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	<title>Bhagwan Aadinath &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>सात पीढ़ीयों को तारने वाली नारी सम्मान की यह परंपरा विश्व समाज के लिए बनेगी प्रेरणा-आचार्य 108 श्री विप्रणत सागरजीः नेसी मातृशक्ति को दिया ब्राह्मी सुंदरी संस्कार अलंकरण </title>
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		<pubDate>Fri, 31 Jan 2025 12:42:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बड़वानी के सतपुड़ा की तलहटी में बसा बावनगजा इन दिनों धर्म, संस्कृति, अध्यात्म और सेवा-समर्पण का केंद्र बना हुआ है। यहां विराजित 1008 श्री भगवान आदिनाथजी की 52 गज की प्रतिमा विश्व प्रसिद्ध है एवं जैन धर्मावलंबियों की अटूट आस्था का केंद्र है। यहां 28 जनवरी से दो दिवसीय वार्षिक मेले का आयोजन आचार्यश्री विप्रणत [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>बड़वानी के सतपुड़ा की तलहटी में बसा बावनगजा इन दिनों धर्म, संस्कृति, अध्यात्म और सेवा-समर्पण का केंद्र बना हुआ है। यहां विराजित 1008 श्री भगवान आदिनाथजी की 52 गज की प्रतिमा विश्व प्रसिद्ध है एवं जैन धर्मावलंबियों की अटूट आस्था का केंद्र है। यहां 28 जनवरी से दो दिवसीय वार्षिक मेले का आयोजन आचार्यश्री विप्रणत सागरजी के सानिध्य में प्रारंभ हुआ। आचार्यश्री ने अपने आशीर्वचन में श्री बावनगजा ट्रस्ट कमेटी के इस बहुत ही पुनीत कार्य की मुक्त कंठ से सराहना की। आचार्यश्री ने कहा एक नारी पढ़ेगी तो सात पीढ़ी तरेगी। आप सभी को बहुत मंगल आशीर्वाद देता हूं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए बड़वानी से दीपक प्रधान की की यह पूरी खबर&#8230; </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बडवानी।</strong> मध्य प्रदेश के जिला बड़वानी के सतपुड़ा की तलहटी में बसा बावनगजा इन दिनों धर्म, संस्कृति, अध्यात्म और सेवा-समर्पण का केंद्र बना हुआ है। आचार्यश्री ने अपने आशीर्वचन में श्री बावनगजा ट्रस्ट कमेटी के इस बहुत ही पुनीत कार्य की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए कहा कि आपने बहुत देर कर दी। अब तक इस आयोजन का शताब्दी वर्ष हो जाना चाहिए था, पर अब कभी भूलकर भी देर ना करना और नारी सम्मान के इस आयोजन को अनवरत कमेटी के माध्यम से जारी रखना। आचार्यश्री ने कहा सात पीढ़ीयों को तारने वाली नारी सम्मान की इस परंपरा के लिए वर्तमान की श्री बावनगजा ट्रस्ट कमेटी विश्व समाज के सामने प्रेरणा बनी हैं।</p>
<p><strong>धर्म, संस्कृति, अध्यात्म का परिचायक रहा वार्षिकोत्सव</strong></p>
<p>इस वार्षिक महामस्तकाभिषेक में न केवल देश बल्कि विश्वभर के समाजजनों का महाकुंभ लगा हुआ है। लगभग 1000 वर्ष के इतिहास से चली आ रही वार्षिक महामस्तकाभिषेक की परंपरा निमाड़ ही नहीं संपूर्ण देश के लिए आकर्षण एवं धर्म प्रभावना का महोत्सव रही है, यूं तो 12 वर्ष में एक बार बड़े मेले का आयोजन होता है पर वार्षिक आयोजन भी अपना एक विशेष महत्व रखता है।</p>
<p><strong>महिला सशक्तिकरण का फैल रहा उजास</strong></p>
<p>वार्षिक महोत्सव को लेकर जैन समाजजनों उमंग-उत्साह के साथ शामिल हुए है। प्रथम दिवस 27 जनवरी को प्रातः श्री भक्तामरजी का विधान पूजन एवं आचार्य श्रीजी की आहार चर्या के बाद जैन समाज की प्रतिभाशाली महिलाओं को जो कि अपनी मेहनत समर्पण एवं अपनी विद्वता से राष्ट्रीय स्तर पर जैन समाज का परचम फहरा रही है। उन महिलाओं को ब्राह्मी सुंदरी संस्कार अलंकरण समारोह में अलंकृत किया गया, जिससे यह मेला महिला सशक्तिकरण का उजास फैलाने वाला रहा।</p>
<p><strong>ब्राह्मी सुंदरी संस्कार अलंकरण से अलंकृत किया </strong></p>
<p>भगवान श्री आदिनाथ ने अपने दोनों पुत्रियां ब्राह्मी एवं सुंदरी को प्रथम बार अंक एवं लिपि विद्या सिखाकर नारी समाज को विशेष सम्मानित स्थान दिया एवं विश्व समाज को नारी सम्मान की प्रेरणा दी, इसी प्रेरणा के साथ भगवान आदिनाथ जी के चरणों में समर्पित श्री बावनगजा ट्रस्ट कमेटी ने प्रथम बार अपने मंच से जैन समाज का परचम फहराने वाली जैन समाज के विभिन्न संगठनों की महिला प्रमुख को ब्राह्मी सुंदरी संस्कार अलंकरण से अलंकृत किया।</p>
<p><strong>नारी शक्ति अपनी ताकत और हुनर को पहचाने</strong></p>
<p>समारोह की मुख्य अतिथि भारत सरकार के नीति आयोग की सदस्य अर्चना जैन ने कहा नारी शक्ति को भीड़ से हटकर अपनी योग्यता के अनुसार अपनी ताकत और हुनर को पहचान कर एक मुकाम हासिल करने का आह्वान किया। उन्होंने जैन नारियों को राजनीति में अपना स्थान बनाने के लिए प्रेरित किया एवं सम्पूर्ण जैन समाज को एकता के सूत्र बंधने का निवेदन किया और अपने नाम के आगे जैन लिखने का संकल्प दिलवाया।</p>
