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	<title>Centenary Celebration &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>आचार्य शांतिसागर ने दिगंबर परंपरा को पुनर्जीवित करने में दिया ऐतिहासिक योगदान : श्रवणबेलगोला आने वाली पीढ़ियों को धार्मिकता, सहिष्णुता और शांति के मार्ग पर करता रहेगा प्रेरित </title>
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		<pubDate>Mon, 10 Nov 2025 07:14:51 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भारतीय संस्कृति में जैन धर्म के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि जैन दर्शन के मूल सिद्धांत आज भी सामाजिक सौहार्द के मार्गदर्शक हैं। श्रवणबेलगोला में आचार्य शांतिसागर की यात्रा के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने जैन दर्शन और आध्यात्मिक योगदान को आज के समय में अत्यंत प्रासंगिक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भारतीय संस्कृति में जैन धर्म के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि जैन दर्शन के मूल सिद्धांत आज भी सामाजिक सौहार्द के मार्गदर्शक हैं। श्रवणबेलगोला में आचार्य शांतिसागर की यात्रा के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने जैन दर्शन और आध्यात्मिक योगदान को आज के समय में अत्यंत प्रासंगिक बताया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>हासन।</strong> उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भारतीय संस्कृति में जैन धर्म के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि जैन दर्शन के मूल सिद्धांत आज भी सामाजिक सौहार्द के मार्गदर्शक हैं। श्रवणबेलगोला में आचार्य शांतिसागर की यात्रा के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने जैन दर्शन और आध्यात्मिक योगदान को आज के समय में अत्यंत प्रासंगिक बताया। उन्होंने आचार्य शांतिसागर की प्रतिमा का अनावरण भी किया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि आचार्य शांतिसागर ने दिगंबर परंपरा को पुनर्जीवित करने में जो ऐतिहासिक योगदान दिया, वह अहिंसा, अपरिग्रह और अनेकांतवाद जैसे जैन मूल्यों का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भौतिकतावादी तेजी से बदलते समय में आचार्य का जीवन हमें याद दिलाता है कि सच्ची आजादी भोग में नहीं, आत्म-संयम और आंतरिक शांति में है। उन्होंने कहा कि शताब्दी समारोह के माध्यम से दिगंबर जैन मठ ने न केवल एक महान संत का सम्मान किया है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए आध्यात्मिक ज्योति को भी पुनर्प्रज्ज्वलित किया है। आचार्य की प्रतिमा सादगी, पवित्रता और करुणा का शाश्वत संदेश प्रसारित करेगी। उपराष्ट्रपति ने श्रवणबेलगोला की</p>
<p>2,000 वर्षो की विरासत का उल्लेख करते हुए भगवान बाहुबली की 57 फुट ऊंची ऐतिहासिक प्रतिमा को आध्यात्मिक भक्ति और कलात्मक उत्कृष्टता का अद्वितीय प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि गंग वंश के मंत्री चामुंडराय द्वारा निर्मित यह प्रतिमा भारत की आध्यात्मिक परंपरा की अनूठी धरोहर है।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-94078" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251110-WA0007.jpg" alt="" width="900" height="1039" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251110-WA0007.jpg 900w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251110-WA0007-260x300.jpg 260w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251110-WA0007-887x1024.jpg 887w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251110-WA0007-768x887.jpg 768w" sizes="(max-width: 900px) 100vw, 900px" />अभिनव चारुकीर्ति भट्टारक आगे बढ़ा रहे परंपरा</strong></p>
<p>उपराष्ट्रपति ने कहा कि सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य ने आचार्य भद्रबाहु की प्रेरणा से यहीं पर संन्यास ग्रहण किया था, जो सत्ता से ज्ञान की यात्रा का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने भारत सरकार के प्राकृत को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिए जाने और ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत प्राचीन जैन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने तमिलनाडु और जैन परंपरा के ऐतिहासिक संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जैन धर्म ने संगम एवं उत्तर-संगम काल में तमिल साहित्य और संस्कृति को महत्वपूर्ण दिशा प्रदान की, जो शिलप्पादिकारम जैसी कृतियों में परिलक्षित होता है। उपराष्ट्रपति ने जैन मठ के प्रमुख अभिनव चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और अनुसंधान के क्षेत्र में प्राकृत अनुसंधान संस्थान सहित कई प्रयासों के माध्यम से आचार्य शांतिसागर की विरासत को सार्थक रूप से आगे बढ़ाया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि श्रवणबेलगोला आने वाली पीढ़ियों को धार्मिकता, सहिष्णुता और शांति के मार्ग पर प्रेरित करता रहेगा।