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	<title>Dindori &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>जीवन खुशियों के इजहार के लिए मिला है आप सब इस इज्जत के हकदार : मुनि श्री सुधासागरजी ने कैदियों को जेल में दिए आशीर्वचन </title>
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		<pubDate>Fri, 19 Dec 2025 12:15:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जीवन हमें खुशियों के इजहार के लिए मिला है। इस इज्जत के हकदार आप सब है। यह उद्गार जिला जेल में बंदियों को संबोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने आगे कहा कि कैसे हमें इज्जत मिलती है, वह रास्ता हमें हनुमान बता रहे हैं। दुनिया भक्तों के बीच में भगवान [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जीवन हमें खुशियों के इजहार के लिए मिला है। इस इज्जत के हकदार आप सब है। यह उद्गार जिला जेल में बंदियों को संबोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने आगे कहा कि कैसे हमें इज्जत मिलती है, वह रास्ता हमें हनुमान बता रहे हैं। दुनिया भक्तों के बीच में भगवान को देखना चाहती है। <span style="color: #ff0000">अशोकनगर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोकनगर।</strong> जीवन हमें खुशियों के इजहार के लिए मिला है। इस इज्जत के हकदार आप सब है। यह उद्गार जिला जेल में बंदियों को संबोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने आगे कहा कि कैसे हमें इज्जत मिलती है, वह रास्ता हमें हनुमान बता रहे हैं। दुनिया भक्तों के बीच में भगवान को देखना चाहती है। भगवान के भक्त बनने का मतलब ये नहीं है कि तुम मेरी जय-जयकार करो। भक्ति का मतलब तुम्हें लोग इज्जत से देखें। तुम्हारे लिए एक विचार आए कि जब भगवान का भक्त ऐसा है तो भगवान कैसा होगा। भगवान जानते हैं कि वह हर जगह नहीं पहुंच सकते, इसलिए भगवान भक्तों को भेज देता है। श्रीराम दुनिया में इतने नहीं जाने गए, सबसे पहले लंका में हनुमानजी पहुंचे और उन्होंने लंका वासियों को दिखा दिया ये तो सभी भक्त हैं। मुनिश्री ने कहा कि जेल तो उन दुश्मनों के लिए बनाई गई है जो देश विरोधी है। ये हमारी मातृभूमि को अपना नहीं मानते। जिन्हें वंदे मातरम कहने में शर्म आती है। जेल उनके लिए बनाई गई है। मुनिश्री ने कहा कि मैं अपराधी के बीच में नहीं आया। मैं अपने भाइयों के बीच आया हूं। इतना अंतर क्यों है? हम सब की मां भारत माता है। इस दौरान जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि जेलर साहब ने कई बार चातुर्मास कर रहे मुनि श्री के चरणों में पहुंचकर निवेदन किया कि जेल में बंद कैदियों को भी आपके मंगल प्रवचनों का लाभ मिले। मुनिश्री कृपा करके आज आपके बीच पधारे हैं। इस दौरान जेलर दीक्षित, जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, पूर्व महामंत्री विपिन सिंघई, टीआई चौहान ने दीप प्रज्वलित किया।</p>
<p><strong>ऐसे संतों को देख कर मन श्रद्धा से नतमस्तक है</strong></p>
