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	<title>Girnar &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>गिरनार के जाँबाज़ तीर्थ रक्षकों का इंदौर में भव्य अभिनंदन : विश्व जैन संगठन और समाज जन ने गिरनार यात्रा में योगदान करने वालों का किया सम्मान </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 05 Oct 2025 04:50:57 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इंदौर में गिरनार तीर्थ रक्षकों के सम्मान समारोह का आयोजन हुआ। इस अवसर पर विश्व जैन संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री संजय जैन जी उपस्थित रहे। समारोह में तीर्थ रक्षकों के समर्पण और संघर्षों की गाथा को सराहा गया। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट… इंदौर। गिरनार तीर्थ के जाँबाज़ तीर्थ रक्षकों का अभिनंदन समारोह [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>इंदौर में गिरनार तीर्थ रक्षकों के सम्मान समारोह का आयोजन हुआ। इस अवसर पर विश्व जैन संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री संजय जैन जी उपस्थित रहे। समारोह में तीर्थ रक्षकों के समर्पण और संघर्षों की गाथा को सराहा गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर</strong>। गिरनार तीर्थ के जाँबाज़ तीर्थ रक्षकों का अभिनंदन समारोह समाज के लिए गर्व का अवसर था। विश्व जैन संगठन के प्रचारक एवं इंदौर ईकाई के युवा अध्यक्ष मंयक जैन ने कहा कि “संघर्षों में जो डटे, जीत उन्हीं की होती है। नेमीनाथ की कृपा से, हर बाधा दूर होती है।”</p>
<p>इस अवसर पर उन सभी समाज जनों का सम्मान किया गया, जिन्होंने गिरनार यात्रा को सफल बनाने में अपना बहुमूल्य योगदान दिया। दद्दू ने कहा कि राहों में चुनौतियाँ आईं, पर समाज की एकजुटता और निष्ठा ने हर बाधा को पार किया। यह सम्मान उनके मेहनत और समर्पण को समर्पित है।</p>
<p>समारोह में राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री संजय जैन जी के इंदौर आगमन पर समाज जन ने उन्हें स्वागत किया। उपस्थित लोगों ने तीर्थ रक्षकों और पुण्यर्जको को सम्मानित किया, जिन्होंने गिरनार की पवित्रता को बनाए रखने में आर्थिक और सामाजिक योगदान दिया।</p>
<p><strong>कार्यक्रम विवरण:</strong></p>
<p>• मुख्य अतिथि: श्री संजय जैन जी (राष्ट्रीय अध्यक्ष, विश्व जैन संगठन)</p>
<p>• दिन व दिनांक: सोमवार, 6 अक्टूबर 2025</p>
<p>• समय: शाम 6:30 बजे से 8:15 बजे तक</p>
<p>• स्थान: अभिनव कला समाज, प्रथम तल सभागार (1st Floor Auditorium), स्टेट प्रेस क्लब, एम.जी. रोड, इंदौर</p>
<p>निवेदक: विश्व जैन संगठन और सकल जैन समाज, इंदौर</p>
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		<title>भगवान नेमिनाथ का जन्म और तप कल्याणक 30 जुलाई को : तिथि के अनुसार दोनों कल्याणक श्रावण शुक्ल छठ को मनाए जाएंगे  </title>
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		<pubDate>Tue, 29 Jul 2025 08:42:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ जन्म औ तप कल्याणक 30 जुलाई को मनाया जाएगा। तिथि अनुसार भगवान नेमिनाथ के दोनों महत्वपूर्ण कल्याणक श्रावण शुक्ल छठ को आते हैं। जैन धर्म और ग्रंथों के अनुसार 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ के जन्म और तप कल्याणक एक महत्वपूर्ण घटना है। श्रीफल जैन न्यूज की विशेष पेशकश [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ जन्म औ तप कल्याणक 30 जुलाई को मनाया जाएगा। तिथि अनुसार भगवान नेमिनाथ के दोनों महत्वपूर्ण कल्याणक श्रावण शुक्ल छठ को आते हैं। जैन धर्म और ग्रंथों के अनुसार 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ के जन्म और तप कल्याणक एक महत्वपूर्ण घटना है। <span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज की विशेष पेशकश में आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित जानकारी&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर</strong>। जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ जन्म औ तप कल्याणक 30 जुलाई को मनाया जाएगा। तिथि अनुसार भगवान नेमिनाथ के दोनों महत्वपूर्ण कल्याणक श्रावण शुक्ल छठ को आते हैं। जैन धर्म और ग्रंथों के अनुसार 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ के जन्म और तप कल्याणक एक महत्वपूर्ण घटना है। उनका जन्म राजा समुद्रविजय और रानी शिवादेवी के यहां शौरीपुर में हुआ था। नेमिनाथ भगवान का विवाह तय होने के बाद जब वे बारात लेकर जा रहे थे तब रास्ते में पशुओं की क्रूरता देखकर उनका मन विरक्त हो गया और उन्होंने दीक्षा लेने का निर्णय लिया। उन्होंने गिरनार पर्वत पर दीक्षा ली और कठोर तपस्या करके केवल ज्ञान प्राप्त किया. किवदंती है कि उनके पिता राजा समुद्रविजय भगवान कृष्ण के पिता वासुदेव के भाई थे। इसलिए नेमिनाथ भगवान और कृष्ण भगवान चचेरे भाई थे। रानी शिवादेवी ने भगवान के गर्भ में आने से पहले 14 स्वप्न देखे थे। उनका नाम अरिष्टनेमि रखा गया था। विवाह के लिए जाते समय, नेमिनाथ ने देखा कि विवाह समारोह में पशुओं की हत्या की जाएगी, जिससे उनका मन विचलित हो गया।</p>
