<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Documentary &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/documentary/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Fri, 10 Apr 2026 12:40:30 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>Documentary &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>बच्चों को बांटी विश्व णमोकार महामंत्र दिवस मिठाई : शिक्षा विभाग के निर्देश पर ऋषभदेव पखवाड़े की शुरुआत </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/sweets_distributed_to_children_on_world_namokar_mahamantra_day/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/sweets_distributed_to_children_on_world_namokar_mahamantra_day/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Apr 2026 12:40:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Ascetic]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Documentary]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain monk]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Nun]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Updates]]></category>
		<category><![CDATA[Lord Rishabhdev]]></category>
		<category><![CDATA[Rishabhdev fortnight]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[World Namokar Mahamantra Day. श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[ऋषभदेव पखवाड़े]]></category>
		<category><![CDATA[ऋषभदेव भगवान]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[डॉक्यूमेंट्री]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[विश्व णमोकार महामंत्र दिवस]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=104404</guid>

					<description><![CDATA[शिक्षा विभाग की अभिनव पहल पर देवाधिदेव ऋषभदेव भगवान के जीवन चरित्र पर होने वाली प्रतियोगिता की शुरुआत ज्योति शिक्षण संस्थान सीनियर सेकंडरी स्कूल और वर्धमान कोचिंग सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में प्री-प्राइमरी कक्षा के विद्यार्थियों से की। बामनवास से पढ़िए, यह खबर&#8230; बामनवास। शिक्षा विभाग की अभिनव पहल पर देवाधिदेव ऋषभदेव भगवान के जीवन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>शिक्षा विभाग की अभिनव पहल पर देवाधिदेव ऋषभदेव भगवान के जीवन चरित्र पर होने वाली प्रतियोगिता की शुरुआत ज्योति शिक्षण संस्थान सीनियर सेकंडरी स्कूल और वर्धमान कोचिंग सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में प्री-प्राइमरी कक्षा के विद्यार्थियों से की। <span style="color: #ff0000">बामनवास से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बामनवास।</strong> शिक्षा विभाग की अभिनव पहल पर देवाधिदेव ऋषभदेव भगवान के जीवन चरित्र पर होने वाली प्रतियोगिता की शुरुआत ज्योति शिक्षण संस्थान सीनियर सेकंडरी स्कूल और वर्धमान कोचिंग सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में प्री-प्राइमरी कक्षा के विद्यार्थियों से की। बच्चों को इस अवसर पर भगवान ऋषभदेव के जीवन चरित्र पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म दिखाई गई। इसके बाद उन्हें विद्यालय के निदेशक अखलेश गुर्जर ने माता मरूदेवी के सोलह सपनों के बारे में बताते हुए उनका अर्थ समझाया।</p>
<p><strong>नन्हे मुन्नों ने ध्यान मुद्रा में किया णमोकार महामंत्र का जाप</strong></p>
<p>विश्व णमोकार महामंत्र दिवस पर बच्चों ने एक साथ समधुर आवाज में णमोकार महामंत्र का निर्दाेष आवाज में जाप किया। जिससे पूरे विद्यालय का वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से भर गया। इस अवसर पर वर्धमान कोचिंग सेंटर की निदेशक एकता जैन ने बताया कि णमोकार महामंत्र में पांच परमेष्ठि को नमन किया जाता है। अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और सर्वसाधु इन परम पद को पाने के लिए आपको धर्म की राह पर चलकर भावना बनाकर जीवन को त्याग की ओर करने का पुरूषार्थ करना होगा।</p>
