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	<title>Freedom Fighter &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>जैनाचार्यश्री जवाहरजी पर डाक टिकट और सिक्का जारी : विद्वत हस्तियों की मौजूदगी में आचार्यश्री का हुआ गुणानुवाद  </title>
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		<pubDate>Mon, 17 Nov 2025 08:52:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[स्वतंत्रता सेनानी और आचार्यश्री जवाहरलालजी महाराज की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में रविवार को भारत सरकार द्वारा स्मारक रजत सिक्का और डाक टिकट जारी किए गए। उदयपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; उदयपुर। स्वतंत्रता सेनानी और आचार्यश्री जवाहरलालजी महाराज की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में रविवार को भारत सरकार द्वारा स्मारक रजत सिक्का और डाक टिकट [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>स्वतंत्रता सेनानी और आचार्यश्री जवाहरलालजी महाराज की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में रविवार को भारत सरकार द्वारा स्मारक रजत सिक्का और डाक टिकट जारी किए गए। <span style="color: #ff0000">उदयपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>उदयपुर।</strong> स्वतंत्रता सेनानी और आचार्यश्री जवाहरलालजी महाराज की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में रविवार को भारत सरकार द्वारा स्मारक रजत सिक्का और डाक टिकट जारी किए गए। भारत सरकार के डाक विभाग की ओर से आचार्य जवाहरलाल पर 5 रुपए मूल्य का स्मारक डाक टिकट और वित्त मंत्रालय द्वारा 150 रुपए मूल्य वर्ग का सिक्का जारी किया। जसकरण बोथरा फाउंडेशन द्वारा मुंबई राजभवन में आयोजित विमोचन समारोह में महाराष्ट्र एवं गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने स्मारक डाक टिकट जारी किया। पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ने स्मारक चतुर्थांश सिक्का जारी किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र शासन में कौशल विकास मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा और महाराष्ट्र डाक सर्कल के महानिदेशक अमिताभसिंह सहित समाज के अनेक गणमान्य महानुभाव उपस्थित थे। इस अवसर पर सरकार द्वारा जारी होने वाली विवरणिका में उदयपुर के साहित्यकार डॉ. दिलीप धींग द्वारा लिखित आलेख का प्रकाशन किया गया है। आलेख में आचार्यश्री जवाहरजी के व्यक्तित्व, कृतित्व तथा समाज व राष्ट्र के लिए उनके योगदान को दर्शाया गया है।</p>
<p><strong>आचार्य श्री जवाहर भविष्य दृष्टा भी थे</strong></p>
<p>श्रमण डॉ. पुष्पेंद्र मुनि ने बताया कि आचार्य श्री जवाहर भविष्य दृष्टा भी थे। श्रमण संघ के तृतीय पट्टधर आचार्यश्री देवेंद्र मुनि जब आठ वर्ष के बालक थे, तब वर्ष 1939 आचार्यश्री जवाहर ने उदयपुर के पंचायती नाहरे में उन्हें देखकर कह दिया था कि यह बालक भविष्य में धर्माेद्योत करने वाला आचार्य बनेगा। डॉ. दिलीप धींग ने बताया कि आचार्यश्री जवाहर के उदयपुर में चार चातुर्मास हुए थे। उनके नाम से उदयपुर में जवाहर जैन विद्यालय और उदयपुर जिले के कानोड़ कस्बे में जवाहर विद्यापीठ चलता है। जवाहर विद्यापीठ से ग्रामीण क्षेत्र के हजारों विद्यार्थी उच्च शिक्षित बने हैं।</p>
<p><strong>सत्संगों से आजादी के लिए किया जनजागरण </strong></p>
<p>श्रमण डॉ. पुष्पेंद्र मुनि ने बताया आचार्य श्री जवाहरलाल ने देश पराधीनता में होने के समय 10 हजार से अधिक सत्संगों के माध्यम से जनजागरण किया। उन्होंने लोगों को स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए प्रेरित किया। विशेष रूप से उन्होंने महात्मा गांधी, सरदार पटेल और लोकमान्य तिलक जैसे नेताओं को स्वतंत्रता आंदोलन में प्रेरित किया।</p>
<p><strong>सामाजिक कुरीतियों का किया विरोध </strong></p>
<p>आचार्यश्री जवाहरलालजी महाराज ने बाल विवाह, दहेज प्रथा और नशाखोरी का दृढ़ विरोध किया। इस संदर्भ को स्मरण करते हुए राज्यपाल कटारिया ने कहा कि उनके नाम पर जारी यह स्मारक सिक्का और डाक टिकट लोगों को उनके कार्यों की चिरस्थायी याद दिलाते रहेंगे। ज्ञातव्य हो कि स्मारक सिक्के में अभी तक पूर्व में कुल सात सिक्के जैन संत समाज पर जारी हुए पर स्थानकवासी समाज में यह प्रथम मौका है जब स्थानकवासी जैन आचार्य जवाहरलाल पर स्मारक सिक्का जारी किया गया।</p>
