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	<title>Birth Anniversary श्रीफल जैन न्यूज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>पुण्य स्मरण दिवस को अमृत सेवा की तरह मनाएं: अमृत सप्ताह के तहत विविध सामाजिक सेवा कार्य का आग्रह  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 04 Jan 2026 14:35:36 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ 11 से 18 जनवरी तक दि. जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन के संस्थापक अध्यक्ष स्व. प्रदीपकुमार सिंह कासलीवाल की 13 जनवरी को जन्म-जयंती के पावन अवसर पर अमृत सप्ताह मनाया जाएगा। इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;  इंदौर 11 से 18 जनवरी तक दि. जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन के संस्थापक अध्यक्ष स्व. प्रदीपकुमार सिंह कासलीवाल की 13 [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> 11 से 18 जनवरी तक दि. जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन के संस्थापक अध्यक्ष स्व. प्रदीपकुमार सिंह कासलीवाल की 13 जनवरी को जन्म-जयंती के पावन अवसर पर अमृत सप्ताह मनाया जाएगा। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> इंदौर</strong> 11 से 18 जनवरी तक दि. जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन के संस्थापक अध्यक्ष स्व. प्रदीपकुमार सिंह कासलीवाल की 13 जनवरी को जन्म-जयंती के पावन अवसर पर अमृत सप्ताह मनाया जाएगा। मैं से हम की यात्रा के प्रेरक, दिगम्बर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन के संस्थापक अध्यक्ष जैनरत्न स्व. प्रदीपकुमार कासलीवाल की ’78 वीं जन्म-जयंती’ के उपलक्ष्य में 11 से रविवार 18 जनवरी तक अमृत सेवा सप्ताह के रूप में मनाकर हम सभी एक बार फिर सेवा, समर्पण एवं सामाजिक दायित्व का नया इतिहास रचेंगे। फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोहर झांझरी, महासचिव विनय जैन कोषाध्यक्ष अश्विन कासलीवाल ने समस्त सोशल ग्रुप से आह्वान किया कि</p>
<p>विगत वर्षों की भाँति इस वर्ष भी सार्थक सामाजिक एवं मानव सेवा गतिविधियों के माध्यम से पुण्य स्मरण दिवस के इस आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान करें। राजेश दद्दू ने फेडरेशन के समस्त ग्रुपों से एवं रिजन पदाधिकारियों अनुरोध किया कि वे जैनरत्न स्व. प्रदीपकुमार कासलीवाल की ’78वीं जन्म जयंती सेवा दिवस’ के अवसर पर सामाजिक सरोकार की भावना के साथ समस्त सोशल ग्रुप कम से कम एक सेवा गतिविधि अवश्य आयोजित करें,। अनाथालय, वृद्धाश्रम अथवा बाल आश्रम में सेवा, रुग्ण व्यक्तियों की सेवा एवं भोजन वितरण, अस्पतालों में रोगियों हेतु सहयोग एवं सेवा, अथवा, मानव कल्याण से जुड़ा कोई अन्य सेवा कार्य इन समस्त गतिविधियों को अमृत सेवा सप्ताह” के अंतर्गत आयोजित किया जाए।</p>
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		<title>जैनाचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की 79वीं जन्म जयंती पर विशेष : अहिंसा धर्म को हजारों हजार साल के लिए सुरक्षित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Oct 2024 05:23:25 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनि राज का नाम किसी के लिए अपरिचित नहीं है। वे स्वतंत्र भारत के एक ऐसे महान योगी, साहित्यकार, युगपुरुष, संस्कृति संरक्षक, मातृभाषा हिमायती के रूप में जाने जाते हैं। आज 17 अक्टूबर गुरुवार शरद पूर्णिमा को उनका 79वां जन्म जयंती महोत्सव सम्पूर्ण विश्व में उत्साह के साथ मनाया जाएगा। पढ़िए [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनि राज का नाम किसी के लिए अपरिचित नहीं है। वे स्वतंत्र भारत के एक ऐसे महान योगी, साहित्यकार, युगपुरुष, संस्कृति संरक्षक, मातृभाषा हिमायती के रूप में जाने जाते हैं। आज 17 अक्टूबर गुरुवार शरद पूर्णिमा को उनका 79वां जन्म जयंती महोत्सव सम्पूर्ण विश्व में उत्साह के साथ मनाया जाएगा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए ओम पाटोदी का विशेष आलेख&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनि राज का नाम किसी के लिए अपरिचित नहीं है। वे स्वतंत्र भारत के एक ऐसे महान योगी, साहित्यकार, युगपुरुष, संस्कृति संरक्षक, मातृभाषा हिमायती के रूप में जाने जाते हैं। आज 17 अक्टूबर गुरुवार शरद पूर्णिमा को उनका 79वां जन्म जयंती महोत्सव सम्पूर्ण विश्व में उत्साह के साथ मनाया जाएगा।</p>
