<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Bhaddilpur &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/bhaddilpur/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Wed, 17 Dec 2025 07:38:20 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=7.0.2</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>Bhaddilpur &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>भगवान शीतलनाथ जी का ज्ञान कल्याणक 18 दिसंबर को : पौष मास की कृष्ण चतुर्दशी को है ज्ञान कल्याणक  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/gyan_kalyanak_of_lord_sheetalnath_ji_on_18th_december/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/gyan_kalyanak_of_lord_sheetalnath_ji_on_18th_december/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 17 Dec 2025 07:38:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA['Plaksha' tree]]></category>
		<category><![CDATA[‘प्लक्ष’ वृक्ष]]></category>
		<category><![CDATA[Bhaddilpur]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[gyan kalyanak]]></category>
		<category><![CDATA[Ikshvaku. Dynasty]]></category>
		<category><![CDATA[indore]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[jain samaj]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[King Dradhratha]]></category>
		<category><![CDATA[Krishna Chaturdashi]]></category>
		<category><![CDATA[Lord Sheetalnath Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Paush month]]></category>
		<category><![CDATA[Queen Nanda]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[इक्ष्वाकु वंश]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[कृष्ण चतुर्दशी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[ज्ञान कल्याणक]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[पौष मास]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान शीतलनाथ जी]]></category>
		<category><![CDATA[भद्दिलपुर]]></category>
		<category><![CDATA[राजा द्रध्रथ]]></category>
		<category><![CDATA[रानी नंदा]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=96579</guid>

					<description><![CDATA[जैन धर्म के 10वें तीर्थंकर भगवान शीतलनाथ जी का ज्ञान कल्याणक इस बार 18 दिसंबर को आ रहा है। पौष मास की कृष्ण चतुर्दशी के दिन भगवान ने केवलज्ञान प्राप्त किया था और अपनी देशना दी थी। इस दिन दिगंबर जैन मंदिरों में भक्तिपूर्वक धर्म आराधना की जाती है। श्रीफल न्यूज की विशेष श्रृंखला के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जैन धर्म के 10वें तीर्थंकर भगवान शीतलनाथ जी का ज्ञान कल्याणक इस बार 18 दिसंबर को आ रहा है। पौष मास की कृष्ण चतुर्दशी के दिन भगवान ने केवलज्ञान प्राप्त किया था और अपनी देशना दी थी। इस दिन दिगंबर जैन मंदिरों में भक्तिपूर्वक धर्म आराधना की जाती है। <span style="color: #ff0000">श्रीफल न्यूज की विशेष श्रृंखला के तहत आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की संकलित और संपादित प्रस्तुति&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर</strong>। जैन धर्म के 10वें तीर्थंकर भगवान शीतलनाथ जी का ज्ञान कल्याणक इस बार 18 दिसंबर को आ रहा है। पौष मास की कृष्ण चतुर्दशी के दिन भगवान ने केवलज्ञान प्राप्त किया था और अपनी देशना दी थी। इस दिन दिगंबर जैन मंदिरों में भक्तिपूर्वक धर्म आराधना की जाती है। अभिषेक और शांतिधारा के अलावा अन्य विधान पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार किए जाते हैं। जैन मान्यताओं के अनुसार वे एक सिद्ध एक मुक्त आत्मा बन गए, जिसने अपने सभी कर्मों का नाश कर दिया था। जैन मानते हैं कि शीतलनाथ का जन्म इक्ष्वाकु वंश में भद्दिलपुर में राजा द्रध्रथ और रानी नंदा के यहां हुआ था। भगवान शीतलनाथ ने भद्रिकापुर में माघ कृष्ण पक्ष की द्वादशी को दीक्षा प्राप्ति की थी। दीक्षा प्राप्ति के पश्चात् तीन महीने तक कठिन तप करने के बाद भद्रिकापुर में ही ‘प्लक्ष’ वृक्ष के नीचे पौष कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को ’कैवल्य ज्ञान’ की प्राप्ति इन्हें हुई। कालांतर में भगवान शीतलनाथ का विवाह हुआ। इसके बाद ही उन्होंने दीक्षा ली और शीघ्र ही केवलज्ञान प्राप्त कर लिया। केवल ज्ञान प्राप्त होने पर भगवान ने देशना देना प्रारंभ किया। उनकी देशना सुनकर अनेक लोगों ने उनसे दीक्षा ली। देश और काल के अनुसार तीर्थंकर भगवान की देशना होती है। भगवान शीतलनाथ जी के बारे में यह भी लिखित साक्ष्य है कि दसवें स्वर्ग में आयु पूर्ण करने के पश्चात श्री शीतलनाथ भगवान का जन्म भारत देश के भरत क्षेत्र में स्थित भद्दिलपुर नगरी में राजा दृढरथ एवं रानी नंदा के यहां हुआ।</p>