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-94079" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251110-WA0006.jpg" alt="" width="1600" height="1066" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251110-WA0006.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251110-WA0006-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251110-WA0006-1024x682.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251110-WA0006-768x512.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251110-WA0006-1536x1023.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251110-WA0006-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251110-WA0006-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251110-WA0006-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251110-WA0006-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251110-WA0006-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251110-WA0006-990x660.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251110-WA0006-1320x879.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />ये भी रहे मौजूद</strong></p>
<p>कार्यक्रम में राज्यपाल थावरचंद गहलोत, केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी, राज्य के राजस्व मंत्री कृष्णबैरे गौड़ा, योजना एवं सांख्यिकी मंत्री डी. सुधाकर, हासन के सांसद श्रेयस एम. पटेल, आचार्य सुविधि सागर, आचार्य वर्धमान सागर तथा दिगंबर जैन महासंस्थान मठ के साधुगण आदि उपस्थित रहे।</p>
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		<title>राष्ट्र का उत्थान हो विश्व का कल्याण हो यही है भारत की विशेषता : मुनिश्री सुधासागरजी के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी समारोह मनाया  </title>
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		<pubDate>Mon, 13 Oct 2025 07:52:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राष्ट्र का उत्थान हो विश्व का कल्याण हो यही है भारत की विशेषता है। इसीलिए तो भारत महान कहा जाता है। दुनिया के सारे देश अपने उत्थान के साथ दूसरे के उत्थान को दूर करते हैं। यह उद्गार सुभाषगंज मैदान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी समारोह को सम्बोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ने [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>राष्ट्र का उत्थान हो विश्व का कल्याण हो यही है भारत की विशेषता है। इसीलिए तो भारत महान कहा जाता है। दुनिया के सारे देश अपने उत्थान के साथ दूसरे के उत्थान को दूर करते हैं। यह उद्गार सुभाषगंज मैदान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी समारोह को सम्बोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">अशोकनगर से पढ़िए, राजीव सिंघई की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोकनगर।</strong> राष्ट्र का उत्थान हो विश्व का कल्याण हो यही है भारत की विशेषता है। इसीलिए तो भारत महान कहा जाता है। दुनिया के सारे देश अपने उत्थान के साथ दूसरे के उत्थान को दूर करते हैं। यह उद्गार सुभाषगंज मैदान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी समारोह को सम्बोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में संतों से जबपूछा गया कि हम किसे अपना कहे तो हमारे ऋषि मनीषियों ने कहा कि वसुदेव कुटुम्बकम हमारे लिए विश्व परिवार की तरह है। महावीर ने एक संकल्प दिया था, हमें किसी का विनाश नहीं करना है। उन्होंने संकल्पी हिंसा का त्याग कराया। मुनिश्री ने कहा कि हर व्यक्ति को अपने जीवन में हर दिन अपने आप को पांच मिनट का समय देना चाहिए सबसे पहले अपने एकाकी शक्ति को पहचानें मेरे साथ परमात्मा भी नहीं है। माता-पिता भाई-बंधु देश समाज कोई नहीं। तब विचार करें कि मुझे कुछ नहीं चाहिए। मुनिश्री ने आगे कहा कि मैं देश के लिए, समाज के लिए, घर परिवार के लिए क्या कर सकता हूं। कमजोर लोगों से संगठन नहीं चलता। बल जोर लोगों से संगठन चलता है। बजरंग बलि की तरह मैं भी भगवान की सेवा करूंगा। हम भगवान की रक्षा के लिए मर भी जाए तो शहीद माने जाएंगे।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-92380" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0005.jpg" alt="" width="1280" height="716" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0005.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0005-300x168.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0005-1024x573.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0005-768x430.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0005-470x264.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0005-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0005-414x232.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0005-990x554.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />सहयोग देने के लिए चल पड़े उसका नाम है आरएसएस</strong></p>