<p>उन्होंने दीक्षा लेने का फैसला किया और गिरनार पर्वत पर जाकर दीक्षा ली। वहां उन्होंने कठोर तपस्या की और केवल ज्ञान प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने अहिंसा का उपदेश प्रसारित करने के लिए पूरे देश में विहार किया। अंत में उन्होंने गिरनार पर्वत पर ही निर्वाण प्राप्त किया। नेमिनाथ भगवान का रंग काला था और आज भी मंदिरों में उनकी मूर्तियां काले रंग की ही होती हैं। उनके जीवन की घटनाओं को जैन धर्म में बहुत महत्व दिया जाता है और उनके जन्म और तप कल्याणक दिवस को उत्साह के साथ मनाया जाता है।</p>
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		<title>भगवान नेमिनाथ का मोक्ष कल्याणक 2 जुलाई को:  तिथि अनुसार आषाढ़ शुक्ल सप्तमी को मनाया जाएगा </title>
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		<pubDate>Wed, 02 Jul 2025 04:19:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ का मोक्ष कल्याणक पूर्ण भक्ति भावना के साथ 2 जुलाई को मनाया जाएगा। तिथि के अनुसार यह आषाढ़ शुक्ल सप्तमी को आता है। इस दिन भगवान नेमिनाथ ने अपने सभी कर्मों को नष्ट कर मोक्ष गमन किया था। श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रृंखला में आज पढ़िए, उपसंपादक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ का मोक्ष कल्याणक पूर्ण भक्ति भावना के साथ 2 जुलाई को मनाया जाएगा। तिथि के अनुसार यह आषाढ़ शुक्ल सप्तमी को आता है। इस दिन भगवान नेमिनाथ ने अपने सभी कर्मों को नष्ट कर मोक्ष गमन किया था। <span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रृंखला में आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह विशेष संकलित प्रस्तुति&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैन धर्म आदि से अनादि है। इस धर्म में तीर्थंकरों ने अवतरण लेकर अपने तप, संयम, त्याग और तपस्या से जैन समाज को धर्म, ज्ञान और आध्यात्मिक शक्तियों से परिचित करवाया। जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ ने भी जैन धर्म की धर्म ध्वजा को आगे रखते हुए अपने जन्म, तप और ज्ञान तथा साधना से सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह आदि के माध्यम से समाजजनों को आध्यात्मिक चेतना से परिपूर्ण कर मोक्ष मार्ग की ओर प्रवृत किया। भगवान नेमिनाथ ने आषाढ़ शुक्ल सप्तमी को जूनागढ़ के पास गिरनार पहाड़ियों पर मोक्ष प्राप्त किया था और एक सिद्ध बन गए, एक मुक्त आत्मा जिसने अपने सभी कर्मों को नष्ट कर दिया है। महावीर, पार्श्वनाथ और ऋषभनाथ के साथ नेमिनाथ उन चौबीस तीर्थंकरों में से एक हैं, जो जैनियों के बीच सबसे अधिक भक्ति पूजा को आकर्षित करते हैं।</p>
<p><strong>इस बार खास है भगवान नेमिनाथ का मोक्ष कल्याण </strong><br />
इस बार भगवान नेमिनाथ का मोक्ष कल्याणक बहुत खास है। इस दिन समूचे देश में भगवान के मंदिरों में मोक्ष कल्याण के अवसर पर अभिषेक, शांतिधारा, अर्घ्य समर्पण सहित अनेकानेक विधान कर निर्वाण पाठ करते हुए भगवान को निर्वाण लाडु चढ़ाया जाएगा। साथ ही इस बार जैन समाज के 22 वें जैन तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर धर्म पद यात्रा का शुभारंभ दिल्ली से किया गया। इसका समापन गिरनारजी में भगवान के चरणों में निर्वाण लाडु समर्पित कर पूजा-अर्चना के साथ होगा। इस पद यात्रा का मुख्य उद्देश्य गिरनार पर्वत पर कब्जे को रोकना है। जैन समाज द्वारा अहिंसक तरीके से पद यात्रा का निर्णय लिया गया है।</p>
<p>यह यात्रा अब गिरनारजी के करीब-करीब पहुंच चुकी है। धर्मपद यात्रा में शामिल लोगों ने बताया कि गिरनारजी में जैन समाज के साधुओं पर अत्याचार किया गया और जैन समाज के लोगांे को दर्शन करने से रोका जाता था। जिसमें आचार्य निर्मल सागर ने भी इस पर कब्जे और अत्याचार रोकने के लिये प्रयास किया था। इन्ही कारणों को लेकर जैन समाज ने एकजुटता दिखाकर 23 मार्च से 2 जुलाई भगवान नेमिनाथ के मोक्ष कल्याणक तक पद यात्रा का आयोजन कर गिरनार पहुंचना सुनिश्चित किया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार गुरुगल रिचर्स इंटरनेशनल के डायरेक्टर डॉ. अमित जैन एवं रीनू जैन एडवोकेट ने गिरनार यात्रा के अध्यक्ष संजय जैन को अपना ऑफिशियल समर्थन पत्र भी विगत दिनों सौंपा था। इस धर्मपद यात्रा में साधु-संतों के साथ बड़ी संख्या में देश के हर शहर से बड़ी संख्या में दिगंबर जैन समाज की महिला और पुरुष शामिल होकर भगवान नेमिनाथ के मोक्ष कल्याणक स्थल गिरनारजी की पांचवी टोंक पर पूजा-आराधना को आतुर हैं।</p>
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		<title>जज्बा और जुनून दिव्यांग ने की गिरनार के पांच टोक की पैदल वंदना: नेमीनाथ भगवान की चरण वंदना एवं महाअर्चना विधान का भव्य आयोजन किया गया </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 28 Oct 2024 13:01:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सकल दिगम्बर जैन समाज ऋषभदेव के 1000 से भी ज्यादा सदस्यों ने भाग लिया। गुरुदेव के आशीर्वाद से पूरी यात्रा निर्विघ्न संपन्न हुई । मीडिया के सचिन गंगावत ने बताया कि यात्रा के दूसरे दिन सभी सदस्यों ने गिरनार के उर्जयंत शिखर की वंदना की जिसमे 6 मुखबधिर भी शामिल थे। साथ ही उन्होंने बताया [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सकल दिगम्बर जैन समाज ऋषभदेव के 1000 से भी ज्यादा सदस्यों ने भाग लिया। गुरुदेव के आशीर्वाद से पूरी यात्रा निर्विघ्न संपन्न हुई । मीडिया के सचिन गंगावत ने बताया कि यात्रा के दूसरे दिन सभी सदस्यों ने गिरनार के उर्जयंत शिखर की वंदना की जिसमे 6 मुखबधिर भी शामिल थे। साथ ही उन्होंने बताया कि पूरी यात्रा में ऋषभदेव के बलवंत बल्लू जिन्होंने दिव्यांग होने के बावजूद भी पूरी 5 टोंक की पैदल वंदना की। <span style="color: #ff0000">ऋषभदेव से सचिन गंगावत की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ऋषभदेव.