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	<title>Digambar Ascetics &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>साधु-साध्वियों के सुरक्षित विहार के लिए समाजजनों से अपील : साधु-साध्वियों के विहार में संभावित अप्रिय घटनाओं की रोकथाम की जा सकेगी  </title>
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		<pubDate>Sat, 30 May 2026 14:37:24 +0000</pubDate>
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<p><strong>श्री दिगंबर जैन उदासीन आश्रम ट्रस्ट की ओर से समाजजनों से आह्वान किया गया है कि आगामी चातुर्मास एवं विहार काल को ध्यान में रखते हुए साधु-साध्वियों की सुरक्षा एवं सुगम यात्रा सुनिश्चित करने में सक्रिय सहयोग प्रदान करें। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर</strong>। श्री दिगंबर जैन उदासीन आश्रम ट्रस्ट की ओर से समाजजनों से आह्वान किया गया है कि आगामी चातुर्मास एवं विहार काल को ध्यान में रखते हुए साधु-साध्वियों की सुरक्षा एवं सुगम यात्रा सुनिश्चित करने में सक्रिय सहयोग प्रदान करें। ट्रस्ट के अध्यक्ष अमित कासलीवाल ने जारी पत्र में बताया कि चातुर्मास का समय निकट है और इस अवधि में साधु-संघों एवं आर्यिकाओं का विभिन्न क्षेत्रों में विहार संभावित है। ऐसे में उनके विहार के दौरान सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना समाज का नैतिक एवं सामाजिक दायित्व है। पत्र में समाजजनों से अनुरोध किया गया है कि वे संबंधित क्षेत्रों के जिला प्रशासन, तहसील कार्यालय एवं पुलिस थाने को आवश्यक सूचना प्रदान करें तथा उसकी प्राप्ति पावती भी प्राप्त करें।</p>
<p>साथ ही शासन एवं प्रशासन द्वारा आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित कराने में अपेक्षित सहयोग प्रदान करें। ट्रस्ट ने कहा है कि समाज की सजगता एवं सहयोग से साधु-साध्वियों के विहार के दौरान संभावित अप्रिय घटनाओं की रोकथाम की जा सकेगी तथा उनके सुरक्षित एवं निर्विघ्न विहार में सहायता मिलेगी। ट्रस्ट ने समाज के सभी वर्गों से इस महत्वपूर्ण विषय की गंभीरता को समझते हुए आवश्यक कार्रवाई करने एवं धर्मसंघ की सुरक्षा में सहभागी बनने की अपील की है।</p>
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		<title>तीर्थंकरों के वर्णों का वर्णन सुन भावविभोर हुए भक्त : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने बताया तीर्थंकर 24 ही क्यों?  </title>
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		<pubDate>Thu, 28 May 2026 12:50:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[30 मई तक धर्म संवर्धन संस्कृति शिविर लगाया गया है। इसमें आचार्य श्री वर्धमान सागर जी, मुनि श्री हितेंद्र सागर जी, श्री प्रभव सागर जी, श्री मुमुक्षु सागर जी, आर्यिका देवर्धि मति, श्री पद्मयशमति सहित अनेक साधुओं द्वारा तत्व तत्वार्थ सूत्र, छहढ़ाला ,धार्मिक संस्कार प्रथम एवं द्वितीय भाग, भक्तामर स्त्रोत,द्रव्य संग्रह आदि धार्मिक विषयों पर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>30 मई तक धर्म संवर्धन संस्कृति शिविर लगाया गया है। इसमें आचार्य श्री वर्धमान सागर जी, मुनि श्री हितेंद्र सागर जी, श्री प्रभव सागर जी, श्री मुमुक्षु सागर जी, आर्यिका देवर्धि मति, श्री पद्मयशमति सहित अनेक साधुओं द्वारा तत्व तत्वार्थ सूत्र, छहढ़ाला ,धार्मिक संस्कार प्रथम एवं द्वितीय भाग, भक्तामर स्त्रोत,द्रव्य संग्रह आदि धार्मिक विषयों पर शिक्षण शिविर में उपदेश दिया जा रहा है। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, डॉ.राजेश पंचोलिया की खबर&#8230;</span></strong></p>
<p><strong><del></p>
<hr />
