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	<title>Barwani City &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Barwani City &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>आर्यिका सृष्टि भूषण माताजी ससंघ का हुआ मंगल प्रवेश : मुनि श्री प्रणुत सागर जी ससंघ से हुआ मंगल मिलन  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 09 Jan 2026 12:28:40 +0000</pubDate>
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<p><strong>बड़वानी नगर में शुक्रवार को सुबह जैन धर्म की बड़ी आर्यिकाओं में से एक आचार्यश्री सन्मति सागर जी की शिष्य आर्यिका श्री सृष्टिभूषणमति जी माताजी ससंघ का मंगल प्रवेश हुआ। माताजी का राजधानी भोपाल में मंगल चातुर्मास के बाद नेमावर, सिद्धवरकूट, पावागिरी जी ऊन, सिद्ध क्षेत्र की वंदना कर पहली बार इस क्षेत्र में आगमन हुआ है। <span style="color: #ff0000">धामनोद से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद</strong>। बड़वानी नगर में शुक्रवार को सुबह जैन धर्म की बड़ी आर्यिकाओं में से एक आचार्यश्री सन्मति सागर जी की शिष्य आर्यिका श्री सृष्टिभूषणमति जी माताजी ससंघ का मंगल प्रवेश हुआ। माताजी का राजधानी भोपाल में मंगल चातुर्मास के बाद नेमावर, सिद्धवरकूट, पावागिरी जी ऊन, सिद्ध क्षेत्र की वंदना कर पहली बार इस क्षेत्र में आगमन हुआ है। माताजी के संघ में कुल तीन आर्यिका माताजी हैं। माताजी सिद्ध क्षेत्र बावनगजा की वंदना करते हुए तीर्थंकर लेणि, सिद्ध क्षेत्र मांगीतुंगी, गजपंथा होते हुए णमोकर तीर्थ पर आगामी माह में होने वाले भव्य पंच कल्याणक में शामिल होंगी। माताजी के मंगल प्रवेश पर समाज के श्रावकों ने आर्यिका संघ के पाद प्रक्षालन कर आरती उतारी और मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। माताजी की अगवानी के लिए यहां पूर्व से विराजित मुनि श्री प्रणुत सागर जी के संघस्थ क्षुल्लक विनियोग सागर जी ने भी अगवानी की। जिन मंदिर में आर्यिका संघ ने भगवान के वेदियों के दर्शन कर मुनि श्री प्रणुत सागर जी का भी आशीर्वाद प्राप्त किया। धर्मसभा के पूर्व आर्यिका श्री, मुनि श्री और क्षुल्लक जी महाराज को समाज जन ने शास्त्र भेंट किया। कल्पना काला द्वारा मंगलाचरण किया गया। धर्म सभा में विश्वयश मति जी माता जी ने बहुत ही संक्षिप्त और मधुर आवाज में कविता की पंक्तियां प्रस्तुत की। साथ ही कहा कि आप जो कुछ अच्छा होता है उसका श्रेय खुद लेना चाहते हो और यदि कुछ बुरा होता है तो भगवान को दोष देते हो।</p>
<p><strong>आज परिणाम की विकृति का नाम पाप है</strong></p>
<p>आर्यिका सृष्टि भूषण माताजी द्वारा छोटे-छोटे मुक्तक और काव्य शैली में धर्मसभा को रोचक बना दिया। माताजी ने बताया कि जिसका प्रभु से वास्ता वही सच्चा नाश्ता है। माताजी ने कहा कि पहले बाप बेटे को सिखाता था पर आज इस पश्चिमी सभ्यता में बेटा बाप को सिखा रहा है। पश्चिम की दौड़ ने सभ्यता तो सिखा दी है लेकिन, संस्कृति और संस्कार बिगाड़ दिए है। आज परिणाम की विकृति का नाम पाप है। आप आज धर्म के नाम पर लड़ रहे हो यदि धर्म के लिए लड़ते तो भगवान बन गए होते। परमेष्ठि बन गए होते, आप के कही भी किए गए पाप मंदिर ने प्रक्षालित होते है ,लेकिन मंदिर में किए गए पाप कही भी प्रक्षालित नहीं होते हैं।</p>