</strong> देवाधिदेव 1008 श्री ऋषभदेव भगवान की असीम कृपा से एवं भारत गौरव राष्ट्र संत, मनोग्याचार्य, जिनशर्नम तीर्थ प्रणेता आचार्य श्री पुलक सागर जी गुरुदेव के मंगल आशीर्वाद से सिद्ध भूमि श्री गिरनार जी के ( उर्जयंत शिखर ) पर तीर्थंकर श्री 1008 नेमीनाथ भगवान की चरण वंदना एवं महाअर्चना विधान का भव्य आयोजन किया गया। यात्रा के संयोजक सुमेश मधु वानावत (एसएमटी ) ने बताया कि यह आयोजन दिनाक 23 से 25 अक्टूबर तक आयोजित किया गया। यह पूरी यात्रा भोपाल मध्यप्रदेश निवासी संगपति एवं पुण्यार्जक प्रदीप &#8220;मामा&#8221;_प्रतिभा &#8220;मामी&#8221;, राहुल जिम्मी, रेयान जैन, कृतज्ञ, लवली, सुनय, रिया परिवार हैं। यात्रा संयोजक सुमेश वानावत ने बताया कि इस आयोजन में सकल दिगम्बर जैन समाज ऋषभदेव के 1000 से भी ज्यादा सदस्यों ने भाग लिया। गुरुदेव के आशीर्वाद से पूरी यात्रा निर्विघ्न संपन्न हुई । मीडिया के सचिन गंगावत ने बताया कि यात्रा के दूसरे दिन सभी सदस्यों ने गिरनार के उर्जयंत शिखर की वंदना की जिसमे 6 मुखबधिर भी शामिल थे। साथ ही उन्होंने बताया कि पूरी यात्रा में ऋषभदेव के बलवंत बल्लू जिन्होंने दिव्यांग होने के बावजूद भी पूरी 5 टोंक की पैदल वंदना की।</p>
<p>दिव्यांगता को आनंद मानकर जीने की कला में महारत रखने वाले ऋषभदेव के राष्ट्रीय कवि एवं पुलक मंच के राष्ट्रीय सांस्कृतिक मंत्री बलवंत बल्लु ने सिद्ध क्षेत्र गिरनार की पैदल यात्रा कर नेमीनाथ प्रभु की चरण वंदना कर साबित कर दिया कि दिव्यांगता किसी भी स्थिति में अभिशाप नहीं हैं। बल्लु ने लगभग 6 हजार सीढ़ियां चढ़ और उतर कर सभी टोंक की वंदना की। उनकी पैदल यात्रा से कई लोगों ने अभिभूत होकर प्रेरणा लेकर सफलता पूर्वक यात्रा की।</p>
<p><strong>बलवंत ने साबित किया दिव्यांगता अभिशाप नहीं</strong></p>
<p>बलवंत बल्लू ने बताया कि दिव्यांगता को समाज में एक सामाजिक कलंक माना जाता है। जिसे सुधारने की आवश्यकता है। जिन क्षेत्रों में उनका ध्यान रखा गया है, वहां उन्होंने अपनी ताकत साबित की है और ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं और समाज में उच्चतम अंक हासिल किए हैं। दिव्यांग व्यक्ति जिन्होंने अपना लक्ष्य बना लिया है और लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत की है, आज सफल हैं और सरकार के साथ-साथ निजी संगठनों में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों की अध्यक्षता कर रहे हैं। दिव्यांग आबादी भारत में बड़ी संख्या में है और इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता है। संपूर्ण आयोजन के यात्रा संयोजन की जिम्मेदारी आखिल भारतीय पुलक मंच परिवार ऋषभदेव द्वारा की गई। सभी सदस्यों ने जिम्मेदारी पूर्वक कार्य किया।</p>
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		<title>तीर्थंकर नेमीनाथ विधान एवं महामस्तकाभिषेक का हुआ आयोजन: 1008 मुनि भक्तों का जत्था पहुंचा ऋषभदेव से गिरनार </title>
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		<pubDate>Fri, 25 Oct 2024 16:50:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ऋषभदेव से गिरनार तक 1008 से अधिक भक्त पहुंचे। इनका यहां पहुंचने पर स्वागत किया गया। मंदिर जी में महाशांति धारा हुई। नेमीनाथ विधान में भक्तिमय माहौल में श्रद्धालु झूमने लगे। भक्तों ने तीर्थंकर नेमीनाथ को रजत छत्र भी चढ़ाया। पढ़िए ऋषभदेव से सचिन गंगावत की खबर ऋषभदेव। सकल दिगम्बर जैन समाज के 1008 से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>ऋषभदेव से गिरनार तक 1008 से अधिक भक्त पहुंचे। इनका यहां पहुंचने पर स्वागत किया गया। मंदिर जी में महाशांति धारा हुई। नेमीनाथ विधान में भक्तिमय माहौल में श्रद्धालु झूमने लगे। भक्तों ने तीर्थंकर नेमीनाथ को रजत छत्र भी चढ़ाया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए ऋषभदेव से सचिन गंगावत की खबर</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ऋषभदेव।</strong> सकल दिगम्बर जैन समाज के 1008 से भी ज्यादा भक्त आज तीर्थंकर ऋषभदेव की असीम कृपा एवम राष्ट्रसंत आचार्य गुरुदेव पुलकसागर जी महाराज के आशीर्वाद से आज ऋषभदेव से गिरनार पहुंचे। यात्रा संयोजक मधु सुमेश वाणावत ने बताया कि गिरनार पहुंचने के बाद सभी मुनि भक्तों का स्वागत किया गया। उसके बाद विधानाचार्य सुधीर मार्तंड के नेतृत्व में सर्वप्रथम महाशांतिधारा संघपति प्रदीप मामा प्रतिभा मामी एवं यात्रा संयोजक मधु सुमेश वाणावत परिवार द्वारा की गई। बाद में तीर्थंकर नेमीनाथ विधान का पालिताना से आए मोहित बरोठ एंड पार्टी द्वारा भक्तिमय आयोजन किया गया। विधान में महिलाएं और पुरुषों ने एक जैसे वस्त्र पहन रखे थे।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-68899" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/1001273906.jpg" alt="" width="1600" height="1200" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/1001273906.