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	<title>Bundelkhand &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>महावीर जयंती पर दीक्षा और महावीर निर्वाण पर देह-निर्वाण : तप, त्याग और राष्ट्र चेतना के प्रेरक संत आचार्य श्री ज्ञानसागर जी </title>
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		<pubDate>Sun, 29 Mar 2026 08:51:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[खंदार क्षेत्र को साधना से तीर्थ बनाने वाले तपस्वी आचार्य श्री ज्ञानसागर जी ने विश्व हिंदू परिषद की सर्वधर्म यात्रा में दिल्ली दरवाजा पर ऐतिहासिक देशना देकर हजारों श्रद्धालुओं में राष्ट्रीय गौरव और धर्म चेतना का संचार किया। पढ़िए जयेन्द्र जैन ‘निप्पू चन्देरी’ का विशेष आलेख भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और संतों का योगदान भारत की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>खंदार क्षेत्र को साधना से तीर्थ बनाने वाले तपस्वी आचार्य श्री ज्ञानसागर जी ने विश्व हिंदू परिषद की सर्वधर्म यात्रा में दिल्ली दरवाजा पर ऐतिहासिक देशना देकर हजारों श्रद्धालुओं में राष्ट्रीय गौरव और धर्म चेतना का संचार किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए जयेन्द्र जैन ‘निप्पू चन्देरी’ का विशेष आलेख</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और संतों का योगदान</strong></p>
<p>भारत की आध्यात्मिक परंपरा सदैव महान संतों और तपस्वियों की तपस्या से आलोकित रही है। जब-जब समाज को दिशा की आवश्यकता हुई, तब-तब संतों ने अपने त्याग, तप और ज्ञान से जनमानस को प्रेरित किया। दिगंबर जैन परंपरा के महान तपस्वी आचार्य श्री ज्ञानसागर जी का जीवन भी ऐसी ही प्रेरणादायक गाथा है, जिसमें धर्म, तपस्या, समाज जागरण और राष्ट्र चेतना का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है।</p>
<p><strong>महावीर जयंती पर दीक्षा &#8211; एक अद्भुत संयोग</strong></p>
<p>उनके जीवन का एक अत्यंत विलक्षण संयोग यह रहा कि उन्होंने भगवान महावीर जयंती के पावन दिवस पर दिगंबर मुनि दीक्षा ग्रहण की। जैन धर्म में यह दिन अत्यंत पवित्र माना जाता है, क्योंकि इसी दिन भगवान महावीर का जन्म हुआ था, जिन्होंने संसार को अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और आत्मसंयम का महान संदेश दिया। ऐसे पावन दिवस पर दीक्षा लेना मानो भगवान महावीर के आदर्शों को अपने जीवन में पूर्ण रूप से आत्मसात करने का संकल्प था।</p>
<p><strong>तप, त्याग और सादगीपूर्ण जीवन</strong></p>
<p>आचार्य ज्ञानसागर जी ने दीक्षा के बाद अपने जीवन को पूर्णतः तप और साधना के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने वैराग्य, संयम और त्याग का ऐसा आदर्श प्रस्तुत किया, जो आज भी साधकों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनका जीवन अत्यंत सादगीपूर्ण था, परंतु उनकी आत्मिक शक्ति और आध्यात्मिक प्रभाव असाधारण था।</p>
<p><strong>खंदार क्षेत्र &#8211; निर्जन वन से पावन तीर्थ तक की यात्रा</strong></p>
<p>उनकी साधना का एक महत्वपूर्ण केंद्र बुंदेलखंड की ऐतिहासिक नगरी चंदेरी के समीप स्थित पावन तीर्थ श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र खंदार जी रहा। आज यह स्थान जैन श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ है, परंतु एक समय ऐसा भी था जब यह क्षेत्र घने जंगलों और निर्जन वातावरण से घिरा हुआ था। चारों ओर ऊँचे वृक्ष, झाड़ियाँ और पथरीली भूमि थी। वहाँ सर्प, बिच्छू, तेंदुआ और अन्य जंगली जानवर विचरण करते थे। मधुमक्खियों के विशाल छत्ते भी भय का कारण बने रहते थे। सामान्य व्यक्ति के लिए वहाँ पहुँचना भी अत्यंत कठिन था, परंतु आचार्य ज्ञानसागर जी ने उसी निर्जन स्थान को अपनी साधना का केंद्र बना लिया।</p>
<p><strong>कठोर साधना और अडिग संकल्प</strong></p>
<p>उन्होंने वहाँ चातुर्मास कर उस क्षेत्र को धर्म साधना का केंद्र बना दिया। वर्षा ऋतु में उस क्षेत्र की स्थिति और भी विकट हो जाती थी। आसपास के डूब क्षेत्र जलमग्न हो जाते थे और पूरा स्थान पानी से भर जाता था। किन्तु गुरुदेव का संकल्प अडिग था। जब चारों ओर जलभराव हो जाता था, तब भी वे एक छोटे से ऊँचे स्थान पर बैठकर ध्यान और तप में लीन रहते थे। वही स्थान उनका तपस्थल बन जाता था और उसी सीमित स्थान पर वे रात्रि विश्राम भी करते थे।</p>
<p><strong>प्रकृति भी हुई तपस्या से प्रभावित</strong></p>
<p>श्रद्धालुओं के अनुसार, जब गुरुदेव ध्यान में लीन होते थे, तब आसपास के जंगलों से तेंदुआ, सर्प और अन्य वन्य जीव भी उनके समीप आकर शांत भाव से बैठ जाते थे। यह दृश्य अत्यंत अद्भुत होता था। ऐसा प्रतीत होता था मानो प्रकृति भी उस महान तपस्वी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त कर रही हो।</p>