<p>मैं इतना समर्थ हूं कि राष्ट्र की रक्षा कर सकता हूं। समाज की परिवार की रक्षा कर सकता हूं। दुनिया में सहयोग देने के लिए चल पड़े उसका नाम है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ। चलो हम दो जन मिलकर तीसरे का सहयोग करें, तीन मिलकर चौथे-पांचवें। इस तरह सेवा का क्षेत्र बढ़ता चल गया, हम राष्ट्र के नाम पर एक हो सकते हैं।</p>
<p><strong>आचार्य भगवंत ने जो संदेश दिया है वह हमारे लिए प्रेरणा </strong></p>
<p>राष्ट्रीय स्वयंसेवक विद्या भारती प्रांत जागरण प्रमुख शिरोमणि दुबे ने कहा कि अभी आचार्य श्री का आशीर्वाद मिला। उन्होंने कहा कि हमें शिक्षा की पवित्रता को आगे बढ़ाना है, जो बहुत ही गहरा संदेश दिया है। हम इन्हें शीर्ष तक पहुंचाएंगे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सौ वर्ष का हो गया। हमारा देश उत्सवों और पर्वाें का देश है। जहां हर कार्य से लोग प्रेरणा लेते हैं। भगवान श्री राम, भगवान महावीर हमारे आराध्य हैं। हमारे मार्गदर्शक हैं। त्रेतायुग में श्री राम ने सोने की लंका को मिट्टी में मिलाकर हमारी संस्कृति सभ्यता को एक नई दिशा दी।</p>
<p><strong>जैन समाज ने किया आरएसएस के शताब्दी समारोह में अभिनंदन</strong></p>
<p>इसके पहले जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि आज हम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी समारोह मुनिश्री सुधा सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में मना रहे हैं। हम सभी स्वयं सेवक का जैन समाज की ओर से हार्दिक अभिनन्दन करते हैं। इसके बाद भारत माता के चित्र का अनावरण किया और आचार्य भगवंत के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित किया। इस दौरान जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई सहित अन्य प्रमुखजनों ने सभी का अभिनंदन किया। इसके पहले ध्वज स्थापित किया। ध्वजारोहण किया गया। जिसने भारत में जन्म लिया है उसे मां भारतीय की सेवा करना होगी। हम हिंदुस्तानी हैं हमने भारत भूमि पर जन्म लिया। हम सब भारतीय हैं। हम उस देश के वासी हैं। जहां जन्म लेने वाली भूमि को माता कहा जाता है। हमारी संस्कृति में नदियों को भी माता कहा जाता है। यह संस्कृति, यह संस्कार हमें हर भारतीय संस्कृति से मिला है।</p>
<p><strong>ये भारत के सपूतों की संस्था </strong></p>
<p>आज जो हमारे देश का सबसे बड़ा कारण है। आज दुनिया में एनआरआई सबसे ज्यादा भारतीय है। जब कोई व्यक्ति विदेश में चला जाता है तो देश का विकास बाधित हो जाता है। अच्छे लोगों के साथ ही हमारे देश का दिमाग विदेश नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब-जब देश आयात बढ़ेगा, देश कमजोर होगा। आज हमारे शिशु मंदिर बंद हो रहे हैं। कांन्वेट स्कूल खुल रहे है। एजूकेशन की ओर कलिकाल में संगठन ही हमारी शक्ति है। राजनीति से ऊपर उठकर हम संगठन को मजबूत करें।</p>
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		<title>आचार्य श्री शांति सागर जी का आचार्य पद प्रतिष्ठापना शताब्दी महोत्सव : दो दिवसीय कार्यक्रम में हुए विविध विधि-विधान और धार्मिक क्रियाएं  </title>
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		<pubDate>Mon, 06 Oct 2025 12:02:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज का आचार्य पद प्रतिष्ठापना शताब्दी महोत्सव का दो दिवसीय कार्यक्रम अनेक भव्य कार्यक्रमों के साथ सानंद हुआ। सन 1872 में जन्मे श्री सातगोंडा ने श्री देवेंद्रकीर्ति स्वामी से सन 1915 में क्षुल्लक एवं सन 1920 में मुनि दीक्षा ली। आपका नाम मुनि श्री शांति सागर जी किया गया। टोंक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज का आचार्य पद प्रतिष्ठापना शताब्दी महोत्सव का दो दिवसीय कार्यक्रम अनेक भव्य कार्यक्रमों के साथ सानंद हुआ। सन 1872 में जन्मे श्री सातगोंडा ने श्री देवेंद्रकीर्ति स्वामी से सन 1915 में क्षुल्लक एवं सन 1920 में मुनि दीक्षा ली। आपका नाम मुनि श्री शांति सागर जी किया गया। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की अक्षुण्ण मूलबाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज अतिशय क्षेत्र टोंकनगर में 57वां वर्षायोग कर रहे हैं। प्रथमाचार्य चारित्रचक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज का आचार्य पद प्रतिष्ठापना शताब्दी महोत्सव का दो दिवसीय कार्यक्रम अनेक भव्य कार्यक्रमों के साथ सानंद हुआ। सन 1872 में जन्मे श्री सातगोंडा ने श्री देवेंद्रकीर्ति स्वामी से सन 1915 में क्षुल्लक एवं सन 1920 में मुनि दीक्षा ली। आपका नाम मुनि श्री शांति सागर जी किया गया। संयमी जीवन में, सर्प , सिंह, चींटी, मकोड़े,मानवजन्य के अनेक उपसर्गों को नाम के अनुरूप समता भाव धारण कर सहन किया। सन 1924 आश्विन शुक्ल ग्यारस को आपको आचार्य पद दिया गया। उस दिन 4 दीक्षा दीं। जिनवाणी जिनालयों और धर्म संस्कृति की रक्षा की। जीवन में 9938 उपवास किए। 88 भव्य आत्माओं की दीक्षा दी।</p>