<p></del>जयपुर।</strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी चंद्रप्रभ जिनालय चंद्रपुरी बड़ के बालाजी में 36 साधुओं सहित ग्रीष्मकालीन वाचना के लिए विराजित हैं। श्रावक-श्राविकाओं की भावना रहती हैं कि आचार्य संघ का सानिध्य अधिक से अधिक मिले। इसके उपाय में धार्मिक अनुष्ठान, कार्यक्रम करते हैं ताकि संत समागम अधिक से अधिक समय मिले। जब से गुरुदेव पधारे हैं। नियमित धार्मिक आयोजन हो रहे हैं। सुनीता,भागचंद चूड़ीवाल ने बताया कि 21 से 30 मई तक धर्म संवर्धन संस्कृति शिविर लगाया गया है। इसमें आचार्य श्री वर्धमान सागर जी, मुनि श्री हितेंद्र सागर जी, श्री प्रभव सागर जी, श्री मुमुक्षु सागर जी, आर्यिका देवर्धि मति, श्री पद्मयशमति सहित अनेक साधुओं द्वारा तत्व तत्वार्थ सूत्र, छहढ़ाला ,धार्मिक संस्कार प्रथम एवं द्वितीय भाग, भक्तामर स्त्रोत,द्रव्य संग्रह आदि धार्मिक विषयों पर शिक्षण शिविर में उपदेश दिया जा रहा है। जिसमें भक्तों द्वारा भाग लिया जा रहा है। जोबनेर मंगलम सिटी, श्याम नगर, मालवीय नगर आदि से सभी उम्र के भक्त शामिल हो रहे हैं। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने तीर्थंकर के शरीर का वर्ण दोहे के माध्यम से बताया दो गोरे,दो सांवरे, दो हरियल, दो लाल। सोलह प्रतिमा स्वर्ण मई, तिन्हें नवाऊँ भाल।। अर्थात चंद्रप्रभ एवं पुष्पदंत सफेद वर्ण, मुनिसुव्रतनाथ एवं नेमिनाथ श्याम वर्ण/नील वर्ण, पद्मप्रभ एवं वासुपूज्य लाल वर्ण, सुपार्श्वनाथ एवं पार्श्वनाथ हरित वर्ण तथा शेष सोलह तीर्थंकर का पीत वर्ण (तपाए हुए स्वर्ण समान) हैं। सुरेश सबलावत के अनुसार आचार्य श्री ने बताया कि बाहुबली स्वामी ने तपस्या करके केवलज्ञान और फिर मोक्ष प्राप्त किया था। अतः वे भगवान हैं, लेकिन तीर्थंकर नामकर्म प्रकृति का उन्हें न तो बंध था, न उदय।</p>
<p>अतः वे तीर्थंकर नहीं हैं तीर्थंकर 24 ही क्यों? जब ये प्रश्न किया गया तब उनका उत्तर था- इस मान्यता में कोई अलौकिकता नहीं है क्योंकि, लोक में अनेक ऐसे पदार्थ है जैसे- ग्रह, नक्षत्र, राशि, तिथियां और तारागण जिनकी संख्या काल योग से नियत है, तीर्थंकर सर्वाेत्कृष्ट होते हैं। अतः उनके जन्मकाल योग भी विशिष्ट उत्कृष्ट ही होना चाहिए या होते हैं। ज्योतिषाचार्यों का मत है कि प्रत्येक कल्पकाल के दुषमा सुषमा काल में ऐसे उत्तम योग 24 ही पड़ते हैं, जिसमें तीर्थंकरों का जन्म होता है।</p>
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		<title>आर्यिका श्री महायश मति जी ने किए केश लोच : केशलोचन के माध्यम से शरीर से राग और मोह दूर होता है </title>
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		<pubDate>Thu, 21 May 2026 06:09:28 +0000</pubDate>
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<p><strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 10 मुनिराज, 20 आर्यिकाओं 1 ऐलक, 4 क्षुल्लक -क्षुल्लिका 36 साधुओं सहित जयपुर चंद्रप्रभ जिनालय चंद्रपुरी बड़ के बालाजी में ग्रीष्मकालीन वाचना के लिए विराजित हैं। अनेक श्रद्धालुओं के सामने श्री वर्धमान सागर जी की सुशिष्या आर्यिका श्री महायश मति ने गुरुवार को केशलोचन किया। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 10 मुनिराज, 20 आर्यिकाओं 1 ऐलक, 4 क्षुल्लक -क्षुल्लिका 36 साधुओं सहित जयपुर चंद्रप्रभ जिनालय चंद्रपुरी बड़ के बालाजी में ग्रीष्मकालीन वाचना के लिए विराजित हैं। अनेक श्रद्धालुओं के सामने श्री वर्धमान सागर जी की सुशिष्या आर्यिका श्री महायश मति ने गुरुवार को केशलोचन किया। केशलोचन के बारे में संघ की आर्यिका श्री पूर्णिमा मति जी ने चर्चा में बताया कि प्रत्येक दिगंबर साधु को 2 से 4 माह की अवधि के भीतर के केशलोचन करना अनिवार्य है। केशलोच दिगंबर साधु का मूल गुण है। केशलोचन के माध्यम से शरीर से राग और मोह दूर होता है। जैन धर्म अहिंसा प्रधान धर्म है, बालों का लोचन अगर नहीं किए जाएं तो उसमें छोटे-छोटे जीवों की उत्पत्ति होने की संभावना होती है। जैन साधु अहिंसा धर्म के महाव्रती होते हैं। सुरेश सबलावत भागचंद चूड़ीवाल के अनुसार माताजी ने बताया कि जैन साधु अपरिग्रही होते हैं। इसलिए जैन साधु अपने हाथ से केशलोचन करते हैं। केश लोच से शरीर से ममत्व दूर होता है। केश लोचन के समय तप, संयम, धैर्य के साथ धर्म की प्रभावना होती है। जिस दिन जैन साधु केशलोच करते हैं, उस दिन उपवास करते हैं।</p>
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		<title>सराक क्षेत्र के मंदिरों में सामूहिक पूजन से हो रही धर्म प्रभावना : प्रतिभा सम्मान समारोह के साथ होगा, शिविरों का समापन 20 मई को </title>
