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	<title>Aryka Vigyanmati Mataji श्रीफल जैन न्यूज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन :  शोधन करके ध्यानपूर्वक भोजन करो- आर्यिका विज्ञानमति माताजी </title>
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		<pubDate>Sat, 22 Jul 2023 10:58:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आर्यिका विज्ञानमति माताजी ने प्रवचन के दौरान कहा कि जब तक जीव के अनंतानुबंधी क्रोध, मान, माया, लोभ समाप्त नहीं होती तब तक सम्यगदर्शन रूपी सूर्य का उदय नहीं होता। ये अनंतानुबंधी कषाय अंदर ही अंदर अपना काम करती रहती है और बाहर भी आ जाती है। हमें इससे हमेशा बचने का प्रयास करना चाहिए। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आर्यिका विज्ञानमति माताजी ने प्रवचन के दौरान कहा कि जब तक जीव के अनंतानुबंधी क्रोध, मान, माया, लोभ समाप्त नहीं होती तब तक सम्यगदर्शन रूपी सूर्य का उदय नहीं होता। ये अनंतानुबंधी कषाय अंदर ही अंदर अपना काम करती रहती है और बाहर भी आ जाती है। हमें इससे हमेशा बचने का प्रयास करना चाहिए। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजीव सिंघाई की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> उदयनगर में चातुर्मासिक धर्मसभा में आर्यिका विज्ञानमति माताजी ने अनंतानुबंधी कषाय का सम्यगदर्शन से कनेक्शन के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि क्या होता है विषफल?, हम क्या व कैसे खा रहे हैं और क्या करना चाहिए महिला मंडल को? सबसे बड़ा धर्म क्या है? क्रिया बड़ी या भाव? चंचल क्या है&#8230;</p>
<p>-जब तक जीव के अनंतानुबंधी क्रोध, मान, माया, लोभ समाप्त नहीं होती तब तक सम्यगदर्शन रूपी सूर्य का उदय नहीं होता। ये अनंतानुबंधी कषाय अंदर ही अंदर अपना काम करती रहती है और बाहर भी आ जाती है। हमें इससे हमेशा बचने का प्रयास करना चाहिए।</p>
<p>-अभी हम इसलिए पढ़ा रहे हैं कि हमारे जाने के बाद तुम 1 घंटा बैठकर धर्म ध्यान कर सको, माला फेरो, पूजन, स्वाध्याय कर लो और विनय पूर्वक एकाग्रता के साथ रोज सुबह शाम नए नए पाठ करना।</p>
<p>&#8211; मैंने नींद में, सपने में भी खा लिया, लड़ाई कर ली, झूठ बोल दिया&#8230;अनेक पाप किए&#8230; फिर उठते ही पुनः विषयों के वन में कूद पड़ा और पंचेद्रीय विषयों के अनेक विषफल खा लिए, जिसके परिणामस्वरूप बार-बार जन्म मरण के कष्ट भोगना पड़ रहे हैं।</p>
<p>-मैने बिना देखे, बिना शोधन किए ही टीवी/मोबाइल देखते-देखते भोजन कर लिया&#8230;क्या करें माताजी टाइम ही नहीं मिलता है, कब टीवी देखेंगे&#8230;अब भोजन करते-करते टीवी देख रहे हैं और भोजन में क्या-क्या खा लिया पता नहीं। कल ही एक व्यक्ति आया। उसने बताया साबुत हरी मिर्च मुंह से कट करने पर जिंदा लट मुंह के अंदर चली गई&#8230;तुरंत मुंह से निकाली, उस समय भोजन छोड़ दिया, अब तक बहुत ग्लानि हो रही है, प्रायश्चित दे दो। मिर्ची जैसी चीज में लट है&#8230;सोचो हमने टीवी मोबाइल देखते हुए आज तक जाने कितने जीव खा लिए होंगे।</p>
<p>-भाई खाने की प्रत्येक वस्तु चाहे वो कितनी ही फ्रेश हो,कितनी साफ सुथरी,सुंदर हो उसमें जीव की उत्पत्ति होगी ही&#8230; बादाम,काजू, पिस्ता&#8230;खाने की कोई भी वस्तु के दो टुकड़े किए बगैर उसे गलाएं नहीं, खाएं नहीं&#8230;दाल,चावल, सब्जी सबमें लट, इल्ली, तिरुला आदि जीव हो सकते हैं।</p>
<p>-बिना देखे, गपशप करते करते खाते रहते हैं, खाते रहते हैं&#8230;जीव कहीं से भी आ सकते हैं, भोजन में गिर सकते हैं इसलिए शोधन करके ध्यानपूर्वक भोजन करो, हो सके तो अंतराय टाल के भोजन करो। भले ही पांच मिनिट के बाद वापस खा लेना लेकिन अंतराय होने पर हाथ धोकर के उठ जाओ और नौ बार णमोकार पढ़कर फिर खा लेना क्योंकि आपके एक/दो बार ही खाएंगे, ऐसा नियम नहीं है।</p>
<p>-तुम्हारी पूजन की द्रव्य में भी कितनी बार तिरुले निकलते हैं इसका पाप किसको लगेगा&#8230; क्रम से अध्यक्ष, मंत्री, व्यवस्थापक, धर्मात्मा फिर सामान्य जन&#8230;.सबको पाप लगेगा।</p>
<p>-महिला मंडल क्या काम का है&#8230;देखो महिला मंडल इसीलिए होता है कि हमारे मंदिर में सुव्यवस्थित काम चलता रहे। नियम बना लो कि हर रविवार को मंदिर में द्रव्य शोधन का काम करेंगे। आप पूजा नहीं कर पा रहे हो तो भी आपको पूजा का फल मिलेगा। आप जीव रक्षा का कार्य कर रहे हो। अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है संसार में।</p>
<p>-अहिंसा परमो धर्म बाकी सब क्रियाएं उसकी बाड़ है, धर्म की मुख्य फसल अहिंसा है&#8230; बाड़ मजबूत करते रहोगे और फसल ही नहीं होगी तो ऐसी बाड़ किस काम की।</p>
<p>-प्रश्न आया है कि भाव से क्रिया करना चाहिए या द्रव्य से?</p>
<p>-ऐसा है कि भाव अपने स्थान पर बहुत बड़ा होता है और क्रिया अपने स्थान पर बहुत बड़ी होती है, अकेले भाव से काम नहीं चलता और अकेले क्रिया से भी कुछ नहीं होता इसलिए भाव पूर्वक क्रिया करना चाहिए।</p>
<p>-प्रश्नोत्तर रत्न मालिका</p>
<p>-चंचल क्या है</p>
<p>-यौवन, धन और आयु, जिस प्रकार कमल के पत्ते पर पानी की बूंद एक पल में फिसल कर नीचे गिर जाती है उसी प्रकार जवानी, धन व आयु कब आई और कब चली गई पता नहीं चलता।</p>
<p>-धन कब, कहां,कैसे चला जाता है, पता नहीं चलता, चक्रवर्ती का इतना वैभव चक्रवर्ती के जाते ही कहां चले जाता है, पता नहीं चलता। ये सब पुण्य के अधीन है। लक्ष्मी चंचल रहती है, कहते हैं कि लक्ष्मी खड़ी रहती है और खड़े आदमी का कोई विश्वास नहीं कि वो कब भाग जाए।</p>
<p>-आयु सागरों (करोड़ों करोड़ों वर्ष) की आयु भी कब समाप्त हो जाती है, पता नहीं चलता।</p>
<p>-चंद्रमा की किरणों के समान शांति देने वाले संसार में कौन हैं?</p>
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