<p><strong>प्राचीन लिपियों का करें संरक्षण  </strong></p>
<p>आयोजन में सम्मानित होने वाली राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षाविद डॉक्टर संगीता विनायका ने भगवान आदिनाथ की पुत्री ब्राह्मी एवं सुंदरी को प्राप्त अंक एवं लिपि विद्या को वर्तमान की शिक्षण व्यवस्था की नींव बताकर प्राचीन लिपियों के संरक्षण की बात कही। प्रसिद्ध महिला उद्यमी समाजसेवी सुजाता निरंजन शाह पुणे ने अपना अनुभव बताते हुए कहा कैसे संघर्षों में भी धैर्य रखकर कठिन परिश्रम के द्वारा विजयी हुआ जा सकता है और अपने परिवार और समाज में एक मिसाल कायम करी जा सकती है।</p>
<p><strong>राजनेता की शक्ति समाजहित के लिए जरुरी</strong></p>
<p>भारतवर्ष दिगंबर जैन खंडेलवाल महासभा के अध्यक्ष साधना दगडे ने बताया कि एक राजनेता के हाथ की शक्ति समाज हित के लिए आवश्यक है, इसलिए जैन नारी भी राजनीति में आगे आए और जो पहले से राजनीति में है वह समाज के लिए रोल मॉडल बने। जैन महिला संगठन की अध्यक्षता रेखा पतंगिया ने जैन पाठशाला का महत्व बताते हुए लौकिक शिक्षा के साथ धार्मिक शिक्षा को ग्रहण करने पर जोर दिया।</p>
<p><strong>अल्पसंख्यक अधिकारों की जानकारी दी</strong></p>
<p>राष्ट्रीय जैन पत्रकार संघ की महामंत्री एवं मोटिवेशनल स्पीकर डॉक्टर प्रगति जैन ने हमारे अल्पसंख्यक अधिकारों के बारे में विस्तार से बताया एवं उनके प्रति जागरूक होने पर जोर दिया। ग्लोबल महासभा की अध्यक्ष एवं मध्य प्रदेश मीडिया फाउंडेशन की महासचिव रुचि चोविश्या ने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए बताया जिस तरह रानी पद्मिनी ने सोनागिरी जी की सुरक्षा और व्यवस्था का दायित्व संभाला था, उसी तरह प्रत्येक जैन नारी को अपने तीर्थ क्षेत्र की व्यवस्था विकास और रक्षा में आगे आना चाहिए।</p>
<p><strong>पदासीन महिलाओं ने अपने विचार व्यक्त किए</strong></p>
<p>मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के जॉइंट सेक्रेटरी जैसे बहुत ही महत्वपूर्ण पद पर आसीन प्रथम जैन महिला सिद्दायनी पाटनी ने खेल का जीवन में महत्व बताते उसे हुए उम्र के दायरे से दूर रखने की सलाह दी। श्रेष्ठ लेखिका प्रधान संपादिका विदुषी उषा पाटनी ने जैन रीति-रिवाज एवं लुप्त होती परंपराओं को जीवंत रखने एवं बाद संस्कृति से प्रभावित कुरीतियों को रोकना समाज हित में बताया, गर्भ संस्कार प्रेरक ममता खासगीवाल ने गर्भ में पल रहे शिशु के संस्कारों पर प्रकाश डाला।जैन एकता मंच राष्ट्रीय की राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष विनीताजी जैन दिल्ली ने ट्रस्ट कमेटी को बधाई देते हुए कहा आप का यह प्रयास आने वाली पीढ़ी के लिए भी प्रेरणा बना है!</p>
<p><strong>समाज की महिलाएं बहुमुखी योग्यता का फहरा रही परचम</strong></p>
<p>ट्रस्ट कमेटी के अध्यक्ष विनोद दोशी एवं सभी ट्रस्टी ने सपत्नी बहुप्रतिक्षित ब्राह्मी सुंदरी संस्कार अलंकरण से अतिथियों को प्रशस्ति-पत्र मोमेंटो देकर आचार्य विप्रणत सागर के मंगल सानिध्य अति उत्साह के साथ अलंकृत किया, अध्यक्ष विनोद दोशी ने कहा महिला अपने जीवन में विविध भूमिकाओं को निभाते हुए समाज धर्म एवं देश के उत्थान लिए कार्य कर अपनी बहुमुखी योग्यता प्रतिभा का परचम फहरा रही है, जिसके लिए सभी की बहुत.बहुत अनुमोदना कर अनंत बधाई दी। मुख्य अतिथि भारत सरकार नीति आयोग सदस्य अर्चना जैन से बावनगजाजी के चहुंतरफा विकास के लिए एवं आगामी बड़े मेले के लिए आवश्यक सुविधाओं के लिए सरकार से सहयोग की अपेक्षा रखी।</p>
<p><strong>आचार्यश्री के चित्र का अनावरण एवं द्वीप प्रज्वलन </strong></p>
<p>आचार्यश्री विद्यासागरजी के चित्र का अनावरण एवं द्वीप प्रज्जवलन समस्त अतिथियों ने किया एवं मंगलाचरण बावनगजा ट्रस्ट द्वारा संचालित छात्रावास के बच्चों ने किया। निमाड़ अंचल महिला मंडल अध्यक्ष सोनल आशीष गंगवाल ने स्वागत भाषण दिया।</p>
<p><strong>प्रथम महिला ट्रस्टी होने का सम्मान व सौभाग्य मिला</strong></p>