<p><strong> जीवन वृत्त </strong></p>
<p>आचार्य श्री विद्यासागर जी का जन्म 10 अक्टूबर 1946 शरद पूर्णिमा को कर्नाटक प्रांत की पुण्य भूमि सदलगा में हुआ था। मात्र 22 वर्ष की उम्र में दिनांक 30 जून 1968 को आपने पंडित रत्न, साहित्य मनीषी, आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज से राजस्थान प्रांत के अजमेर नगर में दीक्षा ग्रहण करके दिगम्बर मुनि के रूप में साधना करने लगे। आपको 22 नवम्बर 1972 में ज्ञानसागर जी द्वारा आचार्य पद प्रदान करके अपना उत्तराधिकारी घोषित किया। आप अपनी मातृभूमि कर्नाटक से आकर राजस्थान में वैराग्य ग्रहण करके मध्य प्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र को अपनी कर्मभूमि के रूप में चुना और अपनी साधना शक्ति के माध्यम से सम्पूर्ण विश्व रूपी बगिया में आध्यात्मिक सौरभ बिखेरा। आपने अपने अंतिम समय में नवोदित तीर्थ चन्द्रगिरि डोंगरगढ़ (छत्तीसगढ़) में 18 फरवरी 2024 (मध्य रात्रि) को समाधि मरण को धारण करते हुए अपने भौतिक शरीर को त्याग दिया।</p>
<p><strong> अनासक्त योगी (वर्तमान के वर्द्धमान) </strong></p>
<p>आपने अपनी तपस्या के द्वारा जिस तेज को प्राप्त किया हर कोई आपसे प्रभावित हुए बिना नहीं रह सका जिसने भी आपके एक बार दर्शन किए वह पूरी तरह आपकी भक्ति में ही रम गया, फिर चाहे वह कितना ही बड़ा व्यक्ति क्यों ना हो। विदेशी लोग जब भी आपके संपर्क में आते उनके मुख से यह बात सुनने को मिलती थी कि हमने भगवान के बारे में सुना था आज साक्षात् भगवान के दर्शन किए हैं। यह सब उनकी तपस्या का ही सफल था। हम सबको भगवान वर्धमान महावीर को तो नहीं देखने का अवसर प्राप्त हुआ परंतु आचार्य विद्यासागर जी के रूप में वर्तमान के वर्धमान के दर्शन का सौभाग्य जरूर प्राप्त किया है।</p>
<p><strong> सच्चा भारत रत्न </strong></p>
<p>अपने भारतीय संस्कृति की पुनः स्थापना का जो बीड़ा उठाया उसके अंतर्गत आपने कई ऐसे महान प्रकल्पों की रूप रेखा समाज के सामने रखी और आपकी प्रेरणा से वे सब प्रकल्प आज संपूर्ण देश में अपना सौरभ बिखेर रहे हैं। यहां तक की भारत सरकार भी उन प्रकल्पों में अपनी सहभागिता प्रकट करके अपने आप को गौरवान्वित मानती है।</p>
<p><strong> दूरदृष्टा और महान संस्कृति निर्माता </strong></p>
<p>सुरक्षित एवं सांस्कृतिक कन्या शिक्षा के लिए प्रतिभास्थली, स्वावलंबन के लिए हथकरघा, स्वदेशी चिकित्सा को बढ़ाओ देने के लिए पूर्णायु व भाग्योदय जैसे चिकित्सा संस्थान, राष्ट्रभाषा हिन्दी के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों में पूर्ण विशुद्ध हिंदी पाठ्यक्रम की प्रेरणा, जीव रक्षा के लिए दयोदय महासंघ (गौशाला) जैसे कई प्रकल्पों की प्रेरणा देकर भौतिक संसाधनों और पश्चिमी प्रभाव से मुक्त करते हुए प्राचीन भारतीय संस्कृति की पुनः स्थापना के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। इन सभी प्रकल्पों के सुव्यवस्थित वृद्धिगत होने पर इसके सुपरिणाम हमें निकट भविष्य में देखने को मिलेंगे।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-68545" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241017-WA0005.jpg" alt="" width="880" height="1599" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241017-WA0005.jpg 880w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241017-WA0005-165x300.jpg 165w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241017-WA0005-564x1024.jpg 564w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241017-WA0005-768x1395.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241017-WA0005-845x1536.jpg 845w" sizes="(max-width: 880px) 100vw, 880px" /> महान संघ नायक </strong></p>