<p><strong>मुनि दीक्षा शताब्दी महोत्सव पारसोला से प्रारंभ हुआ </strong></p>
<p>राजस्थान सरकार के राजकीय अतिथि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के संघ सानिध्य में 3 ओर 4 अक्टूबर 2025 आश्विन शुक्ल 11 एवं 12 से विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों से साथ राष्ट्रीय स्तर पर प्रारंभ हुआ। श्रीजी के पंचामृत अभिषेक मानव चलित श्रीजी की रथयात्रा, ध्वजारोहण भूमिशुद्धि, आचार्य श्री के प्रवचन ,प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर विधान शाम को श्रीजी की आरती ,भजन संध्या का आयोजन हुआ। आचार्य श्री ने प्रवचन में बताया कि हम सभी का सौभाग्यशाली हैं कि 20 वीं सदी के सर्वप्रथम दिगम्बर प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी का आचार्य पद का शताब्दी तथा मुनि श्री वीरसागर जी और मुनि श्री नेमिसागर जी का मुनि दीक्षा शताब्दी महोत्सव पारसोला से प्रारंभ हुआ है और महोत्सव निरंतर आगे भी चलेगा क्योंकि, गुरु का गुणानुवाद समय का मोहताज नहीं है। हर दिन हर समय किया जाता है। आपने आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज के संयम उपकरण पिच्छी कमंडल शास्त्र और सिंहासन का अवलोकन किया। आश्विन शुक्ल एकादशी सन 1924 को 4 दीक्षा देने कारण श्री शांतिसागर जी को आचार्य पद इसी दिन दिया गया। संलेखना के समय प्रथम मुनि शिष्य श्री वीरसागर जी को उन्होंने समाधि के पूर्व आचार्य पद देकर यही आदेश दिया कि परंपरा का निर्दाेष पालन करना और अपने समाधि के पूर्व अपने योग्य शिष्य को आचार्य पद देना। आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा तब से निरंतर निर्दाेष रूप से गुरु परंपरा अनुसार चल रही है।</p>
<p><strong>श्रीजी की विशाल यात्रा महावीर जिनालय अहिंसा सर्किल से प्रारंभ हुई</strong></p>
<p>आचार्य पद से धर्म प्रभावना होती है। आचार्य श्री शांतिसागर जी ने चरित्र के सभी छह अंगों का पालन कर जीवन को प्रयोगशाला बनाया। मृत्यु श्रावक की होती है और संलेखना श्रमण साधु की होती है। यह मंगल देशना प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज के आचार्य पदप्रतिष्ठापना शताब्दी महोत्सव के दो दिवसीय कार्यक्रम में पंचम पट्टाधीशआचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रकट की। गुरुभक्त राजेश पंचोलिया के अनुसार आओ शांति मार्ग पर चले के दिव्य संदेश के आह्वान पर आचार्य श्री वर्धमान सागरजी संघ सानिध्य में श्रीजी की विशाल यात्रा महावीर जिनालय अहिंसा सर्किल से प्रारंभ हुई। जिसमें भारतवर्ष के विभिन्न राज्यों के वेशभूषा परिधानों का विशेष आकर्षण रहा। बुलेट गाड़ियों, घोड़े और ऊँट, जिनध्वजा युवा लहराते हुए शोभायमान दृष्टिगत हुए। ढोल-नगाड़ों, बैंड की मधुर ध्वनियों से आच्छादित लहरियों पर युवक-युवतियां थिरक कर भक्ति प्रदर्शित कर रहे थे।</p>
<p><strong>3 किमी की शोभा यात्रा 4 घंटे में पहुंची </strong></p>
<p>पाँच गज (हाथी) पर चयनित कल्पना सुशील कार्वा उदयपुर मुंबई सौंधर्म इंद्र, चक्रवर्ती अलका सुनील जवेरी संघपति परिवार मुंबई,कुबेर, यज्ञ नायक पूर्वा समर कंठाली इंदौर तथा कुबेर इंद्र पुष्पा मोहनलाल छामुनिया तथा श्रुतदेवी जिनवाणी माता को लेकर कन्हैयालाल बारवास परिवार हाथियों पर सवार होकर धर्म प्रभावना कर रहे। अनेक बग्घियों पर इंद्र तथा विशिष्ट गणमान्य अतिथि गृहस्थ अवस्था भोज के परिजन, बारामती के चंदू काका परिवार,श्री अरविंद दोषी परिवार विराजित हुए। शोभा यात्रा में श्री जी आचार्य संघ की आरती की। पुष्प वृष्टि से स्वागत नगर के सभी राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक संगठनों ने कर सामाजिक सदभावना का परिचय दिया। लगभग 3 किमी की शोभा यात्रा 4 घंटे में प्रमुख मार्गाे से होते हुए आर एन फार्म हाउस पहुंची। नगर में सैकड़ों बैनर लगाए गए। प्रशासन द्वारा भी जुलूस की समुचित व्यवस्था की तथा 100 से अधिक नगरों के समाज जान यहां उपस्थित हुए।</p>
<p><strong> पंजाब बैंड की प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र </strong></p>
