<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Dhamnod &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/dhamnod/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Tue, 02 Jun 2026 10:03:28 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>Dhamnod &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>प्रभु भक्ति और वात्सल्य का अनूठा संगम : बामंदी तीर्थ पर धामनोद जैन समाज ने किया चंदाप्रभु महामंडल विधान’ </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/a_unique_confluence_of_devotion_to_the_lord_and_parental_love/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/a_unique_confluence_of_devotion_to_the_lord_and_parental_love/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 10:03:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Abhishek]]></category>
		<category><![CDATA[Couple Group]]></category>
		<category><![CDATA[Darshan]]></category>
		<category><![CDATA[Dhamnod]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Miraculous Area]]></category>
		<category><![CDATA[Shantidhara]]></category>
		<category><![CDATA[Shri Chandraprabhu Dimbar Jain Temple]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Village Bamandi]]></category>
		<category><![CDATA[अतिशयकारी क्षेत्र]]></category>
		<category><![CDATA[अभिषेक]]></category>
		<category><![CDATA[कपल ग्रुप]]></category>
		<category><![CDATA[ग्राम बामंदी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दर्शन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धामनोद]]></category>
		<category><![CDATA[शांतिधारा]]></category>
		<category><![CDATA[श्री चंद्रप्रभु दिंबर जैन मंदिर]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=107640</guid>

					<description><![CDATA[अतिशयकारी क्षेत्र ग्राम बामंदी स्थित श्री चंद्रप्रभु दिंबर जैन मंदिर में मंगलवार को भक्ति, श्रद्धा और वात्सल्य का एक अलौकिक दृश्य देखने को मिला। धामनोद जैन समाज के ‘कपल ग्रुप’ के मन में अतिशयकारी भगवान चंद्रप्रभु के भव्य दर्शन, अभिषेक और शांतिधारा करने के पावन भाव जाग्रत हुए। इसी मंगल भावना के साथ पूरा समूह [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>अतिशयकारी क्षेत्र ग्राम बामंदी स्थित श्री चंद्रप्रभु दिंबर जैन मंदिर में मंगलवार को भक्ति, श्रद्धा और वात्सल्य का एक अलौकिक दृश्य देखने को मिला। धामनोद जैन समाज के ‘कपल ग्रुप’ के मन में अतिशयकारी भगवान चंद्रप्रभु के भव्य दर्शन, अभिषेक और शांतिधारा करने के पावन भाव जाग्रत हुए। इसी मंगल भावना के साथ पूरा समूह सुबह-सुबह बामंदी मंदिर जी पहुँचा। <span style="color: #ff0000">धामनोद से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद/बामंदी।</strong> परम पवित्र और अतिशयकारी क्षेत्र ग्राम बामंदी स्थित श्री चंद्रप्रभु दिंबर जैन मंदिर में मंगलवार को भक्ति, श्रद्धा और वात्सल्य का एक अलौकिक दृश्य देखने को मिला। धामनोद जैन समाज के ‘कपल ग्रुप’ के मन में अतिशयकारी भगवान चंद्रप्रभु के भव्य दर्शन, अभिषेक और शांतिधारा करने के पावन भाव जाग्रत हुए। इसी मंगल भावना के साथ पूरा समूह सुबह-सुबह बामंदी मंदिर जी पहुँचा। बामंदी तीर्थ क्षेत्र की चैतन्य और चमत्कारी ऊर्जा से सराबोर होकर धामनोद से आए सभी श्रद्धालुओं ने पूर्ण विधि-विधान और शुद्ध वस्त्रों में देवाधिदेव भगवान चंद्रप्रभु का पावन अभिषेक किया। इसके बाद विश्व शांति की कामना के साथ सुख-समृद्धि प्रदाता ‘शांतिधारा’ संपन्न की गई। अभिषेक के उपरांत, संगीतमय लहरियों के बीच श्री चंद्रप्रभु मंडल विधान का आयोजन किया गया। जिसमें सभी दंपतियों ने अर्घ्य समर्पित कर पुण्य अर्जन किया। आरती और भक्ति नृत्य के समय पूरा मंदिर प्रांगण चैतन्य चमत्कारी चंदाप्रभु भगवान की जय के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो उठा। इस धार्मिक मिलन के अवसर पर जैन समाज का पारस्परिक वात्सल्य भाव भी खुलकर सामने आया।</p>
<p>बामंदी जैन समाज द्वारा धामनोद के कपल ग्रुप का अत्यंत आत्मीय और भावभीना स्वागत-सम्मान किया गया। इस स्नेह से अभिभूत होकर धामनोद जैन समाज ग्रुप ने भी बामंदी जैन समाज के अध्यक्ष एवं समस्त प्रबुद्ध समाज जनों का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें सम्मानित किया। धामनोद समाज के सदस्यों ने बामंदी मंदिर जी के दर्शन कर अपनी असीम प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यहां आकर मन को अद्भुत शांति मिली है और भगवान चंद्रप्रभु का अतिशय साक्षात महसूस होता है। सभी श्रद्धालुओं ने भगवान से प्रार्थना की कि उनका आशीष और कृपा दृष्टि संपूर्ण समाज पर सदैव बनी रहे। यह धार्मिक यात्रा जैन समाज की एकता, अटूट श्रद्धा और परस्पर वात्सल्य का एक अनुपम उदाहरण बनकर संपन्न हुई।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/a_unique_confluence_of_devotion_to_the_lord_and_parental_love/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>गुरुकुल स्कूल में विद्यार्थियों एवं अभिभावकों का परामर्श सत्र : विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बनाए रखने, सकारात्मक सोच विकसित करने की सलाह  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/counseling_session_for_students_and_parents_at_gurukul_school/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/counseling_session_for_students_and_parents_at_gurukul_school/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 08 Feb 2026 09:04:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Counseling Session]]></category>
		<category><![CDATA[Counselor Dr. Ali A. Husaini]]></category>
		<category><![CDATA[Dhamnod]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Gurukul School]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain monk]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Nun]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[REBT-CBT Therapist]]></category>
