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	<title>Festival श्रीफल जैन न्यूज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>Festival श्रीफल जैन न्यूज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>सिहोनिया में 15 मई को महामस्तकाभिषेक होगा: संगीतमय श्री 1008 शांतिनाथ विधान का पुण्य लाभ लेने की अपील  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 12 May 2026 03:33:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[चंबल संभाग के सुप्रसिद्ध जैन तीर्थ सिहोनियाजी में तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ स्वामी का जन्म, तप एवं मोक्ष कल्याणक महोत्सव विभिन्न धार्मिक सामाजिक कार्यक्रमों के साथ 15 मई को मनाया जाएगा। मुरैना/सिहोनिया से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230; मुरैना/सिहोनिया। चंबल संभाग के सुप्रसिद्ध जैन तीर्थ सिहोनियाजी में तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ स्वामी का जन्म, तप [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>चंबल संभाग के सुप्रसिद्ध जैन तीर्थ सिहोनियाजी में तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ स्वामी का जन्म, तप एवं मोक्ष कल्याणक महोत्सव विभिन्न धार्मिक सामाजिक कार्यक्रमों के साथ 15 मई को मनाया जाएगा। <span style="color: #ff0000">मुरैना/सिहोनिया से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना/सिहोनिया।</strong> चंबल संभाग के सुप्रसिद्ध जैन तीर्थ सिहोनियाजी में तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ स्वामी का जन्म, तप एवं मोक्ष कल्याणक महोत्सव विभिन्न धार्मिक सामाजिक कार्यक्रमों के साथ 15 मई को मनाया जाएगा। श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र कमेटी सिहोनियाजी ने बताया कि जैन समाज के उपासना स्थल अतिशय क्षेत्र सिहोनिया में विराजमान मूलनायक भगवान शांतिनाथ स्वामी के जन्म, तप एवं मोक्ष कल्याणक के पावन अवसर पर जेठ बदी चौदस शुक्रवार 15 मई को प्रातः 7 बजे से मूलनायक भगवान शांतिनाथ स्वामी के सामूहिक अभिषेक, शांतिधारा, नित्यमह पूजन एवं प्रातः 8 बजे से संगीतमय श्री 1008 शांतिनाथ विधान का आयोजन एवं प्रातः 10 बजे से निर्वाण कांड का वाचन करते हुए सामूहिक रूप से निर्वाण लाडू अर्पित किया जाएगा। भगवान शांतिनाथ स्वामी का महामस्तकाभिषेक होगा। इस पावन अवसर पर आसपास के सभी नगरों से सैकड़ों की संख्या में साधर्मी बंधु सिहोनियाजी पहुंचकर तीर्थंकरों की आराधना, उपासना, पूजन, भक्ति करते हुए पुण्यर्जन करेंगे।</p>
<p><strong>अम्बाह एवं मुरैना से निःशुल्क बसों की व्यवस्था </strong></p>
<p>आयोजन समिति द्वारा साधर्मी बंधुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सिहोनिया पहुंचने के लिए अम्बाह एवं मुरैना से निःशुल्क बसों की व्यवस्था की गई है। कार्यक्रम में सम्मिलित होने वाले सभी समाजजनों के लिए आवास, स्वल्पाहार, भोजनादि की सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। अतिशय क्षेत्र सिहोनियाजी कमेटी ने सभी साधर्मी बंधुओं से शुक्रवार 15 मई को अधिकाधिक संख्या में सिहोनियाजी पहुंचने की अपील की है। जिला मुख्यालय मुरैना से लगभग 33 किलोमीटर की दूरी पर स्थित अतिशय क्षेत्र सिहोनियाजी में भूगर्भ से प्राप्त 11 वीं शताब्दी की खड्गासन भगवान शांतिनाथजी (16 फीट) की पाषाण की प्रतिमा मूलनायक के रूप में स्थापित हैं। उसके आजू बाजू में भगवान अरहनाथजी (10 फीट), भगवान कुंथुनाथजी (10 फीट) की पत्थर से तराशी गई मूर्तियाँ स्थापित हैं। वर्तमान में भी गाँव में खुदाई के दौरान जैन तीर्थंकरों की ऐसी मूर्तियाँ मिलती रहती हैं। क्षेत्र पर एक संग्रहालय है, जिसमें प्राप्त सभी मूर्तियों को सहेजकर रखा गया है।</p>
<p><strong> जैन साधु संतों के निरंतर आगमन </strong></p>
<p>जैन तीर्थ एवं उपासना स्थल पर यू तो वर्षभर विभिन्न धार्मिक आयोजन होते रहते हैं एवं प्रतिदिन दूरदराज से साधर्मी बंधुओं का आवागमन होता रहता है। जैन साधु संतों के निरंतर आगमन से क्षेत्र की महत्ता को बल मिलता रहता है। अतिशय क्षेत्र सिहोनियाजी में प्रति वर्ष क्वार वदी दोज को वार्षिक मेले का आयोजन होता है और जेठ बदी चौदस को भगवान शांतिनाथ जी का निर्वाण महोत्सव मनाया जाता है।</p>
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		<title>जैन धर्म में जानें पंचांग का महत्व : धार्मिक कार्यों, व्रतों, तपस्या और साधना की सही दिशा और समय की पहचान करता है पंचांग </title>