<p>मेले में महिलाओं को मिला सम्मान ऐतिहासिक अलंकरण कार्यक्रम संयोजक बरखा विवेक बडज़ात्या बाकानेर ने आभार प्रदर्शित करते हुए कहा कि हमारे लिए बहुत ही गर्व की बात है कि वर्तमान की श्रीं बावनगजा ट्रस्ट कमेटी ही एक ऐसी ट्रस्ट कमेटी है, जिसने प्रथम बार महिलाओं को इस बड़े मंच से सम्मानित किया। यही नहीं मुझे प्रथम महिला ट्रस्टी के रूप में नामांकित किया एवं समस्त निमाड़ एवं मालवा के स्नेह एवं विश्वास ने एकमात्र महिला ट्रस्टी बनने का सौभाग्य दिया साथ ही आपके इस ऋण को चुकाने का अवसर मुझे इस ऐतिहासिक सम्मान समारोह के संयोजन से मिला। मैं ही नहीं हम सभी यहां बहुत गौरवान्वित महसूस कर रही है, कि अपनी योग्यता का राष्ट्रीय स्तर पर परचम फहराने वाली महिला शक्तियों को यहां सम्मानित किया जा रहा है। आचार्यश्री विप्रणत सागरजी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि आपने इस समारोह को परंपरा के रूप में अपनाने का आवाहन किया।</p>
<p><strong>शास्त्रों को सुसज्जित करने पर हुए पुरस्कृत</strong></p>
<p>क्षेत्र के शास्त्र को सुसज्जित एवं व्यवस्थित करने के उद्देश्य से साथ शास्त्र सजाओ प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। इसके संयोजक किरण दोशी बाकानेर, श्वेता भुज सनावद, नमी पहाडिय़ा बड़वानी, प्रमिला गंगवाल सिंघाना एवं निर्णायक नमिता जैन इंदौर, रेखा पतंगिया इंदौर का आभार व्यक्त किया। शास्त्र सजाओ प्रतियोगिता के विजेता प्रथम सलोनी गंगवाल सिंघाना द्वितीय खुशबू जैन बाकी तृतीय निधि गंगवाल सिंघाना को पुरस्कृत किया गया एवं पार्टिसिपेंट्स को सांत्वना पुरस्कार दिये गए।</p>
<p><strong>आभार व्यक्त किया</strong></p>
<p>लकी ड्रा के संयोजक रचना रावका मनावर, लेखमाला जैन सनावद, पारस गोधा का भी आभार प्रदर्शन किया एवं विजेता सरिता जैन इंदौर, नेहा बडज़ात्या मनावर, पारस गोधा बाकी, अचला वेद बड़वानी को बधाई दी। समस्त निमाड़ महिला मंडल सदस्यों एवं समस्त गणमान्यजनों का आभार प्रदर्शन कर समस्त उपस्थिति बहुत ही आदरणीय अतिथियों के प्रति आभार प्रदर्शन किया! संचालन रश्मि बकलीवाल इंदौर ने किया।</p>
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		<title>श्री विप्रणत सागरजी के सानिध्य में बावनगजा सिद्ध क्षेत्र के वार्षिक मेले में भव्य महिला सम्मेलनः ब्राह्मी सुंदरी अलंकरण से सम्मानित होंगी महिला संगठन </title>
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		<pubDate>Thu, 23 Jan 2025 11:58:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री विप्रणत सागरजी महाराज के सानिध्य में आगामी माघ कृष्ण त्रयोदशी और चतुर्दशी को जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के मोक्ष कल्याणक और मस्तकाभिषेक होगा। इस अवसर पर बावनगजा ट्रस्ट द्वारा इतिहास में पहली बार महिला सम्मान समारोह और ब्राह्मी सुंदरी संस्कार अलंकरण समारोह आयोजित किया जा रहा है। पढ़िए बड़वानी से मनीष [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री विप्रणत सागरजी महाराज के सानिध्य में आगामी माघ कृष्ण त्रयोदशी और चतुर्दशी को जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के मोक्ष कल्याणक और मस्तकाभिषेक होगा। इस अवसर पर बावनगजा ट्रस्ट द्वारा इतिहास में पहली बार महिला सम्मान समारोह और ब्राह्मी सुंदरी संस्कार अलंकरण समारोह आयोजित किया जा रहा है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए बड़वानी से मनीष जैन की यह पूरी खबर&#8230; </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बड़वानी।</strong> आगामी 27 व 28 जनवरी माघ कृष्ण त्रयोदशी और चतुर्दशी को जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के मोक्ष कल्याणक और मस्तकाभिषेक के अवसर पर परम पूज्य आचार्य श्री विप्रणत सागरजी महाराज का सानिध्य प्राप्त होगा। इस अवसर पर दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र बावनगजा ट्रस्ट द्वारा इतिहास में पहली बार महिला सम्मान समारोह और ब्राह्मी सुंदरी संस्कार अलंकरण समारोह आयोजित किया गया है। इस महिला सम्मेलन हेतु ट्रस्ट कमेटी ने एक मात्र महिला ट्रस्टी बरखा बडजात्या को संयोजक मनोनीत किया है।</p>
<p><strong>भगवान आदिनाथ ने ही महिला सशक्तिकरण को प्रोत्साहन दिया</strong></p>
<p>बरखा बडजात्या ने बताया कि भगवान आदिनाथ ने सबसे पहले महिला समाज पर महती अनुकम्पा की और सबसे पहले अपनी दोनों बेटियों ब्राह्मी और सुंदरी को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित कर अंक अक्षर और शिल्प कला सिखलाई। सर्वप्रथम भगवान आदिनाथ ने ही महिला सशक्तिकरण को प्रोत्साहन देकर प्रगति के पथ पर अग्रसर किया और प्रेरक बने। सभी पर कृपा की, उसी प्रेरणा के साथ दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र बावनगजा ट्रस्ट कमेटी द्वारा वार्षिक मेले और मस्तकाभिषेक के अवसर पर इतिहास में पहली बार जैन समाज की समाज सेवी महिला शक्ति और संगठन को अपने मंच पर सम्मानित करेगा।</p>
