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	<title>Devi Ahilya University  श्रीफल जैन न्यूज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के सानिध्य में हुआ आयोजन : भारतीय ज्ञान परंपरा एवं जैन साहित्य पर राष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न  </title>
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		<pubDate>Wed, 11 Jun 2025 05:43:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[तीर्थंकर ऋषभदेव जैन विद्वत् महासंघ एवं भारतीय ज्ञान परंपरा-जैन गणित केन्द्र, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इन्दौर के संयुक्त तत्त्वावधान में &#8216;भारतीय ज्ञान परंपरा एवं जैन साहित्य&#8217; विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी श्रुत पंचमी के पवन पर्व पर दिगम्बर जैन तीर्थ अयोध्या में आयोजित की गई। इस संगोष्ठी में 35 से अधिक विद्वान सम्मिलित हुए। पढ़िए यह विशेष [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>तीर्थंकर ऋषभदेव जैन विद्वत् महासंघ एवं भारतीय ज्ञान परंपरा-जैन गणित केन्द्र, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इन्दौर के संयुक्त तत्त्वावधान में &#8216;भारतीय ज्ञान परंपरा एवं जैन साहित्य&#8217; विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी श्रुत पंचमी के पवन पर्व पर दिगम्बर जैन तीर्थ अयोध्या में आयोजित की गई। इस संगोष्ठी में 35 से अधिक विद्वान सम्मिलित हुए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अयोध्या।</strong> तीर्थंकर ऋषभदेव जैन विद्वत् महासंघ एवं भारतीय ज्ञान परंपरा-जैन गणित केन्द्र, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इन्दौर के संयुक्त तत्त्वावधान में &#8216;भारतीय ज्ञान परंपरा एवं जैन साहित्य&#8217; विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी श्रुत पंचमी के पवन पर्व पर दिगम्बर जैन तीर्थ अयोध्या में आयोजित की गई। इस संगोष्ठी में 35 से अधिक विद्वान सम्मिलित हुए।</p>
<p>संगोष्ठी की अध्यक्षता IKS Division शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार के राष्ट्रीय समन्वयक प्रो. जी.एस.मूर्ति ने की। मुख्य अतिथि थे शोभित विश्वविद्यालय, मेरठ के पूर्व कुलपति एव चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ गणित के आचार्य प्रो. एस. सी. अग्रवाल । विशेष अतिथि के रूप में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इन्दौर के कुलपति प्रो. राकेश सिंघई एवं मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भोपाल की आचार्य प्रो. ज्योति सिंघई उपस्थित रहीं ।</p>
<p>अ. भा. दि. जैन महिला संगठन &#8211; मध्य प्रदेश की अध्यक्ष आशुकवियत्री श्रीमती उषा पाटनी जी ने स्वरचित मंगलाचरण में संगोष्ठी की विषयवस्तु एवं पुरस्कार समर्पण समारोह का पूरा चित्र प्रस्तुत किया।</p>
<p>संगोष्ठी में डॉ. सुशील जैन ( कुरावली) ने प्रथम वक्ता के रूप में विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में जैन साहित्य का महत्त्वपूर्ण स्थान है। जैन साहित्य ने भारतीय ज्ञान परंपरा को समृद्ध किया है, आचार्य धरसेन का बहुत उपकार है कि उन्होंने षटखंडागम जैन ग्रंथ आज हमें उपलब्ध कराया।</p>
<p>डॉ. अल्पना जैन मोदी ( ग्वालियर), ने कहा कि भगवान ऋषभदेव द्वारा प्रदत्त उपदेश के कुछ अंशों को परिवर्ती आचार्यों ने सुरक्षित रखकर उसे चारों अनुयोगों में निबद्ध किया जिसमें कथा, काव्य, स्तोत्र, गणित, ज्योतिष, वास्तु आदि सब कुछ सम्मिलित है।</p>
<p>युवा मनीषी डॉ. भरत जैन (इन्दौर) ने कहा कि जैन धर्म में पर्यावरण को विशेष अर्थ में न सीमित करते हुए जीवन के समस्त कार्यकलापों में सृष्टि का कम से कम दोहन कर अधिकतम लाभ प्राप्ति का मार्ग बताया गया है। जैन जीवन शैली ही पर्यावरण हितैषी है।</p>
<p>डॉ. रश्मि जैन (फिरोजाबाद), ने मध्यकालीन हिन्दी जैन काव्य को भारतीय ज्ञान परंपरा की निधि निरूपित करते हुए बताया कि इन काव्यों में अध्यात्म, दर्शन ही नहीं इतिहास की भी महत्वपूर्ण जानकारी है। डॉ. रश्मि जी ने अनेक कवियों के उदाहरण प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया ।</p>
<p>शीतल तीर्थ &#8211; रतलाम की अधिष्ठात्री डॉ. सविता जैन ने कहा कि इस युग के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ ) ने अपनी दोनों पुत्रियों ब्राह्मी एवं सुन्दरी को लिपि</p>
