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	<title>First Abhishek &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>First Abhishek &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>भगवानी देवी के पुण्य स्मृति दिवस पर किया विशेष पूजन : अजमेरा परिवार ने किया अभिषेक और शांतिधारा की  </title>
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		<pubDate>Sat, 18 Apr 2026 05:33:19 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री दिगम्बर जैन मंदिर में शुक्रवार को मुनिश्री धर्म सागर जी के सानिध्य में अमावस्या महापर्व के शुभ अवसर पर देवाधिदेव 1008 श्री पारसनाथ भगवान का प्रथम अभिषेक मुनि श्री भाव सागर जी के मुखारबिंद से हुआ।झूमरी तिलैया से पढ़िए, यह खबर&#8230; झूमरी तिलैया। श्री दिगम्बर जैन मंदिर में शुक्रवार को मुनिश्री धर्म सागर जी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री दिगम्बर जैन मंदिर में शुक्रवार को मुनिश्री धर्म सागर जी के सानिध्य में अमावस्या महापर्व के शुभ अवसर पर देवाधिदेव 1008 श्री पारसनाथ भगवान का प्रथम अभिषेक मुनि श्री भाव सागर जी के मुखारबिंद से हुआ।<span style="color: #ff0000">झूमरी तिलैया से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span><del></p>
<hr />
<p></del>झूमरी तिलैया।</strong> श्री दिगम्बर जैन मंदिर में शुक्रवार को मुनिश्री धर्म सागर जी के सानिध्य में अमावस्या महापर्व के शुभ अवसर पर देवाधिदेव 1008 श्री पारसनाथ भगवान का प्रथम अभिषेक मुनि श्री भाव सागर जी के मुखारबिंद से हुआ। उन्होंने शांतिधारा के मंत्रों का उच्चारण किया। शांतिधारा का सौभाग्य अजमेरा परिवार को प्राप्त हुआ। अशोक, विनोद, सुनील, मुकेश, राज कुमार अजमेरा की मातेश्वरी भगवानी देवी अजमेरा की पुण्यतिथि पर विशेष पूजा-अर्चना की गई। साथ ही बेंगलोर में पुत्र अशोक मंजू जैन अजमेरा ने बेगुर जैन मंदिर में प्रथम अभिषेक और शांतिधारा की।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-104991" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260418-WA0001-264x300.jpg" alt="" width="264" height="300" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260418-WA0001-264x300.jpg 264w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260418-WA0001.jpg 514w" sizes="(max-width: 264px) 100vw, 264px" /></p>
<p><strong>इन्होंने दी श्रद्धांजलि</strong></p>
<p>इस अवसर परअजमेरा परिवार कोडरमा के साथ समाज के सह मंत्री राज जैन छाबड़ा, सुरेश जैन झांझरी, सुशील जैन छाबडा, प्रदीप जैन छाबड़ा, सुशील जैन पांड्या, मनीष जैन सेठी, वार्ड पार्षद पिंकी-नवीन जैन, संदीप जैन सेठी, पिंकी जैन सेठी, लालगोला से विजय जैन, राज कुमार जैन, विमल जैन, संतोष जैन के साथ छाबड़ा परिवार, दिल्ली से अरुण-संतोष जैन छाबडा, कोलकोत्ता से विभोर-रुचिका जैन सेठी, बैंगलोर से पुनीत निधि जैन अजमेरा, दिल्ली से सुमित नेहा, कथान्स जैन अजमेरा, गुवाहाटी से मनोज आशा जैन गंगवाल, बाराबंकी से धीरज सिंपी जैन सेठी, रांची से सुमेर माधुरी जैन अजमेरा, सुरेश कमोद जैन अजमेरा, महेंद्र कुकू जैन अजमेरा, दिलीप कीर्ति जैन अजमेरा, हजारीबाग समाज के महामंत्री संजय रश्मि जैन अजमेरा, अजित किरण जैन, सिधौली से सुरेश सरिता जैन और विशेष रूप से अर्हम और कथान्स जैन अजमेरा ने अपनी पर दादी को श्रद्धांजलि अर्पित की।</p>
<p><strong>भगवानी देवी को याद किया</strong></p>