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		<pubDate>Sun, 24 Nov 2024 09:17:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म में पंचांग का अत्यधिक महत्व है क्योंकि यह न केवल समय की गणना करने का माध्यम है, बल्कि यह धार्मिक अनुष्ठानों, व्रतों, पर्वों और तिथियों का पालन करने के लिए एक आवश्यक दिशा-निर्देश भी प्रदान करता है। पढ़िए यह विशेष आलेख जैन धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है क्योंकि यह धार्मिक कार्यों, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म में पंचांग का अत्यधिक महत्व है क्योंकि यह न केवल समय की गणना करने का माध्यम है, बल्कि यह धार्मिक अनुष्ठानों, व्रतों, पर्वों और तिथियों का पालन करने के लिए एक आवश्यक दिशा-निर्देश भी प्रदान करता है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष आलेख</span></strong></p>
<hr />
<p>जैन धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है क्योंकि यह धार्मिक कार्यों, व्रतों, पूजा-पाठ, और अन्य अनुष्ठानों के लिए समय और तिथियों की सही जानकारी प्रदान करता है। पंचांग जैन धर्म के धार्मिक कैलेंडर की तरह कार्य करता है, जिसमें तिथियां, वार, योग, नक्षत्र, तिथि विशेष, और अन्य खगोलीय घटनाएं शामिल होती हैं। इनका महत्व निम्नलिखित बिंदुओं में विस्तार से समझा जा सकता है:</p>
<p><iframe title="Evening bulletin 23। पंचांग को नहीं माने वाले आगम का तो  विरोध नहीं कर रहे है। #shreephal_jain_news" width="1320" height="743" src="https://www.youtube.com/embed/fYKQspej5Tc?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" referrerpolicy="strict-origin-when-cross-origin" allowfullscreen></iframe></p>
<p><strong>1. धार्मिक व्रतों और अनुष्ठानों की सही तिथि का निर्धारण  </strong></p>
<p>पंचांग जैन धर्म में व्रतों और धार्मिक अनुष्ठानों की तिथि निर्धारित करने में मदद करता है। उदाहरण के लिए, पउमल, व्रत, उत्सव, त्योहार आदि की तिथियाँ पंचांग में दी जाती हैं। खासकर जैन धर्म में पुज्जा, प्रवचन, और पश्चाताप जैसी क्रियाएँ तिथियों और नक्षत्रों पर आधारित होती हैं। इससे श्रद्धालु सही समय पर धार्मिक कार्य कर सकते हैं।</p>
<p><strong>2. महत्वपूर्ण तिथियां और त्योहार  </strong></p>
<p>जैन पंचांग में जैन धर्म से संबंधित महत्वपूर्ण तिथियां और त्योहारों का विशेष ध्यान रखा जाता है। जैसे:</p>
<p>&#8211; क्षमावाणी दिवस</p>
<p>&#8211; महावीर जयंती</p>
<p>&#8211; दीपावली (जो जैन धर्म में महावीर निर्वाण दिवस के रूप में मनाई जाती है)</p>
<p>&#8211; दसलक्षण पर्व। इन दिनों को धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से खास महत्व दिया जाता है, और पंचांग इनका सही समय और दिन बताता है।</p>
<p><strong>3. नक्षत्र और योग का प्रभाव  </strong></p>
<p>जैन पंचांग में नक्षत्रों, योगों और तिथियों का विश्लेषण किया जाता है, जो व्यक्ति के जीवन पर प्रभाव डालते हैं। इन खगोलीय घटनाओं का ध्यान रखना जैन धर्म में महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि माना जाता है कि सही नक्षत्र और योग के समय किए गए कार्य अधिक फलदायी होते हैं।</p>
<p><strong>4. तिथि और काल के अनुसार व्रतों का पालन  </strong></p>
<p>जैन धर्म में विभिन्न व्रतों का पालन तिथियों और समय के अनुसार किया जाता है। जैसे आलस दिवस या तपस्या के दिन, जैन धर्म के अनुयायी उपवासी रहते हैं और विशेष पूजा करते हैं। पंचांग इन विशेष तिथियों की जानकारी प्रदान करता है, ताकि लोग अपने व्रतों और तपस्या को सही तरीके से पालन कर सकें।</p>
<p><strong>5. समाज में सामाजिक और धार्मिक अनुशासन  </strong></p>
<p>पंचांग जैन समाज में सामाजिक और धार्मिक अनुशासन बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण साधन है। यह प्रत्येक सदस्य को समय की सही जानकारी देता है, जिससे लोग सामूहिक रूप से धार्मिक कार्यों में भाग ले सकते हैं और समाज में एकजुटता बनी रहती है।</p>
<p><strong>6. तपस्या और संयम के नियम  </strong></p>
<p>पंचांग के अनुसार जैन धर्म में तपस्या, संयम और साधना के दिन निर्धारित किए जाते हैं। विशेष रूप से आद्याशा, तपोव्रत और आध्यात्मिक साधनाएँ समय और तिथियों के हिसाब से तय होती हैं, और पंचांग इनकी सही दिशा प्रदान करता है।</p>
<p><strong>7. मौन व्रत और उपवास  </strong></p>
<p>कुछ व्रतों में मौन और उपवास का पालन किया जाता है। पंचांग इस संदर्भ में यह निर्धारित करता है कि किन विशेष तिथियों पर उपवास या मौन व्रत करना शुभ रहेगा। जैन धर्म में उपवास और मौन का पालन बहुत महत्वपूर्ण होता है, और पंचांग इसका सही मार्गदर्शन करता है।</p>
<p><strong>8. समय और स्थान के अनुसार पूजा विधि  </strong></p>
<p>पंचांग में समय के अनुसार पूजा विधियां भी बताई जाती हैं। जैसे किसी खास नक्षत्र में पूजा करने के लिए विशेष विधियाँ होती हैं। जैन धर्म में पूजा का समय और विधि बहुत मायने रखती है, ताकि व्यक्ति आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त कर सके।</p>
