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	<title>Diwali &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>भक्ति और समर्पण में कोई विकल्प नहीं होता : मुनिश्री संभवसागरजी ने प्रवचन में भक्ति समर्पण और भक्त की मनःस्थिति का सटीक वर्णन किया  </title>
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		<pubDate>Tue, 09 Dec 2025 10:49:59 +0000</pubDate>
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<p><strong>भक्ति में सिर्फ समर्पण होता है। उसमें कोई विकल्प नहीं होता। जितना आपका भगवान और गुरु के प्रति अनुराग और समर्पण होगा। उतने ही आपके परिणाम निर्मल होंगे और कर्म अपने आप दूर होते चले जाएंगे। यह उदगार मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने मंगलवार को प्रातः प्रवचन सभा में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> विदिशा।</strong> भक्ति में सिर्फ समर्पण होता है। उसमें कोई विकल्प नहीं होता। जितना आपका भगवान और गुरु के प्रति अनुराग और समर्पण होगा। उतने ही आपके परिणाम निर्मल होंगे और कर्म अपने आप दूर होते चले जाएंगे। यह उदगार मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने मंगलवार को प्रातः प्रवचन सभा में व्यक्त किए। मुनिश्री ने कहा कि जिनके प्रति हमारा राग होता है, उनसे कभी कोई गिला सिकवा नहीं होता। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया प्रतिदिन मुनि श्री के प्रवचन 9 बजे से श्री शांतिनाथ जिनालय स्टेशन जैन मंदिर में चल रहे हैं। मुनिश्री ने फिरोजाबाद की नसिया का एक उत्कृष्ट संस्मरण सुनाते हुए कहा कि बात 1975 की है जब आचार्य श्रीविद्यासागरजी महाराज फिरोजाबाद पहुंचे तो वह नए-नए साधु थे और कोई उनका नाम भी नहीं जानता था। नसिया जी के मैनेजर ने जब यह जानकारी सेठ छदामीलाल जी को दी कि कोई युवा आचार्य पधारे हैं और उनके साथ एक क्षुल्लक जी है तो उनके माथे पर बल पड़ गए कि चातुर्मास का समय है। यदि महाराज रूक गये तो? लेकिन जैसे ही उनको यह जानकारी मिली कि यह तो चतुर्थ कालीन चर्या के धारी आचार्य विद्यासागरजी महाराज है तो वह प्रोफेसर नरेंद्र प्रकाश के साथ वहां आए। उन्होंने आचार्य गुरुदेव की चर्या को देखा और उनसे प्रभावित हुए तथा उनसे चातुर्मास के लिए निवेदन कर दिया। चातुर्मास प्रारंभ हो गया तो उनके प्रवचनों से प्रभावित होकर पांडाल भी छोटे पड़ने लगे और प्रतिदिन गुरुदेव की प्रभावना संपूर्ण फिरोजाबाद में फैल गई।</p>
<p><strong> भगवान भी भक्त के धैर्य की परीक्षा लेते हैं</strong></p>
<p>सेठ छदामीलाल जी प्रतिदिन गुरुदेव के पड़गाहन के लिए पहले दिन से ही खड़े होते थे लेकिन, गुरुदेव उनकी ओर देखते तथा मुस्कुराते हुए नसिया जी से बाहर लगभग दो किमी दूर शहर की ओर निकल जाते। ऐसा करके एक माह, दो माह, तीन माह निकल गए, लेकिन सेठजी को पड़गाहन नहीं मिला। कहते हैं कि भगवान भी भक्त के धैर्य की परीक्षा लेते हैं। चातुर्मास समापन होने को आया लेकिन, सेठजी विल्कुल भी आकुल-व्याकुल नहीं थे। उनके धैर्य की परीक्षा थी और उस धैर्य में ऐसे पास हुए कि भगवान महावीर के निर्वाण कल्याणक महोत्सव दीपावली के दिन उन्होंने पड़गाहन कर गुरुदेव को आहार कराया। मुनि श्री ने कहा कि है आप लोगों को इतना धैर्य ? दो तीन दिन होते हैं तो आप लोगों का धैर्य जबाव देने लगता है और तो और गुरुजी पर आरोप लगाने से भी नहीं चूकते, फौरन मुंह से निकल जाता है कि महाराज जी तो चिन्ह-चिन्ह कर जाते हैं, लेकिन सेठजी पहले दिन से ही खड़े हैं लेकिन, परिणामों में कोई आकुलता-व्याकुलता नहीं और भक्ति भाव से खड़े रहे। यही होती है परिणामों की निर्मलता और भक्त की भगवान के प्रति परीक्षा और इसी को कहते है भक्ति भाव और गुरु के प्रति जब समर्पण।</p>
<p><strong>कार्यक्रम की संयोजना समग्र पाठशाला समिति कर रही </strong></p>
<p>जहां पर सिर्फ भक्ति होती है लेकिन, कोई गिला सिकवा नहीं होता। उन्होंने कहा कि जब भी कोई समस्या आए तो णमोकार महामंत्र का स्मरण कर लिया करो। यह महामंत्र आपकी सभी समस्याओं का टूल है तथा णमोकार महामंत्र को आप किसी भी समय पर किसी भी हालत में पड़ सकते हैं। मुनि श्री ने कहा कि ‘षठखंडागम ग्रंथ’ को साक्षात भगवान की दिव्यध्वनि का अंग माना जाता है और इसमें आचार्य पुष्पदंत ने मंगलाचरण के रूप में सबसे पहले णमोकार महामंत्र लिखा है। अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कार्यक्रम की संयोजना समग्र पाठशाला समिति द्वारा की जा रही है। मुनि श्री निस्सीम सागरजी महाराज द्वारा प्रवचन के अंत में प्रश्नमंच का कार्यक्रम प्रतिदिन किया जाता है। सही उत्तर देने वालों को तुरंत पुरस्कृत किया जा रहा है।</p>
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		<title>भिंड दिगंबर जैन सोशल ग्रुप सिटी ने किया भव्य दीपोत्सव कार्यक्रम : समाजजनों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेकर कार्यक्रम को रोचक बनाया  </title>
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		<pubDate>Fri, 24 Oct 2025 12:33:17 +0000</pubDate>
