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	<title>Brahmacharya Dharma &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>युवाओं में शील संयम और सदाचार के प्रति भटकाव : मुनि श्री प्रमाण सागर ने ब्रह्मचर्य धर्म की व्याख्या कर संयम की शिक्षा दी </title>
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		<pubDate>Sat, 06 Sep 2025 10:49:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अकेले यौन संयम को साध लेना ही ब्रह्मचर्य नहीं,अपनी आत्मा के निकट आकर अपनी साधना को पूर्ण करने का नाम ब्रह्मचर्य है। यह उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने दशलक्षण व्रत के अंतिम दिवस उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के दिन प्रातःकालीन सभा में व्यक्त किये। भोपाल से पढ़िए, राजीव सिंघई की यह खबर&#8230; भोपाल (अवधपुरी)। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अकेले यौन संयम को साध लेना ही ब्रह्मचर्य नहीं,अपनी आत्मा के निकट आकर अपनी साधना को पूर्ण करने का नाम ब्रह्मचर्य है। यह उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने दशलक्षण व्रत के अंतिम दिवस उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के दिन प्रातःकालीन सभा में व्यक्त किये। <span style="color: #ff0000">भोपाल से पढ़िए, राजीव सिंघई की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल (अवधपुरी)</strong>। अकेले यौन संयम को साध लेना ही ब्रह्मचर्य नहीं,अपनी आत्मा के निकट आकर अपनी साधना को पूर्ण करने का नाम ब्रह्मचर्य है। यह उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने दशलक्षण व्रत के अंतिम दिवस उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के दिन प्रातःकालीन सभा में व्यक्त किये। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया श्रावक संस्कार शिविर के अंतिम दिवस प्रवचन के उपरांत सभी शिविरार्थियों के साथ चैनल पर सुन रहे सभी समाज बंधुओं से यौन सदाचार व्रत पालन करने एवं सभी युवक युवतियों को विवाहेत्तर संबंध का पूर्ण रुपेण त्याग करने और गर्भपात जैसा कुकृत्य न करने का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में रिलेशनशिप के कारण आज के युवा शीलऔर संयम को अर्थ हीन समझने लगे है। उसके कारण उन्मुक्त यौनाचार को बढ़ावा मिला है। जिसके परिणाम बहुत ही विकृत और विभत्स आ रहे हैं। यह बहुत चिंता का विषय है।इस तरह कि व्यव्स्थाओं ने हमारी पूरी सामाजिक परंपरा निष्ठा को छिन्न भिन्न कर दिया है। इसके के परिणाम से युवक-युवतियों में शील, संयमऔर सदाचार के प्रति भटकाव आया है, जो कतई स्वीकार योग्य नहीं है</p>
<p><strong>पति-पत्नी के संबंध कपड़े की तरह हो गये</strong></p>
<p>उन्होंने उन्मुक्त यौनाचार की वकालत करने वालों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि उन्मुक्त यौनाचार के कारण विवाह संबंध लेट हो रहे हैं तथा जो हो रहे वह भी डिवोर्स के कगार पर हैं। आजकल पति-पत्नी के संबंध कपड़े की तरह हो गये हैं। एक से छूटा दूसरे से कर लो जब चाहे बदल लो? उन्होंने कहा कि यह हमारी संस्कृति नहीं। भारतीय संस्कृति में दो ही बातें है या तो विवाह करो या वैराग्य की ओर चलो। उन्होंने कहा कि आज के युवक और युवतियों में एन्जॉय के कारण कैरेक्टर में कमी आई है, जो धार्मिक प्रवृत्ति के हैं उनका उपहास उड़ाया जाता है। उन्होंने कहा कि कहां जा रही है हमारी संस्कृति? इस पर ब्रेक लगना चाहिये और यह ब्रेक &#8220;सदगुरुओं की शरण में उनको जीवन की मर्यादा का पाठ पढ़ाकर ही लाया जा सकता है।</p>
<p><strong>आत्मा से दूरी ही ब्रह्म और भ्रम है</strong></p>