<p><strong>विभिन्न प्रतियोगिताएं होगी </strong></p>
<p>इस अवसर पर प्रधानाचार्य कृपा गुर्जर ने बताया कि सोमवार को विद्यालय में शिक्षा विभाग के आदेशों की अनुपालना में विद्यार्थियों में ऋषभदेव पखवाड़े के तहत ऋषभ स्तुति, ऋषभदेव पर आधारित शिक्षाप्रद कहानी, चित्रकला एवं पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता एवं रंगोली प्रतियोगिता, मंगलवार को निबंध और प्रश्नोत्तर, रचनात्मक लेखन एवं कविता पाठ प्रतियोगिता, बुधवार को योग शिविर लगाया जाएगा। विश्व णमोकार महामंत्र दिवस पर बच्चों को विद्यालय में मिठाई का वितरण किया गया। इस अवसर पर विद्यालय की नीरज गुर्जर, शिवानी मीणा, गणेश योगी, योग शिक्षक रीना गुर्जर उपस्थित थे।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/sweets_distributed_to_children_on_world_namokar_mahamantra_day/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>शिक्षा संस्कारों से गुरु जीवन का निर्माण करते हैं : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने आचार्यश्री शांतिसागर जी की महिमा बताई </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/through_education_and_values_teachers_shape_the_lives_of_their_students/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/through_education_and_values_teachers_shape_the_lives_of_their_students/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Jan 2026 12:19:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[21 फीट स्मारक]]></category>
		<category><![CDATA[21-foot monument]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Shantisagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vardhman Sagar JI]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Documentary]]></category>
		<category><![CDATA[inauguration]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain monk]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Nun]]></category>
		<category><![CDATA[jain samaj]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[two-day ceremony]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्यश्री शांतिसागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[डॉक्यूमेंट्री]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[दो दिवसीय अनुष्ठान]]></category>
		<category><![CDATA[लोकार्पण]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=98607</guid>

					<description><![CDATA[देव दर्शन, अभिषेक और पूजन के लिए मंदिर का निर्माण किया जाता है। देव शास्त्र के बाद गुरु का नंबर आता है। निवाई दिगंबर जैन समाज ने प्रथमाचार्य श्रीशांति सागर जी का गुरु मंदिर बनाया है। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी के 21 फीट के स्मारक के लोकार्पण [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>देव दर्शन, अभिषेक और पूजन के लिए मंदिर का निर्माण किया जाता है। देव शास्त्र के बाद गुरु का नंबर आता है। निवाई दिगंबर जैन समाज ने प्रथमाचार्य श्रीशांति सागर जी का गुरु मंदिर बनाया है। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी के 21 फीट के स्मारक के लोकार्पण पर दो दिवसीय अनुष्ठान में प्रकट की। <span style="color: #ff0000">निवाई से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>निवाई।</strong> देव दर्शन, अभिषेक और पूजन के लिए मंदिर का निर्माण किया जाता है। देव शास्त्र के बाद गुरु का नंबर आता है। निवाई दिगंबर जैन समाज ने प्रथमाचार्य श्रीशांति सागर जी का गुरु मंदिर बनाया है। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी के 21 फीट के स्मारक के लोकार्पण पर दो दिवसीय अनुष्ठान में प्रकट की। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री शांतिसागर जी ने धर्म के प्रचार-प्रचार में दीक्षा के बाद दक्षिण भारत से उत्तर भारत कर्नाटक से सम्मेद शिखर के लिए भ्रमण कर धर्म का प्रवर्तन किया। आचार्य श्री शांतिसागर जी के जीवन में त्याग, सहनशीलता, वाणी में मधुरता, क्षमा, मार्दव, आर्जव, सत्य, शौच, संयम आदि 10 धर्म को जीवन में अपनाया और उतारा। उन्होंने अपने गुणों का मान अभिमान नहीं किया। सरलता के साथ चरित्र धर्म का उज्जवल संदेश देश और समाज को दिया।</p>