		<category><![CDATA[Rehabilitation Psychologist]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[आरईबीटी-सीबीटी थैरेपिस्ट]]></category>
		<category><![CDATA[काउंसलर डॉ. अली ए हुसैनी]]></category>
		<category><![CDATA[गुरुकुल स्कूल]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धामनोद]]></category>
		<category><![CDATA[परामर्श सत्र]]></category>
		<category><![CDATA[पुनर्वास मनोवैज्ञानिक]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=99625</guid>

					<description><![CDATA[स्थानीय गुरुकुल स्कूल में कक्षा 10 के विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों के लिए परामर्श सत्र रखा गया। यह सत्र प्रख्यात पुनर्वास मनोवैज्ञानिक, आरईबीटी-सीबीटी थैरेपिस्ट एवं काउंसलर डॉ. अली ए हुसैनी (आरसीआई लाइसेंस प्राप्त) ने संचालित किया। डॉ. हुसैनी को पुणे एवं इंदौर में 10 से अधिक वर्षों का व्यावसायिक अनुभव है। धामनोद से पढ़िए, दीपक [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>स्थानीय गुरुकुल स्कूल में कक्षा 10 के विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों के लिए परामर्श सत्र रखा गया। यह सत्र प्रख्यात पुनर्वास मनोवैज्ञानिक, आरईबीटी-सीबीटी थैरेपिस्ट एवं काउंसलर डॉ. अली ए हुसैनी (आरसीआई लाइसेंस प्राप्त) ने संचालित किया। डॉ. हुसैनी को पुणे एवं इंदौर में 10 से अधिक वर्षों का व्यावसायिक अनुभव है। <span style="color: #ff0000">धामनोद से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद</strong>। स्थानीय गुरुकुल स्कूल में कक्षा 10 के विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों के लिए परामर्श सत्र रखा गया। यह सत्र प्रख्यात पुनर्वास मनोवैज्ञानिक, आरईबीटी-सीबीटी थैरेपिस्ट एवं काउंसलर डॉ. अली ए हुसैनी (आरसीआई लाइसेंस प्राप्त) ने संचालित किया। डॉ. हुसैनी को पुणे एवं इंदौर में 10 से अधिक वर्षों का व्यावसायिक अनुभव है। डॉ. हुसैनी ने अपने सत्र में विद्यार्थियों और अभिभावकों को तनाव, चिंता, परीक्षा भय एवं मानसिक दबाव से उबरने के प्रभावी उपाय बताए। उन्होंने विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बनाए रखने, सकारात्मक सोच विकसित करने तथा भावनात्मक संतुलन के महत्व पर प्रकाश डाला। सत्र में उन्होंने समझाया कि स्पष्ट लक्ष्य निर्धारण, अपनी क्षमताओं एवं शक्तियों की पहचान और स्पष्ट दृष्टि के साथ किया गया निरंतर परिश्रम सफलता की कुंजी है।</p>
<p><strong>करियर चयन के लिए वैज्ञानिक तकनीक जरूरी </strong></p>
<p>अपने परामर्श में डॉ. हुसैनी ने चिंता, तनाव, अवसाद, करियर काउंसलिंग, आत्मविश्वास, नींद संबंधी समस्याएँ, क्रोध नियंत्रण, पारिवारिक एवं वैवाहिक समस्याएं, बच्चों में एडीएसचडी ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिस ऑर्डर, ओसीडी फोबिया, साइकोसोमैटिक विकार, आत्म-छवि, आत्म-हानि, करियर चयन के लिए वैज्ञानिक तकनीकों जैसे अनेक विषयों पर भी मार्गदर्शन दिया। सत्र के दौरान विद्यार्थियों एवं अभिभावकों ने लक्ष्य निर्धारण, करियर चयन, तनाव प्रबंधन एवं भविष्य की योजनाओं को लेकर अपने प्रश्न पूछे, जिनका डॉ. हुसैनी ने अत्यंत सहज, व्यावहारिक और संतुलित ढंग से समाधान किया। उनके उत्तरों से अभिभावक और विद्यार्थी संतुष्ट हुए।</p>
<p><strong>मार्गदर्शन सार्थक प्रयास </strong></p>
<p>यह परामर्श सत्र विद्यार्थियों के मानसिक सशक्तिकरण एवं अभिभावकों को सही मार्गदर्शन प्रदान करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास सिद्ध हुआ। विद्यालय प्रबंधन ने इस अवसर पर डॉ. अली ए. हुसैनी का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे उपयोगी सत्रों के आयोजन की प्रतिबद्धता दोहराई।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/counseling_session_for_students_and_parents_at_gurukul_school/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>विहाररत माताजी संघ का हुआ मंगल प्रवेश : श्रद्धालुओं ने माताजी संघ की अगवानी  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_revered_mother_superior_and_her_congregation_made_a_blessed_entry/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/the_revered_mother_superior_and_her_congregation_made_a_blessed_entry/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 28 Dec 2025 08:36:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Virag Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Auspicious entry श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Dhamnod]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Gujri]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain monk]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Nun]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Kshullika Vineet Shri Mataji]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Vidita Shri Mataji]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री विराग सागरजी]]></category>
		<category><![CDATA[क्षुल्लिका विनीत श्री माताजी]]></category>
		<category><![CDATA[गुजरी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धामनोद]]></category>
		<category><![CDATA[मंगल प्रवेश]]></category>
		<category><![CDATA[विदिता श्री माताजी]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=97149</guid>

					<description><![CDATA[धामनोद में आचार्य श्री विराग सागरजी की शिष्या विदिता श्री माताजी और क्षुल्लिका विनीत श्री माताजी का गुजरी से विहार होकर धामनोद के प्रशांत नरेंद्र जैन अनाज वालों के फार्म हाउस पर रात्रि विश्राम हुआ। धामनोद से पढिए, दीपक प्रधान की यह खबर&#8230; धामनोद। नगर में शनिवार को प्रातः आचार्य श्री विराग सागरजी की शिष्या [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>धामनोद में आचार्य श्री विराग सागरजी की शिष्या विदिता श्री माताजी और क्षुल्लिका विनीत श्री माताजी का गुजरी से विहार होकर धामनोद के प्रशांत नरेंद्र जैन अनाज वालों के फार्म हाउस पर रात्रि विश्राम हुआ। <span style="color: #ff0000">धामनोद से पढिए, दीपक प्रधान की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद।</strong> नगर में शनिवार को प्रातः आचार्य श्री विराग सागरजी की शिष्या विदिता श्री माताजी और क्षुल्लिका विनीत श्री माताजी संघ का मंगल प्रवेश जैन समाज और मुनिसेवा समिति के सदस्यों ने बड़े उत्साह के साथ कराया। समाज अध्यक्ष महेश जैन ने बताया कि शुक्रवार को समाज के नेतृत्व में श्रीफल माताजी को चरणों में चढ़ाकर धामनोद आगमन के लिए निवेदन किया गया था। माताजी संघ की आहार चर्या श्रावक श्रेष्ठी वीरेंद्र सुधा जैन आहार क्रमांक दो की टीम ने मुक्तानंद परिसर धामनोद में कराया।</p>
