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	<title>Dongargarh श्रीफल जैन न्यूज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>डी डी नगर में नरेश सिंघई और टैगोर नगर में राजेश जैन अध्यक्ष निर्वाचित अध्यक्ष सहित नई कार्यकारिणी समिति का किया गया गठन </title>
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		<pubDate>Mon, 06 May 2024 06:59:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[1008श्री वासुपुज्य दिगंबर जैन मंदिर डी डी नगर का चुनाव 4 मई शनिवार को रात्रि 8 बजे मंदिर स्थित हाॅल में संपन्न हुआ। इस चुनाव में अध्यक्ष सहित नई कार्यकारिणी समिति का गठन किया गया।श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर टैगोर नगर में भी 5 मई को नई कार्यकारणी का चुनाव किया गया।पढि़ए प्रणीत जैन की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>1008श्री वासुपुज्य दिगंबर जैन मंदिर डी डी नगर का चुनाव 4 मई शनिवार को रात्रि 8 बजे मंदिर स्थित हाॅल में संपन्न हुआ। इस चुनाव में अध्यक्ष सहित नई कार्यकारिणी समिति का गठन किया गया।श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर टैगोर नगर में भी 5 मई को नई कार्यकारणी का चुनाव किया गया।<span style="color: #ff0000">पढि़ए प्रणीत जैन की रिपोर्ट ……</span></strong></p>
<hr />
<p>1008श्री वासुपुज्य दिगंबर जैन मंदिर डी डी नगर का चुनाव 4 मई शनिवार को रात्रि 8 बजे मंदिर स्थित हाॅल में संपन्न हुआ। इस चुनाव में अध्यक्ष सहित नई कार्यकारिणी समिति का गठन किया गया। चुने गए पदाधिकारियों और सदस्यों के कार्यकाल की अवधि दो वर्ष होगी। पूर्व अध्यक्ष यशवंत जैन ने बताया कि इस वर्ष चुनाव आम सभा के माध्यम से किया गया, जिसमे अध्यक्ष पद पर नरेश सिंघई का चयन किया गया। नई कार्यकारणी में अध्यक्ष -नरेश सिंघई, उपाध्यक्ष &#8211; अनिल काला, रमेश जैन, डॉ विशाल जैन ,सचिव &#8211; विकास सिंघई, कोषाध्यक्ष &#8211; राजेश सिंघई सहसचिव &#8211; मनोज जैन, दीपक जैन, कार्यकारिणी सदस्य &#8211; बाहुबली जैन, शशांक जैन, महेंद्र जैन, प्रमुख सलाहकार &#8211; पवन सेठी, डॉ अनुराग, एम के जैन चुने गए है।श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर टैगोर नगर में भी 5 मई को नई कार्यकारणी का चुनाव किया गया।पूर्व अध्यक्ष पुष्पेंद्र जैन टिल्लू ने बताया की आज का चुनाव वोट के माध्यम से किया गया जिसमे अध्यक्ष राजेश जैन,उपाध्यक्ष नवीन मोदी ,सचिव प्रियांक जैन ,कोषाध्यक्ष संदीप जैन,सहसचिव सुबोध जैन, कार्यकारिणी सदस्य रजनीश कुमार जैन और पुष्पेंद्र जैन ने चुनाव में जीत दर्ज की है।</p>
<p><strong>अखंड ज्योति की गई प्रज्वलित </strong></p>
<p>दिगंबर जैन मंदिर मालवीय रोड में लगभग 150 वर्ष पुराने मंदिर का पुनर्निर्माण कर लघु तीर्थ बनाने हेतु अंतिम देशना आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के रायपुर प्रवास के दौरान प्राप्त हुई थी। ट्रस्ट कमेटी के अध्यक्ष संजय जैन नायक एवं उपाध्यक्ष श्रेयश जैन बालू ने बताया कि मालवीय रोड स्थित दिगंबर जैन मंदिर में जैसलमेर के पीले पत्थरो से 171 फुट ऊंचे शिखर का 3 मंजिला मंदिर त्रिकाल चौबीसी सस्त्रकुट जिनालय बनाना तय हुआ है।साथ ही संत निवास सर्व सुविधा युक्त धर्मशाला, पार्किंग एवं सुन्दर गार्डन का निर्माण कार्य भी किया जायेगा। लघु तीर्थ बनाने की भावना आचार्य श्री के समक्ष ट्रस्ट कमेटी ने रखी थी।</p>