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<p><strong>दीपावली के अवसर पर भिंड दिगंबर जैन सोशल ग्रुप सिटी द्वारा पारिवारिक मिलन समारोह के रूप में दीपोत्सव का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम शहर के तीर्थ स्थल के दिगंबर जैन कीर्ति स्तंभ मंदिर परिसर में 22 अक्टूबर को आयोजित किया गया। <span style="color: #ff0000">भिंड से पढ़िए, सोनल जैन की रिपोर्ट&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भिंड</strong>। दीपावली के अवसर पर भिंड दिगंबर जैन सोशल ग्रुप सिटी द्वारा पारिवारिक मिलन समारोह के रूप में दीपोत्सव का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम शहर के तीर्थ स्थल के दिगंबर जैन कीर्ति स्तंभ मंदिर परिसर में 22 अक्टूबर को आयोजित किया गया। भिंड दीपोत्सव में दिगंबर जैन सोशल ग्रुप सिटी के समस्त दांपत्य सदस्यों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम के अंतर्गत स्वल्पाहार, डांस, कई तरीके के गेम भोजन एवं भगवान की आरती का आनंद लिया गया। दीपोत्सव मुख्य रूप से कार्यक्रम संयोजक ज्योति अतुल जैन, बरखा प्रशांत जैन, प्रेक्षा मुकेश जैन एवं सोनम रिषभ जैन के संयोजन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ अशोक जया जैन द्वारा मंडप उद्घाटन एवं डॉ.जितेंद्र ज्योति जैन द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। मंगलाचरण निष्ठा संजीव गीता जैन एवं मंगलाचरण की भव्य प्रस्तुति बरखा प्रशांत जैन द्वारा की गई। इसके बाद वहां पधारे हुए सभी दान पात्र सदस्यों का तिलक बंधन एवं पट्टिका पहनाकर स्वागत किया गया।</p>
<p>कार्यक्रम में प्रत्येक वर्ग का ध्यान रखा गया। बच्चों के लिए फैंसी ड्रेस, बड़े बच्चों के लिए गेम्स एवं दांपत्य सदस्यों के लिए भी विभिन्न गेम्स का आयोजन किया गया एवं तंबोला गेम एक नए अंदाज में दीपावली की सफाई के रूप में खेला गया। सभी विजय प्रतियोगियों को पुरस्कार प्रदान किए गए। बीच-बीच में कार्यक्रम पोस्ट द्वारा विभिन्न विषयों पर रोचक प्रश्नोत्तरी भी की गई। जिसमें सभी ने बहुत ही उल्लास पूर्वक अपनी सहभागिता प्रदान की। कार्यक्रम की होस्टिंग सोनम रिषभ जैन एवं दर्शी अंशुल आयशा जैन द्वारा की गई। दीपोत्सव में लगभग 170 सदस्यों द्वारा अपनी सहभागिता प्रदान की गई। कीर्ति स्तंभ मंदिर में भगवान की भव्य आरती की गई। सभी दांपत्य सदस्यों द्वारा कार्यक्रम की भूरी-भूरी प्रशंसा की गई और संस्था के अध्यक्ष शैलेंद्र पूनम जैन एवं सचिव अंशुल आयशा जैन द्वारा कीर्ति स्तंभ मंदिर कमेटी सहित सभी का आभार व्यक्त किया गया।</p>
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		<title>त्याग और तपस्या का महापर्व है दीपावली : भीतर ज्ञान, भक्ति और ईश्वर के प्रति प्रेम की अखंड ज्योति जलाने का दिवस है दिवाली </title>
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		<pubDate>Sun, 19 Oct 2025 14:43:50 +0000</pubDate>
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<p><strong>आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज के मुनि श्री गुरुदत्त सागर एवं मुनि श्री मेघ दत्त सागर ने रविवार को अजितनाथ जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि दीपावली जैन धर्म में त्याग और तपस्या का महापर्व है। <span style="color: #ff0000">महरौनी से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>महरौनी।</strong> आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज के मुनि श्री गुरुदत्त सागर एवं मुनि श्री मेघ दत्त सागर ने रविवार को अजितनाथ जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि दीपावली जैन धर्म में त्याग और तपस्या का महापर्व है। इसी दिन भगवान महावीर स्वामी, जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर हैं, को निर्वाण की प्राप्ति हुई थी। साथ ही अमावस्या की सांझ के समय उनके प्रथम गणधर गौतम स्वामी को केवल ज्ञान प्राप्त हुआ था। इसलिए यह पर्व आत्म ज्योति प्रज्ज्वलित करने का प्रतीक है। मुनि श्री ने बताया कि दीपावली के अवसर पर जैन समाज के श्रद्धालु मंदिरों में भगवान महावीर की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं, लाडू चढ़ाते हैं और सायंकाल घर-घर दीप प्रज्ज्वलित कर खुशी मनाते हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में भी दीपावली का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान श्रीराम ने रावण पर विजय प्राप्त कर 14 वर्ष का वनवास पूर्ण करने के बाद अयोध्या लौटकर प्रजाजनों के साथ हर्षोल्लास से दीप जलाए थे।</p>
<p>इसके अतिरिक्त, इसी दिन राजा विक्रमादित्य का राजाभिषेक हुआ था, भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था और महाभारत काल में पांडवों ने 12 वर्ष के वनवास के बाद हस्तिनापुर लौटकर दीपोत्सव मनाया था। मुनि श्री ने कहा कि दीपावली केवल बाहरी दीपक जलाने का त्योहार नहीं, बल्कि अपने भीतर ज्ञान, भक्ति और ईश्वर के प्रति प्रेम की अखंड ज्योति जलाने का दिवस है। धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएँ उपस्थित रहीं। जानकारी के अनुसार, 20 अक्टूबर को अजितनाथ जैन मंदिर में चातुर्मास समापन एवं क्षमावाणी महोत्सव का आयोजन किया जाएगा।</p>
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		<title>भगवान महावीर स्वामी के 2552वें निर्वाणोत्सव पर विशेष : दीपावली से शुरू हुआ था भारत का सबसे प्राचीन संवत </title>
