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	<title>Deeksha Day &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Deeksha Day &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>प्रस्तुत की जाएगी नृत्य नाटिका : निकाली गई युवराज नेमिकुमार की बारात  </title>
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		<pubDate>Sat, 10 Aug 2024 08:41:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर महाराज की परम शिष्या आर्यिका पूर्णमति माताजी के 36वें दीक्षा दिवस के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय आराधना महोत्सव के तहत शुक्रवार को मुरार के बारादरी चौराहे से भगवान नेमिनाथ के गृहस्थ अवस्था के नेमिकुमार की भव्य बारात निकाली गई। पढ़िए सौरभ जैन की रिपोर्ट&#8230; ग्वालियर। संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर महाराज [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर महाराज की परम शिष्या आर्यिका पूर्णमति माताजी के 36वें दीक्षा दिवस के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय आराधना महोत्सव के तहत शुक्रवार को मुरार के बारादरी चौराहे से भगवान नेमिनाथ के गृहस्थ अवस्था के नेमिकुमार की भव्य बारात निकाली गई। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सौरभ जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ग्वालियर।</strong> संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर महाराज की परम शिष्या आर्यिका पूर्णमति माताजी के 36वें दीक्षा दिवस के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय आराधना महोत्सव के तहत शुक्रवार को मुरार के बारादरी चौराहे से भगवान नेमिनाथ के गृहस्थ अवस्था के नेमिकुमार की भव्य बारात निकाली गई। यह बारात दोपहर 1 बजे से शुरू होकर सदर बाजार, हुरावली मार्ग से होते हुए सिरोल चौराहा स्थित चातुर्मास स्थल पहुंची। इस दिन कि बारात में नेमिकुमार के साथ भगवान श्रीकृष्ण और अन्य राज्यों के राजा भी रथों पर सवार हुए । जैन युवा सेवा मंडल मुरार के अर्पित जैन ने बताया कि इस भव्य बारात में जबलपुर, हापुड़, नासिक, पंजाब और लोकल बैंड के साथ महाराष्ट्र की ढोल पार्टी ने अपनी प्रस्तुति दी। इसके साथ ही ट्रॉलियों पर विभिन्न संस्कृक्तियों के नृत्य भी प्रस्तुत किए गए।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-64429" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/08/IMG-20240810-WA0013.jpg" alt="" width="1152" height="864" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/08/IMG-20240810-WA0013.jpg 1152w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/08/IMG-20240810-WA0013-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/08/IMG-20240810-WA0013-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/08/IMG-20240810-WA0013-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/08/IMG-20240810-WA0013-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/08/IMG-20240810-WA0013-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/08/IMG-20240810-WA0013-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/08/IMG-20240810-WA0013-990x743.jpg 990w" sizes="(max-width: 1152px) 100vw, 1152px" /> होगा नेमिकुमार को वैराग्य</strong></p>
<p>आयोजन समिति के अजय, डिंपल जैन एवं सौरभ जैन ने बताया कि शनिवार को सुबह 9 बजे राग से वैराग्य नृत्य नाटिका के माध्यम से नेमिकुमार के वैराग्य धारण करने का दृश्य प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें दिखाया जाएगा बारात में पशुओं की चीख सुनकर वैराग्य होने के पश्चात नेमिकुमार तपस्या करने के लिए गिरनार पर्वत की ओर प्रस्थान कर गए। बारात से पहले, मीरा नगर जैन मंदिर, गेरू बाला जैन मंदिर से गाजे-बाजों के साथ नेमिकुमार की बिनोली यात्रा निकाली गई, जिसमें मुरार जैन समाज द्वारा नेमिकुमार की गोद भराई की रस्म अदा की गई।</p>