<p>आचार्य श्री की उत्कृष्ठ यम समाधि छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ में हुई।ये हमारे लिए परम सौभाग्य की बात है । आचार्य श्री केअंतिम समय में नवीन जिनालय लघु तीर्थ के निर्माण का मंगल आशीर्वाद हम सभी को मिला है। इसी संदर्भ में दिनाँक 25/01/2024 तिथि पौष कृष्ण पूर्णिमा, वीर निर्माण संवत 2250 गुरुवार को गुरु पुष्प नक्षत्र के पुण्य सुअवसर पर अखंड ज्योति स्थापना की गई है। परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महा मुनिराज ने नवीन जिनालय लघु तीर्थ के लिए दिशा निर्देश देते हुए अखंड ज्योति प्रज्वलित करने हेतु कहा था। इस पर अमल करते हुए अखंड ज्योति की स्थापना मूल नायक 1008 श्री आदिनाथ भगवान की वेदी के समक्ष की गई है। यह अखंड ज्योत नवीन जिनालय लघु तीर्थ का कार्य जब तक प्रारंभ होकर पूर्ण नही हो जाता तब तक प्रज्वलित रहेगी। अध्यक्ष संजय जैन नायक एवं उपाध्यक्ष श्रेयश जैन बालू ने समस्त समाज के धर्म प्रेमी बंधुओ एवं सदस्यों कहा है कि संत शिरोमणि 108 आचार्य श्री विद्यासागर महाराज से बड़ा मंदिर के जिनालय का पुनःनिर्माण कर नवीन जिनालय बना कर राजधानी रायपुर में एक लघु तीर्थ स्थल बनाने का मंगल आशीर्वाद प्राप्त हुआ था। सभी सदस्यों ने जल्द से जल्द निर्माण शुरू करने का संकल्प लिया था। सभी मंदिरों के अध्यक्ष एवं सकल जैन समाज को एक साथ मिलकर उस संकल्प को शीघ्र अति शीघ्र पूरा करने की लिए सभी मिल कर कार्य करें।</p>
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		<title>मुनि सुव्रतनाथ भगवान का जन्म एवं तप कल्याणक गया मनाया जैसलमेर के पाषाण से तैयार होगा लघु तीर्थ </title>
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		<pubDate>Fri, 03 May 2024 16:00:11 +0000</pubDate>
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<p><strong>जैन धर्म के 20 वे तीर्थंकर मुनि सुव्रतनाथ भगवान का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव , दिनाँक &#8211; 03 मई 2024 तिथि वैशाख कृष्ण दशमी, 2550 दिन ,शुक्रवार को राजधानी रायपुर के श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर मालवीय रोड में समाज के धर्मप्रेमी बंधुओ द्वारा उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर शहर के श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर के जिनालयों में श्रद्धा की झलक देखने को मिली।<span style="color: #ff0000">पढि़ए प्रणीत जैन की रिपोर्ट ……</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> रायपुर ।</strong>जैन धर्म के 20 वे तीर्थंकर मुनि सुव्रतनाथ भगवान का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव दिनाँक &#8211; 03 मई 2024 तिथि वैशाख कृष्ण दशमी, 2550 दिन ,शुक्रवार को राजधानी रायपुर के श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर मालवीय रोड में समाज के धर्मप्रेमी बंधुओ द्वारा उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर शहर के श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर के जिनालयों में श्रद्धा की झलक देखने को मिली। पूरा जिनालय परिसर 20 वे तीर्थंकर भगवान मुनिसुव्रत नाथ भगवान के जयकारों से गुंजायमान हो गया। भक्तों ने पूजा-अर्चना के कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लिया। श्री दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर के अध्यक्ष संजय जैन नायक एवं उपाध्यक्ष श्रेयश जैन बालू ने बताया की आज प्रातःकाल सुबह 8.30 बजे मंदिर की भगवान पार्श्वनाथ जी की बेदी के समक्ष पांडुक्षिला में श्री पुष्पदंत भगवान को विराजमान करके रजत कलशों से प्रासुक जल से अभिषेक किया गया।</p>
<p><strong>भगवान मुनिसुव्रतनाथ के जयकारों से गूंज उठा जिनालय</strong></p>
