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	<title>AshokNagar &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>AshokNagar &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>आप प्रभु की भक्ति पूजा करते हैं तो आपकी भी प्रशंसा होगी : मुनि श्री अविचल सागरजी ने दी अपनी मंगल देशना  </title>
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		<pubDate>Thu, 26 Mar 2026 16:36:37 +0000</pubDate>
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<p><strong>सुख आनंद मनोरंजन तो जीव सुख चाहते हैं आप जिन प्रभु की भक्ति पूजा करते हैं तो बदले में आपकी भी प्रशंसा होगी। सुख अनेक प्रकार का होता है सब भी जीव सुख चाहते हैं। आपको लोग अच्छा कहेंगे अलग-अलग काम करने से अलग अलग पुण्य की प्राप्ति होती है। यह उद्गार सुभाष गंज में धर्मसभा में मुनि श्री अविचल सागर जी महाराज ने व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">अशोकनगर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोक नगर।</strong> सुख आनंद मनोरंजन तो जीव सुख चाहते हैं आप जिन प्रभु की भक्ति पूजा करते हैं तो बदले में आपकी भी प्रशंसा होगी। सुख अनेक प्रकार का होता है सब भी जीव सुख चाहते हैं। आपको लोग अच्छा कहेंगे अलग-अलग काम करने से अलग अलग पुण्य की प्राप्ति होती है। यदि आप औषधि दान करेंगे तो आप का शरीर निरोगी स्वस्थ सुन्दर बलिष्ट रहेगा। आपको कौन सा पुण्य चाहिए। क्षमा से विनय से दया से मैं बहुत मधुर वचन बोलकर कोमल शब्दों को बोलकर बहुत पुण्य कमाना होगा। इस आशय के उद्गार सुभाष गंज में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री अविचल सागर जी महाराज ने व्यक्त किए। इस दौरान जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि अहिंसा से विश्व में शांति का दिव्य सन्देश देने वाले जैन दर्शन के चौबीस वें तीर्थंकर भगवान श्री महावीर स्वामी का 2625 वां जन्म जयंती महोत्सव 30 मार्च को भव्य समारोह के साथ विभिन्न कार्यक्रम के साथ श्री दिगम्बर जैन पंचायत कमेटी के तत्वावधान में मनाया जाएगा। इसके लिए जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, महामंत्री राकेश अमरोद के नेतृत्व में हुई पंचायत कमेटी के बैठक में महावीर जयंती महा महोत्सव की सभी तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया। उसी अनुरूप सभी कार्यक्रम होंगे। इस दौरान उपाध्यक्ष अजीत बरोदिया प्रदीप तारई, मंत्री शैलेंद्र श्रागर, विजय धुर्रा, संजीव भारिल्य मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार आडिटर संजय केटी, संयोजक उमेश सिंघई, मनीष सिंघई, मनीष रन्नौद, श्रेयांस घैला उपस्थित थे।</p>
<p><strong>संसार के प्रत्येक व्यक्ति के प्रति दया करुणा भाव रखता है</strong></p>
<p>धर्मसभा में मुनिश्री ने कहा कि यदि आप अलौकिक अकल्पनीय सुख चाहते हो तो क्या करना है। इस हेतु शास्त्रों में आया है। भूत अनुकम्पा, वृति परिसंख्यन आदि सूत्र में दया को प्रधान दी गई। जिनेन्द्र भगवान कहते हैं कि संसार के प्रत्येक व्यक्ति के प्रति दया करुणा भाव रखता है। आप को देने के लिए दया करुणा आपके हृदय में होना चाहिए। जो अपने मन का वाणी अपने शरीर के प्रत्येक अंग का उपयोग दया के लिए करता है। उसे पुण्य का वंद होता है। क्या आपको दया से बोलना सुनना और छूना आता है। शाता कर्म का उदय में क्यों नहीं आ रहा। शाता वेदनी कर्म आता कैसे हैं तो भूत अनुकम्पा अर्थात तुम्हारे हाथ से दया करना आना चाहिए। क्षमा विनय के रास्ते से जो पुण्य कमाया है तो आप कहीं भी खड़े हो जाएं आप को यश मिलेगा। उन्होंने कहा कि हजारों तरीके के मार्ग बताये भगवान ने जिस क्षमा विनय के रास्ते से जो पुण्य कमाया तो आप कहीं भी खड़े हो तो लोग आपको जय जिनेन्द्र करते हैं। आपका स्वागत सम्मान करते हैं मैं ये नहीं कह रहा कि दान पूजा से पुण्य मिलता है। इनके अलावा जो हम भूल गए उसे भी हम याद दिला रहे हैं। सबसे पहले साता वेदनी कर्म को इकट्ठा करोगे तो तुम्हारे लिए धन वैभव माता पिता अनेक राज्य सम्पदा के स्वामी वनकर तुम समृद्धि को प्राप्त कर सकते हो रास्ता बता सकते हैं, कोई कुछ कर नहीं सकते।</p>
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		<title>आपको क्रिया में आनंद आया तब वह पुण्य में बदल जाएगा : मुनिश्री सुधासागरजी के सानिध्य में तप कल्याणक पर तीर्थाेदय में होगी जैनेश्वरी दीक्षा  </title>
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		<pubDate>Thu, 22 Jan 2026 03:38:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अपने आप को भाग्यवान मान लेना जैसे ही तुम्हारे पुण्य का उदय आए। प्रभु के चरणों में पहुंचकर भक्ति कर लिया करें। हंस लिया करें। यह उद्गार मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने धर्मसभा में व्यक्त किए। अशोकनगर से पढ़िए, यह खबर&#8230; अशोकनगर। क्रिया में धर्म नहीं है, उसमें कितना आनंद आया वहीं पुण्य है। भाग्यवान [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अपने आप को भाग्यवान मान लेना जैसे ही तुम्हारे पुण्य का उदय आए। प्रभु के चरणों में पहुंचकर भक्ति कर लिया करें। हंस लिया करें। यह उद्गार मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने धर्मसभा में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">अशोकनगर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोकनगर।</strong> क्रिया में धर्म नहीं है, उसमें कितना आनंद आया वहीं पुण्य है। भाग्यवान कहां है देवता उस मंदिर में जाते हैं जब भगवान सामने हो तो थोड़ा हंस लिया करें। अपने आप को भाग्यवान मान लेना जैसे ही तुम्हारे पुण्य का उदय आए। प्रभु के चरणों में पहुंचकर भक्ति कर लिया करें। हंस लिया करें। यह उद्गार मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने धर्मसभा में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि बड़े आदमी को संभालना है। हंसने वाले को संभालना है ये नरक जाने वाले हैं। रावण के पास धन था बुद्धि थी, शरीर निरोगी मिला। धन मिले अय्याशी में लगा दिया। बुद्धि मिली उससे भगवान को कैलाश पर्वत सहित उठरकर फैंकने लगा। इन तीनों को संभालना। मैं जन्म-जन्म का बड़ा आदमी हूं। तुम्हें जो कुछ भी मिला है, अच्छे कर्म से मिला है ये तुम्हारे लिए अपने गुरु से मिलीं है। अब मेरा उपदेश नहीं मैं धनवान हूं बुद्धि मान निरोगी है तो अच्छा कर्म का परिणाम है। अब तुम्हारे लिए अपने आत्म की आवाज सुने। अब भविष्य में भी ऐसा ही चाहते हैं तो यही फार्मूला आगे लगाना है। आज अच्छा कर रहे हैं तो कल भी अच्छा होगा ये आत्मा की आवाज आएगी।</p>
<p><strong>23को जाएगा अशोक नगर जैन समाज द्रव्य भेंट करने गोलाकोट</strong></p>
<p>जैन समाज अध्यक्ष राकेश कासंल ने बताया कि तीर्थाेदय तीर्थ गोलाकोट में मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ससंघ के श्री सानिध्य में चल रहे पंचकल्याणक महामहोत्सव में ‘तप कल्याणक 23 जनवरी को प्रातः 7.30 बजे होगा। सुभाषगंज प्रांगण से श्री दिगंबर जैन पंचायत कमेटी अशोकनगर के नेतृत्व में सभी संस्थाओं का प्रतिनिधि मंडल अपने अपने निजी वाहनों से ‘अष्ट मंगल द्रव्य’ लेकर जा रहा है। इस दौरान मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ को कमेटी श्रीफल करेगी। कमेटी के उपाध्यक्ष अजित वरोदिया, प्रदीप तारई, राजेंद्र अमन, महामंत्री राकेश अमरोद, मंत्री शैलेंद्र श्रागर मंत्री विजय धुर्रा, मंत्री संजीव भारिल्य, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर संजय केटी संयोजक उमेश सिंघई, मनीष सिंघई, मनोज रन्नौद, श्रेयांस घैला सहित अन्य प्रमुख जनों ने सभी से अनुरोध किया है।</p>
<p><strong>’तप कल्याणक पर होगी जैनेश्वरी दीक्षा</strong></p>
<p>जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने बताया कि इस दौरान महाराजा नाभी राय के दरबार का आयोजन होगा। आदि कुमार का राज्याभिषेक होगा। इसके साथ ही विभिन्न देशों के राजाओं द्वारा भेंट समर्पित की जायेगी। राज व्यवस्था अषि मषि कृषि विद्या वाणिज्य शिल्प का उपदेश दिया जाएगा। राज्य व्यवस्था के साथ कृषि क्रिया कार्य शिल्पा कला का मार्ग प्रशस्त किया जायेगा। इसके बाद नीलाजंना नृत्य नीलाजना का निधन और आदि कुमार का वैराग्य जैनेश्वरी दीक्षा मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज दी जायेगी।</p>
<p><strong>सब कुछ छोड़कर यदि जायेंगे तो आप भी सिद्ध बन सकते हैं’</strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि सब कुछ छोड़कर यदि जायेगा तो आप भी सिद्ध शिला को प्राप्त कर सकते हैं। जैसे तारा का समूह स्वच्छ जल में स्पष्ट दिखाई देता है वैसे ही ज्ञानी को सब कुछ स्पष्ट दिखाई देता है। ये मार्ग आनंद को देने वाला है। यहां मजा नहीं आया ये मजे से आगे आनंद देने वाले हैं। इन विकल्प जालों से आगे बढ़कर परम पद की आराधना करने का पुरूषार्थ करते रहना चाहिए। भेद विज्ञान से ही आराधना का मार्ग प्रशस्त होता है। ज्ञान दर्शन चारित्र वीर्य चार को जान लिया शुद्ध आत्मा को जानने से हमें आगे कुछ भी नहीं बचा। जिसने अपने आत्म को जान लिया। भाग्यवानों के लिए है।</p>
<p><strong>आज मंदिर परेशान लोग ज्यादा आ रहे हैं</strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि मैं नहीं चाहता हूं कि मेरे दरवाजे रोते हुए आये गरीब ना आवे रोगी ना आवे आ गया तो उनको भी ठीक कर दूंगा ये पंच कल्याणक भाग्यवानों के लिए हैं। ये मंदिर भाग्यवानांे के लिए है। भाग्यहीनो के लिए नहीं है। ये धर्म भाग् वानो के लिए है ये धर्म उनके लिए है। जिनके मन और तन सुखी है जैन कुल में उनका हुआ है, जो जन्म-जन्म के पुण्यवान हैं । इस पंचम काल का सबसे बड़ा दोष है कि यहां गरीबांे की भीड़ बढ़ रही है। आज मंदिर परेशान लोग ज्यादा आ रहे हैं। आज मंदिर में परेशान दःुखी और गरीब लोगांे की भीड़ बढ़ रही है। आज मंदिरों में देने वाले कम लेने ज्यादा आ रहे हो।</p>
<p><strong>जब तुम मंदिर में अर्घ्य चढ़ाते हो, उसी से अतिशय बढ़ता है</strong></p>
<p>कुछ लोग मंदिर में ख़ाली हाथ इसलिए जाते हैं कि भगवान को पता चले कि भक्त के पास कुछ नहीं है जैनी मंदिर में थाल भर-भर कर लेकर जाता है और खाली हाथ आता है। भगवान कहते हैं क्या बात है तू दूखी तो नहीं है। भगवान मुझे कुछ नहीं चाहिए अभी तक इतना दिया है कि तेरे लिए भी लेकर आया हूं मन्दिर कभी खाली हाथ नहीं जाना जब तुम मंदिर में अर्घ्य चढ़ाते हो। उसी से अतिशय बढ़ता है। उससे अतिशय बढ़ता चला जाता है। जितना भाग्यशाली बनकर पुण्यवान कर जिनालय की वंदना करने जाना मैं भाग्यवान हूं जो भगवान के पंच कल्याणक देखने आया हूं।</p>
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		<title>नववर्ष का स्वागत प्रभु भक्ति श्रीजी की शांतिधारा अभिषेक से : दीपक की रोशनी से जगमग हुआ श्री जी का मंदिर  </title>
