<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Dedication &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/dedication/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Thu, 08 Jan 2026 16:04:06 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>Dedication &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>बंगाल, झारखंड, ओड़िसा शिक्षण शिविरों में जैनत्व संस्कार प्रतिभा सम्मान : 25 स्थानों में 2000 से ज्यादा शिविरार्थी हुए शामिल  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/jainism_cultural_talent_recognition_in_bengal_jharkhand_and_odisha_training_/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/jainism_cultural_talent_recognition_in_bengal_jharkhand_and_odisha_training_/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 08 Jan 2026 16:04:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Cultural Program]]></category>
		<category><![CDATA[Dedication]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar monk]]></category>
		<category><![CDATA[Drawing Competition]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain monk]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Nun]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Jainism Culture and Talent Award]]></category>
		<category><![CDATA[Jainism Culture Program]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Talent Award Ceremony]]></category>
		<category><![CDATA[Winter Knowledge and Culture Education Camp]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[जैनत्व संस्कार कार्यक्रम]]></category>
		<category><![CDATA[जैनत्व संस्कार प्रतिभा सम्मान]]></category>
		<category><![CDATA[ड्रॉ प्रतियोगिता]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[प्रतिभा सम्मान समारोह]]></category>
		<category><![CDATA[शीतकालीन ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविर]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[समर्पण]]></category>
		<category><![CDATA[सांस्कृतिक कार्यक्रम]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=98006</guid>

					<description><![CDATA[आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की प्रेरणा से शीतकालीन ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविर 2026 का बंगाल, ओडिशा, झारखंड सराक क्षेत्र में,शिक्षण शिविरों का धर्म प्रभावना के साथ संपन्न हुआ।शिक्षण शिविर में 2000 से ज्यादा शिविराथियों ने भाग लेकर संस्कार ग्रहण किए।आसनसोल से पढ़िए, यह खबर&#8230;   आसनसोल। आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की प्रेरणा से [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की प्रेरणा से शीतकालीन ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविर 2026 का बंगाल, ओडिशा, झारखंड सराक क्षेत्र में,शिक्षण शिविरों का धर्म प्रभावना के साथ संपन्न हुआ।शिक्षण शिविर में 2000 से ज्यादा शिविराथियों ने भाग लेकर संस्कार ग्रहण किए।<span style="color: #ff0000">आसनसोल से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>  आसनसोल</strong>। आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की प्रेरणा से आचार्य ज्ञेय सागर जी महाराज, आ.स्वस्ति भूषण माताजी, आ. आर्षमति माताजी,आ.सुज्ञान मति माताजी के आशीर्वाद से शीतकालीन ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविर 2026 का बंगाल, ओडिशा, झारखंड सराक क्षेत्र में,शिक्षण शिविरों का धर्म प्रभावना के साथ संपन्न हुआ। शिक्षण शिविर में 2000 से ज्यादा शिविराथियों ने भाग लेकर संस्कार ग्रहण किए। ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविर ब्र. मंजुला दीदी, ब्र.मनीष भैया के निर्दशन में संम्पन हुए। शिक्षण शिविर में जैनत्व संस्कार कार्यक्रम,प्रतिभा सम्मान समारोह,समर्पण ड्रॉ प्रतियोगिता सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। शिविर संयोजक मनीष विद्यार्थी ने बताया पश्चिम बंगाल, झारखंड, उड़ीसा प्रांत के विभिन्न अंचलों में शीतकालीन ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविर जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से आयें विद्वानों द्वारा नैतिक शिक्षा,ज्ञान दर्पण भाग 1,2 छहढाला, नैतिक शिक्षा दी गई, जिसमें छत्तीसगढ़ से आयें पं. जयकुमार जी दुर्ग,पं. शिखरचंद जैन भिलाई म. प्र. टीकमगढ़ से पं.श्रीनंदन जी उ.प्र. महरौनी से पं.कपिल शास्त्री,सागर से पं. मुन्नालाल जैन,पं. राजकुमार कर्द सहसंयोजक, पं.मोहित शास्त्री धर्म प्रभावना कर रहे हैं।</p>
<p><strong>इनका सहयोग रहा</strong></p>
<p>सभी स्थानों पर ज्ञान दर्पण भाग 1, 2, छहडाला, पूजन शिविर नैतिक संस्कार, आरती, प्रवचन, सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थानीय परीक्षा एवं पुरस्कार वितरण के साथ शिक्षण शिविर का समापन श्री दिगंबर जैन मंदिर रघुनाथपुर में सामूहिक महामंडल विधान प्रतियोगिता ड्रा,विद्वानों का सम्मान स्थानीय कार्यकर्ताओं का सम्मान के साथ शिक्षण शिविर का समापन हुआ। स्थानीय संयोजक लखन ,गौरांग जैन,रामदुलार जैन, डॉ. प्रदीप जैन,शक्तिपथ, सराक समिति के लखनपुर से गयाराम जैन अध्यक्ष संजय जैन सचिव, रघुनाथपुर से पुटुक जैन अध्यक्ष एवं सराक उत्थान समिति बंगाल, उड़ीसा, झारखंड, भारतीय जैन मिलन क्षेत्र 10, वर्णी विकास सभा एवं जन कल्याण समिति सागर का महत्वपूर्ण योगदान रहा। शिक्षण शिविर के आयोजन में भारतवर्षीय सराक ट्रस्ट्र दिल्ली अध्यक्ष गजराज गंगवाल, मंत्री इंद्रेश जैन दिल्ली की महत्वपूर्ण भूमिका रही।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/jainism_cultural_talent_recognition_in_bengal_jharkhand_and_odisha_training_/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>करवा चौथ रिश्ते की स्थिरता और संवेदनशीलता का प्रतीक है: “करवा” यानी मिट्टी का घड़ा, जो प्राचीन भारत में जल का प्रतिनिधि  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/karwa_chauth_symbolizes_stability_and_sensitivity_in_relationships/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/karwa_chauth_symbolizes_stability_and_sensitivity_in_relationships/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 08 Oct 2025 12:43:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Bihar]]></category>
		<category><![CDATA[Dedication]]></category>
		<category><![CDATA[Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Haryana]]></category>
		<category><![CDATA[Indian Culture]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[jain samaj]]></category>