<p>विश्व में सुख-समृद्धि की कामना के साथ मंत्रोच्चारों के बीच शांतिधारा का उच्चारण कर जिनेन्द्र देव के चरणों में धारा प्रभावित की गई। साथ ही धर्म प्रेमी बंधुओ द्वारा आरती की गई । तत्पश्चात श्रावक-श्राविकाओं ने देव-शास्त्र-गुरू की पूजन के साथ अपनी निर्मल भक्ति समर्पित करते हुए मंदिर के 20 वे तीर्थंकर मुनिसुव्रतनाथ भगवान की अष्टद्रव्यों से पूजा की गई। सभी ने हाथों में अर्घ्य, दीपक, श्रीफल लेकर भाव-भीनी भक्ति करते हुए प्रभु चरणों में अर्पण कर श्रावकों के मन मुदित हो उठे और जिनालय परिसर भगवान मुनिसुव्रतनाथ के जयकारों से गूंज उठा ।भक्तों ने जन्म-मरण के चक्र से निकलकर मोक्ष को प्राप्त करने की भावना प्रकट की और भगवान मुनिसुव्रतनाथ जी का गुणगान कर पुण्य का संचय किया। कार्यक्रम के दौरान श्रेयश जैन बालू उपाध्यक्ष ,महेंद्र कुमार जैन ,राकेश जैन, प्रवीण जैन, कुमुद जैन,प्रणीत जैन सहित समाज के गणमान्य महिला-पुरूष मौजूद थे।</p>
<p><strong> 150 वर्ष पुराने मंदिर का होगा पुनर्निर्माण</strong></p>
<p>श्री दिगंबर जैन मंदिर मालवीय रोड में लगभग 150 वर्ष पुराने मंदिर का पुनर्निर्माण एवं भूमि पूजन का कार्य आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के मंगल आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन में उनके छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान दिसंबर 2023 को प्राप्त हुआ था। ट्रस्ट कमेटी के अध्यक्ष संजय जैन नायक एवं उपाध्यक्ष श्रेयश जैन बालू ने बताया कि मालवीय रोड स्थित दिगंबर जैन मंदिर में जैसलमेर के पीले पत्थरों से 171 फुट ऊंचे शिखर का 3 मंजिला मंदिर, त्रिकाल चौबीसी सस्त्रकुट जिनालय बनाना तय हुआ है।साथ ही संत निवास ,सर्व सुविधा युक्त धर्मशाला, पार्किंग एवं सुन्दर गार्डन का निर्माण कार्य भी किया जायेगा। लघु तीर्थ बनाने की भावना आचार्य श्री के समक्ष ट्रस्ट कमेटी ने रखी थी। आचार्य श्री के मंगल आशीर्वाद से कई जगहों पर जैन तीर्थ स्थलों का पुनर्निर्माण एवं नए मंदिरों का निर्माण व पुराने मंदिरों का नवीनीकरण वर्तमान में किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ में चंद्रगिरी तीर्थ का निर्माण कार्य भी तेजी से चल रहा है। एवं तिल्दा में कुछ माह पूर्व आचार्यश्री के सानिध्य एवं मार्गदर्शन पर पीले पत्थरो से निर्मित मंदिर का पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव संपन्न हुआ है।</p>
<p><strong>अखंड ज्योति की गई स्थापना </strong></p>
<p>बड़े सौभाग्य की बात है की आचार्य श्री का विहार तिल्दा से सीधे बड़े मंदिर, मालवीय रोड, रायपुर में हुआ था। और आचार्य श्री की उत्कृष्ठ यम समाधि छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ में हुई। आचार्य श्री अंतिम समय में नवीन जिनालय लघु तीर्थ के निर्माण का मंगल आशीर्वाद मिलना परम सौभाग्य की बात है। इसी संदर्भ में दिनाँक 25/01/2024 तिथि पौष कृष्ण पूर्णिमा, वीर निर्माण संवत 2250 गुरुवार को गुरु पुष्प नक्षत्र के पुण्य सुअवसर पर अखंड ज्योति स्थापना की गई है। परम पूज्य आचार्य भगवन श्री विद्यासागर जी महा मुनिराज ने नवीन जिनालय लघु तीर्थ के लिए दिशा निर्देश देते हुए अखंड ज्योति प्रज्वलित करने हेतु कहा था। इस पर अमल करते हुए अखंड ज्योति की स्थापना मूल नायक 1008 श्री आदिनाथ भगवान की वेदी के समक्ष की गई है। यह अखंड ज्योत नवीन जिनालय लघु तीर्थ का कार्य जब तक प्रारंभ होकर पूर्ण नही होता तब तक प्रज्वलित रहेगी। अध्यक्ष संजय जैन नायक एवं उपाध्यक्ष श्रेयश जैन बालू ने समस्त समाज के धर्म प्रेमी बंधुओ एवं सदस्यों को कहा है कि संत शिरोमणि 108 आचार्य श्री विद्यासागर महाराज द्वारा बड़ा मंदिर के जिनालय का पुनःनिर्माण कर नवीन जिनालय बना कर राजधानी रायपुर में एक लघु तीर्थ स्थल बनाने का मंगल आशीर्वाद प्राप्त हुआ था। उनके समक्ष सभी सदस्यों ने जल्द से जल्द निर्माण शुरू करने का संकल्प लिया था। संकल्प को सभी एक साथ मिलकर शीघ्र अति शीघ्र पूरा करें ।</p>