<p>दोपहर को उपाध्यक्ष शैलेंद्र जैन के नेतृत्व में मंगल विहार धरमपुरी के लिए हुआ, जो रात्रि विश्राम पीपल्दा गढ़ी में होगा। माताजी का मंगल विहार महिला मंडल की प्रणीति जैन प्रीति जैन भी थीं। रविवार को मंगल प्रवेश धरमपुरी में होगा। शनिवार को मुनिसेवा समिति ने कड़ाके की ठंड में मंगल प्रवेश कराया। समाज में भी काफी उत्साह देखा गया। पाद प्रक्षालन मीना प्रधान के निवास पर किया गया।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/the_revered_mother_superior_and_her_congregation_made_a_blessed_entry/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>धर्म सभा में दिए प्रवचन : भगवान की पूजा-अर्चना पूर्ण विवेक और विशुद्ध भाव से करें &#8211; उपाध्याय श्री विभंजन सागर जी </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/worship_god_with_complete_wisdom_and_pure_devotion_upadhyay_shri_vibhanjan_sagar/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/worship_god_with_complete_wisdom_and_pure_devotion_upadhyay_shri_vibhanjan_sagar/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 22 Dec 2025 10:21:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Barwani]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Dhamnod]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[discourse]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[religious meeting]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Upadhyay Shri Vibhanjan Sagar Ji श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[उपाध्याय श्री विभंजन सागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन सोसायटी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धर्मसभा]]></category>
		<category><![CDATA[धामनोद]]></category>
		<category><![CDATA[प्रवचन]]></category>
		<category><![CDATA[बड़वानी]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=96850</guid>

					<description><![CDATA[दिगंबर जैन मंदिर बड़वानी में विराजित परम पूज्य उत्कृष्ट समाधि धारक राष्ट्र संत गणाचार्य श्री विराग सागर जी महामुनिराज के शिष्य उपाध्याय श्री विभंजन सागर जी मुनिराज ने आज धर्मसभा को संबोधित करते हुए श्रावकों को पूजा, क्रिया और भावों की शुद्धता पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया। पढ़िए दीपक प्रधान की रिपोर्ट बड़वानी। दिगंबर जैन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>दिगंबर जैन मंदिर बड़वानी में विराजित परम पूज्य उत्कृष्ट समाधि धारक राष्ट्र संत गणाचार्य श्री विराग सागर जी महामुनिराज के शिष्य उपाध्याय श्री विभंजन सागर जी मुनिराज ने आज धर्मसभा को संबोधित करते हुए श्रावकों को पूजा, क्रिया और भावों की शुद्धता पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए दीपक प्रधान की रिपोर्ट</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बड़वानी।</strong> दिगंबर जैन मंदिर बड़वानी में विराजित परम पूज्य उत्कृष्ट समाधि धारक राष्ट्र संत गणाचार्य श्री विराग सागर जी महामुनिराज के शिष्य उपाध्याय श्री विभंजन सागर जी मुनिराज ने आज धर्मसभा को संबोधित करते हुए श्रावकों को पूजा, क्रिया और भावों की शुद्धता पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया।</p>
<p><strong>दैनिक क्रियाओं में होने वाली सूक्ष्म त्रुटियों पर प्रकाश</strong></p>
<p>मुनि श्री ने अपने प्रवचन में अनेक बारीक एवं छोटी-छोटी बातों को समझाते हुए बताया कि श्रावक अपनी दैनिक दिनचर्या में अनजाने में कई त्रुटियां कर बैठते हैं, जिसके कारण उन्हें अपेक्षित धार्मिक परिणाम प्राप्त नहीं होते। उन्होंने कहा कि अपनी प्रत्येक क्रिया में विनय और विशुद्धि लाना आवश्यक है।</p>
<p><strong>आगम सम्मत विधि अपनाने का आह्वान</strong></p>
<p>उपाध्याय श्री ने कहा कि आगम में निहित विधि एवं क्रियाओं को अपनाना चाहिए, न कि केवल परंपराओं या रूढ़िवादी तरीकों का अनुसरण कर अपनी धार्मिक क्रियाएं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन बातों को जीवन में उतारना अत्यंत आवश्यक है।</p>
<p><strong>अभिषेक विधि पर विशेष उदाहरण</strong></p>
<p>मुनि श्री ने बताया कि कई श्रावक भगवान के अभिषेक के समय एक हाथ से कलश पकड़ते हैं और दूसरा हाथ कोहनी पर टिकाते हैं, जो पूर्ण रूप से गलत है। अभिषेक हमेशा दोनों हाथों से किया जाना चाहिए। उन्होंने एक बच्चे का उदाहरण देते हुए बताया कि जब उससे इस प्रकार अभिषेक करने का कारण पूछा गया तो उसने सहज भाव से कहा कि हमारे दादाजी और सभी ऐसे ही करते हैं, इसलिए हम भी ऐसा करते हैं। जब उसे सही विधि समझाई गई तो उसने तुरंत दोनों हाथों से अभिषेक किया।</p>
<p><strong>बुजुर्गों को कुतर्क से बचने की सीख</strong></p>
<p>मुनि श्री ने बताया कि जब यही बात एक बुजुर्ग को समझाई गई तो वे कुतर्क करने लगे। इस पर गुरुदेव ने कहा कि कच्चे आम को पकाया जाए तो वह पक जाता है, लेकिन पके हुए आम को पकाया जाए तो वह सड़ जाता है। अतः बच्चों में बचपन से ही आगम सम्मत धर्म संस्कार डालना आवश्यक है।</p>
<p><strong>भावों के अनुसार मिलता है फल</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि जैसी भावना होगी, वैसा ही परिणाम प्राप्त होगा। कोई भी क्रिया करने पर कृत, कारित और अनुमोदना का पुण्य मिलता है। जो स्वयं क्रिया करता है उसे अधिक पुण्य, जो सहयोग करता है उसे कुछ पुण्य और जो अनुमोदना करता है उसे भी पुण्य प्राप्त होता है। जो क्रिया करने में असमर्थ है, उसे भी पूर्ण क्रिया का पुण्य प्राप्त हो सकता है।</p>