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		<pubDate>Fri, 02 Jan 2026 12:53:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री चंद्र प्रभु दिगम्बर जैन मंदिर राजेंद्रनगर में 2026 अंग्रेजी नववर्ष का स्वागत अभिनंदन भगवान के श्री चरणों में भक्ति पूर्वक किया गया। संपूर्ण मंदिर को दीपक की रोशनी और विद्युत से सजाया गया। भगवान के जिन अभिषेक कलश हुए। इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230; इंदौर। श्री चंद्र प्रभु दिगम्बर जैन मंदिर राजेंद्रनगर में 2026 [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री चंद्र प्रभु दिगम्बर जैन मंदिर राजेंद्रनगर में 2026 अंग्रेजी नववर्ष का स्वागत अभिनंदन भगवान के श्री चरणों में भक्ति पूर्वक किया गया। संपूर्ण मंदिर को दीपक की रोशनी और विद्युत से सजाया गया। भगवान के जिन अभिषेक कलश हुए। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> श्री चंद्र प्रभु दिगम्बर जैन मंदिर राजेंद्रनगर में 2026 अंग्रेजी नववर्ष का स्वागत अभिनंदन भगवान के श्री चरणों में भक्ति पूर्वक किया गया। समाज प्रवक्ता दीपक पाटनी ओर कोषाध्यक्ष मुकेश पाटनी ने संयुक्त रूप से गुरुवार को प्रातः काल 5.30 बजे संपूर्ण मंदिर को दीपक की रोशनी और विद्युत से सजाया गया। भगवान के जिन अभिषेक कलश हुए। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि 2026 के प्रथम जिन अभिषेक शांतिधारा करने का सौभाग्य राहुल नेहा जैन ने प्राप्त किया। द्वितीय शांतिधारा कनकप्रभा रजनी, पर्व पाटनी, तृतीय शांतिधारा का प्रशांत शिल्पी जैन को सौभाग्य प्राप्त हुआ। सुनिल जैन ने बताया कि आज नौ जिन प्रतिमाओं पर नौ शांतिधारा पुण्यार्जक एवं 30 परिवार द्वारा की गई।</p>
<p><strong>दूर-दूर से आए श्रद्धालु, की शांतिधारा</strong></p>
<p>शांतिधारा का वाचन पाठशाला की बालिकाओं ने किया। शांतिधारा के पुण्यार्जक परिवार सोनकच्छ, हैदराबाद, अशोकनगर, ललितपुर ,सागर से भी आए हुए थे। उन्होंने परिवार सहित शांतिधारा में अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग किया। कार्यक्रम के बाद जो भी भक्त मंदिर में पधारे उन सभी परिवार जन को धनकुमार निर्मला सेठी ने प्रभावना वितरित की। समाज पदाधिकारी अध्यक्ष कैलाश पाटनी, डॉ सुधीर कटॉरिया, जम्बू पाटनी, वीरेंद्र सोगानी, आकाश जैन, नितेश जैन ने नववर्ष की शुभकामनाएं दी।</p>
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		<title>विंध्याचल की गोद में सजेगा महामहोत्सव : भियादांत अतिशय क्षेत्र में 12 मार्च को होगा भव्य महा मस्तकाभिषेक </title>
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		<pubDate>Sun, 21 Dec 2025 15:22:26 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ विंध्याचल पर्वत श्रृंखला की गोद में स्थित प्राचीन भियादांत अतिशय क्षेत्र में आगामी 12 मार्च 2026, गुरुवार (चैत्र कृष्ण नवमी) को भव्य भियादांत महामहोत्सव- 2026 का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर श्रद्धा, भक्ति और आस्था से ओतप्रोत वातावरण में 1008 सिद्ध मंत्रों के उच्चारण के साथ महा मस्तकाभिषेक संपन्न होगा। पढ़िए राजीव सिंघई की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> विंध्याचल पर्वत श्रृंखला की गोद में स्थित प्राचीन भियादांत अतिशय क्षेत्र में आगामी 12 मार्च 2026, गुरुवार (चैत्र कृष्ण नवमी) को भव्य भियादांत महामहोत्सव- 2026 का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर श्रद्धा, भक्ति और आस्था से ओतप्रोत वातावरण में 1008 सिद्ध मंत्रों के उच्चारण के साथ महा मस्तकाभिषेक संपन्न होगा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई की यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>चन्देरी (अशोकनगर)</strong>। विंध्याचल पर्वत श्रृंखला की गोद में स्थित प्राचीन भियादांत अतिशय क्षेत्र में आगामी 12 मार्च 2026, गुरुवार (चैत्र कृष्ण नवमी) को भव्य भियादांत महामहोत्सव- 2026 का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर श्रद्धा, भक्ति और आस्था से ओतप्रोत वातावरण में 1008 सिद्ध मंत्रों के उच्चारण के साथ महा मस्तकाभिषेक संपन्न होगा।</p>
<p><strong>विशिष्ट और दुर्लभ प्रतिमा</strong></p>
<p>अतिशय क्षेत्र में शैलाखंड पर उकेरी गई 108 इंच ऊँची भगवान आदिनाथ जी की दिव्य प्रतिमा अपनी विशिष्ट और दुर्लभ केश-विन्यास शैली के कारण जैन शिल्पकला की अनुपम कृति मानी जाती है। यह प्रतिमा महा-अतिशयकारी के रूप में विख्यात है, जहां दर्शन और वंदन से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएँ पूर्ण होने की लोक-मान्यता है।</p>
<p><strong>प्राकृतिक और आध्यात्मिक वातावरण</strong></p>
<p>प्रकृति की गोद में, हरित विंध्याचल पर्वतमाला के मध्य उर्वशी ऊर नदी के पावन तट पर स्थित यह तीर्थ शांत, सात्त्विक और आध्यात्मिक वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। आयोजन समिति के अनुसार यह महामहोत्सव आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के परम शिष्य एवं आचार्य श्री 108 समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती मुनि श्री 108 अविचल सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में तथा भगवान आदिनाथ के जन्म कल्याणक महोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है।</p>
<p><strong>महामहोत्सव का विधान</strong></p>
<p>महामहोत्सव के अंतर्गत स्वर्ण, रजत, पंचरत्न, तीर्थंकर और बड़े बाबा सहित विभिन्न कलशों से अभिषेक का विधान संपन्न होगा। आयोजन समिति ने बताया कि इस आयोजन से प्राप्त समस्त राशि का उपयोग पूर्ण पारदर्शिता के साथ अतिशय क्षेत्र के विकास, निर्माण कार्य, सौंदर्यीकरण और स्थायी तीर्थ सुविधाओं के विस्तार में किया जाएगा।</p>
<p><strong>श्रद्धालुओं और अतिथियों के लिए व्यवस्थाएँ</strong></p>
<p>महामहोत्सव के दौरान पधारने वाले साधु-संतों, विशिष्ट अतिथियों और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवास, भोजन, यातायात और अन्य मूलभूत व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जाएंगी। आयोजन को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है और तैयारियाँ प्रारंभ कर दी गई हैं।</p>
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		<title>जीवन खुशियों के इजहार के लिए मिला है आप सब इस इज्जत के हकदार : मुनि श्री सुधासागरजी ने कैदियों को जेल में दिए आशीर्वचन </title>