<p><strong>ब्राह्मी सुंदरी अलंकरण </strong></p>
<p>दीपक प्रधान ने बताया कि ये आयोजन 27 जनवरी को दोपहर 1 बजे बावनगजा सिद्ध क्षेत्र पर आयोजित किया जाएगा और ब्राह्मी सुंदरी अलंकरण से सम्मानित किया जाएगा। जिसमें देश-प्रदेश की समाज सेवी महिलाएं और समाज सेवी संस्थाएं और संगठन सम्मिलित होंगे। इस कार्यक्रम में पश्चिमी निमाड़, पूर्वी निमाड़, मालवा और देश-प्रदेश से शामिल होंगे। ये अनूठा कार्यक्रम बावनगजा ट्रस्ट के इतिहास में प्रथम बार आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के विशेष अतिथि के रूप में भारत में नीति आयोग की प्रथम महिला सदस्य अर्चना जैन विशेष रूप से उपस्थित रहेंगी।</p>
<p><strong>आचार्य श्री विप्रणत सागरजी के सानिध्य में</strong></p>
<p>ट्रस्ट कमेटी के अध्यक्ष विनोद दोशी, बाकानेर ने बताया कि इस वार्षिक मेले और महिला सम्मेलन में आचार्य श्री विप्रणत सागरजी अपना मंगल सानिध्य और आशीर्वाद प्रदान करेंगे। साथ ही साधर्मी लोगों से अपील की है कि इस महोत्सव में शामिल होकर अपने जीवन को सफल बनाए। ट्रस्ट कमेटी द्वारा यात्रियों के लिए आवास और भोजन व्यवस्था क्षेत्र पर रखी गई है। यह कार्यक्रम का आयोजन ट्रस्ट कमेटी द्वारा आयोजित किया गया है।</p>
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		<title>जैनत्व को सही पहचान दिलाए भगवान आदिनाथ का निर्वाणोत्सव मनाएः राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ भारत ने किया आह्वान  </title>
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		<pubDate>Fri, 17 Jan 2025 10:20:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभनाथ का निर्वाण कल्याणक भारतवर्षीय जैन समाज आवश्यक रूप से धूमधाम से मनाए। वास्तविक रूप से जैन धर्म अनाधि निधन धर्म है और वर्तमान काल में प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ से जैन धर्म का प्रादुर्भाव हुआ है। स्वरूप आदिनाथ जिनालय छत्रपति नगर में सांय भक्तामर महाअर्चना 48 दीपों के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभनाथ का निर्वाण कल्याणक भारतवर्षीय जैन समाज आवश्यक रूप से धूमधाम से मनाए। वास्तविक रूप से जैन धर्म अनाधि निधन धर्म है और वर्तमान काल में प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ से जैन धर्म का प्रादुर्भाव हुआ है। स्वरूप आदिनाथ जिनालय छत्रपति नगर में सांय भक्तामर महाअर्चना 48 दीपों के साथ आयोजित किया जा रहा है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए जिन शासन एकता संघ के राजेश जैन दद्दू द्वारा इंदौर की पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ भारत ने आह्वान किया है की जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभनाथ का निर्वाण कल्याणक भारतवर्षीय जैन समाज आवश्यक रूप से धूमधाम से मनाए। जिन शासन एकता संघ के दद्दू एवं मयंक जैन, राकेश जैन एवं वरिष्ठ समाजसेवी डॉ जैनेन्द्र जैन ने बताया की वास्तविक रूप से जैन धर्म अनाधि निधन धर्म है और वर्तमान काल में प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ से जैन धर्म का प्रादुर्भाव हुआ है। अतः जैनत्व को सही पहचान दिलाने के लिए आदिनाथ भगवान के जन्म व निर्वाण कल्याणक पर भारतवर्षीय समग्र जैन समाज को आवश्यक रूप से मनाना चाहिए।</p>
<p><strong>आदिनाथ का निर्वाण कल्याणक बड़ी धूम-धाम से मनाएं </strong></p>
<p>आगामी 28 जनवरी मंगलवार को भगवान आदिनाथ का निर्वाण कल्याणक बड़ी धूम-धाम व भक्ति-भाव के साथ मनाए और उसी दिवस अपने अपने शहर के जिन मंदिर में शाम को जिन बिम्ब के समक्ष दीपोत्सव आदिनाथ भगवान की भक्ति स्वरूप भक्तामर मण्डल दीप अर्चना कर मनाए ।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-72558" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250117-WA0012.jpg" alt="" width="948" height="1280" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250117-WA0012.jpg 948w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250117-WA0012-222x300.jpg 222w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250117-WA0012-758x1024.jpg 758w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250117-WA0012-768x1037.jpg 768w" sizes="(max-width: 948px) 100vw, 948px" />सार्वजनिक अवकाश हेतु ज्ञापन देकर पुरजोर माँग करें </strong></p>