<p><strong>मनाया जाएगा माताजी का 36वां दीक्षा दिवस</strong></p>
<p>10 अगस्त को आर्यिका पूर्णमति माताजी का 36वां दीक्षा दिवस मनाया जाएगा। इस अवसर पर देश भर से सैकड़ों भुक्तगण शामिल होंगे।</p>
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		<title>आर्यिका प्रशांतमति माताजी का 38वां संयम दीक्षा दिवस मनाया : भव्य भजन संध्या का हुआ आयोजन </title>
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		<pubDate>Wed, 05 Apr 2023 11:34:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[परम् पूज्य विदुषी आर्यिका 105 प्रशांत मति माता जी के 38वें संयम दीक्षा दिवस पर श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिरजी में भव्य भजन संध्या का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आर्यिका श्री का अभिनंदन भी किया गया। पढ़िए सन्मति जैन काका की रिपोर्ट&#8230; सनावद। परम् पूज्य विदुषी आर्यिका 105 प्रशांत मति माता जी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>परम् पूज्य विदुषी आर्यिका 105 प्रशांत मति माता जी के 38वें संयम दीक्षा दिवस पर श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिरजी में भव्य भजन संध्या का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आर्यिका श्री का अभिनंदन भी किया गया। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए सन्मति जैन काका की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> परम् पूज्य विदुषी आर्यिका 105 प्रशांत मति माता जी के 38वें संयम दीक्षा दिवस पर श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिरजी में भव्य भजन संध्या का आयोजन किया गया। जिसमें प्रदीप पंचोलिया, पंकज जटाले, प्रशांत चौधरी, संगीता पाटौदी ने सुमधुर भजनों की प्रस्तुति देकर सभी भक्तों को भक्ति में विभोर कर दिया।</p>
<p><strong>विदुषी आर्यिका की उपाधि प्राप्त</strong></p>
<p>सन्मति जैन काका ने बताया कि आर्यिका मां प्रशांतमति माता जी का जन्म 3 अक्टूबर,1956 को आशोज कृष्ण चौदस को भावनगर (गुजरात) में हुआ था। आपने आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत कार्तिक शुक्ल दूज को नसलापुर में आचार्य शुभल सागर जी महाराज से लिया। आपकी आर्यिका दीक्षा 22 अप्रेल, 1986 को चैत्र शुक्ल चतुर्दशी को मुनि श्री दया सागर जी महाराज से हुई। आपको विदुषी आर्यिका की उपाधि भी प्राप्त है। आपका दीक्षा पूर्व नाम ब्र.पंकज बेन था। आपने चातुर्मास वर्ष 2012 का सनावद में एवं वर्ष 2013 का चातुर्मास सनावद के समीप पोदनपुरम में कर के अपनी ज्ञान की गंगा बहाकर सभी उसका रस पान करवाया था।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-41750" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230405-WA0106.jpg" alt="" width="577" height="821" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230405-WA0106.jpg 577w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230405-WA0106-211x300.jpg 211w" sizes="(max-width: 577px) 100vw, 577px" /></p>
<p><strong>किया गया अभिनंदन</strong></p>
<p>इस पावन अवसर पर सनावद नगर में सेवा समर्पण का भाव रखने वालीं व अभी तक सनावद नगर में सब से ज्यादा उपवास करने वालीं ज्योति बाला धनोते का पार्श्वनाथ महिला मंडल सुपार्श्वनाथ महिला मंडल व श्री शेवताम्बर समाज की ओर से आपका शॉल, श्रीफल व माला से भावभीना स्वागत किया गया। इस अवसर पर सरल जटाले, लोकेन्द्र जैन, प्रशांत चौधरी, वारिश जैन, अक्षय जैन, अरविंद जैन, सुधीर पंचोलिया, महेन्द्र मुंसी, राजेश ब्रदर्स, डॉ.उत्तम जैन व जवाहरलाल जैन सहित सभी समाजजन उपस्थित थे।</p>