<p><strong>गौशाला के लिए भी चारे आदि की व्यवस्था में सहयोगी </strong></p>
<p>माताजी ने काव्यात्मक अंदाज में बहुत अच्छी ज्ञान वर्धक और जीवन को सुधारने वाली बातें बताईं। माताजी ने कहा कि आज हर मां राम जैसा बेटा चाहती है और टीवी पर चरित्रहीन के चरित्र देख रही है तो राम जैसे पुत्र कैसे होंगे। पाश्चात्य की हवा ने हमंे हिला दिया है। माताजी के द्वारा महावीर जी तीर्थ पर और शाश्वत तीर्थराज सम्मेद शिखर पर साधु संतों और त्यागी वृत्तियों के आहार की व्यवस्था करवा रखी है। साथ ही गौशाला के लिए भी चारे आदि की व्यवस्था में सहयोगी है।</p>
<p><strong>क्षुल्ल्क श्री विनियोग सागर जी के मंगल अवतरण दिवस पर शास्त्र भेंट </strong></p>
<p>मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज ने कहा कि आज से मंदिर का कार्य प्रारंभ हो रहा है और माताजी का उसके ठीक पहले आगमन हुआ। ये शुभ मंगल का प्रतीक है। भरा हुआ कलश, गाय का बछड़े को दूध पिलाने का ये मंगल शुभ संकेत होते हैं और ऐसे में मां का आगमन बहुत ही शुभ संकेत हैं। महाराज ने बताया कि आप जिस भी व्यक्ति को जिस प्रकार से देखोगे, उसी प्रकार से दिखेगा। क्षुल्ल्क श्री विनियोग सागर जी के मंगल अवतरण दिवस पर आर्यिका संघ और प्रणुत सागर जी महाराज ने मंगल आशीर्वाद प्रदान कर शास्त्र भेंट किया। मुनिश्री प्रणुत सागर जी महाराज ने कहा कि जब पुण्य का जलवा चलता है तब पाप का दिल जलता है।</p>
<p><strong>माताजी का मंगल विहार </strong></p>
<p>इस अवसर पर जैन समाज के महिला, पुरुष, युवा बच्चे उपस्थित थे। प्रवचन पश्चात मुनि संघ आर्यिका संघ की आहारचर्या हुई और दोपहर को माताजी का मंगल विहार सिद्ध क्षेत्र बावनगजा जी के लिए हुआ। शाम को क्षुल्लक श्री विनियोग सागर जी के पाद प्रक्षालन और प्रवचन हुए।</p>
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		<title>धर्म के संस्कार और बीज दादा दादी ही करते हैं रोपित : मुनि श्री प्रणुत सागर जी ने संस्कारों के लिए परिवार के बुजुर्गों को बताया आधार  </title>
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		<pubDate>Tue, 06 Jan 2026 12:33:47 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बड़वानी नगर में विराजित आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के शिष्य मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज ने मंगलवार को बड़वानी दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज हम गुरुवर आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज की कृपा और आशीर्वाद से बैठे है। आज कोई भी पाप का फल नहीं चाहता [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बड़वानी नगर में विराजित आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के शिष्य मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज ने मंगलवार को बड़वानी दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज हम गुरुवर आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज की कृपा और आशीर्वाद से बैठे है। आज कोई भी पाप का फल नहीं चाहता पर पाप से बचता कोई नहीं है। <span style="color: #ff0000">धामनोद से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद</strong>। बड़वानी नगर में विराजित आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के शिष्य मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज ने मंगलवार को बड़वानी दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज हम गुरुवर आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज की कृपा और आशीर्वाद से बैठे है। आज कोई भी पाप का फल नहीं चाहता पर पाप से बचता कोई नहीं है। आज हमें जो भी प्राप्त हो रहा है, वो पुण्य से और धर्म से प्राप्त हो रहा है। यदि इस जन्म में कोई महिला गर्भ धारण नहीं कर पा रही है तो उसने पिछले जन्म में निश्चित ही कोई जीव का घात किया होगा या किसी मां से किसी बेटे का बिछोह करवाया होगा। कर्म हमेशा अपना काम बताता है और कर्म उदय में आता ही है। इसी वजह से वो गर्भ धारण नहीं कर पा रही है और यदि कोई जन्म से अंधा है तो निश्चित ही पिछले जन्म किसी को जानते या अनजाने में किसी जीव की आंखों की रोशनी छीन ली होगी। चाहे वो बाथरूम में एसिड से या साबुन सोडे से किसी छोटे निरीह जीव की आंखों की रोशनी छीनी होगी तो उसके परिणाम स्वरूप ये दशा हुई।</p>
<p><strong>हमारी मां का उपकार है </strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि ये हम सब पर हमारी मां का उपकार है और हमारा पुण्य की विशुद्धि है कि हमको मनुष्य पर्याय मिली और साथ ही जैन कुल मिला। आप भाग्यशाली हो कि आपको जैन कुल में जन्म मिला। जिससे आपको भगवान को छूने, अभिषेक करने को मिल रहा है साधु संतों की वैया वृत्ति करने को मिल रही है। आहार, औषध दान करने को मिल रहा है और आपको ये संस्कार मिले हैं अपने दादा दादी से। जिस घर में दादा दादी हैं उस घर में बच्चे धर्मात्मा निकलेंगे। धर्म के बीजों का रोपण दादा दादी ही करते हैं। धार्मिक संस्कारों को रोपित और पोषित दादा दादी ही करते हैं। वे ही हाथ पकड़ कर देव दर्शन के लिए मंदिर ले कर आते है। मुनि की संगति प्राप्त होने से हमारे जन्म जन्म के पाप कटते हैं और मुनि की संगति से ही आप के अगले भव सुधरते हैं।</p>
<p><strong>भगवान के अभिषेक और शांतिधारा में उमड़े श्रद्धालु </strong></p>
<p>भगवान नेमीनाथ के दादा के जीव का दृष्टांत देते हुए बताया कि वो जीव कई बार पहले से सातवें नर्क को भोग और मनुष्य भव में मुनि की संगति की तो उनके भी भाव सुधर गए और भव भी सुधर गया और उनके घर में भगवान नेमीनाथ जैसे तीर्थंकर बालक का जन्म हुआ। मुनि श्री ने कहा कि आप दान दो या मत दो पर दान के द्रव्य का दुरुपयोग मत करो, आप आहार दो या मत दो पर आहार में अन्तराय मत दो। धर्मसभा के पूर्व भगवान के अभिषेक और शांतिधारा हुई। धर्मसभा का संचालन और मंगलाचरण इंदौर नगर पुरोहित पंडित नितिन झांझरी ने किया। यह जानकारी मनीष जैन ने दी।</p>
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		<title>मुनिश्री प्रणुत सागर जी मुनिराज ने कहा धर्म से ही सुख मिलता है : मुनिश्री ने प्रवचन में कर्म फल की विशद विवेचना की  </title>
