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	<title>Bundelkhand region &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>अहारजी में प्राकृत चेतना का भव्य संगम: बुंदेलखंड क्षेत्र के प्राकृत विद्या शिक्षण शिविरों का सामूहिक समापन   </title>
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		<pubDate>Tue, 12 May 2026 03:34:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[निकटवर्ती जैन तीर्थ अहारजी में प्राकृत भाषा विकास फाउण्डेशन द्वारा बुंदेलखंड क्षेत्र में प्राकृत भाषा, जैन संस्कृति एवं भारतीय ज्ञान-परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से 2 से 10 मई तक प्राकृत विद्या शिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। शिविरों का सामूहिक समापन समारोह रविवार को श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र अहारजी में आध्यात्मिक वातावरण [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>निकटवर्ती जैन तीर्थ अहारजी में प्राकृत भाषा विकास फाउण्डेशन द्वारा बुंदेलखंड क्षेत्र में प्राकृत भाषा, जैन संस्कृति एवं भारतीय ज्ञान-परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से 2 से 10 मई तक प्राकृत विद्या शिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। शिविरों का सामूहिक समापन समारोह रविवार को श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र अहारजी में आध्यात्मिक वातावरण में हुआ। <span style="color: #ff0000">बकस्वाहा से पढ़िए, रत्नेश जैन रागी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बकस्वाहा।</strong> निकटवर्ती जैन तीर्थ अहारजी में प्राकृत भाषा विकास फाउण्डेशन द्वारा बुंदेलखंड क्षेत्र में प्राकृत भाषा, जैन संस्कृति एवं भारतीय ज्ञान-परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से 2 से 10 मई तक प्राकृत विद्या शिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। शिविरों का सामूहिक समापन समारोह रविवार को श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र अहारजी में आध्यात्मिक वातावरण में हुआ। कार्यक्रम में बुंदेलखंड क्षेत्र के अनेक नगरों से शिविरार्थी, अध्यापक, संयोजक, विद्वान एवं समाजजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि यह शिविर आचार्यश्री सुनीलसागरजी महाराज की प्रेरणा से आयोजित किए गए। जिनका उद्देश्य नई पीढ़ी को प्राकृत भाषा, जैन आगमों एवं भारतीय संस्कृति की मूल चेतना से जोड़ना रहा। शिविरों का आयोजन बाजार मंदिर टीकमगढ़, सिविल लाइन टीकमगढ़, पंचायती मंदिर टीकमगढ़, भगवां, बकस्वाहा, हटा, छतरपुर एवं बम्हौरी में किया गया। जहां बच्चों, युवाओं एवं प्रौढ़जनों ने सहभागिता कर प्राकृत भाषा के अध्ययन में रुचि दिखाई।</p>
<p><strong>आधुनिक शिक्षण प्रणाली से जोड़ने का कार्य किया जा रहा </strong></p>
<p>समारोह का शुभारंभ मंगलाचरण, नवकार महामंत्र एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। विभिन्न शिविरों का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए राष्ट्रीय संयोजक डॉ. आशीष जैन आचार्य ने बताया कि शिविरों में विद्यार्थियों को प्राकृत भाषा का सरल परिचय, प्राकृत व्याकरण, संभाषण शैली, ब्राह्मी लिपि का प्रारंभिक ज्ञान, जैन धर्म-दर्शन, संस्कारमूलक गीत, प्रश्नोत्तरी एवं रोचक गतिविधियों के माध्यम से शिक्षण दिया गया। उन्होंने बताया कि इन शिविरों का उद्देश्य केवल भाषा सिखाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, संस्कार एवं भारतीय ज्ञान परम्परा