<p>इस दौरान जेलर दीक्षित ने कहा कि हम सब पर कृपा करके संत श्री हमारे बीच पधारे हैं। मुझे आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के सान्निध्य का लाभ अमरकंटक के निकट डिंडोरी जिला जेल में मिला था। आज इन कैदियों के उद्धार के लिए आपके चरण कई किमी पैदल चलकर आए हैं। पैरों में कुछ पहनते नहीं है। ऐसे संतों को देख कर मन श्रद्धा से नतमस्तक हो जाता है। इस दौरान विपिन सिंघई ने भी अपनी बात रखी। इस दौरान अध्यक्ष राकेश कांसल, उपाध्यक्ष अजित वरोदिया, प्रदीप तारई, राजेंद्र अमन, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, मंत्री शैलेंद्र श्रागर, मंत्री विजय धुर्रा, मंत्री संजीव भारिल्य, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर संजय के टी, संयोजक मनोज रन्नौद, उमेश सिंघई, मनीष सिंघई, श्रेयांस घैला, थूवोनजी अध्यक्ष अशोक जैन टींगू, मिल महामंत्री मनोज भैसरवास साथ चल रहे थे।</p>
<p><strong>नशा करोगे तो खुशहाली नहीं आ सकती</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि हमारा देश गरीब क्यों है? हम अमेरिका की बराबरी ना करें। अमेरिका का पैसा गलत तरीके से आता है। उनके सब साधन ऐसे हैं कि आप सोच नहीं सकते लेकिन, यदि आप अपने खून पसीने की कमाई से नशा करेंगे, शराब पियोगे तो आपके जीवन में कभी खुशहाली नहीं ला सकते। जेल तुम्हारे लिए दुःख देने के लिए नहीं मिली। जेल तुम्हारे लिए सुधरने का मौका देती है। इस धरती पर इज्जत से ज़ीने के लिए ईश्वर ने भेजा था। तुम क्या कर बैठे कभी ईगो पाइंट मत बनना, नशा मत करना, जिस भारत मां की गोदी में जन्म लिया। उसके साथ हम ऐसा कोई अपराध ना करें, जिससे आप को जेल में जाना पड़े। हम अपने जीवन सुव्यवस्थित बनाएं।</p>
<p><strong>’हमारी संस्कृति महान जहां श्रीकृष्ण भी शांति दूत बन जाते हैं</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि श्री रामचन्द्र जी एक भाई का गला उतार लेते हैं। एक भाई को गले लगा लेते हैं हमारी संस्कृति कैसी महान है। नारायण श्रीकृष्ण जी दुर्याेधन को समझाने के लिए दूत बन गए। आपके जेल अधीक्षक दीक्षित जी निवेदन करने आए तो मन में विचार आया कि श्रीकृष्ण जी जैसी महाशक्ति दूत बनने को तैयार हो गए, जिस पद को निकृष्ट माना जाता है फिर भी वे विश्व शांति के लिए दूत बन गए तो मैंने सोचा कि मेरा क्या बिगड़ता है। तेरी जिंदगी सुधरी है हम चले तो कुचल गया विश्वास हम लोग सदा नीचे देखकर चलते हैं। हम लोग के पैर के नीचे कहीं चीटी भी ना आ जाए। यहां पचास प्रतिशत अपराधी इगो के कारण झुक ना सके और अपराध कर बैठे। पच्चीस प्रतिशत अपराधी है जो प्रमाणन के कारण अपराध पर उतर आए। पच्चीस प्रतिशत आदतन अपराधी होते हैं। मैं यहां 75 प्रतिशत अपराधी को बचा सकता हूं। बस आपको कुछ चीजें हैं, जिनको आप अपने जीवन में उतरते चले जाएं।</p>
<p><strong>जेल इसलिए बनाई कि विदेशी उत्पात ना मचा दें</strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि जब देश आजाद हुआ तो जेल इसलिए बनाई गई कि विदेशी आकर हमारे देश में उत्पात ना मचा दें। हम क्या कर बैठे, एक छोटे से जमीन के टुकड़े के लिए अपने भाई से लड़ पड़े। जाओ मैं तुम्हारे लिए आशीर्वाद देता हूं कि आप भाई के कारण भिखारी नहीं बनोगे। श्री राम चाहते तो कोर्ट केस कर देते, वो चाहते तो पंचायत बिठा देते। हम साधु संतों के पास आते। कानून से राज्य से सब तरफ से वे अधिकारी थे। फिर भी उन्होंने अपना अधिकार क्यों नहीं माना। बस देखा कि आदेश कौन दे रहा है। मां ने कहा है बस श्री रामचंद्र जी वन के लिए चल दिए।</p>
