<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Garbha Kalyanak Festival &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/garbha-kalyanak-festival/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Thu, 07 May 2026 07:59:01 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>Garbha Kalyanak Festival &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>कल्याण और आत्मिक शांति का मार्ग: भगवान श्रेयांसनाथ गर्भ कल्याणक महोत्सव 8 मई को  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_path_to_wellbeing_and_inner_peace/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/the_path_to_wellbeing_and_inner_peace/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 07 May 2026 07:59:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[11th Tirthankara Lord Shreyansnath]]></category>
		<category><![CDATA[11वें तीर्थंकर भगवान श्रेयांसनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[8 मई]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Ascetic]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Garbha Kalyanak Festival]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain monk]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Nun]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Updates]]></category>
		<category><![CDATA[Jyeshtha Krishna Shashthi]]></category>
		<category><![CDATA[King Vishnuraj]]></category>
		<category><![CDATA[May 8]]></category>
		<category><![CDATA[Queen Sunanda (Vishnudevi)]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Simhapuri City. श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Varanasi]]></category>
		<category><![CDATA[गर्भ कल्याणक महोत्सव]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[ज्येष्ठ कृष्ण षष्ठी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[राजा विष्णुराज]]></category>
		<category><![CDATA[रानी सुनंदा (विष्णुदेवी)]]></category>
		<category><![CDATA[वाराणसी]]></category>
		<category><![CDATA[सिंहपुरी नगरी]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=106459</guid>

					<description><![CDATA[जैन धर्म के 11वें तीर्थंकर भगवान श्रेयांसनाथ का गर्भ कल्याणक ज्येष्ठ कृष्ण षष्ठी को मनाया जाता है। इस बार यह पावन दिन 8 मई को आ रहा है। श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रृंखला के तहत आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित और संपादित प्रस्तुति&#8230; इंदौर। जैन धर्म के 11वें तीर्थंकर भगवान श्रेयांसनाथ [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जैन धर्म के 11वें तीर्थंकर भगवान श्रेयांसनाथ का गर्भ कल्याणक ज्येष्ठ कृष्ण षष्ठी को मनाया जाता है। इस बार यह पावन दिन 8 मई को आ रहा है। <span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रृंखला के तहत आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित और संपादित प्रस्तुति&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैन धर्म के 11वें तीर्थंकर भगवान श्रेयांसनाथ का गर्भ कल्याणक ज्येष्ठ कृष्ण षष्ठी को मनाया जाता है। इस बार यह पावन दिन 8 मई को आ रहा है। यह हमें याद दिलाता है कि एक महान आत्मा का आगमन केवल एक भौतिक घटना नहीं, बल्कि संपूर्ण जगत के कल्याण (श्रेय) का सूचक है। इंदौर सहित देश भर के दिगंबर जैन मंदिरों में इस अवसर पर भगवान का अभिषेक, शांतिधारा और विशेष पूजन जैसे अनुष्ठान श्रद्धापूर्वक किए जाते हैं।</p>