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		<title>मुनि श्री ज्ञानसागर का 36वां दीक्षा दिवस ज्ञानतीर्थ पर मनाया गया : महामस्तकाभिषेक, विधान सहित हुए अनेक कार्यक्रम </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/36th_initiation_day_of_gyansagar_was_celebrated_at_gyantirtha-2/</link>
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		<pubDate>Fri, 31 Mar 2023 14:16:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगम्बराचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का 36वां दीक्षा दिवस समारोह ज्ञानतीर्थ क्षेत्र जैन मंदिर में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। पढ़िए मनोज नायक की विशेष रिपोर्ट&#8230; मुरैना। दिगम्बराचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का 36वां दीक्षा दिवस समारोह ज्ञानतीर्थ क्षेत्र जैन मंदिर में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>दिगम्बराचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का 36वां दीक्षा दिवस समारोह ज्ञानतीर्थ क्षेत्र जैन मंदिर में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए मनोज नायक की विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> दिगम्बराचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का 36वां दीक्षा दिवस समारोह ज्ञानतीर्थ क्षेत्र जैन मंदिर में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। ज्ञानतीर्थ क्षेत्र जैन मंदिर पर विराजमान ब्रह्मचारिणी बहिन मंजुला दीदी ने बताया कि उत्तर भारत के प्रथम दिगम्बराचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज (छाणी) परम्परा में मसोपवासी चर्या शिरोमणी आचार्य श्री सुमतिसागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य परम पूज्य गुरुदेव, ज्ञानतीर्थ प्रणेता, सराकोद्धारक समाधिस्थ षष्ट पट्टाचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का 36वां दीक्षा दिवस समारोह परम पूज्य गणिनी आर्यिका श्री अंतसमति माताजी ससंघ के पावन सान्निध्य में ज्ञानतीर्थ क्षेत्र पर मनाया गया।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-41232" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230331-WA0025.jpg" alt="" width="576" height="636" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230331-WA0025.jpg 576w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230331-WA0025-272x300.jpg 272w" sizes="(max-width: 576px) 100vw, 576px" /></p>
<p><strong>आचार्य छत्तीसी विधान</strong></p>
<p>कार्यक्रम के प्रथम दिन प्रातः 08 बजे से श्री जिनेन्द्र प्रभु के अभिषेक, शांतिधारा, पूजन के पश्चात् आचार्य छत्तीसी विधान हुआ। जिसमें गुरुभक्त सधर्मी बन्धु, माता-बहिनें इंद्र-इंद्राणी ने जिनेन्द्र भगवान की आराधना करते हुए अर्घ्य समर्पित किये। दूसरे दिन प्रातः 08 बजे बड़े बाबा श्री आदिनाथ भगवान का महामस्तकाभिषेक, शांतिधारा, पूजन के पश्चात गुरुदेव आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के चरणों का पाद प्रक्षालन, महा अर्चना, अष्टद्रव्य से पूजन एवं महाआरती की गई। इस अवसर पर भजन, भक्ति नृत्य एवं बालिकाओं द्वारा सांस्क्रतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये गए। समारोह का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ हुआ। आये हुए अतिथियों द्वारा चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन किया गया। परम् पूज्य गणिनी आर्यिका श्री अंतसमति माताजी