<p><strong>9. ध्यान और साधना का समय  </strong></p>
<p>पंचांग के माध्यम से साधक यह भी जान सकते हैं कि किस समय ध्यान और साधना करने से अधिक लाभ होगा। विशेष नक्षत्र या योग में ध्यान और साधना करना जैन धर्म में खास महत्व रखता है।</p>
<p>जैन धर्म में पंचांग का महत्व अत्यधिक है क्योंकि यह न केवल समय की जानकारी देता है, बल्कि धार्मिक कार्यों, व्रतों, तपस्या और साधना की सही दिशा और समय की पहचान करता है। इसे ध्यान में रखते हुए, जैन अनुयायी अपनी धार्मिक यात्रा को और भी अधिक फलदायी और प्रभावशाली बना सकते हैं।</p>
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		<title>धर्मालंकार आचार्य रयण सागरजी महाराज के समाधि स्थल पर आयोजन : चरण चिन्ह प्रतिष्ठापना महोत्सव सम्पन्न </title>
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		<pubDate>Tue, 12 Nov 2024 09:43:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर में जन्मे और नगर गौरव धर्मालंकार दिगम्बर जैनाचार्य श्री रयण सागरजी महाराज के समाधि स्थल आनंदपुर कालू में रविवार को उनकी चतुर्थ समाधि दिवस महोत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर समाधि स्थल पर सफेद पाषाण से निर्मित नवनिर्मित छतरी में आचार्य रयण सागरजी महाराज के चरण चिन्ह की प्रतिष्ठापना समारोह भी आयोजित [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर में जन्मे और नगर गौरव धर्मालंकार दिगम्बर जैनाचार्य श्री रयण सागरजी महाराज के समाधि स्थल आनंदपुर कालू में रविवार को उनकी चतुर्थ समाधि दिवस महोत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर समाधि स्थल पर सफेद पाषाण से निर्मित नवनिर्मित छतरी में आचार्य रयण सागरजी महाराज के चरण चिन्ह की प्रतिष्ठापना समारोह भी आयोजित किया गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सागवाड़ा।</strong> नगर में जन्मे और नगर गौरव धर्मालंकार दिगम्बर जैनाचार्य श्री रयण सागरजी महाराज के समाधि स्थल आनंदपुर कालू में रविवार को उनकी चतुर्थ समाधि दिवस महोत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर समाधि स्थल पर सफेद पाषाण से निर्मित नवनिर्मित छतरी में आचार्य रयण सागरजी महाराज के चरण चिन्ह की प्रतिष्ठापना समारोह भी आयोजित किया गया। समारोह का आयोजन ब्रह्मचारिणी निर्मला दीदी के सानिध्य में, सकल जैन समाज कालू द्वारा प्रतिष्ठाचार्य विनोद पगारिया &#8220;विरल&#8221; सागवाड़ा के तत्वावधान में सम्पन्न हुआ।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-69653" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241112-WA0011-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1920" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241112-WA0011-scaled.jpg 2560w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241112-WA0011-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241112-WA0011-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241112-WA0011-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241112-WA0011-1536x1152.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241112-WA0011-2048x1536.jpg 2048w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241112-WA0011-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241112-WA0011-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241112-WA0011-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241112-WA0011-990x743.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241112-WA0011-1320x990.jpg 1320w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" />समारोह का आयोजन और धार्मिक क्रियाएं</strong></p>
<p>समारोह की शुरुआत रविवार को प्रातः काल जिनेन्द्र भगवान के अभिषेक पूजन से हुई। इसके बाद आचार्य छत्तीसी विधान के तहत विधान मण्डप पर अष्ट द्रव्य और श्रीफल युक्त अर्घ समर्पित किए गए। इस धार्मिक अनुष्ठान के बाद आयोजित विनयांजलि सभा में प्रमुख रूप से सेठ महेश नोगामिया, पवन कुमार गोवाडिया और ट्रस्टी राजेन्द्र पंचोरी ने गुरु चरणों में अपने श्रद्धा भाव प्रस्तुत किए।</p>
<p><strong>चरण चिन्ह प्रतिष्ठापना और शोभा यात्रा </strong></p>
<p>इसके बाद सफेद संगमरमर पाषाण से निर्मित आचार्य रयण सागरजी महाराज और मुनि शिव सागर महाराज के चरण चिन्ह की शुद्धिकरण क्रिया और प्रतिष्ठा विधि का आयोजन इन्द्र इन्दाणी समूह द्वारा किया गया। इस अवसर पर चरण चिन्ह को जैन भवन से बैण्ड बाजों के साथ शोभा यात्रा के रूप में समाधि स्थल पर ले जाया गया, जहां पर अनेक श्रद्धालु उपस्थित थे।</p>