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		<pubDate>Sun, 19 Oct 2025 03:10:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन परंपरा में दिवाली पर्व का विशेष महत्व है। यह दिन भगवान महावीर स्वामी के निर्वाणोत्सव के रूप में मनाया जाता है। ईसा से 527 वर्ष पूर्व कार्तिक कृष्ण अमावस्या को भगवान महावीर का निर्वाण हुआ था। इसके अगले दिन, कार्तिक शुक्ल एकम से जैन परंपरा में नए वर्ष की शुरुआत मानी जाती है। इस [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जैन परंपरा में दिवाली पर्व का विशेष महत्व है। यह दिन भगवान महावीर स्वामी के निर्वाणोत्सव के रूप में मनाया जाता है। ईसा से 527 वर्ष पूर्व कार्तिक कृष्ण अमावस्या को भगवान महावीर का निर्वाण हुआ था। इसके अगले दिन, कार्तिक शुक्ल एकम से जैन परंपरा में नए वर्ष की शुरुआत मानी जाती है। इस दिन दीपक जलाने की परंपरा भी जुड़ी हुई है। दीपक केवल बाहरी अंधकार को मिटाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मानव अंतर में व्याप्त अज्ञान और निराशा को दूर कर जीवन में ज्ञान, आशा और आलोक का प्रतीक बनता है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए डॉ. सुनील जैन संचय का विशेष आलेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>भारत धर्मप्रधान देश है और अहिंसा प्रधान संस्कृति का प्रतीक है। हमारे त्योहार संस्कृति एवं सभ्यता का दर्पण हैं और इनका संबंध प्राचीन महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ा होता है। यहां पर धार्मिकता से जुड़े अनेक पर्व मनाए जाते हैं। दीपावली पर्व पूरे देश में बड़े उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है। अधिकतर धर्म-संप्रदायों में इस पर्व को मनाने का कोई न कोई उद्देश्य अवश्य होता है।</p>
<p><strong>भारत में संवतों की विविधता</strong></p>
<p>भारत में वीर निर्वाण संवत, विक्रम संवत, शक संवत, शालिवाहन संवत, ईस्वी संवत, गुप्त संवत, हिजरी संवत आदि कई संवत प्रचलित हैं। इनमें से वीर निर्वाण संवत सबसे प्राचीन है। यह हिजरी, विक्रम, ईस्वी, शक आदि संवतों से भी अधिक पुराना है।</p>
<p><strong>जैन परंपरा में दीपावली</strong></p>
<p>जैन दर्शन में दीपावली पर्व का इतिहास अनूठा और तथ्यपरक है। यह पर्व भगवान महावीर स्वामी से जुड़ा हुआ है। ईसा से 527 वर्ष पूर्व कार्तिक कृष्ण अमावस्या को दीपावली के दिन ही भगवान महावीर का निर्वाण हुआ। इसके अगले दिन कार्तिक शुक्ल एकम से भारत का सबसे प्राचीन संवत ‘वीर निर्वाण संवत’ प्रारंभ हुआ। जैन परंपरा में इसी दिन से नए वर्ष की शुरुआत मानी जाती है।</p>
<p><strong>वीर निर्वाण संवत का प्रमाण</strong></p>
<p>वीर निर्वाण संवत की प्रामाणिकता सुप्रसिद्ध पुरातत्ववेत्ता डॉ. गौरीशंकर हीराचंद ओझा ने वर्ष 1912 में अजमेर जिले के बडली गाँव (भिनय तहसील, राजस्थान) से प्राप्त प्राचीन प्राकृत ब्राह्मी शिलालेख से सिद्ध की। इस शिलालेख में लिखा है “84 वीर संवत”, जो भगवान महावीर निर्वाण के 84 वर्ष बाद लिखा गया। यह शिलालेख अजमेर के राजपूताना संग्रहालय में सुरक्षित है।</p>
<p>शिलालेख की पहली पंक्ति में “वीर” शब्द भगवान महावीर स्वामी को संबोधित है और दूसरी पंक्ति में “निर्वाण से 84 वर्ष” अंकित है। ईसा से 527 वर्ष पूर्व निर्वाण से 84 वर्ष घटाने पर 443 वर्ष आता है, जो इस शिलालेख के लिखे जाने का वर्ष है।</p>
<p><strong>दीपावली और जीवन का आलोक</strong></p>
<p>दीपावली पर जलने वाले दीपकों की संख्या हजारों में होती है। यह बाहरी अंधकार को मिटाता है, लेकिन अंतर का अंधकार यथावत् रहता है। इस दीपावली पर एक दीपक इस अनुभूति के साथ जलाना चाहिए कि आत्मा की ज्योति मरणशील देह में मुस्कुराए।</p>
<p><strong>जैन परंपरा में नया वर्ष</strong></p>
<p>जैन परंपरा में भगवान महावीर स्वामी के निर्वाणोत्सव के अगले दिन से नए वर्ष की शुरुआत मानी जाती है।</p>
<p>“यद्यपि युद्ध नहीं कियो, नाहिं रखे असि-तीर,</p>
<p>परम अहिंसक आचरण, तदपि बने महावीर।”</p>
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		<title>दीपावली से पूर्व दो दिन पुष्य नक्षत्र बाजार रहेगा गुलजार : दो दिन बाजार में जमकर होगी खरीदारी, उम्मीदें उफान पर  </title>
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		<pubDate>Sat, 11 Oct 2025 13:02:07 +0000</pubDate>
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<p><strong>देश में दीपावली का विशेष महत्व है। इस सबसे बड़े त्योहार पर बाजारों में खूब खरीदारी होती है। इस बार दीपावली से पूर्व दो दिन पुष्य नक्षत्र होने के कारण जमकर खरीदारी होगी। कुछ नक्षत्र ऐसे होते हैं, जिनमें किया गया कार्य शुभ, आनंद देनेवाला होता हैं और जीवन की वृद्धि कराता है। उन्हीं 27 नक्षत्रों में एक पुष्य नक्षत्र है। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> देश में दीपावली का विशेष महत्व है। इस सबसे बड़े त्योहार पर बाजारों में खूब खरीदारी होती है। इस बार दीपावली से पूर्व दो दिन पुष्य नक्षत्र होने के कारण जमकर खरीदारी होगी। कुछ नक्षत्र ऐसे होते हैं, जिनमें किया गया कार्य शुभ, आनंद देनेवाला होता हैं और जीवन की वृद्धि कराता है। उन्हीं 27 नक्षत्रों में एक पुष्य नक्षत्र है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ.हुकुमचंद जैन ने बताया कि दीपावली से पहले आने वाला पुष्य नक्षत्र इस साल मंगलवार 14 और बुधवार 15 अक्टूबर को आ रहा है। यह नक्षत्र खरीदारी के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है, खासकर सोना, चांदी, वाहन और संपत्ति खरीदने के लिए।</p>
<p>जैन ने बताया इस नक्षत्र में की गई खरीदारी से घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य का वास होता है। डॉ. जैन ने पुष्य नक्षत्र का महत्व बताते हुए कहा कि पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा माना जाता है और यह धन और समृद्धि का प्रतीक भी। इस नक्षत्र में की गई खरीदारी लंबे समय तक उपयोग में रहती है और इससे घर में बरकत आती है। पुष्य नक्षत्र का संबंध देवी लक्ष्मी से है, जो धन और समृद्धि की देवी हैं। इसलिए लक्ष्मी पूजन से पहले वाला पुष्य नक्षत्र विशेष महत्व रखता है।</p>
<p><strong>खरीदारी के लिए शुभ मुहूर्त</strong></p>
