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	<title>Girnar ji  श्रीफल जैन न्यूज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>18 अप्रैल को है विश्व धरोहर दिवस : विश्व धरोहर सूची में जैन धरोहरों को भी स्थान मिले </title>
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		<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 05:51:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[विश्व धरोहर दिवस, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल दिवस कहा जाता है, प्रत्येक वर्ष 18 अप्रैल को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मॉन्यूमेंट एंड साइट की ओर से 1982 में की गई और बाद में यूनेस्को ने इसे वैश्विक मान्यता दी। विश्व धरोहर दिवस पर डॉ यतीश जैन, जबलपुर का पढ़िए, विशेष [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>विश्व धरोहर दिवस, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल दिवस कहा जाता है, प्रत्येक वर्ष 18 अप्रैल को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मॉन्यूमेंट एंड साइट की ओर से 1982 में की गई और बाद में यूनेस्को ने इसे वैश्विक मान्यता दी। <span style="color: #ff0000">विश्व धरोहर दिवस पर डॉ यतीश जैन, जबलपुर का पढ़िए, विशेष आलेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जबलपुर।</strong> विश्व धरोहर दिवस, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल दिवस कहा जाता है, प्रत्येक वर्ष 18 अप्रैल को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मॉन्यूमेंट एंड साइट की ओर से 1982 में की गई और बाद में यूनेस्को ने इसे वैश्विक मान्यता दी। इस दिवस का उद्देश्य मानव सभ्यता की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। आज विश्व में लगभग 1200 के आसपास धरोहर स्थल सूचीबद्ध हैं, जबकि भारत में वर्तमान में 42 विश्व धरोहर स्थल हैं, जो हमारे देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं।भारत की धरोहरों में जैन परंपरा का विशेष स्थान है। जैन धर्म अत्यंत प्राचीन है और इसके सिद्धांत- अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और आत्मसंयम, न केवल धार्मिक जीवन को बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन को भी दिशा देते हैं। जैन धरोहर स्थल केवल पूजा के स्थान नहीं हैं, बल्कि वे तप, त्याग, ज्ञान और कला के केंद्र हैं। इन स्थलों की विशेषता यह है कि यहाँ आध्यात्मिकता और स्थापत्य कला का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। संपूर्ण देश में प्रत्येक राज्य में अति प्राचीन जैन तीर्थ स्थल एवं जैन धरोहर है जिन्हें विश्व धरोहर सूची में सम्मिलित किया जा सकता है। इसके लिए सार्थक प्रयास किया जाना आवश्यक है। उदाहरण स्वरूप कुछ ही स्थलों के बारे में जानकारी दे रहा हूं जिन्हें आसानी से यूनेस्को के मापदंड में लिया जा सकता है।</p>
<p><strong>श्रवणबेलगोला जैन धरोहरों में अत्यंत महत्वपूर्ण</strong></p>
<p>कर्नाटक में स्थित श्रवणबेलगोला जैन धरोहरों में अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहाँ भगवान बाहुबली की 57 फीट ऊँची एकाश्म प्रतिमा स्थित है, जिसका निर्माण 981 ईस्वी में हुआ था। यह प्रतिमा पूरी तरह एक ही पत्थर से बनी है और यह त्याग, वैराग्य और आत्मविजय का प्रतीक है। हर 12 वर्ष में यहाँ महामस्तकाभिषेक का भव्य आयोजन होता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं। राजस्थान के दिलवाड़ा जैन मंदिर जैन स्थापत्य कला के सर्वोत्तम उदाहरणों में से एक हैं। 11वीं से 13वीं शताब्दी के बीच निर्मित इन मंदिरों की संगमरमर की नक्काशी इतनी सूक्ष्म और सुंदर है कि पत्थर भी जीवंत प्रतीत होता है।</p>