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		<pubDate>Fri, 19 Dec 2025 12:15:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जीवन हमें खुशियों के इजहार के लिए मिला है। इस इज्जत के हकदार आप सब है। यह उद्गार जिला जेल में बंदियों को संबोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने आगे कहा कि कैसे हमें इज्जत मिलती है, वह रास्ता हमें हनुमान बता रहे हैं। दुनिया भक्तों के बीच में भगवान [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जीवन हमें खुशियों के इजहार के लिए मिला है। इस इज्जत के हकदार आप सब है। यह उद्गार जिला जेल में बंदियों को संबोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने आगे कहा कि कैसे हमें इज्जत मिलती है, वह रास्ता हमें हनुमान बता रहे हैं। दुनिया भक्तों के बीच में भगवान को देखना चाहती है। <span style="color: #ff0000">अशोकनगर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>अशोकनगर।</strong> जीवन हमें खुशियों के इजहार के लिए मिला है। इस इज्जत के हकदार आप सब है। यह उद्गार जिला जेल में बंदियों को संबोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने आगे कहा कि कैसे हमें इज्जत मिलती है, वह रास्ता हमें हनुमान बता रहे हैं। दुनिया भक्तों के बीच में भगवान को देखना चाहती है। भगवान के भक्त बनने का मतलब ये नहीं है कि तुम मेरी जय-जयकार करो। भक्ति का मतलब तुम्हें लोग इज्जत से देखें। तुम्हारे लिए एक विचार आए कि जब भगवान का भक्त ऐसा है तो भगवान कैसा होगा। भगवान जानते हैं कि वह हर जगह नहीं पहुंच सकते, इसलिए भगवान भक्तों को भेज देता है। श्रीराम दुनिया में इतने नहीं जाने गए, सबसे पहले लंका में हनुमानजी पहुंचे और उन्होंने लंका वासियों को दिखा दिया ये तो सभी भक्त हैं। मुनिश्री ने कहा कि जेल तो उन दुश्मनों के लिए बनाई गई है जो देश विरोधी है। ये हमारी मातृभूमि को अपना नहीं मानते। जिन्हें वंदे मातरम कहने में शर्म आती है। जेल उनके लिए बनाई गई है। मुनिश्री ने कहा कि मैं अपराधी के बीच में नहीं आया। मैं अपने भाइयों के बीच आया हूं। इतना अंतर क्यों है? हम सब की मां भारत माता है। इस दौरान जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि जेलर साहब ने कई बार चातुर्मास कर रहे मुनि श्री के चरणों में पहुंचकर निवेदन किया कि जेल में बंद कैदियों को भी आपके मंगल प्रवचनों का लाभ मिले। मुनिश्री कृपा करके आज आपके बीच पधारे हैं। इस दौरान जेलर दीक्षित, जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, पूर्व महामंत्री विपिन सिंघई, टीआई चौहान ने दीप प्रज्वलित किया।</p>
<p><strong>ऐसे संतों को देख कर मन श्रद्धा से नतमस्तक है</strong></p>
<p>इस दौरान जेलर दीक्षित ने कहा कि हम सब पर कृपा करके संत श्री हमारे बीच पधारे हैं। मुझे आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के सान्निध्य का लाभ अमरकंटक के निकट डिंडोरी जिला जेल में मिला था। आज इन कैदियों के उद्धार के लिए आपके चरण कई किमी पैदल चलकर आए हैं। पैरों में कुछ पहनते नहीं है। ऐसे संतों को देख कर मन श्रद्धा से नतमस्तक हो जाता है। इस दौरान विपिन सिंघई ने भी अपनी बात रखी। इस दौरान अध्यक्ष राकेश कांसल, उपाध्यक्ष अजित वरोदिया, प्रदीप तारई, राजेंद्र अमन, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, मंत्री शैलेंद्र श्रागर, मंत्री विजय धुर्रा, मंत्री संजीव भारिल्य, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर संजय के टी, संयोजक मनोज रन्नौद, उमेश सिंघई, मनीष सिंघई, श्रेयांस घैला, थूवोनजी अध्यक्ष अशोक जैन टींगू, मिल महामंत्री मनोज भैसरवास साथ चल रहे थे।</p>
<p><strong>नशा करोगे तो खुशहाली नहीं आ सकती</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि हमारा देश गरीब क्यों है? हम अमेरिका की बराबरी ना करें। अमेरिका का पैसा गलत तरीके से आता है। उनके सब साधन ऐसे हैं कि आप सोच नहीं सकते लेकिन, यदि आप अपने खून पसीने की कमाई से नशा करेंगे, शराब पियोगे तो आपके जीवन में कभी खुशहाली नहीं ला सकते। जेल तुम्हारे लिए दुःख देने के लिए नहीं मिली। जेल तुम्हारे लिए सुधरने का मौका देती है। इस धरती पर इज्जत से ज़ीने के लिए ईश्वर ने भेजा था। तुम क्या कर बैठे कभी ईगो पाइंट मत बनना, नशा मत करना, जिस भारत मां की गोदी में जन्म लिया। उसके साथ हम ऐसा कोई अपराध ना करें, जिससे आप को जेल में जाना पड़े। हम अपने जीवन सुव्यवस्थित बनाएं।</p>
<p><strong>’हमारी संस्कृति महान जहां श्रीकृष्ण भी शांति दूत बन जाते हैं</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि श्री रामचन्द्र जी एक भाई का गला उतार लेते हैं। एक भाई को गले लगा लेते हैं हमारी संस्कृति कैसी महान है। नारायण श्रीकृष्ण जी दुर्याेधन को समझाने के लिए दूत बन गए। आपके जेल अधीक्षक दीक्षित जी निवेदन करने आए तो मन में विचार आया कि श्रीकृष्ण जी जैसी महाशक्ति दूत बनने को तैयार हो गए, जिस पद को निकृष्ट माना जाता है फिर भी वे विश्व शांति के लिए दूत बन गए तो मैंने सोचा कि मेरा क्या बिगड़ता है। तेरी जिंदगी सुधरी है हम चले तो कुचल गया विश्वास हम लोग सदा नीचे देखकर चलते हैं। हम लोग के पैर के नीचे कहीं चीटी भी ना आ जाए। यहां पचास प्रतिशत अपराधी इगो के कारण झुक ना सके और अपराध कर बैठे। पच्चीस प्रतिशत अपराधी है जो प्रमाणन के कारण अपराध पर उतर आए। पच्चीस प्रतिशत आदतन अपराधी होते हैं। मैं यहां 75 प्रतिशत अपराधी को बचा सकता हूं। बस आपको कुछ चीजें हैं, जिनको आप अपने जीवन में उतरते चले जाएं।</p>