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		<title>44 वर्ष से दिगम्बरत्वधारी निर्यापक मुनि समयसागरजी बनेंगे आचार्यश्री :  शरद पूर्णिमा को ही जन्मे हैं श्रीमंती के लाल शांतिनाथ </title>
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		<pubDate>Tue, 02 Apr 2024 09:13:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के समाधिस्थ होने के बाद दिगम्बर जैन जगत को नवीन आचार्य के रूप में मुनिश्री समयसागरजी महाराज का मिलना तय है। 27 अक्टूबर 1958 शरद पूर्णिमा को जन्मे श्री शांतिनाथ अष्टगे की जन्मभूमि सदलगा, कर्नाटक है। 8 मार्च 1980 को सिद्धभेत्र द्रोणगिरिजी में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आयार्यश्री विद्यासागरजी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के समाधिस्थ होने के बाद दिगम्बर जैन जगत को नवीन आचार्य के रूप में मुनिश्री समयसागरजी महाराज का मिलना तय है। 27 अक्टूबर 1958 शरद पूर्णिमा को जन्मे श्री शांतिनाथ अष्टगे की जन्मभूमि सदलगा, कर्नाटक है। 8 मार्च 1980 को सिद्धभेत्र द्रोणगिरिजी में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आयार्यश्री विद्यासागरजी महाराज से दीक्षित प्रथम शिष्य मुनिश्री समयसागरजी महाराज विगत 44 वर्ष से दिगम्बरत्व की साधना में तल्लीन हैं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेन्द्र जैन महावीर की विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के समाधिस्थ होने के बाद दिगम्बर जैन जगत को नवीन आचार्य के रूप में मुनिश्री समयसागरजी महाराज का मिलना तय है। 27 अक्टूबर 1958 शरद पूर्णिमा को जन्मे श्री शांतिनाथ अष्टगे की जन्मभूमि सदलगा, कर्नाटक है। 8 मार्च 1980 को सिद्धभेत्र द्रोणगिरिजी में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आयार्यश्री विद्यासागरजी महाराज से दीक्षित प्रथम शिष्य मुनिश्री समयसागरजी महाराज विगत 44 वर्ष से दिगम्बरत्व की साधना में तल्लीन हैं। जो भी उन्हें जानता है, वह यह जानता है कि निरंतर अपने आप में रमण करने वाले, शास्त्र अध्ययन करने वाले मुनिश्री समयसागर जी हैं, जिनमें आमजनों को आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज दिखाई देते हैं।</p>
<p><strong>दिगम्बर धर्म के ध्वजाधारी</strong></p>
<p>श्रीमंती माता व श्री मल्लप्पा अष्टमें के पुत्र-पुत्रियों में सबसे छोटे पुत्र शांतिनाथ देश के सबसे बड़े संघ की बागडोर संभालकर दिगम्बरत्व को नेतृत्च प्रदान करेंगे। उस मां के सौभाग्य के कल्पना ही की जा सकती है, जिसने छह बच्चे (चार पुत्र, दो पुत्री) को जन्म दिया। वे सभी दिगम्बर धर्म के ध्वजाधारी बने हैं। सर्वप्रथम आचार्यश्री विद्यासागरजी (जन्म नाम विद्याधर), मुनिश्री योगसागरजी (जन्म नाम अनंतनाथ), मुनिश्री समयसागरजी (जन्म नाम शांतिनाथ), एक मात्र घर को संभालने वाले श्री महावीरप्रसाद का मन भी घर में कैसे लगता, वे भी मुनिश्री उत्कृष्टसागरजी के रूप में दीक्षित हो गए। इतना ही नहीं श्री मल्लप्पाजी व श्रीमंतीजी ने भी मुनिश्री मल्लिसागरजी व आर्यिका समयमति माताजी के रूप में दीक्षा लेकर समाधि को धारण किया।</p>
<p><strong>मराठी में हुई लौकिक शिक्षा</strong></p>
<p>निर्यापक श्रमण समयसागरजी महाराज ने लौकिक शिक्षा हाईस्कूल तक मराठी माध्यम में पूर्ण की है। आप 2 मई 1975 से आचार्यश्री के संघ में ब्रह्मचर्य लेकर सम्मिलित हुए। फिर क्षुल्लक, ऐलक बनकर पांच वर्षों तक आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज से अध्ययन कर उनके प्रथम शिष्य होने का गौरव प्राप्त किया। उनके चरण पथ अनुगामी मुनिश्री समय सागरजी महाराज भी मीठा, नमक, दही, फल, मिठाई आदि के त्यागी हैं। निर्णायक मुनिश्री समयसागरजी महाराज ज्ञान-ध्यान में लग्न हैं। उनमें अध्यात्म के प्रति जबरदस्त जागरूकता है। हमेशा अंतरंग में रहकर धर्मसाधना करना उनका लक्ष्य रहा है। वर्ष 2018 में उन्हें प्रथम निर्यापक श्रमण घोषित किया गया था।</p>