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		<pubDate>Tue, 19 May 2026 10:20:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पश्चिम बंगाल,झारखंड, उड़ीसा प्रांत के विभिन्न चरणों में चल रहे ज्ञान संस्कार शिक्षण समिति के अवसर पर जिन मंदिरों में प्रतिदिन सामूहिक पूजन एवं जिन मंदिरों की सुरक्षा एवं स्वच्छता के उद्देश्य को लेकर 20 जिन मंदिर के बाद आज श्री दिगंबर जैन आदिनाथ मंदिर राजामेला पश्चिम बंगाल के मंदिर में सामूहिक अभिषेक पूजन हुआ। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>पश्चिम बंगाल,झारखंड, उड़ीसा प्रांत के विभिन्न चरणों में चल रहे ज्ञान संस्कार शिक्षण समिति के अवसर पर जिन मंदिरों में प्रतिदिन सामूहिक पूजन एवं जिन मंदिरों की सुरक्षा एवं स्वच्छता के उद्देश्य को लेकर 20 जिन मंदिर के बाद आज श्री दिगंबर जैन आदिनाथ मंदिर राजामेला पश्चिम बंगाल के मंदिर में सामूहिक अभिषेक पूजन हुआ। <span style="color: #ff0000">बांकुडा सं पढ़िए, मनीष जैन विद्यार्थी की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बांकुडा प. बंगाल।</strong> आचार्य श्री ज्ञानसागर जी के अवतरण दिवस के अवसर पर आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज, आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माता जी, आर्यिका श्री आर्ष माताजी, आर्यिका श्री सुज्ञानमती माता जी के आशीर्वाद से ब्र.मंजुला दीदी, ब्र.मनीष भैया के निर्देशन पश्चिम बंगाल,झारखंड, उड़ीसा प्रांत के विभिन्न चरणों में चल रहे ज्ञान संस्कार शिक्षण समिति के अवसर पर जिन मंदिरों में प्रतिदिन सामूहिक पूजन एवं जिन मंदिरों की सुरक्षा एवं स्वच्छता के उद्देश्य को लेकर 20 जिन मंदिर के बाद आज श्री दिगंबर जैन आदिनाथ मंदिर राजामेला पश्चिम बंगाल के मंदिर में सामूहिक अभिषेक पूजन हुआ। मंदिर के व्यवस्थापक लखन जैन सराक ने बताया कि यहां के मंदिर का अभी जीर्णाेद्धार का कार्य हुआ है। मंदिर की व्यवस्थाओं का बड़ा ध्यान रखा गया है। प्रतिदिन पूजन करने 10, 12 लोगों के अलावा बच्चों एवं महिलाएं भी आती हैं। धर्म प्रभावना के इस कार्य में पं. जयकुमार दर्ग, पं. राजकुमार जी कर्द, विदुषी बहन राखी, गोरांग जैन आदि हैं। शिविर और पूजन के समय मिष्ठान वितरण विकास सभा सागर एवं भारतीय जैन मिलन क्षेत्र 10 के सहयोग से हुआ। पं. बंगाल, झारखंड, उड़ीसा प्रांत में आयोजित कार्यक्रमों के मुख्य संयोजक शाहगढ सागर म. प्र. के पं. मनीष शास्त्री विद्यार्थी जिन्होंने मई माह में तीन प्रदेशों में धर्म प्रभावना का कार्य किया।</p>
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		<title>भगवान अनंतनाथ जन्म एवं तप कल्याणक: इंदौर के जिनालयों में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 14 May 2026 12:58:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के 14वें तीर्थंकर भगवान अनंतनाथ जी का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव आज, 14 मई (ज्येष्ठ कृष्ण द्वादशी) को इंदौर के सभी दिगंबर जैन मंदिरों में पूर्ण श्रद्धा, भक्ति और हर्षाेल्लास के साथ मनाया जा रहा है। श्रीफल जैन न्यूज की विशेष प्रस्तुति के तहत आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के 14वें तीर्थंकर भगवान अनंतनाथ जी का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव आज, 14 मई (ज्येष्ठ कृष्ण द्वादशी) को इंदौर के सभी दिगंबर जैन मंदिरों में पूर्ण श्रद्धा, भक्ति और हर्षाेल्लास के साथ मनाया जा रहा है। <span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज की विशेष प्रस्तुति के तहत आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित और संपादित रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैन धर्म के 14वें तीर्थंकर भगवान अनंतनाथ जी का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव आज, 14 मई (ज्येष्ठ कृष्ण द्वादशी) को इंदौर के सभी दिगंबर जैन मंदिरों में पूर्ण श्रद्धा, भक्ति और हर्षाेल्लास के साथ मनाया जा रहा है। सुबह से ही जिनालयों में अभिषेक, शांतिधारा और विशेष पूजन-अर्चन का क्रम जारी है। भक्तगण भगवान के वैराग्य और आत्म-कल्याण के मार्ग को याद कर जीवन को सार्थक बनाने का संकल्प ले रहे हैं।</p>
