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	<title>Food Donation &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Food Donation &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>मुनिश्री ने कहा दान हमेशा सुपात्र को दिया जाना चाहिए : पूर्वाचार्यों ने आगम ग्रंथों में दाता के सात गुणों का किया है  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 12:54:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मानव जीवन में दान का बहुत महत्व है। जिस प्रकार रक्त के धब्बों को जल वो देता है उसी प्रकार हमारे जीवन में जो दोष लगें हुए हैं उन्हें सुपात्रों को दान देकर मिटाया जा सकता है। पूर्वाचार्यों ने दानदाता के सात गुणों का उल्लेख आगम ग्रंथों में किया है। दाता को हमेशा सतर्क रहते [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मानव जीवन में दान का बहुत महत्व है। जिस प्रकार रक्त के धब्बों को जल वो देता है उसी प्रकार हमारे जीवन में जो दोष लगें हुए हैं उन्हें सुपात्रों को दान देकर मिटाया जा सकता है। पूर्वाचार्यों ने दानदाता के सात गुणों का उल्लेख आगम ग्रंथों में किया है। दाता को हमेशा सतर्क रहते हुएं दान देना चाहिए। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, ओम पाटोदी की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> मानव जीवन में दान का बहुत महत्व है। जिस प्रकार रक्त के धब्बों को जल वो देता है उसी प्रकार हमारे जीवन में जो दोष लगें हुए हैं उन्हें सुपात्रों को दान देकर मिटाया जा सकता है। पूर्वाचार्यों ने दानदाता के सात गुणों का उल्लेख आगम ग्रंथों में किया है। दाता को हमेशा सतर्क रहते हुएं दान देना चाहिए ताकि कोई दोष नहीं लगे। यह बात आचार्य श्री विनम्र सागर जी के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री विनंद सागर जी ने सिद्धोदय सिद्ध क्षेत्र नेमावर में दान पर्व अक्षय तृतीया के अवसर पर दोपहर में स्वध्याय के दौरान व्यक्त किए। चूंकि आदिनाथ भगवान का एक वर्ष के उपवास के पश्चात इक्क्षूरस (गन्ने के रस) का आहार देकर पारणा राजा श्रैयांस द्वारा करवाया गया है। आहार दान का महत्व बताते हुए उन्होंने आहार दान करने वाले दाता पर इन सात गुणों को घटते हुए बताया कि जब भी मुनि राज को आहार दो तो दाता का पहला गुण श्रद्धा है, आहार श्रद्धा के साथ रुचि पूर्वक दो, श्रद्धा के साथ भक्ति भाव प्रकट होने चाहिए। तीसरा गुण विज्ञान अर्थात विवेक पूर्वक मुनि राज के स्वास्थ्य के अनुकूल आहार दिया जाना चाहिए। इसी प्रकार तुष्टि मतलब संतोष के साथ लोभ रहित भाव से आहार दिया जाना चाहिए। दाता में क्षमा का गुण होना चाहिए और दया भाव के साथ चौका लगाना चाहिए। कोई बाहरी सज्जन आपके चौंके में आहार देने आते हैं और उनसे कोई ग़लती भी हो जाए तो उनके प्रति दया और क्षमा भाव रखना चाहिए। इस प्रकार सुपात्र को आहार करवाने से पापों का क्षय और पुण्य में वृद्धि होती है।</p>
<p><strong>नवकार मंत्र पर बनाए गए मोबाइल गेम की जानकारी दी </strong></p>
<p>इस अवसर पर वर्द्धमानपुर शोध संस्थान के सदस्य बदनावर वर्द्धमानपुर, इंदौर और भोपाल से नेमावर पहूंचकर मुनि श्री विनंद सागर जी एवं क्षुल्लक श्री विश्वगुण सागर जी को आहार देने का लाभ प्राप्त किया। इस दौरान संस्थान के अभय पाटोदी ने नवकार मंत्र पर बनाए गए मोबाइल गेम (एप) के बारे में जानकारी दी। जिसके बारे में जानकर मुनि श्री बहुत बहुत आशीर्वाद दिया। संस्थान के एक प्रकल्प वर्धमान 2550 के बारे में विपिन पाटनी ने जानकारी दी। वहीं बदनावर वर्द्धमानपुर नगर की ऐतिहासिकता और नगर से प्राप्त तीर्थंकर प्रतिमाओं के बारे में जानकारी संस्थान के ओम पाटोदी ने दी। मुनि ने बहुत बहुत आशिर्वाद दिया। इस अवसर पर मनोरमा पाटनी, मोना पाटोदी, अंतिम सेठी, दिपाली पाटनी, आशी पाटोदी, दीक्षा सेठी आदि सदस्य उपस्थित थे।</p>
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		<title>नमन भैया ने अक्षय तृतीया पर आचार्य श्री को दिया आहारदान : आचार्यश्री वर्धमानसागर जी से की आध्यामिक चर्चा </title>