के प्रति श्रद्धा जागृत करना भी है। उन्होंने आगे कहा कि फाउंडेशन द्वारा संचालित पंचवर्षीय प्राकृत अध्ययन पाठ्यक्रम (3$2) के माध्यम से प्राकृत भाषा को व्यवस्थित एवं आधुनिक शिक्षण प्रणाली से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। ऑनलाइन माध्यम से वीडियो, पावर पॉइंट प्रस्तुति, इन्फोग्राफिक्स, प्रश्नोत्तर सामग्री एवं सरल परीक्षा प्रणाली के माध्यम से देशभर के विद्यार्थियों को प्राकृत से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।</p>
<p>कार्यक्रम में क्षेत्र समिति के अध्यक्ष महेन्द्र जैन ने कहा कि अहारजी क्षेत्र सदैव धर्म, शिक्षा और साधना की पवित्र भूमि रहा है। प्राकृत विद्या शिक्षण शिविर जैसे आयोजन समाज में ज्ञान, संस्कार एवं संस्कृति के संरक्षण का महत्त्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि युवा पीढ़ी मोबाइल और आधुनिक जीवनशैली के साथ-साथ अपनी मूल संस्कृति और प्राचीन ज्ञान से भी जुड़े। उन्होंने फाउण्डेशन के प्रयासों की सराहना करते हुए भविष्य में भी हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।</p>
<p><strong>शिविरों की सफलता एवं स्थानीय समाज के सहयोग पर प्रसन्नता जताई</strong></p>
<p>फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. ऋषभचन्द जैन फौजदार ने कहा कि प्राकृत भाषा केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि भारतीय अध्यात्म, जैन आगमों और संस्कृति की जीवंत आत्मा है। उन्होंने कहा कि यदि हमें अपनी जड़ों को समझना है, तो प्राकृत भाषा को समझना आवश्यक है, क्योंकि यही भाषा जैनाचार्यों की मूल वाणी रही है। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि प्राकृत अध्ययन के माध्यम से केवल ज्ञान नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास, शोध, शिक्षण एवं रोजगार के नए अवसर भी विकसित हो सकते हैं। कार्यक्रम में क्षेत्रीय संयोजक डॉ. निर्मल जैन शास्त्री एवं विजय जैन शास्त्री ने भी शिविरों की सफलता एवं स्थानीय समाज के सहयोग पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि समाज के सकारात्मक सहयोग से यह अभियान आने वाले समय में और अधिक व्यापक रूप लेगा।</p>
<p>समारोह का प्रभावी एवं ओजस्वी संचालन डॉ. राजेश जैन शास्त्री द्वारा किया गया, जिन्होंने अपनी प्रभावपूर्ण शैली से कार्यक्रम को प्रेरणादायी एवं व्यवस्थित बनाए रखा। इस अवसर पर पुरस्कार पुण्यार्जक श्रीमती आभा जैन परिवार का विशेष सम्मान प्रशस्ति-पत्र देकर किया गया। साथ ही सभी अध्यापक विद्वानों, स्थानीय संयोजकों, शिविर सहयोगियों तथा विभिन्न शिविरों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त संयोजकों का सम्मान-पत्र, स्मृति-चिह्न एवं अभिनंदन कर सम्मानित किया गया।</p>
<p><strong>प्राकृत भाषा के अध्ययन, संरक्षण एवं प्रसार का संकल्प </strong></p>
<p>कार्यक्रम के दौरान प्राकृत गीत, विद्यार्थियों की प्रस्तुति, प्राकृत प्रज्ञा प्रतियोगिता के ड्रॉ एवं पुरस्कार वितरण ने वातावरण को अत्यंत उल्लासपूर्ण बना दिया। उपस्थित विद्यार्थियों एवं समाजजनों ने प्राकृत भाषा के अध्ययन, संरक्षण एवं प्रसार का संकल्प लेते हुए इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान किया। समापन में सामूहिक मंगलभावना के साथ सभी प्रतिभागियों ने यह अनुभव व्यक्त किया कि ऐसे शिविर केवल शिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि संस्कृति, ज्ञान और आत्मजागरण की प्रेरक यात्रा हैं, जो समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन रहे हैं।</p>