		<category><![CDATA[Karwa Chauth]]></category>
		<category><![CDATA[Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[Rajasthan]]></category>
		<category><![CDATA[Sacrifice]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Tolerance]]></category>
		<category><![CDATA[Uttar Pradesh]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[करवा चौथ]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[त्याग]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[बिहार]]></category>
		<category><![CDATA[भारतीय संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[राजस्थान]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[समर्पण]]></category>
		<category><![CDATA[सहनशीलता]]></category>
		<category><![CDATA[हरियाणा]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=92104</guid>

					<description><![CDATA[भारतीय संस्कृति का एक लोकप्रिय पर्व करवा चौथ है, इसकी परंपरा प्रेम और समर्पण से जुड़ी है, लेकिन आधुनिक समाज में यह त्यौहार समानता और साझेदारी के भाव से मनाया जाने लगा है, रिश्तों में आपसी सम्मान, प्रेम और विश्वास का उत्सव भी है। परंपरा तभी सार्थक है, जब उसमें आत्मा के साथ-साथ समय की [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>भारतीय संस्कृति का एक लोकप्रिय पर्व करवा चौथ है, इसकी परंपरा प्रेम और समर्पण से जुड़ी है, लेकिन आधुनिक समाज में यह त्यौहार समानता और साझेदारी के भाव से मनाया जाने लगा है, रिश्तों में आपसी सम्मान, प्रेम और विश्वास का उत्सव भी है। परंपरा तभी सार्थक है, जब उसमें आत्मा के साथ-साथ समय की समझ भी हो। <span style="color: #ff0000">करवा चौथ पर पढ़िए, टीकमगढ़ की प्रियंका पवन घुवारा का यह विशेष ज्ञानवर्द्धक आलेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टीकमगढ़।</strong> भारतीय संस्कृति का एक लोकप्रिय पर्व करवा चौथ है, इसकी परंपरा प्रेम और समर्पण से जुड़ी है, लेकिन आधुनिक समाज में यह त्यौहार समानता और साझेदारी के भाव से मनाया जाने लगा है, रिश्तों में आपसी सम्मान, प्रेम और विश्वास का उत्सव भी है। परंपरा तभी सार्थक है, जब उसमें आत्मा के साथ-साथ समय की समझ भी हो। भारतीय समाज में स्त्री के जीवन को “सुहाग” से जोड़ा गया है। ऐसे में करवा चौथ जैसे व्रत स्त्री के समर्पण, त्याग और सहनशीलता का उत्सव बन गए। करवा चौथ का व्रत उत्तर भारत में विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार में बड़े उत्साह से मनाया जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएँ अपने पति की दीर्घायु के लिए सूर्याेदय से चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं। जब चाँद निकलता है तो पत्नी छलनी से पति का चेहरा देख कर व्रत तोड़ती है। कभी यह व्रत गाँव की औरतों के बीच अपनापन और सहयोग का प्रतीक था। महिलाएँ एक-दूसरे के घर जातीं, मिट्टी के करवे (घड़े) में जल भरतीं, गीत गातीं ‘करवा चौथ का व्रत है भाई, करवा लाना भूली न जाई’ यह त्यौहार उनके लिए आपसी मिलन का अवसर था, जहाँ वे जीवन की तकलीफ़ों को साझा करतीं। फिर भी परंपराओं को केवल अंध विश्वास कहकर नकार देना भी उचित नहीं। हर संस्कृति की अपनी आत्मा होती है। “करवा” यानी मिट्टी का घड़ा, जो प्राचीन भारत में जल का प्रतीक था, और “चौथ” यानी चतुर्थी का दिन। इस त्यौहार का मूल भाव केवल पति की आयु से नहीं, बल्कि स्त्री के सामाजिक सहयोग से भी जुड़ा था। यह सच है कि समय के साथ इसके स्वरूप में बदलाव आया है। अब कई जगह पति भी व्रत रखते हैं, कई जोड़े इसे “रिलेशनशिप रिचुअल” की तरह मनाते हैं। यह बदलाव बताता है कि समाज धीरे-धीरे समानता की ओर बढ़ रहा है। त्योहार का अर्थ वही रहता है, पर दृष्टिकोण बदल जाता है। करवा चौथ जहाँ पहले यह स्त्री के कर्तव्य का प्रतीक था, वहीं अब यह रिश्तों की साझेदारी का रूप ले रहा है। करवा चौथ को न तो केवल रूढ़िवादिता समझें, न ही सिर्फ दिखावे का त्यौहार बनाएं।</p>
<p>इसके भीतर के प्रेम, भाव और समर्पण को सच्चे अर्थों में आत्मसात करें ,यदि इस व्रत के बहाने पति-पत्नी एक-दूसरे को समझने, एक-दूसरे के त्याग की कद्र करने और रिश्ते में नयापन लाने का अवसर पा सके तो यह त्यौहार अपने असली अर्थ में सफल होगा। क्योंकि आखिरकार, करवा चौथ सिर्फ पति की लंबी उम्र का पर्व नहीं, बल्कि उस रिश्ते की स्थिरता और संवेदनशीलता का प्रतीक है, जो दो आत्माओं को जोड़ता है।आज जब हम समानता, स्वतंत्रता और पारस्परिक सम्मान की बात करते हैं, तो यह व्रत भी एकतरफा नहीं रहना चाहिए। यदि पत्नी पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती है, कहते हैं, शिक्षा केवल अक्षर ज्ञान नहीं देती, बल्कि वह जीवन का मार्ग प्रशस्त करती है। किंतु उस शिक्षा का प्रयोग कौन-से दिशा में होगा यह निर्णय हर व्यक्ति को स्वयं करना पड़ता है। तो पति भी पत्नी की सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य के लिए समान भाव से प्रार्थना करे यही सच्चा प्रेम और समानता है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/karwa_chauth_symbolizes_stability_and_sensitivity_in_relationships/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>शरद पूर्णिमा पर हुआ सेवा और समर्पण का पर्व : विद्यासागर, समयसागर व ज्ञानमती माताजी के अवतरण दिवस पर रक्तदान व खीर वितरण से महरौनी धन्य हुआ </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/sharad_purnima_seva_samarpan_mahotsav_maharouni/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/sharad_purnima_seva_samarpan_mahotsav_maharouni/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Oct 2025 11:35:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharaya Day]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Avtaran Diwas]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Vidyasagar]]></category>
		<category><![CDATA[Blood Donation Camp]]></category>
		<category><![CDATA[Dedication]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Community]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain Panchayat]]></category>
		<category><![CDATA[Eshanika Foundation]]></category>
		<category><![CDATA[Faith]]></category>
		<category><![CDATA[Gandhi Chowk Mahrauni शरद पूर्णिमा]]></category>
		<category><![CDATA[Gyanmati Mataji]]></category>
		<category><![CDATA[Human Welfare]]></category>
		<category><![CDATA[Humanity]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain religion]]></category>
		<category><![CDATA[jain sabha]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Youth Union]]></category>