<p>आध्यात्मिक चेतना को विकसित और सुरक्षित समवर्ती करने के लिए आपने सैकड़ो जिन मंदिर का जीर्णोद्धार एवं नव तीर्थ की स्थापना का की प्रेरणा देकर अहिंसा धर्म को हजारों हजार साल के लिए सुरक्षित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया अपने न सिर्फ अचेतन तीर्थ हो बल्कि सैकड़ों चेतन तीर्थ को भी बनाया जो वर्तमान में संपूर्ण भारतवर्ष ही नहीं विदेशों में भी अपने प्रतिभा का सौरभ बिखेर रहे हैं। वर्तमान में आपके द्वारा दीक्षित 130 दिगम्बर जैन मुनिगण , 172 आर्यिका माताजी, 20 ऐलकगण,14 क्षुल्लकगण और हजारों ब्रह्मचारी भैय्या और ब्रह्मचारी बहिनें सर्वत्र अहिंसा धर्म का डंका बजा रहे हैं।</p>
<p><strong> अनुठा परिवार </strong></p>
<p>आपके पिता श्री मल्लप्पा थे जो बाद में मुनि मल्लिसागर बने एवं माता श्रीमंती थी जो बाद में आर्यिका समयमति बनी। वही आपके भाई अनंतनाथ और शांतिनाथ ने आपसे से दीक्षा ग्रहण की और मुनि योगसागर और मुनि समयसागर के रूप में प्रसिद्ध हुए हाल ही में आपके बङे भाई ने भी आपसे दीक्षा लेकर मुनि उत्कृष्ट सागर जी महाराज के रूप में साधनारत है। इस प्रकार घर के लोग संन्यास ले चुके हैं। इस परिवार का यह अनुपम और अनुठा कार्य सर्व जन के अनुकरणीय है।</p>
<p><strong> अनोखा कीर्तिमान </strong></p>
<p>आपकी अद्भुत अनुपम प्रतिभा के महत्व को समझते हुए भारत सरकार के भारतीय डाक विभाग द्वारा आपके 50वें दीक्षा वर्ष (संयम स्वर्ण महोत्सव) (वर्ष 2017-18) एवं 50 में आचार्य पद पदारोहण समारोह (संस्कृति शासनाचार्य स्वर्ण महोत्सव) (वर्ष 2021-22) देश के हर कोने कोने से सैकड़ो विशेष आवरण जारी किए। किसी संत पर इतनी अधिक संख्या में जारी विशेष आवरण का अनूठा कीर्तिमान बन गया।</p>
<p><strong> भारत रत्न अलंकरण व डाक टिकट सिक्के जारी हो </strong></p>
<p>भारत सरकार आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनि राज के देश की सांस्कृतिक मूल्यों को पुनर्जीवित करने के लिए आपके द्वारा किए गए अद्भुत अविस्मरणीय अद्वितीय कार्यो को देखते हुए आपके प्रथम समाधि दिवस 18 फरवरी 2025 को भारत रत्न अलंकरण की घोषणा करते हुए आप की स्मृति को चिरस्थाई बनाने के लिए सिक्के और आपके कार्य को रेखांकित करते हुए डाक टिकटों की श्रृंखला जारी करने का उपक्रम करें तो यह उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। वही पारस वीर सदी की एक उपलब्धि होगी।हालांकि दिगम्बर संत अलंकरण, मान प्रतिष्ठा, सम्मान आदि से बहुत दूर रहते हैं, वे इनको स्विकार भी नहीं करते हैं क्योंकि वे तो इसे भी परिग्रह की श्रेणी में रखते है। वहीं आचार्य श्री ने तो अपने अंतिम समय में अपना आचार्य पद भी त्याग कर समाधि का आश्रय लिया था, परंतु उनके भक्तों की यह भावना है कि सरकार इसे क्रियान्वित करके अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर सकती है।</p>
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		<title>संत निलय में हुआ भव्य रूप में पंचामृत अभिषेक व पूजन : नगर गौरव आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का 75वां वर्षवर्धन दिवस मनाया  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/75th_anniversary_of_acharya_shri_vardhman_sagar_maharaj_celebrated/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 10 Sep 2024 16:46:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[20 वी सदी के प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परम्परा के पंचम पट्टाधिश राष्ट्र गौरव वात्सल्य वारिधि  तपोनिधि 108 आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी का आज सनावद नगर में 75वां वर्ष वर्धन दिवस बड़ी धूमधाम एवं भक्ति भाव से मनाया गया। पर्युषण पर्व के तृतीय दिवस भादव सुदी सप्तमी की