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	<title>Guru &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Guru &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>मानव जगत के लिए जीवन में गुरु का होना आवश्यक : जगत के लिए इतने उपकार किए हैं जिनका ऋण चुकाना संभव नहीं  </title>
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		<pubDate>Wed, 09 Jul 2025 13:42:19 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म में सच्चे देव शास्त्र गुरु के प्रति अकाट्य श्रद्धा होना ही जैन धर्म का मुख्य उद्देश्य है। सच्चे गुरु यानि वीतरागी सच्चे निग्रन्थ गुरु। गुरु ही हमारे लिए सर्वश्रेष्ठ है। गुरु ही मोक्ष मार्ग बताने वाले हैं। गुरु से ही नर से भगवान बना जाता है। गुरु ही भगवान व सृष्टि से रूबरू [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म में सच्चे देव शास्त्र गुरु के प्रति अकाट्य श्रद्धा होना ही जैन धर्म का मुख्य उद्देश्य है। सच्चे गुरु यानि वीतरागी सच्चे निग्रन्थ गुरु। गुरु ही हमारे लिए सर्वश्रेष्ठ है। गुरु ही मोक्ष मार्ग बताने वाले हैं। गुरु से ही नर से भगवान बना जाता है। गुरु ही भगवान व सृष्टि से रूबरू कराता है। गुरु ही हमें जीवन जीना सिखाता है। <span style="color: #ff0000">गुरु पूर्णिमा पर यह विशेष आलेख उदयभान जैन की कलम से&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> जैन धर्म में सच्चे देव शास्त्र गुरु के प्रति अकाट्य श्रद्धा होना ही जैन धर्म का मुख्य उद्देश्य है। सच्चे गुरु यानि वीतरागी सच्चे निग्रन्थ गुरु। गुरु ही हमारे लिए सर्वश्रेष्ठ है। गुरु ही मोक्ष मार्ग बताने वाले हैं। गुरु से ही नर से भगवान बना जाता है। गुरु ही भगवान व सृष्टि से रूबरू कराता है। गुरु ही हमें जीवन जीना सिखाता है। जैसे सूर्य के ताप से तपती भूमि को वर्षा शीतलता मिलती है, फसल पैदा करने की ताकत मिलती है। वैसे ही गुरु चरणों में शिष्यों को ज्ञान, शांति, भक्ति और योग शक्ति प्राप्त करने की शक्ति मिलती है। भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान देवताओं से भी ऊपर माना गया है। कबीर के दोहे से भी स्पष्ट है कि गुरु गोविंद दोनों खडे, काके लागू पाय। बलिहारी गुरु आपने, गोविन्द दियो बताय। सही राह दिखाने वाले गुरु हो तो कामयाब होने से कोई नहीं रोक सकता है। सच्चा गुरु आँखों के सामने सर्वाेच्च ब्रह्म है। सच्चे गुरुको मैं श्रद्धा से नमन करता है। बिना गुरु के आत्मोन्नति भी संभव नहीं है। वंदे गुरुणां गुण लब्धये जिस गुरु में सच्चे गुण है वैसा ही बनने के लिए नमस्कार करता हूँ। गुरु ही हमारे पूज्य है। गुरुओं ने ही आज मानव जगत के लिए इतने उपकार किए हैं जिनका ऋण चुका नहीं सकते।</p>
<p>गुरुओं ने ही हमको हमारे देव व शास्त्रों के बारे में बताया। गुरुओं ने ही हमारे संस्कारों के साथ मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर किया। यदि हमारे जीवन में गुरु नहीं हों तो जीवन भी शुरू नहीं है। मानव जीवन के लिए सच्चा गुरु होना आवश्यक है सच्चा गुरु यानि सभी बंधनों से मुक्त हों। गुरु वह है जो जीवन से कैसे जिया जाता है यह सिखता है, गुरु वे होते हैं जो वीतरागी हों, शांत हों, जिन्हें गर्मी, सर्दी, डांस, मच्छर, कुत्ते, सिंह आदि क्रूर से क्रूर, जन्तुओं का भूख, प्यास आदि का किसी भी प्रकार का शोक, खेद, चिन्ता, न हो, जिन्हें लजा, व ग्लानि के भाव नहीं आते हों, जिन्हे अपने तप, ज्ञान, व प्रतिष्ठा का अभिमान ही ना हो। इस प्रकार चारों कषायों को परास्त कर दिया हो, ऐसे वीतरागी सच्चे गुरु हैं। कुल मिलाकर यह है कि वीतरागी सच्चे गुरु वे हैं जो शान्ति के प्रतीक हैं, कषायों और पांचों इन्द्रियों के विजेता हों, अहिंसा, सत्य, ब्रह्ममर्च व परिग्रह इन पांचों महाव्रतों से सुशोभित हों।</p>
