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	<title>Digambar Sadhu श्रीफल जैन न्यूज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>उदयपुर आगमन पर की प्रसन्नता व्यक्त : असम के राज्यपाल ने आचार्य श्री से प्राप्त किया आशीर्वाद </title>
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		<pubDate>Fri, 21 Apr 2023 16:02:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[उदयपुर। असम के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के श्री महावीर जिनालय सर्व ऋतु विलास में आकर दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने आचार्य श्री से अनेक विषयों पर चर्चा एवं मार्गदर्शन प्राप्त किया और 21 वर्षों बाद उदयपुर आगमन पर प्रसन्नता प्रकट की। इस अवसर पर मंदिर कमेटी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>उदयपुर।</strong> असम के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के श्री महावीर जिनालय सर्व ऋतु विलास में आकर दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने आचार्य श्री से अनेक विषयों पर चर्चा एवं मार्गदर्शन प्राप्त किया और 21 वर्षों बाद उदयपुर आगमन पर प्रसन्नता प्रकट की।</p>
<p>इस अवसर पर मंदिर कमेटी के पदाधिकारियों ने राज्यपाल का स्वागत पुष्पहार, श्रीफल, प्रतीक चिह्न के साथ किया। इस अवसर पर अनेक राजनैतिक तथा प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित रहे।</p>
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		<title>मुनिसंघ का मंगलविहार पृथ्वीपुर की ओर : मैं हूं इसमें आनंद की अनुभूति नहीं &#8211; मुनि श्री सुधासागर महाराज </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 13 Apr 2023 13:47:44 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनिपुंगव सुधासागर महाराज ससंघ का मंगल विहार पृथ्वीपुर मप्र की ओर चल रहा है। गुरुवार की प्रातःकाल मुनिसंघ की आगवानी पारस विहार टीकमगढ़ में हुई, जहां टीकमगढ़ समाज के पदाधिकारियों और श्रावकजनों ने भव्य आगवानी की और पाद पक्षालन कर आशीर्वाद लिया। पढ़िए राजीव सिंघई की रिपोर्ट.. टीकमगढ़। आध्यात्म जगत के सूर्य आचार्य भगवन विद्यासागर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>मुनिपुंगव सुधासागर महाराज ससंघ का मंगल विहार पृथ्वीपुर मप्र की ओर चल रहा है। गुरुवार की प्रातःकाल मुनिसंघ की आगवानी पारस विहार टीकमगढ़ में हुई, जहां टीकमगढ़ समाज के पदाधिकारियों और श्रावकजनों ने भव्य आगवानी की और पाद पक्षालन कर आशीर्वाद लिया। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजीव सिंघई की रिपोर्ट..</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टीकमगढ़।</strong> आध्यात्म जगत के सूर्य आचार्य भगवन विद्यासागर महाराज के परमप्रभावक शिष्य जगतपूज्य मुनिपुंगव सुधासागर महाराज ससंघ का मंगल विहार पृथ्वीपुर मप्र की ओर चल रहा है। गुरुवार की प्रातःकाल मुनिसंघ की आगवानी पारस विहार टीकमगढ़ में हुई, जहां टीकमगढ़ समाज के पदाधिकारियों और श्रावकजनों ने भव्य आगवानी की और पाद पक्षालन कर आशीर्वाद लिया।</p>
<p><strong>कोई नहीं रहना चाहता अकेला</strong></p>
<p>धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागर महाराज ने कहा कि जब व्यक्ति को अहसास होता है कि मैं दुनिया में रह रहा हूं और भविष्य में भी यही रहना है तो वह संसार के प्रति अनुरागित हो जाता है। वह संसार के साथ संबंध जोड़ने का प्रयास करता है। जब-जब व्यक्ति ऐसे संबंध जोड़ने के भाव आते हैं तो वह इस संसार में लम्बे समय तक रहता है। संसार में रहने वाले व्यक्ति को बहुत कुछ चाहिए। उसे परिवार के साथ साथ रिश्तेदार संबंधी और समाज भी चाहिए। तुम जन्मे अकेले हो और मरण भी अकेले होना है लेकिन तुम तुम अकेले नहीं रहना चाहते हो। हर व्यक्ति चाहता है कि मैं अकेला न रहूं। कोई मेरा भी हो।मैं हूं इसमें आनंद की अनुभूति कम है। गृहस्थ कभी आत्मा की अनुभूति नहीं कर सकता क्योंकि वह सुख और दुख की अनुभूति होती है। आत्मा की अनुभूति करने वाले को सिर्फ सुख की अनुभूति होती है, दुख की नहीं।</p>