<p><strong>मेंढक और सेठ का प्रसंग</strong></p>
<p>उन्होंने एक प्रेरक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि एक सेठ पूर्व भव में नियमपूर्वक ध्यान और तप कर रहा था, किंतु अंत समय में पानी की प्यास से विचलित होकर उसकी मृत्यु हो गई और वह कुएं में मेंढक के रूप में जन्मा। बाद में जब भगवान महावीर का समवशरण राजगृह नगरी में आया, तो वह पूर्व भव के पुण्य के कारण कमल की पंखुड़ी मुख में लेकर समवशरण की ओर जा रहा था। मार्ग में हाथी के पैर के नीचे दबने से उसकी मृत्यु हो गई, लेकिन पुण्य भावों के कारण वह तत्काल स्वर्ग में गया और वहां से विमान द्वारा भगवान के समवशरण में देवों के कोठे में विराजमान हुआ। इससे सिद्ध होता है कि भावों की विशुद्धता अत्यंत महत्वपूर्ण है।</p>
<p><strong>अंत समय की भावना पर जोर</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि अपने भावों को सदैव विशुद्ध रखें। आज नहीं तो कल, भावों का फल निश्चित रूप से प्राप्त होता है। अंत समय में पंच परमेष्ठी का आलंबन और आश्रय होना चाहिए, जिससे अगला भव भी सुधर सके।</p>
<p><strong>अन्य धार्मिक गतिविधियां</strong></p>
<p>प्रवचन से पूर्व मुनि श्री ने मंदिर में दर्शन किए। श्रावकों द्वारा भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। प्रवचन के पश्चात मुनि संघ की आहार चर्या संपन्न हुई। दोपहर में सामायिक के बाद धर्म कक्षा आयोजित की गई। इसके पश्चात मुनि संघ का पार्श्वगिरी एवं सिद्ध क्षेत्र बावनगजा जी की ओर मंगल विहार हुआ। उपरोक्त जानकारी मनीष जैन द्वारा प्रदान की गई।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/worship_god_with_complete_wisdom_and_pure_devotion_upadhyay_shri_vibhanjan_sagar/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>धर्म सभा में दिए प्रवचन : भगवान के सामने हाथ मत फैलाइए, भावपूर्वक की गई क्रिया फल प्रदान करती है- उपाध्याय मुनि श्री विभंजन सागर जी  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/do_not_extend_your_hands_before_god_upadhyay_muni_shri_vibhanjan_sagar_ji/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/do_not_extend_your_hands_before_god_upadhyay_muni_shri_vibhanjan_sagar_ji/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 21 Dec 2025 15:30:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[Barwani]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Dhamnod]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[discourse]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[religious meeting]]></category>
		<category><![CDATA[Tags - Shreephal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Upadhyay Muni Shri Vibhanjan Sagar Ji श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[उपाध्याय मुनि श्री विभंजन सागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन सोसायटी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धर्मसभा]]></category>
		<category><![CDATA[धामनोद]]></category>
		<category><![CDATA[प्रवचन]]></category>
		<category><![CDATA[बड़वानी]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=96785</guid>

					<description><![CDATA[बड़वानी नगर में कल पधारे और विराजमान परम पूज्य उत्कृष्ट समाधि धारक राष्ट्र संत गणाचार्य विराग सागर जी महा मुनिराज के शिष्य उपाध्याय श्री विभंजन सागर जी ने दिगंबर जैन मंदिर बड़वानी में धर्म सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आप भगवान के सामने कभी हाथ मत फैलाइए, क्योंकि भगवान से कुछ मांगने की [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>बड़वानी नगर में कल पधारे और विराजमान परम पूज्य उत्कृष्ट समाधि धारक राष्ट्र संत गणाचार्य विराग सागर जी महा मुनिराज के शिष्य उपाध्याय श्री विभंजन सागर जी ने दिगंबर जैन मंदिर बड़वानी में धर्म सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आप भगवान के सामने कभी हाथ मत फैलाइए, क्योंकि भगवान से कुछ मांगने की आवश्यकता नहीं है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए दीपक प्रधान की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद/बड़वानी नगर।</strong> बड़वानी नगर में कल पधारे और विराजमान परम पूज्य उत्कृष्ट समाधि धारक राष्ट्र संत गणाचार्य विराग सागर जी महा मुनिराज के शिष्य उपाध्याय श्री विभंजन सागर जी ने दिगंबर जैन मंदिर बड़वानी में धर्म सभा को संबोधित किया।</p>
<p><strong>भगवान के समक्ष क्रिया का भाव</strong></p>
<p>उपाध्याय श्री विभंजन सागर जी ने कहा कि आप भगवान के सामने कभी हाथ मत फैलाइए, क्योंकि भगवान से कुछ मांगने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने समझाया कि भगवान हमें कुछ नहीं देते। हमारे आगम में बताया गया है कि निमित्त कुछ करता नहीं है और निमित्त के बिना कुछ नहीं होता। इसी कारण हम भगवान पर घटित करते हैं; भगवान कुछ करते नहीं हैं, पर भगवान के बिना कुछ संभव नहीं होता। उन्होंने कहा कि हम भगवान की भक्ति करते हैं, पूजा, अर्चना और आराधना करते हैं। हम मुनि आदि को आहार, बिहार, निहार कराते हैं, दान करते हैं, तीर्थ वंदना करते हैं और अन्य धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। इनसे पुण्य अर्जित होता है और वही पुण्य हमारे काम को सफल बनाता है। इस कारण हाथ फैलाने की आवश्यकता नहीं है।</p>
<p><strong>क्रिया में भाव का महत्व</strong></p>
<p>मुनि श्री ने रूढ़िवादिता से बचने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जैन आगम हर बात का प्रमाण और कारण बताता है। यदि हमारे पास कारण है तो हम उसे करने को तैयार हैं। किसी भी क्रिया को केवल क्रिया समझकर नहीं करना चाहिए। यदि वह क्रिया आदत बन जाए तो उसका भाव समाप्त हो जाता है।उन्होंने स्पष्ट किया कि पूजा, पाठ, स्वाध्याय, जप, तप आदि सभी क्रियाओं में भाव होना आवश्यक है। अन्यथा वह क्रिया व्यर्थ हो जाती है और केवल क्रिया-कांड बनकर रह जाती है। भावपूर्वक की गई क्रिया ही फल प्रदान करती है।</p>
<p><strong>सभा और अन्य कार्यक्रम</strong></p>