<p><strong>विश्व का सबसे बड़ा जैन मंदिर समूह पालिताना</strong></p>
<p>गुजरात का शत्रुंजय पहाड़ी (पालिताना) जैन धर्म का अत्यंत पवित्र स्थल है। यहाँ लगभग 863 से अधिक मंदिर एक ही पर्वत पर स्थित हैं। यह विश्व का सबसे बड़ा जैन मंदिर समूह माना जाता है। इन मंदिरों का निर्माण विभिन्न कालों में हुआ, विशेष रूप से 11वीं से 19वीं शताब्दी के बीच। यहाँ तक पहुँचने के लिए लगभग 3800 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं, जो एक प्रकार की साधना का अनुभव कराती हैं। यह स्थल यह दर्शाता है कि जैन धर्म में तप और श्रम का कितना महत्व है।</p>
<p><strong>मथुरा का कंकाली टीला का विशेष महत्व</strong></p>
<p>इसी प्रकार रणकपुर जैन मंदिर में 1444 स्तंभ हैं, और प्रत्येक स्तंभ की बनावट अलग-अलग है। यह स्थापत्य विज्ञान और कला का अद्भुत संगम है। गुजरात का गिरनार पर्वत जैन तीर्थ अत्यंत प्राचीन और पवित्र स्थल है, जहाँ 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ का संबंध माना जाता है। यहाँ लगभग 9999 सीढ़ियाँ हैं, जो साधना और आत्मअनुशासन का प्रतीक हैं। देशभर में जैन धर्म की प्राचीन ऐतिहासिक धरोहरों की बात करें, तो मथुरा का कंकाली टीला का विशेष महत्व है। यहाँ से प्राप्त अवशेष पहली शताब्दी ईसा पूर्व से गुप्तकाल तक के हैं। यहाँ से जैन स्तूप, आयागपट्ट, मूर्तियाँ और अभिलेख प्राप्त हुए हैं, जो यह प्रमाणित करते हैं कि मथुरा प्राचीन काल में जैन धर्म का प्रमुख केंद्र था। कंकाली टीला जैन कला और मूर्तिकला के प्रारंभिक विकास का साक्षी है।</p>
<p><strong>गोपाचल पर्वत जैन प्रतिमाएँ जैन शिल्पकला अद्वितीय</strong></p>
<p>उड़ीसा में स्थित उदयगिरि खंडगिरि गुफाएँ जैन मुनियों की तपस्थली रही हैं। ये गुफाएँ दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व में राजा खारवेल के समय निर्मित हुई थीं। इन गुफाओं में साधना और ध्यान के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। हाथीगुम्फा अभिलेख यहाँ का प्रमुख आकर्षण है, जो उस समय के इतिहास को स्पष्ट करता है। यह स्थल दर्शाता है कि जैन धर्म का विस्तार पूर्वी भारत तक व्यापक रूप से था। मध्यप्रदेश के ग्वालियर में स्थित गोपाचल पर्वत जैन प्रतिमाएँ जैन शिल्पकला का अत्यंत भव्य उदाहरण हैं। यहाँ चट्टानों को काटकर 7वीं से 15वीं शताब्दी के बीच विशाल तीर्थंकर प्रतिमाएँ बनाई गई हैं। कुछ प्रतिमाएँ 50 फीट से भी अधिक ऊँची हैं। ये प्रतिमाएँ न केवल कला का अद्भुत उदाहरण हैं, बल्कि वे जैन धर्म के प्रभाव और विस्तार को भी दर्शाती हैं।</p>
<p><strong>विश्व धरोहर मानकों के अनुरूप</strong></p>
<p>मध्यप्रदेश का सोनागिरि जैन तीर्थ भी जैन सिद्ध क्षेत्र के रूप में प्रसिद्ध है, जहाँ लगभग 100 से अधिक मंदिर स्थित हैं। यह स्थान मोक्षभूमि के रूप में जाना जाता है।</p>
<p>इन सभी जैन धरोहरों का यदि समग्र रूप से अध्ययन किया जाए, तो यह स्पष्ट होता है कि वे यूनेस्को के विश्व धरोहर मानकों के अनुरूप हैं। इनमें ऐतिहासिकता, स्थापत्य उत्कृष्टता, सांस्कृतिक निरंतरता और आध्यात्मिक महत्व जैसे सभी गुण मौजूद हैं। ये धरोहरें हजारों वर्षों से जीवित परंपरा का हिस्सा हैं, जहाँ आज भी लाखों लोग आस्था और श्रद्धा के साथ आते हैं।</p>
<p><strong>धरोहरों को उचित संरक्षण मिले</strong></p>