<p><strong>धार्मिक केंद्र के रूप में खंदार का विकास</strong></p>
<p>आचार्य ज्ञानसागर जी की तपस्या और प्रेरणा के परिणामस्वरूप धीरे-धीरे उस निर्जन क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियाँ प्रारंभ हुईं। लोगों का भय दूर हुआ और श्रद्धालुओं का आगमन बढ़ने लगा। उनके मार्गदर्शन और आशीर्वाद से वहाँ मंदिरों के निर्माण की आधारशिला रखी गई और धीरे-धीरे वह स्थान एक प्रसिद्ध जैन तीर्थ के रूप में विकसित हो गया। आज खंदार क्षेत्र की प्रतिष्ठा का मुख्य श्रेय आचार्य ज्ञानसागर जी को ही दिया जाता है।</p>
<p><strong>राष्ट्र चेतना और सामाजिक समर्पण</strong></p>
<p>आचार्य ज्ञानसागर जी का व्यक्तित्व केवल आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं था। उनके भीतर समाज और राष्ट्र के प्रति भी गहरा समर्पण था। इसी कारण उनकी वाणी को विभिन्न धार्मिक और सामाजिक मंचों पर अत्यंत सम्मान के साथ सुना जाता था।</p>
<p><strong>दिल्ली दरवाजा पर ऐतिहासिक देशना</strong></p>
<p>विश्व हिंदू परिषद द्वारा आयोजित सर्वधर्म यात्रा के दौरान चंदेरी के ऐतिहासिक दिल्ली दरवाजा पर आचार्य ज्ञानसागर जी महाराज का ऐतिहासिक प्रवचन हुआ। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु, नागरिक और विभिन्न समाजों के लोग उपस्थित थे। उनकी देशना में केवल धार्मिक उपदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रप्रेम, सांस्कृतिक गौरव और नैतिक जीवन का प्रेरक संदेश भी समाहित था। उन्होंने स्पष्ट कहा कि धर्म का उद्देश्य केवल पूजा-अनुष्ठान नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर सत्य, अहिंसा, नैतिकता और राष्ट्रप्रेम की भावना को जागृत करना है।</p>
<p><strong>सर्वधर्म समभाव का अद्भुत उदाहरण</strong></p>
<p>चंदेरी नगर में उनके अनेक भक्त और शिष्य थे। प्रमुख श्रद्धालुओं में विनोद कठरया, कु. पद्म सिंह, कमलेश, हाथीशाह, मुनालाल और सुमन आदि के नाम उल्लेखनीय हैं। जैनेतर समाज से भी मजीद खान पठान और बाबू मुजाबर जैसे श्रद्धालुओं ने गुरुदेव का आशीर्वाद प्राप्त किया। यह दर्शाता है कि उनका व्यक्तित्व किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं था। उनकी करुणा और समत्व से सभी धर्मों के लोग प्रभावित होते थे।</p>
<p><strong>महावीर निर्वाण दिवस पर देह-निर्वाण</strong></p>
<p>आचार्य ज्ञानसागर जी के जीवन का एक और अद्भुत संयोग यह रहा कि जिस पावन पर्व महावीर जयंती पर उन्होंने दीक्षा ग्रहण की थी, उसी परंपरा से जुड़े महावीर निर्वाण दिवस पर उन्होंने देह-निर्वाण प्राप्त किया। यह संयोग उनके जीवन को और भी अधिक आध्यात्मिक और प्रेरणादायक बना देता है।</p>
<p><strong>प्रेरणादायक जीवन संदेश</strong></p>
<p>उनका जीवन यह संदेश देता है कि तप, संयम और आत्मबल से मनुष्य न केवल आत्मकल्याण कर सकता है, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकता है। आज जब श्रद्धालु खंदार क्षेत्र के दर्शन करते हैं, तो उन्हें यह स्मरण अवश्य करना चाहिए कि इस पावन तीर्थ के पीछे एक महान तपस्वी की कठिन साधना, त्याग और आध्यात्मिक शक्ति का योगदान है। आचार्य ज्ञानसागर जी का जीवन यह सिद्ध करता है कि यदि संकल्प दृढ़ हो और आत्मबल प्रबल हो, तो निर्जन वन भी धर्म और आस्था के महान केंद्र बन सकते हैं।</p>
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		<title>पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज का मिलेगा मंगल सान्निध्य : नैनागिरि में भव्य धार्मिक समारोह 23-24 मार्च को </title>
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		<pubDate>Mon, 23 Mar 2026 07:31:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वरदत्तादि ऋषियों की पावन निर्वाण स्थली एवं तेईसवें तीर्थंकर भगवान पारसनाथ स्वामी की समवशरण/देशना स्थली, श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र (रेशंदीगिरि) नैनागिरि, तहसील बकस्वाहा, जिला छतरपुर (बुंदेलखंड, मप्र) की पावन भूमि पर सोमवार 23 एवं मंगलवार 24 मार्च 2026 को विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ भव्य समारोह का आयोजन किया जाएगा। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230; नैनागिरि। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>वरदत्तादि ऋषियों की पावन निर्वाण स्थली एवं तेईसवें तीर्थंकर भगवान पारसनाथ स्वामी की समवशरण/देशना स्थली, श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र (रेशंदीगिरि) नैनागिरि, तहसील बकस्वाहा, जिला छतरपुर (बुंदेलखंड, मप्र) की पावन भूमि पर सोमवार 23 एवं मंगलवार 24 मार्च 2026 को विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ भव्य समारोह का आयोजन किया जाएगा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नैनागिरि।