को शास्त्र एवं श्री आदिनाथ भगवान की शांतिधारा करने का सौभाग्य मदनचंद अजमेर, टीनू मीनू दिल्ली, बाबूलाल अमित जैन मुरैना एवं आचार्य श्री ज्ञानसागर महाराज के चरणों का पाद प्रक्षालन करने का सौभाग्य वकील चंद, नीरज, पंकज, राजीव विवेक विहार दिल्ली वालों को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर जयपुर, दिल्ली, अजमेर, मेरठ, आगरा, अम्बाह, बानमोर, जौरा सहित बड़ी संख्या में गुरुभक्त सधर्मी बन्धु उपस्थित थे। दीक्षा दिवस के अवसर पर सभी आगन्तुक महानुभावों के आवास एवं भोजनादि की व्यवस्था ज्ञानतीर्थ पर की गई थी।</p>
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		<title>सप्त प्रतिमाधारी भगवानदेवी जैन की विनयांजलि सभा : आत्मा को जानना ही धर्म है-पदमचंद जैन </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 31 Mar 2023 14:09:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[समाज सेवी मनोज जैन (नेकी की दीवार) की माताजी मुरेना जैन समाज की वयोवृद्ध त्यागिवर्ती, सप्तम प्रतिमाधारी श्रीमती भगवान देवी जैन के देवलोकगमन पर अग्रसेन पार्क जीबाजी गंज मुरैना में विनयांजलि सभा का आयोजन किया गया। पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट&#8230; मुरैना। जिसने जन्म लिया है, उसका मरण निश्चित है। आत्मा अजर व अमर है। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>समाज सेवी मनोज जैन (नेकी की दीवार) की माताजी मुरेना जैन समाज की वयोवृद्ध त्यागिवर्ती, सप्तम प्रतिमाधारी श्रीमती भगवान देवी जैन के देवलोकगमन पर अग्रसेन पार्क जीबाजी गंज मुरैना में विनयांजलि सभा का आयोजन किया गया। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> जिसने जन्म लिया है, उसका मरण निश्चित है। आत्मा अजर व अमर है। आत्मा कभी मरती या नष्ट नहीं होती। आत्मा तो केवल शरीर परिवर्तित करती है। आत्मा को पहचानना ही धर्म है। धन से, बाहरी आडम्बरों से, बाहर के क्रिया -कांडों से धर्म नहीं आता। हमें अपने आपको धर्म में, आत्मा स्वीकार करने से, आत्मा आने से वह धर्ममय कहलाता है। जीव कोई भी हो, उसे एक न एक दिन इस नश्वर संसार को त्यागना ही होता है। फिर हम उस जीव के जाने पर रोना-धोना क्यों करते हैं। यही हमारी अज्ञानता है। दुखों को मिटाने के लिए आत्मा को पहचानना जरूरी है। यह बात तत्ववेत्ता पंडित पदमचन्द जैन दानाओली लश्कर ने श्रीमती भगवानदेवी जैन के देवलोकगमन पर अग्रसेन पार्क, जीबाजी गंज मुरैना में आयोजित विनयांजलि सभा में कही।</p>
<p><strong>कर रही थीं संयम की साधना</strong></p>
<p>समाज सेवी मनोज जैन (नेकी की दीवार) की माताजी मुरेना जैन समाज की वयोवृद्ध त्यागिवर्ती, सप्तम प्रतिमाधारी श्रीमती भगवान देवी जैन के देवलोकगमन पर अग्रसेन पार्क जीबाजी गंज मुरैना में विनयांजलि सभा का आयोजन किया गया। विनयांजलि सभा में राजेन्द्र भण्डारी ने कहा कि श्रीमती भगवानदेवी जैन एक धार्मिक विदुषी महिला थीं। वह परिवार में रहकर भी संयम की साधना कर रही थीं। प्रतिदिन देव शास्त्र गुरु की भक्ति, आराधना एवं प्रार्थना करना उनकी दिनचर्या में शामिल था। विनयांजलि सभा में मुरैना विधायक राकेश मावई, भाजपा जिलाध्यक्ष योगेशपाल गुप्ता, अम्बाह नगर पालिका अध्यक्षा अंजली जिनेश जैन, नगर निगम आयुक्त संजीव जैन, पूर्व मंत्री मुंशीलाल, शिवमंगल सिंह तोमर, चंद्रप्रकाश शिवहरे, रमेशचंद विरला, गजेंद्र परमार, गोविंद बंसल, राजेन्द्र गोयल, मोहनलाल गर्ग, प्रकाश अग्रवाल सीए, श्याम, अग्रवाल सीए, विशनलाल गर्ग, केदार शिवहरे, श्याम खंडेलवाल, संदीप शर्मा एडवोकेट, रवि गुप्ता पत्रकार, अवधेश दंडोतिया पत्रकार, उपेंद्र गौतम, प्रदीप अवस्थी पत्रकार, देवेश शर्मा पत्रकार, श्रीनिवास शर्मा पत्रकार, अनिल गोयल अली, राजेश शर्मा बाबूजी सहित बहुतायत संख्या में नगर के समाजसेवी, उद्योगपति, पत्रकारबन्धु उपस्थित थे।</p>