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		<title>बुंदेलखंड में 2 मई से शुरू होंगे प्राकृत विद्या शिक्षण शिविर : शिविरों के माध्यम से नई पीढ़ी को अमूल्य धरोहर से जोड़ने का प्रयास </title>
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		<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 10:06:47 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बुंदेलखंड क्षेत्र में प्राकृत भाषा के प्रचार-प्रसार हेतु प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन द्वारा प्राकृत विद्या शिक्षण शिविरों का आयोजन 2 मई से किया जा रहा है। बकस्वाहा से पढ़िए, रत्नेश जैन रागी की यह खबर&#8230; बकस्वाहा। बुंदेलखंड क्षेत्र में प्राकृत भाषा के प्रचार-प्रसार हेतु प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन द्वारा प्राकृत विद्या शिक्षण शिविरों का आयोजन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बुंदेलखंड क्षेत्र में प्राकृत भाषा के प्रचार-प्रसार हेतु प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन द्वारा प्राकृत विद्या शिक्षण शिविरों का आयोजन 2 मई से किया जा रहा है। <span style="color: #ff0000">बकस्वाहा से पढ़िए, रत्नेश जैन रागी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बकस्वाहा</strong>। बुंदेलखंड क्षेत्र में प्राकृत भाषा के प्रचार-प्रसार हेतु प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन द्वारा प्राकृत विद्या शिक्षण शिविरों का आयोजन 2 मई से किया जा रहा है। यह शिविर आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज की प्रेरणा तथा आचार्य श्री समयसागर जी, आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज एवं आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के पावन आशीर्वाद से किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय संयोजक डॉ. आशीष जैन आचार्य, शाहगढ़ (सागर) ने बताया कि प्राकृत भाषा हमारी प्राचीन संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा की मूल धारा है। इन शिक्षण शिविरों के माध्यम से नई पीढ़ी को इस अमूल्य धरोहर से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे भाषा के साथ-साथ संस्कारों का भी संवर्धन हो सके।</p>
<p>वहीं क्षेत्रीय संयोजक विजय जैन शास्त्री ने कहा कि बुंदेलखंड क्षेत्र में ये शिविर विद्यार्थियों एवं जिज्ञासुओं के लिए एक उत्कृष्ट अवसर हैं। शिविरों में सरल, व्यवहारिक एवं प्रभावी पद्धति से प्राकृत भाषा का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे अधिक से अधिक लोग इस भाषा को सीखकर अपने जीवन में आत्मसात कर सकें।</p>
<p><strong>विशेष प्रशिक्षण सत्र निर्धारित</strong></p>
<p>मीडिया प्रभारी राजेश जैन ‘रागी’, बकस्वाहा ने जानकारी देते हुए बताया कि शिविरों की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। प्रथम चरण में शिविरों का आयोजन बकस्वाहा, शाहगढ़, बम्होरी, हटा, भगवां, टीकमगढ़ आदि अनेक स्थानों पर किया जाएगा। इन शिविरों में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं भाषा प्रेमियों के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र निर्धारित किए गए हैं। सभी इच्छुक प्रतिभागियों से अधिक से अधिक संख्या में सहभागिता करने का आग्रह किया गया है, ताकि प्राकृत भाषा के इस अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिल सके।</p>
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		<title>समाजसेवी देवेंद्र चौधरी को नम आंखों से दी अंतिम विदाई : बुंदेलखंड क्षेत्र में शोक छाया, श्रद्धांजलि अर्पित की </title>
