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	<title>Dhoop Dashami &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>भगवान पारसनाथ जी का प्रथम अभिषेक और विश्व शांतिधारा किया: उत्तम संयम धर्म और धूप दशमी का त्योहार मनाया  </title>
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		<pubDate>Wed, 03 Sep 2025 11:33:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री दिगंबर जैन मंदिर में मंगलवार को दशलक्षण पर्व का छठा दिन उत्तम संयम धर्म एवं धूप दशमी के रूप में मनाया गया। पंडित अभिषेक शास्त्री और डॉ. निर्मला दीदी ने प्रवचन में कहा कि मन, वचन, काय को काबू में रखना ही संयम धर्म है। इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230; श्री दिगंबर जैन मंदिर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री दिगंबर जैन मंदिर में मंगलवार को दशलक्षण पर्व का छठा दिन उत्तम संयम धर्म एवं धूप दशमी के रूप में मनाया गया। पंडित अभिषेक शास्त्री और डॉ. निर्मला दीदी ने प्रवचन में कहा कि मन, वचन, काय को काबू में रखना ही संयम धर्म है। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>श्री दिगंबर जैन मंदिर में मंगलवार को दशलक्षण पर्व का छठा दिन उत्तम संयम धर्म एवं धूप दशमी के रूप में मनाया गया। पंडित अभिषेक शास्त्री और डॉ. निर्मला दीदी ने प्रवचन में कहा कि मन, वचन, काय को काबू में रखना ही संयम धर्म है। संयम ही मोक्ष मार्ग की सीढ़ी है। संयम को अपने जीवन में उतारकर भविष्य को प्रकाशमय किया जा सकता है। मन बहुत चंचल है और वह हमेशा गलत राह में भटकता रहता है। इस पर संयम से कंट्रोल किया जा सकता है। हमें अपने जीवन के प्रतिदिन के खानपान बोलचाल रहन सहन में संयम रखना चाहिए। तभी जीवन महान बन सकता है। प्रातः मूलवेदी 1008 पारसनाथ भगवान का प्रथम अभिषेक और विश्व शांतिधारा मुन्ना-रीता जैन, दिलीप आरती जैन बाकलीवाल परिवार को मिला। भगवान का मंगल विहार और प्रथम अभिषेक का सौभाग्य कमल राजीव जैन छाबड़ा परिवार को मिला। भगवान महावीर प्रभु की शांतिधारा सुरेंद-सौरभ सरिता जैन काला दूसरी ओर से नवीन सम्यक जैन गंगवाल के परिवार ने किया। आदिनाथ भगवान के समक्ष 1008 शांतिनाथ भगवान का प्रथम अभिषेक और शांतिधारा, इंदु, अनूप-सार्थक जैन सेठी परिवार ने किया। नया मंदिर में श्रीजी पर प्रथम अभिषेक और शांतिधारा का सौभाग्य शांतिलाल-राजेश देवी जैन छाबड़ा के परिवार को प्राप्त हुआ।</p>
<p>दोपहर में जैन समाज के सभी भक्तजनों ने धूप दशमी का पर्व मनाया और अपने खराब कर्मों को नाश करने के लिए दोनों मंदिरों में अग्नि में धूप खेने डालने का काम किया। महिलाओं ने लाल और पीले साड़ी में धूप दशमी की पूजा की और धूप विसर्जन किया। सह मंत्री राज् जैन छाबड़ा, कोषाध्यक्ष सुरेंद्र जैन काला और समाज के पदाधिकारी के मार्गदर्शन में सभी पूजा विधान के कार्य किया जा रहे हैं। संध्या में महाआरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होगा। महिला समाज बालिका समाज और जैन युवक समिति की ओर से किया जाएगा। यह जानकारी समाज के मीडिया प्रभारी राजकुमार जैन अजमेरा और नवीन जैन ने दी।</p>
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		<title>धूप दशमी पर आदिनाथ चैत्यालय में हुआ अभिषेक : सामूहिक रूप से सुगंधित धूप अर्पित कर की प्रार्थना  </title>
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		<pubDate>Wed, 03 Sep 2025 11:15:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पर्यूषण पर्व के पावन अवसर पर श्री आदिनाथ दिगंबर जैन चैत्यालय में निरंतर श्री जिनेंद्र प्रभु की भक्ति का दौर है। देव शास्त्र गुरु आराधक आशीष जैन ने बताया कि नगर के जीवाजी गंज में स्थित आदिनाथ चैत्यालय में दसलक्षण पर्व में भक्तिमय माहौल बना हुआ है। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पर्यूषण पर्व के पावन अवसर पर श्री आदिनाथ दिगंबर जैन चैत्यालय में निरंतर श्री जिनेंद्र प्रभु की भक्ति का दौर है। देव शास्त्र गुरु आराधक आशीष जैन ने बताया कि नगर के जीवाजी गंज में स्थित आदिनाथ चैत्यालय में दसलक्षण पर्व में भक्तिमय माहौल बना हुआ है। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> पर्यूषण पर्व के पावन अवसर पर श्री आदिनाथ दिगंबर जैन चैत्यालय में निरंतर श्री जिनेंद्र प्रभु की भक्ति का दौर है। देव शास्त्र गुरु आराधक आशीष जैन ने बताया कि नगर के जीवाजी गंज में स्थित आदिनाथ चैत्यालय में दसलक्षण पर्व में भक्तिमय माहौल बना हुआ है। प्रतिदिन प्रातः से ही भक्तों का जमावड़ा लग जाता है। सभी लोग पूजन के विशेष वस्त्र धारण कर, हार मुकुट आदि से सुसज्जित होकर सर्वप्रथम जिनेंद्र प्रभु का जलाभिषेक और शांतिधारा करते हैं। तत्पश्चात पूर्ण भक्ति, श्रद्धा एवं समर्पण के साथ अष्टद्रव्य से वीतरागी प्रभु का पूजन किया जाता है। मंगलवार को पर्यूषण पर्व के छठवें दिन धूप दशमी का पर्व हर्षाेल्लास से मनाया गया। इस अवसर पर आशीष जैन, मिथुन जैन, वनवारी जैन, महेश चंद जैन, ऋषभ जैन, पवन जैन, राजेंद्र जैन, मनोज जैन, मार्दव जैन सहित नन्हें मुन्ने बच्चों ने अभिषेक पूजन में सहभागिता प्रदान की। धूप दशमी के दिन नगर के</p>