<p>भारतीय संदर्भ में जैन धरोहरों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि ये केवल धार्मिक स्थल नहीं हैं, बल्कि वे मानवता के लिए नैतिक और आध्यात्मिक संदेश भी देती हैं। अहिंसा और संयम जैसे सिद्धांत आज के वैश्विक समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं। यदि इन धरोहरों को उचित संरक्षण और वैश्विक पहचान मिले, तो यह न केवल जैन धर्म बल्कि सम्पूर्ण मानव सभ्यता के लिए लाभकारी होगा। विश्व धरोहर दिवस हमें यह प्रेरणा देता है कि हम अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझें, उसका सम्मान करें और उसे सुरक्षित रखने का संकल्प लें। जैन धरोहरों के माध्यम से हमें यह सीख मिलती है कि सच्ची प्रगति केवल भौतिक विकास में नहीं, बल्कि नैतिक और आध्यात्मिक उन्नति में भी निहित है। यदि हम इन धरोहरों को सहेजकर रखेंगे, तो हम अपने अतीत का सम्मान करते हुए भविष्य को सशक्त बना सकेंगे। यही इस दिवस का वास्तविक संदेश है।</p>
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		<title>&quot;गिरनार तीर्थ वंदना 2024&quot; नामक पुस्तिका भी छापी : दिगंबर जैन आम समाज संगठन इंदौर द्वारा गिरनार जी तीर्थ वंदना एक अक्टूबर को </title>
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		<pubDate>Mon, 30 Sep 2024 10:57:19 +0000</pubDate>
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<p><strong> दिगंबर जैन आम समाज संगठन इंदौर द्वारा गिरनार जी तीर्थ वंदना 2024 का आयोजन मंगलवार, 1 अक्टूबर को समय रात्रि 8:30 बजे इंदौर रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म नंबर 5 इंदौर से जूनागढ़ 19320 महामना एक्सप्रेस द्वारा किया जाएगा। यात्रा 6 अक्टूबर को इंदौर लौटेगी। इस यात्रा के पुण्यार्जक परिवार इंद्र कुमार और वीणा सेठी, अंकुर सुप्रिया सेठी, गीत लवित सेठी, वैभव श्रुति बाकलीवाल और विश्रुत वंदित बाकलीवाल परिवार हैं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए रेखा संजय जैन की यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> दिगंबर जैन आम समाज संगठन इंदौर द्वारा गिरनार जी तीर्थ वंदना 2024 का आयोजन मंगलवार, 1 अक्टूबर को किया जाएगा। यात्रा 6 अक्टूबर को इंदौर लौटेगी। इस यात्रा के पुण्यार्जक परिवार इंद्र कुमार और वीणा सेठी, अंकुर सुप्रिया सेठी, गीत लवित सेठी, वैभव श्रुति बाकलीवाल और विश्रुत वंदित बाकलीवाल परिवार हैं। यात्रा की तैयारी के तहत इंद्र कुमार सेठी ने इंदौर में विराजित सभी संतों का आशीर्वाद लिया। दिगंबर जैन आम समाज संगठन द्वारा यह पांचवीं तीर्थ यात्रा है। इससे पहले संगठन शिखरजी, श्रवणबेलगोला, मांगीतुंगीजी और सिद्ववरकूट यात्रा का आयोजन कर चुका है, जिसमें कम से कम 400 परिवारों का जत्था शामिल हुआ था।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-67578" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240930-WA0045.jpg" alt="" width="653" height="916" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240930-WA0045.jpg 653w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240930-WA0045-214x300.jpg 214w" sizes="(max-width: 653px) 100vw, 653px" /> इस वर्ष की यात्रा गिरनार जी जा रही है, जिसमें ढाई सौ लोग और पुण्यार्जक परिवार स्वयं शामिल हैं। यात्रा के दौरान यात्रियों की सुविधा के लिए &#8220;गिरनार तीर्थ वंदना 2024&#8221; नामक पुस्तिका भी छापी गई है, जिसमें यात्रा की सारी जानकारी शामिल है। हर कोच में एक कोच प्रभारी नियुक्त किया गया है, और पुस्तिका में पूरी गिरनार जी यात्रा का वर्णन है।</p>
<a href="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/Girnar-Ji-2.pdf" class="pdfemb-viewer" style="" data-width="max" data-height="max" data-toolbar="bottom" data-toolbar-fixed="on">Girnar Ji 2</a>इस यात्रा के प्रमुख संयोजक इंद्र कुमार और वीणा सेठी परिवार हैं, जबकि यात्रा के संयोजक संजय कासलीवाल, अतुल जैन और चिराग जैन हैं। यात्रा की विस्तृत जानकारी पुस्तिका के अंदर के पृष्ठों पर समाहित है।</p>
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