<p>कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु ,मध्यप्रदेश, राजस्थान दिल्ली, गुजरात ,छत्तीसगढ़,बिहार, असम पश्चिम बंगाल आदि अनेक राज्यों से गुरु भक्त कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। लाखों भक्तों ने जिनवाणी और वात्सल्य वारिधी यू-ट्यूब से लाइव प्रसारण देखा। कार्यक्रम में आचार्य शांति सागर जी के गृहस्थ अवस्था कर्नाटक के तीसरी पीढ़ी के परिजन विशेष रूप से उपस्थित हुए। जुलूस में श्रावक श्राविकाएं बगैर जूते चप्पल के चल रहे थे। सभी मंडल डीजे, बैंड पार्टी की सुमधुर भजनों पर अनेक भक्त भक्ति नृत्य से प्रस्तुत कर रहे थे। पंजाब बैंड की प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र बन गई। मंगल कार्यक्रम के पूर्व दिवस वर्षा कर इंद्र देवता ने नगर एवं भूमि की शुद्धता की। घटयात्रा कलश के पवित्र जल से भूमिशुद्धि की। ध्वज वंदन मंगल कलश स्थापना आदि समस्त मांगलिक क्रियाएं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सानिध्य में प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख जी शास्त्री धरियावद के निर्देशन में हुई।</p>
<p><strong>आचार्य श्री शांतिसागर जी की डॉक्यूमेंट्री दिखाई </strong></p>
<p>ध्वजारोहण श्री अजीत मिंडा मुंबई ,मंडप उद्घाटन सुनील अग्रवाल जयपुर, दीप प्रवज्जलन अनिल सेठी बैंगलोर ,सुरेश सबलावत जयपुर ,राकेश सेठी कोलकाता धर्मचंद जैन टोंक ने किया। कलश स्थापना 6 प्रतिमा धारी सुशीला अशोक पाटनी किशनगढ़ आर के मार्बल ग्रुप ने किया। चरण प्रक्षालन का सौभाग्य अजीत मिंडा, राजकुमार सेठी जयपुर ,शास्त्र भेंट अंकेश जोबनेर ,निर्मल ,शांति, सुबोध सुमति छाबड़ा रायपुर दुर्ग ने तथा आचार्य शांतिसागर जी के सिंहासन, संयम उपकरण पिच्छी, कमंडल शास्त्र का अनावरण राजेश गुणमाला जवेरी मुंबई परिवार ने किया। प्रवचन के बाद आचार्य श्री शांतिसागर जी की डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई। आचार्य ससंघ की आहार चर्या इसके बाद दोपहर को इंद्र प्रतिष्ठा सकलीकरण क्रिया हुई। जिसमें 125 प्रमुख और प्रति इंद्रों द्वारा आचार्य श्री शांति सागर मंडल विधान की पूजन की गई।</p>
<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का पूजन कर द्रव्य अर्पित किए</strong></p>
<p>इस विधान के लिए यज्ञनायक स्पर्श समर कँठाली इंदौर द्वारा पूजन के सभी द्रव्यों के 100 थाल स्थापना, जल ,कलश, चंदन कलश अक्षत थाल प्रकार के देश-विदेश के पुष्प प्रकार के नैवेद्य में मिठाई नमकीन दीप थाल धूप प्रकार के विभिन्न फल सूखे मेवे अर्ध्य सभी द्रव्य सभी इंद्र परिवार द्वारा आचार्य श्री शांति सागर जी एवं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का पूजन कर द्रव्य अर्पित किए। मुनि श्री हितेंद्र सागर जी एवं आर्यिका श्री महायश मति जी ने विधान की पूजन कराई। पूजन के दौरान चढ़ाए जाने वाले द्रव्यों अर्ध्य में आचार्य श्री के गुणों बाबद भी बताया। दोपहर को मुनि श्री दर्शित सागर जी के केशलोचन हुए। दोपहर को आचार्य श्री वर्धमान सागर जी द्वारा प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी की नूतन प्रतिमा की विधि विधान मंत्रोच्चार से प्राणप्रतिष्ठा की गई। कार्यक्रम का सुंदर संचालन बसंत वेद ने किया। किशनगढ़ समाज ने आचार्य संघ को किशनगढ़ में आगमन शताब्दी महोत्सव एवं वर्ष 2026 का चातुर्मास करने हेतु श्रीफल अर्पित किया।</p>
<p><strong>आचार्य श्री की प्रेरणा से ही मूलाचार ग्रंथ का प्रकाशन </strong></p>
<p>रात्रि को श्री जी ओर आचार्य श्री की 2500 दीपक आरती की गई आमंत्रित कलाकारों ने मन मोहक भजनों की प्रस्तुति दी। दूसरे दिन4 अक्टूबर को उपदेश में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने बताया कि आचार्य पद शताब्दी महोत्सव मनाना बहुत ही पुण्य का कार्य है। चार अक्टूबर को अनेक कार्यक्रम हो रहे हैं। दीक्षित मुनि अपने योग्यता गुणों के आधार पर आचार्य बनते हैं। आज आचार्य श्री शांति सागर जी की विशेषता ,उनके गुणों को वाणी से प्रकट करना कठिन है। चारित्र चक्रवर्ती ग्रंथ में उनकी अनेक विशेषता बतलाई है उन्होंने बाहर शरीर से अंतर्मुखी होकर आत्मा के ज्ञान को प्रकट किया और आत्मा में देखने चिंतन करने की प्रवृत्ति को जागृत रखा। देव शास्त्र गुरु हमें मार्ग दिखलाते हैं जिस मार्ग पर वह चले उसको उन्होंने स्वयं निर्मित किया। बने बनाए मार्ग पर चलने से ज्यादा कठिन नया मार्ग बनाकर उस पर चलना महत्वपूर्ण है। गुरु भक्त राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री ने आगे प्रवचन में बताया कि जीवन में धर्म को धारण कर दीक्षा से जीवन का उत्थान किया जाता है दीक्षा के साथ अहिंसा महाव्रत धारण किया जाता है। यह महाव्रत मन, वचन, काय शरीर से पालन किया जाता है। वाणी में कटुता होना भी हिंसा का सूचक है। 20वीं सदी के आचार्य श्री की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी वर्तमान में भी देखने को मिल रही है। साधु जीवन में मन ,वचन , काय से पवित्र होते हैं। साधु शूरवीर होते हैं वह अपनी आत्मा की वीरता से कर्म रूपी शत्रु से लड़ते हैं। आचार्य श्री शांति सागर जी के जीवन में सरलता, सत्य व्यवहार, धर्म के प्रति अनुराग ,और सब परिस्थितियों में समता भाव त्याग, तप आदि गुण थे। आचार्य श्री ने बताया कि हमें ऐसा लगता है कि हम पूर्व जन्म में भी जैन मुनि रहे हैं। इसी कारण उसे आगम चर्या का हम वर्तमान जीवन में पालन कर रहे हैं। जैन साधु के लिए मूलाचार ग्रंथ तब प्रकाशित नहीं था। आचार्य श्री की प्रेरणा से ही मूलाचार ग्रंथ का अब प्रकाशन हुआ है।</p>