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		<title>आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के दीक्षा दिवस 31 मार्च पर विशेष :  सराकोद्धारक व सराको के राम नाम से हुए प्रसिद्ध </title>
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		<pubDate>Thu, 30 Mar 2023 10:38:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुरैना में 01 मई 1957 को श्री शांतिलाल जैन (विचपुरी वाले) के घर मां श्रीमती अशर्फी देवी की कुक्षी से एक बालक का जन्म हुआ। पंडित जी ने बालक की कुंडली बनाकर नाम रखा उमेश। यही उमेश आगे चलकर आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के नाम से प्रसिद्ध हुए। आपने भगवान महावीर स्वामी जन्मकल्याणक के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>मुरैना में 01 मई 1957 को श्री शांतिलाल जैन (विचपुरी वाले) के घर मां श्रीमती अशर्फी देवी की कुक्षी से एक बालक का जन्म हुआ। पंडित जी ने बालक की कुंडली बनाकर नाम रखा उमेश। यही उमेश आगे चलकर आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के नाम से प्रसिद्ध हुए। आपने भगवान महावीर स्वामी जन्मकल्याणक के पावन अवसर पर चैत सुदी तेरस 31 मार्च, 1988 को श्री सिद्धक्षेत्र सोनागिर जी में आचार्य श्री सुमतिसागर जी महाराज से मुनि दीक्षा ग्रहण की। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए मनोज जैन नायक का यह विशेष आलेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना, मनोज जैन नायक।</strong> चम्बल अंचल की पावन व पवित्र वसुन्धरा पर संस्कारधानी धर्म नगरी मुरैना में 01 मई 1957 को श्री शांतिलाल जैन (विचपुरी वाले) के घर मां श्रीमती अशर्फी देवी की कुक्षी से एक बालक का जन्म हुआ। पंडित जी ने बालक की कुंडली बनाकर नाम रखा उमेश। बालक उमेश प्रारम्भ से ही धार्मिक संस्कारों से प्रभावित रहे। आप शुरू से ही देव- शास्त्र -गुरु की भक्ति में मग्न रहते थे।</p>
<p><strong>विरासत में मिली प्रेरणा</strong></p>
<p>आपको संयम के मार्ग पर चलने की प्रेरणा विरासत में ही मिली थी। आपके बाबा शंकरलाल जी (क्षुल्लक वर्धमान सागर) एवं मुरैना के श्री गोपाल दिगम्बर जैन संस्कृत महाविद्यालय से प्राप्त शिक्षा व संस्कारों का ऐसा प्रभाव रहा कि आपको आधुनिक भौतिक परिवेश व सांसारिक सुख भी प्रभावित नहीं कर सका। मात्र 19 वर्ष की अल्पआयु में गृह त्यागकर संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से ग्राम वीरमपुर-अजमेर में सन 1974 में आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत अंगीकार कर संयम के मार्ग पर चलने का दृढ़ संकल्प लिया।</p>
<p>आपके दृढ़ निश्चय को देखते हुए 5 नवम्बर, 1976 को श्री सिद्धक्षेत्र सोनागिर जी में आचार्य श्री सुमतिसागर जी महाराज ने आपको क्षुल्लक दीक्षा प्रदान की और नाम रखा क्षुल्लक गुण सागर जी महाराज। दीक्षा लेने के बाद अपने जैन शास्त्रों का गहन अध्ययन किया। आपकी क्षुल्लक अवस्था की उत्कृष्ट साधना से अनेक धर्मानुरागी बन्धु प्रभावित हुए।</p>
<p>उनमें से जयकुमार एवं वीरेंद्र जी ने तो आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से मुनिदीक्षा ग्रहण की और मुनिश्री सुधासागर जी व मुनिश्री क्षमासागर जी महाराज के रूप में साधनारत हैं। दीक्षा लेने के बाद सन 1979 में मानस्तम्भ पंचकल्याणक महोत्सव के अवसर पर आचार्य श्री विद्यासागर जी के साथ एक दिन के अल्पप्रवास पर आप मुरैना आये थे। क्षुल्लक अवस्था में आपने कभी भी वाहन का उपयोग नहीं किया और न ही कभी दुपट्टे का उपयोग किया।</p>
<p><strong>दुर्गम स्थानों पर पद विहार</strong></p>