<p>विश्व जैन संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय जैन, दिल्ली ने भारतवर्षीय जैन समाज से अपील की है कि सभी समाजजन अपने स्तर पर केंद्र व राज्य सरकार के नाम आदिनाथ भगवान जन्मकल्याणक पर सार्वजनिक अवकाश हेतु ज्ञापन आदि देकर अवकाश की पुरजोर माँग करें। आदिनाथ दिगंबर जैन धार्मिक परमार्थिक ट्रस्ट छत्रपति नगर के अध्यक्ष भूपेंद्र जैन, कमल जैन विपुल बांझल, निलेश जैन एवं परवार समाज महिला संगठन की अध्यक्ष मुक्ता जैन, सारिका जैन, सीमा रावत, रजनी जैन, मनीषा जैन के अनुसार छत्रपति नगर स्थित तीर्थ स्वरूप आदिनाथ जिनालय छत्रपति नगर में 28 जनवरी मंगलवार को सांय भक्तामर महा अर्चना 48 दीपों के साथ आयोजित किया जा रहा है। समस्त समाजजनों से इसमें भाग लेने की अपील की है।</p>
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		<title>इक्षु रस से अभिषेक कर मनाई गई अक्षय तृतीया : समाजजनों ने किया सामूहिक पूजन </title>
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		<pubDate>Sat, 22 Apr 2023 13:18:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ का जन्म चैत्र कृष्ण नौवीं के दिन सूर्योदय के समय हुआ। उन्हें ऋषभनाथ भी कहा जाता है। पढ़िए सन्मति जैन काका की यह रिपोर्ट&#8230; सनावद। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ का जन्म चैत्र कृष्ण नौवीं के दिन सूर्योदय के समय हुआ। उन्हें ऋषभनाथ भी कहा जाता [&#8230;]]]></description>
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<p>जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ का जन्म चैत्र कृष्ण नौवीं के दिन सूर्योदय के समय हुआ। उन्हें ऋषभनाथ भी कहा जाता है। पढ़िए सन्मति जैन काका की यह रिपोर्ट&#8230;</p>
<hr />
<p><strong>सनावद। </strong>जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ का जन्म चैत्र कृष्ण नौवीं के दिन सूर्योदय के समय हुआ। उन्हें ऋषभनाथ भी कहा जाता है। उन्हें जन्म से ही सम्पूर्ण शास्त्रों का ज्ञान था। वे समस्त कलाओं के ज्ञाता और सरस्वती के स्वामी थे।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-42736" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0036.jpg" alt="" width="1599" height="899" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0036.jpg 1599w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0036-300x168.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0036-1024x576.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0036-768x432.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0036-1536x864.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0036-990x557.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0036-1320x742.jpg 1320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0036-470x264.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0036-640x360.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0036-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0036-414x232.jpg 414w" sizes="(max-width: 1599px) 100vw, 1599px" /></p>
<p><strong>पंचामृत व जलाभिषेक किया</strong></p>
<p>सन्मति जैन काका ने बताया कि अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर प्रातः दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर छोटा णमोकार धाम मंदिर में सभी धर्मावलंबियों के द्वारा पंचामृत व जलाभिषेक किया गया ततपश्चात सामूहिक पूजन किया गया। बड़ा मंदिर जी में सामूहिक रूप से भगवान आदिनाथ मंडल विधान सुनील पावणा, महेंद्र मुंसी, सुनील मास्टर साब, सुबोध बाई,राजकुमारी बाई, मीना जटाले,सुनीता लश्करे,सुषमा जैन,सरोज जैन,सुनीता जैन,सहित अनेक समाजजनों के द्वारा कराया गया। तथा रात में भक्ति व पंडित अचिन्त्य जैन के द्वारा प्रवचन किये गए। जैसे की सभी को ज्ञात है कि वैशाख शुक्ला तृतीया को अक्षय तृतीया पर्व मनाया जाता है। इस दिन जैनधर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव (आदिनाथ ) ने राजा श्रेयांस के यहां इक्षु रस का आहार लिया था, जिस दिन तीर्थंकर ऋषभदेव का आहार हुआ था, उस दिन वैशाख शुक्ल तृतीया थी। अतः आज भी लोग इसे अक्षय तृतीया कहते हैं।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-42737" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0035.jpg" alt="" width="899" height="1599" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0035.jpg 899w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0035-169x300.jpg 169w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0035-576x1024.jpg 576w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0035-768x1366.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0035-864x1536.jpg 864w" sizes="(max-width: 899px) 100vw, 899px" /></p>