<p>सभी जैन श्रावकों ने आदिनाथ चैत्यालय पहुंचकर जिनेंद्र प्रभु की आराधना की सामूहिक रूप से सभी ने शुद्ध सुगंधित धूप को अग्नि में समर्पित करते हुए अपने अष्टकर्मों के विनाश हेतु वीर प्रभु से प्रार्थना की।</p>
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		<title>धूप दशमी और अनंत चतुर्दशी का विशेष महत्व : पर्युषण पर्वराज 28 अगस्त से 6 सितंबर तक मनाया जाएगा  </title>
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		<pubDate>Tue, 26 Aug 2025 14:58:56 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पर्वराज पर्युषण पूरे भारत में दिगंबर जैन समाज बड़ी भक्ति भाव से मनाएगा। नगर के सभी जिनालयों में पर्व राज पर्यूषण महापर्व की विशेष साज सज्जा के साथ तैयारी की गई है। इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230; इंदौर। पर्वराज पर्युषण पूरे भारत में दिगंबर जैन समाज बड़ी भक्ति भाव से मनाएगा। नगर के सभी जिनालयों [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पर्वराज पर्युषण पूरे भारत में दिगंबर जैन समाज बड़ी भक्ति भाव से मनाएगा। नगर के सभी जिनालयों में पर्व राज पर्यूषण महापर्व की विशेष साज सज्जा के साथ तैयारी की गई है। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> पर्वराज पर्युषण पूरे भारत में दिगंबर जैन समाज बड़ी भक्ति भाव से मनाएगा। नगर के सभी जिनालयों में पर्व राज पर्यूषण महापर्व की विशेष साज सज्जा के साथ तैयारी की गई है। राजेश जैन दद्दू ने बताया कि पर्युषण पर्व में 10 दिन जिनेंद्र प्रभु महा अर्चना भक्ति की जाएगी। 28 अगस्त से 6 सितंबर तक सभी जिन मंदिरों में प्रतिदिन प्रातः 6.30 बजे से श्रीजी का जलाभिषेक एवं शांतिधारा, नित्य नियम पूजन एवं विशेष दसलक्षण विधान आदि नगर में विराजित आचार्य संसघ, आर्यिका माता एवं मुनि संघों की प्रातः 9 बजे से मंगल देशना, प्रातः 10 बजे मुनिराजों की आहारचर्या, दोपहर 3 बजे से सिद्धांत ग्रंथ तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन (प्रतिक्रमण), शाम 6.30 बजे से सामूहिक सामायिक पाठ, 7.30 बजे श्रीजी की संगीतमय महाआरती, रात्रि 8 बजे नगर के विद्वत एवं बाहर से पधारे शास्त्रियों द्वारा आगम शास्त्र सभा, रात्रि में 9 बजे सभी जिनालयों में पाठशालाओं के बच्चों एवं महिला मंडल के सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। दद्दू ने कहा कि पर्वराज पर्यूषण पर्व के दिनों में धूप दशमी एवं अनंत चतुर्दशी का विशेष महत्व है।</p>
<p><strong>सुहाग की मंगल कामना के लिए उपवास</strong></p>
<p>धूप दशमी के दिन नगर के सभी जिन मंदिरों में विशेष साज सज्जा आकर्षक मंडल एवं झांकियों को विशेष तैयारी के साथ प्रस्तुत किया जाता है। दद्दू ने कहा कि धूप दशमी को सुगंध दशमी भी कहा जाता है। इस दिन सभी समाज जन सपरिवार नगर के सभी जिनालयों के दर्शनार्थ जाते हैं। सुगंधित धूप अग्नि में समर्पित कर अष्टकर्मों के विनाश के लिए प्रार्थना करते हैं। धूप दशमी पर महिलाएं अपने सुहाग की मंगल कामना के लिए उपवास एवं अपने पति की सुख शांति समृद्धि के लिए प्रार्थना करती हैं।</p>
<p><strong>विश्व की मंगल भावना भाते हैं</strong></p>
<p>पर्वराज पर्यूषण पर्व के अंतिम दिन अनंत चतुर्दशी को सभी समाज जन सपरिवार प्रभु की विशेष आराधना करते हैं। इस दिन शायद ही कोई जैन ऐसा होगा, जो अभिषेक, पूजन और व्रत नहीं करता होगा। इस दिन जैन परिवार का प्रत्येक सदस्य अपनी सामर्स्थानुसार श्री जिनेंद्र प्रभु की आराधना करते हुए मोक्ष लक्ष्मी की मंगल भावना भाते है। दोपहर में श्रीजी को पालकी विमान में विराजमान कर श्रीजी की शोभायात्रा निकालकर श्री जिनेंद्र प्रभु का जलाअभिषेक कर विश्व की मंगल भावना भाते हैं।</p>
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		<title>सुगंध दशमी का पर्व मनाया : आत्मा की विशुद्धि का पर्व है दशलक्षण महापर्व &#8211; आर्यिका रत्न धारणामति </title>