<p>भगवान महावीर स्वामी जन्मकल्याणक के पावन अवसर पर चैत सुदी तेरस 31 मार्च, 1988 को श्री सिद्धक्षेत्र सोनागिर जी में आचार्य श्री सुमतिसागर जी महाराज से मुनि दीक्षा ग्रहण की। नाम रखा गया मुनिश्री ज्ञानसागर जी महाराज। पूज्य गुरुदेव ने आपकी प्रतिभा को देखते हुए आपको उपाध्याय पद से विभूषित किया। आपने दुर्गम स्थानों में पद विहार करते हुए जैन धर्म से विमुख हुए सराक बन्धुओं को पुनः समाज की धारा में लाने का सतत प्रयास किया। इसी कारण आप सराकोद्धारक व सराको के राम नाम से प्रसिद्ध हुए। श्री अतिशय क्षेत्र बड़ागांव (बागपत) त्रिलोकतीर्थ धाम में 27 मई 2013 में आपको आचार्य श्री शांतिसागर (छाणी) परम्परा के षष्ट पट्टाचार्य के रूप में आचार्य पद पर प्रतिष्ठित किया गया।</p>
<p><strong>ऐसा हुआ ज्ञानतीर्थ का निर्माण</strong></p>
<p>सराकोद्धारक षष्ट पट्टाचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के परम भक्त अनूप जैन भण्डारी मुरैना ने बताया कि दिगम्बर अवस्था में पूज्य गुरुदेव अपनी जन्मस्थली मुरैना में पहलीबार 26 जनवरी 2003 में अतिशय क्षेत्र सिहोनियां जी पंचकल्याक महोत्सव के निमित्त आये थे। तब पूज्य गुरुदेव की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से ए बी रोड मुरैना में ज्ञानतीर्थ जैन मंदिर निर्माण हेतु जमीन खरीदी गई और ज्ञानतीर्थ निर्माण की आधार शिला रखी गई। पूज्य आचार्य श्री के सान्निध्य में मुरेना नगर में श्री नन्दीश्वरदीप पंचकल्याणक 3 फरवरी 2006 में हुआ और ऐतिहासिक नगर गजरथ निकाला गया। वर्ष 2016 में पूज्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का ज्ञानतीर्थ मुरैना में चातुर्मास हुआ। गुरुदेव के ज्ञानतीर्थ आने से ज्ञानतीर्थ के निर्माणकार्य में गति आई। ज्ञानतीर्थ के शिखर पर बड़े बाबा श्री आदिनाथ की विशाल एवं भव्य पदमासन मूर्ति 14 जुलाई 2016 को विराजमान की गई। ज्ञानतीर्थ जैन मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के पूर्व ही गुरुदेव ने धर्म प्रभावना हेतु विहार कर दिया।</p>
<p><strong>साधना करते हुए मोक्षगामी</strong></p>
<p>विधि के विधान को कौन टाल सकता है। गुरुदेव विहार करते हुए कोटा के नजदीक अतिशय क्षेत्र वांरा (राज.) पहुंचे और वहीं पर अपने अंतिम वर्षायोग में साधना करते हुए भगवान महावीर निर्वाण दिवस की पावन बेला में कार्तिक कृष्ण अमावस्या 15 नबंवर 2020 को समाधि को प्राप्तकर मोक्षगामी हो गए। सप्तम पट्टाचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज, आचार्य श्री विनीत सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में एवं स्वस्तिधाम प्रणेत्री गुरुमां श्री स्वस्तिभूषण माताजी के पावन निर्देशन में 01 फरवरी से 06 फरवरी 2023 तक मुरैना ज्ञानतीर्थ जैन मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा सम्पन्न हुई। आज 31 मार्च को ऐसे पूज्य गुरुदेव श्री ज्ञानसागर जी महाराज के दीक्षा दिवस पर उनके चरणों में कोटि-कोटि नमन।</p>
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		<title>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज : वर्तमान युग में भी चारित्र चक्रवर्ती प्रथम आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की बनाई हुई चर्या का कर रहे हैं पालन </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 28 Feb 2023 08:12:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर जी महाराज जी के 55वे संयम वर्ष वर्धन दिवस पर विशेष (संयम दीक्षा दिवस &#8211; फागुन कृष्णा 8 अष्टमी, 24 फरवरी 1969) आपका व्यक्तित्व अनेक विशेषताओं से भरा हुआ है। आपकी निर्भय एवं निरीहवर्ति समन्वित सम दृष्टि इस आशय का द्योतक है कि निर्धन और श्रीमंत आदि सभी के प्रति [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर जी महाराज जी के 55वे संयम वर्ष वर्धन दिवस पर विशेष (संयम दीक्षा दिवस &#8211; फागुन कृष्णा 8 अष्टमी, 24 फरवरी 1969)</strong></p>