<p>मनीष जैन ने बताया कि सभा के पूर्व उपाध्याय श्री ने मंदिर में विराजित वेदियों पर भगवान के दर्शन किए। इसके साथ ही आचार्य श्री विराग सागर जी महा मुनिराज के चित्र पर दीप प्रज्वलन कर चित्र अनावरण किया गया। इस अवसर पर समाज के युवा, बच्चे, महिला और पुरुष वर्ग उपस्थित रहे। सभा के पश्चात मुनि श्री की आहार चर्या संपन्न हुई। दोपहर में सामयिक और धर्म संबंधित क्लास आयोजित हुई और शाम को आनंद यात्रा हुई।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/do_not_extend_your_hands_before_god_upadhyay_muni_shri_vibhanjan_sagar_ji/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मुनि भक्त समर कंठाली का मां अन्नपूर्णा रोगी सेवा संस्थान ने अभिनंदन किया : आचार्य वर्धमान सागरजी ससंघ के सान्निध्य में पंचकल्याणक में सौधर्म इंद्र बने थे  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/mother_annapurna_rogi_seva_sansthan_felicitated_muni_devotee_samar_kanthali/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/mother_annapurna_rogi_seva_sansthan_felicitated_muni_devotee_samar_kanthali/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Nov 2025 10:36:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Vardhman Sagarji]]></category>
		<category><![CDATA[Dhamnod]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Mother Annapurna Patient Service Institute]]></category>
		<category><![CDATA[Panch Kalyanak]]></category>
		<category><![CDATA[Pipalda]]></category>
		<category><![CDATA[Saudharma Indra]]></category>
		<category><![CDATA[Sawai Madhopur]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[young social worker Samar Kanthali]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य वर्धमान सागरजी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धामनोद]]></category>
		<category><![CDATA[पंचकल्याणक]]></category>
		<category><![CDATA[पीपल्दा]]></category>
		<category><![CDATA[मां अन्नपूर्णा रोगी सेवा एवं पारमार्थिक संस्था]]></category>
		<category><![CDATA[युवा समाज सेवी समर कंठाली]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[सवाई माधोपुर]]></category>
		<category><![CDATA[सौधर्म इंद्र]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=94988</guid>

					<description><![CDATA[पीपल्दा (सवाई माधोपुर) में पंचकल्याणक महोत्सव आचार्य वर्धमान सागरजी महाराज संघ के सानिध्य में हुआ था। इस महोत्सव में युवा समाज सेवी समर कंठाली सौधर्म इंद्र बने थे। उनके इस धार्मिक कार्य में शामिल होने पर मां अन्नपूर्णा रोगी सेवा संस्थान ने स्वागत अभिनंदन किया। धामनोद से पढ़िए, यह खबर&#8230; धामनोद। पीपल्दा (सवाई माधोपुर) में [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>पीपल्दा (सवाई माधोपुर) में पंचकल्याणक महोत्सव आचार्य वर्धमान सागरजी महाराज संघ के सानिध्य में हुआ था। इस महोत्सव में युवा समाज सेवी समर कंठाली सौधर्म इंद्र बने थे। उनके इस धार्मिक कार्य में शामिल होने पर मां अन्नपूर्णा रोगी सेवा संस्थान ने स्वागत अभिनंदन किया। <span style="color: #ff0000">धामनोद से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद।</strong> पीपल्दा (सवाई माधोपुर) में पंचकल्याणक महोत्सव आचार्य वर्धमान सागरजी महाराज संघ के सानिध्य में हुआ था। इस महोत्सव में युवा समाज सेवी समर कंठाली सौधर्म इंद्र बने थे। उनके इस धार्मिक कार्य में शामिल होने पर मां अन्नपूर्णा रोगी सेवा संस्थान ने स्वागत अभिनंदन किया। कंठाली को तिलक लगाकर मोती की माला, पुष्पहार, दुपट्टा और पगड़ी पहनाकर अभिनंदन किया। साथ ही सम्मान पत्र, श्रीफल व और शॉल भेंट की गई। इंजीनियर समर कंठाली विदेश में जॉब कर रहे थे लेकिन, उनका मोह विदेशी नौकरी से भंग हुआ और भारत लौट आए। प्रदेश की उद्योग नगरी इंदौर आए। यहीं उन्होंने अपना इनवेस्मेंट कंपनी खोलकर बिजनेस चालू किया। साथ ही खेती करना आरंभ किया। वे नई तकनीकी से खेती करवा रहे हैं और धीरे-धीरे धर्म की ओर अग्रसर हुए। उनकी माताजी ने आर्यिका दीक्षा ली। संघ में सेवाएं दीं। चातुर्मास में संत सेवा के लिए आहार चौका लगाया। अब पूर्णकालीन आहार चौका लगाने का संकल्प लेकर कार्य प्रारंभ किया। पुण्य जगा सौधर्म इंद्र बनने का आचार्य गुरु का आशीर्वाद मिला।</p>
<p>यह सभी गुरदेव के आशीर्वाद संत सेवा का फल है। इस दौरान ट्रस्ट सदस्य अजय जैन, महाप्रबंधक शशि श्रीवास्तव, मैनेजर कविता तोमर, भोजन प्रभारी प्रभुलाल स्वामी भी उपस्थित थे। सम्मान पत्र का वाचन दीपक प्रधान ने किया। इस अवसर उन्हें श्रावक श्रेष्ठी से अलंकृत किया गया। जैन मंदिर पहुंचकर अध्यक्ष महेश जैन, सुशीला जैन, सुरक्षा अजय जैन, राकेश जैन, नीलेश जैन, लोकेंद्र जैन, कोषाध्यक्ष धीरेन्द्र जैन, प्रिया नीलेश जैन, महेंद्र टेंट मामी आदि समाजजनों की उपस्थिति में सम्मान किया गया।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/mother_annapurna_rogi_seva_sansthan_felicitated_muni_devotee_samar_kanthali/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पर्युषण महापर्व के पांचवें दिन उत्तम सत्यधर्म हुए कार्यक्रम: धामनोद में समाज के श्रावक-श्राविका कर रहे हैं उपवास </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/uttam_satyadharma_programs_were_held_on_the_fifth_day_of_the_paryushan_festival/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/uttam_satyadharma_programs_were_held_on_the_fifth_day_of_the_paryushan_festival/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 01 Sep 2025 10:54:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Ancient Temple Bikhron]]></category>
		<category><![CDATA[Dhamnod]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Paryushan Mahaparva]]></category>
		<category><![CDATA[Shri Parshvanath]]></category>
		<category><![CDATA[Shri Shantinath Bhagwan]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Uttam Satyadharma]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तम सत्यधर्म]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धामनोद]]></category>