<p><strong>विपरीत परिस्थितियों में रहो खुश</strong></p>
<p>अनुकूल परिस्थितियो में जीतना खुश रहते हो, उतना ही विपरीत परिस्थितियों में खुश रहोगे तो आनंद सदा बना रहता है। हमारा सुख निमित्त के अधीन है। निमित्त अच्छा मिला तो सुखी और विपरीत मिला तो दुखी हो जाते हैं। जहां मिलता है, वहां झुक जाना व्यापार है, जहां नहीं मिलता, वहां झुक जाना यह भक्ति है। मुनिश्री सुधासागर महाराज एवं क्षुल्लक गम्भीर सागर महाराज के सानिध्य में पृथ्वीपुर (मप्र) में 22 अप्रैल से शुरू होने वाले पंचकल्याणक महोत्सव के लिए मुनिसंघ का पदविहार चल रहा है।</p>
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		<title>मुनि श्री ज्ञानसागर का 36वां दीक्षा दिवस ज्ञानतीर्थ पर मनाया गया : महामस्तकाभिषेक, विधान सहित हुए अनेक कार्यक्रम </title>
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		<pubDate>Fri, 31 Mar 2023 14:16:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगम्बराचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का 36वां दीक्षा दिवस समारोह ज्ञानतीर्थ क्षेत्र जैन मंदिर में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। पढ़िए मनोज नायक की विशेष रिपोर्ट&#8230; मुरैना। दिगम्बराचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का 36वां दीक्षा दिवस समारोह ज्ञानतीर्थ क्षेत्र जैन मंदिर में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>दिगम्बराचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का 36वां दीक्षा दिवस समारोह ज्ञानतीर्थ क्षेत्र जैन मंदिर में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए मनोज नायक की विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> दिगम्बराचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का 36वां दीक्षा दिवस समारोह ज्ञानतीर्थ क्षेत्र जैन मंदिर में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। ज्ञानतीर्थ क्षेत्र जैन मंदिर पर विराजमान ब्रह्मचारिणी बहिन मंजुला दीदी ने बताया कि उत्तर भारत के प्रथम दिगम्बराचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज (छाणी) परम्परा में मसोपवासी चर्या शिरोमणी आचार्य श्री सुमतिसागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य परम पूज्य गुरुदेव, ज्ञानतीर्थ प्रणेता, सराकोद्धारक समाधिस्थ षष्ट पट्टाचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का 36वां दीक्षा दिवस समारोह परम पूज्य गणिनी आर्यिका श्री अंतसमति माताजी ससंघ के पावन सान्निध्य में ज्ञानतीर्थ क्षेत्र पर मनाया गया।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-41232" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230331-WA0025.jpg" alt="" width="576" height="636" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230331-WA0025.jpg 576w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230331-WA0025-272x300.jpg 272w" sizes="(max-width: 576px) 100vw, 576px" /></p>
<p><strong>आचार्य छत्तीसी विधान</strong></p>
<p>कार्यक्रम के प्रथम दिन प्रातः 08 बजे से श्री जिनेन्द्र प्रभु के अभिषेक, शांतिधारा, पूजन के पश्चात् आचार्य छत्तीसी विधान हुआ। जिसमें गुरुभक्त सधर्मी बन्धु, माता-बहिनें इंद्र-इंद्राणी ने जिनेन्द्र भगवान की आराधना करते हुए अर्घ्य समर्पित किये। दूसरे दिन प्रातः 08 बजे बड़े बाबा श्री आदिनाथ भगवान का महामस्तकाभिषेक, शांतिधारा, पूजन के पश्चात गुरुदेव आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के चरणों का पाद प्रक्षालन, महा अर्चना, अष्टद्रव्य से पूजन एवं महाआरती की गई। इस अवसर पर भजन, भक्ति नृत्य एवं बालिकाओं द्वारा सांस्क्रतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये गए। समारोह का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ हुआ। आये हुए अतिथियों द्वारा चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन किया गया। परम् पूज्य गणिनी आर्यिका श्री अंतसमति माताजी को शास्त्र एवं श्री आदिनाथ भगवान की शांतिधारा करने का सौभाग्य मदनचंद अजमेर, टीनू मीनू दिल्ली, बाबूलाल अमित जैन मुरैना एवं आचार्य श्री ज्ञानसागर महाराज के चरणों का पाद प्रक्षालन करने का सौभाग्य वकील चंद, नीरज, पंकज, राजीव विवेक विहार दिल्ली वालों को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर जयपुर, दिल्ली, अजमेर, मेरठ, आगरा, अम्बाह, बानमोर, जौरा सहित बड़ी संख्या में गुरुभक्त सधर्मी बन्धु उपस्थित थे। दीक्षा दिवस के अवसर पर सभी आगन्तुक महानुभावों के आवास एवं भोजनादि की व्यवस्था ज्ञानतीर्थ पर की गई थी।</p>