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		<pubDate>Sat, 14 Sep 2024 08:52:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दशलक्षण पर्व के छठे दिन उत्तम संयम धर्म मनाया गया, धूप दशमी का भी अनुष्ठान हुआ। प्रातःकालीन बेला में भगवान का अभिषेक व शांतिधारा की गई, इस मौके पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए आर्यिका रत्न धारणामति माताजी ने कहा कि संयम धर्म इंद्रिय को वश में रखना ही इंद्रिय संयम है। स्पर्श, रसना, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दशलक्षण पर्व के छठे दिन उत्तम संयम धर्म मनाया गया, धूप दशमी का भी अनुष्ठान हुआ। प्रातःकालीन बेला में भगवान का अभिषेक व शांतिधारा की गई, इस मौके पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए आर्यिका रत्न धारणामति माताजी ने कहा कि संयम धर्म इंद्रिय को वश में रखना ही इंद्रिय संयम है। स्पर्श, रसना, घ्राण, चक्षु और कर्ण ये पांच इंद्रियां हैं, इन इंद्रियों के विषयों में आसक्त हुआ यह कि मोही प्राणी अपने स्वभाव को भूल रहा है, अपनी ही अज्ञानता का परिणाम है कि सामर्थ्&#x200d;य शक्तिवान होते हुए भी इनका दास बना हुआ है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>महरौनी (ललितपुर)।</strong> दशलक्षण पर्व के छठे दिन उत्तम संयम धर्म मनाया गया, धूप दशमी का भी अनुष्ठान हुआ। प्रातःकालीन बेला में भगवान का अभिषेक व शांतिधारा की गई, इस मौके पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए आर्यिका रत्न धारणामति माताजी ने कहा कि संयम धर्म इंद्रिय को वश में रखना ही इंद्रिय संयम है। स्पर्श, रसना, घ्राण, चक्षु और कर्ण ये पांच इंद्रियां हैं, इन इंद्रियों के विषयों में आसक्त हुआ यह कि मोही प्राणी अपने स्वभाव को भूल रहा है, अपनी ही अज्ञानता का परिणाम है कि सामर्थ्&#x200d;य शक्तिवान होते हुए भी इनका दास बना हुआ है।</p>
<p>सांध्यकालीन बेला में भगवान जिनेन्द्र की संगीतमय आरती की गयी, तत्पश्चात श्री विद्यासागर पाठशाला के तत्वावधान में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसका शुभारंभ नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि दुष्यंत बडौनिया ने किया। दिगम्बर जैन पंचायत द्वारा नगर पंचायत प्रतिनिधि का माल्यार्पण कर शॉल और श्रीफल भेंट कर स्वागत किया।</p>
<p>सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत भगवान नेमीनाथ की बारात और जंगल गमन नाट्य प्रस्तुति की गयी।पात्रों द्वारा अभिनय कर सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में सकल दिगम्बर जैन समाज का सहयोग रहा ।वहीं दशलक्षण महापर्व श्री यशोदय तीर्थ,श्री शांतिनाथ जिनालय एवं श्री चंद्रप्रभु जिनालय में भी धार्मिक कार्यक्रमों की धूम रही।</p>
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		<title>सुगंध दशमी पर श्रावकों ने जैन मंदिरों में की धूप विसर्जित :  संयम की आराधना ही जीवन की श्रेष्ठ साधना &#8211; अविचल सागर </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_worship_of_restraint_is_the_best_spiritual_practice_of_life_avichal_sagar/</link>
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		<pubDate>Sat, 14 Sep 2024 07:20:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[संयमी व्यक्ति का जीवन संयत और निर्मल बताते हुए मुनि अविचल सागर महाराज ने कहा जिनको हम मन से निषिद्ध कर देते हैं और मन पर हावी नहीं होने देते संयम की प्रथम सीढ़ी है। इसके लिए जीवन में सतत साधना की जरूरत है। पढ़िए राजीव सिंघाई की रिपोर्ट&#8230; ललितपुर। संयमी व्यक्ति का जीवन संयत [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>संयमी व्यक्ति का जीवन संयत और निर्मल बताते हुए मुनि अविचल सागर महाराज ने कहा जिनको हम मन से निषिद्ध कर देते हैं और मन पर हावी नहीं होने देते संयम की प्रथम सीढ़ी है। इसके लिए जीवन में सतत साधना की जरूरत है। पढ़िए राजीव सिंघाई की रिपोर्ट&#8230;</strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> संयमी व्यक्ति का जीवन संयत और निर्मल बताते हुए मुनि अविचल सागर महाराज ने कहा जिनको हम मन से निषिद्ध कर देते हैं और मन पर हावी नहीं होने देते संयम की प्रथम सीढ़ी है। इसके लिए जीवन में सतत साधना की जरूरत है। जो वस्तु मन से उतर जाती है उसका हमेशा के लिए निषेध तो हो जाता है। लेकिन जब कोई दूसरा व्यक्ति किसी के लिए निषिद्ध के लिए प्रेरित करता है तो उसके प्रति आकर्षण रहता है। मुनि श्री ने संयम को साधना की उत्कृष्ठ अवस्था बताते हुए कहा संयम की आराधना ही जीवन की श्रेष्ठ साधना है जिसके बंधन में बंधा मनुष्य का जीवन परोपकारी और शान्ति को प्राप्त करता है।</p>
<p>पर्यूषण पर्व पर अभिनंदनोदय तीर्थ में धर्मसभा का शुभारम्भ आचार्य श्री के चित्र के सम्मुख श्रेष्ठी आनंद जैन दैलवारा देवेन्द्र जैन नीलम मोदी द्वारा किया गया। जबकि तत्वार्थ सूत्र का वाचन कु० तनुष्का एवं अनुभा जैन एवं अर्घ समर्पण सुदीप जैन ममता मोहनी परिवार द्वारा किया गया। आदिनाथ मंदिर नईवस्ती में सायंकाल 48 दीपों से भव्य आरती में श्रद्धालुजन भक्ति पूर्वक सम्मलित हो रहे हैं। सायंकाल धर्मसभा में पं. अनुज शास्त्री सांगानेर ने कहा दिगम्बर साधू संत संयम त्याग और तपस्या की साक्षात मूर्ति है उनकी साधना को देखकर हम जीवन में संयम धारण कर अपना जीवन आनंदित बना सकते हैं।</p>