</strong> वरदत्तादि ऋषियों की पावन निर्वाण स्थली एवं तेईसवें तीर्थंकर भगवान पारसनाथ स्वामी की समवशरण/देशना स्थली, श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र (रेशंदीगिरि) नैनागिरि, तहसील बकस्वाहा, जिला छतरपुर (बुंदेलखंड, मप्र) की पावन भूमि पर सोमवार 23 एवं मंगलवार 24 मार्च 2026 को विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ भव्य समारोह का आयोजन किया जाएगा। इस पावन अवसर पर परम पूज्य पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ का मंगल सान्निध्य प्राप्त होगा, जिससे कार्यक्रम की आध्यात्मिक गरिमा और अधिक बढ़ेगी।</p>
<p><strong>विशेष कार्यक्रम</strong></p>
<p>कार्यक्रम के अंतर्गत 23 मार्च की रात्रि विश्राम, 24 मार्च की आहारचर्या श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र (रेशंदीगिरि) नैनागिरि में संपन्न होगी।</p>
<p><strong>श्रद्धालुओं से पधारने का आह्वान</strong></p>
<p>श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र रेशंदीगिरि नैनागिरि ट्रस्ट एवं प्रबंध समिति ने इस अवसर पर सभी श्रद्धालुओं से निवेदन किया गया है कि वे सपरिवार एवं इष्ट-मित्रों सहित नैनागिरि जी पधारकर इस पावन अवसर का लाभ प्राप्त करें।</p>
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		<title>पूज्य बड़े बाबा के दर्शन अभिषेक पूजन की होड़: दूर-दूर से पैदल आ रहे हैं बाबा के भक्त  </title>
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		<pubDate>Mon, 19 Jan 2026 12:09:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन तीर्थ क्षेत्र कुंडलपुर में निरंतर देश के कोने-कोने से श्रद्धालु भक्त पूज्य बड़े बाबा के दर्शन अभिषेक पूजन के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। कुंडलपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; कुंडलपुर दमोह। जैन तीर्थ क्षेत्र कुंडलपुर में निरंतर देश के कोने-कोने से श्रद्धालु भक्त पूज्य बड़े बाबा के दर्शन अभिषेक पूजन के लिए [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन तीर्थ क्षेत्र कुंडलपुर में निरंतर देश के कोने-कोने से श्रद्धालु भक्त पूज्य बड़े बाबा के दर्शन अभिषेक पूजन के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। <span style="color: #ff0000">कुंडलपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर दमोह</strong>। जैन तीर्थ क्षेत्र कुंडलपुर में निरंतर देश के कोने-कोने से श्रद्धालु भक्त पूज्य बड़े बाबा के दर्शन अभिषेक पूजन के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। इसी क्रम में पूज्य बड़े बाबा के उच्चासन पर विराजमान होने के 20 वर्ष पूर्ण होने पर उपकाशी हटा नगरी से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त पदयात्रा करते हुए कुंडलपुर पहुंचे। जहां सभी श्रद्धालु भक्तों का कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी के महामंत्री इंजीनियर आरके जैन, विपुल जैन एडवोकेट आदि ने कुंडलपुर प्रवेशद्वार पर स्वागत अभिनंदन किया। सभी पदयात्री पूज्य बड़े बाबा के चरणों में जाकर दर्शन कर नतमस्तक हुए।</p>
<p>पद यात्रियों में नरेंद्र जैन बाकल, पदम, प्रदीप, पारस बरौदा, प्रदीप जैन शिक्षक, मालती बहन, मीना जमुनिया, बंटी बरौदा, ममता पंडित, सुषमा, संगीता, दीप्ति, निभा, अर्चना, शालू, रिंकू, डब्बू ,राहुल, पुष्पा वाकल, वंदना जैन आदि के साथ 81 वर्षीय वयोवृद्ध गुलाबचंद जैन बरौदा वाले रास्ते में पदयात्रियों का उत्साहवर्धन करते हुए बीच-बीच में पैदल चल रहे थे।</p>
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		<title>आचार्य विद्यासागर जी को मरणोपरांत भारत रत्न सम्मान देने हेतु प्रधानमंत्री को लिखा आग्रह पत्र : सांसद नवीन जैन बोले—आचार्यश्री का तप, त्याग और राष्ट्र निर्माण सेवा सर्वोच्च सम्मान के योग्य </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_vidyasagar_bharat_ratna_request_by_mp_naveen_jain/</link>