<p><strong>अयोध्या की पावन धरा पर जन्म और राजसी वैभव का त्याग</strong></p>
<p>जैन पुराणों के अनुसार, भगवान अनंतनाथ जी का जन्म इक्ष्वाकु वंश के महाराज सिंहसेन और माता सुयशा के यहाँ पवित्र नगरी अयोध्या में ज्येष्ठ कृष्ण द्वादशी के महान दिन हुआ था। प्रभु के शरीर का वर्ण सुवर्ण के समान कांतिमय था। उनका चिह्न ‘भालू’ (ऋक्ष) है, जो शक्ति और दृढ़ता का प्रतीक है। उन्होंने लंबे समय तक न्यायप्रिय राजा के रूप में प्रजा का संचालन किया। संसार की नश्वरता को देखकर उन्हें वैराग्य उत्पन्न हुआ। उन्होंने राजसी ठाट-बाट को तिनके के समान छोड़ दिया। ज्येष्ठ कृष्ण द्वादशी के ही दिन उन्होंने दीक्षा (तप) अंगीकार की।</p>
<p><strong>तीन वर्ष की कठोर साधना और केवलज्ञान की प्राप्ति</strong></p>
<p>दीक्षा लेने के बाद भगवान अनंतनाथ ने तीन वर्षों तक मौन रहकर कठिन आत्म-साधना की। उन्होंने भूख, प्यास, सर्दी और गर्मी के परीषहों को समभाव से सहा। ध्यान की गहराई में उतरकर उन्होंने चारों घातिया कर्मों का क्षय किया। चैत्र कृष्ण अमावस्या के दिन उन्हें श्केवलज्ञानश् (परम ज्ञान) की प्राप्ति हुई। केवलज्ञान के बाद समवशरण में उनकी दिव्यध्वनि खिरी। उन्होंने संसार के प्राणियों को मुक्ति का शाश्वत मार्ग दिखाया।</p>
<p><strong>जैन धर्म की पुनर्स्थापना और धर्म चक्र का प्रवर्तन</strong></p>
<p>जैन धर्म अनादि-निधन है, लेकिन समय-समय पर तीर्थंकर आकर धर्म की पुनर्स्थापना करते हैं। भगवान अनंतनाथ ने अपने युग में शिथिल होते जा रहे धर्म मार्ग को पुनर्जीवित किया। उन्होंने ‘अहिंसा परमो धर्मः’ के सिद्धांत को दृढ़ता से स्थापित किया। उनके समवशरण में 50 गणधर थे, जिनमें यश धीर जी मुख्य थे। उन्होंने चतुर्थ काल में मत-मतांतरों के अंधकार को दूर किया। सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र की महत्ता बताई। उनके काल में लाखों जीवों ने आत्म-कल्याण का मार्ग चुना।</p>
<p><strong>श्रावक-श्राविकाओं के लिए भगवान अनंतनाथ का दिव्य संदेश</strong></p>
<p>भगवान अनंतनाथ जी का संपूर्ण जीवन और उनकी देशना श्रावक-श्राविकाओं के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शिका है। उनका मुख्य संदेश श्अनंतश् आत्म-शक्तियों को जगाने का है। सीमित इच्छाएं, असीम शांतिरू भौतिक वस्तुएं कभी अनंत तृप्ति नहीं दे सकतीं। इच्छाओं को सीमित करके ही शाश्वत सुख पाया जा सकता है। अहिंसा और करुणारू संसार के सभी छोटे-बड़े जीवों के प्रति मन, वचन और काय से दया का भाव रखें। तप और स्वाध्याय प्रतिदिन आत्म-निरीक्षण करें। वासनाओं और कषायों (क्रोध, मान, माया, लोभ) को तप की अग्नि में भस्म करें। सत्य और अपरिग्रहरू संचय की प्रवृत्ति का त्याग कर परोपकार में जीवन लगाएं। आज इस पावन कल्याणक महोत्सव पर इंदौर का जैन समाज भगवान अनंतनाथ जी के चरणों में शत-शत नमन करते हुए उनके बताए आत्म-कल्याण के मार्ग पर चलने का संकल्प दोहरा रहा है।</p>
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		<title>भगवान अनंतनाथ जन्म एवं तप कल्याणक: इंदौर के जिनालयों में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 14 May 2026 07:23:42 +0000</pubDate>
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<p><strong>जैन धर्म के 14वें तीर्थंकर भगवान अनंतनाथ जी का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव आज, 14 मई (ज्येष्ठ कृष्ण द्वादशी) को इंदौर के सभी दिगंबर जैन मंदिरों में पूर्ण श्रद्धा, भक्ति और हर्षाेल्लास के साथ मनाया जा रहा है। <span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज की विशेष प्रस्तुति के तहत आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित और संपादित रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैन धर्म के 14वें तीर्थंकर भगवान अनंतनाथ जी का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव आज, 14 मई (ज्येष्ठ कृष्ण द्वादशी) को इंदौर के सभी दिगंबर जैन मंदिरों में पूर्ण श्रद्धा, भक्ति और हर्षाेल्लास के साथ मनाया जा रहा है। सुबह से ही जिनालयों में अभिषेक, शांतिधारा और विशेष पूजन-अर्चन का क्रम जारी है। भक्तगण भगवान के वैराग्य और आत्म-कल्याण के मार्ग को याद कर जीवन को सार्थक बनाने का संकल्प ले रहे हैं।</p>