<p>ज्ञान महिला इकाई के संयोजन में आचार्य श्री विद्यसागर महाराज संबंधी प्रश्नमंच का आयोजन हुआ जिसमें विजेता प्रतिभागियों को जैन पंचायत के मंत्री कैप्टन राजकुमार जैन, प्रबंधक जितेन्द्र जैन, सुवेन्दु मोदी, सत्येन्द्र गदयाना प्रफुल्ल जैन ने पुरूष्कृत कर सम्मानित किया। जैन अटामंदिर में पं. पंकज जैन शास्त्री के मार्गदर्शन में भक्ताम्मर आधारित प्रतियोगिता सम्पन्न हुई जिसकी संयोजिना अंशिका जैन गुगरवारा ने की जिसमें प्रमुख रूप से प्रबंधक मनोज जैन बबीना, अजय जैन गंगचारी, सजल जैन दिलीप चौधरी मौजूद रहे। सुगंध दशमी पर आज प्रातः काल से ही नगर के जैन अभिनंदनोदय तीर्थ, पार्श्वनाथ नया मंदिर, जैन अटामंदिर, बडा मंदिर याहुलि नगर, नईवस्ती आदिनाथ मंदिर चन्द्रप्रभु मंदिर डोढाघाट, शान्तिनगर मंदिर गांधीनगर इलाइट जैन मंदिर, सिविल लाइन जैन मंदिर, एम्बोशिया कालौनी पार्श्वनाथ कालौनी मुनिसुव्रतनाथ मंदिर गौशाला में पहुचकर धूप विसर्जित कर पुण्यजन किया।</p>
<p>पर्युषण पर्व पर जैन मंदिरों में बच्चों ने आकर्षक झांकियां लगाई जिसको देखने श्रद्धालुओं का दिन भर तांता लगा रहता है। पर्युषण पर्व पर व्यवस्थाओं को जैन पंचायत अध्यक्ष डॉ.अक्षय टडैया, महामंत्री आकाश जैन, सौरभ सीए सनत जैन खजुरिया, प्रतीक इमलया, मीडिया प्रभारी अक्षय अलया मंदिर प्रबंधक मोदी पंकज जैन, अशोक दैलवारा जिनेन्द्र जैन रजपुरा, मनीष जैन, अजित जैन गदयाना आनंद जैन भावनगर आनंद जैन संजय जैन ककडारी, जितेन्द जैन सुवेन्द मोदी विमल जैन पाय आदि का सक्रिय योगदान मिल रहा है।</p>
<p><strong>अनंत चतुर्दशी पर अंडा मांस शराब की दुकानें बंद हेतु महासमिति ने दिया ज्ञापन</strong></p>
<p>दिगम्बर जैन महासमिति ने आज कलेक्टेट में जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी को ज्ञापन देकर महानपर्व प्पर्यूषण के समापन अनंत चतुर्दशी पर 17 सितम्बर को जिले में अण्डा मांस मछली शराब की विक्री निषिद्ध किए जाने हेतु मांग की। जिलाधिकारी ने उक्त संबंध में नगरपालिका एवं पुलिस के माध्यम से ऐसे प्रतिष्ठानों को अनंतचतुर्दशी पर बंद रखने हेतु निर्देश दिए। ज्ञापन देने वालों में प्रमुख रूप से महेन्द्र जैन मडवैया अध्यक्ष राजकुमार जैन मोदी, व्रजकिशोर जैन एड, महेश अमरा, शादीलाल जैन एड, अरूण जैन एड आदि मौजूद रहे।</p>
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		<title>गुदड़ी मंसूर खां जैन मंदिर में आयोजन : मनाया उत्तम संयम धर्म एवं सुगन्ध दशमी महापर्व </title>
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					<description><![CDATA[श्री शीतलनाथ दिगंबर जैन मंदिर गुदड़ी मंसूर खां में पर्यूषण महापर्व चल रहे हैं महापर्व के छठवें दिन शुक्रवार को उत्तम संयम धर्म एवं सुगंध दशमी महापर्व मनाया गया। जिसमें भक्तों ने भगवान शीतलनाथ का अभिषेक एवं शांतिधारा की। पढ़िए शुभम जैन की रिपोर्ट.. आगरा। श्री शीतलनाथ दिगंबर जैन मंदिर गुदड़ी मंसूर खां में पर्यूषण [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री शीतलनाथ दिगंबर जैन मंदिर गुदड़ी मंसूर खां में पर्यूषण महापर्व चल रहे हैं महापर्व के छठवें दिन शुक्रवार को उत्तम संयम धर्म एवं सुगंध दशमी महापर्व मनाया गया। जिसमें भक्तों ने भगवान शीतलनाथ का अभिषेक एवं शांतिधारा की।<span style="color: #ff0000"> पढ़िए शुभम जैन की रिपोर्ट..</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> श्री शीतलनाथ दिगंबर जैन मंदिर गुदड़ी मंसूर खां में पर्यूषण महापर्व चल रहे हैं महापर्व के छठवें दिन शुक्रवार को उत्तम संयम धर्म एवं सुगंध दशमी महापर्व मनाया गया। जिसमें भक्तों ने भगवान शीतलनाथ का अभिषेक एवं शांतिधारा की। विधानचार्य रविंद्र जैन शास्त्री के कुशल निर्देशन में उपस्थित सभी भक्तों ने मंत्रोच्चारण के साथ उत्तम संयम धर्म एवं सुगंध दशमी की पूजन की क्रियाएं संपन्न कीं।</p>
<p>विधानचार्य रविंद्र जैन शास्त्री ने उत्तम संयम धर्म के बारे में भक्तों को बताते हुए कहा कि मन पर संयम लाए बिना जीवन का कल्याण नहीं हो सकता है इस संयम धर्म कहते हैं। दोपहर में सुगंध दशमी के अवसर पर रंगोली एवं रंग भरों प्रतियोगिता आयोजित की गई। जिसमें बड़ी संख्या में महिला में बच्चों ने भाग लिया|</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-66240" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/WhatsApp-Image-2024-09-14-at-12.42.50-PM.jpeg" alt="" width="1600" height="900" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/WhatsApp-Image-2024-09-14-at-12.42.50-PM.jpeg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/WhatsApp-Image-2024-09-14-at-12.42.50-PM-300x168.