<p>ईया, भाषा, एषणा, आदान-निश्क्षेपण, व व्युत्सर्ग इन पाँच समिति रूपी कवच को धारण करने वाले हों। समता, वंदना, स्तुति, प्रतिक्रमण, स्वाध्याय व कायोत्सर्ग ये छः आवश्यक जिनके रक्षक हो। अन्तरंग जीवन हो, केश लोचन, अदन्तपोवन, स्नान रहित हो, एक बार में 24 घंटे में भोजन खड़े-खडे, हाथ में भोजन तथा भू-शयन। इन सात ब्रह्म गुणों के धारक हों। 28 मूल गुणों सहित जो उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संथम, तप, त्याग, आकिन्वयन, व ब्रह्मचर्य आदि 10 धर्मों के धारण करने वाले हों। इन्हीं गुणों से गुरु सच्चे गुरु हैं। गुरु के उपकारों व महिमा का कोई छोर नहीं है। यह सही है कि मानव जीवन के लिए गुरू परम उपकारी है। इसलिए जीवन में गुरु होना आवश्यक है।</p>
<p><strong>इन गुरुओं का स्मरण कर धन्य होंगे हम </strong></p>
<p>आज भी इस देश में सच्चे निग्रन्ध, वीतरागी गुरुओं की कमी नहीं है। में आज जो गुरु है उनका नाम लेना चाहूँगा और उनके श्री चरणों में नमन करना चाहता हूँ उनमें चारित्र चक्रवर्ती प्रथमाचार्य श्री शांतिसागरजी महाराज (दक्षिण), आचार्य श्री आदि सागरजी महाराज (अंकलीकर), आचार्य श्री शांतिसागरजी महाराज (छाणी) परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज, आचार्य श्री समय सागर जी महाराज, आचार्य श्री अनेकांत सागर जी, आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज, गणाचार्य श्री कुन्यु सागर जी महाराज, पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज, आचार्य श्री, पुष्पदंतजी महाराज, आचार्य श्री प्रशन्नसागर जी महाराज, आचार्य श्री प्रज्ञासागर जी महाराज, आचार्य श्री पुलक सागर जी महाराज, आचार्य श्री प्रज्ञ सागर जी महाराज, आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज, आचार्य श्री विशदसागर जी महाराज, आचार्य श्री देवनंदी जी महाराज, आचार्य श्री विहर्श सागर जी महराज, आचार्य श्री विमर्श सागर जी महाराज, आचार्य श्री ज्ञानभूषण जी महाराज, आचार्य श्री सुंदर सागरजी महाराज, पट्टाचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज, निर्मापक मुनि पुंगव श्री सुधा सागर जी महाराज, उपाध्याय श्री उर्ज्ज्यन्त सागर जी महाराज, मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज, मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज, मुनि श्री पावन सागर जी महाराज, मुनि श्री समत्य सागर जी महाराज, मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज, मुनि श्री अमित सागर जी, आदि समस्त आचार्य व मुनि महताज। आर्यिका साध्वी गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी, आर्यिका श्री चन्दनामती माताजी, श्री स्वस्तिभूषण माताजी, आर्यिका श्री विमलप्रभा माताजी, आर्यिका श्री सृष्टिभूषण माताजी, आर्यिका श्री पूर्णमती माताजी, आर्यिका श्री विज्ञाषी माताजी, आर्यिका श्री आर्षमती माताजी, आर्यिका श्री सुज्ञानमती माताजी, आदि समस्त आचार्य, उपाध्याय, साधु व आर्यिका माताजियों को संघ सहित शत-शत् नमन। गुरु भक्ति के रूप में गुरुओं के वचनों को घर-घर पहुंचाकर उनके बताये, निर्देश व शिक्षा की पालना जितना अधिक से अधिक करेंगे। ये ही हमारे सच्चे गुरुओं के प्रति सच्ची भक्ती होगी।