		<category><![CDATA[Khir Distribution]]></category>
		<category><![CDATA[Lalitpur news]]></category>
		<category><![CDATA[Mahrauni Blood Donation]]></category>
		<category><![CDATA[Mahrauni Event]]></category>
		<category><![CDATA[Mahrauni Jain Samaj]]></category>
		<category><![CDATA[Mahrauni News]]></category>
		<category><![CDATA[Rajiv Singhai Monu]]></category>
		<category><![CDATA[Religious Harmony]]></category>
		<category><![CDATA[Samarpan]]></category>
		<category><![CDATA[Samaysagar Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Service Event]]></category>
		<category><![CDATA[Seva Parv]]></category>
		<category><![CDATA[Sharad Purnima]]></category>
		<category><![CDATA[Shraddha]]></category>
		<category><![CDATA[Shravan Month]]></category>
		<category><![CDATA[shrifal news]]></category>
		<category><![CDATA[Social Service]]></category>
		<category><![CDATA[Spiritual Event]]></category>
		<category><![CDATA[Udaypur News]]></category>
		<category><![CDATA[Vidyasagar Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[अवतरण दिवस]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य दिवस]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य विद्यासागर महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य समयसागर महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[आर्यिका ज्ञानमती माताजी]]></category>
		<category><![CDATA[आशीर्वाद]]></category>
		<category><![CDATA[ईशानिका फाउंडेशन]]></category>
		<category><![CDATA[उदयपुर समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[खीर वितरण]]></category>
		<category><![CDATA[गांधी चौक महरौनी।]]></category>
		<category><![CDATA[जैन धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन युवा संघ]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[दिगम्बर जैन पंचायत]]></category>
		<category><![CDATA[दिगम्बर समाज]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक आयोजन]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक सद्भाव]]></category>
		<category><![CDATA[पुण्य संचयन]]></category>
		<category><![CDATA[महरौनी कार्यक्रम]]></category>
		<category><![CDATA[महरौनी जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[मानवता]]></category>
		<category><![CDATA[रक्तदान शिविर]]></category>
		<category><![CDATA[राजीव सिंघई मोनू]]></category>
		<category><![CDATA[ललितपुर समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[श्रद्धा]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[समर्पण]]></category>
		<category><![CDATA[समाज सेवा]]></category>
		<category><![CDATA[सेवा कार्यक्रम]]></category>
		<category><![CDATA[सेवा पर्व]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=91962</guid>

					<description><![CDATA[शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर आचार्य विद्यासागर जी, आचार्य समयसागर जी व आर्यिका ज्ञानमती माताजी के अवतरण दिवस पर महरौनी में रक्तदान शिविर एवं खीर वितरण का आयोजन हुआ। श्रद्धा, सेवा और संवेदना से ओतप्रोत इस आयोजन में 60 से अधिक लोगों ने रक्तदान कर मानवता की मिसाल पेश की। पढ़िए राजीव सिंघई मोनू [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर आचार्य विद्यासागर जी, आचार्य समयसागर जी व आर्यिका ज्ञानमती माताजी के अवतरण दिवस पर महरौनी में रक्तदान शिविर एवं खीर वितरण का आयोजन हुआ। श्रद्धा, सेवा और संवेदना से ओतप्रोत इस आयोजन में 60 से अधिक लोगों ने रक्तदान कर मानवता की मिसाल पेश की। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>महरौनी (ललितपुर)।</strong> शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर आध्यात्म जगत के सूर्य आचार्य भगवन विद्यासागर जी महाराज, आचार्य श्री समय सागर जी महाराज तथा आर्यिका रत्न ज्ञानमती माताजी के अवतरण दिवस पर नगर का वातावरण धार्मिक भावनाओं और सेवा-संवेदना से सराबोर रहा। इस अवसर पर दिगम्बर जैन पंचायत महरौनी द्वारा गांधी चौक बाजार में रक्तदान शिविर एवं खीर वितरण समारोह का आयोजन किया गया। यह आयोजन जैन युवा संघ महरौनी एवं ईशानिका फाउंडेशन टीकमगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में मुनिश्री गुरूदत्त सागर जी महाराज और मुनिश्री मेघदत्त सागर जी महाराज के पावन आशीर्वाद से संपन्न हुआ।</p>
<p>कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि उपजिलाधिकारी रजनीश कुमार, नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि दुष्यंत बडौनिया, कोतवाली प्रभारी राजा दिनेश सिंह एवं सेंट्रल बैंक के प्रबंधक निहाल सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मंगलाचरण अंकी चौधरी ने किया।</p>
<p>मुख्य अतिथियों का स्वागत दिगम्बर जैन पंचायत एवं जैन युवा संघ ने माल्यार्पण और शाल भेंट कर किया। इस मौके पर 60 से अधिक लोगों ने रक्तदान कर समाजसेवा का उदाहरण प्रस्तुत किया। उपजिलाधिकारी रजनीश कुमार ने कहा कि “रक्तदान सबसे बड़ा दान है, इससे किसी जरूरतमंद की जान बचाई जा सकती है। समाज को ऐसे मानवीय प्रयासों से सदैव जुड़ना चाहिए।” कोतवाली प्रभारी राजा दिनेश सिंह एवं नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि दुष्यंत बडौनिया ने भी इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से सहयोग और संवेदना की भावना को बल मिलता है।</p>
<p><strong>गांधी चौक समर्पण और संस्कार की मिसाल </strong></p>
<p>इस अवसर पर डॉ. विकास जैन (ब्लड बैंक प्रभारी), डॉ. अजय चौरसिया (ब्लड बैंक टीकमगढ़), अतुल जैन, राजेन्द्र, प्रदीप, प्रियंक बैध, दीपक मिश्रा, आदर्श जैन, आशीष जैन एडवोकेट, अखिलेश जैन एवं सौरभ पालीका को सम्मानित किया गया। रक्तदाताओं को प्रमाणपत्र और प्रतीक चिह्न भेंट किए गए। कार्यक्रम के अंत में खीर वितरण के साथ पुण्य-संचयन का भावमय वातावरण बना।</p>
<p>शरद की चाँदनी में जब सेवा, श्रद्धा और आध्यात्म का संगम हुआ, तब महरौनी का गांधी चौक सचमुच समर्पण और संस्कार की मिसाल बन गया। मंच संचालन नितिन शास्त्री ने किया।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/sharad_purnima_seva_samarpan_mahotsav_maharouni/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>विद्यासागर सोशल ग्रुप इंदौर के सक्रिय सचिव श्री अरविंद जैन का लंबी बीमारी के बाद निधन : जैन समाज ने तिलकनगर मुक्तिधाम में श्रद्धांजलि अर्पित कर खोया एक समर्पित समाजसेवी </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/vidyasagar_social_group_indore_arvind_jain_passing/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/vidyasagar_social_group_indore_arvind_jain_passing/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 22 Sep 2025 14:51:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Arvind Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Community Leader]]></category>