<p><strong>भरत क्षेत्र में इसी दिन से आहार दान की परम्परा शुरू</strong></p>
<p>जैनधर्म के अनुसार भरत क्षेत्र में इसी दिन से आहार दान की परम्परा शुरू हुई। ऐसी मान्यता है कि मुनि का आहार देने वाला इसी पर्याय से या तीसरी पर्याय से मोक्ष प्राप्त करता है। राजा श्रेयांस ने भगवान आदिनाथ को आहारदान देकर अक्षय पुण्य प्राप्त किया था, अतः यह तिथि अक्षय तृतीया के रूप में मानी जाती है।</p>
<p><strong>भगवान ऋषभनाथ ने ही विवाह-संस्था की शुरुआत की </strong></p>
<p>सभी को ज्ञात है कि भगवान ऋषभनाथ ने ही विवाह-संस्था की शुरुआत की और प्रजा को पहले-पहले असि , मसि , कृषि , विद्या, शिल्प और वाणिज्य-व्यापार के लिए प्रेरित किया।  इसके पूर्व तक प्रजा की सभी जरूरतों को कल्पवृक्ष पूरा करते थे। उनका सूत्र वाक्य था- &#8216;कृषि करो या ऋषि बनो।&#8217;</p>
<p>ऋषभनाथ ने हजारों वर्षों तक सुखपूर्वक राज्य किया फिर राज्य को अपने पु&#x200d;त्रों में विभाजित करके दिगम्बर तपस्वी बन गए। उनके साथ सैकड़ों लोगों ने भी उनका अनुसरण किया। जब कभी वे भिक्षा मांगने जाते, लोग उन्हें सोना, चांदी, हीरे, रत्न, आभूषण आदि देते थे, लेकिन भोजन कोई नहीं देता।</p>
<p><strong>ऐसे जैन धर्म में अनेक सम्प्रदायों की शुरुआत हुई</strong></p>
<p>इस प्रकार, उनके बहुत से अनुयायी भूख बर्दाश्त न कर सके और उन्होंने अपने अलग समूह बनाने प्रारंभ कर दिए। ऐसे जैन धर्म में अनेक सम्प्रदायों की शुरुआत थी। अत: आदिनाथ को एक वर्ष तक भूखे रहना पड़ा। इसके बाद वे अपने पौत्र श्रेयांश के राज्य हस्तिनापुर पहुंचे। श्रेयांस ने उन्हें गन्ने का रस भेंट किया जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। वह दिन आज भी &#8216;अक्षय तृतीया&#8217; के नाम से प्रसिद्ध है। इस अवसर पर विशाल सराफ़ अंकुर जैन, प्रतीक जैन,अंकित जैन,अनुभव जैन,राजेश जैन,अक्षय जैन, राजू जैन,संदेश जैन ,प्रीति जटाले,डीसेंनबाला जैन सहित सभी समाजजन उपस्थित थे।</p>
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		<title>अक्षय तृतीया पर आयोजन : जैन मिलन स्वतंत्र डबरा ने किया गन्ने के रस का वितरण  </title>
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		<pubDate>Sat, 22 Apr 2023 13:12:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन मिलन स्वतंत्र डबरा द्वारा आर्यिका श्री विश्रेय श्री माता जी के सानिध्य में अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर भगवान आदिनाथ का अभिषेक किया गया। इस अवसर पर गन्ने का रस का वितरण भी किया गया। पढ़िए राजू जैन की रिपोर्ट&#8230; डबरा। जैन मिलन स्वतंत्र डबरा द्वारा आर्यिका श्री विश्रेय श्री माता जी के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन मिलन स्वतंत्र डबरा द्वारा आर्यिका श्री विश्रेय श्री माता जी के सानिध्य में अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर भगवान आदिनाथ का अभिषेक किया गया। इस अवसर पर गन्ने का रस का वितरण भी किया गया। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजू जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>डबरा।</strong> जैन मिलन स्वतंत्र डबरा द्वारा आर्यिका श्री विश्रेय श्री माता जी के सानिध्य में अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर भगवान आदिनाथ का अभिषेक किया गया।भगवान के प्रथम अभिषेक का सौभाग्य हेमंत जैन डायमंड परिवार एवं शांति धारा का सौभाग्य श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर समिति के मंत्री विजय जैन नितिन जैन लाला रजियार परिवार कोक प्राप्त हुआ। चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन एवं पाद प्रक्षालन महिला मंडल की सदस्यों द्वारा किया गया। इस अवसर पर पंडित स्वप्निल जैन, झांसी के निर्देशन में भक्तामर महामंडल विधान का आयोजन किया गया। सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य दिनेश बरैया को प्राप्त हुआ।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-42727" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0047.jpg" alt="" width="1160" height="653" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0047.jpg 1160w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0047-300x168.