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	<title>glory &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>तमिलनाडु का भू-भाग: आदिनाथ व जैन तीर्थंकरों की अतिप्राचीन प्रतिमाओं से समृद्ध </title>
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		<pubDate>Tue, 25 Mar 2025 13:40:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[तमिलनाडु में जैन धर्म की तीर्थंकर प्रतिमाएं एवं मंदिर मौजूद है। यहां के गौरवशाली इतिहास को काफी नुकसान हुआ है। परन्तु अभी भी जो अवशेष बच गये है वे इतनी संख्या में पहाड़ों, कंदराओं, जंगलों और गांवों में उपलब्ध है। वे इसकी प्राचीन गौरवगाथा पर भरपूर प्रकाश डालते है। पढ़िए इंदौर से ओम कीर्ति पाटोदी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>तमिलनाडु में जैन धर्म की तीर्थंकर प्रतिमाएं एवं मंदिर मौजूद है। यहां के गौरवशाली इतिहास को काफी नुकसान हुआ है। परन्तु अभी भी जो अवशेष बच गये है वे इतनी संख्या में पहाड़ों, कंदराओं, जंगलों और गांवों में उपलब्ध है। वे इसकी प्राचीन गौरवगाथा पर भरपूर प्रकाश डालते है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए इंदौर से ओम कीर्ति पाटोदी की यह पूरी खबर&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> भारत के कोने-कोने में जैन धर्म की तीर्थंकर प्रतिमाएं एवं मंदिर मौजूद है। इसमें तमिलनाडु का विशेष स्थान है। हालांकि काल के थपेडों ने यहां के गौरवशाली इतिहास को काफी नुकसान पहुंचाया है। परन्तु अभी भी जो अवशेष बच गये है वे इतनी संख्या में पहाड़ों, कंदराओं, जंगलों और छोटे छोटे गांवों में उपलब्ध है। वे इसकी प्राचीन गौरवगाथा पर भरपूर प्रकाश डालते है।</p>
<p><strong>जैन धर्मावलंबी भी अपरिचित</strong></p>
<p>यहां के जैन जनसंख्या में कम होने से यहां के जैन मन्दिरों और तीर्थ स्थलों की जानकारी हमारे पास कम ही है। जैन धर्म के लोग भी इनसे अपरिचित से है। उक्त जानकारी देते हुए वर्द्धमानपुर शोध संस्थान के ओम पाटोदी ने बताया कि आदि तीर्थंकर भगवान श्री आदिनाथ स्वामी से लेकर अन्तिम तीर्थंकर भगवान श्री महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक महोत्सव के अवसर पर आज हम तमिलनाडु के स्थानों की जानकारी एवं वहां मौजूद आदिनाथ स्वामीजी की प्रतिमाओं से रूबरू करवा रहे हैं।</p>
<p><strong>विभिन्न स्थानों पर दर्शनीय मूर्तियॉ हैं</strong></p>
<p>तमिलनाडु में आचार्य अकलंक देव की तपोभूमि के नाम से प्रसिद्ध तिरक्कोइल हिल है। जिसे थिरकोइल हिल भी कहा जाता है, यहां पर एक छोटी-सी प्राचीन पहाड़ी है। जहां पर गोल उन्नत चट्टान है। जिसके चारों ओर भगवान आदिनाथ, चंद्रप्रभ, पारसनाथ एवं भगवान महावीर की अतिप्राचीन दर्शनीय पद्मासन मूर्तियां है। जैसे ही हम पहाड़ी पर चढ़ते हैं तो हमें सर्वप्रथम आदि तीर्थंकर आदिनाथ के दर्शन होते हैं। इसी प्रकार कांचीपुरम जिले जिसे जिनकाशी के नाम से भी जाना जाता है। इस जिले में एक जैन तीर्थ थिरूपरूत्तिकुंड्रम है, यह क्षेत्र लगभग 2500 वर्ष प्राचीन है।</p>
<p><strong>85 जैन मन्दिर नष्ट होकर अतिक्रमण </strong></p>