<p><strong>गुरु का आशीर्वाद हमेशा फलदायी होता है</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने आगे उपदेश में बताया कि गुरु के बिना जीवन शुरू नहीं होता है। गुरु ही धर्म की रक्षा करते और करवाते हैं। आचार्य श्री शांतिसागर जी ने जिनवाणी, जिन मंदिर को सुरक्षित कर बच्चों को गुरुकुल के माध्यम से धार्मिक शिक्षा दिलाकर संस्कारित कराया। शिक्षा और संस्कार से जीवन का निर्माण होता है। शिक्षा से परिवार सुरक्षित होता है। गुरु का आशीर्वाद हमेशा फलदायी होता है। संस्कारों से स्वयं के साथ अन्य का जीवन भी परिवर्तित होता है। जैन स्कूलों में लौकिक शिक्षा के साथ धार्मिक शिक्षा भी देना चाहिए। प्रथम पट्टाचार्य श्री वीरसागर जी ने कचनेर में स्कूल का संचालन कर बच्चों को संस्कार और धार्मिक शिक्षा दी।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-98612" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260121-WA0010-225x300.jpg" alt="" width="225" height="300" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260121-WA0010-225x300.jpg 225w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260121-WA0010-768x1024.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260121-WA0010.jpg 960w" sizes="(max-width: 225px) 100vw, 225px" /></p>
<p><strong>देव दर्शन, अभिषेक और पूजन करना श्रावक का प्रथम कर्तव्य</strong></p>
<p>आचार्यश्री ने कहा कि धार्मिक शिक्षा और संस्कार से जीवन सुरक्षित रहता है। प्रतिदिन देव दर्शन, अभिषेक और पूजन करना श्रावक का प्रथम कर्तव्य है। संस्कार के बिना उच्च शिक्षा निरर्थक है। समाज के पवन बोहरा, हेमंत बाबी, मोहित एवं सुशील ने बताया कि बुधवार को प्रतिष्ठाचार्य धर्मचंद शास्त्री के मंत्रोच्चार से सुबह श्री जी के पंचामृत अभिषेक के बाद आचार्य श्री शांतिसागर जी की प्रतिमा और चरण की शुद्धि की गई। पंचामृत अभिषेक कनकचंद कपूरीदेवी माधोपुर वालों ने, पूर्वाचार्यों के चरणशुद्धि एवं पंचामृत अभिषेक, आचार्य श्रीवीर सागर, श्री धर्मसागर जी का ज्ञानचंद वीरेंद्र चंवरिया, आचार्य श्री शिवसागर जी का रमेशचंद विमलादेवी गिनदौड़ी परिवार, आचार्य श्री अजीत सागर जी के हुकुमचंद पारस मल प्रेस वालों ने चरणों की शुद्धिकरण कर पंचामृत अभिषेक किया।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-98611" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260121-WA0009-300x225.jpg" alt="" width="300" height="225" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260121-WA0009-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260121-WA0009-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260121-WA0009-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260121-WA0009-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260121-WA0009-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260121-WA0009-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260121-WA0009-990x743.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260121-WA0009.jpg 1280w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><strong>आचार्य श्री शांतिसागर जी पर डॉक्यूमेंट्री का प्रसारण </strong></p>