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		<pubDate>Thu, 20 Nov 2025 05:51:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राज्यसभा सांसद नवीन जैन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राष्ट्र संत आचार्य 108 विद्यासागर जी महाराज को मरणोपरांत भारत रत्न सम्मान प्रदान किए जाने का आग्रह किया है। उन्होंने आचार्यश्री के तप, त्याग, संयम, साहित्य और राष्ट्र निर्माण में योगदान को सर्वोच्च सम्मान का पात्र बताया। पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट… आगरा। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>राज्यसभा सांसद नवीन जैन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राष्ट्र संत आचार्य 108 विद्यासागर जी महाराज को मरणोपरांत भारत रत्न सम्मान प्रदान किए जाने का आग्रह किया है। उन्होंने आचार्यश्री के तप, त्याग, संयम, साहित्य और राष्ट्र निर्माण में योगदान को सर्वोच्च सम्मान का पात्र बताया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> राज्यसभा सांसद नवीन जैन ने राष्ट्र संत आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज को मरणोपरांत भारत रत्न सम्मान प्रदान किए जाने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक विस्तृत आग्रह पत्र भेजा है। उन्होंने पत्र में आचार्यश्री के अद्वितीय तप, त्याग, संयम और राष्ट्र निर्माण में उनके अप्रतिम योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे महान महापुरुष को राष्ट्र का सर्वोच्च सम्मान मिलना चाहिए।</p>
<p>सांसद ने अपने पत्र में लिखा कि भगवान महावीर स्वामी द्वारा प्रतिपादित पंचशील—अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, अचौर्य और ब्रह्मचर्य—का पूर्ण जीवन्त स्वरूप आचार्य विद्यासागर जी महाराज में स्पष्ट रूप से दिखाई देता था। उनका संपूर्ण जीवन सम्यक् ज्ञान, सम्यक् श्रद्धा और सम्यक् आचरण का प्रेरक आदर्श रहा। दिगंबर परंपरा के कठोर नियमों का पालन करते हुए उन्होंने भौतिक संसाधनों से दूरी बनाए रखी और चरम संयम का जीवन जिया। एक समय भोजन, एक समय जल सेवन, सूर्यास्त के बाद मौन और सम्पूर्ण तपमय जीवन के कारण वे आधुनिक युग के एक अद्वितीय तपस्वी माने जाते हैं।</p>
<p><strong>मानवता और राष्ट्र उत्थान के लिए समर्पित जीवन </strong></p>
<p>आचार्यश्री का जन्म 10 अक्टूबर 1946 को कर्नाटक के सदलगा में हुआ था। मात्र 22 वर्ष की आयु में उन्होंने आचार्य ज्ञानसागर जी से दीक्षा लेकर स्वयं को मानवता और राष्ट्र उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने कठोर तपस्वी जीवन अपनाते हुए नमक, चीनी, फल, सब्जी, दूध, दही, सूखे मेवे और अंग्रेजी दवाइयों तक का परित्याग कर दिया। बिना तकिये, बिना गद्दे और बिना चादर के तख्त पर एक करवट में शयन उनके तप का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करता है।</p>
<p><strong>मूकमाटी’ सहित उनके 50 से अधिक ग्रंथ </strong></p>
<p>संस्कृत, प्राकृत, हिंदी, मराठी और कन्नड़ के वे विद्वान थे। उनके साहित्य पर 100 से अधिक पीएचडी कार्य किए जा चुके हैं। ‘मूकमाटी’ सहित उनके 50 से अधिक ग्रंथ आज आध्यात्मिक और दार्शनिक साहित्य में मार्गदर्शक के रूप में प्रतिष्ठित हैं। आचार्यश्री का संपूर्ण परिवार—माता-पिता और भाई—भी संन्यास मार्ग पर चला, जो जैन परंपरा में अत्यंत विरल माना जाता है।</p>
<p>आचार्यश्री ने 500 से अधिक मुनियों और 1000 से अधिक आर्यिकाओं को दीक्षा देकर अध्यात्म और मानव सेवा का नया युग प्रारंभ किया। बुंदेलखंड में शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज सेवा के अनेक संस्थान उनके प्रेरणा से स्थापित हुए, जिन्होंने हजारों लोगों के जीवन को दिशा दी।</p>
<p><strong>जैन ने पत्र में प्रधानमंत्री को स्मरण कराया</strong></p>
<p>सांसद नवीन जैन ने पत्र में प्रधानमंत्री को स्मरण कराया कि वर्ष 2023 में आपने स्वयं आचार्यश्री से आशीर्वाद प्राप्त किया था, और उनके देहत्याग पर आपने उन्हें देश की अपूरणीय क्षति बताया था। 18 फरवरी 2024 को तीन दिन के उपवास और मौन के उपरांत उन्होंने शांतिपूर्वक समाधि ली, जिससे सम्पूर्ण विश्व में शोक और श्रद्धा की भावनाएँ उत्पन्न हुईं। सांसद ने कहा कि यद्यपि संतों को किसी शासकीय सम्मान की आवश्यकता नहीं होती, परंतु समाज के प्रत्येक वर्ग की भावना है कि आचार्य विद्यासागर जी महाराज को भारत रत्न देकर उनके अमूल्य तप और राष्ट्र सेवा को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाए। हाल ही में कानपुर के व्यापारी सम्मेलन में भी यह मांग सर्वसम्मति से पारित हुई थी।</p>
<p>आचार्य विद्यासागर जी महाराज का जीवन भारत की आध्यात्मिक और तप परंपरा का स्वर्णिम अध्याय है। उन्हें भारत रत्न प्रदान करना आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य प्रेरणा सिद्ध होगा।</p>
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		<title>मडदेवरा गांव की बेटी अदिति जैन बनी डिप्टी कलेक्टर: फास्ट आईएएस एकेडमी के छात्रों ने लहराया परमच  </title>