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/1001273906-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/1001273906-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/1001273906-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/1001273906-1536x1152.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/1001273906-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/1001273906-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/1001273906-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/1001273906-990x743.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/1001273906-1320x990.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />चांदी का छत्र चढ़ाया</strong></p>
<p>समवशरण मंदिर जी से संघपति मामा-मामी परिवार को रजत रथ में बैठाकर लाव लश्कर के साथ तलहटी मंदिर होते हुए बंदीलाल मंदिर जी तक सभी गुरुभक्त नाचते-झूमते हुए पहुंचे जहा पर तीर्थंकर नेमीनाथ को रजत छत्र चढ़ाया गया। साथ ही यात्रा संयोजक ने बताया कि रात को भव्य भक्ति संध्या का भी आयोजन किया गया।</p>
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		<title>11000 श्रद्धालु भक्तों की तीर्थराज सम्मेद शिखर जी यात्रा हर्षोल्लास से संपन्न : भरत का भारत नाटक का भावपूर्ण महामंचन </title>
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		<pubDate>Wed, 23 Oct 2024 07:12:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिल्ली से पवन गोधा एवं विजय जैन चांदीवाला परिवार के सौजन्य से 11000 श्रद्धालुओं के साथ तीर्थराज सम्मेद शिखरजी की वंदना की यात्रा 15 अक्टूबर से 22 अक्टूबर तक ट्रेन और फ्लाइट द्वारा हर्षोल्लास के वातावरण में संपन्न हुई। वहीं 18 अक्टूबर को मधुबन श्री सम्मेद शिखर जी में &#8220;भरत का भारत&#8221; महानाट्य का भावपूर्ण [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दिल्ली से पवन गोधा एवं विजय जैन चांदीवाला परिवार के सौजन्य से 11000 श्रद्धालुओं के साथ तीर्थराज सम्मेद शिखरजी की वंदना की यात्रा 15 अक्टूबर से 22 अक्टूबर तक ट्रेन और फ्लाइट द्वारा हर्षोल्लास के वातावरण में संपन्न हुई। वहीं 18 अक्टूबर को मधुबन श्री सम्मेद शिखर जी में &#8220;भरत का भारत&#8221; महानाट्य का भावपूर्ण महामंचन रंगशाला की निदेशक, धर्मनिष्ठ, व्यवहार कुशल, प्रतिभावान जैन रत्न श्रीमती साधना जी मादावत इंदौर द्वारा किया गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए धरणेन्द्र जैन की खास रिपोर्ट</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>खैरवाड़ा।</strong> दिल्ली से पवन गोधा एवं विजय जैन चांदीवाला परिवार के सौजन्य से 11000 श्रद्धालुओं के साथ तीर्थराज सम्मेद शिखरजी की वंदना की यात्रा 15 अक्टूबर से 22 अक्टूबर तक ट्रेन और फ्लाइट द्वारा हर्षोल्लास के वातावरण में संपन्न हुई। वहीं 18 अक्टूबर को मधुबन श्री सम्मेद शिखर जी में &#8220;भरत का भारत&#8221; महानाट्य का भावपूर्ण महामंचन रंगशाला की निदेशक, धर्मनिष्ठ, व्यवहार कुशल, प्रतिभावान जैन रत्न श्रीमती साधना जी मादावत इंदौर द्वारा किया गया।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-68823" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/WhatsApp-Image-2024-10-23-at-12.38.41-PM.jpeg" alt="" width="631" height="1032" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/WhatsApp-Image-2024-10-23-at-12.38.41-PM.jpeg 631w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/WhatsApp-Image-2024-10-23-at-12.38.41-PM-183x300.jpeg 183w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/WhatsApp-Image-2024-10-23-at-12.38.41-PM-626x1024.jpeg 626w" sizes="(max-width: 631px) 100vw, 631px" /> इस महानाट्य के माध्यम से बताया गया कि ऋषभ पुत्र भरत के नाम से ही इस देश का नाम भारत पड़ा है, जिसे 165 देशों में करोड़ों लोगों ने आदिनाथ टीवी चैनल के माध्यम से देखा और खूब सराहा। &#8220;भरत का भारत&#8221; महानाट्य की प्रस्तुति से भावविभोर होकर कई श्रद्धालु भक्तों ने 31 हजार रुपये नकद का पुरस्कार प्रदान किया, जिसे श्रीमती साधना जी मादावत ने बड़ी सौम्यता और विनयपूर्वक मंच पर ही पवन गोधा एवं ट्रस्टी गणों को वापस लौटा दिया।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-68824" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/WhatsApp-Image-2024-10-23-at-12.38.19-PM.jpeg" alt="" width="798" height="486" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/WhatsApp-Image-2024-10-23-at-12.38.19-PM.jpeg 798w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/WhatsApp-Image-2024-10-23-at-12.38.19-PM-300x183.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/WhatsApp-Image-2024-10-23-at-12.38.19-PM-768x468.jpeg 768w" sizes="(max-width: 798px) 100vw, 798px" />इस पुरस्कार राशि को ट्रस्टी गणों ने गौशाला के लिए तत्काल प्रदान कर दिया। राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी पारस जैन पार्श्वमणि पत्रकार कोटा ने जानकारी देते हुए बताया कि साधना जैन मादावत देवी अहिल्या की नगरी इंदौर/मुम्बई में रंगशाला प्रोडक्शन हाउस एवं नृत्य नाटक अकादमी की निर्देशिका हैं। उनके द्वारा आज की युवा पीढ़ी और बाल पीढ़ी को जैन धर्म से जोड़ने के लिए पूरे देश में जैन धर्म के कथानकों, चरित्रों और चारित्रों पर आधारित नाटकों और महानाट्यों की प्रस्तुति दी जाती है। इनके प्रॉडक्शन हाउस के माध्यम से कई फिल्मों का भी निर्माण किया गया है, जिनमें प्रमुख हैं:</p>