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0047-1024x576.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0047-768x432.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0047-990x557.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0047-470x264.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0047-640x360.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0047-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0047-414x232.jpg 414w" sizes="auto, (max-width: 1160px) 100vw, 1160px" /></p>
<p><strong>पुण्य कोष भरने का दिन</strong></p>
<p>आर्यिका श्री विश्रेय श्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि आज का दिन पुण्य कोष भरने का दिन है। जैसे अष्टमी, चतुर्दशी का दिन उपवास या व्रत के लिए विशेष रहता है वैसे ही अक्षय तृतीया का दिन दान का विशेष दिन है। आज के दिन राजा श्रेयांस ने आदि मुनिराज की 13 माह 7 दिन के बाद गन्ने के रस से पारणा कराकर तीर्थंकर धर्म को चलाया था। दान के माध्यम से हमारे पापों का क्षय होता है। इसीलिए दान हमेशा निर्लोभता पूर्वक और अटूट भक्ति सहित देना चाहिए। दान से पुण्य की प्राप्ति होती है और (पुण्य फला अर्हंता) पुण्य के फल से अरिहंत पद प्राप्त होता है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-42728" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0048.jpg" alt="" width="830" height="1280" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0048.jpg 830w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0048-195x300.jpg 195w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0048-664x1024.jpg 664w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0048-768x1184.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 830px) 100vw, 830px" /></p>
<p><strong>गन्ने के रस का वितरण</strong></p>
<p>विधान के उपरांत जैन मिलन स्वतंत्र डबरा ने सुबह 11:00 बजे से इक्षु रस का वितरण श्री 1008 महावीर दिगंबर जैन मंदिर कस्टम रोड जवाहर गंज डबरा में किया। माताजी की आज की आहार चर्या जैन मिलन स्वतंत्र डबरा के सांस्कृतिक मंत्री रवि जैन, देवेंद्र जैन, देबू डायमंड परिवार के घर पर संपन्न हुई। इस कार्यक्रम में जैन मिलन स्वतंत्र डबरा के अध्यक्ष राजू जैन कपड़े वाले, मंत्री प्रेमचंद जैन एसबीआई, कोषाध्यक्ष दिनेश कुमार जैन एडवोकेट, पूर्व अध्यक्ष रीतेश जैन रजियार वाले, सह मंत्री अमित जैन एमपी ऑनलाइन, मीडिया प्रभारी आशीष जैन आदिनाथ फास्ट फूड, उपाध्यक्ष नवीन कुमार जैन सिद्धांत, उपाध्यक्ष महेंद्र जैन पैथोलॉजी, रवि जैन डायमंड, दीपक जैन बिट्टू, अतिवीर महेश जैन लाला, हेमंत जैन डायमंड, सह कोषाध्यक्ष शुभम जैन एलआईसी आदि सदस्य उपस्थित रहे।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-42729" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0049.jpg" alt="" width="831" height="1280" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0049.jpg 831w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0049-195x300.jpg 195w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0049-665x1024.jpg 665w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230422-WA0049-768x1183.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 831px) 100vw, 831px" /></p>
<p>जैन मिलन स्वतंत्र डबरा की वीर एवं वीरांगनाओं ने एवं सुशीला बरैया जी, कल्पना जैन, ऋतु जैन, सपना जैन, आदि महिलाएं एवं रॉकी जैन, नितिन जैन लाला, विवेक जैन, दीपक जैन, विमल जैन डायमंड, देवेंद्र जैन देबू, कपूर चंद जैन, दिनेश बरैया, सकल दिगंबर जैन समाज के वरिष्ठ सम्मानीय बंधुओं ने भक्ताबर महामंडल विधान के कार्यक्रम सम्मिलित होकर धर्म लाभ लिया।</p>
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		<title>पशु आहार भी किया दान : अक्षय तृतीया पर इक्षु रस का वितरण </title>