<p>पुष्य नक्षत्र के दौरान खरीदारी के लिए कई शुभ मुहूर्त हैं। 14 अक्टूबर मंगलवार को प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत की चौघड़िया) सुबह 9.15 से दोपहर 1.33 बजे तक। अपराह्न मुहूर्त (शुभ) दोपहर 3 से शाम 4.26 बजे तक, सायाह्न मुहूर्त (लाभ) शाम 7.26 से रात 9 बजे तक। रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर)। रात 10.33 से सुबह 3.14 बजे तक, 15 अक्टूबर बुधवार को शुभ की चौघड़िया प्रातः 10.41 बजे से 12.07 बजे तक। चार एवं लाभ की चौघड़िया दोपहर 2.58 बजे से 5.50 बजे शाम तक रात्रि में शुभ, अमृत एवं चर की चौघड़िया शाम 7.24 से 12.07 बजे रात्रि तक।</p>
<p><strong>पुष्य नक्षत्र में खरीदने योग्य वस्तुएं</strong></p>
<p>जैन ने कहा इस नक्षत्र में आप निम्नलिखित वस्तुओं की खरीदारी कर सकते हैं ’सोना और चांदी’। धन और समृद्धि का प्रतीक वाहन। नए वाहन की खरीदारी के लिए शुभ संपत्तिः जमीन या मकान खरीदने के लिए उत्तम। बहीखाता। नए बहीखाते शुरू करने के लिए शुभ, फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक आइटमः घर के लिए आवश्यक वस्तुएं पुष्य नक्षत्र में खरीदारी करने से घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य का वास होता है। इसलिए, दीपावली से पहले आने वाले इस नक्षत्र का लाभ उठाएं और अपनी जरूरत की चीजें खरीदें।</p>
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		<title>आचार्य श्री शांतिसागर मुनि महाराज की स्मृति में होगा भारत सरकार द्वारा डाक टिकट विमोचन समारोह : हंबुजा जैन मठ, हुंचा में आयोजित कार्यक्रम में प्रमुख हस्तियां होंगी उपस्थित </title>
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		<pubDate>Tue, 12 Nov 2024 09:06:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारत सरकार के संचार मंत्रालय और भारतीय डाक सेवा की ओर से एक विशेष अवसर पर आचार्य श्री शांतिसागर मुनि महाराज के सम्मान में एक स्मारक डाक टिकट जारी किया जाएगा। यह ऐतिहासिक डाक टिकट विमोचन समारोह हंबुजा जैन मठ, हुंचा, शिवमोगा, कर्नाटका में 13 नवंबरको आयोजित किया जाएगा। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230; हुंचा। भारत [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भारत सरकार के संचार मंत्रालय और भारतीय डाक सेवा की ओर से एक विशेष अवसर पर आचार्य श्री शांतिसागर मुनि महाराज के सम्मान में एक स्मारक डाक टिकट जारी किया जाएगा। यह ऐतिहासिक डाक टिकट विमोचन समारोह हंबुजा जैन मठ, हुंचा, शिवमोगा, कर्नाटका में 13 नवंबरको आयोजित किया जाएगा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>हुंचा।</strong> भारत सरकार के संचार मंत्रालय और भारतीय डाक सेवा की ओर से एक विशेष अवसर पर आचार्य श्री शांतिसागर मुनि महाराज के सम्मान में एक स्मारक डाक टिकट जारी किया जाएगा। यह ऐतिहासिक डाक टिकट विमोचन समारोह हंबुजा जैन मठ, हुंचा, शिवमोगा, कर्नाटका में 13 नवंबरको आयोजित किया जाएगा।</p>
<p><strong>मुख्य अतिथि और सम्माननीय हस्तियां</strong></p>
<p>इस भव्य समारोह में विभिन्न प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहेंगी। समारोह के मुख्य अतिथि प्रहलाद जोशी, केंद्रीय मंत्री, नए और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार होंगे। इसके अतिरिक्त, समारोह में विशिष्ट अतिथियों के रूप में मदू बंगारप्पा, कर्नाटका सरकार के प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा मंत्री, डी. सुधाकर, कर्नाटका सरकार के योजना, कार्यक्रम समन्वय और संख्यात्मक विभाग के कैबिनेट मंत्री, बी.वाई. राघवेंद्र, और अरगा ज्ञानेंद्र, सांसद, शिवमोगा, कर्नाटक भी उपस्थित रहेंगे।</p>
<p>समारोह के विशेष अतिथि के तौर पर डी. सुरेंद्र कुमार, धर्मस्थला, राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय जैन मिलन भी इस कार्यक्रम में शिरकत करेंगे।</p>
<p><strong>स्मारक डाक टिकट का विमोचन  </strong></p>
<p>इस आयोजन में आचार्य श्री शांतिसागर मुनि महाराज के योगदान और उनकी आध्यात्मिक धरोहर को सम्मानित करते हुए भारतीय डाक सेवा द्वारा एक विशेष स्मारक डाक टिकट जारी किया जाएगा। डाक टिकट का विमोचन श्री एस. राजेंद्र कुमार, कर्नाटका सर्कल के मुख्य पोस्टमास्टर जनरल, द्वारा किया जाएगा।</p>
<p><strong>समारोह का समय और स्थान  </strong></p>
<p>यह विशेष कार्यक्रम 13 नवंबर 2024, बुधवार को दोपहर 2:00 बजे से हंबुजा जैन मठ, हुंचा, शिवमोगा, कर्नाटका में आयोजित होगा। इस ऐतिहासिक अवसर पर बड़ी संख्या में धार्मिक और सामाजिक कार्यकर्ता तथा स्थानीय निवासी भाग लेंगे। समारोह के दौरान, आचार्य श्री शांतिसागर मुनि महाराज के योगदान और उनकी धार्मिक शिक्षाओं पर प्रकाश डाला जाएगा।</p>
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		<title>अहंकार रहित, सादगी पसंद और विनम्र व्यक्ति : दो हजार लोगों की उपस्थिति में एम.के. जैन का अमृत महोत्सव संपन्न </title>
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		<pubDate>Sun, 10 Nov 2024 11:26:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगंबर जैन समाज के वरिष्ठ समाजसेवी और दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के परम संरक्षक एम.के. जैन का 75 वर्ष की आयु पूर्णता पर परिवार द्वारा निर्वाणा रिसॉर्ट में आयोजित अमृत महोत्सव सानंद संपन्न हुआ। इस अवसर पर दो हजार से अधिक लोगों की उपस्थिति में महोत्सव का आयोजन किया गया। विभिन्न संस्थाओं, मित्रों, शुभचिंतकों [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दिगंबर जैन समाज के वरिष्ठ समाजसेवी और दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के परम संरक्षक एम.के. जैन का 75 वर्ष की आयु पूर्णता पर परिवार द्वारा निर्वाणा रिसॉर्ट में आयोजित अमृत महोत्सव सानंद संपन्न हुआ। इस अवसर पर दो हजार से अधिक लोगों की उपस्थिति में महोत्सव का आयोजन किया गया। विभिन्न संस्थाओं, मित्रों, शुभचिंतकों और समाजजनों ने जैन का माला, शाल, श्रीफल और अभिनंदन पत्र देकर सम्मान किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> दिगंबर जैन समाज के वरिष्ठ समाजसेवी और दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के परम संरक्षक एम.के. जैन का 75 वर्ष की आयु पूर्णता पर परिवार द्वारा निर्वाणा रिसॉर्ट में आयोजित अमृत महोत्सव सानंद संपन्न हुआ। इस अवसर पर दो हजार से अधिक लोगों की उपस्थिति में महोत्सव का आयोजन किया गया। विभिन्न संस्थाओं, मित्रों, शुभचिंतकों और समाजजनों ने जैन का माला, शाल, श्रीफल और अभिनंदन पत्र देकर सम्मान किया।</p>