<p>श्री शांति सागर स्मारक का लोकार्पण पदमचंद कमलादेवी ने किया। इन्होंने 26 जनवरी 2023 को शिलान्यास भी किया था। आचार्य श्री शांतिसागर गुरु मंदिर के ऊपर कलशारोहण विमलकुमार इंद्रा देवी परिवार एवं धातु ध्वजा का आरोहण सुशील नीरा, राहुल आरा मशीन वालों ने किया। दोपहर को आचार्य श्री शांतिसागर विधान का पूजन आचार्य संघ सनिध्य में हुआ। रात्रि में श्री जी और आचार्य श्री की आरती के बाद आचार्य श्री शांतिसागर जी पर डॉक्यूमेंट्री का प्रसारण हुआ।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/through_education_and_values_teachers_shape_the_lives_of_their_students/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>अमेरिका में होगी जैन कान्फ्रेंस : इंदौर के अतिशय मंदिर को शामिल किया गया है विशेष डॉक्युमेंट्री में </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/atishay_mandir_of_indore_has_been_included_in_the_special_documentary/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/atishay_mandir_of_indore_has_been_included_in_the_special_documentary/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Jun 2023 08:07:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Digamber Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Documentary]]></category>
		<category><![CDATA[Federation of Jain Associations]]></category>
		<category><![CDATA[indore]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Conference]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Convention]]></category>
		<category><![CDATA[jain dharm]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain religion]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain saint]]></category>
		<category><![CDATA[Jainism]]></category>
		<category><![CDATA[jaipur]]></category>
		<category><![CDATA[Mangal Pravesh]]></category>
		<category><![CDATA[Panchayati Digambar Jain Mandir Cantonment]]></category>
		<category><![CDATA[Pushpa Pandya श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[जैन अधिवेशन]]></category>
		<category><![CDATA[जैन कान्फ्रेंस]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन संत]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साधु]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन सोसायटी]]></category>
		<category><![CDATA[डॉक्युमेंट्री]]></category>
		<category><![CDATA[पंचायती दिगंबर जैन मंदिर छावनी]]></category>
		<category><![CDATA[पुष्पा पांड्या]]></category>
		<category><![CDATA[फेडरेशन ऑफ जैन एसोसिएशंस]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=46605</guid>

					<description><![CDATA[अमेरिका में होने वाले जैन अधिवेशन में भारत के कुछ महत्वपूर्ण चुनिंदा तीर्थों, मंदिरों, वहां के अतिशय क्षेत्रों आदि पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी रिलीज होगी। फिल्म में इंदौर नगर के पंचायती दिगंबर जैन मंदिर छावनी को भी शामिल किया गया। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230; इंदौर। फेडरेशन ऑफ जैन एसोसिएशंस का 22वां भव्य [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>अमेरिका में होने वाले जैन अधिवेशन में भारत के कुछ महत्वपूर्ण चुनिंदा तीर्थों, मंदिरों, वहां के अतिशय क्षेत्रों आदि पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी रिलीज होगी। फिल्म में इंदौर नगर के पंचायती दिगंबर जैन मंदिर छावनी को भी शामिल किया गया।<span style="color: #ff0000;"> पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> फेडरेशन ऑफ जैन एसोसिएशंस का 22वां भव्य एवं व्यापक अधिवेशन आगामी 30 जून से 3 जुलाई तक होने जा रहा है। प्रत्येक 2 वर्ष के अंतराल में अमेरिका में होने वाली इस कान्फ्रेंस में देश-विदेश के अनेक जैन विद्वान, मनीषी ,वक्ता एवं समग्र जैन धर्म के अनुयायी (श्वेतांबर एवं दिगंबर) एक साथ भाग लेते हैं। इस कान्फ्रेंस में जैन धर्म की मानवीय जीवन में आवश्यकता और श्रेष्ठता पर अपने विचार और रिसर्च पेपर्स रखे जाएंगे। इस अवसर पर भारत के कुछ महत्वपूर्ण चुनिंदा तीर्थों, मंदिरों, वहां के अतिशय क्षेत्रों आदि पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी रिलीज होगी।</p>