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		<title>जैन आगम सूक्तों का काव्य रूपांतर करने वाले बशीर अहमद मयूख का देहावसान: स्वतंत्रता संग्राम से लेकर साहित्य रचना में अव्वल स्थान </title>
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		<pubDate>Thu, 08 May 2025 09:21:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पेशे से किसान, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी देश के स्वनाम धन्य साहित्यकार बशीर अहमद मयूख एकमात्र ऐसे शख्स हैं, जिन्होंने अर्हत जैन आगम सूक्तों का काव्य रूपांतर किया है। विगत दिनों उनका देहावसान हो गया। उन्होंने वेद, कुरान, गीता, उपनिषद, जैन-बौध आगम सूक्त, गुरुग्रंथ आदि का काव्य रूपांतर कर सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल कायम की है। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पेशे से किसान, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी देश के स्वनाम धन्य साहित्यकार बशीर अहमद मयूख एकमात्र ऐसे शख्स हैं, जिन्होंने अर्हत जैन आगम सूक्तों का काव्य रूपांतर किया है। विगत दिनों उनका देहावसान हो गया। उन्होंने वेद, कुरान, गीता, उपनिषद, जैन-बौध आगम सूक्त, गुरुग्रंथ आदि का काव्य रूपांतर कर सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल कायम की है। उन्हें शत-शत नमन। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए श्रीफल जैन न्यूज के उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह खास रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जिनकी लेखन की मूल दृष्टि ही राष्ट्रीय एकता, सांप्रदायिक सद्भाव, किसी भी नाम पर मनुष्य के नाम भेद के विरुद्ध रही है। ऐसे साहित्यकार बिरले होते हैं। कोटा विज्ञाननगर में रहने वाले बशीर अहमद मयूख एक मात्र मुस्लिम लेखक रहे हैं, जिन्होंने अर्हत जैन आगम के सूक्तों का काव्य रूपांतर किया है। उनका लेखन दर्पण की तरह की साफ-सुथरा रहा। उनका विगत दिनों कोटा में 99वें वर्ष में प्रवेश के बाद देहावसान हो गया, लेकिन उनका रचित साहित्य सदा-सर्वदा सदियों तक जनमानस में आध्यात्म और धर्म आराधना के प्रति चेतना जागृत करता रहेगा। यह मेरा सौभाग्य रहा कि बारां राजस्थान में अखिल भारतीय साहित्यकार सम्मेलन में इंदौर से वर्ष 2019 में बतौर अतिथि आमंत्रित किया गया था। उस कार्यक्रम में बशीर अहमद मयूख भी विशेष अतिथि और मुख्य वक्ता के तौर पर मौजूद रहे, जहां उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p><strong>कई धर्म ग्रंथों को काव्य की धारा में पिरोया </strong></p>
<p>16 अक्टूबर 1926 को दशहरे के दिन जन्मे मयूख ने अपने विद्यार्थी काल में ही 1942 में स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया। वे कुछ समय राजनीति में भी सक्रिय रहे, लेकिन 1972 में उन्होंने दलगत राजनीति से सन्यास ले लिया। 1942 से कविता और साहित्य सृजन आरंभ किया। देश की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में वर्ष 1950 से छपना आरंभ हुए। उनकी प्रकाशित पुस्तकों में स्वर्ण रेखा में ऋग्वेद की ऋचा-मंत्रों का काव्य रूप प्रस्तुत किया। अर्हत में जैन आगम सूक्तों का भी उन्होंने काव्य रूपांतर किया। सूर्यबीज उनका गीत और कविता संग्रह है। ज्योति पथ में वेद, कुरान, गीता, उपनिषद, जैन-बौद्ध आगम सूक्त गुरुग्रंथ आदि काव्य का रूपांतर किया। वहीं गुमशुदा की तलाश में इनके सांस्कृतिक निबंध संग्रह है। अवधू अनहद नाद सुने में आध्यात्मिक-दार्शनिक काव्य संग्रह काफी चर्चित रहा है।</p>
<p><strong>कई सम्मानों से नवाजे गए मयूख </strong></p>
<p>मयूख को कई पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इनमें दशरथमल सिंघवी राष्ट्रीय एकता पुरस्कार, रामेश्वर टांटिया स्मृति पुरस्कार, हरित ऋषि पुरस्कार, राजस्थान श्री, दीनदयाल साहित्यकार पुरस्कार से नवाजे गए। इतना ही नहीं बशीर अहमद मयूख हिन्दी सलाहकार समिति के मानद सदस्य रहे। वे रेल मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, जलसंसाधन मंत्रालय, संस्कृत एवं उर्दू अकादमी राजस्थान, केंद्रीय हिन्दी समिति तथा केंद्रीय गृह मंत्रालय का भी प्रभार देखते थे। विशेष बात यह है कि इन्होंने अपने कवि सम्मेलनों से प्राप्त पारिश्रमिक से कोटा विज्ञान नगर में मयूखेश्वर महादेव का मंदिर का निर्माण करवाया है। जो आज लोगों की श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है।</p>
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