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/WhatsApp-Image-2024-09-14-at-12.42.50-PM-1024x576.jpeg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/WhatsApp-Image-2024-09-14-at-12.42.50-PM-768x432.jpeg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/WhatsApp-Image-2024-09-14-at-12.42.50-PM-1536x864.jpeg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/WhatsApp-Image-2024-09-14-at-12.42.50-PM-990x557.jpeg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/WhatsApp-Image-2024-09-14-at-12.42.50-PM-1320x743.jpeg 1320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/WhatsApp-Image-2024-09-14-at-12.42.50-PM-470x264.jpeg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/WhatsApp-Image-2024-09-14-at-12.42.50-PM-640x360.jpeg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/WhatsApp-Image-2024-09-14-at-12.42.50-PM-215x120.jpeg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/WhatsApp-Image-2024-09-14-at-12.42.50-PM-414x232.jpeg 414w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />साय:काल 7:00 बजे 108 दीपकों से प्रभु शीतलनाथ की मंगल आरती की|इस अवसर पर वीरेंद्र जैन,नरेश जैन राकेश जैन पार्षद, सुभाष जैन,धर्मेंद्र जैन,संजय जैन, देवेंद्र जैन,अशोक जैन सुमन जैन सुशील जैन,अल्पना जैन सुनीता जैन समस्त गुदड़ी मंसूर खां जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।</p>
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		<title>धूप की खुशबू से महके जिनालय : मनोहारी झांकियों से सजे मंदिर </title>
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		<pubDate>Sat, 14 Sep 2024 07:15:57 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर सेक्टर 7 आवास विकास कालोनी सिकंदरा में पर्युषण महापर्व के मौके पर उत्तम संयम धर्म के छठवे दिन सुगंध दशमी का पर्व मनाया गया। सर्व प्रथम मूल नायक भगवान श्री शांतिनाथ जी एवं भगवान महावीर भगवान का अभिषेक चार महानुभावों द्वारा स्वर्ण कलश से किया गया और इन्हीं चारों महानुभावों द्वारा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर सेक्टर 7 आवास विकास कालोनी सिकंदरा में पर्युषण महापर्व के मौके पर उत्तम संयम धर्म के छठवे दिन सुगंध दशमी का पर्व मनाया गया। सर्व प्रथम मूल नायक भगवान श्री शांतिनाथ जी एवं भगवान महावीर भगवान का अभिषेक चार महानुभावों द्वारा स्वर्ण कलश से किया गया और इन्हीं चारों महानुभावों द्वारा रजत मुकुट और माला धारण कर रजत झारियौं से शांति धारा भी की गई। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राहुल जैन की रिपोर्ट&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर सेक्टर 7 आवास विकास कालोनी सिकंदरा में पर्युषण महापर्व के मौके पर उत्तम संयम धर्म के छठवे दिन सुगंध दशमी का पर्व मनाया गया। सर्व प्रथम मूल नायक भगवान श्री शांतिनाथ जी एवं भगवान महावीर भगवान का अभिषेक चार महानुभावों द्वारा स्वर्ण कलश से किया गया और इन्हीं चारों महानुभावों द्वारा रजत मुकुट और माला धारण कर रजत झारियौं से शांति धारा भी की गई। इसे धूप दशमी, धूप खेवन पर्व भी कहा जाता है। इस पर्व के तहत जैन धर्मावलंबी सभी जैन मंदिरों में जाकर श्रीजी के चरणों में धूप अर्पित करते हैं। जिससे वायुमंडल सुगंधित व स्&#x200d;वच्&#x200d;छ हो जाता है।</p>
<p>धूप की सुगंध से जिनालय महक उठते है। सभी श्रद्धालुओं ने धूप चढाई गयी l मंदिर जी में नवीन रजत पंचमेरू, (रजत व स्वर्ण) गंगा जमुनी मय अस्सी मंदिरों के साथ स्थापित किए गए। मुख्य मेरु की स्थापना श्रावक श्रेष्ठी मगन कुमार जैन कोषाध्यक्ष ने की उनकी ओर से स्थापना मंत्री विजय निमोरव ने की। शेष चारौं मेरु चार अन्य महानुभावों द्वारा उनकी कीमत देकर प्राप्त हुआ।यह क्रमश यज्ञनायक परिवार से श्रावक श्रेष्ठी अरुण जैन, संस्थापक ट्रस्टी शोभित जैन सेक्टर छह, श्रावक श्रेष्ठी अनिल जैन पर्युल्ल जैन सेक्टर दस मोटर वाले, श्रावक श्रेष्ठी अनिल आदर्श जैन संभव जैन संस्थापक ट्रस्टी व श्रावक श्रेष्ठी मानिक चंद बैनारा दीपक बैनारा विकास बैनारा सेक्टर छह ई थे।</p>
<p>सभी मेरुओं पर सोलह सोलह मंदिर बनाए गए हैं। इसके उपरांत सामूहिक आरती और संगीत मय पूजन किया गया विधि विधान की क्रिया श्री शुभम जैन शास्त्री एवं आदिश जैन मथुरा द्वारा कराई गई l आज पंडित शुभम शास्त्री एवं आदिश जैन शास्त्री ने कहा संयम बड़ी सावधानी से&#8221; अपनी इंद्रियों को वश मे करना, संयम है । व्रत व समिति का पालन करना, मन-वचन-काय की अशुभ प्रवत्तियों का त्याग करना, इन्द्रियों को वश में करना उत्तम संयम धर्म है। सभी जीवों की रक्षा करना तथा करने का भाव निरंतर होना, प्राणी संयम है। श्री शांतिनाथ युवा मंडल ने मंदिर में कुंडलपुर वाले बाबा की प्रथम तीर्थंकर बड़े बाबा श्री आदिनाथ भगवान व 24वें तीर्थंकर शासक नायक भगवान महावीर स्वामी जी की मनमोहक झांकी, भगवान का पालना, झरना, गाय का दूध के नीचे भगवान महावीर की मूर्ति निकालते हुई, आदि झांकी सजवाई। इनका अनावरण एवं झुलाने पालना का काम श्रीमती बेबी जैन व आरती करने का सौभाग्य ने वंदना बाकलीवाल ने प्राप्त किया।