<p>फिल्म में इंदौर नगर के पंचायती दिगंबर जैन मंदिर छावनी को भी शामिल किया गया। भारत के लिए इस कार्य का पटकथा लेखन एवं फिल्मांकन, डायरेक्शन इंदौर की पुष्पा पांड्या (छावनी समाज के पूर्व अध्यक्ष स्व. मूलचंदजी पांड्या के भाई, स्व क्रांति कुमार गुना वाले की धर्मपत्नी) का है। पुष्पा पांड्या ने,बावनगजा, कुंडलपुर, श्रवणबेलगोला आदि के साथ इंदौर में गोम्मटगिरि, ह्रिंकार गिरी, ढाई द्वीप, कांच मंदिर, समवशरण मंदिर आदि को भी अपनी पटकथा एवं डायरेक्शन में शामिल कर वीडियो शूट किया है। इसके निर्माता अमेरिका निवासी डॉ. मनोज जैन परिवार हैं।</p>
<p>डॉक्यूमेंट्री वीडियोग्राफी फिल्म आदि का कार्य सिद्धि विनायक क्रिएशन के नीलेश व्यास, नीति व्यास एवं उनकी टीम ने भारत में जगह-जगह घूम कर किय है। इसी सिलसिले में पुष्पा पांड्या, श्री सिद्धि विनायक क्रिएशन टीम, वीडियोग्राफर आदि के साथ अतिशय क्षेत्र छावनी के श्री दिगंबर जैन पंचायती मंदिर श्री नेमीनाथ जिनालय में आई। जिनालय की भव्यता एवं श्री पार्श्वनाथ भगवान के अतिशय एवं दर्शन से पूरी टीम प्रभावित हुई और यह जानकर आश्चर्य चकित हुई कि श्री पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमा जो खंडित हो गई थी, वह कैसे जुड़ गयी।</p>
<p>जब यह बताया गया कि श्रमण संस्कृति के चर्या शिरोमणि आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महामुनिराज के प्रयाग शिष्य श्रुत संवेगी मुनि श्री आदित्य सागर जी, अप्रमित सागर जी, सहज सागर संसघ के मंत्रों की साधना से श्री पार्श्वनाथ भगवान वापस अपने मूल स्वरूप में आ गए तो सभी प्रतिमाओं के फोटो एवं वीडियो लिए गए। जिनालय की स्थापना से लेकर वर्तमान के सभी कार्यों की विकासगाथा विशेषकर पार्श्व नाथ भगवान के अतिशय आदि की जानकारी ट्रस्ट के महामंत्री देवेंद्र सेठी एवं दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद इंदौर के पूर्व अध्यक्ष इंजी. जैन कैलाश वेद ने दी।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/atishay_mandir_of_indore_has_been_included_in_the_special_documentary/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>प्राचीन ‘प्राकृत भाषा’ पर आधारित :  रिसर्च डॉक्युमेंट्री फिल्म संस्कार भारती के सिने टॉकीज कार्यक्रम में दिखाई गई </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/research_documentary_-film_-screened-in-sanskar-bharti_cine_-talkies_-program/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/research_documentary_-film_-screened-in-sanskar-bharti_cine_-talkies_-program/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 Feb 2023 10:25:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Arihant Kumar Jain जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[Documentary]]></category>
		<category><![CDATA[jain samaj]]></category>
		<category><![CDATA[Mumbai]]></category>
		<category><![CDATA[Prakrit language]]></category>
		<category><![CDATA[Sanskar Bharti]]></category>
		<category><![CDATA[Shravanabelola]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[अरिहन्त कुमार जैन]]></category>
		<category><![CDATA[जैन धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[डाक्युमेंट्री]]></category>
		<category><![CDATA[प्राकृत भाषा]]></category>
		<category><![CDATA[मुंबई]]></category>