		<category><![CDATA[Community Loss विद्यासागर सोशल ग्रुप]]></category>
		<category><![CDATA[Condolence]]></category>
		<category><![CDATA[Cremation]]></category>
		<category><![CDATA[Death]]></category>
		<category><![CDATA[Dedication]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[family]]></category>
		<category><![CDATA[Indian Community News]]></category>
		<category><![CDATA[Indian Jains]]></category>
		<category><![CDATA[indore]]></category>
		<category><![CDATA[indore news]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Legacy]]></category>
		<category><![CDATA[Loss]]></category>
		<category><![CDATA[Memorial]]></category>
		<category><![CDATA[Mourning]]></category>
		<category><![CDATA[obituary]]></category>
		<category><![CDATA[Philanthropy]]></category>
		<category><![CDATA[Religious Leader]]></category>
		<category><![CDATA[Respect]]></category>
		<category><![CDATA[Sadness]]></category>
		<category><![CDATA[shrifal news]]></category>
		<category><![CDATA[Social Organizer]]></category>
		<category><![CDATA[Social Service]]></category>
		<category><![CDATA[social worker]]></category>
		<category><![CDATA[Tribute]]></category>
		<category><![CDATA[Vidyasagar Social Group]]></category>
		<category><![CDATA[Volunteer]]></category>
		<category><![CDATA[अरविंद जैन]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर न्यूज़]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक समाज]]></category>
		<category><![CDATA[निधन]]></category>
		<category><![CDATA[परिवार]]></category>
		<category><![CDATA[पुत्र]]></category>
		<category><![CDATA[प्रेरणा]]></category>
		<category><![CDATA[भरा परिवार]]></category>
		<category><![CDATA[युवा नेता]]></category>
		<category><![CDATA[विद्यासागर ग्रुप]]></category>
		<category><![CDATA[शोक सभा]]></category>
		<category><![CDATA[श्रद्धा]]></category>
		<category><![CDATA[श्रद्धांजलि]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[समर्पण]]></category>
		<category><![CDATA[समाजजन]]></category>
		<category><![CDATA[समाजसेवा]]></category>
		<category><![CDATA[समाजसेवी]]></category>
		<category><![CDATA[समाजहित]]></category>
		<category><![CDATA[सम्मान]]></category>
		<category><![CDATA[सामाजिक कार्यकर्ता]]></category>
		<category><![CDATA[सुपुत्री]]></category>
		<category><![CDATA[सेवा भाव]]></category>
		<category><![CDATA[स्थानीय समाचार]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=91112</guid>

					<description><![CDATA[इंदौर में विद्यासागर सोशल ग्रुप के सक्रिय सचिव श्री अरविंद जैन का 21 सितंबर 2025 को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके निधन से जैन समाज को अपूरणीय क्षति हुई। तिलकनगर मुक्तिधाम में आयोजित शोक सभा में समाजजन एवं नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… इंदौर। दिगंबर जैन सोशल ग्रुप [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>इंदौर में विद्यासागर सोशल ग्रुप के सक्रिय सचिव श्री अरविंद जैन का 21 सितंबर 2025 को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके निधन से जैन समाज को अपूरणीय क्षति हुई। तिलकनगर मुक्तिधाम में आयोजित शोक सभा में समाजजन एवं नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। <span style="color: #ff0000">पढ़िए पूरी रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> दिगंबर जैन सोशल ग्रुप विद्यासागर इंदौर के सक्रिय सचिव श्री अरविंद जैन सर का रविवार, 21 सितंबर 2025 को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे अपने पीछे सुपुत्री श्रीमती रूपल जैन और दो पुत्र प्रखर जैन एवं पुलकित जैन छोड़ गए हैं। श्री अरविंद जैन सर जैन समाज इंदौर के समर्पित और प्रभावशाली कार्यकर्ता रहे हैं। उनके निधन से समाज को अपूरणीय क्षति हुई है।</p>
<p>तिलकनगर मुक्तिधाम में आयोजित शोक सभा में समाजश्रेष्ठी श्री आर के जैन, राकेश सिंघई, भरत जैन, सतीश जैन, संतोष जैन सर, सुदीप जैन, स्वर्ण जैन, एल सी जैन, संतोष जैन गुरुजी, भाजपा नेता नितेश जैन, महावीर जैन, प्रजेश जैन और अन्य समाजजन उपस्थित रहे और उन्होंने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।समाज के वरिष्ठ एवं युवा सदस्य उनके योगदान और समर्पण को याद करते हुए भावुक हुए। शोक सभा का संचालन सतीश जैन (इला बैंक), अध्यक्ष, विद्यासागर सोशल ग्रुप, इंदौर ने किया।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/vidyasagar_social_group_indore_arvind_jain_passing/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>विज्ञान का जितना भी अनुसरण है उसमें जैन धर्म का अनुसरण: आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी ने समर्पण के लिए बताए कई रहस्य  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/whatever_is_the_following_of_science_it_is_the_following_of_jainism/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/whatever_is_the_following_of_science_it_is_the_following_of_jainism/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 10 Aug 2025 16:40:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vinishchay Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Dedication]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Ramganj Mandi City]]></category>
		<category><![CDATA[Religion]]></category>
		<category><![CDATA[Science]]></category>
		<category><![CDATA[self-confidence]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[society]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री विनिश्चय सागर]]></category>
		<category><![CDATA[आत्मविश्वास]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[रामगंजमंडी नगर]]></category>
		<category><![CDATA[विज्ञान]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[समर्पण]]></category>
		<category><![CDATA[समाज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=87341</guid>