<p>मुनि श्री ने चार शब्द भ्रम, ब्रह्म, मर्म, कर्म की गहराई में उतरते हुए कहा कि चर्म पर दृष्टि रखना ही हमारा भ्रम है,जो आत्मा के जितना निकट है,वह ही उतना बड़ा ब्रह्मचारी है,आत्मा के निकट और आत्मा से दूरी ही ब्रह्म और भ्रम है। मुनि श्री ने कहा आत्मा से दूरी बनाने में सबसे बड़ा योगदान उस छोटी सी डिबिया (मोबाइल) का है। जो आपकी जेब में है उस छोटी सी डिबिया में ही आपका सारा संसार सिमट गया है और वही छोटी सी डिबिया की युवा पीढ़ी को काम,भोग की लालसा में उलझाकर आत्मा से दूर कर रही है।</p>
<p><strong>अपनी आत्मा को जानना जरुरी है</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि जिन्होंनेअपने काम,भोग और लालसा पर नियंत्रण किया उनकी वृति तथा प्रवृत्ति में लगाम लगी है, उन्होंने अंतर्मुखी होकर शील संयम और सदाचार का पालन किया है, उन्होंने कहा अंतर्मुखी होने के लिये सबसे पहले अपनी आत्मा को जानना जरुरी है। मैं कौन हूं, मेरा स्वरूप क्या है? मेरा गुणधर्म क्या है? मेरा स्वभाव क्या है? मुनि श्री ने कहा कि आत्मज्ञान ही हमारे जीवन के उत्कर्ष का आधार है,आत्मा को जाने विना कभी भी कल्याण नहीं हो सकता जिसको एक बार आत्मज्ञान हो जाता है,उसकी प्रवत्ती में स्वाभाविक सहजता आ जाती है,उसका भ्रम टूटता है,ब्रह्म के बोध से मर्म का निवारण होता है,भ्रम टूटने से मर्म की उपलव्धि और कर्म का निवारण होता है आचार्य कुंद कुंद कहते है कि आध्यात्मिक साधना का आधार अपने आपको जानना और पहचानना है कि मैं हूं कौन? जिस दिन तुम जीवन की सच्चाई को जान लोगे तेरा सारा व्यामोह दूर होकर जीवन की दशा और दिशा बदल जाएगी।</p>
<p><strong>अब भी संभल जाओ</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि क्षण मात्र के सुख के पीछे अपने संपूर्ण जीवन और अपनी संपूर्ण शक्ति को इस &#8220;काम भोग&#8221; की लालसा में खपा दिया, अब भी संभल जाओ। यह शरीर की खाज खुजाने के समान है, उसको खुजलाने में सुख नहीं उस पर मलहम लगाने में ही सार है। उसी प्रकार जिसको आत्मज्ञान हो जाता है,वह काम भोग की खुजली को खुजलाता नहीं उस खाज पर तत्वज्ञान की मलहम लगाकर उसे स्थाई रुप से ठीक करता है उन्होंने अयोध्या प्रसाद गोहिल की रचना में ब्रहमचारणी गायका उदाहरण देते हुये कहा कि संयम अकेले मनुष्य में ही नहीं होता यह पशु में भी घट जाता है,एक परिवार में एक गाय पलती थी उसने पांच सात बच्चों को जन्म दे दिया,उसके उपरांत उसे जब गर्भवती बनाने की अनेक चेष्टा की गई तो उस गाय ने घर की बिटिया को स्वप्न दिया कि अब मैंने ब्रह्मचर्य व्रत अपना लिया है। अतःअब मुझे गर्भवती बनाने का प्रयास किया तो मैं कुए में कूदकर अपनी जान दे दूंगी।</p>
<p>घर के लोगों ने महज इस सपना समझा और उस गाय को एक सांड से संपर्क कराया तो उस गाय ने अपने आपको रस्सी से छुड़ाकर सामने कुएं में छलांग लगा अपनी जान दे दी।</p>
<p><strong>भगवान वासुपूज्य स्वामी का निर्वाण महोत्सव मनाया</strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कि भगवान वासुपूज्य स्वामी का निर्वाण महोत्सव मनाते हुए निर्वाण लाडु चढ़ाया गया एवं अनंतनाथ भगवान का पूजन किया गया। अनेक शिविरार्थियों ने उपवास रखा तथा दोपहर में विद्याप्रमाण गुरुकुलम से जलयात्रा निकाली गई, जो कि संविद नगर जैन मंदिर से होती हुई वापस गुरुकुल प्रांगण में आई तथा भगवान का अभिषेक संपन्न हुआ एवं श्री जी जिनालय में विराजमान किये गए। रविवार को पूर्णिमा के अवसर पर 55 मिनट की वृहद शांतिधारा एवं सभी उपासिओं की पारणा एवं सम्मान समारोह रखा गया है। मुनि श्री के सानिध्य में 14 सितंबर को संपूर्ण भोपाल की जैन समाज का क्षमावाणी पर्व मनाया जाएगा।</p>