<p><strong>नवनिर्मित छतरी में चरण चिन्ह प्रतिष्ठा</strong></p>
<p>समारोह के अंतिम चरण में, प्रतिष्ठाचार्य पगारिया के मंत्रोच्चारण के साथ मधु महावीर बोहरा परिवार द्वारा आचार्य रयण सागरजी और मुनि शिव सागरजी के चरण चिन्ह नवनिर्मित छतरी में स्थापित किए गए। इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने के लिए सागवाड़ा, डूंगरपर, बांसवाड़ा, उदयपुर, जोधपुर और अन्य स्थानों से श्रद्धालु उपस्थित हुए।</p>
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		<title>जैन धर्म के अनुसार रक्षाबंधन क्यों? : रक्षा बंधन को सच्चे अर्थों में मनाना है तो बाहर और भीतर से एक समान हों </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 18 Aug 2024 16:46:10 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्रतिवर्ष श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को रक्षाबंधन अत्यंत प्राचीन पर्व है। इसकी परम्परा अठारहवें तीर्थंकर अरहनाथ के तीर्थ से महामुनि विष्णुकुमार के निमित्त से प्रारंभ हुई है। रक्षा बंधन पर हममें जो करूणाभाव है वह तन-मन धन से अभिव्यक्त हो। यह एक दिन के लिए नहीं, सदैव के लिए हमारा स्वभाव बन जाय, ऐसी भावना भाना [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>प्रतिवर्ष श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को रक्षाबंधन अत्यंत प्राचीन पर्व है। इसकी परम्परा अठारहवें तीर्थंकर अरहनाथ के तीर्थ से महामुनि विष्णुकुमार के निमित्त से प्रारंभ हुई है। रक्षा बंधन पर हममें जो करूणाभाव है वह तन-मन धन से अभिव्यक्त हो। यह एक दिन के लिए नहीं, सदैव के लिए हमारा स्वभाव बन जाय, ऐसी भावना भाना चाहिए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर की डायरी से यह विशेष आलेख, प्रस्तुति रेखा संजय जैन&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>प्रतिवर्ष श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को रक्षाबंधन अत्यंत प्राचीन पर्व है। इसकी परम्परा अठारहवें तीर्थंकर अरहनाथ के तीर्थ से महामुनि विष्णुकुमार के निमित्त से प्रारंभ हुई है। इस पर्व की पौराणिक कथा इस प्रकार है&#8230;</p>
<p>उज्जैनी नगरी में राजा श्रीवर्मा राज्य करते थे उनके बलि, नामुचि, बृहस्पति और प्रह्लाद आदि चार मंत्री थे। उनको धर्म पर श्रद्धा नहीं थी। एक बार उस नगरी में आचार्य श्री अकम्पन जी महाराज का 700 मुनियों के संघ सहित का आगमन हुआ। राजा भी उनके मंत्री के साथ गए और मुनियों को वंदन किया। मुनि तो ध्यान में लीन मौन थे। राजा उनकी शांति और तप को देखकर बहुत प्रभावित हुआ, पर मंत्री कहने लगे -‘महाराज ! इन जैन मुनियों को कोई ज्ञान नहीं है इसीलिए मौन रहने का ढोंग कर रहे हैं&#8217; इस प्रकार निंदा करते हुए राजा और मंत्री वापस आ रहे थे। तभी यह बात श्री श्रुतसागर जी नाम के मुनिश्री ने सुन ली , उन्हें मुनि संघ की निंदा सहन नहीं हुई इसलिए उन्होंने मंत्रियों के साथ वाद-विवाद किया और उन्हें चुप कर दिया।</p>
<p>राजा के सामने अपमान जानकार वह मंत्री रात में मुनि को मारने गए, पर जैसे ही उन्होंने तलवार उठाई उनका हाथ खड़ा ही रह गया। नगर देवी ने उन सबको उसी अवस्था में कील(जड़) कर दिया। सुबह सब लोगों ने देखा और राजा ने उन्हें राज्य से बाहर कर दिया।</p>
<p>यहां से निकाले गए ये चार मंत्री हस्तिनापुर के राजा पद्मराय की शरण में गए। पद्मराय के भाई जैन मुनि थे &#8211; उनका नाम विष्णु कुमार था। हस्तिनापुर के राजा का शत्रु सिंहरथ नाम का राजा था, जिस पर पद्मराय राजा जीत हासिल ही नहीं कर पा रहे थे। तब बलि मंत्री की युक्ति से उन्हें विजय प्राप्त हुई और उन्होंने मंत्री से इनाम मांगने को कहा, पर मंत्री ने कहा &#8211; जब आवश्यकता पड़ेगी तब मांग लूंगा। इधर आचार्य श्रीअकम्पन जी महाराज 700 मुनियों के संघ सहित विहार करते हुए हस्तिनापुर पहुंचे। उनको देखकर मंत्रियों का बैर जागा और उन्होंने उन्हें मारने की योजना बनायी।</p>
<p>मौका पाते ही बलि ने राजा से अपना इनाम मांग लिया&#8230;</p>
<p>मंत्री ने कहा &#8211; ‘महाराज हमें यज्ञ करना है इसलिए आप हमें सात दिन के लिए राज्य सौप दें। राजा ने वचनबद्धता के कारण राज्य सौंप दिया। चारों मंत्रियों ने मुनि संघ के चारों ओर पशु, हड्डी, मांस, चमड़ी के ढेर लगा दिए फिर और उसमें आग लगा दी। मुनिवरों पर घोर उपसर्ग हुआ। बलि के अत्याचार से सब जगह हा-हाकार मच गया था और लोगों ने यह प्रतिज्ञा कर ली थी कि जब मुनियों का संकट दूर होगा तो उन्हें आहार कराकर ही भोजन ग्रहण करेंगे।</p>