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		<pubDate>Tue, 21 Apr 2026 13:41:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर के गौरव बाल ब्रह्मचारी नमन भैया ने जयपुर जाकर आचार्यश्री वर्धमानसागर जी को आहारदान दिया। साथ ही उन्होंने उनके सानिध्य में आध्यात्मिक चर्चा कर आत्म तत्व को जाना। सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230; सनावद। नगर के गौरव बाल ब्रह्मचारी नमन भैया ने जयपुर जाकर आचार्यश्री वर्धमानसागर जी को आहारदान दिया। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर के गौरव बाल ब्रह्मचारी नमन भैया ने जयपुर जाकर आचार्यश्री वर्धमानसागर जी को आहारदान दिया। साथ ही उन्होंने उनके सानिध्य में आध्यात्मिक चर्चा कर आत्म तत्व को जाना। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> नगर के गौरव बाल ब्रह्मचारी नमन भैया ने जयपुर जाकर आचार्यश्री वर्धमानसागर जी को आहारदान दिया। साथ ही उन्होंने उनके सानिध्य में आध्यात्मिक चर्चा कर आत्म तत्व को जाना। उल्लेखनीय है कि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री अपूर्व सागर जी महाराज मुनि श्री अर्पित सागर जी महाराज एवं मुनि श्री विवर्जित सागर जी महाराज के संघ का प्रमुख संचालन कर रहे त्याग की परंपरा को आगे बढ़ाने वाले नगर के गौरव बाल ब्रह्मचारी नमन भैया जी ने अक्षय तृतीया के मंगल पावन दिवस पर जयपुर पहुंच कर आचार्य शांति सागर जी महाराज की परंपरा का निर्वाह कर रहे आचार्यश्री वर्धमान सागर जी महाराज को आहार दान देकर पुण्य अर्जन किया। इसके बाद उन्होंने आचार्य श्री से आध्यात्मिक धार्मिक चर्चा भी की। जैसा कि ज्ञात है कि पूर्व में ब्रह्मचारी नमन भैया ने आचार्य श्री से 2 प्रतिमा के व्रत धारण कर चुके हैं। आप आगामी दिनों में आचार्य श्री से जैनेश्वरी दीक्षा के लिए निवेदन कर जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण करने का भाव प्रकट करेंगे।</p>
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		<title>अक्षय तृतीया पर्व पर हुआ आहारदान परंपरा का निर्वहन : मुनिश्री संघ की आहारचर्या बड़वाह में हुई  </title>
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		<pubDate>Tue, 21 Apr 2026 12:36:51 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विशुद्ध सागरजी के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री आदित्य सागरजी ससंघ चार पिच्छी अक्षय तृतीया पर्व (दान महिमा पर्व )पर मंगल आगमन हुआ। बड़वाह से पढ़िए संदीप जैन की यह खबर&#8230; बड़वाह। आचार्य श्री विशुद्ध सागरजी के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री आदित्य सागरजी ससंघ चार पिच्छी अक्षय तृतीया पर्व (दान महिमा पर्व [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विशुद्ध सागरजी के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री आदित्य सागरजी ससंघ चार पिच्छी अक्षय तृतीया पर्व (दान महिमा पर्व )पर मंगल आगमन हुआ। <span style="color: #ff0000">बड़वाह से पढ़िए संदीप जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बड़वाह</strong>। आचार्य श्री विशुद्ध सागरजी के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री आदित्य सागरजी ससंघ चार पिच्छी अक्षय तृतीया पर्व (दान महिमा पर्व ) पर मंगल आगमन हुआ। आहार चर्या कि विधि किसी को भी मालूम न होने के कारण भगवान आदिनाथ को मुनि अवस्था में छः माह तक आहार नहीं मिला था। राजा श्रेयांस को पूर्व भव के स्मरण से आहार चर्या विधि का ज्ञान हुआ फिर राजा श्रेयांस ने मुनि आदिनाथ का पडगाहन कर नवधाभक्ति पूर्वक इच्छुक रस (गन्ने का रस ) से प्रथम आहार करवाया। जब से उस दिन का नाम अक्षय तृतीया पर्व पड़ा और दान की महिमा का प्रचलन प्रारंभ हुआ।</p>
<p>दान की महिमा का साक्षात् निर्वहन और धर्म प्रभावना के साथ आहार पुण्यार्जक श्रावक श्रेष्ठी प्रियंका संदीप चौधरी, रश्मि सुयश चौधरी परिवार द्वारा निज निवास पर मुनि श्री आदित्य सागरजी महाराज की आहार चर्या हुई। संघ के अन्य मुनि श्री सहज सागरजी की सुलोचना, प्रवीण जैन लब्धि जैन, मुनि अप्रमित सागरजी की स्वस्तिक सुधीर जैन कमलेश जैन एवं क्षुल्लक श्रेयस सागरजी की अनिता सुधीर जैन, सुयश जैन के निवास पर आहार चर्या हुई। सामायिक तपचर्या पश्चात् सायंकाल ससंघ का मंगल विहार इंदौर की ओर हुआ।</p>
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		<title>अक्षय तृतीया पर आदिनाथ पूजन कर जैन धर्मालुओं ने मनाया महापर्व : पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में पाठशाला परिवार के बच्चों ने अक्षय तृतीया पर भारतीय वेशभूषा में पूजन कराई </title>