<p><strong>गर्भ कल्याणक की कथा</strong></p>
<p>जैन ग्रंथों के अनुसार भगवान श्रेयांसनाथ का जीव अपने पूर्व जन्म में पुष्करवर द्वीप के पूर्व विदेह क्षेत्र में राजा नलिनगुल्म था। वहां कठिन तपस्या और आत्म-साधना के माध्यम से उन्होंने ‘तीर्थंकर नाम कर्म’ का संचय किया। इसके पश्चात वे अच्युत स्वर्ग में इंद्र बने। ज्येष्ठ कृष्ण षष्ठी के दिन उस महान आत्मा ने वाराणसी के निकट सिंहपुरी नगरी (वर्तमान सारनाथ) के राजा विष्णुराज और रानी सुनंदा (विष्णुदेवी) के घर गर्भ में प्रवेश किया। उनके गर्भ में आने से 6 माह पूर्व से ही देवराज इंद्र की आज्ञा से कुबेर ने सिंहपुरी में रत्नों की वर्षा शुरू कर दी थी। रानी ने गर्भ धारण करते समय 16 शुभ स्वप्न देखे जो एक तीर्थंकर के अवतरण का संकेत थे।</p>
<p><strong>नामकरण और ‘श्रेय’ का संदेश</strong></p>
<p>भगवान के जन्म के बाद राजा विष्णु का राज्य और प्रजा अत्यंत समृद्ध और सुखी हो गई। चारों ओर ‘श्रेय’ (कल्याण) का वातावरण निर्मित होने के कारण इंद्र ने उनका नाम ‘श्रेयांसनाथ’ रखा। उनका प्रतीक चिह्न ‘गैंडा’ है, जो शक्ति और अडिगता का परिचायक है।</p>
<p><strong>भगवान श्रेयांसनाथ के मुख्य संदेश और उपदेश</strong></p>
<p>भगवान श्रेयांसनाथ का संपूर्ण जीवन और उनकी दिव्य देशना हमें आत्म-उत्थान के कई सूत्र देती है।</p>
<p>-कल्याण का मार्ग: भगवान का नाम ही ‘श्रेय’ (कल्याण) से जुड़ा है। उन्होंने सिखाया कि वास्तविक कल्याण बाहरी वैभव में नहीं, बल्कि अपनी आत्मा के शुद्धिकरण में है।</p>
<p>-अहिंसा और करुणा: उन्होंने समस्त जीवमात्र के प्रति दया भाव रखने और मन-वचन-काय से किसी को कष्ट न पहुंचाने का उपदेश दिया।</p>
<p>-सांसारिक क्षणभंगुरता: राजसी सुखों के बीच रहने के बावजूद उन्होंने ऋतु परिवर्तन को देखकर वैराग्य धारण किया। यह संदेश देता है कि संसार के सभी भोग अनित्य हैं और केवल धर्म ही शाश्वत साथी है।</p>
<p>-इंद्रिय संयम और अपरिग्रह: उन्होंने अनावश्यक संग्रह (अपरिग्रह) को छोड़ने और अपनी इंद्रियों पर विजय प्राप्त करने पर बल दिया।</p>
<p><strong>वर्तमान प्रासंगिकता</strong></p>
<p>भगवान श्रेयांसनाथ का गर्भ कल्याणक हमें यह सिखाता है कि हम अपने जीवन में ‘श्रेय’ (जो हितकारी हो) को चुनें, न कि केवल ‘प्रेय’ (जो केवल देखने में प्रिय हो) को। आज के भौतिकवादी युग में उनकी शिक्षाएं हमें आंतरिक शांति और संतोष का मार्ग दिखाती हैं। श्रद्धालुओं द्वारा किया जाने वाला पाठ और विधान केवल परंपरा नहीं, बल्कि उनके गुणों को अपने भीतर उतारने का संकल्प है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/the_path_to_wellbeing_and_inner_peace/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>भगवान महावीर का गर्भ कल्याणक महोत्सव 1 जुलाई को: तिथि के अनुसार आषाढ़ शुक्ज षष्ठी को मनाया जाएगा </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/lord_mahavirs_garbha_kalyanak_mahotsav_on_1st_july/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/lord_mahavirs_garbha_kalyanak_mahotsav_on_1st_july/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 01 Jul 2025 03:00:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[1 जुलाई]]></category>