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		<pubDate>Sat, 03 Jan 2026 05:40:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[समीपस्थ नगर घुवारा निवासी देवेन्द्र जैन चौधरी का नए वर्ष की रात्रि में आकस्मिक देह परिवर्तन होने से घुवारा नगर ही नहीं अपितु संपूर्ण बुंदेलखंड क्षेत्र के समाज में शोक व्याप्त है। समाजजनों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।बकस्वाहा से पढ़िए, रत्नेश जैन रागी की यह खबर&#8230; बकस्वाहा। समीपस्थ नगर घुवारा निवासी देवेन्द्र जैन चौधरी का नए [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>समीपस्थ नगर घुवारा निवासी देवेन्द्र जैन चौधरी का नए वर्ष की रात्रि में आकस्मिक देह परिवर्तन होने से घुवारा नगर ही नहीं अपितु संपूर्ण बुंदेलखंड क्षेत्र के समाज में शोक व्याप्त है। समाजजनों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।<span style="color: #ff0000">बकस्वाहा से पढ़िए, रत्नेश जैन रागी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बकस्वाहा।</strong> समीपस्थ नगर घुवारा निवासी देवेन्द्र जैन चौधरी का नए वर्ष की रात्रि में आकस्मिक देह परिवर्तन होने से घुवारा नगर ही नहीं अपितु संपूर्ण बुंदेलखंड क्षेत्र के समाज में शोक छा गया। शुक्रवार को उनके अंतिम संस्कार में हजारों जनप्रतिनिधि, समाजसेवी, अनेक संस्थाओं के पदाधिकारी सदस्य,महानुभावों ने नम आंखों से भावपूर्ण अंतिम विदाई देकर श्रद्धांजलि अर्पित की।देवेंद्र चौधरी घुवारा की समर्पित सेवाओं, दानवीरता, धर्म प्रभावना, तीर्थों के विकास में अग्रणी, देव शास्त्र गुरु के प्रति समर्पित, सहज सरल वात्सल स्नेह मिलनसार व्यक्तित्व के कारण लोगों के हृदय में स्थान बनाए हुए थे। आप जैन तीर्थ द्रोणगिरि की प्रबंध समिति के लंबे समय से पदाधिकारी तथा गत वर्ष ट्रस्ट कमेटी के मंत्री के पद पर मनोनीत किए गए जाने पर अपनी समर्पित सेवाएं देकर तीर्थ विकास में अग्रणी योगदान दे रहे थे। वहीं जैन तीर्थ नैनागिरि प्रबंध समिति सहित अनेक संस्था संगठनों में पदाधिकारी व सदस्य के रूप में समर्पित योगदान दे रहे थे।</p>
<p><strong>कई तीर्थ में दिया योगदान</strong></p>
<p>द्रोणगिरि नैनागिरि तीर्थ ही नहीं अनेक तीर्थों तथा जिनालयों के विकास के लिए समर्पित, जिनालयों में जिनबिम्ब विराजमान कराने में अग्रणी, सबके प्रति सम्मान और सहयोग की भावना रखने वाले गंभीर व्यक्तित्व के धनी का आकस्मिक देह परिवर्तन से सबका मन विचलित हो गया। सबके हृदय में अपार दुःख छा गया। आप स्वर्गीय चौधरी कमलापति के पौत्र, स्वर्गीय चौधरी भागचंद के पुत्र, चौधरी अनिल कुमार, सुरेंद्र कुमार के भाई तथा देवांशु, दर्शन, देवराज के पिताजी थे।</p>
<p><strong>शोक संवेदनाएं व्यक्त कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए</strong></p>
<p>देवेंद्र चौधरी जी के दुःखद देह परिवर्तन पर सुरेश जैन आईएएस, सन्तोष कुमार जैन घड़ी, राजेश रागी,शील डेवडिया, कपिल मलैया, महेंद्र बड़ागांव, पवन घुवारा, सुनील घुवारा,सनत कुटौरा,आलोक दाऊ, सुशील मोदी, सुरेश डेवडिया सहित जैन तीर्थ द्रोणगिरि, जैन तीर्थ नैनागिरि के साथ ही बुंदेलखंड के अनेक तीर्थ, संस्थाओं के पदाधिकारी व सदस्य तथा जनप्रतिनिधि, समाजसेवियों ने अपनी अश्रुपूरित श्रद्धांजलि प्रेषित करते हुए शोक संतप्त परिवार को इस अपार दुःख सहन की शक्ति प्रदान करने की भगवान से प्रार्थना की।</p>
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