<p>एवं अंक ज्ञान की शिक्षा प्रदान की। प्रथम गुरू एवं नारी सशक्तिकरण का उच्च मानदण्ड स्थपित किया आपने असि, मसि, कृषि आदि षविधाओं की शिक्षा दी ।</p>
<p>तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद के जैन अध्ययन केन्द्र के निर्देशक प्रो. विपिन जैन ने TMU में भारतीय ज्ञान परम्परा केंन्द्र की प्रो. अनुपम जैन के निर्देशन में चल रही गतिविधियों एवं जैन अध्ययन केन्द्र में चल रहे शोधकार्यों की जानकारी दी।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-82755" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/01.jpg" alt="" width="516" height="395" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/01.jpg 516w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/01-300x230.jpg 300w" sizes="(max-width: 516px) 100vw, 516px" />महासंघ के अध्यक्ष डॉ. अनुपम जैन (इन्दौर), ने विस्तार से भारतीय ज्ञान परम्परा के भेदोपभेदों की जाकारी दी एवं बताया कि यह परम्परा लिखित एवं अलिखित दोनों है। लिखित में वैदिक एवं श्रमण दोनों परम्पराओं का साहित्य महत्त्वपूर्ण है। वस्तुतः जैन साहित्य का सम्यक् अनुशीलन किये बगैर भारतीय ज्ञान परम्परा को समझना संभव ही नहीं है। इस ज्ञान परम्परा में गणित का महत्त्वपूर्ण स्थान है जिस पर लिखा संदर्भ ग्रंथ जैन गणित आज विवेचित होगा ।</p>
<p>मौलाना आजाद प्रौद्योगिकी संस्थान, भोपाल से पधारी प्रो. ज्योति सिंघई ने कहा कि संस्कारों का बीजारोपण परिवार से ही प्रारम्भ हो जाता है। हम अपने बड़े बुजुगों के माध्यम से अनेक संस्कारों को सहज ही स्वीकार कर उच्च स्तरीय जीवन शैली को अंगीकार कर सुखद समाज बनाते है जो समाज निर्माण में सहायक होते है। हमारे केन्द्र पर गायत्री मंत्र का मानव शरीर पर प्रभाव का अध्ययन किया जा रहा है मैं चाहती हूँ कि णमोकार मंत्र पर भी अध्ययन हो जिससे मष्तिष्क तरंगों पर उसके प्रभाव का आकलन हो सके।</p>
<p>मुख्य अतिथि प्रो. अग्रवाल (मेरठ) ने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा का अन्य सभ्यताओं में विकसित ज्ञान के साथ तुलनत्मक अध्ययन किया जाना चाहिए। बेबोलियन, मेसोपोटामियान, ग्रीक आदि सभ्यताओं में जो ज्ञान परम्परा रही है उससे तुलना करने पर हम भारतीय ज्ञान परम्परा को ग्लोबल स्तर पर प्रतिष्ठित कर सकेंगे।</p>
<p>अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. मूर्ति ने विद्वानों का आह्वान किया किया कि वे ज्ञान कि विभिन्न क्षेत्रों में जैनाचार्यों एवं जैन साहित्य के योगदान का अध्ययन करें। IKS Division से हम उन्हें पूरा सहयोग देंगे।</p>
<p>कार्यक्रम का सशक्त एवं प्रभावी संचालन डॉ. संजीव सराफ (वाराणसी) ने किया। आभार माना महासंघ के महामंत्री प विजय कुमार जैन ने ।</p>
<p>सभी सहभागियों को सम्पुट (Kit) प्रदान किये गये।</p>
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		<title>अलवर-भरतपुर की सीमा में सीकरी जैन समाज द्वारा किया जाएगा स्वागत :  अयोध्या तीर्थ प्रभावना रथ 28 जुलाई को भरतपुर जिले में करेगा प्रवेश </title>
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		<pubDate>Thu, 27 Jul 2023 09:24:10 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पांच तीर्थंकरों की जन्मभूमि के विकास हेतु परम पूज्य आर्यिका शिरोमणि गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी के निर्देशन में भगवान ऋषभदेव जन्मभूमि अयोध्या तीर्थ प्रभावना रथ का प्रवर्तन संपूर्ण भारतवर्ष में हो रहा है। जिसका मंगल आगमन 28 जुलाई को राजस्थान के पूर्वी सिंह द्वार भरतपुर जिले में होगा। पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट.. सीकरी। जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पांच तीर्थंकरों की जन्मभूमि के विकास हेतु परम पूज्य आर्यिका शिरोमणि गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी के निर्देशन में भगवान ऋषभदेव जन्मभूमि अयोध्या तीर्थ प्रभावना रथ का प्रवर्तन संपूर्ण भारतवर्ष में हो रहा है। जिसका मंगल आगमन 28 जुलाई को राजस्थान के पूर्वी सिंह द्वार भरतपुर जिले में होगा। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट..</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सीकरी।</strong> जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव के साथ पांच तीर्थंकरों की जन्मभूमि के विकास हेतु परम पूज्य आर्यिका शिरोमणि गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी के निर्देशन में भगवान ऋषभदेव जन्मभूमि अयोध्या तीर्थ प्रभावना रथ का प्रवर्तन संपूर्ण भारतवर्ष में हो रहा है। जिसका मंगल आगमन 28 जुलाई को राजस्थान के पूर्वी सिंह द्वार भरतपुर जिले में होगा। जहां अलवर भरतपुर की सीमा पर सीकरी जैन समाज द्वारा स्वागत किया जाएगा तो वहीं भरतपुर जिले में 7 दिन का प्रवास रथ का रहेगा।</p>