पावन बेला के अवसर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>20 वी सदी के प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परम्परा के पंचम पट्टाधिश राष्ट्र गौरव वात्सल्य वारिधि  तपोनिधि 108 आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी का आज सनावद नगर में 75वां वर्ष वर्धन दिवस बड़ी धूमधाम एवं भक्ति भाव से मनाया गया। पर्युषण पर्व के तृतीय दिवस भादव सुदी सप्तमी की पावन बेला के अवसर पर प्रातः सर्वप्रथम बड़ा जैन मंदिर व संत निलय में भव्य रूप में पंचामृत अभिषेक व पूजन सभी भक्तों के द्वारा बहुत ही भक्ति भाव से किया गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सन्मति जैन काका की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> 20 वी सदी के प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परम्परा के पंचम पट्टाधिश राष्ट्र गौरव वात्सल्य वारिधि  तपोनिधि 108 आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी का आज सनावद नगर में 75वां वर्ष वर्धन दिवस बड़ी धूमधाम एवं भक्ति भाव से मनाया गया। पर्युषण पर्व के तृतीय दिवस भादव सुदी सप्तमी की पावन बेला के अवसर पर प्रातः सर्वप्रथम बड़ा जैन मंदिर व संत निलय में भव्य रूप में पंचामृत अभिषेक व पूजन सभी भक्तों के द्वारा बहुत ही भक्ति भाव से किया गया। इस अवसर पर  शांति धारा करने का सौभाग्य सुधीर कुमार चौधरी परिवार को प्राप्त हुआ।</p>
<p>इस अवसर पर नगर में चातुर्मासरत आर्यिका सरस्वती माताजी ससंघ के सानिध्य में वृहद स्तर पर प्रथम बार मुनि हितेंद्र सागर जी महाराज द्वारा रचित आचार्य श्री वर्धमान सागर विधान का आयोजन किया गया, जिसमें प्रमुख सौधर्म इंद्र इंद्राणी बनने का सौभाग्य हितेश मेघा पांड्या अमर ज्योति बस परिवार को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर आर्यिका अनंतमति माताजी ने अपनी गुरु के प्रति अपनी विनियांजली प्रकट करते हुए कहा कि सनावद नगरी बहुत ही पुण्यशाली नगरी है जहां आज इतने बड़े आचार्य का जन्म हुआ। जो आज भी 20वी सदी के प्रथमाचार्य आचार्य श्री 108 शान्ति सागर जी महाराज की परंपरा का निर्वहन भली भाति रूप से कर रहे हैं। ऐसे गुरु बिरले होते है।</p>
<p>किस प्रकार समर्पण का भाव होना चाहिए, किस प्रकार आचार्य श्री आज भी अपने गुरुदेव की चर्या का निर्वहन कर रहे हैं वो आचार्य श्री से ही देखने को मिलती हे। इसी कड़ी में दोपहर में आर्यिका माताजी के सानिध्य में जिनवाणी पूजन करवाई गई। जिसका सौभाग्य कुसुमकुमार जैन काका एवं रेखा राकेश जैन परिवार को प्राप्त हुआ। अगली कड़ी में शाम को श्रीजी की एवं आचार्य श्री की 75 दीपों से मंगल आरती की गई। प्रशांत चौधरी, प्रांशुल पंचोलिया, संगीता पाटोदी, पूर्णिमा जैन द्वारा भव्य भक्ति व आरती प्रस्तुत की गई।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-65889" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240910-WA0055.jpg" alt="" width="1280" height="576" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240910-WA0055.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240910-WA0055-300x135.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240910-WA0055-1024x461.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240910-WA0055-768x346.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240910-WA0055-990x446.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />आचार्य श्री वर्धमान सागर जी  महाराज का जीवन परिचय</strong></p>
<p>जैसा की ज्ञात हों की भरत चक्रवती के नाम पर अवतरित भारत देश मे राज्य मध्यप्रदेश में कई भव्य आत्माओं ने अवतरित होकर श्रमण मार्ग अपनाया है।</p>
<p>इसी राज्य खरगौन जिले के सनावद नगर जो कि सिद्ध क्षेत्र श्री सिद्धवरकूट श्री सिद्धक्षेत्र पावा गिरी ऊन श्री सिद्ध क्षेत्र चूल गिरी बावनगजा बड़वानी के निकट है।</p>