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		<title>सप्त प्रतिमाधारी भगवानदेवी जैन की विनयांजलि सभा : आत्मा को जानना ही धर्म है-पदमचंद जैन </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 31 Mar 2023 14:09:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[समाज सेवी मनोज जैन (नेकी की दीवार) की माताजी मुरेना जैन समाज की वयोवृद्ध त्यागिवर्ती, सप्तम प्रतिमाधारी श्रीमती भगवान देवी जैन के देवलोकगमन पर अग्रसेन पार्क जीबाजी गंज मुरैना में विनयांजलि सभा का आयोजन किया गया। पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट&#8230; मुरैना। जिसने जन्म लिया है, उसका मरण निश्चित है। आत्मा अजर व अमर है। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>समाज सेवी मनोज जैन (नेकी की दीवार) की माताजी मुरेना जैन समाज की वयोवृद्ध त्यागिवर्ती, सप्तम प्रतिमाधारी श्रीमती भगवान देवी जैन के देवलोकगमन पर अग्रसेन पार्क जीबाजी गंज मुरैना में विनयांजलि सभा का आयोजन किया गया। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> जिसने जन्म लिया है, उसका मरण निश्चित है। आत्मा अजर व अमर है। आत्मा कभी मरती या नष्ट नहीं होती। आत्मा तो केवल शरीर परिवर्तित करती है। आत्मा को पहचानना ही धर्म है। धन से, बाहरी आडम्बरों से, बाहर के क्रिया -कांडों से धर्म नहीं आता। हमें अपने आपको धर्म में, आत्मा स्वीकार करने से, आत्मा आने से वह धर्ममय कहलाता है। जीव कोई भी हो, उसे एक न एक दिन इस नश्वर संसार को त्यागना ही होता है। फिर हम उस जीव के जाने पर रोना-धोना क्यों करते हैं। यही हमारी अज्ञानता है। दुखों को मिटाने के लिए आत्मा को पहचानना जरूरी है। यह बात तत्ववेत्ता पंडित पदमचन्द जैन दानाओली लश्कर ने श्रीमती भगवानदेवी जैन के देवलोकगमन पर अग्रसेन पार्क, जीबाजी गंज मुरैना में आयोजित विनयांजलि सभा में कही।</p>
<p><strong>कर रही थीं संयम की साधना</strong></p>
<p>समाज सेवी मनोज जैन (नेकी की दीवार) की माताजी मुरेना जैन समाज की वयोवृद्ध त्यागिवर्ती, सप्तम प्रतिमाधारी श्रीमती भगवान देवी जैन के देवलोकगमन पर अग्रसेन पार्क जीबाजी गंज मुरैना में विनयांजलि सभा का आयोजन किया गया। विनयांजलि सभा में राजेन्द्र भण्डारी ने कहा कि श्रीमती भगवानदेवी जैन एक धार्मिक विदुषी महिला थीं। वह परिवार में रहकर भी संयम की साधना कर रही थीं। प्रतिदिन देव शास्त्र गुरु की भक्ति, आराधना एवं प्रार्थना करना उनकी दिनचर्या में शामिल था। विनयांजलि सभा में मुरैना विधायक राकेश मावई, भाजपा जिलाध्यक्ष योगेशपाल गुप्ता, अम्बाह नगर पालिका अध्यक्षा अंजली जिनेश जैन, नगर निगम आयुक्त संजीव जैन, पूर्व मंत्री मुंशीलाल, शिवमंगल सिंह तोमर, चंद्रप्रकाश शिवहरे, रमेशचंद विरला, गजेंद्र परमार, गोविंद बंसल, राजेन्द्र गोयल, मोहनलाल गर्ग, प्रकाश अग्रवाल सीए, श्याम, अग्रवाल सीए, विशनलाल गर्ग, केदार शिवहरे, श्याम खंडेलवाल, संदीप शर्मा एडवोकेट, रवि गुप्ता पत्रकार, अवधेश दंडोतिया पत्रकार, उपेंद्र गौतम, प्रदीप अवस्थी पत्रकार, देवेश शर्मा पत्रकार, श्रीनिवास शर्मा पत्रकार, अनिल गोयल अली, राजेश शर्मा बाबूजी सहित बहुतायत संख्या में नगर के समाजसेवी, उद्योगपति, पत्रकारबन्धु उपस्थित थे।</p>
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		<title>आचार्य पदारोहण दिवस पर विशेष : अहिंसा के सद प्रचारक हैं आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज  </title>