		<category><![CDATA[पर्युषण महापर्व]]></category>
		<category><![CDATA[प्राचीन मंदिर बिखरोन]]></category>
		<category><![CDATA[श्री पार्श्वनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[श्री शांतिनाथ भगवान]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=89330</guid>

					<description><![CDATA[नगर और प्राचीन मंदिर बिखरोन में पर्युषण महापर्व के अवसर पर दश लक्षण धर्म के पांचवे दिन जैन मंदिर में अभिषेक, शांतिधारा की गई। मंदिर में प्रतिदिन भक्तों की संख्या में बढ़ती जा रही है। यहां सुबह भगवान के अभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं में अपार श्रद्धा देखी जा रही है। धामनोद से पढ़िए, यह [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>नगर और प्राचीन मंदिर बिखरोन में पर्युषण महापर्व के अवसर पर दश लक्षण धर्म के पांचवे दिन जैन मंदिर में अभिषेक, शांतिधारा की गई। मंदिर में प्रतिदिन भक्तों की संख्या में बढ़ती जा रही है। यहां सुबह भगवान के अभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं में अपार श्रद्धा देखी जा रही है। <span style="color: #ff0000">धामनोद से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद।</strong> नगर और प्राचीन मंदिर बिखरोन में पर्युषण महापर्व के अवसर पर दश लक्षण धर्म के पांचवे दिन जैन मंदिर में अभिषेक, शांतिधारा की गई। मंदिर में प्रतिदिन भक्तों की संख्या में बढ़ती जा रही है। यहां सुबह भगवान के अभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं में अपार श्रद्धा देखी जा रही है। अभिषेक और शांतिधारा नीचे दो बार हो रही है और ऊपर भी अस्थाई रूप से श्रावक-श्राविकाएं पूजन कर रहे हैं। यहां भी श्री शांतिनाथ भगवान की प्रतिमा विराजमान की है। यहां भी अभिषेक और शांतिधारा हो रही है। प्राचीन मंदिर में श्री पार्श्वनाथ की चतुर्थ काल की पार्श्वनाथ की प्रतिमा मूलनायक की है। वहां भी नित्य अभिषेक और शांतिधारा तथा दशलक्षण धर्म की पूजा श्रावक श्राविकाएं कर रहे हैं। सोमवार को मुनिसेवा समिति की टीम ने भी अभिषेक और शांतिधारा कर पूजन किया। नगर के श्री पार्श्वनाथ मंदिर में भी अभिषेक और शांतिधारा के अलावा महापूजन दशलक्षण धर्म पर हो रहा है। सोमवार को शांतिधारा के सहयोगी सोमा राजेंद्र जैन, डॉ. सुरेखा प्रकाश कियावत, अंतिम, धीरेंद्र जैन इंद्र बनकर पुण्य का लाभ लिया।</p>
<p><strong>धर्म की राजनीति करने वाले की हर चेहरे धुंधले हैं</strong></p>
<p>आचार्य विशुद्ध सागरजी के शिष्य पंडित यश जैन और पंडित अंशुल भैया के मुखारबिंद से सोमवार को उत्तम सत्य धर्म पर विशेष प्रवचन हुए। पंडित अंशु भैया ने कहा कि मिल तो सबसे लेता है लेकिन मिलता किसी में नहीं। धर्म कहता है कि माया से मुक्त होकर जिओ। चल कपट करने वाले जीव को भगवान बनने का सुख नहीं मिलता। वह सोचता है कि राम राम जपना पराया माल अपना। वक्त पड़े तो गधे को कहे काका। रघुपति राघव राजा राम जैसा मौका वैसा काम, गंगा गए तो गंगा दास जमुना गए तो जमुना दास ऐसी नीति कुटिल नीति वक्र नीति वालों के भीतर धर्म नहीं ठहर सकता है। आज दिल्ली की राजनीति से ज्यादा गंदी धर्म की राजनीति हो गई है। कुछ तथाकथित लोग धर्म और धर्म गुरुओं को लेकर धर्म में राजनीति का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिया है मूल तो ज्योति का है। ऐसे नकली धर्मात्माओं से बचाना अन्यथा बंदर के हाथ में चाकू जैसा हाल होगा। उन्होने कहा कि धर्म की राजनीति करने वाले की हर चेहरे धुंधले हैं। कहीं कुछ भी स्पष्ट नहीं है। सत्यता ही जीवन में समुद्र को भी पार कर सकता है वरना जीवन कभी भी पार नहीं हो सकेगा। सच्चा धर्म व सच्ची सत्यता से। सत्य धर्म भी चारित्र में प्राप्त होगा। अन्यथा 84 लाख योनि में जीव भटकता रहेगा।</p>
<p><strong>मुनिसेवा समिति के सहयोग से जुलूस निकाला जाएगा</strong></p>
<p>मंदिर में विशेष पूजन के सहयोगी बने समाज अध्यक्ष महेश जैन, सचिन जैनए शाम को सामूहिक भगवान की स्तुति और श्रीजी आरती की गई। शाम को विद्वानों के प्रवचन हुए और समाज की अंकिता सचिन जैन ने अहम योग भी कराया। इस दौरान दोनों मंदिरों की भव्य सजावट रोशनी से की गई। मंगलवार को धूप दशमी पर प्राचीन जैन मंदिर बिखरोन में दोपहर 3 बजे समाजजनों की उपस्थिति में भव्य जुलूस निकाला जाएगा और सामूहिक धूप मंदिर में चढ़ाई जाएगी। यह जानकारी राकेश जैन, अजय जैन, नीलेश जैन, धीरेंद्र जैन, मुकेश पंधानिया और वनय जैन ने दी। मुनिसेवा समिति के सहयोग से जुलूस निकाला जाएगा। सोमवार को प्रणीति शैलेंद्र जैन का पांचवां उपवास है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/uttam_satyadharma_programs_were_held_on_the_fifth_day_of_the_paryushan_festival/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>धामनोद में आचार्य श्री शांतिसागरजी का समाधि दिवस मनाया: भक्ति भाव से अष्टद्रव्य से अर्घ्य अर्पित किए  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/samadhi_day_of_acharya_shri_shantisagarji_celebrated_in_dhamnod/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/samadhi_day_of_acharya_shri_shantisagarji_celebrated_in_dhamnod/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 25 Aug 2025 14:28:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Shantisagarji]]></category>
		<category><![CDATA[Ashtadravya]]></category>
		<category><![CDATA[Dhamnod]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Offering Arghya]]></category>
		<category><![CDATA[Samadhi Day]]></category>
		<category><![CDATA[Shri Parshvanath Digambar Jain Temple]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[अर्घ्य अर्पित]]></category>
		<category><![CDATA[अष्टद्रव्य]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री शांतिसागरजी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धामनोद]]></category>
		<category><![CDATA[श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[समाधि दिवस]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=88505</guid>