		<category><![CDATA[श्रवणबेलोला]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[संस्कार भारती]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=38873</guid>

					<description><![CDATA[मुंबई। संस्कार भारती कोकण प्रान्त ‘सिने सृष्टि भारतीय दृष्टि’ के तत्वावधान में प्रति माह के अंतिम शनिवार को आयोजित किए जा रहे सिने जगत से जुड़े कार्यक्रमों की श्रृंखला के अंतर्गत आठवां सप्ताह था, जिसमें डॉ. अरिहन्त कुमार जैन द्वारा निर्देशित ‘प्राकृत भाषा &#8211; एक प्राचीन समृद्ध परम्परा’ नामक एक रिसर्च डॉक्यूमेंट्री फिल्म की स्क्रीनिंग [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मुंबई।</strong> संस्कार भारती कोकण प्रान्त ‘सिने सृष्टि भारतीय दृष्टि’ के तत्वावधान में प्रति माह के अंतिम शनिवार को आयोजित किए जा रहे सिने जगत से जुड़े कार्यक्रमों की श्रृंखला के अंतर्गत आठवां सप्ताह था, जिसमें डॉ. अरिहन्त कुमार जैन द्वारा निर्देशित ‘प्राकृत भाषा &#8211; एक प्राचीन समृद्ध परम्परा’ नामक एक रिसर्च डॉक्यूमेंट्री फिल्म की स्क्रीनिंग की गयी। यह कार्यक्रम 25 फरवरी 2023 को शाम 6 बजे कला क्षेत्र स्टूडियो, आराम नगर पार्ट 2., कॉटेज नंबर 210. वर्सोवा, (अंधेरी वेस्ट) में आयोजित किया गया। सर्वप्रथम कार्यक्रम का प्रारम्भ संस्कार भारती के वरिष्ठ सदस्य हरि कुलकर्णी, अरुण शेखर एवं डॉ. अरिहन्त जैन ने भारतीय परंपरानुसार दीप प्रज्वलन से किया। तत्पश्चात कल्याणी कुमारी ने सभी का स्वागत करते हुए सभी का परिचय दिया एवं कार्यक्रम की संक्षिप्त जानकारी दी। अरुण शेखर ने डॉ. अरिहन्त जी का परिचय देते हुए, संस्कार भारती के कार्यक्षेत्र पर प्रकाश डाला और वर्तमान समाज के उत्थान में भारतीय सिनेमा की क्या उपयोगिता हो सकती है, उस पर अपने विचार रखे। इसके साथ ही संस्कार भारती कोकण प्रान्त सिने टॉकीज 2022 के कालीना महाविद्यालय में हुए त्रिदिवसीय कार्यक्रम की झलकियां भी दिखाई गईं। इसके पश्चात् रिसर्च डॉक्युमेंट्री फिल्म &#8220;प्राकृत भाषा- एक प्राचीन समृद्ध परंपरा&#8221; को प्रदर्शित किया गया, जो कि कर्नाटक स्थित श्रवणबेलगोला के ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्त्व एवं प्राकृत भाषा पर आधारित है।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-38877" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/WhatsApp-Image-2023-02-27-at-3.52.01-PM.jpeg" alt="" width="1600" height="901" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/WhatsApp-Image-2023-02-27-at-3.52.01-PM.jpeg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/WhatsApp-Image-2023-02-27-at-3.52.01-PM-300x168.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/WhatsApp-Image-2023-02-27-at-3.52.01-PM-1024x577.jpeg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/WhatsApp-Image-2023-02-27-at-3.52.01-PM-768x432.jpeg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/WhatsApp-Image-2023-02-27-at-3.52.01-PM-1536x865.jpeg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/WhatsApp-Image-2023-02-27-at-3.52.01-PM-990x557.jpeg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/WhatsApp-Image-2023-02-27-at-3.52.01-PM-1320x743.jpeg 1320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/WhatsApp-Image-2023-02-27-at-3.52.01-PM-470x264.jpeg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/WhatsApp-Image-2023-02-27-at-3.52.01-PM-640x360.jpeg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/WhatsApp-Image-2023-02-27-at-3.52.01-PM-215x120.jpeg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/WhatsApp-Image-2023-02-27-at-3.52.01-PM-414x232.jpeg 414w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" /></p>
<p><strong>यशोगाथा श्रवणबेलगोला की</strong></p>