<p>समारोह में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विधायक रमेश मेंदोला, गोलू शुक्ला, पूर्व विधायक संजय शुक्ला सहित दिगंबर जैन समाज के भरत मोदी, सामाजिक संसद के अध्यक्ष राजकुमार पाटोदी, महामंत्री सुशील पांड्या, जैन समाज के राष्ट्रीय नेता हंसमुख गांधी, वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. जैनेंद्र जैन, नरेंद्र जैन (पप्पाजी), राजीव जैन (बंटी भैया), पुलक चेतना मंच के वरिष्ठ प्रदीप बडजात्या, शिक्षाविद स्वप्निल कोठारी, छत्रपति नगर जैन समाज के अध्यक्ष भूपेंद्र जैन, कॉलोनाइजर रमेश जैन, नवीन आनंद गोधा, धर्मेंद्र पाटनी, संजय अहिंसा, अजय मिंटा और अन्य समाज श्रेष्ठि उपस्थित थे।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-69543" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241110-WA0007.jpg" alt="" width="1280" height="960" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241110-WA0007.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241110-WA0007-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241110-WA0007-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241110-WA0007-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241110-WA0007-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241110-WA0007-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241110-WA0007-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241110-WA0007-990x743.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं से जुड़े</strong></p>
<p>समारोह के दौरान धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने उपस्थित समाजजनों से एम.के. जैन के व्यक्तित्व पर विचार मांगे। सामाजिक संसद के अध्यक्ष राजकुमार पाटोदी और महामंत्री सुशील पांड्या, अंजय मिंटा और शेखर छाबड़ा ने कहा कि जैन साहब दिखने में साधारण हैं, लेकिन उनका व्यक्तित्व असाधारण है और धर्म समाज के प्रति उनका समर्पण अद्वितीय है। बीड़ी वाला परिवार के वरिष्ठ सदस्य नरेंद्र जैन (पप्पाजी) और राजीव जैन (बंटी भैया) ने जैन को समाज हित चिंतक बताया और कहा कि इस उम्र में भी वे विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं से जुड़े हुए हैं, जो उनकी समाज सेवा के प्रति सक्रियता को दर्शाता है। समाजसेवी डॉ. जैनेंद्र जैन ने कहा कि जैन लक्ष्मी पुत्र होने के बावजूद अहंकार रहित, सादगी पसंद और विनम्र व्यक्ति हैं, जिनके व्यक्तित्व में अपनों से हंसना और परायों में अपनापन बोने की विशेषता है।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-69544" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241110-WA0006.jpg" alt="" width="574" height="1280" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241110-WA0006.jpg 574w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241110-WA0006-135x300.jpg 135w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241110-WA0006-459x1024.jpg 459w" sizes="(max-width: 574px) 100vw, 574px" />पुलक चेतना मंच के प्रमुख प्रदीप बडजात्या ने कहा कि महेंद्र भाई ने समाज की एकता के पक्षधर के रूप में अपनी विनम्रता, सरल स्वभाव और मधुर वाणी से समाज में विशिष्ट स्थान प्राप्त किया है। वे हम सब के लिए सम्माननीय हैं। इस कार्यक्रम का आभार श्री एम.के. जैन के पुत्र मधुर जैन ने व्यक्त किया और एम.के. जैन के दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना की।</p>
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		<title>श्रीफल जैन न्यूज का आज का इवनिंग बुलेटिन : सर्दियों में योग और आहार के जरिए बच सकते हैं बीमारियों से </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 09 Nov 2024 15:18:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आप देख रहे हैंं श्रीफल जैन न्यूज का ईवनिंग बुलेटिन। आप सभी का स्वागत है, मैं हूं रेखा जैन तो आज आपको बताएंगे कैसे योग के माध्यम से सर्दी में होने वाली बीमारियों से बच सकते हैं और इसके साथ ही हैं कुछ और खास खबरें भी&#8230;&#8230;&#8230;&#8230; 1&#8230;&#8230;&#8230;.. लोकेशन इंदौर रिपोर्टर रेखा जैन सर्दियों के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आप देख रहे हैंं श्रीफल जैन न्यूज का ईवनिंग बुलेटिन। आप सभी का स्वागत है, मैं हूं रेखा जैन तो आज आपको बताएंगे कैसे योग के माध्यम से सर्दी में होने वाली बीमारियों से बच सकते हैं और इसके साथ ही हैं कुछ और खास खबरें भी&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;</strong></p>
<hr />
<p><iframe title="Evening bulletin 9।ठंडी में कैसा योगा करें। हुमचा में इन्द्र ध्वज विधान।उषा ठाकुर द्वारा इनका सम्मान" width="1320" height="743" src="https://www.youtube.com/embed/kFVMyIYWJWU?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" referrerpolicy="strict-origin-when-cross-origin" allowfullscreen></iframe></p>