<p><strong>अयोध्या की पावन धरा पर जन्म और राजसी वैभव का त्याग</strong></p>
<p>जैन पुराणों के अनुसार, भगवान अनंतनाथ जी का जन्म इक्ष्वाकु वंश के महाराज सिंहसेन और माता सुयशा के यहाँ पवित्र नगरी अयोध्या में ज्येष्ठ कृष्ण द्वादशी के महान दिन हुआ था। प्रभु के शरीर का वर्ण सुवर्ण के समान कांतिमय था। उनका चिह्न ‘भालू’ (ऋक्ष) है, जो शक्ति और दृढ़ता का प्रतीक है। उन्होंने लंबे समय तक न्यायप्रिय राजा के रूप में प्रजा का संचालन किया। संसार की नश्वरता को देखकर उन्हें वैराग्य उत्पन्न हुआ। उन्होंने राजसी ठाट-बाट को तिनके के समान छोड़ दिया। ज्येष्ठ कृष्ण द्वादशी के ही दिन उन्होंने दीक्षा (तप) अंगीकार की।</p>
<p><strong>तीन वर्ष की कठोर साधना और केवलज्ञान की प्राप्ति</strong></p>
<p>दीक्षा लेने के बाद भगवान अनंतनाथ ने तीन वर्षों तक मौन रहकर कठिन आत्म-साधना की। उन्होंने भूख, प्यास, सर्दी और गर्मी के परीषहों को समभाव से सहा। ध्यान की गहराई में उतरकर उन्होंने चारों घातिया कर्मों का क्षय किया। चैत्र कृष्ण अमावस्या के दिन उन्हें श्केवलज्ञानश् (परम ज्ञान) की प्राप्ति हुई। केवलज्ञान के बाद समवशरण में उनकी दिव्यध्वनि खिरी। उन्होंने संसार के प्राणियों को मुक्ति का शाश्वत मार्ग दिखाया।</p>
<p><strong>जैन धर्म की पुनर्स्थापना और धर्म चक्र का प्रवर्तन</strong></p>
<p>जैन धर्म अनादि-निधन है, लेकिन समय-समय पर तीर्थंकर आकर धर्म की पुनर्स्थापना करते हैं। भगवान अनंतनाथ ने अपने युग में शिथिल होते जा रहे धर्म मार्ग को पुनर्जीवित किया। उन्होंने ‘अहिंसा परमो धर्मः’ के सिद्धांत को दृढ़ता से स्थापित किया। उनके समवशरण में 50 गणधर थे, जिनमें यश धीर जी मुख्य थे। उन्होंने चतुर्थ काल में मत-मतांतरों के अंधकार को दूर किया। सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र की महत्ता बताई। उनके काल में लाखों जीवों ने आत्म-कल्याण का मार्ग चुना।</p>
<p><strong>श्रावक-श्राविकाओं के लिए भगवान अनंतनाथ का दिव्य संदेश</strong></p>
<p>भगवान अनंतनाथ जी का संपूर्ण जीवन और उनकी देशना श्रावक-श्राविकाओं के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शिका है। उनका मुख्य संदेश श्अनंतश् आत्म-शक्तियों को जगाने का है। सीमित इच्छाएं, असीम शांतिरू भौतिक वस्तुएं कभी अनंत तृप्ति नहीं दे सकतीं। इच्छाओं को सीमित करके ही शाश्वत सुख पाया जा सकता है। अहिंसा और करुणारू संसार के सभी छोटे-बड़े जीवों के प्रति मन, वचन और काय से दया का भाव रखें। तप और स्वाध्याय प्रतिदिन आत्म-निरीक्षण करें। वासनाओं और कषायों (क्रोध, मान, माया, लोभ) को तप की अग्नि में भस्म करें। सत्य और अपरिग्रहरू संचय की प्रवृत्ति का त्याग कर परोपकार में जीवन लगाएं। आज इस पावन कल्याणक महोत्सव पर इंदौर का जैन समाज भगवान अनंतनाथ जी के चरणों में शत-शत नमन करते हुए उनके बताए आत्म-कल्याण के मार्ग पर चलने का संकल्प दोहरा रहा है।</p>
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		<title>सिद्ध क्षेत्र पावागिरी ऊन में श्री शांतिनाथ भगवान को चढ़ाया जाएगा निर्वाण लाडू : बड़ी संख्या में भक्तों के पहुंचने की है संभावना  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_nirvana_ladoo_will_be_offered_to_lord_shantinath_at_the_siddha_kshetra_of_pavagiri_oon/</link>