<p><strong>संपूर्ण समाज के लिए मंगल आशीर्वाद दिया</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने सम्यक दर्शन ,सम्यक ज्ञान सम्यक चारित्र जिनागम को जीवन में धारण किया। समाधि के समय भी धर्म से वह परिपूर्ण रहे। और सिद्ध क्षेत्र कुंथल गिरी में 36 दिन की सल्लेखना धारण की। साधु मृत्यु पर विजय प्राप्त करते हैं। इस अवसर पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने संघपति जवेरी परिवार मुंबई ,गृहस्थ अवस्था के परिजनों ,चंदू काका बारामती परिवार, डॉ. कल्याण अग्रवाल ,अरविंद दोषी सहित पंडित हंसमुख शास्त्री, भागचंद जी एवं टोंक नगर की संपूर्ण समाज के लिए मंगल आशीर्वाद दिया। आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व अनेक विद्वानों ने , पंडित श्री हंसमुख जी धरियावद, ने भावांजलि प्रस्तुत की।आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व आर्यिका श्री महायश मति जी ने प्रथमाचार्य श्री ओर 9 के अंक का संयोग बताया जन्म दिनांक 27 ,जन्म वर्ष 1872, कमल की 1008 पंखुड़ी ,108 कमल , 18 वर्ष की उम्र, 36 मूलगुण, 36 दिन की सल्लेखना, 18 करोड़ जाप, समाधि दिनांक 18,समाधि माह सितंबर,,108 गुण आदि से भावांजलि प्रस्तुत की।मुनि श्री हितेंद्र सागर जी महाराज ने गुणानुवादमें बताया कि प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज बाल ब्रह्मचारी थे उनकी परंपरा में आचार्य वीर सागर जी, आचार्य श्री शिव सागर जी, आचार्य श्री धर्म सागर जी, आचार्य श्री अजीत सागर जी और वर्तमान पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सभी बाल ब्रह्मचारी आचार्य हैं। अनेक उपसर्ग सहन किएबाहर से आमंत्रित भक्तों ने चित्र अनावरण कर दीप प्रवज्जलन कर चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भंेट की।</p>
<p><strong>कई आयोजन और सम्मेलन हुए </strong></p>
<p>टोंक नगर में भूगर्भ से प्रतिमाएं निकलने कारण आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने इसे अतिशय क्षेत्र घोषित किया है। प्रथमाचार्य श्री शांति सागर आचार्य पद शताब्दी प्रतिष्ठापना महोत्सव में पूर्व में पत्रकार संगोष्ठी, विद्वत संगोष्ठी, चार्टर्ड एवं एडवोकेट सम्मेलन, शिक्षक सम्मेलन, नारी, युवा सम्मेलन हो चुके है। भागचंद, धर्म चंद, कमल सराफ ,बीना छामुनिया ने बताया कि टोंक समाज द्वारा अनेक प्रकल्पों राष्ट्र सेवा, श्रुत जिनवाणी सेवा, श्रमण साधु सेवा माता-पिता की सहमति से जैन समाज में शादी करना आदि प्रकल्पों के लिए सांकेतिक 100 सदस्यों को देव शास्त्र एवं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के समक्ष संकल्पित कराया। इस अवसर पर गृहस्थ अवस्था की जन्म नगरी भोज से तीसरी पीढ़ी की पद्मश्री पाटिल, चौथी के किरण ,सुरेखा, कुमारी प्रणिता सहित उपस्थित हुए। बारामती के प्रसिद्ध संघपति चंदू काका के परिजन, अरविंद दोषी मुंबई के परिजन, संघ पति प्रतापगढ़ मुंबई के सुनील, अलका जवेरी ने भी सहभागिता की।</p>
<p><strong>यह समाजजन भी मौजूद रहे</strong></p>
<p>आचार्य श्री शांति सागर फाउंडेशन के अनिल सेठी बंगलौर, संजय पापड़ीवाल किशनगढ़, राकेश सेठी कोलकाता, सुरेश सबलावत जयपुर, सुनील अग्रवाल जयपुर राजकुमार सेठी जयपुर, अजीत मिंडा मुंबई, सुनील जवेरी मुंबई, डॉ. कल्याण गंगवाल, भरत जीरभार, समर कँठाली इंदौर, जय, शरद कार्वा उदयपुर, राजेश जवेरी मुम्बई सहित अनेक भक्त उपस्थित हुए। सभी के तन-मन-धन त्याग हेतु तिलक, माला, शॉल, श्रीफल से स्वागत कर स्मृति चिन्ह भेंट किया।</p>
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		<title>नवागढ़ में शताब्दी पुरुष तेजी राम का जन्म महोत्सव धूमधाम से मनाया : नवागढ़ अतिशय क्षेत्र में परिवारजनों व समाज ने तेजी राम को बताया इतिहास पुरुष </title>
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		<pubDate>Fri, 29 Aug 2025 13:13:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नवागढ़ अतिशय क्षेत्र में शताब्दी पुरुष तेजी राम का जन्म महोत्सव समाज और परिजनों की उपस्थिति में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर अभिषेक, शांति धारा और विधान के साथ समाजजनों ने उन्हें नवागढ़ का इतिहास पुरुष बताया। पढ़िए मनोज जैन नायक की खास रिपोर्ट… नवागढ़। प्रागैतिहासिक अतिशय क्षेत्र नवागढ़ का अन्वेषण 9 [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नवागढ़ अतिशय क्षेत्र में शताब्दी पुरुष तेजी राम का जन्म महोत्सव समाज और परिजनों की उपस्थिति में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर अभिषेक, शांति धारा और विधान के साथ समाजजनों ने उन्हें नवागढ़ का इतिहास पुरुष बताया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की खास रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नवागढ़</strong>। प्रागैतिहासिक अतिशय क्षेत्र नवागढ़ का अन्वेषण 9 अप्रैल 1959 को पंडित गुलाबचंद्र जी पुष्प, स्वरूप पठया सहित कई श्रावकों के अथक प्रयास से हुआ था। यहां भगवान अरनाथ स्वामी की अद्वितीय कायोत्सर्ग मुद्रा प्रतिमा प्राप्त हुई। 