					<description><![CDATA[रामगंजमंडी नगर में चातुर्मास के दौरान आचार्यश्री विनिश्चय सागर जी की धर्मसभा में धर्म, समाज, विज्ञान के अलावा संयम, समर्पण आदि के बारे में दिव्य ज्ञान बंट रहा है। इसका धर्मलाभ यहां के समाजजन ले रहे हैं। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230; रामगंजमंडी। आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी महाराज ने कहा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी नगर में चातुर्मास के दौरान आचार्यश्री विनिश्चय सागर जी की धर्मसभा में धर्म, समाज, विज्ञान के अलावा संयम, समर्पण आदि के बारे में दिव्य ज्ञान बंट रहा है। इसका धर्मलाभ यहां के समाजजन ले रहे हैं। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी महाराज ने कहा मानव का मस्तिष्क सर्वांग होता है। समर्पण के क्षेत्र में सबसे पहले मस्तिष्क को ही झुकाना पड़ता है। कोई व्यक्ति कितना भी कुछ कर ले सिर न झुकाए तो उसका समर्पण स्वीकार नहीं होता और वह कुछ भी ना करें मात्र सिर झुका ले तो यह उसका समर्पण स्वीकार हो जाता है। सिर यहां-वहां नहीं झुकना चाहिए। किसी ऐरे-गैरे चमत्कारी विद्याओं के बल पर जो लोगों को प्रभावित करते हैं, वहां नहीं झुकना चाहिए। यह मस्तक वहां झुकना चाहिए, जहां किसी प्रकार का कोई चमत्कार न हो। उन्होंने कहा कि आप जैसे लोग विद्याओं के बल पर चमत्कार करते हैं और आप जैसे ही लोग चमत्कार से प्रभावित हो जाते हैं।</p>
<p>प्रभावित हो जाते मस्तक ऐसी जगह झुक जाता है, जहां पर नहीं झुकना था। जहां पर अंधविश्वास वहां पर आपका मस्तिष्क झुक जाता है। दो ही चीजे है एक अंधविश्वास एक आत्मविश्वास। बाहर में जो कुछ भी आपको दिख रहा है उसमें अंधविश्वास हो सकता है, अंतस चेतना में जो उपलब्धि होती है उसमें आत्मविश्वास हो सकता है।</p>
<p><strong>अंधविश्वास सही नहीं भटकाने वाला होता है</strong></p>
<p>आचार्यश्री ने कहा कि जैन दर्शन आत्मविश्वास की बात करता है, अंधविश्वास को नकारता है। समझदार पढ़ा-लिखा व्यक्ति वह किसी भी धर्म का हो वह भी यही कहता है कि अंधविश्वास सही नहीं है। यह भटकाने वाला होता है। यह लोगों की आस्था को गलत जगह स्थापित कर देता है। मूढ़ नहीं होना चाहिए कोई पढ़ा लिखा न हो चलेगा, कोई पढ़ा लिखा होकर मूढ़ हो तो यह नहीं चल सकता। आज के समय में पढ़े लिखे लोग मूढ़ हैं। साइंस को पढ़ रहे हैं फिर भी अंधविश्वास पर उनकी आस्था है,</p>
<p><strong>विज्ञान धर्म के बिना हो ही नहीं सकता</strong></p>
<p>जैन दर्शन और विज्ञान के अनुसरण पर बोलते हुए गुरुदेव ने कहा है कि विज्ञान का जो भी अनुसरण है, वह जैन धर्म का अनुसरण ही है। विज्ञान जो भी आविष्कार करेगी प्रयोग करेगी वह जैन दर्शन की किसी न किसी पर्याय से लिया होगा। विज्ञान का सबसे ज्यादा फोकस पुदगल पर होता है। पुदगल की शक्तियां असीम होती है। इसे वैज्ञानिक आविष्कार करते जाइए, करते जाइए लेकिन, इसकी शक्तियां समाप्त नहीं होती। वैज्ञानिक आविष्कार से जितनी भी चीज हमारे आसपास घर में हैं। यह सब चमत्कार पुदगल का है। विज्ञान की दुहाई देकर हम धर्म से अलग होते जा रहे हैं लेकिन, विज्ञान धर्म के बिना हो ही नहीं सकता। धर्म का विशेष ज्ञान विज्ञान है। ऐसे पढ़े-लिखे लोग विज्ञान को पढ़ने वाले लोग अंधविश्वास की ओर झुक गए हैं। वह इसलिए झुक रहे हैं क्योंकि, उनका विश्वास चमत्कार पर है अंधविश्वास पर है, लोग सही बात को न समझ रहे हैं न दूसरों को समझा रहे हैं।</p>
<p><strong>अज्ञानता है कि आप अमृत को विष कह रहे हो</strong></p>
<p>जीव को अगर संसार में कोई भटका रहा है तो वह मिथ्यात्व है। अगर कहीं जाने से काम बनते तो लोग पुरुषार्थ क्यों करते हैं, लोग दुकान व्यापार नौकरी क्यों करते । भ्रांति हो सकती वहां जाना हुआ सुख साता का उदय हुआ और काम बन गया। हमने यह समझ लिया वहां जाने से यह काम हुआ। कोई विष को अमृत कहे तो आप नहीं मानोगे कोई अमृत को विष कहे तब भी नहीं मानोगे और मान रहे हैं तो आपकी बुद्धि काम नहीं कर रही है, अज्ञानता है कि आप अमृत को विष कह रहे हो। भगवान के सामने मांगो मत नहीं मांगोगे तो वह मिलेगा जिसकी कोई सीमा नहीं है। न उनको कुछ देना न आपको कुछ लेना आपको अंदर उस शक्ति को जगाना है। जिससे सब आपको मिल जाए।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/whatever_is_the_following_of_science_it_is_the_following_of_jainism/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बरबस नयनों में नीर भर देती याद कराती बचपन के वो हसीन पल : रक्षाबंधन पर भावपूर्ण कविता में समर्पण और प्रेम का सुंदर संदेश  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/it_brings_tears_to_my_eyes_and_reminds_me_of_those_beautiful_moments_of_my_childhood/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/it_brings_tears_to_my_eyes_and_reminds_me_of_those_beautiful_moments_of_my_childhood/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 10 Aug 2025 08:48:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Dedication]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Infinite Love]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Rakshabandhan]]></category>
		<category><![CDATA[resolution]]></category>
		<category><![CDATA[Shravani Purnima]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Silk String]]></category>
		<category><![CDATA[असीम प्रेम]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[रक्षाबंधन]]></category>
		<category><![CDATA[रेशमी डोरी]]></category>
		<category><![CDATA[श्रावणी पूर्णिमा]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[संकल्प]]></category>
		<category><![CDATA[समर्पण]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=87274</guid>

					<description><![CDATA[रक्षाबंधन भाई-बहन के असीम प्रेम और समर्पण के साथ संकल्प का त्योहार है। भाई-बहन अलग-अलग कैसे हो सकते हैं क्योंकि दो शरीर और आत्मा एक सी है। जीवन पर्यन्त यह रिश्ता बना रहता है। लाख संकट भी रिश्ते न तोड़ सकता है। इन्हीं भावानओं के साथ पढ़िए, डडूका से अजीत कोठिया की यह भावपूर्ण कविता&#8230;. [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>रक्षाबंधन भाई-बहन के असीम प्रेम और समर्पण के साथ संकल्प का त्योहार है। भाई-बहन अलग-अलग कैसे हो सकते हैं क्योंकि दो शरीर और आत्मा एक सी है। जीवन पर्यन्त यह रिश्ता बना रहता है। लाख संकट भी रिश्ते न तोड़ सकता है। <span style="color: #ff0000">इन्हीं भावानओं के साथ पढ़िए, डडूका से अजीत कोठिया की यह भावपूर्ण कविता&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p>‘कविता : बंधन कच्चे धागों का&#8217;</p>
<p>एक घर, एक परिवार में जन्मे</p>
<p>एक भाई, एक बहन</p>
<p>एक साथ खेले कूदे पढ़े लिखे।</p>
<p>यौवन की दहलीज तक आते</p>
<p>राहे हो गई जुदा-जुदा।</p>
<p>बस मिल जाते हैं राखी पर</p>
<p>बरसों में एक बार,</p>