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-84797" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250709-WA0021.jpg" alt="" width="1004" height="1504" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250709-WA0021.jpg 1004w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250709-WA0021-200x300.jpg 200w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250709-WA0021-684x1024.jpg 684w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250709-WA0021-768x1150.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250709-WA0021-990x1483.jpg 990w" sizes="(max-width: 1004px) 100vw, 1004px" />गुरुओं की वैष्यावृति, सच्चे मन से करना चाहिए </strong></p>
<p>बंधुओं, हमारा यह लेख लिखने का मूल उद्देश्य वे ही है कि आज हम सभी का गौरव है कि हमें आज चलते फिरते तीर्थकरों के रूप में गुरू मिले हैं. इन गुरुओं के बारे में हमारी वर्तमान युवा पीढ़ी इनकी त्याग, तपस्या, संयम को पहचाने और गुरू को समझे और हम सभी को यानि संस्थाओं व समाज को जिन मन्दिरों के पदाधिकारियों को जैन सोशल ग्रुपों को गुरुओं के आहार-विहार में जितना बन सके उससे अधिक करना चाहिये, गुरुओं की वैष्यावृति, सच्चे मन से करना चाहिये। सच्चे गुरू की सच्ची भक्ति करेंगे तो निश्चित रूप से हमारे कर्मों का क्षय होगा और हम गलत रास्ते पर न जाकर सही रास्ते पर जायेंगे। और समाज का उत्थान, विकास होगा और हम मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होंगे। आने वाली गुरु पूर्णिमा 10 जुलाई को संपूर्ण देश अपने-अपने गुरुओं को श्रद्धा से नमन करेगा। जिन्होंने अभी तक कोई गुरू नहीं बनाया तो वे अवश्य बनाये। चातुर्मास अवधि में, उनके आहार-विहार में सभी को सक्रिय रूप से आगे आकर श्रमण संस्कृति का संरक्षण करें, युवा वर्ग, कलमकार यानि पत्रकार, संपादक, संवाददाता भी गुरुओं के आहार-विहार में स्थानीय समाज को जगाएं और संबंधित थानों में उनके संरक्षण की व्यवस्था कराने में सहयोग करें। हमारी सभी शीर्ष संस्थाओं को योजनाबद्ध तरीके से इन चल तीर्थों मानि वीतरागी गुरुओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। पुनः एक बार सभी आचार्याे, उपाध्यायों, मुनियों व आर्यिकाओं को विस्वभाव से सच्चे मन से नमन।</p>
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		<title>गुरु का आकर्षण ही सही मायने में गुरुत्वाकर्षण : मुनि श्री निरंजन सागर जी: साइंस ऑफ लिविंग सत्र में गुरु की शक्ति के बारे में बताया  </title>
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		<pubDate>Sun, 05 Mar 2023 13:30:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गुरु की अवर्णनीय महिमा का वर्णन बस इतना ही है कि प्रतिपल उनका जाप, उनका नाम ,आपके मन पर ,वचनों पर, और शरीर के एक एक अवयव पर स्पंदित होता रहे ।गुरु यह एक ऐसा महान, अनंत, अक्षय अक्षर है जिसका कभी क्षरण नहीं होता, और जो इसको जपले उसका कभी अकाल मरण नहीं होता। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>गुरु की अवर्णनीय महिमा का वर्णन बस इतना ही है कि प्रतिपल उनका जाप, उनका नाम ,आपके मन पर ,वचनों पर, और शरीर के एक एक अवयव पर स्पंदित होता रहे ।