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		<pubDate>Sun, 19 Apr 2026 18:23:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्मालुओं ने आज अक्षय तृतीया को दान का पर्व मनाते हुए जैन मंदिरों में प्रातःकाल अभिषेक पूजन के उपरान्त भगवान आदिनाथ की पूजन कर अर्घ्य समर्पित किए। श्रावकों ने निकटवर्ती स्थानों पर विराजमान मुनिराजों को आहारदान कर पुण्यार्जन किया। ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; ललितपुर। जैन धर्मालुओं ने आज अक्षय तृतीया को दान का [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्मालुओं ने आज अक्षय तृतीया को दान का पर्व मनाते हुए जैन मंदिरों में प्रातःकाल अभिषेक पूजन के उपरान्त भगवान आदिनाथ की पूजन कर अर्घ्य समर्पित किए। श्रावकों ने निकटवर्ती स्थानों पर विराजमान मुनिराजों को आहारदान कर पुण्यार्जन किया। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> जैन धर्मालुओं ने आज अक्षय तृतीया को दान का पर्व मनाते हुए जैन मंदिरों में प्रातःकाल अभिषेक पूजन के उपरान्त भगवान आदिनाथ की पूजन कर अर्घ्य समर्पित किए। श्रावकों ने निकटवर्ती स्थानों पर विराजमान मुनिराजों को आहारदान कर पुण्यार्जन किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार राजा ऋषभदेव ने मुनिदीक्षा धारण के उपरान्त छह माह का उपवास लेकर आहारचर्या के लिए निकले उस समय नवदाभक्ति पूर्वक आहार की विधि न मिलने के कारण पडगाहन नहीं हो पाया 7 माह 9 दिन के उपरान्त अक्षय तृतीया को हस्तिनापुर नगरी में मुनिराज का प्रथम आहार राजा श्रेयांस के यहां हुआ और आहार में मात्र इच्छुरस का आहार ग्रहण किया। तब से आज तक अक्षय तृतीया को जैन धर्मालु आखा तीज के रूप में मनाते हैं और दानतीर्थ के प्रवर्तक राजा श्रयांस कहलाए। नगर के पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में पाठशाला परिवार के बच्चों ने अक्षय तृतीया पर भारतीय वेशभूषा में पूजन कराई और स्वल्पाहार में इच्छरस बच्चों को वितरित कर मंदिर प्रबंधक जिनेंद्र जैन रजपुरा एवं मनीष जैन फोटो द्वारा पुरस्कृत किया।</p>
<p>कार्यक्रम की संयोजना प्रीति जैन, गुंजा जैन, दीपा जैन, श्यामली जैन, महक जैन, टीसा जैन की गई। इस मौके पर प्रमुख रूप से मनोज जैन जडीबूटी, संतोष जैन, विमल जैन पारौल, अनिल जैन अलया, अनुराग जैन सिंघई, मनोज जैन कलपुर्जे, राजकुमार जैन, विकास खजुरिया, सुरेंद्र जैन कुडावनी, विमल जैन डुगारसा, ऋषभ जैन रजपुरा सतीश जैन मौजूद रहे। अक्षय तृतीया पर अनेकों श्रावकों ने निकटवर्ती टीकमगढ़ जिले में विराजमान आचार्य श्री विशुद्धसागर महाराज, मप्र के भानगढ में विराजमान मुनिश्री सुधासागरजी एवं चंदेरी नगर में मुनिश्री अभयसागरजी सहित साधु संघों में पहुंचकर दर्शन लाभ लिया और आहारदान किया। अनेकों श्रावकों ने अपने आवास पर परोक्ष रूप से दिगंबर साधुओं का नमोस्तु नमोस्तु की भावना से पडगाहन कर भावना की कि उनके घर ऋद्धिधारी मुनिराज का पदार्पण हुआ और उन्हें आहारदान कर पुर्ण्याजन मिला।</p>
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		<title>सुख में सुमिरन जो करे दुख काए होय : मुनि सुधासागर अभिनंदनोदय तीर्थ में मुनिसंघ ने दी श्रावकों को सीख </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/he_who_remembers_god_in_times_of_happiness_why_would_sorrow_ever_befall_him/</link>
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		<pubDate>Tue, 17 Mar 2026 13:27:30 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री अभिनंदनोदय तीर्थ क्षेत्र ललितपुर में धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए मुनि श्री सुधासागर महाराज ने कहा कि पर के आलम्बन के बिना व्यक्ति जी नहीं सकता और इसको छोडे बगैर कल्याण नहीं है। ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; ललितपुर। श्री अभिनंदनोदय तीर्थ क्षेत्र ललितपुर में धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए मुनि श्री सुधासागर महाराज [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री अभिनंदनोदय तीर्थ क्षेत्र ललितपुर में धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए मुनि श्री सुधासागर महाराज ने कहा कि पर के आलम्बन के बिना व्यक्ति जी नहीं सकता और इसको छोडे बगैर कल्याण नहीं है। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>ललितपुर।</strong> श्री अभिनंदनोदय तीर्थ क्षेत्र ललितपुर में धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए मुनि श्री सुधासागर महाराज ने कहा कि पर के आलम्बन के बिना व्यक्ति जी नहीं सकता और इसको छोडे बगैर कल्याण नहीं है। जीवन में अपने मन को प्रसन्न रखो सौभाग्य मानो कि हम अपने मन को दुखी नहीं करेंगे और अच्छा सोचेंगे। मुनि श्री ने जीवन को धर्म से जोडने की प्रेरणा देते हुए कहा अपना समय व्यर्थ मत गवाओ प्रभु की भक्ति स्वाध्याय से जुडने से जीवन में शान्ति और कल्याण का मार्ग प्रशस्त होगा। मुनि श्री ने कहा जैन दर्शन कहता है कि यह मनुष्य जन्म तुम्हें कई जन्मों के पुण्य से मिला है इसका उपयोग करो बुरे कार्यों पर न तो सोचो और न ही करो। धर्म ही सद आचरण और अच्छे बुरे की पहिचान देता है। उन्होंने कहा प्रकृत्ति माँ है बह गलत वस्तु का निर्माण नहीं करती हर वस्तुत में गुण है इसलिए पहचानो और प्रभु चरणों से जुड़ो प्रभु के सुमरन में ही कल्याण है। सुख के दिन गलत कार्य में मत गंवाओ, प्रभु चरणों में बने रहो और गलत कार्यों से बचो इससे जीवन में संस्कार आएंगे और भविष्य सुधरेगा।</p>