<p><strong>संपूर्ण संघ पहुंच रहा है कुंडलपुर</strong></p>
<p>आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के द्वारा 131 मुनिदीक्षा, 172 आर्यिका दीक्षा, 22 ऐलक दीक्षा, 90 क्षुल्लक, क्षुल्लिका दीक्षा के साथ लगभग चार सौ से अधिक दीक्षाएं दी गईं। अनेक भैया-दीदी ब्रह्मचर्य अवस्था में हैं व हजारी प्रतिमाधारी हैं। आचार्यश्री के रूप में पूज्य समयसागरजी महाराज 16 अप्रैल 2024, मंगलवार को दिगम्बर जैन तीर्थ कुण्डलपुर, म.प्र. में सर्व संघ की उपस्थिति में पद ग्रहण करेंगे। संपूर्ण संघ उनके एक इशारे पर कुण्डलपुर पहुंच रहा है। यह आचार्यश्री के संघ की अभूतपूर्व विशेषता है। जैन शासन में आचार्य पद की महत्ता 28 मूलगुगों के साथ 36 मूलगुणों पर आधारित है। 36 मूलगुणों के साथ आचार्य पद नेतृत्व का प्रतीक है।</p>
<p><strong>करेंगे जिन शासन को गौरवान्वित</strong></p>
<p>वर्ष 2024 बहुत ही महत्वपूर्ण वर्ष है, यह वर्ष अंतिम तीर्थंकर महावीर स्वामी का 2550वां निर्वाण वर्ष है। चारित्र चक्रवर्ती आचार्यश्री शांतिसागरजी महाराज का आचार्य पदारोहण शताब्दी वर्ष भी है। जैन समाज ने इस वर्ष बहुत खोया है फिर भी कालचक्र की गति तो गतिमान है। आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज के उत्तराधिकारी के रूप में उन्हीं के प्रथम शिष्य पूज्य समयसागरजी महाराज के प्रति हम सभी बहुमान व्यक्त करते हुए कामना करते हैं कि दिगम्बरत्व की ध्वजा की आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज ने जितना ऊंचा उठाया है, उसी अनुरूप निर्यापक श्रमण, समयसागरजी महाराज एक श्रेष्ठ आचार्य के रूप में प्रतिष्ठापित होकर जैन संस्कृति के उन्नायक आचार्य होकर अनेकों जीवों के कल्याण का निमित्त बनकर जैन शासन को गौरवान्वित करेंगे।</p>
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		<title>j.p.lक्रिकेट टूर्नामेंट के फाइनल पर पुरस्कार वितरण कार्यक्रम फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पुरुस्कृत किया विजेताओ को </title>
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		<pubDate>Fri, 29 Mar 2024 12:50:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वर्धमान ग्रुप गुना द्वारा आयोजित j.p.lक्रिकेट टूर्नामेंट के फाइनल पर पुरस्कार वितरण किया एक शानदार कार्यक्रम शानदार आयोजन हुआ। पढि़ए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट.. दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन के मिडिया प्रभारी राजेश जैन दद्दू ने बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राकेश विनायका कार्य अध्यक्ष श्री कीर्ति पांडया राष्ट्रीय सचिव श्री ऋषभ जैन संजय [&#8230;]]]></description>
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<p>वर्धमान ग्रुप गुना द्वारा आयोजित j.p.lक्रिकेट टूर्नामेंट के फाइनल पर पुरस्कार वितरण किया एक शानदार कार्यक्रम शानदार आयोजन हुआ। <span style="color: #ff0000">पढि़ए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट..</span></p>
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<p>दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन के मिडिया प्रभारी राजेश जैन दद्दू ने बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राकेश विनायका कार्य अध्यक्ष श्री कीर्ति पांडया राष्ट्रीय सचिव श्री ऋषभ जैन संजय पपड़ीवाल ने वर्धमान ग्रुप गुना द्वारा आयोजित j.p.lक्रिकेट टूर्नामेंट के फाइनल पर पुरस्कार वितरण किया एक शानदार कार्यक्रम शानदार आयोजन में महामहिम आचार्य श्री विद्यासागर जी के जन्म सदलगा से डोंगरगढ़ सिद्ध तत्व की यात्रा की शानदार प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया साथ ही बजरंगगढ़ में विराजित राष्ट संत श्री विहर्ष सागर जी संसघ से आशीर्वाद भी प्राप्त किया</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-57841" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/03/IMG-20240329-WA0008.jpg" alt="" width="521" height="1156" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/03/IMG-20240329-WA0008.jpg 521w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/03/IMG-20240329-WA0008-135x300.jpg 135w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/03/IMG-20240329-WA0008-462x1024.jpg 462w" sizes="(max-width: 521px) 100vw, 521px" /></p>
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		<title>जैन समाज में खुशी की लहर :  जैनाचार्य विद्यासागर के नाम पर सागर में आयुर्वेदिक महाविद्यालय खोला जाएगा &#8211; मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव </title>
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		<pubDate>Thu, 14 Mar 2024 07:08:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समाधिस्थ जैनाचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज को समर्पित कर सागर विधानसभा क्षेत्र में आयुर्वेदिक महाविद्यालय बनाए जाने की घोषणा की। पढ़िए रत्नेश जैन रागी की रिपोर्ट&#8230; सागर। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समाधिस्थ जैनाचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज को समर्पित कर सागर विधानसभा क्षेत्र में आयुर्वेदिक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समाधिस्थ जैनाचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज को समर्पित कर सागर विधानसभा क्षेत्र में आयुर्वेदिक महाविद्यालय बनाए जाने की घोषणा की।<span style="color: #ff0000"> पढ़िए रत्नेश जैन रागी की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>सागर।</strong> मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समाधिस्थ जैनाचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज को समर्पित कर सागर विधानसभा क्षेत्र में आयुर्वेदिक महाविद्यालय बनाए जाने की घोषणा की। सागर में आयोजित एक कार्यक्रम में जैन समाज की भावनाओं को दृष्टिगत रखते हुए सागर विधानसभा क्षेत्र के विधायक शैलेन्द्र जैन के आग्रह पर इस आयुर्वेदिक महाविद्यालय का नाम &#8221; जैनाचार्य विद्यासागर जी आयुर्वेदिक महाविद्यालय &#8221; के नाम रखा जाने की घोषणा पर सागर ही नहीं अपितु सम्पूर्ण देश की जैन समाज ने खुशी जाहिर करते हुए मुख्यमंत्री व सरकार के प्रति धन्यवाद प्रकट किया।</p>
<p>आभार प्रकट करने वालों में नैनागिरि जैन तीर्थ सहित देश की अनेक संस्थाओं के पदाधिकारी सुरेश जैन आईएएस भोपाल, प्रभावना जनकल्याण परिषद (रजि) के राष्ट्रीय अध्यक्ष, बीजेएस के सागर सम्भाग अध्यक्ष तथा जैन तीर्थ नैनागिरि व द्रोणगिरि सहित अनेक संस्थाओं के पदाधिकारी राजेश जैन रागी बकस्वाहा, देश की अनेक संस्थाओं के पदाधिकारी व समाजसेवी संतोष कुमार जैन घड़ी, कपिल मलैया, देवेन्द्र लुहारी सागर, सुनील घुवारा , वीरेंद्र सिंघई टीकमगढ़, सुनील संचय ललितपुर आदि शामिल हैं। सर्वविदित है कि पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज हमेशा आयुर्वेद के सम्बंध में प्रेरणा देते रहे। पूज्यवर के आशीर्वाद से जबलपुर में &#8220;पूर्णायु&#8221; के नाम से मेडिकल कॉलेज शुरू किया गया है, जिसमें बड़ी संख्या में बेटियां अध्ययन कर आयुर्वेद चिकित्सक के रूप में भविष्य में सेवा प्रदान करेंगी।</p>
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