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	<title>Etawah &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>सर्वकल्याणकारी होगा विहसंत सागर तीर्थधाम का निर्माण: 501 पवित्र स्थलों की मिट्टी से 15 मार्च को होगा भव्य शिलान्यास </title>
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		<pubDate>Thu, 12 Mar 2026 13:47:44 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन संत, मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री 108 विहसंत सागर जी महाराज की प्रेरणा और आशीर्वाद से जैतपुरा (उदी मोड़), इटावा में विहसंत सागर तीर्थधाम का भव्य शिलान्यास समारोह रविवार 15 मार्च को आयोजित किया जाएगा। विहसंत सागर चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, नव-निर्मित होने वाले इस तीर्थधाम में विश्व की पहली अद्वितीय [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन संत, मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री 108 विहसंत सागर जी महाराज की प्रेरणा और आशीर्वाद से जैतपुरा (उदी मोड़), इटावा में विहसंत सागर तीर्थधाम का भव्य शिलान्यास समारोह रविवार 15 मार्च को आयोजित किया जाएगा। विहसंत सागर चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, नव-निर्मित होने वाले इस तीर्थधाम में विश्व की पहली अद्वितीय सवा 19 फीट ऊंची भगवान श्री मल्लिनाथ की प्रतिमा विराजमान की जाएगी। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना/इटावा</strong>। जैन संत, मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री 108 विहसंत सागर जी महाराज की प्रेरणा और आशीर्वाद से जैतपुरा (उदी मोड़), इटावा में विहसंत सागर तीर्थधाम का भव्य शिलान्यास समारोह रविवार 15 मार्च को आयोजित किया जाएगा।</p>
<p>विहसंत सागर चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, नव-निर्मित होने वाले इस तीर्थधाम में विश्व की पहली अद्वितीय सवा 19 फीट ऊंची भगवान श्री मल्लिनाथ की प्रतिमा विराजमान की जाएगी। इसी के साथ 15 मार्च को जैतपुरा उदी मोड़, इटावा में एक साथ 15 महत्वपूर्ण परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस तीर्थधाम के निर्माण से क्षेत्र की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल जाएंगी।</p>
<p><strong>41 फीट ऊंचा मानस्तंभ बनेगा आकर्षण का केंद्र</strong></p>
<p>मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री 108 विहसंत सागर जी महाराज ने बताया कि प्रस्तावित विहसंत सागर तीर्थधाम सर्वकल्याणकारी होगा। यहां भारत का पहला 41 फीट ऊंचा मानस्तंभ बनाया जाएगा, जिसमें 72 प्रतिमाएं विराजमान होंगी। इस मानस्तंभ के दर्शन लगभग 5 किलोमीटर दूर से भी संभव होंगे। शिलान्यास समारोह को विशेष बनाने के लिए प्रतिनिधि मंडल ने 24 हजार किलोमीटर की यात्रा कर 501 पवित्र तीर्थस्थलों की मिट्टी एकत्र की है। यह मिट्टी 501 कलशों में भरकर इटावा लाई जा रही है। इसके अलावा 300 जैन संतों और 12 भट्टारकों द्वारा अभिमंत्रित लौंग भी भेजी गई है, जिन्हें शिलान्यास के समय नींव में स्थापित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक समारोह में 12 राज्यों से श्रद्धालु और अनेक गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे।</p>
<p><strong>एक साथ 15 परियोजनाओं का होगा शिलान्यास</strong></p>
<p>चार बीघा के विशाल भूखंड पर बनने वाले इस तीर्थधाम में 15 मार्च को एक साथ 15 महत्वपूर्ण परियोजनाओं का शिलान्यास किया जाएगा। यह कार्यक्रम उपाध्याय विहसंत सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में सम्पन्न होगा। इन परियोजनाओं में प्रमुख रूप से भगवान मल्लिनाथ का जिन मंदिर, विहसंत सागर त्यागी-ब्रती आश्रम, हॉस्पिटल, संग्रहालय, विरागोदय आहारशाला, गौशाला, तीर्थंकर वाटिका, विरागोदय गुरुकुल, त्रिकाल चौबीसी मानस्तंभ, मेडिटेशन टेम्पल, आश्रय भवन, विहसंत ऑडिटोरियम, भोजनालय, यात्री निवास शामिल हैं। बताया गया है कि इन सभी परियोजनाओं का कार्य लगभग डेढ़ वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके निर्माण से हजारों लोगों को रोजगार भी मिलने की संभावना है।</p>
<p><strong>12 मार्च को इटावा पहुंचेगी 1800 वर्ष प्राचीन आदिनाथ भगवान की प्रतिमा</strong></p>