<p><strong>भक्तिपूर्वक मुनि श्री को आहारदान दिया</strong></p>
<p>धर्म सभा के शुभारम्भ में मुनि श्री सुधासागर महाराज का पाद प्रक्षालन जैन पंचायत के साथ शान्तोदय, देवोदय एवं सतोदय तीर्थ के पदाधिकारियों द्वारा किया गया। महिला मण्डल द्वारा संगीतमय मुनि श्री की पूजन हुई जिसमें भक्तिपूर्वक अर्घ्य समर्पित किए गए। धर्मसभा का संचालन महामंत्री आकाश जैन एवी गैस द्वारा किया गया। मुनि श्री के ससंघ अभिनंदनोदय तीर्थ में विराजमान रहने से अपूर्व धर्म प्रभावना हो रही है। मुनि श्री की आहारचर्या में समूचा प्रांगण जयकारों से गूंज उठता है। आज आहारचर्या का पुण्यार्जन सोमचंद संजीव जैन लकी परिवार को मिला। जिन्होंने भक्तिपूर्वक मुनि श्री को आहारदान दिया और गाजे बाजे के साथ अपने आवास से अभिनंदनोदय तीर्थ मुनि श्री को लेकर आए। सायंकाल जिज्ञासा समाधान कार्यक्रम आलोक जैन शास्त्री के संयोजन में हुआ। जिसमें अनेकों श्रावकों ने अपनी शंकाओं का समाधान निर्यापक श्रमण मुनि श्री सुधासागर महाराज द्वारा पाया।नजिसमें उन्होने श्रावकों को धर्म से जुडने एवं समाजिक कार्यों में सक्रिय रहने की प्रेरणा दी।</p>
<p><strong>कार्यक्रम में यह रहे मौजूद</strong></p>
<p>धर्मसभा में प्रमुख रूप से जैन पंचायत के अध्यक्ष डॉ. अक्षय टडैया, महामंत्री आकाश जैन, संयोजक सनत जैन खजुरिया, सीए सौरभ जैन, मंदिर प्रबंधक मोदी पंकज जैन, अशोक दैलवारा, धार्मिक अयोजन संयोजक प्रतीक इमलिया, राकेश जैन रिंकू, श्रेष्ठी शीलचंद अनौरा, राजेन्द्र जैन थनवारा, अक्षय अलया मीडिया प्रभारी, संजीव जैन ममता स्पोर्ट,नरेंद्र जैन छोटे पहलवान, जिनेन्द्र जैन डिस्को, वैभव जैन टिन्ना, स्वदेश गोयल, सौरभ जैन पीलू, रिंकू जैन पाय, अंकुर जैन मोहनमावा, प्रमुख रूप से मौजूद रहे। मंगलवार को प्रातःकाल मुनिश्रीवसुधासागरजी महाराज ने ससंघ नगर में निर्माणाधीन भगवान महावीर नेत्र चिकित्सालय एवं गांधीनगर स्थित आदिनाथ जैन मंदिर पहुंचे, जहां व्यवस्थाओं को देखा और मार्गदर्शन किया।</p>
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		<title>सिद्धम भैया से मुनि श्री सिद्धसागर जी महाराज तक का सफर: नांद्रे में विराजित मुनिश्री का चल रहा वर्षायोग  </title>
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		<pubDate>Mon, 18 Aug 2025 06:57:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मध्यप्रदेश में चंबल संभाग के डाकू ग्रस्त भिंड जिले के अंतर्गत प्रसिद्ध रूर नगर की पावन धरा पर श्रेष्ठीवर्य कपूरचंद की धर्मपत्नी उषा जैन जी की कुक्षी से 7 सितंबर 2002 में जन्म लेकर ‘सिद्धम’ नाम प्राप्त किया। रूर कि भूमि सदैव वंदनीय रही है क्योंकि, जिस परिवार में आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज का [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मध्यप्रदेश में चंबल संभाग के डाकू ग्रस्त भिंड जिले के अंतर्गत प्रसिद्ध रूर नगर की पावन धरा पर श्रेष्ठीवर्य कपूरचंद की धर्मपत्नी उषा जैन जी की कुक्षी से 7 सितंबर 2002 में जन्म लेकर ‘सिद्धम’ नाम प्राप्त किया। रूर कि भूमि सदैव वंदनीय रही है क्योंकि, जिस परिवार में आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज का जन्म हुआ। उसी घर में मुनि श्री सिद्धसागर जी महाराज का जन्म हुआ है। <span style="color: #ff0000">नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नांद्रे।