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-66235" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/WhatsApp-Image-2024-09-14-at-12.42.04-PM.jpeg" alt="" width="1366" height="1600" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/WhatsApp-Image-2024-09-14-at-12.42.04-PM.jpeg 1366w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/WhatsApp-Image-2024-09-14-at-12.42.04-PM-256x300.jpeg 256w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/WhatsApp-Image-2024-09-14-at-12.42.04-PM-874x1024.jpeg 874w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/WhatsApp-Image-2024-09-14-at-12.42.04-PM-768x900.jpeg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/WhatsApp-Image-2024-09-14-at-12.42.04-PM-1311x1536.jpeg 1311w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/WhatsApp-Image-2024-09-14-at-12.42.04-PM-990x1160.jpeg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/WhatsApp-Image-2024-09-14-at-12.42.04-PM-1320x1546.jpeg 1320w" sizes="(max-width: 1366px) 100vw, 1366px" />जैन समाज के लोग देखने के उत्साहित थे। इसके बाद श्री जी की आरती उतारी। शांतिनाथ युवा मंच के जितेश जैन, वैभव जैन, मोहित जैन, राकेश जैन पेंट, विपुल जैन, राकेश जैन टीचर,आशीष जैन,आलोक जैन,सिद्धार्थ जैन, दीपेश जैन, दीपक बैनारा, अनन्त जैन, अभिषेक जैन, मीडिया प्रभारी राहुल जैन थे l आज रंगोली प्रतियोगिता हुई एवं शास्त्र, आरती के थाल सजाए गए। श्री शांतिनाथ मंदिर प्रबंध कमेटी के राजेश बैनाड़ा, विजय जैन निमोरब, मगन कुमार जैन, महेश चंद जैन, अनिल आदर्श जैन, अरुण जैन, सतीश जैन, हेमा जैन, राजेंद्र जैन, राकेश जैन पेंट, मनोज जैन, मीडिया प्रभारी राहुल जैन सहित सकल जैन समाज मौजूद आदि थे। 14 सितम्बर को सुबह 7 बजे अभिषेक पूजन एवं श्री शान्तिनाथ पाठशाला की प्रस्तुति कार्यक्रम शाम को सांय 8:30 बजे से होगी l</p>
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		<title>भक्ति भाव पूर्वक से मनाया धूप दशमी का पर्व : संयम व्यक्ति को पूज्य और वंदनीय बनाता है- गुणमाला दीदी </title>
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		<pubDate>Sat, 14 Sep 2024 07:10:33 +0000</pubDate>
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<p><strong>पर्वाधिराज दसलक्षण पर्यूषण का छठा दिन श्रद्धालु भक्त जनों ने उत्तम संयम धर्म के रूप में मनाया। धर्म और ज्ञान की गंगा बहा रहीं बुंदेलखंड कुंडलपुर से आई गुणमाला दीदी ने अपनी पीयूष वाणी मे भक्तजनों को कहा कि संयम समझने का नहीं अंतरंग में उतारने का विषय है। संयम व्यक्ति को पूज्य और वंदनीय बनाता है और इसको भगवान देवता भी मस्कार करते हैं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह रिपोर्ट&#8230;       </span></strong></p>
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<p><strong>झुमरीतिलैया।</strong> पर्वाधिराज दसलक्षण पर्यूषण का छठा दिन श्रद्धालु भक्त जनों ने उत्तम संयम धर्म के रूप में मनाया। धर्म और ज्ञान की गंगा बहा रहीं बुंदेलखंड कुंडलपुर से आई गुणमाला दीदी ने अपनी पीयूष वाणी मे भक्तजनों को कहा कि संयम समझने का नहीं अंतरंग में उतारने का विषय है। संयम व्यक्ति को पूज्य और वंदनीय बनाता है और इसको भगवान देवता भी नमस्कार करते हैं। बिना संयम के मोक्ष की प्राप्ति नहीं हो सकती है। दूसरों पर कंट्रोल नहीं अपने पर कंट्रोल करो जीवन को संयमित और नियंत्रित बनाना ही संयम है। मनुष्य को बाहर से नहीं अंदर से जागने की आवश्यकता है। इंद्रियों पर कंट्रोल करके ही संयम धर्म को धारण किया जा सकता है। मनुष्य को हमेशा विवेक पूर्वक काम करना चाहिए। यत्न पूर्वक कार्य करने से ही संयम होता है नियम और संयम के साथ जीवन जीना चाहिए। इसके बिना मनुष्य भी पशु के समान है।</p>
<p>महात्मा योगी का जीवन हमेशा स्वतंत्र जीवन होता है और मन को अपने अनुसार चलाते हैं परंतु भोगी व्यक्ति मन का गुलाम बन कर जीते हैं। निर्ग्रंथ के बिना निर्वाण की प्राप्ति नहीं हो सकती हैं। संसार के बंधन को तोड़ कर संयम धर्म को धारण किया जा सकता है,अपने को व्यवस्थित बना लेना ही संयम है,प्राणों को छोड़कर प्रण को धारण करने वाला ही संयमी होता है। इससे पहले श्रद्धालु भक्त जनों ने दोनों मंदिरों में भगवान के समक्ष बड़े ही भक्ति भाव पूर्वक&#8221; धूप दशमी&#8221; का पर्व मनाया। विश्व शांति मंत्रों को बोलकर कर्मों की निर्जरा के लिए धूप अग्नि में विसर्जित किया गया। प्रातः विधान अभिषेक पूजा में सुबोध गंगवाल ,आशा गंगवाल, शशि छाबडा और नीलम सेठी ने अपने भक्ति मय संगीत भजनों से लोगों को आनंदित एवं भाव विभोर कर रहे हैं।</p>