<p>यह बात विष्णुकुमार मुनि को पता चली। वह हस्तिनापुर गए और एक ब्राह्मण पंडित का रूप धारण कर लिया और बलि राजा के सामने उत्तमोत्तम श्लोक बोलने लगे। बलि राजा पंडित से बहुत खुश हुआ और इच्छित वर मांगने को कहा-विष्णुकुमार ने तीन पग जमीन मांगी। विष्णुकुमार ने विराट रूप धारण किया और एक पग सुमेरु पर्वत पर रखा और दूसरा मानुषोत्तर पर्वत पर रखा और बलि राजा से कहा &#8211; ‘बोल अब तीसरा पग कहां रखूं ?’</p>
<p>तीसरा पग रखने की जगह दे नहीं तो तेरे सिर पर रखकर तुझे पाताल में उतार दूंगा&#8217;। चारों ओर खलबली मच गयी। देवों और मनुष्यों ने विष्णुकुमार मुनि को विक्रिया समेटने के लिए कहा- राजा बने बलि सहित चारों मंत्रियों ने भी क्षमा मांगी। विष्णुकुमार मुनि ने मुनिसंघ पर किए गए उपसर्ग को दूर करवाया और अहिंसा पूर्वक धर्म का स्वरूप समझाया। इस प्रकार 700 जैन मुनियों की रक्षा हुई।</p>
<p>हजारों श्रावक ने 700 मुनियों की वैयावृति की और बलि आदि मंत्री ने मुनिराजों से क्षमा मांगी। जिस दिन यह घटना घटी, वह श्रावण सुदी पूर्णिमा थी। इस दिन 700 मुनियों का उपसर्ग दूर हुआ और उनकी रक्षा हुई, अतः वह दिन रक्षा पर्व के नाम से प्रसिद्ध हुआ। संकट दूर होने पर सब लोगों ने दूध की सेवियों का हल्का भोजन तैयार किया क्योंकि मुनि कई दिन के उपवासे थे। मुनि केवल सात सौ थे अतः वे केवल सात सौ घरों पर ही आहार ले सकते थे। इसलिए शेष घरों में उनकी प्रतिकृति बनाकर और उसे आहार देकर प्रतिज्ञा पूरी की गई। सबने परस्पर में रक्षा करने का बंधन बांधा, जिसकी स्वीकृति त्योहार के रूप में अब तक चली आ रही है। दीवारों पर जो चित्र रचना इस दिन की जाती है, उसे सौन कहा जाता है। यह सौन शब्द श्रमण शब्द का अपभ्रंश माना गया है। श्रमण शब्द प्राचीन काल में जैन साधु का सूचक था। वास्तव में कर्मों से न बंधकर मूल स्वरूप की रक्षा करना ही &#8216;रक्षा-बंधन &#8216; है।</p>
<p><strong>तभी होगा पर्व मनाना सार्थक</strong></p>
<p>विष्णुकुमार मुनि ने बंधन को अपनाया। अपने पद को छोड़कर मुनियों की रक्षार्थ गए। ऐसा करने में उनका प्रयोजन धर्म प्रभावना और वात्सल्य था। रक्षा के लिए जो बंधन है, वह सभी के लिए मुक्ति का कारण है। बाहर से मधुर और भीतर से कटाक्ष, ऐसा रक्षा बंधन नहीं होना चाहिए। हमारे द्वारा सम्पादित कार्य बाहर और भीतर से एक समान होना चाहिए। रक्षा बंधन को सच्चे अर्थों में मनाना है तो बाहर और भीतर से एक समान हों। मन में करूणा का भाव जागृत करें, अनुकम्पा, दया और वात्सल्य का अवलम्बन लें&#8230; तभी यह सार्थक होगा। रक्षा बंधन पर हममें जो करूणाभाव है वह तन-मन धन से अभिव्यक्त हो। यह एक दिन के लिए नहीं, सदैव के लिए हमारा स्वभाव बन जाय, ऐसी भावना भाना चाहिए। सत्वेषु मैत्री-प्राणी मात्र के प्रति मित्रता का भाव हमारे जीवन में उतरना चाहिए। तभी हमारा यह पर्व मनाना सार्थक है।</p>
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		<title>महावीर जिनालय चुंगी नाका में कार्यक्रम : श्री मज्जिनेंद्र वेदी शुद्धि, याग महामंडल विधान और जिनबिंब स्थापना महा महोत्सव 9 जुलाई से </title>
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		<pubDate>Sat, 08 Jul 2023 12:44:57 +0000</pubDate>
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<p><strong>महावीर जिनालय चुंगी नाका अंबाह में 9 जुलाई से 10 जुलाई सोमवार तक श्री मज्जिनेंद्र वेदी शुद्धि, याग महामंडल विधान और जिनबिंब स्थापना महामहोत्सव बड़े धूम धाम से किया जा रहा है। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए अजय जैन की यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अंबाह।</strong> महावीर जिनालय चुंगी नाका अंबाह में 9 जुलाई से 10 जुलाई सोमवार तक श्री मज्जिनेंद्र वेदी शुद्धि, याग महामंडल विधान और जिनबिंब स्थापना महामहोत्सव बड़े धूम धाम से किया जा रहा है। सौरभ जैन वरेह वालों ने बताया कि श्री 1008 महावीर दिगंबर जिनालय चुंगी नाका अंबाह, में जो ऊपर तल पर जो नवीन वेदिका बनी थी, उसके शुद्धीकरण के पश्चात जिनबिंबों को नवीन वेदिका में पंडित मुकेश शास्त्री के सानिध्य में विराजमान किया जायेगा।</p>
<p>9 जुलाई 2023 रविवार को प्रातः 6:30 बजे देव आज्ञा क्षेत्र आज्ञा, 7:00 बजे जिन अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम पूजन, 8:00 बजे मांगलिक घट यात्रा, ध्वज भूमि शुद्धि जप स्थल शुद्धि, 9:00 बजे मंगलमय ध्वज स्थापना, 10:30 बजे वेदी शुद्धि, जपस्थल शुद्धि एवं वेदी संस्कार और दोपहर 1:00 बजे मंडप प्रतिष्ठा, इंद्र प्रतिष्ठा एवं याग महामंडल विधान किया जाएगा। रात्रि 8:00 बजे जिन भक्ति, मंगल आरती, शास्त्र स्वाध्याय किया जायेगा।</p>