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		<pubDate>Mon, 05 Jan 2026 12:43:25 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बड़वानी नगर में विराजित पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के शिष्य श्रमण मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज ने सोमवार को दिगंबर जैन मंदिर में भगवान के दर्शन किए। मुनिश्री के सानिध्य में भगवान के अभिषेक किया गया और शांतिधारा हुई। धामनोद से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह खबर&#8230; धामनोद। बड़वानी नगर में विराजित [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बड़वानी नगर में विराजित पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के शिष्य श्रमण मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज ने सोमवार को दिगंबर जैन मंदिर में भगवान के दर्शन किए। मुनिश्री के सानिध्य में भगवान के अभिषेक किया गया और शांतिधारा हुई। <span style="color: #ff0000">धामनोद से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद।</strong> बड़वानी नगर में विराजित पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के शिष्य श्रमण मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज ने सोमवार को दिगंबर जैन मंदिर में भगवान के दर्शन किए। मुनिश्री के सानिध्य में भगवान के अभिषेक किया गया और शांतिधारा हुई। मुनिश्री ने धर्मसभा में कहा कि आप को जो कुछ मिला है और मिल रहा है। सब धर्म के अनुसार मिल रहा है। आपने धर्म किया है तो सुख मिल रहा है। यदि पाप किए है तो दुःख मिल रहा है। मुनिराज ने कहा कि आप खुद अंतर्मन से सोचना कि कोई दो व्यक्ति एक जैसा सामान का व्यापार कर रहे हैं और एक की दुकान पर ग्राहकों की भीड़ लगी है और दूसरे की दुकान पर बमुश्किल कोई ग्राहक आ रहा है तो ये निश्चित है जिस व्यक्ति के दुकान पर ग्राहकों की भीड़ है, उसने पिछले जन्म में पुण्य कार्य धर्म कार्य किया है। इसलिए उसकी दुकान पर भीड़ है और जिसकी दुकान पर ग्राहकों की कमी है, उसके धर्म करने में कमी थी या पाप कार्य किए थे। धर्म का सबसे बड़ा फल तो ये मानो कि आपको ईश्वर ने मनुष्य जीवन दिया। उसमें भी उच्च कुल,परिवार दिया। साथ ही आपके शरीर के सब अंग अच्छे हैं। यदि आपमें कुछ भी कमी है तो उसकी वजह आप खुद हैं।</p>
<p><strong> अच्छा कुल, अच्छा समाज चाहिए तो धर्म कार्य में लग जाएं</strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि आपके कर्म का उदय में आना है। आज के समय में भगवान सभी बनना चाहते हैं पर भगवान की सुनते कोई नहीं। अभी आप बासा खा रहे हो। पिछले पुण्य के उदय से आपका सबकुछ अच्छा चल रहा है। यदि थोड़ा सा भी विपरीत समय आए तो समझ लेना कि हमारे पाप कर्म उदय में आ रहे है और इन उदय कर्मों को समता से झेल लेना और प्रभु की भक्ति, धर्म साधना में लगा देना। साथ ही जिन लोगों का भी पुण्य प्रबल चल रहा है और हर सुख सुविधा भोग रहे हो तो ये मत समझ लेना कि हम बहुत पुण्यशाली है। यदि पुनः अच्छी योनि में जन्म लेना है। अच्छा कुल, अच्छा समाज चाहिए तो धर्म कार्य में लग जाएं।</p>
<p>मुनिश्री ने एक बहुत बड़े व्यापारी का दृष्टांत देकर बताया कि एक अजेन व्यक्ति भी जैन धर्म में आस्था और विश्वास रखता था वो कई करोड़ों का मालिक था। वो बिल्कुल अनपढ़ था। अभी कुछ वर्षों पहले ही वो पढ़ना और लिखना सीखा ,इसके पूर्व वो व्यक्ति बिल्कुल अंगूठा छाप था। अतः यहां ये भी बात है कि यदि आपका पुण्य जोरदार है तो आप अनपढ़ भी है तो भी आप पैसे वाले बन सकते हैं। अतः धर्म कीजिए जिससे आने वाले भव में आपको सुखों की प्राप्ति हो। मुनि श्री ने बताया कि आप एक गिलास पानी में एक चम्मच नमक मिलाएंगे और उसको पियेंगे तो उससे आपको उल्टी या दस्त हो जाएंगे और उस नमक का खारापन दबाने के लिए आपको कम से कम सात से आठ चम्मच शकर मिलाना पड़ेगी तब जाकर उसका खारापन दूर होगा।</p>