गुरु यह एक ऐसा महान, अनंत, अक्षय अक्षर है जिसका कभी क्षरण नहीं होता, और जो इसको जपले उसका कभी अकाल मरण नहीं होता। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए जयकुमार जलज व राजेश रागी की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुण्डलपुर।</strong> गुरु की अवर्णनीय महिमा का वर्णन बस इतना ही है कि प्रतिपल उनका जाप, उनका नाम ,आपके मन पर ,वचनों पर, और शरीर के एक एक अवयव पर स्पंदित होता रहे ।गुरु यह एक ऐसा महान, अनंत, अक्षय अक्षर है जिसका कभी क्षरण नहीं होता, और जो इसको जपले उसका कभी अकाल मरण नहीं होता। गुरु का आकर्षण ही सही मायने में गुरुत्वाकर्षण है। मुनि श्री निरंजन सागर जी महाराज ने साइंस ऑफ लिविंग के सत्र में गुरु की गुरुत्वाकर्षण शक्ति के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि &#8220;गुरु की महिमा वर्णी न जाए गुरु नाम जपो मन वचन काय&#8221;।</p>
<p>पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण तो नाम मात्र का है। गुरु आपको ईर्ष्यालु नहीं, बल्कि सही इंसान बनाकर ईश्वर बनने का मार्ग बताते हैं। गुरु आपको क्रूर नहीं, बल्कि करुणावान बनने की सीख देते हैं। गुरु आपके जीवन को शल्य से रहित होकर वात्सल्य से भर देते हैं। एक शिष्य बहुत अध्ययन करना चाहता था। उसने अपने गुरुजी से कहा मैं अध्ययन करना चाहता हूं। गुरुजी ने कहा ठीक है अध्ययन करना है तो यह किताबें ले आओ इनका अध्ययन किसी एकांत स्थान पर करना।</p>
<p>तुम्हें ज्ञान प्राप्त हो जाएगा। अगर उसने गुरु जी से कहा होता कि मैं जीवन का सार जीवन का अनुभव प्राप्त करना चाहता हूं। तो शायद गुरु ऐसी सलाह नहीं देते। उसने कहा ज्ञान हासिल करना है। आज हम बच्चों को किताबों का ज्ञान दिलाने ही तो भेजते हैं बाहर। उसे अपने जीवन के अनुभव नहीं सिखाते उसे अपने से दूर रखते हैं ,दूर भेजते हैं। कि जाओ तुमको ज्ञान दिलवा रहे हैं। पहले लोग अपने बच्चों को अपने पास रखते थे। अपने जीवन के अनुभव देते थे। ज्ञान तो अपने आप आ जाता था।</p>
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		<title>श्रावकों ने समर्पित किए 128 अर्घ्य : सदगुरु के बगैर जीवन बेकार- आर्यिका अंतरमति माता जी </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 04 Mar 2023 14:46:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर के पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन अटामंदिर में विराजमान आर्यिकारत्न आदर्शमति माता जी संघस्थ प्रभावक आर्यिका अतंरमति माता जी ने अष्टान्हिका पर्व पर आयोजित सिद्धचक्र विधान में प्रवचन दिए। इस मौके पर अनेक कार्यक्रम हुए। पढ़िए राजीव सिंघई की रिपोर्ट&#8230; ललितपुर। गुरु के बिना जीवन को अधूरा बताते हुए आर्यिका अंतरमति माता जी ने कहा कि [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>नगर के पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन अटामंदिर में विराजमान आर्यिकारत्न आदर्शमति माता जी संघस्थ प्रभावक आर्यिका अतंरमति माता जी ने अष्टान्हिका पर्व पर आयोजित सिद्धचक्र विधान में प्रवचन दिए। इस मौके पर अनेक कार्यक्रम हुए। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजीव सिंघई की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> गुरु के बिना जीवन को अधूरा बताते हुए आर्यिका अंतरमति माता जी ने कहा कि जीवन में सदगुरु न हो तो जीवन बेकार है। जीवन में गुरु जरूरी है। आर्यिका श्री ने कहा कि गुरु अंधेरे से उजाले में ले जाने का माध्यम है, जिनके द्वारा जीवन के दुर्गुणों को दूर करने का मार्ग प्रशस्त होता है और सदमार्ग की प्रेरणा मिलती है। गुरु के बिना बुद्ध और शक्ति जीवन में अनर्थ करती है। नगर के पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन अटामंदिर में विराजमान आर्यिकारत्न आदर्शमति माता जी संघस्थ प्रभावक आर्यिका अतंरमति माता जी ने उक्त उदगार अष्टान्हिका पर्व पर आयोजित सिद्धचक्र विधान में व्यक्त किए।</p>