<p>पर मन के किसी कोने में</p>
<p>उठती कसक,</p>
<p>बरबस नयनों में नीर भर देती</p>
<p>याद कराती बचपन के</p>
<p>वो हसीन पल</p>
<p>जो हमने वास्तव में जिए।</p>
<p>जीवन की आपाधापी में,</p>
<p>राखी के कच्चे धागों में ही छुपा है</p>
<p>प्रेम का शाश्वत अहसास।</p>
<p>याद आती विदेश में बसी बहन,</p>
<p>परदेस में खपा भाई।</p>
<p>ये राखी ही है जो मिलाती है</p>
<p>हमें वर्चुअली ही सही,</p>
<p>कराती है अपनों और अपनेपन का अहसास!</p>
<p>राखी भर देती दूरस्थ भाई-बहनों</p>
<p>के मन में मिठास।</p>
<p>आओ आज श्रावणी पूर्णिमा पर</p>
<p>राखी की रेशमी डोरी में</p>
<p>बांध लें रिश्तों की मजबूत गांठ</p>
<p>हम कही भी रहे,</p>
<p>राखी पर तो करे भाई-बहनों</p>
<p>को याद।</p>
<p>यही भर देगी रिश्तों में नई मिठास!</p>
<p>आओ दूर रहकर भी पाए</p>
<p>राखी की डोरी में,</p>
<p>सच्चे भाई बहन प्रेम का अहसास।</p>
<p>&#8212;&#8212;&#8212;-</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/it_brings_tears_to_my_eyes_and_reminds_me_of_those_beautiful_moments_of_my_childhood/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>रक्षाबंधन केवल पर्व नहीं बल्कि एक मानवीय दृष्टिकोण भी : वृक्षों को महिलाओं द्वारा बांधे जा रहे रक्षा सूत्र , प्रकृति की रक्षार्थ निहित है मानव कल्याण </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/rakshabandhan_is_not_just_a_festival_but_also_a_human_perspective/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/rakshabandhan_is_not_just_a_festival_but_also_a_human_perspective/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 09 Aug 2025 08:51:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA['Tree-Raksha Bandhan']]></category>
		<category><![CDATA['वृक्ष-रक्षा बंधन']]></category>
		<category><![CDATA[Affection]]></category>
		<category><![CDATA[Dedication]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Draupadi]]></category>
		<category><![CDATA[Faith]]></category>
		<category><![CDATA[Human Perspective]]></category>
		<category><![CDATA[Human Welfare]]></category>
		<category><![CDATA[Humayun]]></category>
		<category><![CDATA[Indian History]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Karnavati]]></category>
		<category><![CDATA[Rakshabandhan]]></category>
		<category><![CDATA[Shri Krishna]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[कर्णावती]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[द्रौपदी]]></category>
		<category><![CDATA[भारतीय इतिहास]]></category>
		<category><![CDATA[मानव कल्याण]]></category>
		<category><![CDATA[मानवीय दृष्टिकोण]]></category>
		<category><![CDATA[रक्षाबंधन]]></category>
		<category><![CDATA[विश्वास]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीकृष्ण]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[समर्पण]]></category>
		<category><![CDATA[स्नेह]]></category>
		<category><![CDATA[हुमायूं]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=87190</guid>

					<description><![CDATA[आज 9 अगस्त को रक्षा पर्व समूचे देश में मनाया जा रहा है। इस पर्व के पीछे समर्पण, प्रेम, प्रतिबद्धता, विश्वास की मजबूत डोर ने हमारी संस्कृति, सभ्यता और सामाजिक ताने-बाने को बहुत खूबसूरत बुना है। आइए आज इस पर्व विशेष पर पढ़िए, प्रियंका पवन धुवारा का यह आलेख&#8230; आज के समय में रक्षाबंधन केवल [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आज 9 अगस्त को रक्षा पर्व समूचे देश में मनाया जा रहा है। इस पर्व के पीछे समर्पण, प्रेम, प्रतिबद्धता, विश्वास की मजबूत डोर ने हमारी संस्कृति, सभ्यता और सामाजिक ताने-बाने को बहुत खूबसूरत बुना है। <span style="color: #ff0000">आइए आज इस पर्व विशेष पर पढ़िए, प्रियंका पवन धुवारा का यह आलेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>आज के समय में रक्षाबंधन केवल भाई-बहन का पर्व नहीं रहा, यह प्रकृति की रक्षा, सामाजिक सौहार्द और समानता का प्रतीक भी बन चुका है। &#8216;वृक्ष-रक्षा बंधन&#8217;। बच्चे और महिलाएं पेड़ों को राखी बाँधकर यह संदेश दे रही हैं कि हम केवल मानव की नहीं, प्रकृति की भी रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। रक्षाबंधन के बदलते मायने हमें यह समझाते हैं कि त्योहार केवल रस्में नहीं होते, वे विचार होते हैं, भावना होते हैं। आज का रक्षाबंधन हमें यह सीख देता है कि रक्षा एकतरफा नहीं, परस्पर होती है। रिश्ते खून से नहीं, भावना से बनते हैं। प्रकृति, समाज और देश भी हमारी रक्षा के हकदार हैं और यह कि महिला केवल संरक्षित नहीं, संरक्षक भी हो सकती है। रक्षाबंधन अब केवल एक पर्व नहीं, एक मानवीय दृष्टिकोण है— &#8216;जो कहता है कि प्रेम, समर्पण और समानता से ही समाज और रिश्ते टिक सकते हैं।&#8217;</p>
<p><strong>रक्षा पर्व की जड़ें बहुत गहरी हैं</strong></p>
<p>रक्षाबंधन की जड़ें भारतीय इतिहास, पौराणिक कथाओं और सामाजिक परंपराओं में गहराई से जुड़ी हैं। द्रौपदी और श्रीकृष्ण की कथा हो या रानी कर्णावती द्वारा हुमायूं को भेजी गई राखी। यह पर्व सदा से रक्षक और संरक्षित के बीच एक नैतिक संकल्प का प्रतीक रहा है। पहले के समय में राखी केवल भाई-बहन के खून के रिश्ते तक सीमित थी। बहन भाई की कलाई पर राखी बाँधती थी और भाई जीवन भर उसकी रक्षा करने का वचन देता था। यह रिश्ता स्नेह, विश्वास और समर्पण से भरा होता था। भारत विविधताओं से भरा देश है, जहां हर त्योहार न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक होता है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रिश्तों को भी मजबूत करता है। इन्हीं में से यह एक विशेष पर्व है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/rakshabandhan_is_not_just_a_festival_but_also_a_human_perspective/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>महावीर इंटरनेशनल का स्वर्ण जयंती समारोह सेवा, समर्पण का उत्सव: सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम के साथ हुआ समापन  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/mahavir_internationals_golden_jubilee_celebration_a_celebration_of_service_and_dedication/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/mahavir_internationals_golden_jubilee_celebration_a_celebration_of_service_and_dedication/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 09 Jul 2025 13:40:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Cultural Program]]></category>