</strong> मध्यप्रदेश में चंबल संभाग के डाकू ग्रस्त भिंड जिले के अंतर्गत प्रसिद्ध रूर नगर की पावन धरा पर श्रेष्ठीवर्य कपूरचंद की धर्मपत्नी उषा जैन जी की कुक्षी से 7 सितंबर 2002 में जन्म लेकर ‘सिद्धम’ नाम प्राप्त किया। रूर कि भूमि सदैव वंदनीय रही है क्योंकि, जिस परिवार में आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज का जन्म हुआ। उसी घर में मुनि श्री सिद्धसागर जी महाराज का जन्म हुआ है। आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज के पूर्वाश्रम के भतीजे हैं मुनि श्री सिद्धसागर जी महाराज। सिद्धम भैया जी की लौकिक शिक्षा एचएससी तक हुई। देवपूजा, शास्त्र स्वाध्याय और तीर्थ यात्रा करना आपका मुख्य कर्तव्य था। मुनिराजों का विहार कराना, चातुर्मास कराना, वैयावृत्ती करना, आहार दान देना आदि में आप सदैव अग्रणी रहे। सिद्धम भैया ने धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज से भिंड में 15 अगस्त 2019 को मात्र 17 वर्ष की अल्पायु में आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत ग्रहण कर संघ में प्रवेश किया। इसके पश्चात बाल ब्रह्मचारी सिद्धम भैया ने सन 2020 में पटना (बिहार) के चंडी गांव में द्वितीय प्रतिमा व्रत लिया। ओजस्वी वक्ता, सरल व्यक्तित्व, गुरु भक्ति में निपुण सिद्धम भैया ने लगातार चार वर्ष तक संघस्थ ब्रह्मचारी रहकर गुरु मुख से शास्त्रों का अध्ययन किया।</p>
<p><strong>मुनि श्री सिद्ध सागर जी का जीवन एक महान आदर्श</strong></p>
<p>25 अक्टूबर 2023 का वह शुभ दिन आया, जब आचार्य श्री विशुद्धसागर जी ने आपकी योग्यता परखकर आपकी आध्यात्मिक यात्रा को आगे बढाते हुए बड़ौत में अपार जनसमूह के समक्ष मुनि दीक्षा प्रदान कर आपको मुनि श्री सिद्धसागर जी कहकर पुकारा। मुनिश्री सिद्ध सागर जी का मंगल वर्षायोग (चातुर्मास )वर्ष 2024 में नांदणी (महाराष्ट्र) हुआ और वर्ष 2025 का चातुर्मास नांद्रे (महाराष्ट्र) में चल रहा है। मुनि श्री सिद्धसागर जी महाराज गुरु चरणों में रहकर निरंतर शास्त्रों का स्वाध्याय, ध्यान, उपवास में अपने समय का सदुपयोग करते रहते हैं। मुनि श्री सिद्ध सागर जी का जीवन एक महान आदर्श है।</p>
<p><strong>गांव-गांव भ्रमण करते हुए जिन धर्म की सतत धर्म प्रभावना कर रहे हैं</strong></p>
<p>आपके गृहस्थावस्था के भाई-बहन विकास जैन, पंकज जैन, सपना जैन और प्रीति जैन भी निरंतर धर्म साधना करते हुए शास्त्र-स्वाध्याय में मग्न रहते हैं। समाज को आप जैसे मुनिराज पर गर्व है। आप गांव-गांव भ्रमण करते हुए जिन धर्म की सतत धर्म प्रभावना कर रहे हैं। धन्य हैं आपका त्याग और तपस्या। आप स्वभाव से विनम्र एवं मितभाषी हैं। आपके प्रवचन प्रभावशाली होते हैं। मैं अपने आपको भाग्यशाली समझता हूं कि मुझे मुनि श्री सिद्ध सागर जी के रुप में मुझे सच्चे गुरु एवं सच्चे मित्र मिले हैं। मेरी यही भावना है कि जीवन के अंतिम सांस तक गुरु-शिष्य का यह नाता बना रहे।</p>
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		<title>हे! स्वामी नमोस्तु, नमोस्तु, नमोस्तु से गूंजा जैन मंदिर : जैन मिलन बालिका मंडल ने मुनिराजों को दिया आहारदान </title>
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		<pubDate>Sun, 27 Jul 2025 11:41:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[हरियाली तीज पर बड़े जैन मंदिर में उत्सव जैसा माहौल था। जैन मिलन बालिका मंडल की 50 से अधिक बालिकाएं युगल मुनिराजों को आहार दान देने के लिए दृढ़ संकल्प और नवधा भक्ति के साथ हाथों में मांगलिक वस्तुए जैसे कलश, श्रीफल, बादाम, सुपाड़ी, लौंग आदि लेकर पढ़गाहन के लिए तैयार थीं। मुरैना से पढ़िए, [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>हरियाली तीज पर बड़े जैन मंदिर में उत्सव जैसा माहौल था। जैन मिलन बालिका मंडल की 50 से अधिक बालिकाएं युगल मुनिराजों को आहार दान देने के लिए दृढ़ संकल्प और नवधा भक्ति के साथ हाथों में मांगलिक वस्तुए जैसे कलश, श्रीफल, बादाम, सुपाड़ी, लौंग आदि लेकर पढ़गाहन के लिए तैयार थीं। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> हरियाली तीज पर बड़े जैन मंदिर में उत्सव जैसा माहौल था। जैन मिलन बालिका मंडल की 50 से अधिक बालिकाएं युगल मुनिराजों को आहार दान देने के लिए दृढ़ संकल्प और नवधा भक्ति के साथ हाथों में मांगलिक वस्तुए जैसे कलश, श्रीफल, बादाम, सुपाड़ी, लौंग आदि लेकर पढ़गाहन के लिए तैयार थीं। आचार्य आर्जवसागरजी महाराज के शिष्य चातुर्मासरत मुनि श्री विलोकसागरजी महाराज एवं मुनिश्री विबोधसागरजी महाराज शुद्धि के बाद श्री जिनेंद्र प्रभु की वंदना कर संकल्प पूर्वक आहारचर्या के लिए निकले तो संपूर्ण मंदिर प्रांगण हे स्वामी नमोस्तु, नमोस्तु, नमोस्तु, अत्रो अत्रो अत्रो, तिष्ठो तिष्ठो तिष्ठो के स्वर से गुंजायमान हो उठा।</p>
<p>दृश्य था युगल मुनिराजों को आहारचर्या हेतु पढ़गाहन का। जैन मिलन बालिका मंडल की सभी बालिकाएं सामूहिक रूप में मुनिश्री को आहारचर्या के लिए आमंत्रित कर रही थीं बालिकाओं के लिए भी आज का दिन पुण्यशाली था। यही वजह रही कि दोनों मुनिराजों की विधि मिल गई और दोनों युगल मुनिराजों का पढ़गाहन उनके चौके में हुआ। सभी ने मिलकर महामंत्र णमोकार का पाठ करते हुए गुरुदेवों की तीन परिक्रमा की और बोला कि हे स्वामी मन शुद्धि, वचन शुद्धि, काया शुद्धि, आहार जल शुद्ध है, भोजनशाला में प्रवेश कीजिए।</p>