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		<pubDate>Mon, 10 Nov 2025 10:24:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन तीर्थ नैनागिरि की पावन भूमि और पारसनाथ भगवान की समवशरण परिधि के मड़देवरा गांव की अर्चना जैन तथा अशोककुमार जैन की सुपुत्री अदिति जैन का मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग 2023 की परीक्षा में डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयन हुआ है। इससे समूचे गांव और बकस्वाहा क्षेत्र में खुशी की लहर है। बकस्वाहा से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन तीर्थ नैनागिरि की पावन भूमि और पारसनाथ भगवान की समवशरण परिधि के मड़देवरा गांव की अर्चना जैन तथा अशोककुमार जैन की सुपुत्री अदिति जैन का मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग 2023 की परीक्षा में डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयन हुआ है। इससे समूचे गांव और बकस्वाहा क्षेत्र में खुशी की लहर है। <span style="color: #ff0000">बकस्वाहा से पढ़िए, रत्नेश जैन रागी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बकस्वाहा।</strong> जैन तीर्थ नैनागिरि की पावन भूमि और पारसनाथ भगवान की समवशरण परिधि के मड़देवरा गांव की अर्चना जैन तथा अशोककुमार जैन की सुपुत्री अदिति जैन का मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग 2023 की परीक्षा में डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयन हुआ है। इससे समूचे गांव और बकस्वाहा क्षेत्र में खुशी की लहर है। इस उपलब्धि ने संपूर्ण बुंदेलखंड को गौरवान्वित किया है। इस गौरवशाली उपलब्धि पर अनेक जनप्रतिनिधि, संगठन संस्थाओं के पदाधिकारियों ने शुभकामनाएं प्रेषित कर अदिति के उज्जवल भविष्य की कामना की है। अदिति जैन ने प्राथमिक शिक्षा मड़देवरा से माध्यमिक, हायर सेकंडरी स्कूल की शिक्षा नवोदय विद्यालय, बीकाम की डिग्री डॉ.हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर से प्रथम श्रेणी में उतीर्ण कर सफलता प्राप्त की है। स्मरण रहे कि अदिति ने इसके पूर्व में असिस्टेंट ट्रेजरी ऑफिसर, असिस्टेंट डायरेक्टर वित्त विभाग में सफलता प्राप्त की है। उल्लेखनीय है कि ग्राम मडदेवरा निवासी भागचंद्र जैन के सुपुत्र आयुष जैन (सागर) का भी डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयन हुआ था, जो वर्तमान में बड़ामलहरा एसडीएम है।</p>
<p><strong>फास्ट आईएएस एकेडमी के अनेक छात्रों को मिली सफलता</strong></p>
<p>दिगंबर जैन महासमिति के एक प्रकल्प फास्ट आईएएस एकेडमी के छात्रों को भारी सफलता मध्यप्रदेश लोकसेवा आयोग 2023 के परिणाम में प्राप्त हुई है। इन छात्रों का सफल एवं धमाकेदार प्रदर्शन हर बार के परिणामों के अनुरुप इस बार भी रिकॉर्ड तोड़ रहा। जिसमें अदिति जैन डिप्टी कलेक्टर, पूजा जैन डीएसपी, आकाश जैन जनपद सीईओ (डीएसपी 1फस्ट वेटिंग), अर्पित जैन जनपद सीईओ, पंकज जैन कॉपरेटिव एक्सटेंशन ऑफिसर, अनामिका जैन कॉपरेटिव एक्सटेंशन ऑफिसर, विपुल जैन कॉपरेटिव एक्सटेंशन ऑफिसर के पद पर चयनित हुए है।</p>
<p><strong>इन समाजजनों और पदाधिकारियों ने दी बधाई </strong></p>
<p>दिगंबर जैन महासमिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष और फास्ट आईएएस एकेडमी के चेयरमेन डॉ. अशोक जैन बड़जात्या के महत्वपूर्ण संदेश लक्ष्य तो हर हाल में पाना है को सार्थक करने वाले इन सभी विद्यार्थी और प्रशासनिक अधिकारियों को बधाइयां मिल रही है। फास्ट परिवार, महासमिति के राष्ट्रीय संगठन मंत्री और भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी मध्यांचल के प्रांतीय अध्यक्ष डीके जैन इंदौर, मध्यांचल कमेटी के संरक्षक तथा जैन तीर्थ नैनागिरि ट्रस्ट कमेटी अध्यक्ष सुरेश जैन आईएएस, न्यायमूर्ति विमला जैन भोपाल, मध्यांचल कमेटी के महामंत्री राजकुमार घाटे, मध्यांचल कमेटी के प्रचार प्रमुख, महावीर ट्रस्ट, जैन तीर्थ नैनागिरि ट्रस्ट कमेटी के मंत्री और द्रोणगिरि कमेटी के उपाध्यक्ष राजेश जैन रागी बकस्वाहा, बड़ामलहरा विधायक रामसिया भारती, जनपद अध्यक्ष रजनी मोती यादव बकस्वाहा, पूर्व जनपद अध्यक्ष अभय फट्टा, मडदेवरा सरपंच, प्राचार्य सुमतिप्रकाश जैन, सामाजिक कार्यकर्ता अनिल बड़कुल पत्रकार ने शुभकामनाएं दी।</p>
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		<title>राष्ट्रीय विद्वत् संगोष्ठी, शपथ ग्रहण एवं पुरस्कार समर्पण समारोह इंदौर में सम्पन्न : आचार्य विभव सागर जी ससंघ सान्निध्य में वर्णी संस्थान का भव्य राष्ट्रीय आयोजन </title>