1959 से लेकर आज तक के विकास कार्यों में श्रावक रत्न तेजी राम पठया मैनवार का योगदान सदैव अग्रणी रहा। समाज सेवा, कर्मठता और आस्था के बल पर उन्होंने अपने परिवार व क्षेत्र को गौरवान्वित किया। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपने पुत्रों को उच्च शिक्षा दिलाई और पुत्रियों के विवाह संपन्न कर दायित्व निभाए।</p>
<p><strong>कुशाग्र बुद्धि और कर्मठता के लिए प्रसिद्ध </strong></p>
<p>तेजी राम जी का जन्म 1925 में हुआ था। बचपन से ही वे कुशाग्र बुद्धि और कर्मठता के लिए प्रसिद्ध रहे। पत्नी श्रीमती राजरानी के साथ गृहस्थ जीवन में भी वे आदर्श बने। नवागढ़ में विकास कार्यों और चातुर्मास व्यवस्था में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। शताब्दी महोत्सव पर परिजनों ने क्षेत्रीय समाज के साथ भगवान अरनाथ स्वामी के समक्ष अभिषेक, शांति धारा एवं विधान संपन्न किए। सभी ने उन्हें शताब्दी पुरुष और इतिहास पुरुष की उपाधि दी। इस अवसर पर पंडित दिनेश दिवाकर, ब्रह्मचारी जयकुमार निशांत भैया जी सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे। समिति व गुरुकुलम द्वारा पगड़ी, शॉल और अंग वस्त्र से सम्मानित किया गया। अंत में पठया परिवार ने अतिथियों का आतिथ्य कर जन्मोत्सव को गरिमा प्रदान की।</p>
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		<title>राष्ट्रीय अटल शिक्षा रत्न सम्मान से 80 शिक्षक सम्मानितः 31 समाज सेवियों का आचार्य विद्या सागरजी अलंकरण से सम्मानित किया गया </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/80_teachers_honoured_with_national_atal_shiksha_ratna_award_and_31_social_workers_honoured_with_acharya_vidya_sagar_award/</link>
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		<pubDate>Wed, 19 Feb 2025 10:56:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[महामहिम आचार्य विद्या सागरजी के प्रथम समाधि दिवस पर भारत के दसवें प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयीजी के 100वें जन्म दिवस के अवसर पर आयोजित शताब्दी समारोह एवं शिक्षा महाकुंभ की श्रृंखला में शिक्षक संदर्भ समूह द्वारा अभियान के अंतर्गत संकल्प ग्रहण करने वाले शिक्षकों एवं शिक्षा मनीषियों को राष्ट्रीय अटल शिक्षा रत्न सम्मान [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>महामहिम आचार्य विद्या सागरजी के प्रथम समाधि दिवस पर भारत के दसवें प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयीजी के 100वें जन्म दिवस के अवसर पर आयोजित शताब्दी समारोह एवं शिक्षा महाकुंभ की श्रृंखला में शिक्षक संदर्भ समूह द्वारा अभियान के अंतर्गत संकल्प ग्रहण करने वाले शिक्षकों एवं शिक्षा मनीषियों को राष्ट्रीय अटल शिक्षा रत्न सम्मान से तथा 31 वरिष्ठ समाजसेवियों को आचार्यश्री विद्या सागरजी अलंकरण से सम्मानित किया गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश जैन दद्दू की यह पूरी खबर इंदौर से&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> श्रमण संस्कृति के महामहिम आचार्य विद्या सागरजी महाराज के प्रथम समाधि दिवस पर भारत के दसवें प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयीजी के 100वें जन्म दिवस के अवसर पर आयोजित शताब्दी समारोह एवं शिक्षा महाकुंभ की श्रृंखला में शिक्षक संदर्भ समूह द्वारा संचालित ‘मेरा विद्यालय मेरी पहचान‘ अभियान के अंतर्गत अपने विद्यालय को ‘आनंद घर‘ के रूप में रूपांतरित करने का संकल्प ग्रहण करने वाले 80 से अधिक शिक्षकों एवं शिक्षा मनीषियों को राष्ट्रीय अटल शिक्षा रत्न सम्मान से तथा 31 वरिष्ठ समाजसेवियों को आचार्यश्री विद्या सागरजी अलंकरण से सम्मानित किया गया।</p>
<p><strong><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-74935" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250219-WA0026.jpg" alt="" width="1600" height="1200" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250219-WA0026.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250219-WA0026-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250219-WA0026-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250219-WA0026-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250219-WA0026-1536x1152.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250219-WA0026-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250219-WA0026-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250219-WA0026-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250219-WA0026-990x743.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250219-WA0026-1320x990.jpg 1320w" sizes="auto, (max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />भव्य सम्मान समारोह का आयोजन </strong></p>