<p>भगवान शीतलनाथ जब अपनी माता के गर्भ में थे, तब एक बार उनके पिता, राजा दृढरथ को तीव्र ज्वर हो गया। ज्वर लगभग प्राणघातक था। ज्वर के कारण उन्हें भयंकर पीड़ा हो रही थी। उनके पूरे शरीर आँखों में, माथे, पेट, हर जगह में तीव्र जलन हो रही थी। तभी रानी नंदा, जिनके गर्भ में तीर्थंकर भगवान विराजमान थे ने अपने हाथों से राजा दृढरथ का स्पर्श किया और उस स्पर्श से उनके शरीर की सारी जलन दूर हो गई। उनका पूरा शरीर शीतल और सुखदायक हो गया। इसी घटना के कारण, जब भगवान का जन्म हुआ, तो उनका नाम ‘शीतलनाथ’ रखा गया।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/gyan_kalyanak_of_lord_sheetalnath_ji_on_18th_december/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>वर्तमान का विदिशा शहर ही अतीत का भद्दिलपुर है: राहतगढ़ में 27 नवंबर से 2 दिसंबर तक आयोजित होगा पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_present_day_vidisha_city_is_the_bhaddilpur_of_the_past/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/the_present_day_vidisha_city_is_the_bhaddilpur_of_the_past/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 17 Nov 2025 13:47:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Bhaddilpur]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Panch Kalyanak Pratishtha Maha Mahotsav]]></category>
		<category><![CDATA[Rahatgarh]]></category>
		<category><![CDATA[Sheetaldham]]></category>
		<category><![CDATA[Shri Sheetalnath Digambar Jain Big Temple]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Vidisha]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव 2 से 7 दिसंबर तक होगा]]></category>
		<category><![CDATA[भद्दिलपुर]]></category>
		<category><![CDATA[राहतगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[विदिशा]]></category>
		<category><![CDATA[शीतलधाम]]></category>
		<category><![CDATA[श्री शीतलनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=94698</guid>

					<description><![CDATA[भाव विशुद्धि युक्त अनुराग ही भक्ति है। इसमें व्यक्ति सबकुछ भूलकर गुरु का हो जाता है। यह उद्गार मुनिश्री प्रमाणसागरजी महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा में शीतलधाम में व्यक्त किए। विदिशा से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230; विदिशा। भाव विशुद्धि युक्त अनुराग ही भक्ति है। इसमें व्यक्ति सबकुछ भूलकर गुरु का हो जाता है। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>भाव विशुद्धि युक्त अनुराग ही भक्ति है। इसमें व्यक्ति सबकुछ भूलकर गुरु का हो जाता है। यह उद्गार मुनिश्री प्रमाणसागरजी महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा में शीतलधाम में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> भाव विशुद्धि युक्त अनुराग ही भक्ति है। इसमें व्यक्ति सबकुछ भूलकर गुरु का हो जाता है। यह उद्गार मुनिश्री प्रमाणसागरजी महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा में शीतलधाम व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि गुरु सान्निध्य के बाद भी जिनके अंदर भक्ति भाव नहीं उभर पाता। उनका कभी उद्धार नहीं हो सकता। हमने न केवल गुरु को पाया अपितु गुरु ने हमारे ऊपर कृपा बरसा कर हमें अपना प्रतिनिधि बनाया। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ससंघ का यह अल्पप्रवास है उनको राहतगढ़ में 27 नवंबर से 2 दिसंबर तक आयोजित पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के लिये जाना है। अतः यह बीच का समय विदिशा नगर को मिल गया। मुनि श्री ने कहा कि आप लोगों पर 1992 से जो गुरु कृपा बरसी वह फिर लगातार बरसती रही और इस शहर को जैन धर्म के दशवंे तीर्थंकर भगवान शीतलनाथ के नाम से पहचान दी।</p>