<p>आर्यिका श्री के सानिध्य में प्रातःकाल प्रभु का अभिषेक शान्तिधारा पुण्यार्जक परिवार द्वारा की गई, जिसमें आर्यिका श्री के अतिरिक्त आर्यिका अनुनयमति जी, आर्यिका श्वेतमति जी, आर्यिका संवरमति जी, आर्यिका शैलमति माता जी विराजमान रहीं। विधान प्रतिष्ठाचार्य पं. विनीत शास्त्री सांगानेर के मार्गदर्शन में हुआ, जिसमें श्रावकों ने 128 अर्घ्य भक्ति पूर्वक समर्पित किए। विधान में सौधर्म इन्द्र ललित कुमार दीपक जैन एवं मैनासुन्दरी का पुण्यार्जन सुरेन्द्र सराफ ने किया।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-39232" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230304-WA0027.jpg" alt="" width="1298" height="777" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230304-WA0027.jpg 1298w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230304-WA0027-300x180.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230304-WA0027-1024x613.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230304-WA0027-768x460.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230304-WA0027-990x593.jpg 990w" sizes="(max-width: 1298px) 100vw, 1298px" /></p>
<p>विधान में साधु वैयावृत्ति महिला मण्डल, नंदा सुनंदा महिला मण्डल, जिनवाणी सुरक्षा मण्डल, चन्द्रप्रभु महिला मण्डल, पूर्णमति महिला मण्डल, आदर्श श्राविका महिला मण्डल ने विधान की द्रव्य सामग्री भक्ति पूर्वक समर्पित की, जिसमें संगीतकार प्रदीप जैन बाहुबलिनगर ने श्रावकों को प्रभु की भक्ति कराई। इसमें श्रावक भक्ति में झूम उठे। सायंकाल श्रीजी के सम्मुख श्रावकों ने भक्ति पूर्वक आरती कर पुण्यार्जन किया। विधान में मंदिर प्रबधक भगवानदास कैलगुवा, कपूरचंद लागौन, मंत्री सतीश नजा, धार्मिक आयोजन संयोजक मनोज जैन बबीना, अखिलेश गदयाना, डॉ. संजीव कडंकी, प्रेमचंद विरधा, मनोज जैन, संजय सराफ, ज्ञानचंद कुम्हैण्डी, प्रमोद जैन गुरसौरा, नरेश जेन मुक्ता, नीलेश जैन मसौरा, ऋषभ जैन, सचिन जैन लागौन के अतिरिक्त अनीता मोदी, वीणा जैन, नीलम सराफ, सिलोचना जैन, सरिता जैन गुगरवारा, समता जैन, करूणा जैन, अंजली सराफ, संगीता नायक, श्वेता जैन, रागनी जैन, मोहनी कठरया, इन्दिरा जैन, नीलम कामरा आदि का विशेष योगदान मिल रहा है। गौरतलब रहे कि इन दिनों आर्यिका रत्न आदर्शमति माता जी संघ सहित दयोदय पशु संरक्षण केन्द्र गौशाला ललितपुर एवं आर्यिका अंतरमति माता जी संघ सहित पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन अटामदिर में विराजमान है, जहां अपूर्व धर्मप्रभावना हो रही है।</p>
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		<title>सम्मेदशिखर जी : आचार्य प्रसन्न सागर जी महाराज के सानिध्य में मनाया मुनिसुब्रतनाथ भगवान का निर्वाण महोत्सव </title>