					<description><![CDATA[नगर के दिगंबर श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में आचार्य श्री शांतिसागरजी महाराज के 70 वें समाधि दिवस मनाया गया। समाधि दिवस पर सुंदर भावों से भक्ति के साथ अष्ट द्रव्य से अर्घ्य बोलकर चढ़ाया गया। धामनोद से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह खबर&#8230; धामनोद। नगर के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में आचार्य श्री [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>नगर के दिगंबर श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में आचार्य श्री शांतिसागरजी महाराज के 70 वें समाधि दिवस मनाया गया। समाधि दिवस पर सुंदर भावों से भक्ति के साथ अष्ट द्रव्य से अर्घ्य बोलकर चढ़ाया गया। <span style="color: #ff0000">धामनोद से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद</strong>। नगर के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में आचार्य श्री शांतिसागरजी महाराज के 70 वें समाधि दिवस मनाया गया। टोक में विराजमान विराजित शिरोमणि आचार्य वर्धमान सागरजी महाराज की प्रेरणा से राष्ट्रीय स्तर पर शताब्दी वर्ष महोत्सव भी मनाया जा रहा है।</p>
<p>पथरिया में विराजित आचार्य श्री विशुद्ध सागरजी महाराज की प्रेरणा से धामनोद के जैन मंदिर में प्रथमाचार्य श्री शांतिसागरजी महाराज के समाधि दिवस पर सुंदर भावों से भक्ति के साथ अष्ट द्रव्य से अर्घ्य बोलकर चढ़ाया गया। ध्वजा लेकर मंदिरजी के मूल गेट के परिसर पर ध्वजावंदन हुआ। इस दौरान श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित थी। यह जानकारी अध्यक्ष महेश जैन, राजेश जैन ने दी।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/samadhi_day_of_acharya_shri_shantisagarji_celebrated_in_dhamnod/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पार्श्वनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक पर्व पार्श्वगिरी पर धूमधाम से मनाया : 2300 लड्डू और 23 किलो का विशेष लड्डू चढ़ा, शोभायात्रा व विधान सहित अनेक आयोजन </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/parshvagiri_moksha_kalyanak_mahotsav_celebrated_with_devotion/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/parshvagiri_moksha_kalyanak_mahotsav_celebrated_with_devotion/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 02 Aug 2025 11:40:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Aryika Mataji]]></category>
		<category><![CDATA[Balaghat Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Band Baja]]></category>
		<category><![CDATA[Dhamnod]]></category>
		<category><![CDATA[Dhamnod Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Indore Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Celebrations आर्यिका संघ]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Event]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain rituals]]></category>
		<category><![CDATA[jain tirth]]></category>
		<category><![CDATA[Kukshi Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Laddu Chadhana]]></category>
		<category><![CDATA[Malwa Jain Samaj]]></category>
		<category><![CDATA[Moksha Kalyanak]]></category>
		<category><![CDATA[MP Jain Samaj]]></category>
		<category><![CDATA[Nimar Jain Samaj]]></category>
		<category><![CDATA[panchamrit abhishek]]></category>
		<category><![CDATA[Parshvagiri]]></category>
		<category><![CDATA[Parshvanath Mahotsav]]></category>
		<category><![CDATA[Parshvanath Moksha]]></category>
		<category><![CDATA[Parshwanath Kalyanak]]></category>
		<category><![CDATA[Pipalya Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Pithadhish]]></category>
		<category><![CDATA[Poojan]]></category>
		<category><![CDATA[Religious News]]></category>
		<category><![CDATA[Samajik Samagam]]></category>
		<category><![CDATA[Shobha Yatra]]></category>
		<category><![CDATA[shrifal news]]></category>
		<category><![CDATA[Spiritual News]]></category>
		<category><![CDATA[Tirth Mahotsav]]></category>
		<category><![CDATA[vatsalya bhoj]]></category>
		<category><![CDATA[अभिषेक]]></category>
		<category><![CDATA[क्षेत्रीय समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक आयोजन]]></category>
		<category><![CDATA[निमाड़ जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[पार्श्वगिरी]]></category>
		<category><![CDATA[पार्श्वनाथ भगवान]]></category>
		<category><![CDATA[पूजन]]></category>
		<category><![CDATA[मालवा जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[मोक्ष कल्याणक]]></category>
		<category><![CDATA[लड्डू चढ़ाना]]></category>
		<category><![CDATA[शांतिधारा]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=86630</guid>

					<description><![CDATA[   धामनोद स्थित पार्श्वगिरी अतिशय क्षेत्र पर 31 जुलाई को भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव भक्तिभाव से मनाया गया। कार्यक्रम में पंचामृत अभिषेक, 2300 लड्डुओं की चढ़ाई, विधान और वात्सल्य भोज सहित विविध आयोजन हुए। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… धामनोद के निकट पार्श्वगिरी अतिशय क्षेत्र पर 31 जुलाई 2025 को भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>   धामनोद स्थित पार्श्वगिरी अतिशय क्षेत्र पर 31 जुलाई को भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव भक्तिभाव से मनाया गया। कार्यक्रम में पंचामृत अभिषेक, 2300 लड्डुओं की चढ़ाई, विधान और वात्सल्य भोज सहित विविध आयोजन हुए। <span style="color: #800000">पढ़िए पूरी रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p>धामनोद के निकट पार्श्वगिरी अतिशय क्षेत्र पर 31 जुलाई 2025 को भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक पर्व पूरे उत्साह और धार्मिक भक्ति से मनाया गया। प्रारंभ में आर्यिका संघ की आहार चर्या पूर्ण हुई। इसके बाद कुक्षी के पहाड़िया परिवार द्वारा ध्वजारोहण किया गया और पिपलिया के मोटा बा दादा भाई परिवार द्वारा स्वल्पाहार की व्यवस्था की गई।</p>