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		<pubDate>Wed, 13 May 2026 08:19:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[खरगोन जिले में स्थित पावागिरी उन सिद्ध क्षेत्र में पहाड़ी पर विशाल मंदिर बना है। जहां श्री शांतिनाथ, कुंथुनाथ भगवान् और अरहनाथ भगवान की 17 फीट की प्राचीन प्रतिमा है। 15 मई को तीर्थंकर भगवान श्री शांतिनाथ भगवान के जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक भी है। धामनोद से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह खबर&#8230; धामनोद। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>खरगोन जिले में स्थित पावागिरी उन सिद्ध क्षेत्र में पहाड़ी पर विशाल मंदिर बना है। जहां श्री शांतिनाथ, कुंथुनाथ भगवान् और अरहनाथ भगवान की 17 फीट की प्राचीन प्रतिमा है। 15 मई को तीर्थंकर भगवान श्री शांतिनाथ भगवान के जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक भी है। <span style="color: #ff0000">धामनोद से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद।</strong> खरगोन जिले में स्थित पावागिरी उन सिद्ध क्षेत्र में पहाड़ी पर विशाल मंदिर बना है। जहां श्री शांतिनाथ, कुंथुनाथ भगवान् और अरहनाथ भगवान की 17 फीट की प्राचीन प्रतिमा है। 15 मई को तीर्थंकर भगवान श्री शांतिनाथ भगवान के जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक भी है। कमेटी के महामंत्री अशोक झांझरी और मंत्री अतुल कासलीवाल ने बताया कि कमेटी ने देशभर के श्रद्धालुओं के लिए निर्वाण दिवस के दिन एक लाडू की राशि 500 रुपए रखी है। जिनके भी भाव हों या वह खुद आकर लाडू श्री चरणों में अर्पित कर सकते हैं या जो क्षेत्र खाते में राशि भेजकर लाडू चढ़ाकर पुण्य अर्जित कर सकते हैं। इसके लिए खाते में राशि डालकर लाभ लेकर क्षेत्र के कार्य में सहयोग प्रदान किया जा सकता है।</p>
<p>यह जानकारी ट्रस्टी मनीष जैन बड़वानी व प्रचार मंत्री आशीष जैन ने दी। सिद्ध क्षेत्र पावागिरी ऊन सिद्ध क्षेत्र खरगोन में 15 मई को तीर्थंकर भगवान श्री शांतिनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक के शुभ अवसर पर पावागिरी जी ऊन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन जुटने वाले हैं। उन्होंने बताया कि जिन्हें निर्वाण लाडू अर्पित करना है या करवाना है वे बुकिंग राशि कार्यालय में जमा करवा सकता है। विेशेष जानकारी के लिए पदाधिकारियों से मोबाइल पर संपर्क किया जा सकता है।</p>
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		<title>सिहोनिया में 15 मई को महामस्तकाभिषेक होगा: संगीतमय श्री 1008 शांतिनाथ विधान का पुण्य लाभ लेने की अपील  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_mahamastakabhishek_ceremony_will_be_held_in_sihoniya_on_may_15/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 12 May 2026 03:33:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[चंबल संभाग के सुप्रसिद्ध जैन तीर्थ सिहोनियाजी में तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ स्वामी का जन्म, तप एवं मोक्ष कल्याणक महोत्सव विभिन्न धार्मिक सामाजिक कार्यक्रमों के साथ 15 मई को मनाया जाएगा। मुरैना/सिहोनिया से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230; मुरैना/सिहोनिया। चंबल संभाग के सुप्रसिद्ध जैन तीर्थ सिहोनियाजी में तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ स्वामी का जन्म, तप [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>चंबल संभाग के सुप्रसिद्ध जैन तीर्थ सिहोनियाजी में तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ स्वामी का जन्म, तप एवं मोक्ष कल्याणक महोत्सव विभिन्न धार्मिक सामाजिक कार्यक्रमों के साथ 15 मई को मनाया जाएगा। <span style="color: #ff0000">मुरैना/सिहोनिया से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना/सिहोनिया।</strong> चंबल संभाग के सुप्रसिद्ध जैन तीर्थ सिहोनियाजी में तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ स्वामी का जन्म, तप एवं मोक्ष कल्याणक महोत्सव विभिन्न धार्मिक सामाजिक कार्यक्रमों के साथ 15 मई को मनाया जाएगा। श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र कमेटी सिहोनियाजी ने बताया कि जैन समाज के उपासना स्थल अतिशय क्षेत्र सिहोनिया में विराजमान मूलनायक भगवान शांतिनाथ स्वामी के जन्म, तप एवं मोक्ष कल्याणक के पावन अवसर पर जेठ बदी चौदस शुक्रवार 15 मई को प्रातः 7 बजे से मूलनायक भगवान शांतिनाथ स्वामी के सामूहिक अभिषेक, शांतिधारा, नित्यमह पूजन एवं प्रातः 8 बजे से संगीतमय श्री 1008 शांतिनाथ विधान का आयोजन एवं प्रातः 10 बजे से निर्वाण कांड का वाचन करते हुए सामूहिक रूप से निर्वाण लाडू अर्पित किया जाएगा। भगवान शांतिनाथ स्वामी का महामस्तकाभिषेक होगा। इस पावन अवसर पर आसपास के सभी नगरों से सैकड़ों की संख्या में साधर्मी बंधु सिहोनियाजी पहुंचकर तीर्थंकरों की आराधना, उपासना, पूजन, भक्ति करते हुए पुण्यर्जन करेंगे।</p>