<p><strong>जब पाप कर्म उदय में आते है तो वो कष्ट देते हैं </strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि ठीक वैसा ही आपका थोड़ा सा किया गया पाप को कम करने के लिए आपको कई गुना धर्म या पुण्य कार्य करना होगा और आपने यदि पाप किए है तो उसे आप अगले जन्म में भोगने के लिए भी तैयार रहना क्योंकि, पाप किसी को छोड़ता नहीं है। यदि कोई आज गलत कार्य करके सुखी हैं तो ये मान के चलिए कि अभी उसका पिछला पुण्य चल रहा है। इसलिए वो बुरे कार्य में भी सुख भोग रहा है किन्तु, जब पाप कर्म उदय में आते है तो वो कष्ट देते हैं और रुलाते भी हैं, अतः धर्म कीजिए निश्चित ही सुख ही सुख मिलेगा। इस अवसर पर समाज के महिला, पुरुष, युवा उपस्थित थे। यह जानकारी मनीष जैन ने दी।</p>
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		<title>भगवान को पूजना सरल है, लेकिन भगवान की मानना कठिन है : मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज ने दी मंगल देशना  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 30 Dec 2025 13:49:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भगवान को पूजना सरल है किंतु भगवान की मानना कठिन है। यह उदगार बड़वानी नगर में विराजित विराग सागर जी महाराज के शिष्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महा मुनिराज के शिष्य मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज जी ने दिगंबर जैन मंदिर में धर्म सभा में व्यक्त किए। धामनोद से पढ़िए, दीपक प्रधान की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भगवान को पूजना सरल है किंतु भगवान की मानना कठिन है। यह उदगार बड़वानी नगर में विराजित विराग सागर जी महाराज के शिष्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महा मुनिराज के शिष्य मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज जी ने दिगंबर जैन मंदिर में धर्म सभा में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">धामनोद से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>धामनोद।</strong> भगवान को पूजना सरल है किंतु भगवान की मानना कठिन है। यह उदगार बड़वानी नगर में विराजित विराग सागर जी महाराज के शिष्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महा मुनिराज के शिष्य मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज जी ने दिगंबर जैन मंदिर में धर्म सभा में व्यक्त किए। मुनिश्री ने आगे बताया कि हम भगवान की पूजा करते हैं लेकिन, हम भगवान पर और हमारी पूजा पर भरोसा नहीं करते हैं। अगर हमने भगवान की पूजा, अर्चना पूर्ण विश्वास, विवेक, श्रद्धा के साथ की है तो हमारे जीवन में कष्ट आ ही नहीं सकता। हमे कष्ट इसलिए आते है कि हम भगवान पर विश्वास ही नहीं करते। मुनिराज ने बताया कि हमें बड़े पुण्य योग से जैन कुल मिला है जो कि बहुत दुर्लभ है हमें पंच परमेष्ठि मिले हैं। उनका सम्मान करो। यथोचित सेवा, पूजा अर्चना करो।</p>