<p><strong> आप अपनी सजा को भी आप ईमानदारी में बदल दो </strong></p>
<p>हम लोग भगवान की पताका लेकर आए हैं। साधु संत दुनिया में हैं तो वे इस बात का प्रतीक है कि इस दुनिया भगवान है। निर्मोही बनो तो संत बनकर बनो, ड़ाकू बनकर नहीं। मुनिश्री ने कहा कि जिन बंदियों को सजा हो जाती है। उनके परिवार की क्या दशा होती है। अच्छे के सब साथी होते हैं। बुरे का कोई साथी नहीं होता। क्या मुंह दिखाओगे भगवान को, मैंने तुम्हे हनुमान बनने भेजा था, आप क्या कर बैठे? आप अपनी सजा को भी आप ईमानदारी में बदल दो कि तुम्हारे लिए जेल के दरवाजे खुल जाएं, सजा प्रायश्चित बन जाए। आदर्श कैदी बन जाएं।</p>
<p><strong>भगवान सबका सबका कल्याण करते हैं</strong></p>
<p>जेल अधीक्षक हम साधु संतों को इसलिए जब मौका मिले तो लेकर आते हैं कि आपका जीवन सुधर जाए। आप सजा को प्रायश्चित मानो। यदि आप ने ऐसा दृढ़ निश्चय कर लिया कि मैंने जो अपराध किया है मैं उसका प्रायश्चित पूरी ईमानदारी से करुंगा और फिर हो सकता है कि आपके अच्छे काम को देख कर आपकी सजा भी माफ हो जाए। जो भगवान सबका सबका कल्याण करते हैं, उन्हें तुम्हारे अपराध के कारण सजा देनी पड़ी। हम भारत माता के साथ अपराध कर रहे हैं। मैं संदेश लेकर आया हूं भगवन। आपको थोड़ा सा पश्चाताप होना चाहिए।</p>
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		<title>मुनि श्री निरीहसागर जी ने सुनाएं प्ररेणादायक प्रसंग धीरे कोई काम नहीं होना चाहिए </title>
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		<pubDate>Sun, 05 May 2024 15:38:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र, जैन तीर्थ कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से मुनिश्री निरीह सागर जी महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा कल शाम को आचार्य भक्ति के बाद आचार्य श्री ने मुझे बुलाया ,एक ब्रह्मचारी के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र, जैन तीर्थ कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से मुनिश्री निरीह सागर जी महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा कल शाम को आचार्य भक्ति के बाद आचार्य श्री ने मुझे बुलाया ,एक ब्रह्मचारी के माध्यम से और कहा कि कल आपको प्रवचन करना है। हमने कहा हमसे बड़े-बड़े महाराज जी हैं, उन्होंने कहा सब कर चुके हैं ।आपको करना है ।कुछ प्रसंग ऐसे होते हैं ,जो सामान्य लोगों ने कभी नहीं सुने, लेकिन जो ऊपर मंच पर बैठे हुए हैं, उनके सुने हुए हैं, वही बात यहां से सुनेंगे तो उनको कैसा लगेगा।<span style="color: #ff0000">पढि़ए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट ……</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर।</strong> सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र, जैन तीर्थ कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से मुनिश्री निरीह सागर जी महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा कल शाम को आचार्य भक्ति के बाद आचार्य श्री ने मुझे बुलाया ,एक ब्रह्मचारी के माध्यम से और कहा कि कल आपको प्रवचन करना है। हमने कहा हमसे बड़े-बड़े महाराज जी हैं, उन्होंने कहा सब कर चुके हैं ।आपको करना है ।कुछ प्रसंग ऐसे होते हैं ,जो सामान्य लोगों ने कभी नहीं सुने, लेकिन जो ऊपर मंच पर बैठे हुए हैं, उनके सुने हुए हैं, वही बात यहां से सुनेंगे तो उनको कैसा लगेगा। सन 1983 की बात है, आचार्य श्री का चातुर्मास ईसरी शिखरजी की तलहटी में हो रहा था ।वहां पर उन्होंने जो प्रवचन में कहा था।</p>