<p>शिक्षक संदर्भ समूह भारत जिला इकाई इंदौर द्वारा आयोजित इस भव्य सम्मान समारोह का आयोजन स्थानीय अशासकीय श्री बाल विनय मंदिर, छत्रीबाग में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पं. योगेंद्र महंत पूर्व राज्य मंत्री मध्य प्रदेश शासन एवं नंदकिशोर पहाड़िया, नगर निगम शिक्षा प्रकोष्ठ प्रमुख थे। श्री अरविंद सिंह बघेल संयुक्त संचालक लोक शिक्षण संभाग इंदौर थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षक संदर्भ समूह के संस्थापक एवं राष्ट्रीय समन्वयक शिक्षाविद डॉ. दामोदर जैन ने की। समूह के सह-समन्वयक वीरेंद्र भदौरिया विशेष रूप से उपस्थित थे।</p>
<p><strong>समाज सेवियों एवं गुरु भक्तों को सम्मानित किया </strong></p>
<p>इस अवसर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले समाज सेवियों एवं गुरु भक्त जिनमें राजीव जैन, पार्षद, डॉ जैनेन्द्र जैन पं.योगेंद्र महंत, श्री अरविंद सिह बघेल, राजेंद्र जैन वास्तु, रितिका जैन, बड़वानी, राजेश जैन युवा, सचिन जैन उद्योगपति डॉ. विनीत कोठारी, राकेश सिघई, भरतेश बड़कुल, सतीश डबडेरा, अशोक श्रीवास्तव, वंदना संतोष जैन गुरुजी, आदि का आचार्य विद्यासागरजी अलंकरण से प्रशस्ति-पत्र, मोमेंटो, मुक्तक माल्य, समूह का साहित्य प्रदानकर एवं साफा बांधकर सम्मान किया गया। इस अवसर पर शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने हेतु सेवानिवृत शिक्षक सुरेशचंद्र दुबे, नरेंद्रसिंह ठाकुर, सुभाषचंद्र वर्मा एवं रमेशचंद्र सिन्देल को राष्ट्रीय अटल शिक्षा रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया।</p>
<p><strong><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-74933" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250219-WA0027.jpg" alt="" width="1280" height="720" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250219-WA0027.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250219-WA0027-300x168.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250219-WA0027-1024x576.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250219-WA0027-768x432.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250219-WA0027-990x557.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250219-WA0027-470x264.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250219-WA0027-640x360.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250219-WA0027-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250219-WA0027-414x232.jpg 414w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />दीप प्रज्वलन व सरस्वती वंदना से शुभारंभ </strong></p>
<p>कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ सरस्वती वंदना मंजूषा पाठक व अन्नपूर्णा पांडे ने प्रस्तुत की। गुरु वंदना श्रीमती वंदना जैन गुरुजी ने की। समूह के संकल्प गीत का गायन कमलेश यदुवंशी ने किया। नन्हीं बालिका कु. सिद्धि सीमा बेड़े ने नृत्यमय स्वागत गीत की प्रस्तुति दी।</p>
<p><strong>शिक्षक महाकुंभ का प्रस्ताव रखा </strong></p>
<p>समूह के संस्थापक एवं राष्ट्रीय समन्वयक श्री जैन ने समूह की गतिविधियों की जानकारी देते हुए आगामी 25 दिसंबर 2025 को अटलजी के जन्म दिवस पर इंदौर में एक लाख शिक्षकों के समागम हेतु शिक्षक महाकुंभ के आयोजन का प्रस्ताव रखा, जिसे उपस्थित समस्त अतिथियों, उद्योगपतियों एवम समाज सेवियों ने सहर्ष स्वीकार कर तन-मन-धन से अभी से ही तैयारी आरंभ करने का आश्वासन दिया। जिसका शिक्षक समुदाय में करतल ध्वनि से स्वागत किया।</p>
<p><strong>अतिथियों का स्वागत किया गया </strong></p>
<p>अतिथियों का स्वागत समूह के जिला समन्वयक संतोष जैन गुरुजी, संभागीय समन्वयक नरेंद्र सिंह ठाकुर, उप समन्वयक ललित पारिख, सह-समन्वयकगण-उर्मिला सरकानूनगो, डॉ. रजनी पांडे, अनिल गुप्ता, शैलेंद्र दुबे, सुभाष गोयल, अन्नपूर्णा पांडे, अतुल क्षीरसागर, मनीष व्यास, सुभाष चंद्र वर्मा, आजाद पटेल, योगिता नागर, पायल परदेसी, किशोर सोलंकी आदि ने किया। कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम के मुख्य आयोजक संतोष जैन गुरुजी ने किया तथा आभार ललित पारिख ने माना।</p>
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