<p>&#8211; प. पू. गणिनी आर्यिका श्री ज्ञानमति माताजी की जीवन गाथा पर आधारित फिल्म &#8220;दिव्य शक्ति&#8221;<br />
&#8211; सल्लेखना/संथारा पर आधारित फिल्म &#8220;वीर गोम्मटेशा&#8221;<br />
&#8211; किसानों की आत्महत्या विषय पर आधारित फिल्म &#8220;काकोली के राम&#8221;, जो एक सकारात्मक फिल्म है और बताती है कि किस तरह एक रामलीला में राम की भूमिका निभाने वाला ग्रामीण किसान राम के जीवन से प्रेरित होकर अपनी समस्याओं का हल ढूंढता है।</p>
<p>फिल्म &#8220;काकोली के राम&#8221; ने कई राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किए हैं। इसके अलावा, कई जैन तीर्थों पर डॉक्यूमेंट्री फिल्मों का भी निर्माण किया गया है, जिसमें विश्व प्रसिद्ध कांच मंदिर पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर डॉक्यूमेंट्री का निर्माण शामिल है। जज की प्रशासकीय सर्विस का त्याग कर, इनका मूल उद्देश्य जैन कथानकों के मंचन के माध्यम से पूरे देश में जैन धर्म और सनातन धर्म की प्रभावना करना है। उनकी टीम में जैन युवाओं एवं युवतियों की उभरती प्रतिभाओं को मौका दिया जाता है।</p>
<p>आज के माता-पिता बच्चों को उच्च से उच्च शिक्षा देने पर जोर देते हैं, परंतु उनमें धार्मिक, सामाजिक सद्भाव और संस्कारों का बीजारोपण एवं संस्कृति से परिचय नहीं करवाते, जो कि समाज में एक बड़ी विडंबना है। बचपन में दिए गए सद संस्कार पचपन की दहलीज पर पहुंचने के बाद भी ज्यों के त्यों बने रहते हैं। यह सार्वभौमिक सत्य है।</p>
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		<title>ऋषभदेव से 1008 मुनि भक्त आज सिद्ध क्षेत्र गिरनार तीर्थ यात्रा पर रवाना होंगे :  गिरनार पर्वत पर होगा महा अर्चना विधान, प्रदीप मामा परिवार का होगा बहुमान </title>
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		<pubDate>Wed, 23 Oct 2024 07:08:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारत गौरव राष्ट्र संत, मनोग्याचार्य, जिनशर्णम तीर्थ के प्रणेता आचार्य श्री पुलक सागर जी गुरुदेव के मंगल आशीर्वाद से सिद्ध भूमि श्री गिरनार जी (उर्जयंत शिखर) पर तीर्थंकर श्री नेमीनाथ भगवान की चरण वंदना एवं महाअर्चना विधान का भव्य आयोजन किया जा रहा है। पढ़िए धरणेन्द्र जैन की रिपोर्ट&#8230; खेरवाड़ा। भारत गौरव राष्ट्र संत, मनोग्याचार्य, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भारत गौरव राष्ट्र संत, मनोग्याचार्य, जिनशर्णम तीर्थ के प्रणेता आचार्य श्री पुलक सागर जी गुरुदेव के मंगल आशीर्वाद से सिद्ध भूमि श्री गिरनार जी (उर्जयंत शिखर) पर तीर्थंकर श्री नेमीनाथ भगवान की चरण वंदना एवं महाअर्चना विधान का भव्य आयोजन किया जा रहा है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए धरणेन्द्र जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>खेरवाड़ा।</strong> भारत गौरव राष्ट्र संत, मनोग्याचार्य, जिनशर्णम तीर्थ के प्रणेता आचार्य श्री पुलक सागर जी गुरुदेव के मंगल आशीर्वाद से सिद्ध भूमि श्री गिरनार जी (उर्जयंत शिखर) पर तीर्थंकर श्री नेमीनाथ भगवान की चरण वंदना एवं महाअर्चना विधान का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यात्रा के संयोजक सुमेश मधु वानावत ने बताया कि यात्रा में आज दोपहर गुरुकुल मैदान से 25 लग्जरी बसों के माध्यम से 1008 मुनि भक्त ऋषभदेव से रवाना होंगे और 25 अक्टूबर को पुनः लौटेंगे।</p>
<p>यह पूरी यात्रा भोपाल, मध्यप्रदेश निवासी संगति एवं पुण्यार्जक प्रदीप &#8220;मामा,&#8221; प्रतिभा &#8220;मामी,&#8221; राहुल जिम्मी, रेयान जैन, कृतज्ञ, लवली, सुनय, रिया परिवार द्वारा आयोजित की गई है। यात्रा संयोजक सुमेश मधु वानावत ने बताया कि इस आयोजन में सकल दिगंबर जैन समाज ऋषभदेव के सदस्य एवं आस-पास के पुलक मंच के सदस्य भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम को लेकर समाज में उत्साह देखने को मिल रहा है। इतने बड़े आयोजन के लिए विधिवत कमेटियां बनाई गई थीं, जो सभी तैयारियां पूरी कर चुकी हैं। इस यात्रा के आयोजन की जिम्मेदारी अखिल भारतीय पुलक मंच परिवार ऋषभदेव द्वारा निभाई जा रही है, और इस संपूर्ण कार्यक्रम के आयोजक मंच परिवार एवं जिनशर्णम तीर्थ ट्रस्ट उपलाट वापी रहेंगे।</p>
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		<title>धर्म के पतन को रोकना हम सभी के हाथों में है : श्री सिद्ध क्षेत्र गिरनार जी मेरी दृष्टि में  </title>