<hr />
<p><strong>आपका व्यक्तित्व अनेक विशेषताओं से भरा हुआ है। आपकी निर्भय एवं निरीहवर्ति समन्वित सम दृष्टि इस आशय का द्योतक है कि निर्धन और श्रीमंत आदि सभी के प्रति आपका समान व्यवहार है। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए उनकी संघस्थ शिष्या आर्यिका श्री महायशमति माताजी का विशेष आलेख</span></strong></p>
<hr />
<p>परम पूज्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की मूल परम्परा के पंचम पट्टाधीश आचार्य गुरुवर श्री 108 वर्धमान सागर जी महाराज जी हैं।</p>
<p>आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज द्वारा आरोपित चरित्र रूपी पौधे की वृद्धि एवं रक्षा आचार्य श्रीवीर सागर जी महाराज, आचार्य श्री शिव सागर, आचार्य श्री धर्म सागर, आचार्य श्री अजित सागर जी महाराज के द्वारा अभी तक हुई हैं। पूर्वाचार्यों द्वारा अभिसिंचित उस चारित्र वृक्ष ने वर्तमान में विशाल रूप धारण किया है और उसका संरक्षण, सिंचन एवं संवर्धन आचार्य श्री वर्धमान सागर जी बहुत ही कुशलता से कर रहे हैं।</p>
<p><strong>महान शासन पद्धति</strong></p>
<p>आपकी शासन पद्धति अपने आप में बहुत ही महान है। आप के शासन में इस निकृष्ट काल लिखकर तत्काल में भी पूर्वाचार्यों के समान विशाल संघ एक सूत्र में अनुबद्ध है। आपके हृदय में स्थित मृदुता की प्रतीक सरल, स्पष्ट एवं मृदु वाणी, हास्य युक्त प्रसन्न मुख- मुद्रा से प्रभावित होकर अनेक भव्य आत्मा अपने पापों का पक्षालन करते हुए जीवन सफल एवं धन्य मनाते हैं।</p>
<p><strong>विशेष है व्यक्तित्व</strong></p>
<p>आपका व्यक्तित्व अनेक विशेषताओं से भरा हुआ है। आपकी निर्भय एवं निरीहवर्ति समन्वित सम दृष्टि इस आशय का द्योतक है कि निर्धन और श्रीमंत आदि सभी के प्रति आपका समान व्यवहार है। इस प्रकार आपके ज्योतिर्मय जीवन की जगमगाती ज्योति से आज कितने ही प्राणी अपने आत्म ज्योति का अन्वेषण कर रहे हैं और करते रहेंगे। आपकी अथाह महिमा को प्रदर्शित करना अशक्य है। मैं छोटी सी शिष्या आचार्य श्री के चरणों में त्रिकाल नमोस्तु करती हूं</p>
<p>तथा मन के कुछ भावों के श्रद्धा सुमन को अर्पित करती हुई भावना करती हूं कि गुरुदेव शतायु होकर हमें मार्गदर्शन देते रहें। आपके द्वारा प्रदत आर्यिका व्रत आपकी पुनीत छत्र छाया में निर्दोष पलता रहे। आपके संपर्क में जो व्यक्ति एक बार आ गया, वह आपकी सौम्य प्रशांत मूर्ति को विस्मृत नहीं कर सकता।आपका व्यवहार पक्ष जितना सुंदर और सबल है, उतना ही आध्यात्मिक पक्ष प्रबल है। समता आपके व्यवहार में सहचरिणी के रूप में रहती है। सच तो यह है कि आप की मधुर वाणी सौम्य छवि ने वात्सल्यता के कारण जन-जन के हृदय में अपना स्थान बना लिया है। आपके निर्मल मन की आभा ने लोगों को अपनी ओर खींच लिया है और आपकी सरलता और भद्रता ने देश व समाज पर मानो जादू कर दिया है। आपके जीवन का प्रत्येक क्षण उच्च साधना का परिचय देता है क्योकि मिथ्यान्धकार से ग्रसित जीवों को आप अपने आलोक से प्रकाश प्रदान करने में सूर्य व्रत सिद्ध हुए हैं।</p>
<p><strong>रत्नत्रय की निधि में आलोकित</strong></p>
<p>पूज्य गुरुदेव लोकानुरंजन से दूर रहते हैं और रत्नत्रय की निधि में आप सदा आलोकित रहते हैं।आप की आगम निष्ठा एवं तपश्चरण अग्नि सराहनीय है। तभी तो आज दिगंबर साधु समुदाय में आपका जीवन अत्यंत गौरवपूर्ण श्रद्धा के आधार का केंद्र बना हुआ है। वर्तमान की भौतिकता के युग में भी आप चतुर्थ काल के जैसी चर्या या यूं कहें कि चारित्र चक्रवर्ती प्रथम आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की बनाई हुई आगम परंपरा के अनुसार चर्या का पालन कर रहे हैं और संघ के साधुओं से करवा रहे हैं। आप इस युग के दैदीप्यमान नक्षत्र हैं, जिसकी दिव्य दृष्टि सदा सदैव बनी रहेगी।</p>