<p>1&#8230;&#8230;&#8230;..</p>
<p>लोकेशन इंदौर</p>
<p>रिपोर्टर रेखा जैन</p>
<p>सर्दियों के मौसम में शरीर को स्वस्थ रखने के लिए योगासन और प्राणायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करना अत्यंत फायदेमंद होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, सूर्य नमस्कार सबसे प्रभावी आसन है, जो रक्त संचार को बढ़ाता है और शरीर में गर्मी का संचार करता है। इसके साथ-साथ भस्तिका प्राणायाम इम्युनिटी को मजबूत करता है और सर्दी-खांसी से बचाव में मदद करता है। सही आहार, जैसे हरी सब्जियां और विटामिन डी से भरपूर सूर्य की किरणें भी स्वास्थ्य को बेहतर बनाती हैं। कालानी नगर निवासी योग शिक्षिका रचना बागरेचा ने बताया कि इन दिनों सूर्य नमस्कार, जलनेति, ताड़ासन, भुजंगासन, उत्कटासन, धनुरासन, पश्चिमोत्तान आसन और प्राणायाम करना विशेष लाभकारी है।</p>
<p>Slug &#8211; योगासन, प्राणायाम और ध्यान के साथ-साथ सही आहार और नियमित व्यायाम से हम सर्दियों में रह सकते हैं स्वस्थ</p>
<p>2&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;..</p>
<p>लोकेशन श्री होम्बुजा(कर्नाटक)</p>
<p>रिपोर्टर कमलेश जैन</p>
<p>श्री होम्बुजा(कर्नाटक) में 13 नवंबर से 20 नवंबर तक जगतगुरु स्वस्ति श्री डॉ. देवेंद्र कीर्ति भट्टारक महास्वामीजी के नेतृत्व में श्री इंद्रध्वज महामंडल विधान का आयोजन किया जा रहा है। आप को बता दें कि श्री होम्बुजा(कर्नाटक) में यह विधान पहली बार होने जा रहा हैं। इस विधान सौधर्म इंद्र- इंद्राणी बने का लाभ गुवाहाटी निवासी चैनरूप शारदा बगड़ा परिवार को मिलेगा। 13 नवंबर को सुबह 7 बजे इंद्रप्रतिष्ठा, ध्वजारोहण, नित्याभिषेक, मंडप उद्घाटन, विधान, धर्म सभा, आरती, जाप, अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 14 से 19 नवंबर तक सुबह नित्य अभिषेक, विधान, धार्मिक सभा, आरती, जाप अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। 20 नवंबर को श्री जिन अभिषेक, विधान, महायज्ञ, हवन, विसर्जन, रथ उत्सव और श्री क्षेत्र पर दीपोत्सव का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।</p>
<p>Slug &#8211; जगतगुरु स्वस्ति श्री डॉ. देवेंद्र कीर्ति भट्टारक महास्वामीजी के नेतृत्व में श्री इंद्रध्वज महामंडल विधान का आयोजन</p>
<p>3&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;</p>
<p>लोकेशन इंदौर</p>
<p>रिपोर्टर</p>
<p>इंदौर जैन समाज के तिलक नगर निवासी राजेश को विधायक उषा ठाकुर द्वारा सम्मानित किया गया। आप को बता दें कि यह सम्मान उन्हें नगर सुरक्षा समिति में अच्छा काम के लिए सम्मानित किया गया है। कोरोना के समय में भी इन्होंने सराहनीय कार्य किया था। तब भी उन्हें सम्मानित किया गया था। श्रीफल जैन न्यूज भी उन्हें बधाई देता है और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता है।</p>
<p>Slug-तिलक नगर निवासी राजेश जैन को विधायक उषा ठाकुर ने किया सम्मानित</p>
<p>आज के लिए इतना ही। कल पुनः इसी समय आप से मुलाकात होगी। आप के पास भी जैन धर्म से संबंधित कोई भी खबर संबंधित हो तो हमें 9460155006 अवश्य भेजें</p>
<p>जय जिनेन्द्र</p>
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		<title>श्रीफल जैन न्यूज का आज का ईवनिंग बुलेटिन : धार्मिक शिक्षा और संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत </title>
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		<pubDate>Fri, 08 Nov 2024 14:11:57 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आप देख रहे हैंं श्रीफल जैन न्यूज का ईवनिंग बुलेटिन। आप सभी का स्वागत है, मैं हूं रेखा जैन तो आइए नजर डालते हैं एक खास सर्वे पर, जिसमें जो आंकड़े सामने आए हैं, वे धर्म, संस्कार-संस्कृति के लिहाज से चिंता जनक है और समाज संस्थाओं को उस दिशा में काम करने की आवश्यकता है, [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आप देख रहे हैंं श्रीफल जैन न्यूज का ईवनिंग बुलेटिन। आप सभी का स्वागत है, मैं हूं रेखा जैन तो आइए नजर डालते हैं एक खास सर्वे पर, जिसमें जो आंकड़े सामने आए हैं, वे धर्म, संस्कार-संस्कृति के लिहाज से चिंता जनक है और समाज संस्थाओं को उस दिशा में काम करने की आवश्यकता है, <span style="color: #ff0000">इसके साथ ही हैं कुछ और खास खबरें भी&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>https://youtu.be/51piBqzgeOs?feature=shared </strong></p>
<p>1&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;</p>
<p>लोकेशन इंदौर</p>
<p>स्टोरी &#8211; रेखा संजय जैन संपादक</p>
<p>सुनते हैं और बार-बार दिखाया जाता है कि मंदिरों में श्रावकों की संख्या बढ़ रही है। यह कितना सच है, इस पर गहराई से अध्ययन करें तो दो चीजें सामने आती हैं एक संख्या तो बढ़ी है लेकिन आस्था-विश्वास कम हुआ है। यह बात एक सर्वे में सामने आई है। यह सर्वे अलग-अलग शहर में अलग-अलग उम्र, अलग-अलग क्षेत्र में काम करने वालों 300 व्यक्तियों पर हुआ। उनसे पूछे गए सवालों के आधार पर यह परिणाम समाने आया कि धर्म सभा, धर्म क्षेत्र में संख्या बढ़ी पर आस्था विश्वास, त्याग में कमी आई है। यह सर्वे श्रीफल पत्रिका ने 2021 में करवाया था। सर्वे में पूछा कहा था कि मंदिर क्यों जाते हो तो जो उत्तर सामने आया वह प्रतिशत में आपको बता रहे हैं&#8230;</p>
<p>* माता पिता में कहने पर 30 %</p>
<p>* ग्रह नक्षत्र की शांति के लिए 18 %</p>
<p>* साधु संतों के आकर्षण के कारण 9 %</p>
<p>* परिवार की परम्परा का निर्वाह करने किए 11%</p>
