। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया पंचांग के अनुसार, इस साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का प्रारंभ 16 मार्च को रात 09: 38 बजे से होगा, जिसका समापन 17 मार्च को रात 09:52 बजे पर होगा। ऐसे में होलाष्टक 17 मार्च से लगेगा और 24 मार्च को समाप्त होगा। इसके बाद 25 मार्च को धुलैडी होली मनाई जाएगी। जैन ने बताया ज्योतिष शास्त्रानुसार प्रत्येक कार्य शुभ मुहूर्तों का शोधन करके करना चाहिए। यदि कोई भी कार्य शुभ मुहूर्त में किया जाता है, तो वह उत्तम फल प्रदान करता है। इस प्रकार प्रत्येक कार्य की दृष्टि से उसके शुभ समय का निर्धारण किया गया है। होलाष्टक के समय विशेष रूप से विवाह, ग्रह प्रवेश, मुण्डन संस्कार,वाहन खरीद, नए निर्माण व नए कार्यों को आरंभ नहीं करना चाहिए। ऐसा ज्योतिष शास्त्र का कथन है। अर्थात् इन दिनों में किए गए कार्यों से कष्ट, अनेक पीड़ाओं की आशंका रहती है तथा विवाह आदि संबंध विच्छेद और कलह का शिकार हो जाते हैं या फिर अकाल मृत्यु का खतरा या बीमारी होने की आशंका बढ़ जाती है।</p>
<p><strong>ग्रहों का स्वभाव रहता है उग्र</strong></p>
<p>होलाष्टक के दौरान सभी ग्रह उग्र स्वभाव में रहते हैं, जिसके कारण शुभ कार्यों का अच्छा फल नहीं मिल पाता है। होलाष्टक प्रारंभ होते ही प्राचीन काल में होलिका दहन वाले स्थान की गोबर, गंगाजल आदि से लिपाई की जाती थी। साथ ही वहां पर होलिका का डंडा लगा दिया जाता था, जिनमें एक को होलिका और दूसरे को प्रह्लाद माना जाता है।</p>
<p>जैन के अनुसार होलाष्टक के दौरान अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा को राहू उग्र स्वभाव में रहते हैं। इन ग्रहों के उग्र होने के कारण मनुष्य के निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो जाती है, जिसके कारण कई बार उससे गलत निर्णय भी हो जाते हैं और हानि की आशंका बढ़ जाती है। जिनकी कुंडली में नीच राशि के चंद्रमा और वृश्चिक राशि के जातक या चंद्र छठे या आठवें भाव में हैं उन्हें इन दिनों अधिक सतर्क रहना चाहिए।</p>
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