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		<pubDate>Fri, 31 Mar 2023 08:57:50 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[21वीं सदी के दूरदृष्टा, अध्यात्मयोगी एवं चर्या शिरोमणि 108 आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज वर्तमान में श्रमण संस्कृति के सुविख्यात एवं बहुआदरित संत हैं। सन 2007 औरंगाबाद महाराष्ट्र में 31 मार्च महावीर जयंती के शुभ दिन गणाचार्य विराग सागर जी के द्वारा आपको आचार्य पद पर प्रतिष्ठित किया गया। पढ़िए डॉ. जैनेंद्र जैन एवं [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>21वीं सदी के दूरदृष्टा, अध्यात्मयोगी एवं चर्या शिरोमणि 108 आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज वर्तमान में श्रमण संस्कृति के सुविख्यात एवं बहुआदरित संत हैं। सन 2007 औरंगाबाद महाराष्ट्र में 31 मार्च महावीर जयंती के शुभ दिन गणाचार्य विराग सागर जी के द्वारा आपको आचार्य पद पर प्रतिष्ठित किया गया। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए डॉ. जैनेंद्र जैन एवं राजेश जैन दद्दू का विशेष आलेख&#8230;</span></strong></p>
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<p>21वीं सदी के दूरदृष्टा, अध्यात्मयोगी एवं चर्या शिरोमणि 108 आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज वर्तमान में श्रमण संस्कृति के सुविख्यात एवं बहुआदरित संत हैं। आप अंतिम तीर्थंकर एवं वर्तमान शासन नायक भगवान महावीर स्वामी की परंपरा में हुए आचार्य आदि सागर अंकलीकर, आचार्य महावीरकीर्ति, आचार्य विमल सागर एवं आचार्य सन्मति सागर जी महाराज की निर्ग्रंथ वीतरागी दिगंबर जैन श्रमण परंपरा के प्रतिनिधि गणाचार्य विराग सागर जी महाराज से दीक्षित उनके बहुचर्चित श्रमण शिष्य हैं और अपनी आगम अनुकूल चर्या एवं ज्ञान से नमोस्तु शासन को जयवंत कर रहे हैं।</p>
<p><strong>बाल्यावस्था में बढ़ाए संयम पथ पर कदम</strong></p>
<p>आपका जन्म 18 दिसंबर, 1971 को मध्यप्रदेश के भिंड जिले के ग्राम रुर में हुआ। पारिवारिक संस्कार एवं आत्म रुचि के कारण बाल्यावस्था में ही आपने वैराग्य को जागृत कर संयम पथ पर पग बढ़ाएं और 17 वर्ष की अल्प आयु में ही गृह त्याग कर आप ब्रह्मचारी बन गए एवं श्रमणाचार्य गुरुवर विराग सागर जी से 11 अक्टूबर 1979 में क्षुल्लक दीक्षा, 19 जून 1991 को हीरो की नगरी पन्ना में ऐलक दीक्षा पश्चात 21 नवंबर 1991 को अत्यंत एकांत प्राकृतिक तीर्थ श्रेयांश गिरी की तलहटी में वटवृक्ष तले श्री विराग सागर जी के कर कमलों से जिनेश्वरी मुनि दीक्षा को प्राप्त किया। तदोपरांत सन 2007 औरंगाबाद महाराष्ट्र में 31 मार्च महावीर जयंती के शुभ दिन गणाचार्य विराग सागर जी के द्वारा आपको आचार्य पद पर प्रतिष्ठित किया गया। यह आपका 16वां आचार्य पदारोहण दिवस है।</p>
<p><strong>अधात्म सरोवर के राजहंस</strong></p>
<p>आचार्य विशुद्ध सागर जी वर्तमान काल में अपने ज्ञान, अपनी विशुद्ध चर्या और आगम सम्मत पीयूष मयी विशुद्ध वाणी के प्रभाव से अध्यात्म सरोवर के राजहंस सिद्ध हो चुके हैं। आपके अलौकिक व्यक्तित्व में जहां गुरु गोविंद दोनों के दर्शन होते हैं वहीं आपके दीक्षा गुरु गणाचार्य विराग सागर जी के साथ-साथ श्रमण संस्कृति के महामहिम संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की छवि भी दिखाई देती है। आपका वात्सल्य और आपकी सरलता, सहजता भी ऐसी है कि जो भी आपके सानिध्य में आता है, वह प्रभावित हुए बिना नहीं रहता है और उन्हीं का होकर रह जाता है। आपके तप, त्याग, ज्ञान और निर्दोष चर्या और चरित्र को देखकर अब लोग उन्हें छोटे विद्यासागर भी मानने लगे हैं। आज यदि आचार्य विद्यासागर जी महाराज श्रमण संस्कृति के जेष्ठ एवं श्रेष्ठ शिरोमणि संत हैं तो आचार्य विशुद्ध सागर जी भी श्रमण संस्कृति के श्रेष्ठ और गौरवमयी संतों की श्रृंखला में चर्या शिरोमणि के रूप में स्थापित एवं बहु चर्चित और बहु आदरित आचार्य हैं।</p>
<p><strong>आगम अनुकूल है चर्या</strong></p>
<p>इस पंचम काल में अनेक जैन मुनि, आचार्य एवं उनके संघ साधनारत हैं, लेकिन वर्तमान में उनकी चर्या एवं कृतित्व में 20 वीं सदी का प्रभाव भी घुसपैठ करता दिखाई देता है लेकिन आचार्य विशुद्ध सागर जी एवं उनके द्वारा दीक्षित 50 से अधिक मुनियों का संघ इसका अपवाद है। उनकी आगम अनुकूल चर्या में सिर्फ और सिर्फ आगम की झलक ही दिखाई देती है और शिथिलाचार का कोई स्थान नहीं है। देश में कहीं भी उनके नाम से कोई प्रोजेक्ट भी नहीं है, इसलिए वे न तो धन संग्रह (चंदा) इकट्ठा करते हैं और न ही करवाते हैं। यही वजह है कि उनकी चर्या श्रावकों के लिए आदर्श एवं श्रमणों के लिए अनुकरणीय बन गई है।</p>