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		<pubDate>Mon, 05 Aug 2024 13:13:57 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सिद्ध क्षेत्र गिरनार जी एवं पावागढ़ के दर्शन व भ्रमण करने का अवसर विगत दिवस मिला जो अनुभव व विचार मन में आए उन्हें टी के वेद सभी के साथ शेयर करना चाहते हैं। इसी भाव से उनकी यह लेख लिखने की भावना जागृत हुई। पढ़िए टी के वेद का यह विशेष आलेख&#8230;. गुजरात। प्रारंभ [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>सिद्ध क्षेत्र गिरनार जी एवं पावागढ़ के दर्शन व भ्रमण करने का अवसर विगत दिवस मिला जो अनुभव व विचार मन में आए उन्हें टी के वेद सभी के साथ शेयर करना चाहते हैं। इसी भाव से उनकी यह लेख लिखने की भावना जागृत हुई। <span style="color: #ff0000">पढ़िए टी के वेद का यह विशेष आलेख&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>गुजरात।</strong> प्रारंभ से ही जैन संस्कृति का केंद्र रहा है। यहां से 22वें तीर्थंकर 1008 नेमिनाथ भगवान का मोक्ष हुआ, इसके अतिरिक्त प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ के गणधर पुण्डरीक ने भी यही से मोक्ष प्राप्त किया, चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा गिरनार पर्वत पर चंद्र गुफा का निर्माण, गुफा में पूज्य आचार्य धरसेन की योग साधना, आचार्य धरसेन द्वारा आचार्य पुष्पदंत व आचार्य भुतबली को श्रुतज्ञान, राजा जयसिंह सिद्धराज द्वारा गिरनार पर्वत पर भगवान नेमिनाथ का मंदिर निर्माण आदि ऐतिहासिक तथ्य उपलब्ध है। तीर्थंकर नेमिनाथ के तीन कल्याणक, दीक्षा, केवल ज्ञान, और निर्वाण उर्जयन्त गिरी (गिरनार) से हुए। यह मात्र तीर्थंकर नेमिनाथ की निर्वाण स्थली ही नहीं है, वरन् 72 करोड़ 700 मुनि भी इसी क्षेत्र से निर्वाण गए हैं। इस संबंध में अनके प्रमाणिक अभिलेख विभिन्न ग्रंथों एवं न्याय दृष्टांतों में उपलब्ध है। इन सब ऐतिहासिक साक्ष्यो को यहां पुर्नउद्धरित करना मेरा आशय नहीं है। मैं मात्र वर्तमान स्थिति व समाज की दिशा व चिंतन पर ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं।</p>
<p>मेरी गिरनार यात्रा के दौरान मैंने अनुभव किया कि तलहटी पर स्थित 3 मंदिर हमारे आधिपत्य व नियंत्रण में है। समोशरण मंदिर 2.कमल मंदिर 3. वर्तमान चैबीसी मंदिर</p>
<p>इसके अतिरिक्त प्रथम टोक पर दिगंबर व श्वेतांबर मंदिर स्थित है इसके अतिरिक्त शेष सभी स्थानों टोंको पर सभी समाजों का अधिकार है।</p>
<p>प्रथम सीढ़ी से लेकर अंतिम सीढ़ी पांचवी टोक तक लगभग 500 से अधिक अन्य धर्मावलंबियों के पूज्य स्थान/मूर्तियां/मंदिर/स्थित है एक तरफ 500 पूज्य स्थान अन्य मतावलंबियों के हैं दूसरी और हमारे मात्र पांच स्थान, हम कहां टिक सकते हैं।</p>
<p>गिरनार जी आने वाले यात्रियों का यदि हम वर्गीकरण करें तो मेरे मोटे तौर पर वर्ष में आने वाले यात्रियों की संख्या इस प्रकार है।</p>
<p>1. जैन यात्री 30,000 दिगंबर</p>
<p>2. जैन यात्री 2,00,000 श्वेतांबर</p>
<p>3. अन्य यात्री 80,00,000 (अन्य मतावलंबियों)</p>
<p>कहां 80 लाख यात्री और कहां हम 2 से 2.5 लाख यात्री।</p>
<p>किस आधार पर हम लड़ाई लड़ रहे हैं।</p>
<p><strong>राजनीतिक प्रभाव</strong></p>
<p>हम उसे स्वीकार करें या ना करें परंतु यह सत्य है कि 2014 के पूर्व जो शासन व्यवस्था थी उसमें अल्पसंख्यकों के हित चाहे पूर्ण सुरक्षित ना हो परंतु फिर भी वे आंशिक रूप से संरक्षित थे। न्याय निर्णयों में भी शासन की भूमिका चाहे स्वीकारे या ना स्वीकारे महत्वपूर्ण होती है एवं 2014 के पूर्व के निर्णयों में हमारी बात सुनी गई है अब जो राजनीतिक दल सत्ता में है वे सैद्धांतिक रूप से जैन धर्म (श्रमण संस्कृति) का अस्तित्व ही स्वीकार नहीं करते हैं उनके मत में जैन धर्म हिंदू धर्म (वैदिक संस्कृति) का ही एक भाग है, एवं उनकं सभी निर्णय इसी के आधार पर होते हैं।</p>
<p><strong>सामाजिक संस्थाएं</strong></p>
<p>पूरे भारतवर्ष में जितनी जैन सामाजिक संस्थाएं अस्तित्व में है या कार्यरत है उनमें कोई स्पष्ट कार्य विभाजन नहीं है सभी संस्थाएं सभी क्षेत्र में एक दूसरे की प्रतिस्पधी है। अपवाद स्वरूप कुछ सामाजिक संगठन सही दिशा मंे अग्रसर हेतु उनको पर्याप्त सहयोग नही मिलता है। ये संस्थाएं कम धर्म के नाम पर दुकाने कहना अधिक उपयुक्त होगा। समाज को मार्गदर्शन नेतृत्व प्रदान करना सही रास्ता दिखाना विस्तृत व लंबी गहरी सोच के साथ निर्णय लेना इन संस्थाओं का उद्देश्य होना चाहिए जिसका अभाव है। सभी संस्थाओं के दो-दो हिस्से पदों के बंटवारों में हो चुके हैं शेष संस्थाएं नाम मात्र की है जिनका कोई वास्तविक अस्तित्व धरातल पर नहीं है।</p>
<p><strong>व्हाट्सएपवीर, क्रांतिकारी नेता</strong></p>
<p>समाज में एक नया वर्ग और पैदा हो चुका है जिन्हें मैं व्हाट्सएप वीर कहता हूं। जो मात्र व्हाट्सएप तक ही सीमित है एवं समाज व धर्म का सर्वाधिक नुकसान इन्हीं कुकुरमुत्तो के वंशजों ने किया है हर कार्य का विरोध बिना आगे पीछे का विचार किये करना सही चाणक्य नीति नहीं है। अब वह जमाना भी नहीं हैं जब हमारे यहाँ ऐसे श्रमण हुए है जिन्होंने अपने आभा मण्डल/ प्रभा प्रमण्डल से निर्णयो को अपने पक्ष में प्रभावित किया है चाहे वह केन्द्र शासन हो या राज्य शासन, चाहे वह वरिष्ठतम न्यायालय हो या स्थानीय न्याय तंत्र शासन के हर कार्य का हर निर्णय का विरोध कर हम क्या पा लेगें?</p>
<p>गिरनार जी में जब रोप वे (उड़न खटोला) के निर्माण की कल्पना हुई 2007 मे तब पहली टोक पर एक स्टेशन प्रस्तावित था। दुसरी टोक पर दुसरा स्टेशन, हमने इसका पूर जोर विरोध किया। परिणायतः 2020 मे 13 साल मे यह कार्य, पूर्ण हुआ। अंततः केवल दुसरी टोक पर उड़न खटोला का स्टेशन बना। मैने स्वयं प्रथम टोक से दूसरी टोक जाने के लिये 1200 सीढी चढ़ने का 4000/- भुगतान किया सभी तीर्थो पर डोली वालो का आधिपत्य हो गया है। वे सभी मांसाहरी, जैन विरोधी है हम उनकी आय का साधन बन गये।</p>