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		<pubDate>Fri, 17 Feb 2023 16:04:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अन्तर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज के सानिध्य में निमियाघाट जैन मंदिर में प्रातः गुरु भक्ति के साथ सैकड़ों लोगों ने अतिशय कारी चिंतामणि श्री पारसनाथ भगवान और श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान का महामस्तकाभिषेक किया। पढ़िए राजकुमार अजमेरा की विशेष रिपोर्ट&#8230; निमियाघाट (पारसनाथ)। अन्तर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज के सानिध्य में निमियाघाट जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अन्तर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज के सानिध्य में निमियाघाट जैन मंदिर में प्रातः गुरु भक्ति के साथ सैकड़ों लोगों ने अतिशय कारी चिंतामणि श्री पारसनाथ भगवान और श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान का महामस्तकाभिषेक किया। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजकुमार अजमेरा की विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>निमियाघाट (पारसनाथ)।</strong> अन्तर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज के सानिध्य में निमियाघाट जैन मंदिर में प्रातः गुरु भक्ति के साथ सैकड़ों लोगों ने अतिशय कारी चिंतामणि श्री पारसनाथ भगवान और श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान का महामस्तकाभिषेक किया। अभिषेक के साथ अन्तर्मना के मुखारविंद से विश्व शांति धारा वाचन किया गया। इसके पश्चात मुनिसुब्रतनाथ भगवान की प्रतिमा के समक्ष पूजन के साथ निर्वाण लाडू भक्ति भाव के साथ चढ़ाया गया।</p>
<p><strong>आलोचना सुनकर नहीं, बल्कि प्रशंसा सुनकर हो रहे हैं बर्बाद </strong></p>
<p>अन्तर्मना आचार्य श्री ने अपने प्रवचन में कहा कि एक निर्वाण कांड पढ़ने से 64 तीर्थ का दर्शन का पुण्य मिलता है और एक बार पहाड़ की वंदना करने से अनंतानंत पुण्य का संचय होता है। फूलों ने कभी भंवरे को आमंत्रित नहीं किया कि आओ मैं खिल गया हूं, मेरा मकरंद लो। सूरज कभी नहीं कहता कि मेरे में कितना तेज है। सागर कभी नहीं कहता कि मैं कितना गहरा हूं। आज हम आलोचना सुनकर नहीं, बल्कि प्रशंसा सुनकर बर्बाद हो रहे हैं। स्वयं की प्रशंसा सुनकर फूलना यानि दुःख में कूदने का निमंत्रण है। आज हमारी सबसे बड़ी कमजोरी स्वयं की प्रशंसा सुनना बन गया है। जब तक लोग हमारी प्रशंसा करते हैं, गुणानुवाद करते हैं, तब तक वो हमारे परम मित्र हैं, परम भक्त हैं, परम हितैषी हैं।</p>
<p>बल्कि होना ये चाहिए कि हम अपने गुणों को, सत्कार्यों को, नेक कार्यों को, इतना श्रेष्ठ बनाएं, जिससे सामने वाला आपको देखकर आपका मुरीद हो जाए। गुणों से प्रभावित होने वाले, हो सकता है कि आपके सामने आपकी प्रशंसा ना करें लेकिन मन ही मन आपको अपना आदर्श बना कर अपनी चेतना को प्रकाशित कर लेंगे। इसलिए कोई भी कार्य करें तो प्रशंसा सुनने की अपेक्षा न रखें। अपने कार्य को इतनी ईमानदारी और मनोभाव से करें कि शत्रु भी आपकी सफलता एवं समर्पण के सामने नतमस्तक हो जाए। इससे पहले दिन में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के सभी पदाधिकारियों ने आचार्य श्री को पूर्ण तैयारी की जानकारी दी। शाम को भव्य गुरुभक्ति की गई। इस कार्यक्रम में विशेष रूप से आकाश जैन, बिट्टू जैन भोपाल, कोडरमा से आशीष जैन, पिंटू जैन, संजय, राज कुमार अजमेरा, धनबाद से वंदना -मनोज जैन, गिरिडिह से राजन साह आदि उपस्थित थे।</p>
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