<p>इसके बाद 10 जुलाई सोमवार को प्रातः 6:30 बजे अभिषेक शांतिधारा एवं पूजन, 9:00 बजे श्री जिनबिंब स्थापना, 11:00 बजे श्री विश्वशांति महायज्ञ एवं विसर्जन व आभार प्रदर्शन किया जाएगा। रविवार को पूजन उपरांत पधारे सभी समाज के लिए स्वल्पाहार और 10 जुलाई सोमवार को कार्यक्रम में पधारे सभी भक्तजनों की कार्यक्रम के उपरांत खाने की व्यवस्था की गई है।</p>
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		<title>महावीर जिनालय चुंगी नाका में कार्यक्रम : श्री मज्जिनेंद्र वेदी शुद्धि, याग महामंडल विधान और जिनबिंब स्थापना महा महोत्सव 9 जुलाई से </title>
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		<pubDate>Sat, 08 Jul 2023 11:50:54 +0000</pubDate>
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<p><strong> महावीर जिनालय चुंगी नाका अंबाह में 9 जुलाई से 10 जुलाई सोमवार तक श्री मज्जिनेंद्र वेदी शुद्धि, याग महामंडल विधान और जिनबिंब स्थापना महामहोत्सव बड़े धूम धाम से किया जा रहा है। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>अंबाह।</strong> महावीर जिनालय चुंगी नाका अंबाह में 9 जुलाई से 10 जुलाई सोमवार तक श्री मज्जिनेंद्र वेदी शुद्धि, याग महामंडल विधान और जिनबिंब स्थापना महामहोत्सव बड़े धूम धाम से किया जा रहा है। सौरभ जैन वरेह वालों ने बताया कि श्री 1008 महावीर दिगंबर जिनालय चुंगी नाका अंबाह, में जो ऊपर तल पर जो नवीन वेदिका बनी थी, उसके शुद्धीकरण के पश्चात जिनबिंबों को नवीन वेदिका में पंडित मुकेश शास्त्री के सानिध्य में विराजमान किया जायेगा।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-47948" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230708-WA0014.jpg" alt="" width="867" height="918" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230708-WA0014.jpg 867w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230708-WA0014-283x300.jpg 283w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230708-WA0014-768x813.jpg 768w" sizes="(max-width: 867px) 100vw, 867px" /></p>
<p>9 जुलाई 2023 रविवार को प्रातः 6:30 बजे देव आज्ञा क्षेत्र आज्ञा, 7:00 बजे जिन अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम पूजन, 8:00 बजे मांगलिक घट यात्रा, ध्वज भूमि शुद्धि जप स्थल शुद्धि, 9:00 बजे मंगलमय ध्वज स्थापना, 10:30 बजे वेदी शुद्धि, जपस्थल शुद्धि एवं वेदी संस्कार और दोपहर 1:00 बजे मंडप प्रतिष्ठा, इंद्र प्रतिष्ठा एवं याग महामंडल विधान किया जाएगा। रात्रि 8:00 बजे जिन भक्ति, मंगल आरती, शास्त्र स्वाध्याय किया जायेगा।</p>
<p style="text-align: left;">इसके बाद 10 जुलाई सोमवार को प्रातः 6:30 बजे अभिषेक शांतिधारा एवं पूजन, 9:00 बजे श्री जिनबिंब स्थापना, 11:00 बजे श्री विश्वशांति महायज्ञ एवं विसर्जन व आभार प्रदर्शन किया जाएगा। रविवार को पूजन उपरांत पधारे सभी समाज के लिए स्वल्पाहार और 10 जुलाई सोमवार को कार्यक्रम में पधारे सभी भक्तजनों की कार्यक्रम के उपरांत खाने की व्यवस्था की गई है।</p>
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		<title>श्री आदिनाथ जिनालय छत्रपति नगर, इंदौर का स्थापना दिवस : मंगलाष्टक से होगी महामहोत्सव की शुरुआत </title>
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		<pubDate>Fri, 02 Jun 2023 14:07:51 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य भगवन 108 श्री विद्यासागर जी महाराज, चर्या शिरोमणि आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के पावन आशीर्वाद से श्री आदिनाथ जिनालय छत्रपति नगर का स्थापना दिवस आगामी तीन जून भव्यता से मनाया जाएगा। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230;  इंदौर। आचार्य भगवन 108 श्री विद्यासागर जी महाराज, चर्या शिरोमणि आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य भगवन 108 श्री विद्यासागर जी महाराज, चर्या शिरोमणि आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के पावन आशीर्वाद से श्री आदिनाथ जिनालय छत्रपति नगर का स्थापना दिवस आगामी तीन जून भव्यता से मनाया जाएगा। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230; </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> आचार्य भगवन 108 श्री विद्यासागर जी महाराज, चर्या शिरोमणि आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के पावन आशीर्वाद से श्री आदिनाथ जिनालय छत्रपति नगर का स्थापना दिवस आगामी तीन जून भव्यता से मनाया जाएगा। कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 7 बजे से मंगलाष्टक होगी। इसके बाद प्रातः 7:30 बजे से मूलनायक श्री 1008 श्री आदिनाथ भगवान का महामस्तकाभिषेक प्रारंभ होगा।</p>