<p>आत्मा स्वभावं परभाव भिन्नम इस आध्यात्मिक सूत्र पर जीवन जीने वाले आचार्य विशुद्ध सागर जी का एकमात्र लक्ष्य आत्म कल्याण एवं दैनंदिनी कार्यक्रम ज्ञान, ध्यान, लेखन, प्रवचन और अध्ययन करना एवं संघस्थ मुनियों एवं ब्रह्मचारियों को अध्ययन कराना है। जन सामान्य को ज्ञानी कहने और प्रत्येक जीव आत्मा को भगवान मानने वाले तीर्थंकर सम उपकारी आचार्य विशुद्ध सागर जी उत्कृष्ट क्षयोपशम (श्रेष्ठ ज्ञान) धारी और विषयों से विरक्त तपस्वी एवं गहन चिंतक और दार्शनिक भी हैं। साल भर चलने वाली आपकी आगम अनुकूल और आडंबर विहीन निर्दोष चर्या मैं धर्म, दर्शन, ज्ञान, चरित्र और तप का विराट संगम आलोकित होता है। आपके चिंतन, प्रवचन एवं लेखन में भी जहां साक्षात सरस्वती उतरती दिखाई देती है वहीं हर एक वाक्य में विशुद्ध आगम व अध्यात्म झलकता है और आध्यात्मी आचार्य कुंद कुंद एवं महान दार्शनिक जैन आचार्य समंतभद्र के समन्वय की अनुगूंज भी ध्वनित होने के साथ-साथ मानव मात्र के कल्याण का संकल्प भी प्रकट होता है।</p>
<p><strong>एक लाख किलोमीटर से अधिक पदविहार</strong></p>
<p>आचार्यश्री का जितना विषद व्यक्तित्व है, उससे अधिक उनका कृतित्व भी है। देश के 12 राज्यों में लगभग 1,00,000 किलोमीटर से अधिक पग विहार कर चुके आचार्यश्री के सानिध्य में शताधिक पंचकल्याणक प्रतिष्ठाओं का संपन्न होना आपकी अरिहंत भक्ति का अभिज्ञान कराती है। आपके द्वारा शताधिक प्रवचन साहित्य के अलावा भाष्य, अनुशीलन, स्वतंत्र चिंतन, कथा साहित्य एवं 5000 से अधिक आध्यात्मिक कविताएं आदि विभिन्न प्रकार का पठनीय साहित्य सृजित है, जिसका देश विदेश में लाखों स्वाध्याय प्रेमियों के द्वारा स्वाध्याय किया जाता है।</p>
<p><strong>टूटी आस्थाओं को जोड़ने वाली महायोगी</strong></p>
<p>लाखों जैनेत्तरों को व्यसन एवं मांसाहार का त्याग कराने वाले आचार्य श्री अहिंसा के सद प्रचारक एवं टूटती आस्थाओं को जोड़ने वाले महायोगी हैं। आपके नाम के पूर्व आध्यात्म योगी का जो विशेषण अंकित किया जाता है वह न केवल सार्थक है वरन आपके व्यक्तित्व की दीपशिखा है जिससे उनके भक्तों को ढोंग का नहीं ढंग का एवं धर्म और अध्यात्म से परिपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा प्राप्त होती है । आज कटनी मध्य प्रदेश में विराजमान आचार्य श्री के 16 वें आचार्य पदारोहण दिवस पर कोटि-कोटि नमन।</p>
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		<title>साइंस ऑफ लिविंग सत्र में प्रवचन : भय से मनुष्य को तब तक डरना चाहिये जब तक वह नहीं आया है -मुनिश्री निरंजन सागर महाराज </title>
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		<pubDate>Wed, 29 Mar 2023 10:26:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[साइंस ऑफ लिविंग के सत्र में मुनिश्री निरंजन सागर महाराज ने कहा कि विपत्ति के समय भी अधीर नहीं होना चाहिए। जब सामने आई परिस्थिति का सामना करना तय है तो क्यों न धैर्य साहस से सामना किया जाये। पढ़िए संजय जैन हटा और राजेश रागी बकस्वाहा की यह रिपोर्ट&#8230; हटा। विपत्ति के समय भी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>साइंस ऑफ लिविंग के सत्र में मुनिश्री निरंजन सागर महाराज ने कहा कि विपत्ति के समय भी अधीर नहीं होना चाहिए। जब सामने आई परिस्थिति का सामना करना तय है तो क्यों न धैर्य साहस से सामना किया जाये। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए संजय जैन हटा और राजेश रागी बकस्वाहा की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>हटा।