<p><strong>जेल इसलिए बनाई कि विदेशी उत्पात ना मचा दें</strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि जब देश आजाद हुआ तो जेल इसलिए बनाई गई कि विदेशी आकर हमारे देश में उत्पात ना मचा दें। हम क्या कर बैठे, एक छोटे से जमीन के टुकड़े के लिए अपने भाई से लड़ पड़े। जाओ मैं तुम्हारे लिए आशीर्वाद देता हूं कि आप भाई के कारण भिखारी नहीं बनोगे। श्री राम चाहते तो कोर्ट केस कर देते, वो चाहते तो पंचायत बिठा देते। हम साधु संतों के पास आते। कानून से राज्य से सब तरफ से वे अधिकारी थे। फिर भी उन्होंने अपना अधिकार क्यों नहीं माना। बस देखा कि आदेश कौन दे रहा है। मां ने कहा है बस श्री रामचंद्र जी वन के लिए चल दिए।</p>
<p><strong> आप अपनी सजा को भी आप ईमानदारी में बदल दो </strong></p>
<p>हम लोग भगवान की पताका लेकर आए हैं। साधु संत दुनिया में हैं तो वे इस बात का प्रतीक है कि इस दुनिया भगवान है। निर्मोही बनो तो संत बनकर बनो, ड़ाकू बनकर नहीं। मुनिश्री ने कहा कि जिन बंदियों को सजा हो जाती है। उनके परिवार की क्या दशा होती है। अच्छे के सब साथी होते हैं। बुरे का कोई साथी नहीं होता। क्या मुंह दिखाओगे भगवान को, मैंने तुम्हे हनुमान बनने भेजा था, आप क्या कर बैठे? आप अपनी सजा को भी आप ईमानदारी में बदल दो कि तुम्हारे लिए जेल के दरवाजे खुल जाएं, सजा प्रायश्चित बन जाए। आदर्श कैदी बन जाएं।</p>
<p><strong>भगवान सबका सबका कल्याण करते हैं</strong></p>
<p>जेल अधीक्षक हम साधु संतों को इसलिए जब मौका मिले तो लेकर आते हैं कि आपका जीवन सुधर जाए। आप सजा को प्रायश्चित मानो। यदि आप ने ऐसा दृढ़ निश्चय कर लिया कि मैंने जो अपराध किया है मैं उसका प्रायश्चित पूरी ईमानदारी से करुंगा और फिर हो सकता है कि आपके अच्छे काम को देख कर आपकी सजा भी माफ हो जाए। जो भगवान सबका सबका कल्याण करते हैं, उन्हें तुम्हारे अपराध के कारण सजा देनी पड़ी। हम भारत माता के साथ अपराध कर रहे हैं। मैं संदेश लेकर आया हूं भगवन। आपको थोड़ा सा पश्चाताप होना चाहिए।</p>
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		<title>प्रतिष्ठा महा महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ का होगा शुभारंभ : मुनि श्रीसुधासागरजी ने कर्तव्य और कर्म को श्रेष्ठ बताया </title>
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		<pubDate>Sun, 07 Dec 2025 15:17:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ मुनि श्री श्रीसुधासागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य एवं प्रतिष्ठा चार्य प्रदीप भैया के निर्देशन होने जा रहे श्री मद् जिनेन्द्र पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ तथा गजरथ महोत्सव का शुभारंभ मंगलमय घटयात्रा के साथ होगा। अशोकनगर से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230; अशोक नगर। कई लोग अपनी जिंदगी दूसरों [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> मुनि श्री श्रीसुधासागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य एवं प्रतिष्ठा चार्य प्रदीप भैया के निर्देशन होने जा रहे श्री मद् जिनेन्द्र पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ तथा गजरथ महोत्सव का शुभारंभ मंगलमय घटयात्रा के साथ होगा। <span style="color: #ff0000">अशोकनगर से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>अशोक नगर</strong>। कई लोग अपनी जिंदगी दूसरों पर न्यौछावर कर अपने आप को धन्य मानते हैं। ऐसे लोग भी हैं, जो जगत में अपने प्राण न्यौछावर कर भी दूसरे को बचाना चाहते हैं। आगम में आया है कि जंगल में मुनि राज तपस्या कर रहे हैं। उसी समय एक शेर मुनि राज की ओर झपटा मारकर आगे बढ़ा तब उपस्थित एक सुकर मुनिराज को बचाने कूद पड़ा। सवाल ये कि मेरे मरने से कोई लाभ नहीं महाराज जी के जिंदा रहने से कितने लोगों का कल्याण होगा। ऐसे लोग भी दुनिया में हैं ये लोग इतना पुण्य कमा लेते हैं। जिसका पराबार नहीं है। यह उद्गार सुभाषगंज मैदान में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने व्यक्त किए।</p>
<p><strong>जब कोई साथ नहीं देता तो व्यक्ति टूट जाता है</strong></p>
<p>जिसे अपना संगा मानता है, जबवहीं साथ नहीं देता तो व्यक्ति पचास प्रतिशत टूट जाता है और जब किस्मत साथ नहीं देती तो व्यक्ति निराशा में चला जाता है और अपने आप की जीवन लीला समाप्त करने पर उतारू हो जाता है। जो दुःख से घबराकर आत्महत्या करने चले जाते हैं। कर्म के कारण उन्हें इससे भी ख़तरनाक दुःख मिलते हैं। जैसे जेल में पचास प्रतिशत से अधिक अपराधी मरना चाहते हैं लेकिन, मर नहीं पाते वहां ऐसी व्यवस्था बनाई गई है कि मरना चाहाने वाले मर भी नहीं सकता। ऐसे ही कर्म ने ऐसी व्यवस्था बनाई है कि नरक घनघोर दुःख है। वहां जीव मरना चहता है लेकिन, मर नहीं सकता दुनिया में वे लोग हैं जिसे लोग मारना चाहते हैंज़वह भी मरना चाहते हैं। दुनिया में ऐसे लोग भी हैं।</p>
<p><strong>घटयात्रा के साथ होगा पंच कल्याणक महोत्सव का शुभारंभ</strong></p>
<p>इस दौरान जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य एवं प्रतिष्ठा चार्य प्रदीप भैया के निर्देशन होने जा रहे श्री मद् जिनेन्द्र पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ तथा गजरथ महोत्सव का शुभारंभ मंगलमय घटयात्रा के साथ होगा। इस भव्य शोभायात्रा में भगवान जिनेन्द्र देव के रथयात्रा रजत विमान एवं पालकी यात्रा के साथ सुबह सात बजे सुभाष गंज मैदान से निकलेगा। यह भव्य शोभायात्रा आचार्य श्री विद्यासागर द्वार, भगवान महावीर मार्ग रेस्ट हाउस, गांधी पार्क एफओवी पुल, पछाडीखैडा रोड होते हुए पुरानी अनाज मंडी स्थित अयोध्या नगरी पहुंचकर धर्म सभा में बदल जाएगी। जहां मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज के मंगल प्रवचन होंगे। जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, उपाध्यक्ष अजित बरोदिया, प्रदीप तारई राजेन्द्र अमन, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, मंत्री शैलेन्द्र श्रागर, मंत्री विजय धुर्रा, मंत्री संजीव भारिल्य, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर संजय केटी, संयोजक मनोज रन्नौद, उमेश सिंघई, मनीष सिंघई, श्रेयांस घैला, थूवोनजी अध्यक्ष अशोक जैन टींगू, मिल महामंत्री मनोज भैसरवास, विपिन सिंघई समन्वय ग्रुप के साथियों सहित अन्य प्रमुख जनो ने सभी से अनुरोध किया है इस सभी कार्यक्रमों में भाग लें।</p>