<p>श्री आदिनाथ दिगंबर जैन धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट छत्रपति नगर,पार्श्वनाथ ग्रुप, महिला परिषद्, बहु मंडल छत्रपति नगर इंदौर के अनुसार प्रातः8:30 बजे से नित्यमय पूजन संगीतकार पंकज जैन द्वारा होगा। गौरतलब है कि छत्रपति नगर के मूलनायक श्री 1008आदिनाथ भगवान के महामस्तकाभिषेक एक साल में 3 बार होते हैं। इस वर्ष का अंतिम महामस्तकाभिषेक 3 जून शनिवार को संपन्न होगा।</p>
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		<title>कांच मंदिर से निकलेगी शोभायात्रा : श्री महावीर जन्मकल्याणक महोत्सव धूमधाम से मनाने का संकल्प </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 Mar 2023 15:36:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद इंदौर, दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन, दिगंबर जैन परवार समाज, पुलक चेतना मंच, दिगंबर जैन परवार समाज महिला मंडल एवं समस्त जैन समाज संगठन ने अपील की है कि भगवान श्री महावीर स्वामी की 2549वीं जन्म जयंती जन्मकल्याणक पर उनके सिद्धांतों को अंगीकार करने का संकल्प लें। पढ़िए राजेश जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद इंदौर, दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन, दिगंबर जैन परवार समाज, पुलक चेतना मंच, दिगंबर जैन परवार समाज महिला मंडल एवं समस्त जैन समाज संगठन ने अपील की है कि भगवान श्री महावीर स्वामी की 2549वीं जन्म जयंती जन्मकल्याणक पर उनके सिद्धांतों को अंगीकार करने का संकल्प लें। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद इंदौर, दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन, दिगंबर जैन परवार समाज, पुलक चेतना मंच, दिगंबर जैन परवार समाज महिला मंडल एवं समस्त जैन समाज संगठन ने अपील की है कि भगवान श्री महावीर स्वामी की 2549वीं जन्म जयंती जन्मकल्याणक पर उनके सिद्धांतों को अंगीकार करते हुए पुनीत प्रसंग पर निकलने वाली भव्य श्रीजी की शोभा यात्रा में यह संकल्प लें&#8230;</p>
<p>-श्रमण संस्कृति एवं तीर्थों की रक्षा करेंगे।</p>
<p>-तीर्थों को पर्यटन स्थल घोषित करने का विरोध करेंगे।</p>
<p>-मंदिर निर्माण के साथ अब अपने आसपास शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र में प्रमुखता से निर्माण हो ।</p>
<p>-सभी जैन अपने नाम के बाद गोत्र की जगह जैन लगाएं। ऐसा आप स्वयं करें और बाकी को भी जानकारी दें और आगामी होने वाली जनगणना के कालमं नं 6 में अबकी बार सिर्फ जैन ही लिखना है।</p>
<p>-समाज की बेटी समाज में विवाह करें।</p>
<p>शोभायात्रा 4 अप्रैल, मंगलवार को कांच मंदिर से दोपहर 2.30 बजे निकाली जाएगी। इस अवसर पर महिलाओं के लिए ड्रेस कोड केसरिया साड़ी और पुरुषों के लिए श्वेत वस्त्र रखा गया है।</p>
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		<title>श्री गोपालदास वरैया की जन्म जयंती मनाई गई : बरैया जी जैन समाज की अनमोल धरोहर थे-जिनेश जैन </title>
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		<pubDate>Thu, 23 Mar 2023 13:42:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन सिद्धांत संस्कृत महाविद्यालय मुरैना में विद्यालय के संस्थापक गुरुणां गुरु गोपालदास वरैया का जन्म जयंती समारोह को बड़े उत्साह एवं उल्लास के साथ मनाया गया। पढ़िए मनोज नायक की विशेष रिपोर्ट&#8230; मुरैना। श्री गोपालदास वरैया जैन समाज की एक अनमोल धरोहर थे। आपने संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र में जो कार्य किया, वह अतुलनीय है। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन सिद्धांत संस्कृत महाविद्यालय मुरैना में विद्यालय के संस्थापक गुरुणां गुरु गोपालदास वरैया का जन्म जयंती समारोह को बड़े उत्साह एवं उल्लास के साथ मनाया गया। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए मनोज नायक की विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> श्री गोपालदास वरैया जैन समाज की एक अनमोल धरोहर थे। आपने संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र में जो कार्य किया, वह अतुलनीय है। श्री वरैया जी ने आज से लगभग 125 वर्ष पूर्व मुरैना नगर में संस्कृत विद्यालय की स्थापना की थी, जो आज वटवृक्ष का रूप ले चुकी है। आपको जैन शास्त्रों का गहन अध्ययन था, आपकी गिनती देश के प्रकांड विद्वानों में होती थी। आप समय-समय पर सम्पूर्ण भारतवर्ष में जैन सिद्धान्तों का प्रचार-प्रसार किया करते थे।</p>
<p>आपके द्वारा सन 1902 में स्थापित संस्कृत महाविद्यालय में अनेकों दिगम्बराचार्यों, मुनिराजों ने शिक्षा प्राप्त की है। इस विद्यालय ने हजारों जैन विद्वानों को तैयार किया है। इसीलिए श्री गोपालदास जी वरैया को गुरुणां गुरु की उपाधि से सुशोभित किया गया था। उक्त विचार मुख्य अतिथि अम्बाह नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष जिनेश जैन ने श्री गोपालदास वरैया की जन्म जयंती के अवसर जैन संस्कृत महाविद्यालय मुरैना में उपस्थित बन्धुओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किये।</p>