<p>साथ ही कोडरमा समाज के उप मंत्री नरेंद्र झांझरी और पूर्व मंत्री ललित सेठी ने भी अपनी श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि श्रीमति अजमेरा बहुत ही धार्मिक महिला थीं। इनकी कमी को पूरा नही किया जा सकता है। इनका परिवार हमेशा समाज के सभी कार्यों में अग्रणी रहता है। इनकी माँ भगवानी देवी और पिताजी चिमनलाल जैन,चाचा हीरा लाल जैन के संस्कार इनके परिवार में सदैव दिखते हैं।</p>
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		<title>भगवान मुनिसुव्रतनाथ स्वामी का जन्म एवं तप कल्याणक मनाया : इंद्र-इंद्रानियों ने झूम-झूम कर भक्ति नृत्य किया </title>
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		<pubDate>Wed, 23 Apr 2025 13:20:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आरके पुरम स्थित श्री 1008 श्री मुनिसुव्रतनाथ दिगंबर त्रिकाल चौबीसी जैन मंदिर में मनोहारी मूलनायक मुनिसुव्रतनाथ भगवान का जन्म व तप कल्याण महोत्सव धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मनाया गया। मुनिसुव्रतनाथ भगवान की मूर्ति को चांदी की पालकी में विराजमान कर गाजे-बाजे के साथ मंदिर परिसर लाया गया। प्रथमाभिषेक हुआ। भगवान को पालना झुलाया। कोटा से [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आरके पुरम स्थित श्री 1008 श्री मुनिसुव्रतनाथ दिगंबर त्रिकाल चौबीसी जैन मंदिर में मनोहारी मूलनायक मुनिसुव्रतनाथ भगवान का जन्म व तप कल्याण महोत्सव धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मनाया गया। मुनिसुव्रतनाथ भगवान की मूर्ति को चांदी की पालकी में विराजमान कर गाजे-बाजे के साथ मंदिर परिसर लाया गया। प्रथमाभिषेक हुआ। भगवान को पालना झुलाया। <span style="color: #ff0000">कोटा से पढ़िए यह पारस जैन पार्श्वमणि की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कोटा।</strong> मुनि चिन्मय सागर जी महाराज की प्रेरणा से निर्मित आरके पुरम स्थित श्री 1008 श्री मुनिसुव्रतनाथ दिगंबर त्रिकाल चौबीसी जैन मंदिर में मनोहारी मूलनायक मुनिसुव्रतनाथ भगवान का जन्म व तप कल्याण महोत्सव मंगलमय में वातावरण में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मनाया गया। मंदिर समिति के अध्यक्ष अंकित जैन ने बताया कि प्रातः काल मुनिसुव्रतनाथ भगवान की मूर्ति को चांदी की पालकी में विराजमान कर गाजे-बाजे के साथ विभिन्न चौराहों से होते हुए मंदिर परिसर में लाया गया। पालकी उठाने का सौभाग्य राकेश जैन परिवारजन ने प्राप्त किया। उसके बाद प्रातः काल प्रथमाभिषेक 108 रिद्धि मंत्रों द्वारा दोनों ओर से किया गया। मंदिर समिति के महामंत्री अनुज गोधा और कोषाध्यक्ष ज्ञानचंद जैन ने बताया कि इसके बाद विश्व में शांति की मंगल कामना के साथ मूलनायक भगवान मुनिसुव्रतनाथ पर शांति धारा की गई। कार्याध्यक्ष प्रकाश जैन ने बताया कि वैशाख कृष्ण पक्ष दशमी बुधवार को मुनिसुव्रतनाथ महामंडल विधान श्रद्धा भक्ति और समर्पण के साथ किया गया। विधि विधान की मांगलिक क्रियाएं पंडित वीरेंद्र शास्त्री जी ने करवाई।</p>
<p>विधान में इंद्र-इंद्रानियों ने झूम-झूम कर भक्ति नृत्य किया। इस अवसर पर भगवान का पालना भी सजाया गया। बालक मुनिसुव्रतनाथ को पालने में सजाकर बिठाया। उसके बाद सभी ने उनको पालना में झुलाया। कार्यक्रम को सफल बनाने में विनोद जैन टोरडी, लोकेश बरमुंडा, पंकज जैन, पदम जैन, चंद्रेश जैन, मनीष जैन, संजय जैन, भागचंद मित्तल, हरकचंद गोधा, पीसी जैन, राकेश जैन, विमल जैन इत्यादि का विशेष योगदान रहा। सांयकल 48 मंगल दीपकों से भक्तामर आराधना एवं महाआरती की गई।</p>
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		<title>कुण्डलपुर में आचार्यश्री समय सागरजी का आचार्य पदारोहण दिवस मनाया गयाः  आचार्य छत्तीसी विधान, भजन संध्या का हुआ आयोजन </title>