<p>जिससे कि आप के पाप कटेंगे और पुण्य मजबूत होगा। जो कि अगले भव भवांतर तक आपके साथ जाएगा। यदि यहां भी मायाचारी की तो वो कई जन्मों तक तुम्हे तुम्हारे कर्म नहीं छोड़ेंगे। धर्म क्षेत्र में कभी मायाचारी नहीं करना चाहिए। कर्म ने तीर्थंकरों को नहीं छोड़ा भगवान महावीर के जीव को भी नर्क भोगना पड़ा था कर्मों की वजह से। आप मंदिर में आते है तो पूजा अभिषेक आदि क्रियाएं करते हैं पर भाव नहीं होते हैं केवल एक दूसरे के देखने की वजह से करते हैं जिससे आपको आपकी क्रियाओं का लाभ नहीं मिलता। आप पुण्य करने आते है और यहां भी मायाचारी से पाप कर देते हो तो आपको पुण्य नहीं मिलता और कष्ट भोगते हो।</p>
<p>आपके नगर में साधु आते हैं तो पूरे नगर के पाप कटते हैं और आपके पुण्य करने के भाव होते हैं और यदि मेहमान आते हैं तो आप से अनजाने में भी पाप हो ही जाते हैं। अतः जब भी निर्ग्रन्थ साधु संत नगर में आए तो उनकी यथा योग्य आहार,बिहार,निहार, वैया वृत्ति करके पुण्य अर्जन करना साथ ही विनय ,विवेक और विशुद्धि का भी ध्यान रखना ताकि मुनिराज की चर्यानुकूल क्रिया करे। ताकि उनकी साधना में भी कोई दिक्कत ना हो।,प्रवचन पश्चात मुनि संघ की आहार चर्या संपन्न हुई। दोपहर को सामयिक धर्म की क्लास, प्रतिक्रमण हुआ एवं शाम को धर्म आधारित आनंद यात्रा संपन्न हुई। मुनि श्री संघ की आरती संपन्न हुई।</p>
<p><strong>अहिंसा कॉन्सेप्ट जैन भजन संध्या होगी </strong></p>
<p>मुनि संघ का 31 तारीख को बावनगजा सिद्ध क्षेत्र में प्रातः मंगल प्रवेश होगा। जहां मुनि श्री प्रणुत सागर जी ससंघ के सानिध्य में और वहां पूर्व से विराजित उपाध्याय श्री विभंजन सागर जी महाराज के सानिध्य में 31 दिसंबर 2025 की विदाई की रात में और नए वर्ष के आगमन में विश्व के सबसे पहले सबसे बड़े 84 फिट ऊंची भगवान ऋषभ नाथ के चरणों में अहिंसा कॉन्सेप्ट जैन भजन संध्या का भी किया गया है। इस भजन संध्या में देश की प्रसिद्ध भजन गायिका धन्य श्री जादू बिखेरेंगी।</p>
<p>1 जनवरी को प्रातः गुरु संघ सानिध्य में तीर्थ राज की वंदना की जाएगी। साथ ही 84 फिट उत्तुंग भगवान आदिनाथ के चरणाभिषेक और वृहद शांति धारा परम पूज्य मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज के मुखारविंद से की जाएगी। इस अवसर पर लगभग चार राज्यों से गुरु भक्त आएंगे और धर्म लाभ लेंगे। शाम को मुनि संघ का प्रतिक्रमण गुरु भक्ति, भक्ति से परी पूर्ण आनंद यात्रा भी आयोजित की जाएगी। साथ ही मुनि संघ की और भगवान की आरती की जाएगी। यह जानकारी मनीष जैन द्वारा प्राप्त हुई ।</p>
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		<title>मुनि श्री प्रक्षाल सागर जी एवं रत्नत्रय सागर जी का मंगल प्रवेश: बड़वानी में मुनिश्री ने दिया धर्मसभा को संबोधन </title>
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		<pubDate>Wed, 21 May 2025 05:07:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गणाचार्य विराग सागर जी के शिष्य आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री प्रक्षाल सागर जी एवं मुनि श्री रत्नत्रय सागर जी का मंगलवार को प्रातः गणपुर धार से बड़वानी नगर में मंगल प्रवेश हुआ। मुनि संघ इंदौर में पट्टाचार्य कार्यक्रम में शामिल होकर तीर्थ क्षेत्र की वंदना के निमित्त पदयात्रा कर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>गणाचार्य विराग सागर जी के शिष्य आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री