<p><strong>अम्बाह एवं मुरैना से निःशुल्क बसों की व्यवस्था </strong></p>
<p>आयोजन समिति द्वारा साधर्मी बंधुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सिहोनिया पहुंचने के लिए अम्बाह एवं मुरैना से निःशुल्क बसों की व्यवस्था की गई है। कार्यक्रम में सम्मिलित होने वाले सभी समाजजनों के लिए आवास, स्वल्पाहार, भोजनादि की सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। अतिशय क्षेत्र सिहोनियाजी कमेटी ने सभी साधर्मी बंधुओं से शुक्रवार 15 मई को अधिकाधिक संख्या में सिहोनियाजी पहुंचने की अपील की है। जिला मुख्यालय मुरैना से लगभग 33 किलोमीटर की दूरी पर स्थित अतिशय क्षेत्र सिहोनियाजी में भूगर्भ से प्राप्त 11 वीं शताब्दी की खड्गासन भगवान शांतिनाथजी (16 फीट) की पाषाण की प्रतिमा मूलनायक के रूप में स्थापित हैं। उसके आजू बाजू में भगवान अरहनाथजी (10 फीट), भगवान कुंथुनाथजी (10 फीट) की पत्थर से तराशी गई मूर्तियाँ स्थापित हैं। वर्तमान में भी गाँव में खुदाई के दौरान जैन तीर्थंकरों की ऐसी मूर्तियाँ मिलती रहती हैं। क्षेत्र पर एक संग्रहालय है, जिसमें प्राप्त सभी मूर्तियों को सहेजकर रखा गया है।</p>
<p><strong> जैन साधु संतों के निरंतर आगमन </strong></p>
<p>जैन तीर्थ एवं उपासना स्थल पर यू तो वर्षभर विभिन्न धार्मिक आयोजन होते रहते हैं एवं प्रतिदिन दूरदराज से साधर्मी बंधुओं का आवागमन होता रहता है। जैन साधु संतों के निरंतर आगमन से क्षेत्र की महत्ता को बल मिलता रहता है। अतिशय क्षेत्र सिहोनियाजी में प्रति वर्ष क्वार वदी दोज को वार्षिक मेले का आयोजन होता है और जेठ बदी चौदस को भगवान शांतिनाथ जी का निर्वाण महोत्सव मनाया जाता है।</p>
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		<title>अंजना शाखा का गौ माता सेवा का प्रेरणादायक कार्य: धर्म भावनाओं का ऐसे सेवा कार्य अंजना शाखा से निरंतर जारी रहेगा </title>
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		<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 15:24:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ईख महापर्व के पावन अवसर पर जीव दया स्थल गौरी के किनारे पर अंजना शाखा द्वारा गौशाला में गौ सेवा का कार्य किया गया। गायों को हरा चारा सब्जी गुड़ चना एवं रोटी खिलाया। भिंड से पढ़िए, यह खबर&#8230; भिंड। ईख महापर्व के पावन अवसर पर जीव दया स्थल गौरी के किनारे पर अंजना शाखा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>ईख महापर्व के पावन अवसर पर जीव दया स्थल गौरी के किनारे पर अंजना शाखा द्वारा गौशाला में गौ सेवा का कार्य किया गया। गायों को हरा चारा सब्जी गुड़ चना एवं रोटी खिलाया। <span style="color: #ff0000">भिंड से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भिंड।</strong> ईख महापर्व के पावन अवसर पर जीव दया स्थल गौरी के किनारे पर अंजना शाखा द्वारा गौशाला में गौ सेवा का कार्य किया गया। गायों को हरा चारा सब्जी गुड़ चना एवं रोटी खिलाया। गौ माता की सेवा कर सभी बहनों को अत्यंत आत्मिक शांति एवं संतोष प्राप्त हुआ। यह सेवा कार्य सभी के लिए एक प्रेरणादायक एवं भाव पूर्वक अनुभव रहा। हमारी धार्मिक चेयरमैन वीरा स्नेहलता ने बताया जीवदया एवं धर्म भावनाओं का ऐसे सेवा कार्य अंजना शाखा से निरंतर जारी रहेगा। अध्यक्ष सुनीता जैन, मंत्रीरेनू जैन, कोषाध्यक्ष सुमन जैन किरण जैन माया जैन कविता जैन स्नेहलता जैन रूबी जैन नीलम जैन आदि लोग मौजूद रहे।</p>
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		<title>विशुद्ध बगिया में खिले 4 नए पुष्प : टीकमगढ़ में भव्य जैनेश्वरी दीक्षा के भक्त बने साक्षी  </title>