<p>* साधु संतों के नियम देने के कारण 5%</p>
<p>* प्रभु का स्मरण करने से कोई काम होगा तब 15 %</p>
<p>* मनुष्य भव का कर्तव्य है यही से सुख शांति मिलती है 10%</p>
<p>* अन्य कार्य भी बताया 2%</p>
<p>सर्वे में जो आंकड़े आए हैं वह इसलिए भी सत्य है कि आज दिखाई दे रहा है। अभिषेक, पूजन, दर्शन करने वाले कितने मिलते हैं मंदिरों में और समय-समय पर कार्यक्रम होते हैं तो संख्या एकदम से बढ़ जाती है या अपनी पसंद के साधु-संत आते हैं तो संख्या बढ़ जाती है।</p>
<p>जो मंदिर जाते हैं उनसे त्याग, नियम को लेकर पूछा और जो उत्तर सामने आए, उसे प्रतिशत में आप को बता रहे हैं&#8230;</p>
<p>* रात्रि भोजन त्याग 15 %</p>
<p>* अष्टमूलगुण का पालन 10 %</p>
<p>* व्रत नियम 5%</p>
<p>* महाराज साहब में ,रात्रि भोजन आदि का त्याग करवा दिया, कुछ समय का समय पूरा होते ही शुरू कर दूंगा 20%</p>
<p>* कुछ नियम नहीं, मात्र मंदिर जाते हैं 45%</p>
<p>* स्वाध्याय करने वालों की संख्या 5%</p>
<p>जैन धर्म के इतिहास के बारे में पूछा तो मात्र 8 % लोगों सही जवाब दिया, बाकी 98 प्रतिशत लोग जैन धर्म का इतिहास ही नहीं जानते हैं</p>
<p>इन आंकड़ों को जानने के बाद जब वर्तमान में एक नजर डाली कि कितनी संस्थाएं धर्म के अध्ययन पर उत्साह से फोकस करती हैं और आधुनिक साधनों से पढ़ाती हैं। तो मात्र एक संस्थान दक्षिण भारत महासभा इस काम में आगे है, बाकी की संस्थाएं मात्र विभाग खोल कर बैठी हैं और जैसा हो रहा, वैसा कर रही हैं।</p>
<p>भारत में लगभग 9465 जैन मंदिर हैं, उनमें मात्र 1200 के लगभग में पाठशाला शुरू हुई, बाकी मंदिरों साप्ताहिक, मासिक, अन्य समय-समय पर शिविर आदि आयोजित करते हैं।</p>
<p>इस सब आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि हम सब को भीड़ दिखाई देती है उसमें आस्था, श्रद्धा वाले कम हैं और कोई न कोई अन्य कार्य वाले अधिक हैं।</p>
<p>इन आंकड़ों को कम करने के लिए और आस्था, श्रद्धा को बढ़ाने के लिए कुछ ऐसा करने की आवश्यकता है।</p>
<p>* जैन धर्म के अध्ययन और अनुसंधान के लिए एक समर्पित संस्थान की स्थापना।</p>
<p>* प्रत्येक परिवार में धार्मिक शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए पाठशाला का आयोजन।</p>
<p>* डिजिटल माध्यम से जैन संस्कृति और शिक्षाओं का प्रसार।</p>
<p>* जैन धर्म के मूल तत्वों का गहराई से अध्ययन।</p>
<p>* विभिन्न धार्मिक आयोजनों और कार्यक्रमों का सुनियोजित प्रारूप तैयार करना।</p>
<p><strong>यह करने से लाभ</strong></p>
<p>-जैन संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाना।</p>
<p>-धार्मिक शिक्षा और संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना।</p>
<p>-समुदाय के सदस्यों को एकजुट करना और सहयोग को प्रोत्साहित करना</p>
<p>आज इंटरनेट पर भी आधी- अधूरी जानकारी मिल रही है, वैसे भी युवा पीढ़ी धर्म के इतिहास को सही नहीं जान पा रही है।</p>
<p>जानकारी के साथ श्राद्ध और आस्था बने, इसके लिए पुराने समय जो आश्रम विद्या की पद्धति थी, उसे समझना होगा। उसके लिए अब सोशल मीडिया के माध्यम से पाठशाला, घर-घर पाठशाला, धर्म के कॉल सेंटर तैयार करने होंगे। विज्ञान धर्म का ही हिस्सा है, यह बताना होगा।</p>
<p>Slug &#8211; मंदिर जाने वाले बढ़े लेकिन आस्था और श्रद्धा हुई कम</p>
<p>2&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;..</p>
<p>लोकेशन दिल्ली</p>
<p>रिपोर्टर &#8211; मनीष जैन</p>
<p>भारत में कितने नागरिक हैं, इसकी जनगणना होनी है। उनका नाम, जन्म, तारीख, शहर&#8230;ऐसी कई जानकारी के साथ एक कॉलम आएगा जाति का, वहां आप सब को जैन लिखना चाहिए। पाटनी, शाह, गांधी, सेठी, वेद आदि नहीं लिखना है। ये सब गोत्र हैं। यह इसलिए जरूरी है कि सरकारी आंकड़ों में अगर हमारी संख्या कम आती है तो उसका प्रभाव हमारे तीर्थ क्षेत्र, इतिहास आदि के साथ हमारे लिए मिलने वाली सरकारी सुविधाओं पर भी पड़ता है। इसके साथ ही राजनीति क्षेत्र में भी प्रभाव कम रहता है क्योंकि हमारी संख्या कम दिखाई देती है तो राजनेता भी हमें इग्नोर करते हैं। कई बार सुनने को मिलता है कि तुम हो गी कितने। इसलिए हर जैन को यह अभियान बनाना है कि वह अपने आस पास वालों को, परिवार, मित्र को यह सन्देश भेजे कि जनगणना के समय में जाति वाले कालम में मात्र जैन ही लिखना है। आज ही जागे तो उसका परिणाम हमें मिलेगा। नहीं तो आने वाले समय में सरकारी आंकड़ों में जैनों की संख्या कम होने के साथ हमारे इतिहास और संस्कृति का समावेश हिन्दू समाज में हो जाएगा।</p>
<p>Slug- जनगणना में लिखें केवल जैन, गोत्र नहीं</p>
<p>3&#8230;&#8230;&#8230;</p>
<p>लोकेशनः- इंदौर</p>
<p>रिपोर्टः- राजेश जैन दद्दू</p>
<p>मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में 24 मई 1986 को पिता राजेश और मां वीणा के घर जन्मे सन्मति ने साल 8 नवंबर 2011 को मंगलगिरी तीर्थ सागर में आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज से दीक्षित होकर अपनी साधना आरंभ की। यह दिन जैन समाज के लिए बहुत पुनीत दिन है। सन्मति जैन ने बीबीए और एमबीए में गोल्ड मेडल प्राप्त किया। 8 नवम्बर 2011 आचार्य श्री विशुद्ध सागर से दीक्षित होने के बाद आचार्य श्री ने सन्मति भैया का नामकरण मुनि श्री आदित्य सागर किया। सन्मति भैया ने विशुद्ध सागर में डुबकी लगाई और जब बाहर निकले तो वह सन्मति भैया नहीं बल्कि मुनि आदित्य सागर बनकर निकले। उन्होंने गुरु के सानिध्य में रहते हुए जैन समाज को सत्य पथ दिखाया। साथ ही निरंतर श्रमण संस्कृति को नित नए आयामों से गौरवान्वित किया। मुनि श्री को प्राचीन कन्नड़ पढ़ना भी आता है। इसके लिए 2018 के महामस्तकाभिषेक के बाद बैंगलोर में रहकर उन्होंने इसका अध्ययन किया था।</p>