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		<title>दिगम्बर जैन समाज के दस लक्षण पर्यूषण पर्व 28 अगस्त से प्रारंभ : वागड़ मेवाड़ में श्रद्धा और उमंग के साथ मनाया जाएगा पर्यूषण महापर्व </title>
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		<pubDate>Mon, 25 Aug 2025 14:14:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगम्बर जैन समाज का पर्यूषण महापर्व 28 अगस्त से 6 सितम्बर तक पश्चिम बंगाल के चितरंजन मिहिजाम स्थित श्री पारसनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में मनाया जाएगा। इस दौरान दस दिवसीय धर्मिक आयोजन, उपवास, अभिषेक, शांतिधारा और रथोत्सव के कार्यक्रम आयोजित होंगे। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… दिगम्बर जैन समाज के संयम, तप और त्याग का पर्वाधिराज पर्यूषण [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>दिगम्बर जैन समाज का पर्यूषण महापर्व 28 अगस्त से 6 सितम्बर तक पश्चिम बंगाल के चितरंजन मिहिजाम स्थित श्री पारसनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में मनाया जाएगा। इस दौरान दस दिवसीय धर्मिक आयोजन, उपवास, अभिषेक, शांतिधारा और रथोत्सव के कार्यक्रम आयोजित होंगे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए पूरी रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p>दिगम्बर जैन समाज के संयम, तप और त्याग का पर्वाधिराज पर्यूषण महापर्व 28 अगस्त से प्रारंभ हो रहे हैं। प्रतिष्ठाचार्य पंडित विनोद पगारिया ने बताया कि यह दस दिवसीय पर्व 6 सितम्बर तक चलेगा। पश्चिम बंगाल के चितरंजन मिहिजाम स्थित श्री पारसनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में उनके तत्वावधान में विविध आयोजन होंगे।</p>
<p><strong>पर्यूषण पर्व के तहत प्रत्येक दिन विशेष धर्मों का पालन किया जाएगा:</strong></p>
<p>• 28 अगस्त: उत्तम क्षमा धर्म</p>
<p>• 29 अगस्त: उत्तम मार्दव धर्म</p>
<p>• 30 अगस्त: आर्जव धर्म</p>
<p>• 31 अगस्त: सत्य धर्म और भगवान पुष्पदन्त जी मोक्ष कल्याणक</p>
<p>• 1 सितम्बर: शौच धर्म</p>
<p>• 2 सितम्बर: संयम धर्म और सुंगध दशमी पर्व</p>
<p>• 3 सितम्बर: उत्तम तप धर्म</p>
<p>• 4 सितम्बर: उत्तम त्याग धर्म</p>
<p>• 5 सितम्बर: उत्तम आकिंचन धर्म</p>
<p>• 6 सितम्बर: उत्तम ब्रह्यचार्य धर्म, अनन्त चतुदर्शी और वासुपूज्य भगवान का मोक्ष कल्याणक</p>
<p>इस अवसर पर नगर के प्राचीन मंदिरों जैसे आदिनाथ दिगम्बर जूना मंदिर, चन्द्रप्रभु मंदिर, गांधियों का मंदिर, सेठों का मंदिर, सोनियों का मंदिर, भगवान ऋषभदेव पगल्याजी जल मंदिर, अतिशय क्षेत्र योगेंद्र गिरी, श्री शांतिनाथ मंदिर सिद्धी रेजीडेन्सी, अजीतनाथ मंदिर गोवाड़ी में प्रतिदिन प्रातः श्रद्धालुओं द्वारा जिनेन्द्र भगवान का अभिषेक और शांतिधारा की जाएगी। इसके बाद नव देवता पूजा, देव शास्त्र गुरु पूजा, मूलनायक भगवान की पूजा, सोलह कारण पर्व पूजा, पंचमेरू पूजा तथा दशलक्षण विधान के बाद तत्वार्थ सूत्र का वांचन किया जाएगा। रात्रि में जिनेन्द्र भगवान की आरती उतारी जाएगी।</p>
<p><strong>8 सितम्बर को एक रथ और 9 सितम्बर को दो रथ निकाले जाएंगे</strong></p>
<p>समाज के सेठ महेश नोगमिया ने बताया कि पर्व के तहत भाद्रपद शुक्ल त्रयोदशी 5 सितम्बर और भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी 6 सितम्बर को रात्रि में जिन प्रतिमा और जिनवाणी को प्राचीन काष्ठ निर्मित पालकी में विराजित कर पालकियाँ निकाली जाएंगी। 7 सितम्बर को पूर्णिमा क्षमावाणी पर्व मनाया जाएगा। इसके पश्चात रथोत्सव पर्व के तहत 8 सितम्बर को एक रथ और 9 सितम्बर को दो रथ निकाले जाएंगे। समूचे वागड़ मेवाड़ क्षेत्र में पर्यूषण पर्व श्रद्धा और उमंग के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर जैन श्रद्धालु निराहार रहकर उपवास की तप साधना करेंगे।</p>