<p>प्रातः नया मंदिर में मूल नायक 1008 महावीर भगवान का प्रथम अभिषेक व शांति धारा का सौभाग्य शांति लाल-राजेश देवी छाबडा के परिवार को मिला। बड़ा मंदिर में मूल नायक पारसनाथ भगवान का प्रथम अभिषेक व शांति धारा का सौभाग्य जय कुमार-त्रिशला मनीष गंगवाल के परिवार को मिला। पांडुकशिला पर भगवान को विराजमान एवं प्रथम अभिषेक शांति धारा का सौभाग्य आशीष- अभिषेक अक्षय जैन गंगवाल के परिवार को मिला। दसलक्षण व्रतधारी परिवारों ने भी भगवान की शांति धारा की। पांडु्कशिला पर भगवान को विराजमान करने एवं प्रथम अभिषेक ओर शांतिधारा समाज के कोषाध्यक्ष सुरेन्द-सरिता सौरभ काला परिवार को प्राप्त हुआ। आज के विधान के पुण्यार्जक परिवार त्रिशला नेहा गंगवाल परिवार एवं अशोक अनिल विकास पटौदी परिवार थे।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-66227" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240914-WA0007.jpg" alt="" width="1093" height="960" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240914-WA0007.jpg 1093w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240914-WA0007-300x263.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240914-WA0007-1024x899.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240914-WA0007-768x675.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240914-WA0007-990x870.jpg 990w" sizes="(max-width: 1093px) 100vw, 1093px" />दोपहर में गुणमाला दीदी और चंदा दीदी के द्वारा तत्त्वार्थसूत्र का वाचन भक्तजनों के बीच किया गया। संध्या रात्रि में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम निधि झांझरी, आरची छाबड़ा के निर्देशन में धार्मिक अंताक्षरी का कार्यक्रम हुआ। सभी विजेता प्रतियोगी को ओम -हीरा देवी सेठी और कमल-सोना सेठी के द्वारा पुरुस्कार दिया गया। समाज के पदाधिकारी राज छाबड़ा, सुरेंद्र काला, ललित सेठी, सुशील छाबड़ा, सुरेश झाझंरी, जय कुमार गंगवाल, जैन समाज के मीडिया प्रभारी नवीन जैन, राजकुमार अजमेरा पर्युषण महापर्व को सफल बनाने में लगे हुए हैं।</p>
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		<title>उत्तम संयज धर्म पर दिए प्रवचन :  उन्नति का सोपान संयम-धर्म महान &#8211; आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी </title>
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		<pubDate>Sat, 14 Sep 2024 05:32:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पर्युषण महापर्व पर आयोजित श्रावक संयम संस्कार शिविर में दिगम्बर जैनाचार्य 108 श्री विशुद्ध सागर जी गुरुदेव ने संबोधन करते हुए कहा कि मनुष्य-भव, उच्च-कुल, विवेक, बुद्धि, निरोगता, आत्म-कल्याण की भावना, सद् गुरु, सदोपदेश संयम धारण, आत्मोन्मुखी दृष्टि जीवन में बहुत दुर्लभ है। समुद्र में पडा रत्न पुनः मिलना सम्भव है। परन्तु पुनः नर तन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पर्युषण महापर्व पर आयोजित श्रावक संयम संस्कार शिविर में दिगम्बर जैनाचार्य 108 श्री विशुद्ध सागर जी गुरुदेव ने संबोधन करते हुए कहा कि मनुष्य-भव, उच्च-कुल, विवेक, बुद्धि, निरोगता, आत्म-कल्याण की भावना, सद् गुरु, सदोपदेश संयम धारण, आत्मोन्मुखी दृष्टि जीवन में बहुत दुर्लभ है। समुद्र में पडा रत्न पुनः मिलना सम्भव है। परन्तु पुनः नर तन मिलना अत्यंत कठिन है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नांदणी मठ (महाराष्ट्र)।</strong> पर्वराज पर्युषण महापर्व पर आयोजित श्रावक संयम संस्कार शिविर में दिगम्बर जैनाचार्य 108 श्री विशुद्ध सागर जी गुरुदेव ने संबोधन करते हुए कहा कि मनुष्य-भव, उच्च-कुल, विवेक, बुद्धि, निरोगता, आत्म-कल्याण की भावना, सद् गुरु, सदोपदेश संयम धारण, आत्मोन्मुखी दृष्टि जीवन में बहुत दुर्लभ है। समुद्र में पडा रत्न पुनः मिलना सम्भव है। परन्तु पुनः नर तन मिलना अत्यंत कठिन है। स्वर्ग के देव भी मनुष्य पर्याय प्राप्त करने लिए तरसते हैं। मनुष्य-भव मिलना बहुत दुर्लभ है। जैसे वाहन में ब्रेक, नदि में तट, गाड़ी में नट, सागर में सीमा, अश्व में लगाम, हाथी को अंकुश ऊंट में नकील घर में द्वार खेत में बाढ़ की जेब में नोट की, पेट में भोजन की, चुनाव में बोटकी आवश्यकता होती है, उसी प्रकार जीवन में संयम की आवश्यकता होती है।</p>
<p>संयम में सुख है, संयम में आनन्द है। संयम में शान्ति है। संयमी का यश लोक- अलोक में फैलता है। राग ही द्वेष को जन्म देता है। राग आग है, राग पाप का मूल है। राग अंधा है। राग विनाशकारी है। राग अनर्थ की जड़ है। राग कष्टकारी है। पर-से राग और द्वेष ही संसार भ्रमण का कारण है। असंयम राग से ही प्रारम्भ होता है। राग की एक कणिका साधक की सम्पूर्ण-साधना को क्षण भर में नष्ट कर देती है। असंयमित जीवन बिना ब्रेक की गाड़ी के समान खतरनाक है।</p>