<p>Slug &#8211; जैन समाज को दिखाया सत्य का पथ</p>
<p>आज के लिए इतना ही। कल पुनः इसी समय आप से मुलाकात होगी। आप के पास भी जैन धर्म से संबंधित कोई भी खबर संबंधित हो तो हमें 9460155006 अवश्य भेजें</p>
<p>जय जिनेन्द्र</p>
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		<title>श्रीफल जैन न्यूज का आज का ईवनिंग बुलेटिन : दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र बचाने के लिए जुड़ें गुल्लक योजना से </title>
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		<pubDate>Wed, 06 Nov 2024 15:05:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आप देख रहे हैंं श्रीफल जैन न्यूज का ईवनिंग बुलेटिन। आप सभी का स्वागत है, मैं हूं रेखा जैन तो आइए नजर डालते हैं आज की कुछ खास खबरों पर&#8230;.. 1 &#8230;&#8230;&#8230; लोकेशन इंदौर रिपोर्ट प्रीतम जल और रक्त का उत्पादन अब तक कोई भी विज्ञान नहीं कर पाया है। जिस तरह जल को बचाने [&#8230;]]]></description>
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<p>आप देख रहे हैंं श्रीफल जैन न्यूज का ईवनिंग बुलेटिन। आप सभी का स्वागत है, मैं हूं रेखा जैन तो आइए नजर डालते हैं <span style="color: #ff0000">आज की कुछ खास खबरों पर&#8230;..</span></p>
<hr />
<p>1 &#8230;&#8230;&#8230;</p>
<p>लोकेशन इंदौर</p>
<p>रिपोर्ट प्रीतम</p>
<p>जल और रक्त का उत्पादन अब तक कोई भी विज्ञान नहीं कर पाया है। जिस तरह जल को बचाने के लिए जागरूकता की जरूरत है, ठीक वैसे ही रक्त के दान को सबसे बड़ी नेमत माना गया है। दोनों ही द्रव्य मानव को जीवन देते हैं। इंदौर देश का पहला ऐसा महानगर है, जहां पिछले 16 सालों से रक्तदान-महादान की मशाल को थामे 15 लोगों की टीम एक कॉल पर संबंधित रक्त समूह का ब्लड की उपलब्धता कुछ ही समय में करवा देती है। इंदौर के लाबरिया भैरू क्षेत्र में गंगवाल बस स्टैंड के समीप एमओजी लाइन में निःशुल्क ब्लड कॉल सेंटर स्थापित है। इस कॉल सेंटर के अध्यक्ष अशोक नायक बताते हैं कि उनके साथ इंदौर सहित आसपास के गांवों और नगरों में 4 लाख रक्तदाता मानव सेवा में जुटे हुए हैं। उन्होंने बताया कि उनके सेंटर की टैग लाइन है- ब्लड चाहिए, हमें बताइए। यह भारत का पहला निःशुल्क ब्लड कॉल सेंटर है, जो रेडक्रॉस</p>
<p>से भी संबद्ध है। नायक ने बताया कि उन्होंने अपनी टीम के सहयोग से हजारों कैंप लगाकर लोगों को रक्तदान के प्रति जागरूक किया है।</p>
<p>Slug -16 साल से रक्त दान का कार्य । संस्था की टैग लाइन &#8220;ब्लड चाहिए, हमें बताइए</p>
<p>2 &#8230;.</p>
<p>लोकेशन इंदौर</p>
<p>रिपोर्टर रेखा संजय जैन</p>
<p>समेदशिखर, गिरनार जीजैसे कई दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र हैं, जिनके लिए जैन समाज संघर्ष कर रहा है। आज करोड़ों रुपए कोर्ट में इसलिए बात के लिए लग रहे हैं कि हम यह सिद्ध कर पाएं कि यह तीर्थ क्षेत्र दिगम्बर जैन समाज के हैं। यहां से तीर्थंकर भगवान मोक्ष गए या यहां पर अतिशय हुए हैं। तीर्थ क्षेत्र कमेटी और महासभा की जीर्णोद्धार संस्था प्राचीन तीर्थों की सुरक्षा में लगी हुए है। यह काम मात्र इन संस्थाओं का नहीं और न ही यह संस्थाएं अकेले कुछ कर पाएंगी। समाज के हर घर को इन संस्थानों से जुड़ना होगा। इसलिए दोनों संस्थाओं ने गुल्लक योजना प्रारंभ की है, जिससे धन भी एकत्रित होगा और समाज का प्रत्येक घर इन संस्थाओं से जुड़कर संस्थाओं के हाथ मजबूत करेगा। इस योजना से समाज के हर घर को इसलिए जुड़ना जरूरी है, अगर हम आज भी इन संस्थाओं से नहीं जुड़ पाए तो दिगंबर जैन समाज का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएग। कैसे बता पाएंगे कि तीर्थंकरों को कहां से मोक्ष हुआ, कहां क्या अतिशय हुआ है। जिस समाज का कोई अस्तित्व नहीं होता, वह समाज दिशाहीन हो जाता है। तो आओ सब जुड़ें गुल्लक योजना से।</p>
<p>Slug &#8211; अस्तित्व को बचाने के लिए जुड़ें गुल्लक योजना से</p>
<p>&#8211; तीर्थ क्षेत्र गुल्लक योजना के लिए हंसमुख गांधी से संपर्क करें +91 93021 03513</p>
<p>&#8211; महासभा की गुल्लक योजना से जुड़ने के लिए टी के वेद से संपर्क करें +91 94251 54777</p>
<p>3 &#8230;&#8230;&#8230;.</p>
<p>लोकेशन श्रवणबेलगोला</p>
<p>रिपोर्टर &#8211; कमलेश जैन</p>
<p>श्रीक्षेत्र श्रवणबेलगोल के जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी के समाधि मण्डप का लोकार्पण समारोह 6 दिसंबर 2024 को प्रात: 9 बजे श्रीक्षेत्र श्रवणबेलगोला में किया जाएगा। वर्ष 1970 से 2023 तक स्वामी श्रीक्षेत्र श्रवणबेलगोला की भट्टारक गद्दी पर रहे। वह महावीर जयंती 19 अप्रैल 1970 को श्रीक्षेत्र श्रवणबेलगोला के भट्टारक पद पर विराजमान हुए और 23 मार्च 2023 को आपका समाधिमरण हो गया । आप नेतृत्व में 1981, 1993, 2006, 2018 में महामस्तकाभिषेक संपन्न हुए। समाधि मण्डप लोकार्पण समारोह में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दरामय्या, पूर्व प्रधान मंत्री एच डी देवगौड़ा सभी कई मंत्री और पूर्व मंत्री उपस्थित रहेंगे। इनके साथ ही श्री दिगम्बर जैन मठ के सभी भट्टारक स्वामी जी , आदिचुंचनगिरी महासंस्थान मठ, श्री पेजावर मठ, श्री सिद्धगंगा मठ और धर्माधिकारी श्री क्षेत्र धर्मस्थल के डॉ डी वीरेन्द्र हेगडे जी का सानिध्य रहेगा।</p>
<p>Slug &#8211; समाधि मंडप लोकार्पण समारोह</p>
<p>&#8230;&#8230;</p>
<p>आज के लिए इतना ही। कल पुनः इसी समय आप से मुलाकात होगी। आप के पास भी जैन धर्म से संबंधित कोई भी खबर संबंधित हो तो हमें 9460155006 अवश्य भेजें</p>
<p>जय जिनेन्द्र</p>
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