<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Ashada Month &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/ashada-month/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Sun, 23 Jun 2024 08:55:00 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=7.0.2</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>Ashada Month &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>बदनावर वर्द्धमानपुर नगर में भगवान आदिनाथ की कई प्रतिमा नदी किनारे व खेतों से प्राप्त हुई थी :  प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव का गर्भ कल्याणक इस कल्पकाल अथवा कालखंड का प्रथम महोत्सव </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/rishabhdevs_womb_kalyanak_is_the_first_festival_of_this_kalpakal_or_period/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/rishabhdevs_womb_kalyanak_is_the_first_festival_of_this_kalpakal_or_period/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 23 Jun 2024 08:55:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Ashada Month]]></category>
		<category><![CDATA[Astrology]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[discourse]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Krishna Paksha]]></category>
		<category><![CDATA[morena]]></category>
		<category><![CDATA[Prediction श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[religious meeting]]></category>
		<category><![CDATA[Senior Astrologer Dr. Hukumchand Jain]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[गर्भकल्याणक]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन सोसायटी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धर्मसभा]]></category>
		<category><![CDATA[प्रवचन]]></category>
		<category><![CDATA[बदनावर]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान आदिनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[वर्द्धमानपुर नगर]]></category>
		<category><![CDATA[वर्द्धमानपुर शोध संस्थान]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=62475</guid>

					<description><![CDATA[अषाढ़ कृष्ण दूज 23 जून रविवार को जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ का गर्भ कल्याणक जैन धर्मावलंबियों द्वारा सम्पूर्ण विश्व में मनाया जाएगा। यह इस कल्पकाल अथवा कालखंड का तीर्थंकर सम्बंधित प्रथम महोत्सव था, जिसे देवों द्वारा मनाया गया था। चूंकि यह वर्ष पारस वीर निर्वाण महोत्सव वर्ष भी जिसे पारस वीर सदी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>अषाढ़ कृष्ण दूज 23 जून रविवार को जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ का गर्भ कल्याणक जैन धर्मावलंबियों द्वारा सम्पूर्ण विश्व में मनाया जाएगा। यह इस कल्पकाल अथवा कालखंड का तीर्थंकर सम्बंधित प्रथम महोत्सव था, जिसे देवों द्वारा मनाया गया था। चूंकि यह वर्ष पारस वीर निर्वाण महोत्सव वर्ष भी जिसे पारस वीर सदी के रूप में मनाया जा रहा है। अतः यह पर्व विशेष उत्साह से मनाया जाएगा।<span style="color: #ff0000"> पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बदनावर।</strong> अषाढ़ कृष्ण दूज 23 जून रविवार को जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ का गर्भ कल्याणक जैन धर्मावलंबियों द्वारा सम्पूर्ण विश्व में मनाया जाएगा। यह इस कल्पकाल अथवा कालखंड का तीर्थंकर सम्बंधित प्रथम महोत्सव था, जिसे देवों द्वारा मनाया गया था। चूंकि यह वर्ष पारस वीर निर्वाण महोत्सव वर्ष भी जिसे पारस वीर सदी के रूप में मनाया जा रहा है। अतः यह पर्व विशेष उत्साह से मनाया जाएगा।