</strong> विपत्ति के समय भी अधीर नहीं होना चाहिए। जब सामने आई परिस्थिति का सामना करना तय है तो क्यों न धैर्य साहस से सामना किया जाये। साइंस ऑफ लिविंग सत्र में आचार्य निरंजन सागर महाराज ने कहा कि ज्ञान ही दुःख का मूल है, ज्ञान ही भव का कूल है। राग सहित सो प्रतिकूल है, राग रहित सो अनुकूल है। चुन-चुन इनमें समुचित तू, मत चुन अनुचित भूल है। सब शास्त्रों का सार यही क्षमता बिन सब धूल है। सोचियेगा स्वयं आचार्य महाराज समता के लिए धैर्य के लिये शास्त्रों का सार कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर अपने जीवन में बड़े-बड़े ग्रन्थों को, वेदो को, पुराणों को पढ़ लिया, रट लिया पर आपके जीवन में समता नहीं आयी, शान्ति नहीं आयी, आपके जीवन में धैर्य का नामोनिशान तक नहीं तो ऐसा ज्ञान, मात्र भारभूत ही है। सहन वही कर सकता है, जिसने कषायों का दहन कर दिया है। इसका सीधा-सीधा अर्थ है कि आपकी सहनशीलता आपकी कषायहीनता को भी दर्शाती है। जिसने सहन करना सीख लिया, उसकी कर्म निर्जरा भी निश्चित है।</p>
<p><strong>सहन करने वाला होता है महावीर</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने कहा, मार्गाच्यवन निर्जरार्थं परिषोढव्याः परीषहाः अर्थात् मार्ग से च्युतन होने के लिये और कमों की निर्जरा करने तो लिये जो सहन करने योग्य हो वो परीषह है। बिना अग्नि के ताप को सहन किये स्वर्ण में भी शुद्धता नहीं आती है। आज जितनी भी आत्मायें सिद्धालय में विराजमान हैं, उन्होंने भी अपनी सहनशीलता की परीक्षा दी है और उसका ही परिणाम है कि वे आज उस अनन्त सुख को भोग रहे हैं। भय से मनुष्य को तब तक डरना चाहिये जब तक वह नहीं आया है, परन्तु जब आ ही जाये तो निडर होकर उस का सामना करना चाहिये। कहते भी हैं कि मन के हारे हार और मन के जीते जीत, कषाय करने वाला अधीर होता है और सहन करने वाला महावीर होता है।</p>
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		<title>साइंस ऑफ लिविंग सत्र में प्रवचन : सहनशीलता से बड़ा कोई मोटिवेशनल फैक्टर नहीं है -मुनिश्री निरंजन सागर महाराज </title>
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		<pubDate>Tue, 28 Mar 2023 12:48:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[साइंस ऑफ लिविंग के सत्र में मुनिश्री निरंजन सागर महाराज ने सेल्फ मोटिवेशन अर्थात् आत्म अभिप्रेरणा का सेल्फ सेटिस्फेक्शन अर्थात् आत्म सन्तुष्टि का मंत्र बताया। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा मोटिवेशनल फैक्टर है। जो जितना अपने जीवन में सहनशील है, वह उतना ही अपने जीवन मे सन्तुष्ट है, सफल है। पढ़िए संजय जैन हटा और [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>साइंस ऑफ लिविंग के सत्र में मुनिश्री निरंजन सागर महाराज ने सेल्फ मोटिवेशन अर्थात् आत्म अभिप्रेरणा का सेल्फ सेटिस्फेक्शन अर्थात् आत्म सन्तुष्टि का मंत्र बताया। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा मोटिवेशनल फैक्टर है। जो जितना अपने जीवन में सहनशील है, वह उतना ही अपने जीवन मे सन्तुष्ट है, सफल है। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए संजय जैन हटा और राजेश रागी बकस्वाहा की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>हटा।</strong> साइंस ऑफ लिविंग के सत्र में मुनिश्री निरंजन सागर महाराज ने सेल्फ मोटिवेशन अर्थात् आत्म अभिप्रेरणा का सेल्फ सेटिस्फेक्शन अर्थात् आत्म सन्तुष्टि का मंत्र बताया। उन्होंने कहा कि आपकी अपनी सहनशीलता ही आपके जीवन का सबसे बड़ा मोटिवेशनल फैक्टर है। जो जितना अपने जीवन में सहनशील है, वह उतना ही अपने जीवन मे सन्तुष्ट है, सफल है। क्योंकि कहा जाता है कि जहां सन्तुष्टि है वहां सफलता है। आपने अपने जीवन की विपत्ति को सम्पत्ति क्यों नहीं माना ? इतिहास साक्षी है कि जिस किसी भी महापुरुष ने अपने जीवन में आयी विपत्ति को बिना आपत्ति स्वीकार किया है, उसका सहर्ष सामना किया है, उसे सहन किया है, वह विपत्ति उन महापुरुषों के लिये सम्पत्ति का काम कर गयी अर्थात् उन महापुरुषों ने उस विपत्ति को किस धीरता के साथ सहन किया।</p>
<p><strong>विपत्ति में न हों निराश </strong></p>