<p>तलहटी से आर्यिका माताजी के सानिध्य में बैंड-बाजों सहित शोभायात्रा पहाड़ तक पहुँची। तत्पश्चात गौरव दीपचंद पहाड़िया (बड़वानी) द्वारा पंचामृत अभिषेक और शांतिधारा वोहरा परिवार (बड़वानी) द्वारा की गई।</p>
<p><strong>2300 लड्डुओं का चढ़ावा</strong></p>
<p>मुख्य पूजन में 23 किलो का विशेष लड्डू रेणुजी महेन्द्रजी पहाड़िया परिवार द्वारा चढ़ाया गया। कुल 2300 लड्डुओं का चढ़ावा निमाड़, मालवा क्षेत्र के श्रद्धालुओं द्वारा किया गया। वात्सल्य भोज का पुण्यार्जन सुसारी के नरेशजी एवं अंकितजी पहाड़िया परिवार ने किया।</p>
<p><strong>पिपलिया के गंगवाल परिवार मुख्य इंद्र बने</strong></p>
<p>दोपहर में आयोजित पार्श्वनाथ विधान में पिपलिया के गंगवाल परिवार मुख्य इंद्र बने। कार्यक्रम में महिला मंडल व पुरुष वर्ग ने पूर्ण भक्ति से सहभागिता निभाई।</p>
<p>शाम को भोजन व्यवस्था दोशी परिवार (बाकानेर) द्वारा की गई। इस अवसर पर बड़वानी, अंजड़, मनावर, कुक्षी, पिपलिया, धरमपुरी, टोकी सहित अनेक नगरों से श्रद्धालु पहुँचे। कार्यक्रम में गणिनी आर्यिका क्षमा श्री माताजी एवं छूल्लिका विश्व रत्न माताजी ने सभी को आशीर्वाद दिया और कहा कि यह क्षेत्र सिद्ध भूमि है – हर वर्ष मोक्ष कल्याणक को इसी भाव से मनाएं। अंत में कमेटी अध्यक्ष कमल जी गोधा और महामंत्री गौरवजी पहाड़िया ने सभी आगंतुकों और पुण्यार्जकों का आभार व्यक्त किया।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/parshvagiri_moksha_kalyanak_mahotsav_celebrated_with_devotion/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>गुजरी में मुनि विशुद्ध सागरजी के शिष्यों का आगमन :  12 मई को गुलझरा में होगा मंगल प्रवेश </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_arrival_of_the_disciples_of_muni_vishuddha_sagarji_in_gujri/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/the_arrival_of_the_disciples_of_muni_vishuddha_sagarji_in_gujri/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 12 May 2025 07:21:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Dhamnod]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[discourse]]></category>
		<category><![CDATA[Gujri]]></category>
		<category><![CDATA[Guljhara]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Kshullak Shrut Sagar श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Jayvanta Sagar]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Saraswat Sagar]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Siddha Sagar]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Vishuddh Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[religious meeting]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[क्षुल्लक श्रुत सागर]]></category>
		<category><![CDATA[गुजरी]]></category>
		<category><![CDATA[गुलझरा]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन सोसायटी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धर्मसभा]]></category>
		<category><![CDATA[धामनोद]]></category>
		<category><![CDATA[प्रवचन]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि जयवंत सागर]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि विशुद्ध सागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि सारस्वत सागर]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि सिद्ध सागर]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=80735</guid>

					<description><![CDATA[ गुजरी में आचार्य शिरोमणि पटाचार्य विशुद्ध सागरजी के परम शिष्य मुनि सारस्वत सागर, मुनि जयवंत सागर, मुनि सिद्ध सागर तथा क्षुल्लक श्रुत सागर का आगमन हुआ। पढ़िए दीपक प्रधान की रिपोर्ट&#8230; धामनोद। गुजरी में आचार्य शिरोमणि पटाचार्य विशुद्ध सागरजी के परम शिष्य मुनि सारस्वत सागर, मुनि जयवंत सागर, मुनि सिद्ध सागर तथा क्षुल्लक श्रुत सागर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong> गुजरी में आचार्य शिरोमणि पटाचार्य विशुद्ध सागरजी के परम शिष्य मुनि सारस्वत सागर, मुनि जयवंत सागर, मुनि सिद्ध सागर तथा क्षुल्लक श्रुत सागर का आगमन हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए दीपक प्रधान की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद।</strong> गुजरी में आचार्य शिरोमणि पटाचार्य विशुद्ध सागरजी के परम शिष्य मुनि सारस्वत सागर, मुनि जयवंत सागर, मुनि सिद्ध सागर तथा क्षुल्लक श्रुत सागर का आगमन हुआ। मुनियों ने 1008 श्री चंद्रप्रभु भगवान की प्रतिमा के दर्शन कर गहरी भक्ति और अभिभूत भाव प्रकट किया। पाद प्रक्षालन अर्पित कासलीवाल द्वारा किया गया और आहार चर्या भी उनके निवास पर संपन्न हुई। प्रवचन में मुनि सारस्वत सागर ने कहा कि गुजरी जैसे स्थान पर मंदिर का होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह न केवल पूर्वजों की धर्मनिष्ठा को दर्शाता है, बल्कि मानपुर और धामनोद के बीच संतों के आवागमन एवं देवदर्शन की दृष्टि से भी यह स्थान विशेष महत्व रखता है। उन्होंने यहाँ की भक्ति भावना और संतों के प्रति लोगों के वात्सल्य की सराहना की। धामनोद जैन समाज के अध्यक्ष महेश जैन, सचिव दीपक प्रधान, सहसचिव अजय जैन, पूर्व अध्यक्ष राकेश जैन तथा मुनि सेवा समिति के संजय जैन, शैलेंद्र जैन, प्रशांत जैन, दीपांशु जैन और सचिन जैन ने मुनिश्री के चरणों में श्रीफल अर्पित करते हुए उन्हें धामनोद आने का निमंत्रण दिया।</p>
<p>जैन समाज अध्यक्ष महेश जैन और सचिव दीपक प्रधान ने जानकारी दी कि मुनि श्री का मंगल प्रवेश 12 मई, सोमवार सुबह 7 बजे गुलझरा में होगा। नगर के विभिन्न चौराहों से होते हुए जुलूस के साथ मंदिर पहुंचने पर प्रातः 9 बजे मंगल प्रवचन एवं आहार चर्या आयोजित की जाएगी।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/the_arrival_of_the_disciples_of_muni_vishuddha_sagarji_in_gujri/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