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		<title>मुनिश्री सुधासागरजी का अशोकनगर में मंगल प्रवेश :  शांतिनाथ त्रिकाल चौबीस की वर्ष गांठ पर हुआ महा मस्तिकाभिषेक </title>
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		<pubDate>Tue, 02 Dec 2025 15:59:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री सुधाकरसागर जी ने कहा कि भारतीय दर्शन की सबसे बड़ी विशेषता है। ये सबको अपने में समाहित कर लेता है। अशोकनगर से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230; अशोकनगर। भारतीय दर्शन की सबसे बड़ी विशेषता है कि भक्त को निर्णय करना है, उसका भगवान कैसा हो। कल्पना आती है कि हमारा बेटा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री सुधाकरसागर जी ने कहा कि भारतीय दर्शन की सबसे बड़ी विशेषता है। ये सबको अपने में समाहित कर लेता है। <span style="color: #ff0000">अशोकनगर से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोकनगर।</strong> भारतीय दर्शन की सबसे बड़ी विशेषता है कि भक्त को निर्णय करना है, उसका भगवान कैसा हो। कल्पना आती है कि हमारा बेटा हो, आपके मन में विचार आता है कि आपकी बहूं कैसी है। आप मकान खरीदने पर विचार करते हैं। यह उद्गार सुभाषगंज मैदान में मुनि श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मेरे पड़ोसी कैसा हो ऐसा ही आपको विचार करना है कि मेरा गुरु कैसा हो जो गुण तुम्हारे अंदर नहीं है वो गुरु होना चाहिए। मात्र संत शब्द से गुरु नहीं हो सकता आचारण देखा जाता है श्रीराम के नाम के साथ आचरण देखो सारी दुनिया श्री राम के आदर्श को अपनाने को तैयार रहते हैं एक प्रसंग आता है। सीता जी की कोई ग़लती नही थी मन से वचन से काय से किसी भी प्रकार से कहीं गलती हो ही नहीं सकती थी। महासति सीता कहती हैं कि गलती मेरी है। मैं इतनी सुंदर क्यों थी रावण की दृष्टि मेरे तरफ गई ये होती है। महान व्यक्तित्व की विशेष आपके परिणाम ख़राब होते ही नही कैसे होते हैं। महासति सीता जी गलती नहीं होने पर भी अपनी ग़लती मान रहे हैं।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-95816" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251202-WA0026.jpg" alt="" width="720" height="739" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251202-WA0026.jpg 720w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251202-WA0026-292x300.jpg 292w" sizes="(max-width: 720px) 100vw, 720px" /> शोभायात्रा के साथ एक मंच पर सोलह संत</strong></p>
<p>आज हम सब का एक माह के बाद सौभाग्य जगा। मुनि श्री सुधासागरजी महाराज का विशाल संघ 16 पिच्छिका के साथ चार गुना बढ़कर आए। हम सब को मुनि श्री के सान्निध्य में श्री मद् जिनेन्द्र पंच कल्याणक महा महोत्सव विश्व शांति महायज्ञ एवं गजरथ महोत्सव प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया, मुकेश भैया के निर्देशन में मनाने जा रहे हैं। आइये हम सब अपने मन को अयोध्या की ओर ले चले।</p>
<p><strong>शोभायात्रा के साथ मुनि श्री का हुआ नगर प्रवेश</strong></p>
<p>एक माह के दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी के प्रवास के वाद परम पूज्य का दोपहर बाद नगर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। जहां जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, उपाध्यक्ष अजित वरोदिया, प्रदीप तारई, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, मंत्री शैलेन्द्र श्रागर, मंत्री विजय धुर्रा, मंत्री संजीव भारिल्य, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, आडिटर संजय केटी, संयोजक मनोज रन्नौद, उमेश सिंघई, मनीष सिंघई, श्रेयांस घैला, थूवोन जी अध्यक्ष अशोक जैन टींगू, मिल महामंत्री मनोज भैसरवास, विपिन सिंघई ने नगर के बाहर पहुंचकर श्रीफल भेंट किए। इसके बाद भव्य शोभायात्रा के साथ नगर प्रवेश कराया। जहां यह शोभायात्रा पार्श्वनाथ मंदिर, पछाड़ी खेड़ा रोड, बगीचा मंदिर, गांधी पार्क रेस्ट हाउस, भगवान महावीर स्वामी मार्ग, आचार्य श्री विद्यासागर दारा होते हुए सुभाष गंज पहुंचे। जहां भव्य धर्मसभा को संबोधित किया।</p>
<p><strong>व्यक्ति विफल क्यों हो जाता है समझें</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि व्यक्ति विफल क्यों हो जाता है। समझें विफलता दिखा रही है कि आपने सही तरीके से पुरुषार्थ नहीं किया। अज्ञानी व्यक्ति का सबसे बड़ा लक्ष्य है। वह विफल होने पर निराश हो जाता है। वह हर किसी पर आरोप लगाने लगता है। आप जिस वस्तु को चाह रहे हैं वह नहीं मिली तो उसका आरोप किसी अन्य व्यक्ति पर लगा देते हैं तो आगे भी विफल होंगे यहां तक कि आप गाड़ी सावधानी से चला रहे थे। कोई सामने आकर टकरा जाए आपकी गाड़ी बड़ी थी। वह आप को गालियां देगा। आपकी ग़लती नही है फिर भी आपने शांति से सुन लिया तो शांति से सुनने का चमत्कार देखना आगे आपको ऐसी कठिनाई नहीं होगी।</p>
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		<title>मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज से अखिल भारतवर्षीय वीतराग जिनशासन प्रभावना संगठन को मिला आशीर्वाद : जिनालयों की सेवा और सुरक्षा हेतु बनी नई संगठन को मिला पूज्य मुनिश्री का मंगल आशीष </title>