		<category><![CDATA[Dedication]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Golden Jubilee Celebration]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[jain samaj]]></category>
		<category><![CDATA[Mahavir International]]></category>
		<category><![CDATA[Salute - 50 Years of Service]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[महावीर इंटरनेशनल]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[समर्पण]]></category>
		<category><![CDATA[सांस्कृतिक कार्यक्रम]]></category>
		<category><![CDATA[सैल्यूट- 50 वर्षों की सेवा]]></category>
		<category><![CDATA[स्वर्ण जयंती समारोह]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=84791</guid>

					<description><![CDATA[महावीर इंटरनेशनल की स्वर्ण जयंती समारोह 5 एवं 6 जुलाई को जयपुर के बिरला सभागार और अल्बर्ट हॉल से संबद्ध विभिन्न स्थलों पर “सैल्यूट- 50 वर्षों की सेवा, समर्पण और उत्साह-उल्लास का आयोजन थीम के साथ भव्यता व गरिमा के साथ संपन्न हुआ। रंगारंग सांस्कृतिक संध्या की गई। इस भव्य संध्या में देशभर के 150 [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>महावीर इंटरनेशनल की स्वर्ण जयंती समारोह 5 एवं 6 जुलाई को जयपुर के बिरला सभागार और अल्बर्ट हॉल से संबद्ध विभिन्न स्थलों पर “सैल्यूट- 50 वर्षों की सेवा, समर्पण और उत्साह-उल्लास का आयोजन थीम के साथ भव्यता व गरिमा के साथ संपन्न हुआ। रंगारंग सांस्कृतिक संध्या की गई। इस भव्य संध्या में देशभर के 150 से अधिक सदस्यों ने मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन किया। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> महावीर इंटरनेशनल की स्वर्ण जयंती समारोह 5 एवं 6 जुलाई को जयपुर के बिरला सभागार और अल्बर्ट हॉल से संबद्ध विभिन्न स्थलों पर “सैल्यूट- 50 वर्षों की सेवा, समर्पण और उत्साह-उल्लास का आयोजन थीम के साथ भव्यता व गरिमा के साथ संपन्न हुआ। महावीर इंटरनेशनल के गवर्निंग काउंसिल सदस्य तथा गोल्डन थ्रेड टीम के अजीत कोठिया ने बताया कि सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद रंगारंग सांस्कृतिक संध्या की गई। इस भव्य संध्या में देशभर के 150 से अधिक सदस्यों ने मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन किया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की थीम थी अनेकता में एकता।</p>
<p>पंजाब, हरियाणा, कुल्लू, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, सिलीगुड़ी, तेलंगाना और चेन्नई की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। हाड़ा रानी का बलिदान, मध्य प्रदेश के गौंड जनजातीय नृत्य, महाराज छत्रपति शिवाजी की वीरगाथा इन विषयों पर आधारित नाट्य और नृत्य प्रस्तुतियां अत्यंत प्रभावशाली रहीं। विशेष आकर्षण रही -द वुमनियाज़ बैंड की जोशीली प्रस्तुति। जिसमें नई-पुराने गानों की मेलोडी पर श्रोता झूम उठे। इस अवसर पर महिला सशक्तिकरण की प्रतीक श्रीमती सिद्धि जौहरी तथा दिल्ली विश्वविद्यालय की वरिष्ठ व्याख्याता डॉ. अंजू अमिताभ विशिष्ट अतिथि रहीं। कार्यक्रम में विभिन्न केंद्रों से आए 74 संस्थापक सदस्य, पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष एवं महासचिवों को सम्मानपूर्वक धन्यवाद ज्ञापित किया गया।</p>
<p><strong>वॉकथॉन में 1300 से अधिक सदस्य शामिल</strong></p>
<p>6 जुलाई 2025 को “सैल्यूट वॉकथॉन”- मानवता के लिए एक कदम सुबह जयपुर की ऐतिहासिक अल्बर्ट हॉल से “सैल्यूट वॉकथॉन” की शुरुआत हुई। जो बिरला ऑडिटोरियम पर सम्पन्न हुई। इस मानवीय उद्देश्य वाले वॉकथॉन में 1300 से अधिक सदस्य शामिल हुए। राजस्थान पुलिस बैंड ने अपनी मधुर वाद्य प्रस्तुति से कार्यक्रम में उत्साह का संचार किया। जयपुर जीप क्लब का सहयोग विशेष रूप से सराहनीय रहा। आरजे मोहित शर्मा ने मंच संचालन द्वारा पूरे आयोजन में ऊर्जा भर दी। स्वर्णिम गुब्बारों को आकाश में छोड़कर विकास और सेवा के संकल्प को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाया गया।</p>
<p><strong>अभिनंदन एवम स्पर्श सम्मान प्रदान किया</strong></p>
<p>सम्मान समारोह एवं विचार-सत्र में आयोजित सम्मान समारोह में दानदाताओं, सहयोगी संस्थाओं एवं उत्कृष्ट कार्य करने वाले सदस्यों को “ अभिनंदन एवम स्पर्श” सम्मान प्रदान किया गया।साथ ही, आगामी वर्षों की दिशा व एन जी ओ की कार्यशैली पर विचार-विमर्श सत्र आयोजित हुआ। इस अवसर पर कई विशिष्ट अतिथि मंच पर उपस्थित रहे कमल किशोर चेटीवाल मैनेजिंग डायरेक्टर, इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड , पंकज ओस्तवाल डायरेक्टर, ओस्तवाल ग्रुप, ऋषभ हेमानी राजस्थान यूनिसेफ प्रमुख। कार्यक्रम की अध्यक्षता अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष वीर सीए अनिल कुमार जैन ने की। महासचिव वीर अशोक कुमार गोयल और कोषाध्यक्ष वीर सुधीर कुमार जैन ने सभा को संबोधित किया।</p>
<p><strong>इनका रहा सराहनीय सहयोग </strong></p>
<p>मुख्य संयोजक वीरा डॉ. रश्मि सारस्वत, संयोजक वीरा अलका दुधड़िया,समितियों के नियोजक वीरा नंदिनी छलानी, वीरा सुनीता जैन, वीरा सुधा खंडेलवाल, वीरा रश्मि आर्य, वीरा डॉ. आशु मलिक, वीरा वंदना बख्शी ,वीर आयुष जैन, वीर हस्तीमल बांठिया, वीर रविन्द्र कुमार जैन ने कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु विशेष योगदान दिया। देशभर से आए विभिन्न केंद्रों के प्रमुख प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार साझा किए और संगठन की “लक्ष्य 75” योजना की दिशा को मजबूती दी। आयोजन में वागड़ जोन डूंगरपुर बांसवाड़ा से 66 वीर वीराओ ने हिस्सा लिया।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/mahavir_internationals_golden_jubilee_celebration_a_celebration_of_service_and_dedication/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आभास हैं तो पिता आकाश भी है: पितृ दिवस पर अपने पिताश्री को समर्पित काव्यांजलि  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/if_there_is_a_feeling_then_father_is_also_the_sky/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/if_there_is_a_feeling_then_father_is_also_the_sky/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 14 Jun 2025 12:00:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Dedication]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Father's Day]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Kavyanjali]]></category>
		<category><![CDATA[restraint]]></category>
		<category><![CDATA[Sacrifice]]></category>
		<category><![CDATA[service]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[काव्यांजलि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[त्याग]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[पितृ दिवस]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[समर्पण]]></category>