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		<pubDate>Sun, 06 Apr 2025 11:44:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में प.पू.आचार्य श्री विद्या सागरजी महाराज के शिष्य आचार्यश्री समय सागरजी महाराज का आचार्य पदारोहण दिवस धूमधाम से मनाया गया। एक वर्ष पूर्व चैत्र शुक्ल अष्टमी को कुण्डलपुर की पावन धरा पर आचार्यश्री को एक भव्य समारोह में चतुर्विध संघ के सानिध्य में आचार्य पद प्रदान किया गया था। पढ़िए कुंडलपुर से राजीव [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में प.पू.आचार्य श्री विद्या सागरजी महाराज के शिष्य आचार्यश्री समय सागरजी महाराज का आचार्य पदारोहण दिवस धूमधाम से मनाया गया। एक वर्ष पूर्व चैत्र शुक्ल अष्टमी को कुण्डलपुर की पावन धरा पर आचार्यश्री को एक भव्य समारोह में चतुर्विध संघ के सानिध्य में आचार्य पद प्रदान किया गया था।<span style="color: #ff0000"> पढ़िए कुंडलपुर से राजीव सिंघई की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुण्डलपुर (दमोह)।</strong> सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में महा समाधिधारक संत शिरोमणि प.पू.आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य विद्या शिरोमणि प.पू. आचार्य श्री समय सागरजी महाराज का आचार्य पदारोहण दिवस धूमधाम से मनाया गया। एक वर्ष पूर्व 16 अप्रैल 2024 चैत्र शुक्ल अष्टमी को कुण्डलपुर की पावन धरा पर परम पूज्य आचार्य श्री समय सागरजी महाराज को एक भव्य समारोह में विशाल जनसमूह के बीच चतुर्विध संघ के सानिध्य में आचार्य पद प्रदान किया गया था।</p>
<p><strong>साधना की आग में तपकर हीरा बनने की यात्रा </strong><br />
आचार्यश्री समय सागरजी महाराज का जीवन संयम, तप और साधना की आग में तपकर हीरा बनने की यात्रा है। संयम की गूंज त्याग की महक है। जिनके प्रत्येक पदचिन्ह में आत्मशुद्धि का प्रकाश है। आपकी वाणी अमृतसी मधुर है, संघ को नई दिशा मिली। इस अवसर पर प्रातः भक्तामर महामंडल विधान, आचार्य छत्तीसी विधान, पूज्य बड़े बाबा का अभिषेक, रिद्धि कलश, शांतिधारा, आचार्यश्री का पूजन हुआ।</p>
<p><strong>क्रियाओं का सौभाग्य मिला</strong><br />
प्रथम अभिषेक, शांतिधारा, रिद्धि कलश करने का सौभाग्य मोहित शानू शैलेंद्र जैन बांसवाड़ा, डॉक्टर शरद शशांक संचय जैन अमेरिका एवं भोपाल, रजनीश सचिन सरधना, वैभव आरजव आगरा, धर्मेंद्र संस्कार सिरोंज, सुनील अंकित गदिया मदनगंज किशनगढ़ को प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>गुरुमंदिर प्रतिकृति का हुआ अनावरण</strong><br />
आचार्य श्री समय सागरजी महाराज के आचार्य पदारोहण दिवस के पावन प्रसंग पर बड़े बाबा मंदिर परिसर में गुरु मंदिर हस्तशिल्प प्रतिकृति का अनावरण ब्रह्मचारी वाणीभूषण विनय भैया, चंद्रकुमार सराफ अध्यक्ष कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी, अशोक सराफ, ललित सराफ, अजय निरमा, मनोज जैन मुनिसेवा, अमर सेठ आदि पदाधिकारी सदस्यों के सानिध्य में हुआ। इस हस्तशिल्प प्रतिकृति के निर्माता एवं पुण्यार्जक परिवार श्रेष्ठी अनिल पीयूष जैन विद्यासागर रोडवेज, नागपुर, मनीष मंजू पाटनी, मनमन क्रिएशन, सिवनी बानापुरा इंदौर है।</p>
<p><strong>आरती, महाआरती का भव्य आयोजन</strong><br />
उनकी गुरुभक्ति भावना अनुरूप वे आचार्यश्री की समाधिस्थल डोंगरगढ़ ,तपस्थली कुण्डलपुर, दीक्षा स्थली अजमेर, कर्मस्थली दयोदय जबलपुर, जन्मस्थली सदलगा कर्नाटक में यह गुरु मंदिर स्थापित किये जा रहे हैं। सायंकाल विद्या भवन में भजन संध्या एवं आचार्यश्री की आरती का भव्य आयोजन हुआ। भक्तामर दीप अर्चना एवं पूज्य बड़े बाबा की संगीतमय महाआरती हुई।</p>