<p><strong>भगवान शीतलनाथ की जन्म भूमि को लेकर तीन क्षेत्र विकसित हो गए</strong></p>
<p>जब मैं वर्ष 1992 में विदिशा आया था तब मैंने अनेक ग्रंथों को पढ़ा और शोध किया था तब यह बात प्रमाणिक हो गयी थी कि वर्तमान का विदिशा शहर ही अतीत का भद्दिलपुर है। यहां पर तीन शिलालेख साक्ष्य प्राप्त हुए थे। जिसमें सबसे पहला श्री शीतलनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में श्री पारसनाथ भगवान के पादमूल में 500 साल पुराना शिलालेख है। दूसरा विदिशा के एक प्राचीन कुएं में भद्दिलपुर लिखा मिला जो लगभग 800 साल पुराना है तथा तीसरा राजस्थान के चांदखेड़ी के एक शिलालेख में विदिशा का नाम भद्दिलपुर अंकित है। उसी समय पर एक किताब भी छपी थी। ‘पावन कल्याणक भूमि भद्दिलपुर पर एक अध्ययन’। मुनि श्री ने कहा कि भगवान शीतलनाथ की जन्म भूमि को लेकर तीन क्षेत्र विकसित हो गए। ,क्षेत्र का विकसित होंना बुरा नहीं है पर जन्मभूमि तो एक ही है और यह तुम्हारा भद्दिलपुर है।</p>
<p><strong>एकजुटता के साथ इस कार्य को पूर्ण करे</strong></p>
<p>जहां गुरुदेव की कृपा बरसी और यह उतुंग समवशरण तुम लोगों के बीच में है। काम अपनी गति से चल रहा है और आप लोगों ने इसमें बहूत कुछ लगाया भी है लेकिन, अब जबकि कार्य पूर्णतः की ओर है। उसमें पूरी तरह लगे रहने की जरूरत भी है। जितना उत्कृष्ट कार्य आप कर सकते हैं। उतना उत्कृष्ट कार्य आप लोग कीजिए। उन्होंने कहा कि प्रण कर लो और पूरी समाज मिलजुलकर एकजुटता के साथ इस कार्य को पूर्ण करे। मुनि श्री ने कहा कि इतना उतंग समवशरण पूरे भारत में कहीं नहीं बना। आप सभी लोग कमर कसके तैयार हो जाइये। उन्होंने कहा कि मुनिश्री संभवसागरजी महाराज जी यहां पर हैं ही उनके मार्गदर्शन में वह जैसा कहें इस काम को आगे बढ़ाओ। सभी लोग सकारात्मक एवं सहयोगात्मक दृष्टि रखकर बाकी बातें गौण करें।</p>
<p><strong>ागवान शीतलनाथ स्वामी का यह समवशरण पूर्णतः की ओर है</strong></p>
<p>इस अवसर पर श्री संभवसागर महाराज ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि धर्म के मामले में जो सूखा क्षेत्र था आचार्य गुरुदेव की ऐेसी कृपा हुई कि सूखा क्षेत्र हरियाली में परिवर्तित हो गया। उन्होंने कहा कि यह जो विशाल समवशरण देख रहे हैं। यह विदिशा वालों की गुरु भक्ति का प्रदर्शन ही है। भगवान शीतलनाथ स्वामी का यह समवशरण पूर्णतः की ओर है। यह मध्यप्रदेश का ऐसा पहला क्षेत्र है जहां पर भगवान के चार कल्याणक हुए हैं। उन्होंने कहा कि गुरुकृपा का आशीर्वाद है, जो हम सभी पर बरसा एवं 25 वर्ष तक लगातार संयोग मिला। उन्होंने कहा कि भले ही आज गुरुदेव नहीं है लेकिन, हम सभी के बीच में आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के रूप में विराजमान हैं। उन्होंने कहा कि बड़े भाई प्रमाणसागर महाराज आए हैं। हम सभी को बहूत अच्छा लगा और हम सभी उनको ही सुनने के लिये आतुर है।</p>
<p><strong>आहार चर्या का सौभाग्य अर्जित किया </strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि मुनिसंघ ने दोपहर में समवशरण मंदिर का अवलोकन किया। भविष्य में विदिशा को एक नई पहचान देगा। यह कला एवं स्थापत्य का अदभुत उदाहरण है। मुनि श्री प्रमाणसागरजी महाराज को निरंतराय आहार कराने का सौभाग्य बसंत जैन, सचिन जैन परिवार को मिला। वहीं मुनि श्री संभवसागरजी महाराज के आहार का सौभाग्य शीतल महिला मंडल को मिला।</p>
<p><strong>मंगलवार को यह होंगे कार्यक्रम </strong></p>
<p>द्वय मुनि संघ के मंगल सानिध्य में मंगलवार को चतुर्दशी पर प्रातः7.30 से 1008 भगवान आदिनाथ बर्राे बाले बाबा का महा मस्तकाभिषेक होगा तथा मुनि श्री के मुखारविंद से शांतिधारा होगी। 8.30 बजे से मुनिसंघ के प्रवचन होंगे। 10 बजे आहार चर्या शीतलधाम से संपन्न होगी। शीतलविहार न्यास एवं श्री सकल दिगंबर जैन समाज सभी धर्मश्रदालुओं से निवेदन करता है कि समय पर पधारें और धर्मलाभ लें।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/the_present_day_vidisha_city_is_the_bhaddilpur_of_the_past/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