प्रक्षाल सागर जी एवं मुनि श्री रत्नत्रय सागर जी का मंगलवार को प्रातः गणपुर धार से बड़वानी नगर में मंगल प्रवेश हुआ। मुनि संघ इंदौर में पट्टाचार्य कार्यक्रम में शामिल होकर तीर्थ क्षेत्र की वंदना के निमित्त पदयात्रा कर गुजरी, धामनोद, धरमपुरी, सिंघाना होते हुए नगर में पधारे। समाज के युवा संघ उनके साथ पद विहार में साथ रहे। समाजजनों ने अगवानी की। <span style="color: #ff0000">बड़वानी से दीपक प्रधान की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>बड़वानी।</strong> नगर में गणाचार्य विराग सागर जी के शिष्य आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री प्रक्षाल सागर जी एवं मुनि श्री रत्नत्रय सागर जी का मंगलवार को प्रातः गणपुर धार से बड़वानी नगर में मंगल प्रवेश हुआ। मुनि संघ इंदौर में पट्टाचार्य कार्यक्रम में शामिल होकर तीर्थ क्षेत्र की वंदना के निमित्त पदयात्रा कर गुजरी, धामनोद, धरमपुरी, सिंघाना होते हुए नगर में पधारे। समाज के युवा संघ उनके साथ पद विहार में साथ रहे। प्रातः बड़वानी आगमन पर समाज के लोगों ने मुनि द्वय की पाद प्रक्षालन कर आरती उतार कर मंगल अगवानी की। यहां ये उल्लेखनीय है कि मुनि श्री रत्नत्रय सागर जी की मुनि दीक्षा दो वर्ष पूर्व आचार्य श्री विभव सागर जी के हाथों से बावनगजा सिद्ध क्षेत्र पर हुई थी।</p>
<p><strong>हमारे जीवन के कर्ता-धर्ता हम स्वयं हैं।</strong><br />
मुनि संघ ने बड़वानी मंदिर में विराजित भगवान के दर्शन किए और मुनि श्री रत्नत्रय सागर जी ने धर्म सभा को संबोधित किया और कहा कि हम हमारे जीवन के कर्ता-धर्ता हम स्वयं हैं। याने हमारे कर्म के अनुसार हमे कर्म का फल प्राप्त होता है, जैन कर्म सिद्धांत बताता है कि हमारा कर्ता कोई नहीं है, ना हमारे माता-पिता, ना ही हमारे प्रिय भगवान आदिनाथ, भगवान भी हमारे कर्ता-धर्ता नहीं है। यदि भगवान हमारे कर्ता-धर्ता होते तो कोई गरीब नहीं होता। कोई तकलीफ नहीं पता भगवान सभी को प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उद्योग पति, करोड़ पति बना देता, याने भगवान हमारे कर्ता-धर्ता नहीं है। जैन धर्म कर्म सिद्धांत कहता है कि आपको किए गए कर्म के अनुसार ही आपको फल मिलता है। कर्मों ने भगवान तीर्थंकर आदिनाथ, पार्श्वनाथ, महावीर भगवान को और आचार्य को नहीं छोड़ा अतः भगवान कर्मों के कर्ता-धर्ता नहीं हैं। हम स्वयं है। मुनि महाराज ने राजा श्रेणिक, रानी चेलना यशोधर मुनि का दृष्टांत देते हुए बताया कि कैसे राजा श्रेणिक ने जंगल में कठोर तपस्या करते हुए मुनि राज पर मरा हुआ सांप डाल दिया था और जब रानी चेलना को बताया और जाकर देखा महाराज के गले में सांप के आसपास चींटियां चल रही थी और मुनिराज एकाग्र चित होकर बगैर विचलित हुए तपस्या ने लीन थे और उनके शरीर से खून बह रहा था। तब रानी ने राजा को कहा कि तुमने कैसा नर्क का बंध कर लिया और ये पाप किया और रानी चेलना ने मरे हुए सर्प को हटा कर उपसर्ग दूर किया और मुनिराज ने फिर भी दोनों को आशीर्वाद दिया और वो मरा हुआ सर्प माला में बदल गया। इस अवसर पर समाज के युवा बच्चे महिला उपस्थित थे। धर्म सभा के पश्चात मुनिसंघ की आहार चर्या हुई,शाम को मुनि संघ का विहार बावनगजा सिद्ध क्षेत्र की ओर हुआ। यह जानकारी मनीष जैन ने दी।</p>
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