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		<pubDate>Wed, 29 Oct 2025 14:32:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इंदौर नेमीनगर स्थित जैन कॉलोनी में आचार्य विभव सागर जी के सान्निध्य में वर्णी संस्थान विकास सभा द्वारा राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी, शपथ ग्रहण एवं पुरस्कार समर्पण समारोह अत्यंत गरिमामयी वातावरण में संपन्न हुआ। पढ़िए मनीष जैन विद्यार्थी सागर की रिपोर्ट… इंदौर। जैन कॉलोनी, नेमीनगर में परम पूज्य आचार्य श्री 108 विभव सागर जी महाराज ससंघ [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>इंदौर नेमीनगर स्थित जैन कॉलोनी में आचार्य विभव सागर जी के सान्निध्य में वर्णी संस्थान विकास सभा द्वारा राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी, शपथ ग्रहण एवं पुरस्कार समर्पण समारोह अत्यंत गरिमामयी वातावरण में संपन्न हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनीष जैन विद्यार्थी सागर की रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैन कॉलोनी, नेमीनगर में परम पूज्य आचार्य श्री 108 विभव सागर जी महाराज ससंघ की पावन उपस्थिति में वर्णी संस्थान विकास सभा के तत्वावधान में राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी एवं शपथ ग्रहण कार्यक्रम भव्य रूप से आयोजित हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण से हुआ, जिसे पं. रमेश शास्त्री अहमदाबाद ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पं. जीवंधर शास्त्री जबलपुर ने की। पं. जयंत शास्त्री सीकर, डॉ. अरविंद जैन इंदौर, पं. दीपचंद जी भोपाल, पं. गजेंद्र शास्त्री इंदौर सहित अनेक विद्वान मंचासीन रहे।</p>
<p>संगोष्ठी में योगदृष्टा स्मारिका एवं वर्णी संदेश मासिक पत्रिका का विमोचन किया गया। विद्वानों ने वर्णी जी के व्यक्तित्व एवं आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज के स्वर्ण जयंती वर्ष पर अपने भावपूर्ण लेख एवं संस्मरणों का वाचन किया। इसी अवसर पर आचार्य श्री ने नवीन पदाधिकारियों एवं सदस्यों को शपथ दिलाई।</p>
<p>वर्णी विकास सभा में उत्कृष्ट सेवा कार्य करने वाले पं. कैलाश जैन शास्त्री टीला, अरविंद जैन महुना बण्डा एवं वर्णी विद्यालय मड़ावरा को राष्ट्रीय वर्णी प्रभावना पुरस्कार प्रदान किया गया।</p>
<p><strong>राष्ट्रस्तर पर वर्णी जी की प्रभावना करने का संदेश दिया</strong></p>
<p>अध्यक्षीय उद्बोधन में पं. जीवंधर शास्त्री ने वर्णी जी के कार्यों को भविष्य का आदर्श बताते हुए सभी को उनके आदर्शों के प्रचार-प्रसार के लिए प्रेरित किया। आचार्य श्री विभव सागर जी ने अपने विद्यार्थीकाल से जुड़े संस्मरण सुनाते हुए सभी को राष्ट्रस्तर पर वर्णी जी की प्रभावना करने का संदेश दिया। अंत में कार्यक्रम संयोजक एवं कार्याध्यक्ष डॉ. अरविंद जैन ने सभी आगंतुकों, विद्वानों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का समापन किया।</p>
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		<title>विलक्षण सांस्कृतिक धरोहर है बुंदेलखंड में: टीकमगढ़ कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने नवागढ़ आने की दी स्वीकृति </title>
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		<pubDate>Mon, 27 Oct 2025 14:41:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगंबर जैन प्रागैतिहासिक अतिशय क्षेत्र के निदेशक ब्रह्मचारी जयकुमार निशांत ने टीकमगढ़ कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय को वंदना के लिए आमंत्रित किया। इस अवसर पर निवाड़ी डिप्टी कलेक्टर विनीता के साथ नरेंद्र जैन बैंक, ज्ञानचंद जैन (ज्ञान मेडिको) ने नवागढ़ साहित्य कलेक्टर को भेंट किया। मुरैना / नवागढ़ से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230; [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दिगंबर जैन प्रागैतिहासिक अतिशय क्षेत्र के निदेशक ब्रह्मचारी जयकुमार निशांत ने टीकमगढ़ कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय को वंदना के लिए आमंत्रित किया। इस अवसर पर निवाड़ी डिप्टी कलेक्टर विनीता के साथ नरेंद्र जैन बैंक, ज्ञानचंद जैन (ज्ञान मेडिको) ने नवागढ़ साहित्य कलेक्टर को भेंट किया। <span style="color: #ff0000">मुरैना / नवागढ़ से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना/नवागढ़।</strong> दिगंबर जैन प्रागैतिहासिक अतिशय क्षेत्र के निदेशक ब्रह्मचारी जयकुमार निशांत ने टीकमगढ़ कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय को वंदना के लिए आमंत्रित किया। इस अवसर पर निवाड़ी डिप्टी कलेक्टर विनीता के साथ नरेंद्र जैन बैंक, ज्ञानचंद जैन (ज्ञान मेडिको) ने नवागढ़ साहित्य कलेक्टर को भेंट किया। श्रोत्रिय ने नवागढ़ विरासत, नवागढ़ अभिलेख एवं इतिहास, थीसिस डॉक्टर अर्पित रंजन दिल्ली, यशोबर्मन गोलचार्य के साथ नवागढ़ एवं गुरुकुलम विवरणिका का अवलोकन कर आश्चर्य व्यक्त किया। आपने नवागढ़ में संग्रहित विरासत के चित्रों का दिग्दर्शन किया। ब्रह्मचारी निशांत भैया ने नवागढ़ उद्भव एवं अन्वेषण के साथ वहां के अतिशय तथा प्राचीनता के बारे में अवगत कराया। 5 किमी विस्तार वाले नवागढ़ के विध्वंस का कारण चंदेल शासक परमाल आल्हा ऊदल एवं पृथ्वीराज चौहान का युद्ध बना। बुंदेलखंड का संस्कृत उन्नयन चंदेल शासन काल में विशेष रूप से हुआ। देवगढ़, खजुराहो, महोबा, अहार, पपौरा, बानपुर, नवागढ़, सेरोंन, सोनागिर प्रमुख जैन तीर्थ हैं जहां सांस्कृतिक विरासत का भंडार है।</p>