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-62478" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/WhatsApp-Image-2024-06-23-at-2.08.23-PM.jpeg" alt="" width="1080" height="1079" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/WhatsApp-Image-2024-06-23-at-2.08.23-PM.jpeg 1080w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/WhatsApp-Image-2024-06-23-at-2.08.23-PM-300x300.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/WhatsApp-Image-2024-06-23-at-2.08.23-PM-1024x1024.jpeg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/WhatsApp-Image-2024-06-23-at-2.08.23-PM-150x150.jpeg 150w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/WhatsApp-Image-2024-06-23-at-2.08.23-PM-768x767.jpeg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/WhatsApp-Image-2024-06-23-at-2.08.23-PM-65x65.jpeg 65w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/WhatsApp-Image-2024-06-23-at-2.08.23-PM-990x989.jpeg 990w" sizes="(max-width: 1080px) 100vw, 1080px" />विशेष अवसरों से संबंधित</strong></p>
<p>वर्द्धमानपुर शोध संस्थान के ओम पाटोदी ने बताया कि कल्याणक शब्द तीर्थंकर भगवान के जीवन के विशेष अवसरों से संबंधित है। श्रमण संस्कृति के अनुसार हर कालखंड में 24 तीर्थंकर होते हैं। उन सभी के पांच कल्याणक मनाए जाते हैं। जिसमें प्रथम कल्याण गर्भ कल्याण होता है उसके पश्चात जन्म कल्याण तप कल्याण ज्ञान कल्याण और मोक्ष कल्याण। जब कोई महान आत्मा तीर्थंकर प्रकृति का बंध करके गर्भ में आती है तो उस समय देवों द्वारा विशेष उत्सव मनाया जाता है और तीर्थंकर के गर्भ में आने से 6 माह पूर्व और जन्म लेने तक कल 15 मां रत्नों की वृष्टि की जाती है। यह प्रथम उत्सव राजा नाभी राज एवं रानी मरू देवी राज्य अयोध्या नगरी में मनाया गया था। आदिनाथ भगवान इक्ष्वाकु वंश में हुएं उसी वंश में आगे चल कर भगवान राम का जन्म हुआ था। जिसका उल्लेख हमें पुराणों में मिलता है।</p>
<p><strong>समय-समय पर निकलीं जैन प्रतिमाएं</strong></p>
<p>पाटोदी ने बताया कि बदनावर नगर के भूगर्भ से समय-समय जो जैन प्रतिमाएं प्राप्त हुई उसमें कई प्रतिमाएं भगवान आदिनाथ जी की प्राप्त हुई थी। जो नगर के अलावा भी अन्य नगरों के मंदिर में विराजमान हैं वहीं धार व उज्जैन के संग्रहालय में भी प्रदर्शित हैं। बदनावर नगर में वर्तमान में दिगम्बर श्वेताम्बर दो मंदिर में भगवान आदिनाथ जी की अत्यंत प्राचीन प्रतिमा विराजमान हैं। वही धार नगर के दिगम्बर जैन मंदिर में आदिनाथ भगवान की एक भव्य प्रतिमा विराजमान हैं जो बदनावर नदी किनारे से प्राप्त हुई थी। इसी प्रकार विगत कुछ वर्षों पूर्व बलवंती नदी के गहरी करण के समय आदिनाथ भगवान की एक विशाल खंडित प्रतिमा निकली थी जिसे बाद में उड़िया मंदिर परिसर में पुरातत्व विभाग द्वारा रखा गया था। इसी प्रकार उज्जैन के जयसिंहपुरा जैन संग्रहालय में आदिनाथ दीर्घा में 112 क्रमांक पर प्रदर्शित एक प्रतिमा जिसके प्राप्त स्थान का विवरण उपलब्ध नहीं है सम्भवतः बदनावर से ही प्राप्त हुई थी।</p>
<p><strong>देश में कई जगह है विशाल व प्राचीन जिनबिम्ब</strong></p>