<p><strong>किशनगढ़ से कुण्डलपुर आए 400 यात्री</strong><br />
मदनगंज किशनगढ़ राजस्थान से लगभग 400 यात्री के समूह ने कुंडलपुर आकर कुंडलपुर क्षेत्र की पूरी वंदना की एवं 6 अप्रैल को महेंद्र पाटनी, कल्पना पाटनी, मदनगंज, किशनगढ़ 400 यात्रियों के साथ पूज्य बड़े बाबा मंदिर में बड़े बाबा महामंडल विधान करेंगे।</p>
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		<title>अंतरंग लक्ष्मी को प्राप्त करने का लक्ष्य प्रत्येक साधक का होता है-आचार्यश्री समय सागरजीः श्री आदिनाथ जी का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव मनाया गया </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_goal_of_every_seeker_is_to_attain_the_inner_lakshmi_acharya_shri_samay_sagarji/</link>
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		<pubDate>Mon, 24 Mar 2025 07:31:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कुण्डलपुर में प्रथम तीर्थंकर भगवान श्री आदिनाथ जी का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव आचार्यश्री समय सागर महाराज ससंघ सानिध्य में मनाया गया। उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि आगम ग्रन्थों के आधार पर यह बात समझ में आ जाती है कि मोहनीय कर्म के क्षय फलस्वरुप अथवा चार घातिया कर्म के क्षय फलस्वरुप केवल [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>कुण्डलपुर में प्रथम तीर्थंकर भगवान श्री आदिनाथ जी का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव आचार्यश्री समय सागर महाराज ससंघ सानिध्य में मनाया गया। उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि आगम ग्रन्थों के आधार पर यह बात समझ में आ जाती है कि मोहनीय कर्म के क्षय फलस्वरुप अथवा चार घातिया कर्म के क्षय फलस्वरुप केवल ज्ञान की उपलब्धि होती है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए कुंडलपुर से राजीव सिंघई की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>कुंडलपुर दमोह।</strong> सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में जैनधर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान श्री आदिनाथ जी का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव विद्या शिरोमणि प.पू.आचार्यश्री समय सागरजी महाराज ससंघ सानिध्य में धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर प्रातः भक्तामर महामंडल विधान, श्री आदिनाथ विधान, पूज्य बड़े बाबा का अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, विधान हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तों ने पूज्य बड़े बाबा का चरणाभिषेक किया। शांतिधारा का वाचन परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनिश्री अभय सागरजी महाराज द्वारा किया गया। आचार्यश्री की पूजन हुई।</p>
<p><strong>कर्म के क्षय फलस्वरुप केवल ज्ञान की उपलब्धि</strong></p>
<p>इस अवसर पर प. पू. आचार्यश्री समय सागरजी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा महावीर जयंती तो पूरे भारतवर्ष में मनाई जाती है किंतु आज आदिनाथ भगवान की जन्म जयंती जन्म कल्याणक का यह पुनीत पावन अवसर आप लोगों को प्राप्त हुआ है। आज की तिथि में ही आदिनाथ भगवान का जन्म एवं तप कल्याणक दोनों अवसर आपको प्राप्त हो रहा है। वस्तुतः आगम ग्रन्थों के आधार पर यह बात समझ में आ जाती है कि मोहनीय कर्म के क्षय फलस्वरुप अथवा चार घातिया कर्म के क्षय फलस्वरुप केवल ज्ञान की उपलब्धि होती है। किंतु केवली कई प्रकार के होते हैं उनमें सामान्य केवली का भी वर्णन मिलता है और तीर्थंकर केवली का भी वर्णन मिलता है। दोनों में अंतरंग दृष्टि से देखेंगे कर्मक्षय की दृष्टि से देखेंगे तो केवल ज्ञान में कोई भी अंतर नहीं है। केवल ज्ञान की दृष्टि से कोई भी अंतर नहीं पाया जाता। क्योंकि क्षायिक ज्ञान माना जाता।</p>