		<category><![CDATA[1st July]]></category>
		<category><![CDATA[24th Tirthankara Lord Mahavir]]></category>
		<category><![CDATA[24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी]]></category>
		<category><![CDATA[Arghya]]></category>
		<category><![CDATA[Ashadh Shukla Shashthi]]></category>
		<category><![CDATA[Ashtadravya]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Garbha Kalyanak Festival]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Maharaj Siddhartha]]></category>
		<category><![CDATA[Queen Trishala]]></category>
		<category><![CDATA[Shantidhara]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[अर्घ्य]]></category>
		<category><![CDATA[अष्टद्रव्य]]></category>
		<category><![CDATA[आषाढ़ शुक्ल षष्ठी]]></category>
		<category><![CDATA[गर्भ कल्याणक महोत्सव]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[महाराज सिद्धार्थ]]></category>
		<category><![CDATA[महारानी त्रिशला]]></category>
		<category><![CDATA[शांतिधारा]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=84091</guid>

					<description><![CDATA[भगवान महावीर स्वामी का गर्भ कल्याणक एक जुलाई को मनाया जाएगा। जिनालयों में 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के गर्भ कल्याण दिवस पर महावीर स्वामी की अष्टद्रव्य से पूजा-अर्चना करके अभिषेक होंगे। सुख समृद्धि एवं शांति की कामना करते हुए शांतिधारा तथा गर्भ कल्याणक का अर्घ्य भी चढ़ाया जाए तिथि के अनुसार यह महोत्सव आषाढ़ [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>भगवान महावीर स्वामी का गर्भ कल्याणक एक जुलाई को मनाया जाएगा। जिनालयों में 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के गर्भ कल्याण दिवस पर महावीर स्वामी की अष्टद्रव्य से पूजा-अर्चना करके अभिषेक होंगे। सुख समृद्धि एवं शांति की कामना करते हुए शांतिधारा तथा गर्भ कल्याणक का अर्घ्य भी चढ़ाया जाए तिथि के अनुसार यह महोत्सव आषाढ़ शुक्ल षष्ठी के दिन मनाया जाएगा। <span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज के पाठकों के लिए यह विशेष जानकारी उपसंपादक प्रीतम लखवाल द्वारा यहां साझा की जा रही है।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैन धर्मावलंबियों द्वारा 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के गर्भ कल्याण दिवस पर महावीर स्वामी की अष्टद्रव्य से पूजा-अर्चना करके अभिषेक किया जाएगा। सभी सुख समृद्धि एवं शांति की मंगलमयी कामना करते हुए शांतिधारा तथा गर्भ कल्याणक का अर्घ्य भी चढ़ाया जाएगा। भगवान महावीर के गर्भ कल्याणक दिवस इस बार एक जुलाई को आ रहा है। तिथि के अनुसार यह महोत्सव आषाढ़ शुक्ल षष्ठी के दिन मनाया जाएगा। धर्म ग्रंथों में वर्णित जानकारी के अनुसार भगवान महावीर के जन्म से पूर्व एक बार महारानी त्रिशला नगर में हो रही अद्भुत रत्न वर्षा के बारे में सोच रही थीं। यह सोेचते-सोचते वे गहरी नींद में सो गईं।</p>
<p>उसी रात को अंतिम प्रहर में महारानी ने सोलह शुभ मंगलकारी स्वप्न देखे। वह आषाढ़ शुक्ल षष्ठी का दिन था। रानी त्रिशला ने गर्भ स्थिति में यह मंगलकारी शुभ स्वप्न देखे थे। सुबह जागने पर रानी के महाराज सिद्धार्थ से अपने स्वप्नों की चर्चा की और उसका फल जानने की इच्छा प्रकट की। राजा सिद्धार्थ कुशल राजनीतिश्र के साथ्ज्ञ ज्योतिष शास्त्र के भी विद्वान थे। उन्होंने रानी से कहा कि एक-एक कर अपना स्वप्न बताएं। वे उसी प्रकार उसका फल बताते चलेंगे। तब महारानी त्रिशला ने अपने सारे स्वप्न् उन्हें एक-एक कर विस्तार से सुनाए।</p>