		<category><![CDATA[संयम]]></category>
		<category><![CDATA[सेवा]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=83012</guid>

					<description><![CDATA[जैन धर्म और धर्मशास्त्रों के अनुसार संयम, त्याग, समर्पण और सेवा के लिए हमारे साधु-संतों की दिव्य वाणी में संदेश होता है। अब आप देखिए पिता क्या हैं? उनको परिभाषित करना मुश्किल है क्योंकि, अपनी संतति के जन्म से ही वह समर्पण की परिधि में रहता है। संयम उसका सबसे बड़ा ‘तप’ है। बच्चों की [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जैन धर्म और धर्मशास्त्रों के अनुसार संयम, त्याग, समर्पण और सेवा के लिए हमारे साधु-संतों की दिव्य वाणी में संदेश होता है। अब आप देखिए पिता क्या हैं? उनको परिभाषित करना मुश्किल है क्योंकि, अपनी संतति के जन्म से ही वह समर्पण की परिधि में रहता है। संयम उसका सबसे बड़ा ‘तप’ है। बच्चों की ख्वाहिशों के लिए उनका त्याग अवर्चनीय है। वे हमेशा सेवा को ही प्रस्तुत रहते हैं। <span style="color: #ff0000">ऐसे पिता को पितृ दिवस पर स्मरण करती डॉ. अभिलाषा श्रीवास्तव की यह कविता पढ़िए&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>‘मेरे पिता&#8230;’</p>
<p>पिता, पिता एक शब्द नहीं अहसास है ,</p>
<p>उनसे ही तो मेरे जीवन की आस है।</p>
<p>दिल के हर कोने में उनका आभास है,</p>
<p>मतलबी दुनिया में बस पिता ही खास है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>सोचा आज पिता पर एक कविता लिखूं,</p>
<p>पर क्या लिखूं उनकी ही तो लिखावट हूं।</p>
<p>उनका हाथ जब मेरे सिर पर रहता है,</p>
<p>तो मुझे हर काम बहुत छोटा सा लगता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>मुझे जीवन में हार न मानने की सीख देते हैं,</p>
<p>मुसीबत का सामना करने का साहस देते हैं।</p>
<p>मेरे मार्गदर्शक, मेरे गुरु, मेरे जीवनदाता हैं,</p>
<p>मेरी सफल जिंदगी के वो ही तो विधाता हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उनकी प्यारी मुस्कान मुझे हिम्मत देती है,</p>
<p>हंसी, मजाक करने की आदत खुशी देती है।</p>
<p>मन करता है उड़कर उनके पास चली जाऊं,</p>
<p>पर वो कहते हैं ससुराल में हर फ़र्ज़ निभाऊं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>फिर सोचती हूं फोन से उनसे बात करूं,</p>
<p>पर बुढ़ापे की श्रवण शक्ति का क्या करूं?</p>
<p>इसलिए कई बातें मन में ही रख लेती हूं,</p>
<p>और मन ही मन उनसे बातें कर लेती हूं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>हे ईश्वर! मुझे आपसे बस यही है कहना,</p>
<p>पिता को हमेशा स्वस्थ एवं प्रसन्न रखना।</p>
<p>उनकी मुस्कुराहट मेरा जीवन संवार देती है,</p>
<p>सद्मार्ग पर चलने का मुझको साहस देती है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>‘पितृ दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं!’</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>-डॉ. अभिलाषा श्रीवास्तव, सहायक प्राध्यापक हिंदी, स्नातकोत्तर महाविद्यालय अंबाह</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/if_there_is_a_feeling_then_father_is_also_the_sky/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मां को भी मां की जरूरत होती है:  बेटी के रूप में मां को समर्पित कविता  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/a_mother_needs_a_mother_too/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/a_mother_needs_a_mother_too/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 11 May 2025 08:05:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Blessing]]></category>
		<category><![CDATA[continuous rain]]></category>
		<category><![CDATA[Dedication]]></category>
		<category><![CDATA[determination]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Mother Nature herself]]></category>
		<category><![CDATA[Mother Worship]]></category>
		<category><![CDATA[Mother's love]]></category>
		<category><![CDATA[Sacrifice]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[अविरल वर्षा]]></category>
		<category><![CDATA[आशीष]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[त्याग]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[दृढ़ता]]></category>
		<category><![CDATA[मां ममत्व]]></category>
		<category><![CDATA[मां स्वयं प्रकृति]]></category>
		<category><![CDATA[मातृ वंदना]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[समर्पण]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=80687</guid>

					<description><![CDATA[आज समूचा विश्व मातृ वंदना कर रहा है। मातृ वंदना के लिए संदर्भ की नहीं सदभाव की जरूरत है क्योंकि, मां ममत्व, त्याग, समर्पण और दृढ़ता की प्रतिमूर्ति है। मां अद्भुत है। मां स्वयं प्रकृति है। जिसके न होने पर भी आशीष की अविरल वर्षा से जीवन धन्य हो, वह आशीष सदैव उपकृत करता है। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आज समूचा विश्व मातृ वंदना कर रहा है। मातृ वंदना के लिए संदर्भ की नहीं सदभाव की जरूरत है क्योंकि, मां ममत्व, त्याग, समर्पण और दृढ़ता की प्रतिमूर्ति है। मां अद्भुत है। मां स्वयं प्रकृति है। जिसके न होने पर भी आशीष की अविरल वर्षा से जीवन धन्य हो, वह आशीष सदैव उपकृत करता है। यह मैंने भी अनुभूत किया है। <span style="color: #ff0000">मां को प्रणाम करते हुए पढ़िए, एडवोकेट सारिका जैन शास्त्री की यह कविता&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>एक अल्हड़ सी, नाजुक सी,प्यारी सी गुड़िया</p>
<p>जिसको ऊँगली पकड़कर चलना सिखाया था</p>
<p>आज हर समय वो मेरा हाथ थामे रहती है स</p>
<p>बिना बोले ही हर बात जान लेती है स</p>
<p>जानती है कि</p>
<p>उसकी एक मुस्कान से दिन बन जाता है मेरा</p>
<p>सो मेरे साथ हँसने, बतियाने वक्त निकाल ही लेती है</p>
<p>कभी जिसकी चोटी बनाकर स्कूल भेजती थी</p>
<p>आज वह मेरे बाल संवारती है</p>
<p>क्या पहनना, क्या खाना, हर बात यूँ बतलाना</p>
<p>जैसे मेरी ही माँ बन गयी हो वो</p>
<p>सच ही तो कहते है लोग</p>
<p>कि माँ को भी माँ की जरूरत होती है</p>
<p>सो भगवान बेटी को भेज देते है माँ के पास</p>
<p>देख उसे यकीं होता</p>
<p>कि कैसे एक गुड़िया बेटी से सखी और सखी से माँ जैसी बन गयी</p>
<p>सच में एक नन्ही परी</p>
<p>नव विस्तार बन गयी&#8230;</p>
<p>नव विस्तार बन गयी&#8230;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&#8211; सारिका जैन (शास्त्री), एडवोकेट।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/a_mother_needs_a_mother_too/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