<p><strong>उदय के फलस्वरुप समोशरण की रचना </strong></p>
<p>अंत चतुष्टय की प्राप्ति सामान्य केवली हो तीर्थंकर केवली हो सबको प्राप्त हो चुका है। विशेषता यह है तीर्थंकर प्रकृति के वंध के फलस्वरुप जो की केवली और श्रुतकेवली के पादमूल में ही तीर्थंकर प्रकृति का वंध षोडसकारण भावना के माध्यम से होता है। ज्यो ही मोहिनी कर्म का क्षय हो जाता है तेरहवे गुण स्थान में तीर्थंकर प्रकृति का उदय हो जाता है। उस उदय के फलस्वरुप समोशरण की रचना होती है।</p>
<p><strong>अमूर्त आत्मतत्व को प्राप्त करने महान आत्माएं हुई हैं </strong></p>
<p>आप लोग सुबह उठ जाते हैं स्नानादि से निवृत होकर अपने आप को आईना में देखते हैं आईना का क्या मायना है आईना अर्थात दर्पण होता उसमें अपना चेहरा देखते जब आप बाहर निकलते सारे लोग आपका चेहरा देखते। मैं अच्छा लगू फोटो निकालते फोटो में क्या आ रहा है आपका चेहरा शरीर वस्त्राभूषण आदि फोटो में आ रहा है। किंतु जो परमात्म तत्व है जो आत्मतत्व है वह उसे कैमरे में नहीं आ सकता। क्योंकि वह अमूर्त आत्मतत्व है और अमूर्त आत्मतत्व को प्राप्त करने जो महान आत्माएं हुई हैं। उन्होंने मोक्ष मार्ग पर आरुण होकर रत्नात्रय के माध्यम से शरीर से आत्मतत्व को पृथक कर लिया है। इसका अनंतसुख का अनुभव प्रतिपल प्रति समय करते रहते हैं। वापस इस धरती पर कभी आएंगे नहीं। निर्वाण का लाभ प्राप्त हो जाता है।</p>
<p><strong>बिना पुरुषार्थ के कोई भी वस्तु उपलब्ध नहीं हो सकती</strong></p>
<p>लोक के अग्रभाग पर जाकर विराजमान होते हैं। साधना का फल है अंतरंग लक्ष्मी को प्राप्त करने का लक्ष्य प्रत्येक साधक का होता है। उस लक्ष्य को प्राप्त करने ही गुरुदेव ने हम लोगों को मार्ग प्रशस्त किया है। उस मार्ग पर आरुण होकर अपनी साधना को उन्होंने पूर्ण कर लिया है। हम लोगों के लिए प्रतिफल यही संबोधन रहा है चतुर्विध संघ के लिए। मनुष्य पर्याय बहुत दुर्लभ मानी जाती है इस पर्याय को सार्थक करने जो सच्चे देव शास्त्र गुरु की साधना में लग जाता है। निश्चित रूप से अल्प समय में वह घड़ी आएगी वह पूर्णतः मोक्ष मार्ग के योग्य सामग्री को प्राप्त करके साधना के माध्यम से आत्मनिधि को प्राप्त करने का प्रयास कर सकता है। बिना पुरुषार्थ के कोई भी वस्तु उपलब्ध नहीं हो सकती। निरंतर निरपेक्ष भाव के साथ भगवान की गुरु की साधना करने के लिए क्षण मिले। आज का जन्म कल्याणक और तप कल्याण का दिन है केवल ज्ञान प्राप्त करने का एकमात्र लक्ष्य होना चाहिए।</p>
<p><strong>रिद्धिकलश करने का सौभाग्य महानुभावों को प्राप्त हुआ</strong></p>
<p>इस अवसर पर प्रथम अभिषेक, शांतिधारा, रिद्धिकलश करने का सौभाग्य अंशुल जैन, न्यायाधीश अशोक जैन, गुना जबलपुर, अनिल ज्ञानचंद फिरोजपुर, किरीट हर्ष कोमल मुंबई, विकास राखी दुर्गापुर, नेमीचंद संतोष भीलवाड़ा, हर्षित महेश बम्होरी राजकुमार नीरज तेंदूखेड़ा, वैभव नमन नवीन ध्रूव रेवाड़ी, डॉ मानकचंद्र शीलचंद जबलपुर, राकेश ईशान डिंडोरी, हर्ष शुभम टूंडला ,तुषार अक्षय सर्वेश कन्नौज को प्राप्त हुआ। आचार्य संघ की आहार चर्या संपन्न हुई। दोपहर में विद्या भवन में मुनिश्री विनीत सागरजी महाराज के मंगल प्रवचन हुए। सायंकाल भक्तामर दीप अर्चना एवं पूज्य बड़े बाबा की संगीतमय महाआरती हुई।</p>
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