<p>आज भी गिरनार की सभी टोकों पर डोली वाले 15000 से 20,000 प्रति व्यक्ति वसूल रहे हैं। हम मात्र डोली वाले को भुगतान कर अपनी धार्मिक यात्रा पूर्ण मानते हैं।</p>
<p>यही त्रुटि हम सम्मेदशिखरजी में दोहरा रहे हैं। किसी क्षेत्र को पर्यटन स्थल बनने से आप नही रोक सकते हैं। यह समय की मांग है हम विकास को विलम्बित कर सकते हैं, रोक नहीं सकते हैं। विकास को अपने अनुसार करवाया जा सकता है।</p>
<p>एक गैर मताबलंबी व जैन मतावलंबी में क्या फर्क है, हममें से 95 प्रतिशत रात्रि भोजन करते हैं, अभक्ष्य का त्याग नहीं है कोई नियम धर्म नहीं है। यात्रा मात्र मनोरंजन व सुखसुविधाओं के लिये करते हैं, जिन्हें धर्म का लेश मात्र भी ज्ञान नहीं है &#8211; शुद्ध णमोकार को उच्चारण भी नहीं कर सकते है। तीर्थों पर महंगी होटलों जैसी सुविधा चाहते हैं, वे तीर्थयात्री रहे ही कहां हैं? हम मात्र नाम के जैन हैं &#8211; हमारे कार्य व व्यवहार समाज के शेष वर्गो से किसी मान में उच्च नहीं है। यदि हम सर्वे करे तो पायेंगे कि समाज के 90 प्रतिशत घरों में एक जिनवाणी की पुस्तक भी नहीं मिलेगी। (जो निःशुल्क उपलब्ध है) तो स्वाध्याय तो बहुत दूर है। मंदिरों में समाज की संख्या का दो से तीन प्रतिशत पूजन अभिषेक करते हैं।</p>
<p><strong>श्रमणो को भूमिका</strong></p>
<p>धन्य हो आचार्य शान्तिसागरजी, विमल सागर जी, आचार्य विद्यानन्दजी जो अपने एक संदेश से प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री व बडे़ से बड़े से निर्णायकों को प्रभावित कर सकते थे अबतो अधिकांश श्रमणों के अपने मठ हैं, अपने प्रोजेक्ट हैं धर्म से ज्यादा रूचि उनकी इन प्रोजेक्टों में हैं। सामाजिक संस्थाओं का बंटाढार भी श्रमणों के प्रभाव में हुआ है। जब तक सामाजिक संस्थाओं का अपना नेत्तृत्व चुनने का अधिकार था। सामाजिक संस्थाओं का कार्य व्यवस्थित था अब तों पदों की बंदरबाट श्रमणों के निर्देशों पर होती है, श्रावकों से अधिक मान कषाय श्रमणों में है। तमिलनाडु में अर्हत गिरि पर आचार्य कुन्द-कुन्द के चरण विराजित हैं। किसी श्रमण की प्रेरणा से वहां जीर्णोद्वार हुआ उनका नाम का पटिया तीन जगह लगाया गया। क्या पिछले 2500 वर्षो मे कोई आचार्य नहीं हुए। जिन्होंने वहां जीर्णोद्वार कराया ? श्रमणों की यह मानसिकता श्रावकों को क्या संदेश देती है।</p>
<p><strong>श्रावकों की भूमिका व सुझाव</strong></p>
<p>1 हमें सामाजिक संस्थाओं में मात्र &#8211; उन्हीं पदाधिकारियों का चयन/मनोनयन करना है जो धर्म के सामान्य सिद्धान्तों रात्रि भोजन त्याग, अभक्ष्य त्याग, देवशास्त्र गुरु की उपासना करते हो &#8211; 95 प्रतिशत दुकान के रूप मे संस्था चलाने वाले छंट जाएंगे</p>
<p>2) कोई भी निर्णय हम लम्बी अवधि के पक्ष/विपक्ष को विचार कर ले तथा निर्णयों का प्रचार प्रसार काम होने के बाद हो।</p>
<p>3) श्रमणो का दायित्व &#8211; अपने धर्म उपदेश तक सीमित हों</p>
<p>4) देश काल परिस्थिति के अनुसार श्रावकों व श्रमणों की चर्या में परिवर्तन हो</p>
<p>5) समाज के पिछड़े व वह वर्ग जिसे समाज के सहयोग की आवश्यकता है, के लिये आवश्यक प्रावधान हो।</p>
<p>6) पंचकल्याणकों विधानों-पुस्तक प्रकाशनों का कार्य आवश्यकता पर व सीमित हो।</p>
<p>7) चार्तुमास की भव्यता धार्मिक संस्कारों में हो एवं चार्तुमास की व्यवस्था मंदिरों के माध्यम से हो जो अपने आय-व्यय का हिसाब प्रस्तुत कर सके व रख सके।</p>
<p>इन संबंधों में विचार अवश्य होना चाहिए। यह समय की आवश्यकता है अन्यथा धर्म के पतन को कोई रोक नही सकेगा व इसके लिये हमारी वर्तमान पीढ़ी जवाबदार होगी।</p>
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		<title>दो विपरीत भावनाओं का सुन्दर चित्रण करता बदनावर से प्राप्त यह शिल्प : सुंदर कलात्मक आभूषणों से सुसज्जित देवी और भौतिकता से मुक्त वीतराग भाव से युक्त तीर्थंकर </title>
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		<pubDate>Sat, 13 Jul 2024 11:34:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी दिनांक 13 जुलाई शनिवार को श्रमण संस्कृति के बाईसवें तीर्थंकर भगवान श्री नेमीनाथ स्वामी का मोक्ष कल्याणक दिवस है। आज ही के दिन हजारों वर्ष पूर्व नेमीनाथ स्वामी ने कर्म रूपी बंधनों को तोड़कर गुजरात राज्य के मनोरम श्री गिरनार पर्वत के उच्च शिखर से निर्वाण को प्राप्त [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी दिनांक 13 जुलाई शनिवार को श्रमण संस्कृति के बाईसवें तीर्थंकर भगवान श्री नेमीनाथ स्वामी का मोक्ष कल्याणक दिवस है। आज ही के दिन हजारों वर्ष पूर्व नेमीनाथ स्वामी ने कर्म रूपी बंधनों को तोड़कर गुजरात राज्य के मनोरम श्री गिरनार पर्वत के उच्च शिखर से निर्वाण को प्राप्त किया था। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बदनावर।</strong> अषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी दिनांक 13 जुलाई शनिवार को श्रमण संस्कृति के बाईसवें तीर्थंकर भगवान श्री नेमीनाथ स्वामी का मोक्ष कल्याणक दिवस है। आज ही के दिन हजारों वर्ष पूर्व नेमीनाथ स्वामी ने कर्म रूपी बंधनों को तोड़कर गुजरात राज्य के मनोरम श्री गिरनार पर्वत के उच्च शिखर से निर्वाण को प्राप्त किया था। इस दिन जैन समाज के श्रावक श्राविकाओं द्वारा भगवान नेमीनाथ जी की पुजा अर्चना करते हुए निर्वाण लाडू समर्पित किया जाता है।</p>