<p>उपाध्याय विहसंत सागर जी महाराज ने बताया कि भूमि के भीतर से प्राप्त लगभग 1800 वर्ष प्राचीन भगवान आदिनाथ की प्रतिमा 12 मार्च को आगरा से इटावा लाई जाएगी। यह प्रतिमा बरहीपुरा जैन मंदिर से गाजे-बाजे के साथ शोभायात्रा के रूप में पूरे इटावा शहर का भ्रमण करेगी। इसके बाद प्रतिमा को जैतपुरा में निर्माणाधीन विहसंत सागर तीर्थधाम में विराजमान किया जाएगा। यह प्राचीन प्रतिमा तातपुर गांव में भू-गर्भ से प्राप्त हुई थी, जिसे अब जैतपुरा में स्थापित किया जाएगा।</p>
<p><strong>हजारों श्रद्धालुओं के आने की संभावना</strong></p>
<p>शिलान्यास समारोह में देशभर से लगभग 10 हजार से अधिक साधर्मी और गुरुभक्तों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। इस अवसर पर अन्य स्थानों के साथ-साथ मुरैना से जैतपुरा जाने के लिए बसों की विशेष व्यवस्था भी की गई है। सभी बसें रविवार 15 मार्च को सुबह 5 बजे जैतपुरा के लिए रवाना होंगी। यह समारोह धार्मिक आस्था, संस्कृति और समाजसेवा के नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है।</p>
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		<title>महावीर जन्म कल्याणक पर निकली भव्य रथयात्रा: महावीर के जीवन और संदेशों को आत्मसात करने की प्रेरणा दी </title>
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		<pubDate>Fri, 11 Apr 2025 07:45:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भगवान महावीर स्वामी का जन्म कल्याणक महोत्सव श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाया गया। सुबह प्रभात फेरी निकाली गई। यह नगर के मुख्य बाजारों से होती हुई बड़े जैन मंदिर पहुंची।जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। महावीर के जीवन और संदेशों को आत्मसात करने की प्रेरणा दी। अंबाह से अजय जैन की पढ़िए यह खबर&#8230; [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भगवान महावीर स्वामी का जन्म कल्याणक महोत्सव श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाया गया। सुबह प्रभात फेरी निकाली गई। यह नगर के मुख्य बाजारों से होती हुई बड़े जैन मंदिर पहुंची।जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। महावीर के जीवन और संदेशों को आत्मसात करने की प्रेरणा दी। <span style="color: #ff0000">अंबाह से अजय जैन की पढ़िए यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अंबाह।</strong> नगर में भगवान महावीर स्वामी का जन्म कल्याणक महोत्सव श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाया गया। सुबह प्रभात फेरी निकाली गई। यह नगर के मुख्य बाजारों से होती हुई बड़े जैन मंदिर पहुंची। प्रभात फेरी में भगवान महावीर के जीवन और संदेशों का प्रचार हुआ। समापन विश्व शांति और जनकल्याण की कामना के साथ हुआ। दोपहर 1 बजे श्री आदिनाथ जैन मंदिर से रथ यात्रा निकली। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु, माताएं और बहनें शामिल रहीं। रथ यात्रा के दौरान भगवान महावीर के जन्म से जुड़े भजन गूंजते रहे। श्रद्धालु एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते नजर आए। यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई परेड चौराहा स्थित जैन बगीची पहुंची। यहां वात्सल्य भोज के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।</p>
<p><strong>भगवान जिनेंद्र की झलक पाने को आतुर रहे भक्त </strong></p>
<p>नगरवासियों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा की। आरती उतारी। शीतल पेय वितरित कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया। इटावा का मयूर बैंड आकर्षण का केंद्र रहा। बैंड की भक्ति धुनों पर श्रद्धालु नाचते हुए भगवान महावीर के जन्म की खुशी में मगन दिखे। तपती दोपहरी में भी श्रद्धालु भगवान जिनेंद्र की झलक पाने के लिए डटे रहे।</p>
<p><strong>जयकारों से आकाश गूंज उठा</strong></p>
<p>जैसे ही भगवान जिनेंद्र का रथ मुख्य मंदिर से बाहर निकला, जय जिनेंद्र के जयकारों से आकाश गूंज उठा। रथ के आगे श्रद्धालु नाचते-गाते, सिर झुकाते हुए जयकारे लगाते आगे बढ़ते रहे। समापन पर रथ जैन बगीची पहुंचा। यहां भगवान श्रीजी का जल से अभिषेक हुआ। पंडित मुकेश शास्त्री ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ जलाभिषेक करवाया। रथयात्रा में आचार्य श्री विवेक सागर जी महाराज के शिष्य ऐलक विप्रमाण सागर जी महाराज, आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज के शिष्य क्षुल्लक श्री विश्वरक्ष सागर जी महाराज की उपस्थिति रही। बैंडबाजे की धुन पर श्रद्धालु जमकर नाचते रहे। आयोजन के समापन पर वात्सल्य भोज का आयोजन हुआ जिसमें भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।</p>
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