<p>सभी बालिकाएं पूर्ण श्रद्धा एवं नवधा भक्ति के साथ युगल मुनिराजों को आहार के लिए भोजनशाला में ले गईं। गुरुदेव के भोजनशाला में प्रवेश के बाद अष्टद्रव्य से पूजनादि के पश्चात सभी ने अत्यंत ही आत्मीयता, शुद्ध मन से दोनों मुनिराजों को आहार कराया। युगल मुनिराजों का निरंतराय आहार होने पर सभी बालिकाओं के चेहरों पर एक अलग तरह की चमक दिखाई दे रही थी।</p>
<p><strong>युगल मुनिराजों ने बालिकाओं को दिलाए संकल्प</strong></p>
<p>आहारचर्या के बाद युगल मुनिराजों ने जैन सिद्धांतों के अनुसार बालिकाओं को कुछ संकल्प भी दिलाएं। उन्होंने कहा कि आज के बाद आप सभी नित्य देव दर्शन करेंगे। अपने माता पिता की पसंद से ही शादी करेंगे। शादी से पूर्व पूर्ण रूप से ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करेंगे। सदैव मुनिराजों और आर्यिकाओं को आहारदान एवं वैयावृति करेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि वर्तमान में मानव जीवन बहुत ही संघर्षमय हो गया है।आपको जीवन में कितनी भी परेशानियां आएं, कभी घबराना नहीं।परेशानियों से डरना नहीं, उनका डटकर मुकाबला करना। आत्महत्या जैसा विचार कभी भी मन में न आने देना, क्योंकि संघर्ष का नाम ही जीवन है। सभी बालिकाओं ने युगल मुनिराजों की बातों को ध्यानपूर्वक सुना और उन्हें वचन दिया कि हे गुरुदेव हम भगवान महावीर स्वामी के अनुयायी होकर जैन दर्शन को अंगीकार करते हैं। आपके द्वारा आज दिलाए गए संकल्पों को सदैव पालन करेंगे।</p>
<p><strong>दिगंबर जैन संतों की आहारचर्या</strong></p>
<p>जैन मुनि की आहारचर्या बहुत कठोर होती है, जिसे ‘सिंह वृत्ति’ कहा जाता है। वे 24 घंटे में विधि मिलने पर एक बार ही अन्न जल ग्रहण करते हैं। इसमें जैन साधु एक ही स्थान पर खड़े होकर, दोनों हाथों को मिलाकर अंजुली बनाते हैं और उसी में भोजन करते हैं। यदि अंजुली में भोजन के साथ कोई जीव जंतु, बाल, अपवित्र पदार्थ या कोई जीव आ जाए तो वे भोजन लेना बंद कर देते हैं और अपने हाथ छोड़ देते हैं, फिर पानी भी नहीं पीते। इस क्रिया को अन्तराय बोला जाता है। इसके बाद वे दूसरे दिन ही आहारचर्या के लिए जाते हैं।</p>
<p><strong>जैन धर्म में क्या है आहारदान</strong></p>
<p>जैन धर्म में आहार दान को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दान, मुनियों, आर्यिकाओं और तपस्वियों को दिया जाता है। जैन दर्शन में आहारदान एक महत्वपूर्ण और पवित्र क्रिया है। यह अहिंसा, अपरिग्रह, और पुण्य प्राप्ति के सिद्धांतों पर आधारित है। जैन धर्म में आहार दान का पालन करके व्यक्ति न केवल अपने कर्मों को शुद्ध करता है, बल्कि वह दूसरों के जीवन में भी सुख और शांति लाता है।</p>
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		<title>हरियाली तीज पर जैन मिलन बालिका मंडल करेगा आहारदान: पीड़ित मानव सेवा एवं समाजोत्थान के कार्यों में अग्रणी है संस्था  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Jul 2025 13:49:10 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[हरियाली तीज पर 27 जुलाई को जैन मिलन बालिका मंडल मुरैना मुनिराजों की आहारचर्या में सहभागी बनेगा। जैन मिलन बालिका मंडल मुरैना की अध्यक्ष दीक्षा नरेश जैन ने बताया कि बालिका मंडल सदैव ही जैन साधु संतों, साध्वियों की संयम साधना में संलग्न रहता है। किसी भी जैन मुनिराज अथवा जैन साध्वी के नगरागमन पर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>हरियाली तीज पर 27 जुलाई को जैन मिलन बालिका मंडल मुरैना मुनिराजों की आहारचर्या में सहभागी बनेगा। जैन मिलन बालिका मंडल मुरैना की अध्यक्ष दीक्षा नरेश जैन ने बताया कि बालिका मंडल सदैव ही जैन साधु संतों, साध्वियों की संयम साधना में संलग्न रहता है। किसी भी जैन मुनिराज अथवा जैन साध्वी के नगरागमन पर मंडल द्वारा अपनी सेवाएं प्रदान की जाती है। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> हरियाली तीज पर 27 जुलाई को जैन मिलन बालिका मंडल मुरैना मुनिराजों की आहारचर्या में सहभागी बनेगा। जैन मिलन बालिका मंडल मुरैना की अध्यक्ष दीक्षा नरेश जैन ने बताया कि बालिका मंडल सदैव ही जैन साधु संतों, साध्वियों की संयम साधना में संलग्न रहता है। किसी भी जैन मुनिराज अथवा जैन साध्वी के नगरागमन पर मंडल द्वारा अपनी सेवाएं प्रदान की जाती है। इसके साथ ही जीव दया, पीड़ित मानव सेवा एवं समाजोत्थान के कार्यों में जैन मिलन बालिका मंडल की सहभागिता रहती है। इस वर्ष नगर के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में आचार्यश्री विद्यासागर महाराज से दीक्षित आचार्यश्री आर्जवसागरजी महाराज के शिष्य मुनिश्री विलोक सागरजी एवं मुनिश्री विबोधसागरजी का आध्यात्मिक चातुर्मास हो रहा है।