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		<pubDate>Mon, 10 Nov 2025 11:10:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सूंथड़ा तीर्थ से प्रेरित श्रद्धालुओं द्वारा गठित अखिल भारतवर्षीय वीतराग जिनशासन प्रभावना संगठन को अशोकनगर में मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के साक्षात आशीर्वाद प्राप्त हुआ। संगठन का उद्देश्य तीर्थों और जिनालयों की सुरक्षा व सेवा को बढ़ावा देना है। पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट… सूंथड़ा स्थित सुखोदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र के दर्शन के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सूंथड़ा तीर्थ से प्रेरित श्रद्धालुओं द्वारा गठित अखिल भारतवर्षीय वीतराग जिनशासन प्रभावना संगठन को अशोकनगर में मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के साक्षात आशीर्वाद प्राप्त हुआ। संगठन का उद्देश्य तीर्थों और जिनालयों की सुरक्षा व सेवा को बढ़ावा देना है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p>सूंथड़ा स्थित सुखोदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र के दर्शन के पश्चात जब श्रद्धालुओं में तीर्थों और जिनालयों की सेवा-सुरक्षा का भाव जागृत हुआ, तब अखिल भारतवर्षीय वीतराग जिनशासन प्रभावना संगठन की स्थापना का विचार आकार लिया। संगठन के अध्यक्ष डॉ. हरिश्चंद्र शास्त्री और महामंत्री प्रतीक शास्त्री (नोएडा) ने बताया कि संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों को अशोकनगर में विराजमान परम पूज्य मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के साक्षात दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मिला।</p>
<p>इस अवसर पर संगठन के कोषाध्यक्ष प्रिंस शास्त्री (देवांश, फिरोजाबाद), नाथूलाल जैन, लौकेश जैन (बनेठा) सहित अन्य सदस्यों ने मुनिश्री से संगठन के उद्देश्यों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि तीर्थों की सेवा, सुरक्षा और संवर्धन के लिए संगठन राष्ट्रव्यापी स्तर पर प्रभावना कार्य करेगा।</p>
<p>कार्यक्रम के दौरान प्रिंस शास्त्री (फिरोजाबाद) को लोकप्रिय धार्मिक कार्यक्रम ‘जिज्ञासा समाधान’ में परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।</p>
<p>ऋषभ शास्त्री आकाश (फिरोजाबाद) और गजेंद्र शास्त्री (छतरपुर) ने बताया कि संगठन के सदस्यों ने कार्यक्रम में अपनी जिज्ञासाएँ प्रस्तुत कीं, जिनका समाधान स्वयं मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने किया। उन्होंने हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में संगठन के भावी कार्यों हेतु मंगल आशीर्वाद दिया।</p>
<p>पूरे आयोजन में श्रद्धा, भक्ति और संगठन के प्रति समर्पण की भावना स्पष्ट रूप से झलक रही थी। यह आयोजन वीतराग जिनशासन की प्रभावना और तीर्थ सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।</p>
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		<title>मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज से अखिल भारतवर्षीय वीतराग जिनशासन प्रभावना संगठन को मिला आशीर्वाद : जिनालयों की सेवा और सुरक्षा हेतु बनी नई संगठन को मिला पूज्य मुनिश्री का मंगल आशीष </title>
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		<pubDate>Mon, 10 Nov 2025 06:33:02 +0000</pubDate>
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<p>सूंथड़ा तीर्थ से प्रेरित श्रद्धालुओं द्वारा गठित अखिल भारतवर्षीय वीतराग जिनशासन प्रभावना संगठन को अशोकनगर में मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के साक्षात आशीर्वाद प्राप्त हुआ। संगठन का उद्देश्य तीर्थों और जिनालयों की सुरक्षा व सेवा को बढ़ावा देना है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट…</span></p>
<hr />
<p>सूंथड़ा स्थित सुखोदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र के दर्शन के पश्चात जब श्रद्धालुओं में तीर्थों और जिनालयों की सेवा-सुरक्षा का भाव जागृत हुआ, तब अखिल भारतवर्षीय वीतराग जिनशासन प्रभावना संगठन की स्थापना का विचार आकार लिया। संगठन के अध्यक्ष डॉ. हरिश्चंद्र शास्त्री और महामंत्री प्रतीक शास्त्री (नोएडा) ने बताया कि संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों को अशोकनगर में विराजमान परम पूज्य मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के साक्षात दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मिला।</p>
<p>इस अवसर पर संगठन के कोषाध्यक्ष प्रिंस शास्त्री (देवांश, फिरोजाबाद), नाथूलाल जैन, लौकेश जैन (बनेठा) सहित अन्य सदस्यों ने मुनिश्री से संगठन के उद्देश्यों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि तीर्थों की सेवा, सुरक्षा और संवर्धन के लिए संगठन राष्ट्रव्यापी स्तर पर प्रभावना कार्य करेगा।</p>
<p>कार्यक्रम के दौरान प्रिंस शास्त्री (फिरोजाबाद) को लोकप्रिय धार्मिक कार्यक्रम ‘जिज्ञासा समाधान’ में परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।</p>
<p>ऋषभ शास्त्री आकाश (फिरोजाबाद) और गजेंद्र शास्त्री (छतरपुर) ने बताया कि संगठन के सदस्यों ने कार्यक्रम में अपनी जिज्ञासाएँ प्रस्तुत कीं, जिनका समाधान स्वयं मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने किया। उन्होंने हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में संगठन के भावी कार्यों हेतु मंगल आशीर्वाद दिया।</p>
<p>पूरे आयोजन में श्रद्धा, भक्ति और संगठन के प्रति समर्पण की भावना स्पष्ट रूप से झलक रही थी। यह आयोजन वीतराग जिनशासन की प्रभावना और तीर्थ सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।</p>