<p>पहले यहां पर 85 जैन मन्दिर थे जो धार्मिक विद्वेष के कारण या तो नष्ट कर दिये गये अथवा अतिक्रमण कर लिए गए हैं। यह तीर्थ अतिशय क्षेत्र के नाम से प्रसिद्ध है इसमें आदिनाथ भगवान की अत्यंत प्राचीन प्रतिमा उपलब्ध है यह क्षेत्र जैन इतिहास एवं स्थापत्य कला से समृद्ध है। कांचीपुरम जिले में ही आरपाक्कम् जैन अतिशय क्षेत्र है यहां पर श्री आदिपट्टाराकट नाम से एक विशाल जैन मंदिर है। जिसमें मूल नायक भगवान श्री आदिनाथ स्वामी विराजमान हैं यह क्षेत्र तमिलनाडु के कुल देवता के रूप में आस्था का केंद्र है। यहां पर जैन-अजैन सभी लोग आते हैं। इसी प्रकार तमिलनाडु में सैकड़ों ऐसे जैन धर्म के स्थान मौजूद है जिनके बारे में देश के लोग कम ही जानकारी रखते हैं।</p>
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		<title>कविता : जगत पूज्य की महिमा </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 19 Feb 2023 11:06:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कविता]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160; -सौरभ जैन भयंकर चंदेरी इशूरवारा की धरती पर जन्म हुआ था गुरुवर का अद्भुत पुण्य उदय में आया, धारा भेष दिगंबर का जय जयकार हुई ऐसी कि जयकुमार ही नाम हुआ विद्या गुरु की शरण मिली तो फिर जीवन सुखधाम हुआ शांति देवी की गोद में खेले रूप पिता की छाया में आगम के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><strong>-सौरभ जैन भयंकर चंदेरी</strong></p>
<p>इशूरवारा की धरती पर जन्म हुआ था गुरुवर का अद्भुत पुण्य उदय में आया, धारा भेष दिगंबर का</p>
<p>जय जयकार हुई ऐसी कि जयकुमार ही नाम हुआ विद्या गुरु की शरण मिली तो फिर जीवन सुखधाम हुआ</p>
<p>शांति देवी की गोद में खेले रूप पिता की छाया में आगम के अनुरागी थे सो लिप्त हुए ना माया में</p>
<p>दर्श किए विद्या गुरु के वैराग्य स्वयं में धार लिया मुनि दीक्षा को धारण करके हम सब का उद्धार किया</p>
<p>भक्तों का उद्धार किया वचनों के सिद्धि दायक है यही मुक्ति के पंथ प्रदर्शक निजता के अनुशासक हैं</p>
<p>देव चरण मे आकर जिनके अपना माथा धरते हैं जगतपूज्य उन गुरुचरणों में हम सब वंदन करते हैं</p>
<p>भजकर जिनका नाम हजारों मनुज धन्य हो जाते हैं गौशाला से विद्यालय तक जो निर्माण कराते हैं</p>
<p>गंदोधक से मिट जाते हैं कितने कष्टों के अंबार जिनके समाधान से मिलती जिनवाणी की अमृत धार</p>
<p>सांगानेर चांदखेड़ी में जिन प्रतिमा अवतरित हुई सब जीवों पर कृपा दृष्टि भी जिनवर की अनवरत हुई</p>
<p>ललितपुर में सहत्रकुट बिजोलिया गगन बिहारी है गोलाकोट के बड़े बाबा भी कितने अतिश्यकारी हे</p>
<p>जबलपुर हनुमान ताल भक्तांबर के स्वर गूंज रहे सिरोंज नारेली चमलेश्वर नाम शिखर को चूम रहे</p>
<p>थूबोन जी का बदला नक्शा खड़े बाबा चमत्कारी है जगत पूज्य के पावन चरणों की महिमा भी न्यारी है</p>
<p>देवगढ़ के कण कण में अतिशय दिखे अपार हे पुण्योदय से शवोदय तक तीर्थों की बहार है</p>
<p>श्रमण संस्कृति संस्थान ने धर्म का परचम लहराया चैतनोदय भी आपकी कृपा से गुरुवर हे पाया</p>
<p>तीर्थों के उद्धारक हैं जिज्ञासा का समाधान यही संस्कार शिविर के प्रेरणा श्रोत्रहम सबके भगवान यही</p>
<p>चरणों में अर्पित शब्दों की गुणमाला गुरुवर करे प्रणाम जगत पूज्य के दर्शन से मिल जाते है चारों ही धाम</p>
<p>क्या होती है गुरु की भक्ति कैसे गुरु का ध्यान करें हनुमान तुम विद्या गुरु के विद्या गुरु में राम मिले</p>
<p>गुरुवर के पग धरे भाल पर सारे तीर्थ दिखाते है नयनों से जल अर्पित करके तीर्थ बंधन कर जाते है</p>
<p>जिनकी दहाड़ सिंह सारिकी कड़वा सच जो कहते हैं मगर गुरु की शरण मिले तो बालक बनकर रहते हैं</p>
<p>विद्या गुरु के सुधा सिंधु के हम सब गुण को गाते हैं जो गुरुवर को ध्याते हैं वह गुरुवर के हो जाते हैं</p>
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