युगल मुनिराजों की आहारचर्या, धर्मसभा, धार्मिक अनुष्ठानों में जैन मिलन बालिका मंडल अपनी सहभागिता प्रदान कर रहा है। हरियाली तीज के अवसर पर 27 जुलाई को जैन मिलन बालिका मंडल की सभी सदस्यों ने युगल मुनिराजों को आहारदान देने का दृढ़ संकल्प लिया है। मंडल की सभी बालिकाएं पूर्ण श्रद्धा एवं भक्ति के साथ युगल मुनिराजों के लिए चौका लगाकर, नवधा भक्ति पूर्वक मुनिराजों का पड़गाहन करते हुए उन्हें आहारदान देंगी।</p>
<p>आहारचर्या में जैन मिलन बालिका मंडल की अध्यक्ष दीक्षा जैन, साक्षी जैन, स्वस्ति जैन, अक्षिता जैन, अनुश्री जैन, भूमि जैन, खुशी जैन, दीक्षा जैन, आशी जैन, मनीषा जैन, चांदनी जैन, जानवी जैन, क्षमा जैन, भूमि जैन, मोना जैन, आयुषी जैन, खुशी जैन, सौम्या जैन, नव्या जैन, निर्जरा जैन, हंशिका जैन, बेबो जैन, आशिका जैन, बुलबुल जैन, शिवानी जैन, न्याशा जैन, परी जैन, दृष्टि जैन सहित सभी सदस्याएं सहभागी होंगी।</p>
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		<title>पुलक पर्व महोत्सव में हुआ विधान में बरसी भक्ति: अवतरण दिवस पर पौधरोपण, रक्तदान कर सेवा की  </title>
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		<pubDate>Mon, 12 May 2025 07:31:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री पुलक सागर जी के अवतरण दिवस पर तीन दिवसीय कार्यक्रम में पुलक मंच एवं महिला जाग्रति मंच के सदस्यों ने पुलक पर्व मनाया। इसमें रक्तदान शिविर, पौधरोपण, अन्नदान और पुलक सिंधु विधान आदि के कार्यक्रम भक्ति और श्रद्धाभाव से किए गए। इंदौर से पढ़िए, उषा डोसी, मीरा जैन की यह खबर&#8230; इंदौर। आचार्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री पुलक सागर जी के अवतरण दिवस पर तीन दिवसीय कार्यक्रम में पुलक मंच एवं महिला जाग्रति मंच के सदस्यों ने पुलक पर्व मनाया। इसमें रक्तदान शिविर, पौधरोपण, अन्नदान और पुलक सिंधु विधान आदि के कार्यक्रम भक्ति और श्रद्धाभाव से किए गए। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, उषा डोसी, मीरा जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> आचार्य श्री पुलक सागर जी के अवतरण दिवस के रूप में तीन दिवसीय कार्यक्रम 9 से 11 मई तक पुलक पर्व के रूप में पुलक मंच एवं महिला जाग्रति मंच के सदस्यों द्वारा मनाया जाता है। प्रथम दिवस 9 मई को रक्तदान शिविर का जैन कॉलोनी मंदिर लगाया गया। मंच परिवार के सदस्यों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। सुदामा नगर जैन कॉलोनी अंबिकापुरी राजेंद्र नगर शाखा के सदस्यों ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। द्वितीय दिन 10 मई को पौधरोपण एवं अन्नदान किया गया। 11 मई को गुरुदेव के अवतरण दिवस पर सुदामा नगर जैन मंदिर में पुलक सिंधु विधान मुनिश्री प्रणुत सागर जी एवं आर्यिका विबोधश्री माताजी ससंघ के सानिध्य में विधान का शुभारंभ हुआ। इसमें संचालन विमल झांझरी महामंत्री सुदामा नगर ने किया। मुनि श्री ने उदबोधन में आचार्यश्री पुलकसागरजी को याद करते हुए उनके द्वारा बनाई गई संस्था को बड़ी बताते हुए कहा कि यह संस्था पूरे देश में साधु संतों की सेवा करती है।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-80746" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250512-WA0011.jpg" alt="" width="1600" height="720" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250512-WA0011.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250512-WA0011-300x135.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250512-WA0011-1024x461.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250512-WA0011-768x346.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250512-WA0011-1536x691.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250512-WA0011-990x446.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250512-WA0011-1320x594.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />पुलक सिंधु विधान में इनका रहा सराहनीय योगदान </strong></p>