<p>वर्तमान में हम ऋषभदेव आदिनाथ जी की मुर्ति अथवा तीर्थ क्षेत्र के की बात करें तो भगवान ऋषभदेव जी की एक 84 फुट की विशाल प्रतिमा भारत में मध्य प्रदेश राज्य के बड़वानी जिले में बावनगजा नामक स्थान पर अवस्थित है। मांगीतुंगी (महाराष्ट्र ) में भगवान ऋषभदेव की 108 फुट की विशाल प्रतिमा है। ग्वालियर के गोपाचल पर्वत पर उत्कीर्ण हजारों जिनप्रतिमाओं में ऋषभदेव की कई प्रतिमाएं देखी जा सकती है। उदयपुर जिले के एक प्रसिद्ध शहर का नाम भी &#8220;ऋषभदेव&#8221; है जो भगवान ऋषभदेव के नाम पर ऋषभदेव पड़ा। यहां पर भगवान ऋषभदेव का एक विशाल जैन मंदिर विद्यमान है। भगवान आदिनाथ ऋषभदेव की विशाल पद्मासन प्रतिमा मूलनायक के रूप में सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर जिला दमोह में एक विशाल नागौरी शैली में निर्मित लाल पाषाण के मंदिर में विराजमान है। इस प्रतिमा को बड़े बाबा के नाम से जाना जाता है। भारत में अनेकों स्थान पर ऋषभनाथ भगवान के जिनालय विद्यमान हैं। इनमें कुछ अति प्राचीन हैं। बद्रीनाथ में भी ऋषभदेव को शिव रूप में पूजा जाता है। तमिलनाडु कर्नाटक में प्रचुर मात्रा में से पर्वतों पर गुफाओं में जिनप्रतिमाओं का निर्माण हुआ है जो अतिप्राचीन है।<br />
कुछ प्राचीन मंदिरों के नाम भी आदिनाथ के नाम से विख्यात है जैसे आदिनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र चांदखेड़ी खानपुर राजस्थान, दिगंबर जैन दर्शनोदय अतिशय क्षेत्र थूबोनजी जिला अशोकनगर मध्य प्रदेश, दिगंबर जैन सर्वोदय तीर्थ क्षेत्र अमरकंटक आदि प्रमुख हैं। भगवान आदिनाथ का मंदिर खजुराहो का एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर पूर्वी मंदिर समूह में स्थित है। इस मंदिर में भगवान आदिनाथ की पत्थर के काले रंग की प्रतिमा देखने के लिए मिलती है, जो बहुत ही खूबसूरत लगती है। देश ही नहीं यहां तक कि विदेश के संग्रहालयों में भी भगवान आदिनाथ की उपस्थिति दर्ज है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/rishabhdevs_womb_kalyanak_is_the_first_festival_of_this_kalpakal_or_period/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पश्चिमी देशों में फिर युद्ध के आसार : आषाढ़ मास कृष्ण पक्ष केवल 13 दिन का होगा </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/krishna_paksha_will_be_of_only_13_days_in_the_month_of_ashada/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/krishna_paksha_will_be_of_only_13_days_in_the_month_of_ashada/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 23 Jun 2024 08:41:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Ashada Month]]></category>
		<category><![CDATA[Astrology]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[discourse]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Krishna Paksha]]></category>
		<category><![CDATA[morena]]></category>
		<category><![CDATA[Prediction श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[religious meeting]]></category>
		<category><![CDATA[Senior Astrologer Dr. Hukumchand Jain]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[आषाढ़ मास]]></category>
		<category><![CDATA[कृष्ण पक्ष]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन सोसायटी]]></category>
		<category><![CDATA[ज्योतिष]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धर्मसभा]]></category>
		<category><![CDATA[प्रवचन]]></category>
		<category><![CDATA[भविष्यवाणी]]></category>
		<category><![CDATA[मुरैना]]></category>