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		<title>पर्यूषण पर्व के दसवें दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पर पाठशाला के बच्चो ने रूपेश जैन के भजन सुनेः जन्म तप कल्याणक के साथ विभिन्न आयोजन हुए </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/on_the_tenth_day_of_paryushan_festival_the_school_children_listened_to_hymns_and_recited_shanti_paath_on_the_religion_of_supreme_celibacy/</link>
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		<pubDate>Tue, 11 Feb 2025 11:50:36 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगंबर जैन पाठशाला डडूका के बच्चों ने माघ मास के पर्यूषण पर्व के दसवें दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पर जैन भजन गायक के भजन प्रोजेक्टर पर देखे। इस अवसर पर दश धर्म आधारित टेली फिल्म भी देखी। वहीं पवित्र ग्रंथ तत्वार्थ सूत्र जो संस्कृत भाषा में रचित है, के प्रथम अध्याय को कंठस्थ कर सस्वर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>दिगंबर जैन पाठशाला डडूका के बच्चों ने माघ मास के पर्यूषण पर्व के दसवें दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पर जैन भजन गायक के भजन प्रोजेक्टर पर देखे। इस अवसर पर दश धर्म आधारित टेली फिल्म भी देखी। वहीं पवित्र ग्रंथ तत्वार्थ सूत्र जो संस्कृत भाषा में रचित है, के प्रथम अध्याय को कंठस्थ कर सस्वर पाठ किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए डडूका की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>डडूका।</strong> दिगंबर जैन पाठशाला डडूका के बच्चों ने माघ मास के पर्यूषण पर्व के दसवें दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पर जैन भजन गायक रूपेश कुमार के भजन प्रोजेक्टर पर देखे। इस अवसर पर दश धर्म आधारित टेली फिल्म देखी, तथा पवित्र ग्रंथ तत्वार्थ सूत्र जो संस्कृत भाषा में रचित है, के प्रथम अध्याय को कंठस्थ कर सस्वर पाठ किया। पाठशाला प्रेरक अजीत कोठिया ने बच्चों को पर्यूषण पर्व के दश दिवसीय आयोजन एवं दश धर्मों उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, सत्य, शौच, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य एवं उत्तम ब्रह्मचर्य पर जानकारी दी।</p>
<p><strong>पर्यूषण पर्व वर्ष में तीन बार </strong></p>
<p>पर्यूषण पर्व वर्ष में तीन बार मनाए जाते है। इस बार ये पर्व माघ शुक्ल चतुर्दशी पर संपन्न हुए। बच्चो ने सामूहिक दश लक्षण पूजा कर शांतिपाठ कर विश्व शांति की कामना की। पर्व के दौरान विमलनाथ जन्म तप कल्याणक, अजित नाथ जन्म तप कल्याणक, अभिनंदन नाथ जन्म तप कल्याणक, धर्मनाथ भगवान जन्म तप कल्याणक तथा युगाचार्य विद्या सागरजी महाराज के प्रथम समाधि दिवस पर विविध आयोजन किये गए।</p>
<p><strong>गायक रूपेश जैन ने जैन संस्कारों के संरक्षण के प्रयासों की सराहा </strong></p>
<p>आभार पाठशाला के प्रधानमंत्री रियल जैन तथा कार्यकारिणी सदस्यों हर्षल जैन, मानवी जैन, कथनी जैन, मिष्ठी जैन, निश्चल जैन, कल्प जैन, सिद्धम जैन, भाग्य जैन तथा दिव्य जैन ने किया। बच्चो को वीडियो कॉल पर प्रसिद्ध जैन भजन गायक रूपेश कुमार जैन ने मंगल आशीर्वाद दिया। रूपेश जैन ने पाठशाला प्रेरक धनपाल शाह तथा मनोज शाह द्वारा पाठशाला के माध्यम जैन संस्कारों के संरक्षण हेतु किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। सभी कार्यक्रमों का संचालन अजीत कोठिया ने किया।</p>
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