<p>श्रवणबेलगोला वह स्थान है, जहां 1000 वर्षों से भी अधिक समय से भगवान गोम्मटेश्वर बाहुबली की 57 फीट ऊंची दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्थित है। यह जैन श्रमण परंपरा एवं संस्कृति का अप्रतिम तीर्थ है, जिसकी यशोगाथा यहां पाए गए शताधिक प्राचीन प्राकृत शिलालेखों में अंकित है। श्रवणबेलगोला के जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चरुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी की प्रेरणा से वहां स्थित &#8216;राष्ट्रीय प्राकृत अध्ययन और अनुसंधान संस्थान&#8217; के द्वारा प्राचीन शिलालेखों, हस्तलिखित पाण्डुलिपियों आदि का संरक्षण एवं संवर्धन का कार्य चल रहा है। कार्यक्रम में उपस्थित फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े जाने-माने विशेषज्ञों ने फिल्म के विषय, स्क्रिप्ट, फिल्मांकन, निर्देशन और प्रस्तुति को एक स्वर में सराहा एवं डॉ. अरिहन्त को इस हेतु बधाई दी। यह फिल्म हिन्दी तथा अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध है तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल्स में भी प्रदर्शित हो चुकी है।</p>
<p><strong>दिया प्रश्नों का समाधान</strong></p>
<p>कार्यक्रम के दूसरे सत्र में प्रश्नोत्तरी चर्चा सत्र प्रारंभ हुआ, जिसमें फिल्म के विषय से संबन्धित प्रश्न पूछे गए, जिनका डॉक्यूमेंट्री के निर्देशक डॉ. अरिहन्त जी ने सारगर्भित समाधान किया । उन्होंने बताया कि प्राकृत भाषा सर्वप्राचीन भाषा है, जो कि अनेक शताब्दियों तक जनभाषा रही है और अनेक भारतीय भाषाओं की जननी है। यह भाषा जिस भी प्रांत में गयी, उस जगह के अनुरूप ढल गई और इसके भी कई प्रकार हो गए। उन्होंने बताया कि कलिंग नरेश सम्राट खारवेल एवं सम्राट अशोक के समय इसे राजभाषा का दर्जा प्राप्त था और यही कारण है कि अशोक के जितने भी शिलालेख हैं, वे प्राकृत भाषा एवं ब्राह्मी लिपि में हैं। साथ ही उन्होंने उड़ीसा स्थित खारवेल के सर्वप्राचीन हाथीगुंफा प्राकृत शिलालेख का प्रमाण देते हुए बताया कि उसमें यह लिखा है कि प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव के पुत्र भरत चक्रवर्ती के नाम पर इस देश का नाम ‘भारतवर्ष’ पड़ा। इसके साथ ही प्राकृत के विपुल साहित्य पर भी चर्चा की और बताया कि ऐसा कोई भी विषय अछूता नहीं है, जिसका सृजन प्राकृत साहित्य में न हुआ हो। कई लोगों के लिए यह पहला अवसर था कि वे प्राकृत भाषा एवं साहित्य से प्रथम बार परिचित हो सके।</p>
<p><strong>एक परिचय</strong></p>
<p>डॉ. अरिहन्त, क.जे. सोमैया इंस्टीट्यूट ऑफ धर्मा स्टडीस, सोमैया विद्याविहार विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। वैश्विक स्तर पर प्राकृत भाषा की समृद्ध परंपरा को पुनः स्थापित करने के उद्देश्य से अङ्ग्रेज़ी में प्रकाशित ‘Prakrit Times International Newsletter’ के आप संपादक हैं । आपके इस अभिनव कार्य के लिए नेशनल मीडिया फ़ाउंडेशन, नई दिल्ली द्वारा हाल ही में आपको ‘नेशनल गौरव अवार्ड’ से सम्मानित किया गया है।</p>
<p><strong>शोध की संभावनाएं</strong></p>
<p>समापन सत्र में श्रीहरि कुलकर्णी ने धन्यवाद ज्ञापित किया और कार्यक्रम की सार्थकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डॉ.अरिहन्त के माध्यम से आज हम सभी प्राकृत भाषा एवं साहित्य के माहात्म्य से करीब से परिचित हो पाये हैं, जिसके विपुल साहित्य पर शोध की अपार संभावनाएं हैं। इस कार्यक्रम में फिल्म, साहित्य, लेखन, अभिनय और रंगभूमि के क्षेत्र से जुड़े कई नामी गिरामी हस्तियां उपस्थित थीं। कार्यक्रम का संचालन कल्याणी कुमारी ने किया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अरुण शेखर, जगदीश निषाद, ज्योति, कल्याणी कुमारी का महत्त्वपूर्ण सहयोग रहा।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/research_documentary_-film_-screened-in-sanskar-bharti_cine_-talkies_-program/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