<p>हमने किसी साधक के मुंह से ही प्रवचन में सुना था ,वह आपके सामने रख रहा हूं। उन्होंने प्रवचन में कहा कि जो छोटा बच्चा होता है, उसकी मां दूध पिलाती है तो वह मचलता बहुत है ,कटोरी में दूध रखा है, चम्मच है ,मां ने गोदी में लिटाया, वह हाथ पैर हिला रहा है ,मुंह भी इधर-उधर कर रहा है ,दूध पीना नहीं चाहता, लेकिन मां समझदार है, बच्चा भूखा है, उसको दूध पिलाना है, जबरदस्ती पिलाना है ,यदि नहीं पिलाया तो काम नहीं करने देगा, बीच में रोएगा। दूध पिलाती है और वह छोटे-छोटे हाथ- पैर चलाता रहता है ,पूरे समय गर्दन भी इधर-उधर होती रहतीहै, तो मां युक्ति से उसके हाथ- पैर को अपने पैरों से दबा लेती है और मुंह को पकड़ लेती, नाक दबा देती ,उसके मुंह में चम्मच से दूध भर देती है, नाक तब तक दबाए रहती, जब तक कि वह गटक नहीं लेता ।ऐसे जबरदस्ती करके दूध पिलाती जाती है। दो-तीन कटोरी दूध वह पी लेता है ।</p>
<p>शरारती बच्चा था ,जबरदस्ती पिलाया ।ज्यादा ही शरारती था तो बाद में दही बनाकर निकाल देता है ।कुछ ऐसे बच्चे भी होते हैं जो दही बनाकर निकाल देते ।आचार्य जी ने कहा मां जबरदस्ती दूध पिलाती है कि वह काम करने नहीं देगा। बाद में रोएगा।</p>
<p><strong>जितना ग्रहण कर सको, वह सामने रख दिया </strong></p>
<p>मैं भी आपको प्रवचन जबरदस्ती पिला रहा हूं ,आप पीना नहीं चाहते आपको पिला रहा हूं ,बाद में आप कहेंगे ,अपनी समस्या रखेंगे ,इसलिए पहले ही सुना रहा हूं। मैंने आचार्य श्री के मुख से साक्षात तो नहीं सुना। किसी साधु के मुख से सुना था, जितना ग्रहण कर पाए ,आपके सामने रख दिया ।ऐसा ही एक प्रसंग 2011 का है, उसमें मुनि प्रसाद सागर जी का ज्यादा है। आप उन्हें जानते हैं, सब कुछ जल्दी-जल्दी कार्य होना चाहिए ।धीरे कोई काम नहीं होना चाहिए। वैसे ही कुछ हुआ।हम लोग विहार कर रहे थे। दक्षिण यात्रा में गए थे ।ब्रह्मचारी अवस्था में थे। आचार्य श्री राजनांदगांव में थे । हम लोगों की बस दुर्ग से राजनांदगांव पहुंची। वहां हम लोग, 36 ब्रह्मचारी पहुंचे ।आचार्य श्री छत्तीसगढ़ में विराजमान थे।36 मूलगुण के धारी ,आचार्य श्री के पास ।उनमें से 18 की मुनि दीक्षा हो चुकी है, कुछ क्षुल्लक बन चुके हैं, कुछ ब्रह्मचारी हैं ।श्रवणबेलागोला पहुंचे ।हम लोगों ने भट्टारक जी से अनुमति चाही, रात के समय वहां 7&#8211;8 बजे बाद अनुमति नहीं थी उनके पास पहुंचे, वहां दो आर्यिका माता बैठी थी। कुछ तत्व चर्चा चल रही थी ।हम लोग जाकर बैठ गए ।उनकी चर्चा समाप्त हुई ,आर्यिका माता उठकर चली गई।</p>
<p>हम लोगों ने अपनी चर्चा की अनुमति उनसे ली, 1 घंटे हमारी बात हुई।हम लोगों ने आर्यिका माता के दर्शन किए ।उन्होंने गवाशन मुद्रा में नमोस्तु किया। हम लोग 36 ब्रह्मचारी थे। आसपास कोई मुनि नहीं, नमोस्तु किसे किया। उन्होंने पूछा आचार्य श्री का स्वास्थ्य कैसा है ।हम लोग सोचने लगे, इन्हें कैसे मालूम हुआ कि हम आचार्य संघ के हैं, उन्होंने कहा ऐसे युवा हीरे उन्हीं के संघ में हो सकते हैं ।</p>