<p>इस दौरान सीकरी पहाड़ी बोलखेड़ा, कामा, जुरहरा, डीग, कुम्हेर, भरतपुर, बयाना में रथ प्रवर्तन होगा। युवा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन एवं प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जैन जयपुर को रथ संयोजक नियुक्त किया गया है। युवा परिषद के प्रदेश संयुक्त महामंत्री संजय जैन बड़जात्या ने कहा की रथ के आगमन को लेकर भरतपुर जिले की जैन समाजों में काफी उत्साह नजर आ रहा है सभी जगह रथ प्रवर्तन की तैयारियां जोर-शोर से चल रही है।</p>
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		<title>ऑनलाइन दिया जाएगा प्रशिक्षण : कुंद- कुंद ज्ञानपीठ द्वारा प्राकृत भाषा के निशुल्क अध्ययन हेतु पाठ्यक्रम का हुआ शुभारंभ  </title>
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		<pubDate>Wed, 26 Jul 2023 12:45:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त शोध संस्थान कुंद कुंद ज्ञानपीठ द्वारा जैन धर्म के शास्त्रों को सरलता से समझने के लिए जैन आगमों की प्राचीन भाषा प्राकृत के अध्ययन अध्यापन हेतु निशुल्क पाठ्यक्रम प्रारंभ किया गया है। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230; इंदौर। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त शोध संस्थान कुंद कुंद [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त शोध संस्थान कुंद कुंद ज्ञानपीठ द्वारा जैन धर्म के शास्त्रों को सरलता से समझने के लिए जैन आगमों की प्राचीन भाषा प्राकृत के अध्ययन अध्यापन हेतु निशुल्क पाठ्यक्रम प्रारंभ किया गया है। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230;</strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त शोध संस्थान कुंद कुंद ज्ञानपीठ द्वारा जैन धर्म के शास्त्रों को सरलता से समझने के लिए जैन आगमों की प्राचीन भाषा प्राकृत के अध्ययन अध्यापन हेतु निशुल्क पाठ्यक्रम प्रारंभ किया गया है। संपूर्ण पाठ्यक्रम का प्रशिक्षण सप्ताह में 2 दिन रात्रि 7:30 से 8:30 बजे तक ऑनलाइन द्वारा दिया जाएगा एवं अध्ययन-अध्यापन हेतु पाठ्यक्रम की संपूर्ण फीस एवं व्यय भी कुंद कुंद ज्ञानपीठ द्वारा वहन किया जाएगा।</p>
<p><strong>श्रवणबेलगोला प्राकृत विद्यापीठ से संबद्ध </strong></p>
<p>कुंद कुंद ज्ञानपीठ के अध्यक्ष अमित कासलीवाल ने बताया कि यह पाठ्यक्रम श्रवणबेलगोला प्राकृत विद्यापीठ से संबद्ध है, जिसका शुभारंभ 25 जुलाई को राष्ट्रीय प्राकृत विद्यापीठ श्रवणबेलगोला के निर्देशक जयकुमार उपाध्ये ने किया। उपाध्ये ने प्राकृत भाषा के उत्थान एवं प्रशिक्षण के उद्देश्य से किए जा रहे प्रयासों के लिए कुंद कुंद ज्ञानपीठ की सराहना की और पाठ्यक्रम की सफलता के लिए शुभकामनाएं व्यक्त कीं। इस अवसर पर अतिथि के रूप में उपस्थित रंजना पटोरिया कटनी, अमित कासलीवाल एवं कुंद कुंद ज्ञानपीठ के पदाधिकारी एवं समाज के विशिष्ट जन मौजूद थे। पाठ्यक्रम का प्रशिक्षण शिक्षा प्रकोष्ठ की चेयरमैन संस्कृत एवं प्राकृत भाषा विदुषी प्रोफेसर डॉक्टर ‌संगीता मेहता द्वारा दिया जाएगा।</p>
<p><strong>किया जाएगा पुरस्कृत</strong></p>
<p>अमित कासलीवाल ने बताया कि परीक्षा में उपस्थित एवं श्रेष्ठ अंक प्राप्त करने वाले प्रशिक्षणार्थियों को स्वर्गीय अजीत कुमार सिंह कासलीवाल स्मृति प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत प्रमाण पत्र एवं प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाएगी। प्राकृत भाषा को सीखने के इच्छुक विद्यार्थी एवं समाजजन एमजी इस रोड स्थित कुंद कुंद ज्ञानपीठ (56 दुकान के पीछे) कार्यालय पर संपर्क कर आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर अरविंद जैन ने किया।</p>
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