<p>संभाग अध्यक्ष अनामिका बाकलीवाल एवं महामंत्री आशा सोनी ने बताया कि विश्व शांति के लिए पुलक सिंधु विधान किया गया। इसमें सौधर्म इंद्र उषा कमल डोसी, कुबेर इंद्र मीरा महेंद्र जैन एवं यज्ञनायक इंद्र ज्योत्सना अरविंद जैन ने भक्ति भाव से विधान पूर्ण किया। रविवार को विधान महोत्सव में राष्ट्रीय अध्यक्ष मीना झांझरी, आशा होलसराय सोनी, प्रदीप बडजात्या, कमल किरण रावका, पदमचंद मोदी, महेंद्र निगोत्या, प्रदीप बिलाला, चंद्रेश जैन, जीतू सेठ, माधुरी कुलदीप जैन, वैभव कसलीवाल, पीयूष रावका, सुरेश सेठी, सुषमा सरैया, कमल डोसी, महेंद्र जैन, अरविंद जैन, कैलाश मीना पाटनी, मीता जैन, रेखा काला, रेखा बंडी आदि सदस्य उपस्थित रहे। आभार मनोज बाकलीवाल ने आभार माना।</p>
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		<title>आहार दान के पुण्य से मोक्ष की प्राप्ति होती हैं: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने धर्मसभा में दी मंगलदेशना  </title>
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		<pubDate>Thu, 01 May 2025 08:31:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने नीमच की धर्मसभा में आहारदान का महत्व बताया। आचार्यश्री ने भगवान आदिनाथ जी के आहारचर्या के बारे में विस्तार से श्रावकों को समझाया। धर्मसभा में बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे। नीमच से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; नीमच। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने नीमच की धर्मसभा में आहारदान का महत्व बताया। आचार्यश्री ने भगवान आदिनाथ जी के आहारचर्या के बारे में विस्तार से श्रावकों को समझाया। धर्मसभा में बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे। <span style="color: #ff0000">नीमच से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नीमच।</strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 36 साधुओं सहित नीमच विराजित हैं। अक्षय तृतीया जैन धर्म के दृष्टिकोण से पावन दिवस है, क्योंकि प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथ भगवान का अक्षय तृतीया वैशाख शुक्ला तीज को एक वर्ष के बाद उपवास के बाद पारणा होकर प्रथम आहार हुआ था। श्री आदिनाथ भगवान ने श्रमण साधुओं के लिए आहार चर्या का मार्गदर्शन किया। श्री ऋषभदेव भगवान ने गृहस्थों को असि, मसी, कृषि, शिल्प, कला और वाणिज्य आवश्यक कार्यों का ज्ञान कराया। अपनी पुत्रियों ब्रह्मी और सुंदरी के माध्यम से अंक और लिपि का ज्ञान कराया। वह जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर, उनके पुत्र भरत प्रथम चक्रवती अन्य पुत्र अनंत वीर्य प्रथम गणधर तथा बाहुबली प्रथम कामदेव हुए। उन्होंने सभी 100 पुत्रों को विभिन्न कलाआंे का ज्ञान कराया। यह मंगलदेशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने नीमच की धर्मसभा में प्रकट की। आचार्य श्री ने कहा कि श्री ऋषभदेव ने 84 लाख वर्ष पूर्व की आयु में जब एक लाख वर्ष पूर्व की आयु शेष थी तब दीक्षा धारण की। आचार्य श्री ने बताया कि 83 लाख वर्ष होने के बावजूद तीर्थंकर वृद्ध नहीं बुढ़ापा नहीं आता है, सदा वह जवान रहते हैं। आचार्य श्री ने बताया कि श्री आदिनाथ महा मुनिराज ने छह माह का योग धारण कर उपवास किया था। आगामी 6 माह में उपवास के बाद जब आहार के लिए निकले तो 6 माह तक उन्हें आहार की विधि नहीं मिली, आहार नहीं हुआ क्योंकि, किसी को भी साधुओं को आहार देने का ज्ञान नहीं था। अनेक श्रावक कोई हीरे रत्न लाता था, कोई राज्य सौंपता था, कोई कन्याएं देता था किंतु आगम की विधि अनुसार उन्हें आहार के लिए नवधाभक्ति से पड़गाहन नहीं करते थे। तब आहार के लिए एक नगर से दूसरे नगर भ्रमण विहार करते हुए हस्तिनापुर के राजा श्रेयांस को महा मुनिराज आदिनाथ की मुद्रा देखकर पूर्व भव का जाति स्मरण हुआ और उन्होंने श्री आदिनाथ महामुनिराज का पड़गाहन किया और गन्ने के रस से आहार कराया।</p>
<p><strong>साधु के पड़गाहन की सही विधि बताई</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने इस अवसर पर बताया कि प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज ने वर्ष 1915 में क्षुल्लक दीक्षा ली थी। उस समय श्रावकों को नवधा भक्ति से आहार चर्या का ज्ञान नहीं था। 3 दिन से ज्यादा उपवास हो गए। तब मंदिर के उपाध्याय ने साधु के पड़गाहन की सही विधि बताई, तब आहार हुआ। आचार्य श्री ने बताया कि दान की दृष्टि से तीर्थंकर उत्तम, मुनि और आर्यिका मध्यम तथा क्षुल्लक और क्षुल्लिका जघन्य पात्र होते हैं। पात्रों को आहारदान से वैसा फल प्राप्त होता हैं। आहारदान देने से राजा श्रेयांश मोक्ष गए। मानव जीवन की सार्थकता आहार दान, अभय दान, औषधी दान और शास्त्र दान देने से होती है। इससे पुण्य की प्राप्ति होती है।</p>
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