<p>असंयम से शरीर की शक्ति नष्ट होती है, बुद्धि का हास होता है सुन्दरता नष्ट होती है, रूग्नता बढ़ती है, अपयश होता है, पुण्य घटता है, पाप बढ़ता है। संयम सुख का रास्ता है। संयमी का यश बढ़ता है, संयमी स्वस्थ एवं सुन्दर रहता है, संयमी सर्वत्र सम्मान को प्राप्त करता है। संयमी क्षण मात्र में सिद्धियाँ प्राप्त कर लेता है। प्राणियों की रक्षा करना प्राणी संयम है, इन्द्रियों के भोगों से विरक्त होना इन्द्रिय-संयम है। संयम सुखद है। संयम सुक्ति का साधन है। संयमी की सर्वोन्नति होती है। संयम सज्जनों का श्रृंगार है। संयम सज्जनों की कुल- परम्परा है। असंयम छोड़ो, संयम धारण करो।</p>
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		<title>प्राणी-रक्षण और इन्द्रिय दमन करना संयम है : उत्तम संयम धर्म के दिन सुगंध दशमी पर्व उत्साहपूर्वक मनाया गया </title>
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		<pubDate>Fri, 13 Sep 2024 17:09:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर में विराजमान आर्यिका सरस्वती माताजी के निर्देशन में बड़ी भक्ति भाव से मनाए जा रहे पर्युषण पर्व के छठे दिन प्रातः बड़े मंदिर जी एवं संत निलय में पंचामृत अभिषेक पूजन किया गया, साथ ही आज शांतिधारा का सौभाग्य शार्विल संजना &#8211; साहिल जैन परिवार एवं बड़ा मंदिर जी में बड़ा अभिषेक करने का  [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर में विराजमान आर्यिका सरस्वती माताजी के निर्देशन में बड़ी भक्ति भाव से मनाए जा रहे पर्युषण पर्व के छठे दिन प्रातः बड़े मंदिर जी एवं संत निलय में पंचामृत अभिषेक पूजन किया गया, साथ ही आज शांतिधारा का सौभाग्य शार्विल संजना &#8211; साहिल जैन परिवार एवं बड़ा मंदिर जी में बड़ा अभिषेक करने का  सौभाग्य कल्याण कुमार भाई कमल कुमार केके परिवार को प्राप्त हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सन्मति जैन की विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> नगर में विराजमान आर्यिका सरस्वती माताजी के निर्देशन में बड़ी भक्ति भाव से मनाए जा रहे पर्युषण पर्व के छठे दिन प्रातः बड़े मंदिर जी एवं संत निलय में पंचामृत अभिषेक पूजन किया गया, साथ ही आज शांतिधारा का सौभाग्य शार्विल संजना &#8211; साहिल जैन परिवार एवं बड़ा मंदिर जी में बड़ा अभिषेक करने का  सौभाग्य कल्याण कुमार भाई कमल कुमार केके परिवार को प्राप्त हुआ। सन्मति काका ने बताया कि इसी कड़ी में आर्यिका माताजी ने अपनी उत्तम संयम धर्म पर अपनी अमृत  वाणी का रसपान करवाते हुए कहा कि प्राणी-रक्षण और इन्द्रिय दमन करना संयम है।</p>
<p>स्पर्शन, रसना, घ्राण, नेत्र, कर्ण और मन पर नियंत्रण करना इन्द्रिय-संयम है। पृथ्वीकाय, जलकाय, अग्निकाय, वायुकाय, वनस्पतिकाय और त्रसकाय जीवों की रक्षा करना प्राणी संयम है इन दोनों संयमों में इन्द्रिय संयम मुख्य है क्योंकि इन्द्रिय संयम प्राणी संयम का कारण है, इन्द्रिय संयम होने पर भी प्राणी संयम होता हैं, बिना इन्द्रिय संयम के प्राणी संयम नहीं हो सकता। इन्द्रियाँ बाह्म पदार्थों का ज्ञान कराने में कारण है, इस कारण तो वे आत्मा के लिये लाभदायक हैं क्योंकि संसारी आत्मा इन्द्रियों के बिना पदार्थों को जान नहीं सकता। पँचेन्द्रिय जीव की यदि नेत्र-इन्द्रिय बिगड़ जावे तो देखने की शक्ति रखने वाला भी आत्मा किसी वस्तु को देख नहीं सकता।</p>
<p>आर्यिका अनंत  मति माताजी ने धूप दशमी का महत्म बताते हुए कहा कि भाद्रपद में शुक्&#x200d;ल पक्ष की दशमी को यह पर्व मनाया जाता है। इसे सुगंध दशमी अथवा धूप दशमी कहा जाता है। जैन मान्&#x200d;यताओं के अनुसार पर्युषण पर्व के अंतर्गत आने वाली सुगंध दशमी का काफी महत्&#x200d;व है। इस व्रत को विधिपूर्वक करने से मनुष्य के अशुभ कर्मों का क्षय होकर पुण्&#x200d;य बंध का निर्माण होता है तथा उन्हें स्वर्ग, मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दौरान जैन मंदिरों में जाकर भगवान को धूप अर्पण करते हैं। जिसे धूप खेवन भी कहा जाता है, जिससे सारा वायुमंडल सुगंधमय होकर, बाहरी वातावरण स्&#x200d;वच्&#x200d;छ और खुशनुमा हो जाता है।</p>
<p>इस अवसर पर सनावद के सभी जैन मंदिरों सहित णमोकार धाम ,सिद्धाचल पोदनपुरम एवं ओंकारबाग मोरटक्का में सभी समाजजनों ने बड़े भक्ति भावों से धूप खेवन कर धूप दशमी का पर्व मनाया। इसी क्रम में दोपहर में आयोजित आर्यिका माताजी के सानिध्य में जिनवाणी पूजन करने का सौभाग्य अर्चना आलोक कुमार जैन, साधना वीरेंद्रकुमार मुंशी एवं पुष्पा सुनील कुमार पांवणा परिवार को प्राप्त हुआ।</p>
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