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		<title>एक हजार आठ कलशों से हुआ दर्शनोदय तीर्थ पर महामस्तकाभिषेक : अमरोद में तीर्थ चक्रवर्ती रथयात्रा का भव्य स्वागत, राष्ट्रसंत सुधासागरजी महाराज ने दिए प्रेरक संदेश </title>
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		<pubDate>Mon, 03 Nov 2025 16:43:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अमरोद में राष्ट्रसंत मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ के सानिध्य में आयोजित तीर्थ चक्रवर्ती रथयात्रा और 1008 कलशों से हुए महामस्तकाभिषेक ने श्रद्धा का अद्भुत वातावरण बना दिया। धर्मसभा में राष्ट्रसंत ने भारतीय संस्कृति, सुदामा-कृष्ण प्रसंग और नशा मुक्ति पर प्रेरक विचार रखे। पढ़िए राजीव सिंघई की पूरी रिपोर्ट… अशोकनगर जिले के अमरोद गांव [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अमरोद में राष्ट्रसंत मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ के सानिध्य में आयोजित तीर्थ चक्रवर्ती रथयात्रा और 1008 कलशों से हुए महामस्तकाभिषेक ने श्रद्धा का अद्भुत वातावरण बना दिया। धर्मसभा में राष्ट्रसंत ने भारतीय संस्कृति, सुदामा-कृष्ण प्रसंग और नशा मुक्ति पर प्रेरक विचार रखे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई की पूरी रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p>अशोकनगर जिले के अमरोद गांव में दर्शनोदय तीर्थ परिसर में रविवार को भव्य धार्मिक आयोजन हुआ। राष्ट्रसंत मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ, क्षुल्लक श्री गम्भीर सागरजी, क्षुल्लक श्री विदेह सागरजी महाराज, ब्रह्मचारी प्रदीप भाईया व मुकेश भाईया के मार्गदर्शन में तीर्थ चक्रवर्ती रथयात्रा का शुभारंभ सहोदरी से हुआ जो अमरोद पहुंची।</p>
<p><strong>स्वागत में उमड़ा जनसैलाब</strong></p>
<p>अमरोद पहुंचने पर मध्यप्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री राव ब्रजेन्द्र सिंह यादव और जिला पंचायत अध्यक्ष अजय यादव के नेतृत्व में अंचल के हजारों लोगों ने रथयात्रा का भव्य स्वागत किया। इस शोभायात्रा में रजत विमान सहित चक्रवर्ती रथ, पुष्प सज्जा और भक्ति गीतों के साथ वातावरण धर्ममय बन गया।</p>
<p><strong>महामस्तकाभिषेक में 1008 कलशों का प्रयोग</strong></p>
<p>दर्शनोदय तीर्थ पर भगवान की प्रतिमाओं का एक हजार आठ कलशों से महामस्तकाभिषेक किया गया। विभिन्न गांवों से आए श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चारण के साथ जल, दूध, चंदन, केसर और पुष्पों से भगवान का अभिषेक किया। पूरा परिसर “जय जिनेन्द्र” के उद्घोषों से गूंज उठा।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-93658" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251103-WA0036.jpg" alt="" width="1280" height="716" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251103-WA0036.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251103-WA0036-300x168.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251103-WA0036-1024x573.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251103-WA0036-768x430.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251103-WA0036-470x264.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251103-WA0036-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251103-WA0036-414x232.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251103-WA0036-990x554.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />धर्मसभा में राष्ट्रसंत का प्रवचन</strong></p>
<p>धर्मसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रसंत मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ने कहा – “जहां से सारी दुनिया का सोच समाप्त होता है, वहीं से भारतीय सोच प्रारंभ होती है।” उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति मात्र मनुष्यों द्वारा नहीं, बल्कि भगवानों द्वारा पुष्पित और पल्लवित की गई है। साधु संघ नगर-नगर विहार कर जन-जन को प्रभु संदेश पहुंचा रहा है।</p>
<p><strong>सुदामा-कृष्ण प्रसंग से दी जीवन प्रेरणा</strong></p>
<p>संतप्रवर ने सुदामा-कृष्ण संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि जैसे श्रीकृष्ण ने सुदामा के चरण धोकर सेवा की, वैसे ही दिगंबर साधु भी अपने संयम और त्याग से समाज को धन्य करते हैं। साधु सदा भक्तों के कल्याण की भावना रखते हैं।</p>
<p><strong>नशा मुक्ति और परिश्रम पर संदेश</strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि “जिस दिन भारत नशामुक्त होगा, उसी दिन भारत समृद्ध बनेगा।” उन्होंने पसीने की कमाई को पवित्र बताया और युवाओं से मेहनत और शिक्षा को जीवन का आधार बनाने की प्रेरणा दी।</p>
<p><strong>समाज के प्रमुख पदाधिकारी रहे उपस्थित</strong></p>
<p>इस अवसर पर जैन समाज अध्यक्ष राकेश कासंल, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, उपाध्यक्ष अजित बरोदिया, प्रदीप तारई, राजेन्द्र अमन, मंत्री शैलेन्द्र श्रागर, विजय धुर्रा, मीडिया प्रभारी अरविंद कनार सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।</p>
<p><strong>श्रद्धा और भक्ति से सराबोर रहा वातावरण</strong></p>
<p>पूरे अमरोद क्षेत्र में धार्मिक उल्लास, भक्ति और शांति का अद्भुत संगम देखने को मिला। रथयात्रा और महामस्तकाभिषेक में हजारों श्रद्धालुओं की भागीदारी ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।</p>
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