<p><strong>मिल गया पाद प्रक्षालन का अवसर</strong></p>
<p>आचार्य श्री का प्रभाव भी ऐसा था। अब 2018 का प्रसंग आता है ।डिंडोरी में आचार्य श्री थे महावीर जयंती के दूसरे दिन पपोरा जी के लिए विहार हुआ ।महावीर जयंती के समय और बाद में कितनी गर्मी होती है, हमने विहार में कुछ व्यवस्थाएं की, महाराज जी के आशीर्वाद से की ।वैसे हमें कुछ आता नहीं है, प्रवचन नहीं आता ,हम कुछ प्रसंग सुना रहे हैं ,पुराने महाराज थे। ब्रह्मचारी थे।जबलपुर का विहार हो रहा था ।दुर्लभ सागर महाराज ने कहा आपको यह काम करना है, पहले से वह स्थान देखना है, जहां आचार्य श्री को रोकना है ,ठंड है तो ठंड के अनुकूल ,गर्मी है तो गर्मी के हिसाब से व्यवस्था करनी है। हमने वैयावृती कैसी करनी है, तेल- घी तो सभी करते हैं, हमने कहा जो वैयावृती कोई नहीं करता,वह हम करेंगे और हम जहां रुकना,होता था आधे पौन घंटे पहले पहुंच जाते थे। जहां आचार्य श्री को रोकना है, वहां व्यवस्था ठंड- गर्मी के हिसाब से देख लेते थे। सभी महाराज के पाटे लगवा देते थे ।विद्यालय में ही रुकना होता था। वहां आहार होते थे। बहुत बड़ा प्रांगण था। किनारों पर कक्ष बने हुए थे। एक चौके वाले भाई आए और कहा हमें आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन करना है ।हमने उन्हें कहा कि इस चबूतरे पर जल कोपर रख दो। सभी चौके वाले किनारे पर बैठ गए। आचार्य श्री आ रहे थे ।मुनि लोग आ रहे थे। संकेत कर दिया यहां आना है ।कोई पैर छूना नहीं, मैंने कह दिया ।आचार्य श्री ने दोनों पैर कोपर में डाल दिए ।आचार्य श्री के आदेश से सभी ने उनके पैर धुलाये ,उन लोगों का पुण्य था ।उन्हें पाद प्रक्षालन का अवसर मिल गया।</p>
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		<title>आचार्यश्री विद्यासागर जी का विहार हुआ : अमरकंटक से डिंडोरी की ओर चले गुरुदेव </title>
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		<pubDate>Sat, 08 Apr 2023 12:11:19 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अमरकंटक (राजेश जैन दद्दू)। दिगंबर मानसरोवर के राजहंस संत शिरोमणि महामहिम आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महामुनिराज का ससंघ विहार सर्वोदय जैन तीर्थक्षेत्र अमरकंटक, मप्र से हो गया है। उनका विहार कारोपानी अमरकंटक से 66 किमी जबलपुर मार्ग पर डिंडोरी की ओर हुआ है। गुरुदेव की संभावित दिशा बुधगांव माल, कारोपानी चल चरखा महिला प्रशिक्षण [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>अमरकंटक (राजेश जैन दद्दू)।</strong> दिगंबर मानसरोवर के राजहंस संत शिरोमणि महामहिम आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महामुनिराज का ससंघ विहार सर्वोदय जैन तीर्थक्षेत्र अमरकंटक, मप्र से हो गया है। उनका विहार कारोपानी अमरकंटक से 66 किमी जबलपुर मार्ग पर डिंडोरी की ओर हुआ है।</p>
<p>गुरुदेव की संभावित दिशा बुधगांव माल, कारोपानी चल चरखा महिला प्रशिक्षण हथकरघा एवं रोजगार केंद्र, जिला डिंडोरी है।</p>
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