<p><strong>हरिवंश पुराण नाम से प्रसिद्ध</strong></p>
<p>पाटोदी ने बताया कि बदनावर नगर के भूतकाल इतिहास का हम अध्ययन करते हैं तो पायेंगे कि प्राचीन वर्द्धमानपुर का जितना संबंध भगवान महावीर स्वामी के जीवन से रहा होगा उतना ही 22वें तीर्थंकर श्री नेमीनाथ भगवान से भी रहा क्योंकि भगवान नेमीनाथ जी श्री कृष्ण एवं वसुदेव के जीवन चरित्र पर एक वृहद ग्रंथ रचा गया जो हरिवंश पुराण के नाम से प्रसिद्ध हुआ इसकी रचना का श्रेय प्राचीन वर्द्धमानपुर बदनावर नगर को ही जाता है इसी धर्म धरा के शांतिनाथ चैत्यालय में ही बैठकर प्रबुद्धाचार्य श्री जिनसेण स्वामी जी ने आठवीं शताब्दी में की थी। इस नगर से प्रचुर मात्रा में प्राप्त जिनप्रतिमा इसका समर्थन करती है।</p>
<p><strong>राग और विराग का संगम</strong></p>
<p>भगवान नेमीनाथ जी से सम्बंधित कई सामग्री हमें यहां से प्राप्त हुई है जिसमें जयसिंहपुरा जैन संग्रहालय उज्जैन में सरल क्रमांक 151 पर संग्रहित भगवान श्री नेमीनाथ स्वामी की दक्षिणी अम्बिका देवी का यह कलात्मक शिल्प जहां एक ओर सुंदर आभूषणों से सुसज्जित देवी को प्रदर्शित करता है वहीं दूसरी ओर भौतिक संसाधनों से मुक्त आत्मध्यान में तल्लीन वीतराग छवि को धारण किए हुए तीर्थंकर की शांत भाव को प्रकट करता है। राग एवं विराग यह दोनों विपरीत भावनाओं का अद्भुत समागम हमें बदनावर वर्द्धमानपुर से प्राप्त मुर्तियो में देखने को मिलता है। यह जैन शिल्प की एक अद्भुत अद्वितीय विशेषता है। जो हमें अन्य कहीं बहुत कम ही मिल पाती है।</p>
<p><strong><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-63378" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240713-WA0023.jpg" alt="" width="1280" height="1259" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240713-WA0023.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240713-WA0023-300x295.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240713-WA0023-1024x1007.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240713-WA0023-768x755.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240713-WA0023-65x65.jpg 65w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240713-WA0023-990x974.jpg 990w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />नहीं मिटा पाए इतिहास</strong></p>
<p>पाटोदी ने बताया कि श्री नेमीनाथ जी की एक मनोज्ञ प्रतिमा यहां से प्राप्त हुई जिसे कि आक्रांताओं ने खंडित कर दिया परंतु वे इतिहास को नहीं मिटा पाए। हजारों वर्ष बाद भी इतिहास मानो पुनः जीवित हो कर हमे उस समय की जानकारी दे रहा है। यह प्रतिमा वर्तमान में उज्जैन संग्रहालय में ही सरल क्रमांक 82 पर प्रदर्शित है। इसके पाद मूल में भगवान ने नाथ का लांछन शंख अंकित है चूंकि प्रतिमा को खंडित कर दिया गया था परन्तु इसकी बनावट आकर्षित करती है। इस प्रतिमा पर दो लाइन का लेख भी अंकित है। जो हमें उसे काल की सूचना प्रदान करता है।</p>
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		<title>गिरनार जी पर सुरक्षित दर्शन का मांगा आश्वासन : सांसद शंकर लालवानी को दिया ज्ञापन   </title>
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		<pubDate>Thu, 11 Jul 2024 06:28:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[विश्व जैन संगठन इंदौर के सदस्यों ने सांसद शंकर लालवानी को गिरनार की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया और महेश गिरी की अहिंसक जैन समाज को धमकी के बारे में भी अवगत कराया। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230; इंदौर। विश्व जैन संगठन इंदौर के सदस्यों ने सांसद शंकर लालवानी को गिरनार की वर्तमान स्थिति से अवगत [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>विश्व जैन संगठन इंदौर के सदस्यों ने सांसद शंकर लालवानी को गिरनार की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया और महेश गिरी की अहिंसक जैन समाज को धमकी के बारे में भी अवगत कराया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> विश्व जैन संगठन इंदौर के सदस्यों ने सांसद शंकर लालवानी को गिरनार की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया और महेश गिरी की अहिंसक जैन समाज को धमकी के बारे में भी अवगत कराया। 13 जुलाई को 22वे तीर्थंकर श्री नेमीनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक पर जैन समाज ने सुरक्षित दर्शन की मांग गुजरात सरकार से की है जिसका गुजरात हाइकोर्ट द्वारा 2005 में ही ऑर्डर दिया जा चुका है। इंदौर अध्यक्ष मयंक जैन ने बताया कि सांसद ने इस बात को गुजरात मुख्यमंत्री तक पहुंचा दिया है और सुरक्षित दर्शन के लिए माकूल पुलिस व्यवस्था के लिए कहा है।</p>
<p>प्रचारक राजेश दद्दू ने बताया कि लंबे समय से मध्य प्रदेश में जैन समाज की मांग जैन कल्याण बोर्ड के लिए लंबित है जो कि भाजपा के चुनाव घोषणा पत्र की भी हिस्सा थी उस पर तुरंत अमल करके गठन करने के लिए निवेदन किया जिससे जैन तीर्थो का मध्य प्रदेश में संरक्षण हो सके। साथ में सांसद प्रतिनिधि अजय जैन, मंत्री पारस जैन, अभय जैन ,केके जैन एवं दीपक जैन मौजूद थे।</p>
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