<p>ध्यान रखना दूध फटने पर वे लोग निराश नहीं होते, ना ही कभी उदास होते हैं, जिन्हें रसगुल्ले बनाना आता है। विपत्ति में धैर्य, अभ्युदय में क्षमा, सभा में वाक्पटुता, युद्ध में विक्रम, यश में अभिरुचि और ज्ञान का व्यसन, ये महापुरुषों के स्वाभाविक गुण हैं। किसी विद्वान ने कहा है कि दु:ख में घबराओ मत और सुख में कभी इतराओ मत। दुःख किसे नहीं आता। महापुरुषों ने भी अपने जीवन मे दुःख को दुःख मानकर सहनशक्ति के बल पर सहन किया है और परिणाम यह निकला कि वही दुःख भी उनके लिये सुख में परिवर्तित हो गया। सज्जनों का धन तो धैर्य ही है। जिसके पास धैर्य है, वह जो भी इच्छा करता है, प्राप्त कर सकता है। अपने धैर्य के बिना और कोई संकट से मनुष्य का उद्धार नहीं कर सकता। संकट के समय धैर्य धारण करना मानो आधी लड़ाई जीत लेना है। जो व्यक्ति स्वभाव से धैर्यवान है, वह महान है।</p>
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		<title>पंचकल्याणक महोत्सव की तैयारी जोर-शोर से : सृष्टि सृष्टि का नियम स्वयं के कर्म भोगने होंगे &#8211; जगतपूज्य मुनिपुंगव सुधासागर </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 28 Mar 2023 12:42:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शोदय तीर्थ में विराजमान जगतपूज्य मुनिपुंगव सुधासागर महाराज एवं क्षुल्लक गम्भीर सागर महाराज के सानिध्य में धार्मिक आयोजन निरंतर चल रहे हैं और श्रावकजन इसका आनंद उठा रहे हैं। मुनि श्री के सानिध्य में धर्म प्रभावना भी हुई। पढ़िए राजीव सिंघई की यह विशेष रिपोर्ट&#8230; महरौनी (ललितपुर)। यशोदय अतिशय तीर्थ पर आयोजित श्री पंचकल्याणक महोत्सव [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>शोदय तीर्थ में विराजमान जगतपूज्य मुनिपुंगव सुधासागर महाराज एवं क्षुल्लक गम्भीर सागर महाराज के सानिध्य में धार्मिक आयोजन निरंतर चल रहे हैं और श्रावकजन इसका आनंद उठा रहे हैं। मुनि श्री के सानिध्य में धर्म प्रभावना भी हुई। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजीव सिंघई की यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>महरौनी (ललितपुर)।</strong> यशोदय अतिशय तीर्थ पर आयोजित श्री पंचकल्याणक महोत्सव एवं चौबीस समोशरण विधान की तैयारी जोर-शोर से शुरू हो गयी है और आयोजकों में उत्साह नजर आ रहा है। यशोदय तीर्थ में विराजमान जगतपूज्य मुनिपुंगव सुधासागर महाराज एवं क्षुल्लक गम्भीर सागर महाराज के सानिध्य में धार्मिक आयोजन निरंतर चल रहे हैं और श्रावकजन इसका आनंद उठा रहे हैं। मुनिश्री के सानिध्य में जिन अभिषेक और शांतिधारा हुई, जिसका सौभाग्य अनिल जैन छिंदवाड़ा,अंकुर जैन मुरादाबाद,फतेह लाल जयपुर, अंकित चौधरी शिक्षक एवं अभिलाष सिंघई को प्राप्त हुआ। मुनिश्री सुधासागर महाराज को आहार देने का सौभाग्य राजीव सिंघई कुम्हेढी वाले और क्षुल्लक गम्भीर सागर को आहार देने का सौभाग्य राजकुमार सिंघई को प्राप्त हुआ।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-41009" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230328-WA0024.jpg" alt="" width="1011" height="1039" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230328-WA0024.jpg 1011w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230328-WA0024-292x300.jpg 292w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230328-WA0024-996x1024.jpg 996w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230328-WA0024-768x789.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230328-WA0024-990x1017.jpg 990w" sizes="(max-width: 1011px) 100vw, 1011px" /></p>
<p><strong>स्वार्थ से की गई भक्ति का नहीं मिलता फल</strong></p>
<p>धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागर महाराज ने कहा कि श्रावक का गुरु से प्रश्न हे गुरुदेव मुझे ऐसा कोई मंत्र बता दो कि जीवन में कभी कोई विपत्ति न आए? गुरु ने समाधान किया कि ऐसा तो हो ही नहीं सकता और कोई ये कहता है कि ऐसा कर लो तो तुम्हें विपत्ति नहीं आएगी तो वो गुरु हो ही नहीं सकता क्योंकि ये सृष्टि का ही नियम की पंच परावर्तन से जीवन है तो सुख और दुख विपत्ति का सामना स्वयं करना होगा। स्वयं के कर्म फल भोगने होंगे। यही जीवन है, जिंदगी है। आज तक दुनिया में ऐसी कोई सड़क या रास्ता नहीं बना, जिस पर ये बोर्ड लगा दिया जाए कि इस रास्ते पर कोई