<p><strong>आइए जानते हैं महारानी ने कौन से 16 स्वप्न देखे</strong></p>
<p>रानी ने पहले स्वप्न के बारे में बताया कि एक अति विशाल श्वेत हाथी दिखाई दिया। राजा सिद्धार्थ ने इसका फल बताते हुए कहा कि उनके घर एक अद्भुत पुत्र-रत्न उत्पन्न होगा। रानी ने दूसरे स्वप्न के बारे में बताया कि श्वेत वृषभ दिखाई दिया। राजा ने बताया कि वह पुत्र जगत का कल्याण करने वाला होगा। तीसरे स्वप्न के बारे में जब रानी ने बताया कि श्वेत वर्ण और लाल अयालों वाला सिंह दिखा तो राजा ने इसका फल बताया कि वह पुत्र सिंह के सामन बलशाली होगा। चौथे स्वप्न में रानी ने देखा कि कमलासन लक्ष्मी का अभिषेक करते हुए दो हाथी भी दिखे। इसका फल बताया गया कि देवलोक से देवगण आकर उस पुत्र का अभिषेक करेंगे। पांचवे स्वप्न में रानी ने दो सुगंधित पुष्पमालाएं देखीं। राजा ने उनको बताया कि वह पुत्र धर्म तीर्थ स्थापित करेगा और जन-जन द्वारा पूजित होगा। छठे स्वप्न में पूर्ण चंद्रमा नजर आया तो उसके फल के बारे में बताया गया कि उसके जन्म से तीनों लोक आनंदित होंगे।</p>
<p>सातवें स्वप्न में उदय होता सूर्य नजर आया तो उन्हें बताया गया कि वह पुत्र सूर्य के समान तेजयुक्त और पापी प्राणियों का उद्धार करने वाला होगा। आठवें स्वप्न में कमल पत्रों से ढंके दो स्वर्ण कलश थे तो इस बारे में राजा ने बताया कि वह पुत्र अनेक निधियों का स्वामी निधिपति होगा। नौवें स्वप्न में कमल सरोवर में क्रीड़ा करती दो मछलियां दिखी। इसके बारे में यह फल बताया कि वह पुत्र महा आनंद दाता और दुःख हर्ता होगा। 10वें स्वप्न में रानी ने कमलों से भरा जलाशय देखा तो राजा ने उन्हें बताया कि 1008 शुभ लक्षणों से युक्त पुत्र प्राप्त होगा। 11वंे स्वप्न का जिक्र करते हुए रानी ने कहा कि लहरें उछालता समुद्र दिखा। राजा ने उन्हें बताया कि भूत-भविष्य और वर्तमान का ज्ञाता केवली पुत्र होगा। 12वंे स्वप्न में हीरे-मोती और रत्न जड़ित सिंहासन देखा। इस बारे में बताया गया कि आपका पुत्र राज्य का स्वामी और प्रजा का हित चिंतक रहेगा। 13वें स्वप्न में स्वर्ग का विमान देखा गया। इसके बारे में इस जन्म से पूर्व वह पुत्र स्वर्ग में देवता होगा। चौदहवें स्वप्न में रानी ने पृथ्वी को भेदकर निकलता नागों के राजा नागेंद्र का विमान देखा तो राजा ने बताया कि वह पुत्र जन्म से ही त्रिकालदर्शी होगा। 15 स्वप्न में रानी ने रत्नों का ढेर देखा।</p>
<p>राजा ने उन्हें बताया कि वह पुत्र अनंत गुणों से संपन्न होगा। सोलहवें स्वप्न में रानी ने धुआ रहित अग्निी देखी। इस पर राजा सिद्धार्थ ने उन्हें बताया कि वह पुत्र सांसारिक कर्मों का अंत करके मोक्ष को प्राप्त होगा। इन स्वप्नों के साथ ही भगवान महावीर ने रानी त्रिशला के गर्भ में प्रवेश किया और कालांतर तक उनकी कीर्ति हुई। जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर के रूप में पूरे जगत में पूजित हुए। आज भी जैन धर्मावलंबी भगवान महावीर जी की पूर्ण भक्ति भावना से पूजा, अर्चना और अभिषेक आदि विधान करते हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/lord_mahavirs_garbha_kalyanak_mahotsav_on_1st_july/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