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		<pubDate>Sat, 18 Apr 2026 06:41:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[धार्मिक नगरी टीकमगढ़ शुक्रवार को ऐतिहासिक और पुण्यशाली अवसर की साक्षी बनी। पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज संसघ के पावन सान्निध्य एवं दीक्षा प्रदाता के रूप में यहां चार ब्रह्मचारी मुमुक्षुओं ने सांसारिक बंधनों का त्याग कर जैनेश्वरी दीक्षा अंगीकार की। टीकमगढ़ से पढ़िए, यह रिपोर्ट&#8230; टीकमगढ़। धार्मिक नगरी टीकमगढ़ शुक्रवार को ऐतिहासिक और पुण्यशाली [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>धार्मिक नगरी टीकमगढ़ शुक्रवार को ऐतिहासिक और पुण्यशाली अवसर की साक्षी बनी। पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज संसघ के पावन सान्निध्य एवं दीक्षा प्रदाता के रूप में यहां चार ब्रह्मचारी मुमुक्षुओं ने सांसारिक बंधनों का त्याग कर जैनेश्वरी दीक्षा अंगीकार की। <span style="color: #ff0000">टीकमगढ़ से पढ़िए, यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टीकमगढ़।</strong> धार्मिक नगरी टीकमगढ़ शुक्रवार को ऐतिहासिक और पुण्यशाली अवसर की साक्षी बनी। पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज संसघ के पावन सान्निध्य एवं दीक्षा प्रदाता के रूप में यहां चार ब्रह्मचारी मुमुक्षुओं ने सांसारिक बंधनों का त्याग कर जैनेश्वरी दीक्षा अंगीकार की। दीक्षा महोत्सव में देशभर से हजारों गुरुभक्त, धर्मप्रेमी एवं समाजबंधु उपस्थित रहे। इस अवसर पर पंडित श्रेयांश कुमार जैन बडोद, पंडित संतोष कुमार विनोद कुमार रजवास पंडित जय निशांत, अतिशय जैन इंदौर ने जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण की। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि दीक्षा समारोह में पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज ने आशीर्वचन देते हुए कहा कि संयम का मार्ग ही मोक्ष का मार्ग है। विशुद्ध बगिया में आज चार नए पुष्प खिले हैं, जिनकी सुगंध से पूरा समाज सुवासित होगा। संसार के समस्त परिग्रहों का त्याग कर आत्म कल्याण के मार्ग पर बढ़ना सबसे बड़ा पुरुषार्थ है। दीक्षा विधि के बाद नवदीक्षित साधुओं का श्रद्धालुओं ने जय कारा लगाए और नमोस्तु शासन जयवंत हो से दीक्षा स्थल गुंजायमान कर दिया।</p>
<p><strong>विशुद्ध बगिया के नए पुष्पों का परिचय</strong></p>
<p>श्रमण मुनि श्री सकलार्थ सागर जी महाराज</p>
<p>’पूर्वनाम-ब्रह्मचारी श्री प्रवीण जैन</p>
<p>’जनक-जननी- रमेशचंद जैन एवं पुष्पा जैन</p>
<p>’जन्म-17 जून 2003, इंदौर (मप्र)</p>
<p>’लौकिक शिक्षा- बीए अंतिम वर्ष</p>
<p>संघ प्रवेश- 28 अप्रैल 2025</p>
<p>’मुनि दीक्षा- 17 अप्रैल 2026, टीकमगढ़ (मप्र)</p>
<p><strong>श्रमण मुनि श्री सुबोध सागर जी महाराज  </strong></p>
<p>पूर्वनाम- ब्रह्मचारी विलास गांधी</p>
<p>जनक-जननी- तलकचंद गांधी एवं कमलादेवी (सु. कुंथुमति)</p>
<p>जन्म-11 जुलाई 1955, सोलापुर (महाराष्ट्र)</p>
<p>लौकिक शिक्षा-9वीं</p>
<p>विशेष-द्वितीय प्रतिमा व्रत कुंथुगिरि (महा) में लिया,</p>
<p>संघ प्रवेश-मुंबई</p>
<p>मुनि दीक्षा-17 अप्रैल 2026, टीकमगढ़ (मप्र)</p>
<p><strong>श्रमण मुनि श्रीसुप्रभात सागर जी महाराज </strong></p>
<p>पूर्वनाम- ब्रह्मचारी राहुल जैन</p>
<p>’जनक-जननी- राजेंद्र जैन एवं रानी जैन</p>
<p>जन्म-20 सितंबर 2000, सोनागिर</p>
<p>लौकिक शिक्षा- चौथी</p>
<p>विशेष-ब्रह्मचर्य व्रत 24-10-2018,</p>
<p>प्रतिमा व्रत-23-12-2018,</p>
<p>संघ प्रवेश-15-01-2025</p>
<p>मुनि दीक्षा- 17 अप्रैल 2026, टीकमगढ़ (मप्र)</p>
<p><strong> क्षुल्लक श्री सुप्रसन्न सागर जी महाराज  </strong></p>
<p>पूर्वनाम-ब्रह्मचारी राजेश जैन</p>
<p>जनक-जननी-बाबूलाल जैन एवं पुष्पा जैन</p>
<p>जन्म-8 नवंबर 1982, टीकमगढ़ (मप्र)</p>
<p>लौकिक शिक्षा-10वीं</p>
<p>विशेष-ब्रह्मचर्य व्रत 2-10-2024</p>
<p>मुनि दीक्षा-17 अप्रैल 2026, टीकमगढ़ (मप्र)</p>
<p>दीक्षा प्रदाता-पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज</p>
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