दुर्घटना नहीं होगी। स्वार्थ पूर्वक की गई भक्त की भक्ति फलीभूत नहीं होती। ऐसा कोई मंत्र नहीं जो भविष्य की व्याधियों को न होने दे। आज के 90% भक्त की भक्ति स्वार्थ की है क्योंकि उनके स्वार्थ सिद्ध हो जाए या उनका संसार बढ़ जाए तो भगवान है, नहीं तो उनका मानना है कि प्रभु नहीं है। सच्चा भक्त तो वो है जो अपने अच्छा होने पर प्रभु कृपा माने और बुरा होने पर खुद के कर्म का कारण कहे। मंच संचालन नितिन शास्त्री ने किया और सभी का आभार यशोदय तीर्थ कमेटी के गौरव अध्यक्ष प्रशांत सिंघई बंटी ने व्यक्त किया। इस मौके पर प्रमोद सिंघई, राजा चौधरी, मुकेश सराफ, ऋषभ कठरया, अनिल मिठया, राजेश मलैया नुना, जिनेश मलैया, भागेश खजुरिया, संजीव शास्त्री, आकाश चौधरी, सुनील डेवडिया, सुनील गडौली, शुभम मोदी, अभिषेक सिंघई, अभिषेक खंजाची, आशू पारौल, कमल, हिंमाशु बिजौलिया, संजीव विलौआ, सुबोध पठा, गौरव कठरया सहित बड़ी संख्या में भक्तजन उपस्थित रहे।</p>
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		<title>2 अप्रैल को 21 वर्षो के बाद संघ का मंगल प्रवेश संभावित : पुण्यशाली समाज को परंपरा से सभी आचार्यों के चातुर्मास का अवसर मिलता है-आचार्य श्री वर्धमान सागर जी </title>
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		<pubDate>Mon, 27 Mar 2023 16:09:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आगामी 2 अप्रैल को पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का उदयपुर शहर में 21 वर्षो के बाद 8 मुनिराजों, 19 आर्यिका माताजी, 2 क्षुल्लक एवं एक क्षुल्लिका माताजी सहित भव्य मंगल प्रवेश होगा। पढ़िए राजेश पंचोलिया की रिपोर्ट&#8230; उदयपुर। वर्ष 2002 में संघ ने उदयपुर में चातुर्मास किया था। काफी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आगामी 2 अप्रैल को पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का उदयपुर शहर में 21 वर्षो के बाद 8 मुनिराजों, 19 आर्यिका माताजी, 2 क्षुल्लक एवं एक क्षुल्लिका माताजी सहित भव्य मंगल प्रवेश होगा। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजेश पंचोलिया की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>उदयपुर।</strong> वर्ष 2002 में संघ ने उदयपुर में चातुर्मास किया था। काफी वर्षों से उदयपुर के समाज को आस एवं प्यास लगी रही। 21 वर्षों से आप इंतजार कर रहे हैं। मेवाड़ और बागड़ की जनता-समाज सौभाग्यशाली है कि परंपरा के सभी आचार्यों के चातुर्मास इस धरती पर हुए हैं। आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज ने यह मंगल देशना वर्धमान फार्म हाउस गुड़ली में आयोजित धर्म सभा में प्रकट की। आचार्य श्री ने कहा आचार्य श्री शांतिसागर जी ने उदयपुर में चातुर्मास किया था। उनके साथ श्री वीर सागर जी मुनि रूप में रहे हैं। उन्होंने भी चातुर्मास किया है। आचार्य श्री शिव सागर जी ने, आचार्य श्री धर्म सागर जी ने, आचार्य श्री अजीत सागर जी ने यहां चातुर्मास किया और उन्हें आचार्य पद भी उदयपुर में ही मिला और हमने भी वर्ष 2002 में उदयपुर में चातुर्मास किया है।</p>
<p>उदयपुर का समाज बहुत सौभाग्यशाली है कि उसे परंपरा के सभी आचार्यों का योग संयोग से अवसर मिला है। ऐसा अवसर पुण्य शाली समाज जनता को मिलता है। श्री गजू भैया एवं परमीत ने बताया कि 27 मार्च को आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने वर्धमान फार्म हाउस कारवा परिसर गुड़ली से विहार किया। संघ की आहार चर्या श्रम सेवालय गोवल में संपन्न हुई। दोपहर को विहार कर रात्रि विश्राम श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर देबारी में होगा। यहां अल्प विश्राम की संभावना है।</p>
<p>राजेश पंचोलिया इंदौर के अनुसार उदयपुर सकल दिगंबर जैन समाज अध्यक्ष शांतिलाल वेलावत एवं पारस चित्तौड़ा मीडिया प्रभारी ने बताया कि आगामी 2 अप्रैल को पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का उदयपुर शहर में 21 वर्षो के बाद 8 मुनिराजों, 19 आर्यिका माताजी, 2 क्षुल्लक एवं एक क्षुल्लिका माताजी सहित भव्य मंगल प्रवेश होगा।</p>
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