<p>कलेक्टर श्रोत्रिय ने नवागढ़ की विशेष गुफाओं, शैल चित्रों एवं प्राचीन इतिहास को लेकर निशांत भैया से कहा आपके जैन क्षेत्र के बीच तालमेल कैसा है? क्या वह एक दूसरे संबंध नहीं है? भैया जी ने बताया कि सभी की स्वतंत्रता समितियां हैं पर सांस्कृतिक धार्मिक रूप से सभी एक दूसरे के सहयोगी हैं। कलेक्टर ने कहा कि इन क्षेत्र को यदि पर्यटक स्थलों से जोड़ा जाए तो इनका विकास शीघ्रता से होगा। तब भैया जी ने कहा खजुराहो से भीमकुंड, अहार, पपौरा, नवागढ़, उमरी, ललितपुर, देवगढ़, बानपुर, कुंडेश्वर, टीकमगढ़, ओरछा, झांसी को जोड़ा जा सकता है।</p>
<p><strong> नवागढ़ आगमन का आमंत्रण</strong></p>
<p>ब्रह्मचारी निशांत भैया के साथ विनीता ने कलेक्टर को नवागढ़ आने का अनुरोध किया। तब आपने उत्सुकता एवं हर्षित भाव से आमंत्रण स्वीकार करते हुए कहा कि अरनाथ स्वामी का आशीर्वाद तथा लाखों वर्ष प्राचीन धरोहर के दर्शन करने अवश्य आऊंगा।</p>
<p>नवागढ़ में जो अन्वेषण हुआ है अभी वहां और संभावनाएं हैं। भारतीय पुरातत्व विभाग को चाहिए। यहां का विशेष रूप से गंभीरता पूर्वक अन्वेषण करने का कार्य संपादित हो। सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आप लोगों ने ऐसे प्राचीन सांस्कृतिक ऐतिहासिक विरासत वाले क्षेत्र को संरक्षित कर भारतीय संस्कृति का बहुमान एवं गौरव बढ़ाया है। मैं अवश्य आऊंगा।</p>
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		<title>नवागढ़ में 2 मार्च को तीर्थ संरक्षण संवर्धन पर मंथन : महामस्तकाभिषेक समारोह में राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे शामिल </title>
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		<pubDate>Sat, 01 Mar 2025 17:29:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ दिगंबर जैन प्रागैतिहासिक तीर्थक्षेत्र में चल रहे महा महोत्सव समारोह में आचार्य श्री विद्यासागर जी के शिष्य नयसागर जी के सानिध्य में विविध कार्यक्रम होंगे। बुंदेलखंड के तीर्थों संरक्षण और संवर्धन के लिए मंथन होगा। पढ़िए नवागढ़ से राकेश जैन रागी की खबर&#8230; नवागढ़। श्री दिगंबर जैन प्रागैतिहासिक तीर्थक्षेत्र में चल रहे महा महोत्सव समारोह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> दिगंबर जैन प्रागैतिहासिक तीर्थक्षेत्र में चल रहे महा महोत्सव समारोह में आचार्य श्री विद्यासागर जी के शिष्य नयसागर जी के सानिध्य में विविध कार्यक्रम होंगे। बुंदेलखंड के तीर्थों संरक्षण और संवर्धन के लिए मंथन होगा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए नवागढ़ से राकेश जैन रागी की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नवागढ़।</strong> श्री दिगंबर जैन प्रागैतिहासिक तीर्थक्षेत्र में चल रहे महा महोत्सव समारोह में आचार्य श्री विद्यासागर जी के शिष्य मुनि श्री नयसागर जी के सानिध्य में रविवार 2 मार्च को सुबह महामस्तकाभिषेक, दोपहर 1 बजे वर्णी संस्थान विकास सभा का शपथग्रहण समारोह, दोपहर 2 बजे से बुंदेलखंड के तीर्थों संरक्षण और संवर्धन के लिए मंथन सम्मेलन सहित विविध कार्यक्रम किए जाएंगे।</p>
<p><strong>ये रहेंगे कार्यक्रम में अतिथि</strong></p>
<p>तीर्थक्षेत्र नवागढ़ के महामंत्री वीरचंद्र नैकोरा एवं तीर्थक्षेत्र मध्यांचल कमेटी के प्रचार प्रमुख राजेश रागी ने बताया कि इस विचार गोष्ठी मंथन कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जम्बूप्रसाद जैन गाजियाबाद, मुख्य अतिथि राष्ट्रीय महामंत्री संतोष पेंडारी नागपुर, भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र मध्यांचल कमेटी के कार्याध्यक्ष एवं बुंदेलखंड प्रभारी संतोषकुमार जैन घड़ी सागर के विशिष्ट आतिथ्य में किया जाएगा।</p>
<p><strong>पदाधिकारी संबोधित करेंगे</strong></p>
<p>इस विचार गोष्ठी मंथन में तीर्थक्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय एवं मध्यांचल के अनेक पदाधिकारी और प्रतिनिधियों के साथ ही बुंदेलखंड के दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र एवं अतिशय क्षेत्र के पदाधिकारी और प्रतिनिधि शामिल होकर अपने विचार व्यक्त करेंगे।</p>
<p><strong>विद्वानों का मिलेगा मार्गदर्शन</strong></p>
<p>इस अवसर पर देश के ख्यातिप्राप्त विद्वान, प्रतिष्ठाचार्य, बालब्रह्मचारी पं. जय निशांत भैया जी सहित अनेक विद्वान पंडितों का उद्बोधन तथा मार्गदर्शन प्राप्त होगा। नवागढ़ तीर्थक्षेत्र के महामंत्री वीरचंद्र नैकोरा सहित कमेटी के पदाधिकारियों ने इस अवसर पर सम्मिलित होने की अपील की है।</p>