		<category><![CDATA[वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=62466</guid>

					<description><![CDATA[वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि कोई तिथि जब दो सूर्योदय को स्पर्श करती है तो तिथि वृद्धि होती है और जब कोई तिथि किसी भी सूर्योदय को स्पर्श नहीं करती तो क्षय होती है। इस बार आषाढ़ कृष्ण पक्ष में प्रतिपदा तिथि और त्रियोदशी तिथि दोनों तिथि सूर्योदय के समय न होने [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि कोई तिथि जब दो सूर्योदय को स्पर्श करती है तो तिथि वृद्धि होती है और जब कोई तिथि किसी भी सूर्योदय को स्पर्श नहीं करती तो क्षय होती है। इस बार आषाढ़ कृष्ण पक्ष में प्रतिपदा तिथि और त्रियोदशी तिथि दोनों तिथि सूर्योदय के समय न होने से इनका क्षय हो गया । इससे आषाढ़ कृष्ण पक्ष 15 दिनों की जगह 13 दिनों का रह गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> चंद्र माह में दो पक्ष होते हैं एक कृष्ण पक्ष दूसरा शुक्ल पक्ष । दोनों में पंद्रह पंद्रह दिन यानी तिथियां होती हैं। कई बार एक पक्ष में एक तिथि बढ़ जाती है कभी एक तिथि कम हो जाती है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि कोई तिथि जब दो सूर्योदय को स्पर्श करती है तो तिथि वृद्धि होती है और जब कोई तिथि किसी भी सूर्योदय को स्पर्श नहीं करती तो क्षय होती है। इस बार आषाढ़ कृष्ण पक्ष में प्रतिपदा तिथि और त्रियोदशी तिथि दोनों तिथि सूर्योदय के समय न होने से इनका क्षय हो गया । इससे आषाढ़ कृष्ण पक्ष 15 दिनों की जगह 13 दिनों का रह गया। जैन ने कहा यह संयोग द्वापर युग के महाभारत काल में बना था। इस बार आषाढ़ मास कृष्ण पक्ष 23 जून से शुरू होकर 05 जुलाई को समाप्त होगा।</p>
<p>शुक्ल पक्ष 06 जुलाई से 21 जुलाई तक चलेगा। बहुत सालों बाद आषाढ़ कृष्ण पक्ष केवल 13 दिन का पड़ रहा है । ऐसा संयोग महाभारत काल में पड़ा था। यह एक प्रकार का दुर्योग है। इस बार पूरे आषाढ़ माह में पांच शनिवार, पांच रविवार होंगे। शनि ग्रह 29 जून को रात 12:38 बजे वक्री होंगे, जो 15 नवंबर को मार्गी होंगे। बुध 25 जून की रात 04:12 बजे पश्चिम में उदय होंगे और शुक्र ग्रह 05 जुलाई को पश्चिम में मिथुन राशि में उदय होंगे। 29 जून के बाद से जुलाई अगस्त माह में दक्षिण, पश्चिम दिशा शहरों में भारी वर्षा बाढ़ से बड़ी हानि हो सकती है। पश्चिमी दो देशों में नए युद्ध की शुरुआत हो सकती है।</p>
<p>जिसमे दूसरे देश भी सामिल हो सकते हैं। ये युद्ध का खतरा 29 जून से 15 अगस्त तक शनि के कुंभ राशि में वक्री रहने तक रहेगा। आषाढ मास में शुक्र व बुध ग्रह का उदय जल प्लावन, बाढ़, प्राकृतिक प्रकोप, नई बीमारी का भय दे सकता है। 13 दिनों का पक्ष का संयोग बहुत सालों बाद आता है। महाभारत युद्ध के पहले 13 दिन के पक्ष का दुर्योग काल आया था। उस समय बड़ी जन धन हानि हुई थी। घनघोर युद्ध हुआ था। ज्योतिष शास्त्र में 13 दिनों का पक्ष अच्छा नहीं माना गया है। ऐसा दुर्योग होने से अतिवृष्टि, अनावृष्टि, राजसत्ता का परिवर्तन, जाति भेद, रंग भेद आदि उपद्रव होने की आशंका पूरे साल बनी रहती है।</p>
<p>ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है समस्त प्रकृति को पीड़ित करने वाला यह दुर्योग संक्रामक रोगों की भी वृद्धि कर सकता है। इस पक्ष में मांगलिक कार्य, व्रतारम्भ, उद्यापन, भूमि भवन का क्रय विक्रय, गृह प्रवेश आदि शुभ कार्यों को नहीं करना चाहिए।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/krishna_paksha_will_be_of_only_13_days_in_the_month_of_ashada/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