<p>इन सिद्ध क्षेत्रों से करोड़ों मुनि मोक्ष गए हैं। ऐसी पवित्र नगरी सनावद में पर्युषण पर्व के तृतीय दिवस उत्तम आर्जव दिवस पर एक प्रतिभा शाली कुल परिवार नगर का मान बढ़ाने वाले यशस्वी बालक का जन्म माता श्रीमती मनोरमा देवी की उज्जवल कोख से प्रसवित हुआ। आपके पिता श्री कमल चंद जी थे। 18 सितम्बर 1950 भादव शुक्ला 7 सप्तमी संवत 2006  को अवतरित होनहार भाग्यशाली पुत्र यशवंत कुमार के रूप में जन्म लिया। आप ने सन 1967 में श्री मुक्तागिरी सिद्ध क्षेत्र में आर्यिका श्री ज्ञानमति माताजी से आजीवन शूद्र जल त्याग और  5 वर्ष का ब्रह्मचर्य व्रत लिया। आप ने 18 वर्ष की उम्र में ही मुनि दिक्षा ग्रहण कर ली थी। कर्नाटक प्रांत के श्रवणबेलगोला 12 वर्षों में एक बार होने वाले महामस्तकाभिषेक में आप ने तीसरी बार अपना सानिध्य प्रधान किया है ।जो की अपने आप में बहुत ही आलौकिक एवं गर्व की बात है। आप अभी राजस्थान की पावन धरा पारसोला मेंअपने विशाल संघ सहित विराजमान हैं जो कि सनावद के लिए बहुत गर्व की बात है। इस अवसर पर कुसुम कुमार, हेमेंद्र कुमार, सन्मति जैन काका परिवार द्वारा प्रभावना वितरण वितरित की गई। इस अवसर पर सभी समाज जनों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई।</p>
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		<title>आचार्य शांतिसागर महाराज की 152वीं जन्म जयंती मनाई : संघ चैत्यालय में श्रीजी के पंचामृत अभिषेक व शांति धारा सहित हुई अनेक कार्यक्रम </title>
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		<pubDate>Sun, 11 Jun 2023 10:02:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी गुरुदेव की 152वीं जन्म जयंती के पावन अवसर पर अहमदाबाद में ससंघ विराजमान गणिनी आर्यिका रत्न श्री सुभूषण मति माताजी के पावन निर्देशन व सानिध्य में संघ चैत्यालय में श्रीजी के पंचामृत अभिषेक व शांति धारा के पश्चात चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी आचार्य का पंचामृत अभिषेक कर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी गुरुदेव की 152वीं जन्म जयंती के पावन अवसर पर अहमदाबाद में ससंघ विराजमान गणिनी आर्यिका रत्न </strong><strong>श्री सुभूषण मति माताजी के पावन निर्देशन व सानिध्य में संघ चैत्यालय में श्रीजी के पंचामृत अभिषेक व शांति धारा के पश्चात चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी आचार्य का पंचामृत अभिषेक कर महा पूजा की गई। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर/ अहमदाबाद।</strong> चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी गुरुदेव की 152वीं जन्म जयंती के पावन अवसर पर अहमदाबाद में ससंघ विराजमान गणिनी आर्यिका रत्न श्री सुभूषण मति माताजी के पावन निर्देशन व सानिध्य में संघ चैत्यालय में श्रीजी के पंचामृत अभिषेक व शांति धारा के पश्चात चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी आचार्य का पंचामृत अभिषेक कर महा पूजा की गई। इस अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए आर्यिका श्री ने कहा कि आचार्य भगवन अडिग विश्वास के धनी थे।</p>
<p>ब्रिटिश गवर्नमेंट के समय जब जिन मंदिरों को सार्वजनिक आराधना स्थल घोषित कर दिया गया था, तब आचार्य भगवान शांति सागर जी ने 1105 दिन अनाज का त्याग कर दिया। आखिरकार सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ा और हाईकोर्ट से निर्णय हुआ कि जिन मंदिर जैनियों के ही आराधना स्थल हैं। उन्हीं का उपकार है कि आज हम अपने मंदिरों में पूजन-आराधना कर पाए रहे हैं।</p>
<p>आचार्य श्री ने दिगंबर संतों के विचरण पर प्रतिबंध होने पर भी अपनी चर्या से शासकों का मन द्रवित कर दिगंबर परम्परा को जीवन्त किया। आचार्य भगवान का श्रमण जीवन उत्कृष्ट श्रमणाचार्य तो गृहस्थ जीवन उत्कृष्ट श्रावकाचार था। गृहस्थ अवस्था में खेत पर जाते तो पक्षियों से पीठ करके बैठ जाते और दाने के साथ-साथ पानी की भी व्यवस्था कर देते थे। गुरु का संपूर्ण जीवन कथनी नहीं, कृतित्व से भरा पड़ा है।</p>
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