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		<title>आचार्य भगवन विशुद्ध सागरजी संघ के बढते कदम मुंबई की ओर-सिद्ध सागरजीः नातेपूते में गुरू-शिष्य का मिलन होगा  </title>
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		<pubDate>Fri, 07 Feb 2025 11:11:24 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अढीव पंढरपूर पंचकल्याणक के उपरांत आचार्यश्री विशुद्ध सागरजी ससंघ का विहार मुंबई की ओर प्रारंभ हुआ है। 8 फरवरी को नातेपूते में गुरू-शिष्य का मिलन होगा। श्रमण मुनिश्री सारस्वत सागरजी और श्रमण मुनिश्री जयंत सागरजी नातेपूते में पूर्व से ही विराजमान हैं। श्रमण मुनिश्री सिद्धसागर नेे कहा की समय परिणमनशील है, काल परिवर्तित होते है [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अढीव पंढरपूर पंचकल्याणक के उपरांत आचार्यश्री विशुद्ध सागरजी ससंघ का विहार मुंबई की ओर प्रारंभ हुआ है। 8 फरवरी को नातेपूते में गुरू-शिष्य का मिलन होगा। श्रमण मुनिश्री सारस्वत सागरजी और श्रमण मुनिश्री जयंत सागरजी नातेपूते में पूर्व से ही विराजमान हैं। श्रमण मुनिश्री सिद्धसागर नेे कहा की समय परिणमनशील है, काल परिवर्तित होते है और धर्म सारथी के रुप में धर्मस्थ को प्रवाहित करते रहते है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए पंढरपूर, महाराष्ट्र से अभिषेक अशोक पाटील की यह पूरी खबर&#8230; </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पंढरपूर (महाराष्ट्र)</strong> श्रमण मुनिश्री सिद्धसागर महाराजजी ने बताया की अढीव पंढरपूर पंचकल्याणक के उपरांत आचार्य भगवन श्री विशुद्ध सागरजी महाराज ससंघ का विहार मुंबई की ओर प्रारंभ हुआ है। 8 फरवरी को नातेपूते में गुरू-शिष्य का मिलन होगा। श्रमण मुनिश्री सारस्वत सागर जी महाराज और श्रमण मुनिश्री जयंत सागरजी महाराज नातेपुते में विराजमान हैं।</p>
<p><strong>शिथिल हुए धर्मरथ को गति </strong></p>
<p>श्रमण मुनिश्री सिद्धसागर महाराजजी ने आचार्य भगवन श्री विशुद्ध सागरजी के बारे में बताते हुए कहा की समय परिणमनशील है, काल परिवर्तित होते है और धर्म सारथी के रुप में महान पुरुष धर्मस्थ को प्रवाहित करते रहते है। इनकी पुण्य वर्गणाओ से शिथिल हुआ धर्मरथ गति प्राप्त करता है और अनेको जीव चल पडते है भगवत्ता प्राप्त करने के लिए। सम्प्रति मे ऐसे ही महापुरुष आचार्यश्री विशुद्ध सागरजी महाराज ने आकाश समधर्म को विस्तार प्रदान किया।</p>
<p><strong>डाकूओं का शहर साधुओं की नगरी बना</strong></p>
<p>गुरुदेव का जन्म मध्यप्रदेश के भिंड जिला के रूर ग्राम में हुआ। यह वही भिंड जिला जिसे कभी डाकुओ के शहर के नाम से जाना जाता था। परंतु जब से आचार्य भगवन का जन्म हुआ उनकी पुण्य वर्गणाओ के प्रभाव से अब यह शहर साधूओ की नगरी के नाम से संपूर्ण भारत में प्रसिद्ध है। इस नगर से अनेको मुनि, आर्यिकाएं और व्रति बन चुके है।</p>
<p><strong>महान ग्रंथ समयसार का स्वाध्याय किया </strong></p>
<p>मेरा सौभाग्य रहा जिस ग्राम रूर में जिस परिवार में आचार्य भगवन श्री विशुद्ध सागरजी का जन्म हुआ उसी घर में मेरा भी जन्म हुआ। बुंदेलखंड में कहते है पूत के लक्षण पालने में दिख जाते है। आचार्यश्री बचपन से ही धार्मिक प्रवृत्ति के रहे, घर में रहते थे तब ही अल्प आयु में समयसार जैसे महान ग्रंथ का स्वाध्याय करते थे।</p>
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		<title>श्रीफल किया अर्पित : बुंदेलखंड की धर्म नगरी ललितपुर में होगा 2024 का भव्य पावन वर्षायोग  </title>
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		<pubDate>Sat, 13 Jul 2024 08:56:57 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ललितपुर (राजीव सिंघई मोनू)। आचार्य श्रेष्ठ परम पूज्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज एवं नवाचार्य परम पूज्य श्री 108 समय सागर जी महाराज के परम प्रभावी शिष्य परम पूज्य गुरुवर मुनि श्री अविचल सागर जी महाराज का 2024 का पावन वर्षा योग ललितपुर में होगा। दिगंबर.जैन पंचायत समिति ललितपुर के तत्वाधान में ललितपुर समाज ने [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ललितपुर (राजीव सिंघई मोनू)।</strong> आचार्य श्रेष्ठ परम पूज्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज एवं नवाचार्य परम पूज्य श्री 108 समय सागर जी महाराज के परम प्रभावी शिष्य परम पूज्य गुरुवर मुनि श्री अविचल सागर जी महाराज का 2024 का पावन वर्षा योग ललितपुर में होगा।</p>
<p>दिगंबर.जैन पंचायत समिति ललितपुर के तत्वाधान में ललितपुर समाज ने श्री फल समर्पित किया। शुक्रवार दोपहर 3.00 बजे पृथ्वीपुर से ललितपुर की ओर मंगल विहार हुआ।</p>
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