<p><strong>मनाया हर्षोल्लास से</strong></p>
<p>श्री गोपाल दिगम्बर जैन संस्क्रत महाविद्यालय के उपमंत्री सुरेशचंद बाबूजी ने बताया कि जैन सिद्धांत संस्कृत महाविद्यालय मुरैना में विद्यालय के संस्थापक गुरुणां गुरु गोपालदास वरैया का जन्म जयंती समारोह को बड़े उत्साह एवं उल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जिनेश जैन पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अम्बाह थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वयोवृद्ध श्री द्वारिकाप्रसाद जैन एडवोकेट ने की। मंचासीन मुख्य अथिति जिनेश जैन अम्बाह, एडवोकेट द्वारिकाप्रसाद जैन, प्रेमचंद जैन (बन्दना साड़ी), पंडित प्रशांत जैन भीकमपुर सहित अतिशय क्षेत्र टिकटोली के अध्यक्ष राजेंद्र भण्डारी, राजेन्द्र जैन नन्दपुरा, एडवोकेट धर्मेंद्र जैन, विद्यालय के छात्र महावीर जैन, अभिषेक जैन ने गुरुणां गुरु श्री गोपालदास बरैया के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला।</p>
<p>विद्यालय की परंपरा के अनुसार विद्यालय परिवार की ओर से समाजसेवी मनोज जैन, सुरेशचंद बाबूजी, अनिल जैन व्याख्याता, दिनेश बरैया, रविन्द्र जैन, विमल जैन ने विद्यालय से शिक्षा प्राप्त पंडित श्री प्रशांत जैन भीकमपुर (ललितपुर) का शॉल, श्रीफल भेंटकर सम्मान किया गया। कार्यक्रम का संचालन विद्यालय के प्राचार्य चक्रेश शास्त्री एवं संजय शास्त्री ने किया । इस अवसर पर विद्यालय परिवार, विद्यालय के समस्त छात्रगण, बहुतायत संख्या में सधर्मी बन्धु, माता-बहिनें उपस्थित थीं।</p>
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		<title>हरीपर्वत जैन मंदिर में आयोजन : गोपाल दास वरैया का 157वा़ं जन्म जयंती महोत्सव मनाया </title>
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		<pubDate>Wed, 22 Mar 2023 13:20:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आगरा (शुभम जैन)। श्री दिगम्बर जैन बरैया समिति के तत्वावधान में गुरुवर पंडित श्री गोपालदास वरैया जी का 157वां जन्म-जयंती महोत्सव हरीपर्वत स्थित श्री 1008 शांतिनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर के आचार्य शांतिसागर सभागार में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ चित्रा अनावरण एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। छोटी-छोटी बालिकाओं ने मंगलाचरण [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>आगरा (शुभम जैन)।</strong> श्री दिगम्बर जैन बरैया समिति के तत्वावधान में गुरुवर पंडित श्री गोपालदास वरैया जी का 157वां जन्म-जयंती महोत्सव हरीपर्वत स्थित श्री 1008 शांतिनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर के आचार्य शांतिसागर सभागार में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ चित्रा अनावरण एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। छोटी-छोटी बालिकाओं ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। इस अवसर पर आयोजक कमेटी ने सभी अतिथियों का माला पहनाकर स्वागत सम्मान किया।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-40490" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230322-WA0045.jpg" alt="" width="1156" height="867" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230322-WA0045.jpg 1156w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230322-WA0045-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230322-WA0045-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230322-WA0045-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230322-WA0045-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230322-WA0045-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230322-WA0045-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230322-WA0045-990x743.jpg 990w" sizes="auto, (max-width: 1156px) 100vw, 1156px" /></p>
<p>श्री दिगंबर जैन वरैया समिति के महामंत्री धर्मेंद्र जैन ने बताया कि श्री गोपाल दास वरैया जी अपने समय में काफी विख्यात धर्म गुरु थे। उन्हें जैन धर्म के शास्त्रों का अच्छा ज्ञान प्राप्त था। इस कार्यक्रम में पदमचंद जैन, धर्मेंद्र कुमार जैन, राहुल जैन, कमल किशोर जैन, गौरव जैन, संजीव जैन, रोहित जैन, शुभम जैन, मुकेश जैन, सौरभ जैन, मनीष जैन सहित विभिन्न शहरों से जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए।</p>
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