<p><strong>दिव्य ज्योति करुणा के सागर</strong></p>
<p>वीतराग वाणी को जीवन में आकार रूप देने वाले आर्त और रौद्र ध्यान से दूर रहने वाले स्व पर कल्याण में दत्तचित पत्ती की तरह रहने वाले साधना में सर्वोच्च स्थान रखने वाले प्रेरणास्पद व्यक्तित्व के धनी दिव्य ज्योति करुणा के सागर प्रवचन पटू शांत स्वभावी भद्र परिणामी ज्ञान ध्यान तप में सदा रहने वाले, सहिष्णुता की साकार मूर्ति अद्वितीय संत&#8230; बस यही है आपका जीवन परिचय। जो स्वयं मोह को छोड़कर कुल पर्वतों के समान पृथ्वी का उद्धार करने वाले हैं। जो समुद्र के समान स्वयं धन की इच्छा से रहित होकर रत्नों के स्वामी हैं तथा जो आकाश के समान व्यापक होने से किसी के द्वारा स्पष्ट ना होकर विश्व की विश्रांति के कारण हैं। ऐसे अपूर्व गुणों के धारक पुरातन पूर्वाचार्यों के समान उनके गुणों का अनुकरण करने वाले महान आचार्य परमेष्ठी हैं। निर्ग्रन्थ चर्या में वैसे तो प्रत्येक युग में कठिन चर्या रही है किंतु इस कलियुग में तो ओर भी कठिन हो गई है क्योंकि इस भौतिक युग में लोगों की भोग लिप्सा प्राणियों में आत्म रुचि तथा संसार से विरक्त नहीं होने देती है।</p>
<p><strong>आचार्य श्री सोमदेव ने कहा भी है&#8230;</strong></p>
<p>इस कलिकाल में मनुष्यों का चित्त चंचल हो गए धर्म में उपयोग- स्थिर नहीं रहता तथा शरीर अन्न का कीड़ा बन गया है तथापि आज भी बड़ा आश्चर्य है कि आज भी जिनेद्र रूप के धारक निर्ग्रन्थ साधु पाए जाते हैं।</p>
<p><strong>यह सब प्रताप आचार्य शांतिसागर महाराज का है।</strong></p>
<p>साधूना दर्शनम पुण्यं तीर्थ भूता ही साधक कालेन फलति तीर्थ सद्य साधो समागम</p>
<p><strong>यानी</strong></p>
<p>साधु के दर्शन करने से पुण्य तो होता है क्योंकि साधु तीर्थ स्वरूप हैं। तीर्थ दर्शन तो कालांतर में फलदाई होता है किंतु साधु दर्शन से तत्काल ही फल मिलता है। इसी उक्ति के अनुसार मेरे मन में साधु समागम की उत्कृष्ट भावना घर कर गई और परम शांत वात्सल्य मूर्ति ऋषि राज का दर्शन ही निर्मल दृष्टि का कारण बना। उसी समय जीवन में रत्नत्रय को धारण करके जिनके जैसा बनना है, दृढ़ संकल्प लिया। प्रताप गुरु भक्ति के सब मुक्ति प्राप्त होती है तो क्या उसे सूची पदार्थों की प्राप्ति नहीं हो सकती।</p>
<p><strong>गुरुभक्ति सती मुक्तये शूद्रा कि वा ना साध यति</strong></p>
<p><strong>त्रैलोक्य मूल्यरत्नेन दुर्लभा किम प्रयोजनम</strong></p>
<p>अर्थात गुरुभक्ति से जब मुक्ति प्राप्त होती है तो क्या क्षुद्र पदार्थों की प्राप्ति नहीं हो सकती। जैसा अमूल्य रत्न से तीनों लोक की संपत्ति प्राप्त होती है तो उससे धान्य का छिलका प्राप्त नहीं हो सकता है। इन्हीं विचारों ने मन को प्रेरित किया कि अनादि काल से संसार के दुःखों से संतृप्त मुझ को इन गुरुदेव की भक्ति और इनके चरण सानिध्य में ही संसार समुद्र से पार होने का उपाय प्राप्त हो सकता है। अतः मैंने निर्णय लिया कि अब इन परम गंभीर एवं शांत गुरुवर के सानिध्य में ही अपना जीवन व्यतीत करना है।</p>
<p><strong>श्री शांति सिंधु सी निर्भयता</strong></p>
<p><strong>हो वीर सिंधु सी निर्मलता</strong></p>
<p><strong>शिव सागर सा अनुशासन हो</strong></p>
<p><strong>हो धर्म सिंधु सी निस्पर्हता</strong></p>
<p><strong>संयत वाणी चिंतन शक्ति होअजित सुरिवर सी दृढ़ता</strong></p>
<p><strong>इन सर्व गुणों का संचय हो</strong></p>
<p><strong>वृद्धि गत हो मन की मृदुता</strong></p>
<p><strong>हो मार्ग आपका निष्कंटक</strong></p>
<p><strong>यशवती बने यह परम्परा</strong></p>
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