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		<pubDate>Sat, 22 Apr 2023 12:29:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इंदौर(राजेश जैन दद्दू)। आदिनाथ दिगंबर जैन महिला मंडल कनाडिया रोड सविंदनगर द्वारा अक्षय तृतीया के पावन दिवस पर मंदिर जी के बाहर इक्षु रस वितरण किया गया और दयोदय गोशाला रेवती रेंज के लिए पशु आहार की एक गाड़ी घास राशि दान की गई। महिला मंडल के इस कार्य के लिए दिगंबर जैन समाज समाजिक [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>इंदौर(राजेश जैन दद्दू)।</strong> आदिनाथ दिगंबर जैन महिला मंडल कनाडिया रोड सविंदनगर द्वारा अक्षय तृतीया के पावन दिवस पर मंदिर जी के बाहर इक्षु रस वितरण किया गया और दयोदय गोशाला रेवती रेंज के लिए पशु आहार की एक गाड़ी घास राशि दान की गई।</p>
<p>महिला मंडल के इस कार्य के लिए दिगंबर जैन समाज समाजिक संसद के अध्यक्ष राजकुमार पाटोदी मंत्री डॉ. जैनेन्द्र जैन. फेडरेशन के अध्यक्ष राकेश विनायका, महावीर ट्रस्ट के अध्यक्ष अमित कासलीवाल, दयोदय ट्रस्ट के राजीव जैन बंटी, संजीव जैन संजीवनी, राजेश जैन दद्दू एवं परवार समाज महिला मंडल की अध्यक्ष मुक्ता जैन ने कहा कि आप के इस पुनीत कार्य की हम सब सराहना करते हुए बधाई देते हैं।</p>
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		<title>जैन धर्म की पताका लहराई: अक्षय तृतीया पर अंजनी नगर हुआ भक्ति नगर </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Apr 2023 12:23:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इंदौर(राजेश जैन दद्दू)। अंजनी नगर में अक्षय तृतीया के पुण्य अवसर पर जैन धर्म की पताका घर घर खूब लहराई। अंजनी नगर में विगत 7 दिनों से विराजमान श्रुत सवेंगी मुनि श्री 108 आदित्य सागर जी, मुनि श्री अप्रमित सागर जी, मुनि श्री सहज सागर जी की आहार चर्या में पूरे इंदौर का जैन समाज [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>इंदौर(राजेश जैन दद्दू)।</strong> अंजनी नगर में अक्षय तृतीया के पुण्य अवसर पर जैन धर्म की पताका घर घर खूब लहराई। अंजनी नगर में विगत 7 दिनों से विराजमान श्रुत सवेंगी मुनि श्री 108 आदित्य सागर जी, मुनि श्री अप्रमित सागर जी, मुनि श्री सहज सागर जी की आहार चर्या में पूरे इंदौर का जैन समाज आहार देने हेतु उमड़ पड़ा ।</p>
<p>युवा बुजुर्ग, महिलाएं एवं छोटे बच्चे भी उत्साहित थे। तीनों मुनिराज की आहारचर्या में लगभग 300 से 400 लोगों ने आहार देकर पुण्यार्जन किया। साथ ही समाज कमेटी ने चौके के बाहर गन्ने के रस की प्रभावना वितरित की गई।</p>
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		<title>अक्षय तृतीया पर्व का महत्व: आज ही के दिन भगवान आदिनाथ को राजा श्रेयांश ने आहार दान कराया था  </title>
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		<pubDate>Sat, 22 Apr 2023 10:17:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भगवान आदिनाथ मुनि दीक्षा लेने के पश्चात छह माह के उपवास की प्रतिज्ञा लेकर ध्यान मग्न हो गए। व्रत समाप्ति पश्चात वे आहार के लिए निकले किन्तु मुनियोचित आहार विधि का ज्ञान ना होने के कारण कोई उन्हें आहार नही दे सका। इस प्रकार मुनियोचित आहार न मिलने पर उन्हें एक वर्ष 13 दिन तक [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>भगवान आदिनाथ मुनि दीक्षा लेने के पश्चात छह माह के उपवास की प्रतिज्ञा लेकर ध्यान मग्न हो गए। व्रत समाप्ति पश्चात वे आहार के लिए निकले किन्तु मुनियोचित आहार विधि का ज्ञान ना होने के कारण कोई उन्हें आहार नही दे सका। इस प्रकार मुनियोचित आहार न मिलने पर उन्हें एक वर्ष 13 दिन तक और निराहार रहना पड़ा। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> भगवान आदिनाथ मुनि दीक्षा लेने के पश्चात छह माह के उपवास की प्रतिज्ञा लेकर ध्यान मग्न हो गए। व्रत समाप्ति पश्चात वे आहार के लिए निकले किन्तु मुनियोचित आहार विधि का ज्ञान ना होने के कारण कोई उन्हें आहार नही दे सका। इस प्रकार मुनियोचित आहार न मिलने पर उन्हें एक वर्ष 13 दिन तक और निराहार रहना पड़ा।</p>
<p>जब भगवान प्रयाग से विहार करते हुए हस्तिनापुर पधारे तब हस्तिनापुर नरेश सोमप्रभ के छोटे भाई श्रेयांश ने उन्हें अपने महल से देखा और उन्हें पूर्व जन्म में दिए आहार दान की विधि का स्मरण हो आया। उन्होंने भगवान को नवधा भक्तिपूर्वक पड़गाया और इक्षु रस का शुद्ध आहार दिया। वह पुण्य दिवस वैशाख शुक्ल तृतीया था। आदि प्रभु को इस सर्वप्रथम आहार दान के कारण हस्तिनापुर को महानता प्राप्त हो गई तथा यह पवित्र दिन अक्षय तृतीया के रुप में एक पर्व के नाम से प्रसिद्ध हो गया। राजा श्रेयांश को दान के प्रथम प्रवर्तक के रुप में प्रतिष्ठा प्राप्त हुई | संसार में दान देने की प्रथा इस आहार दान के पश्चात ही प्रचलित हुई।</p>
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