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	<title>Aryika Swasti Bhushan Mata Ji &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Aryika Swasti Bhushan Mata Ji &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>प्रथम बार सराक जैन प्रतिभाओं का हुआ सम्मान : ओड़िसा में शिक्षण शिविरों का हुआ समापन </title>
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		<pubDate>Wed, 13 May 2026 08:34:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के 70 वें अवतरण दिवस के अवसर पर आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज, आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी, आर्यिका श्री आर्ष मति माता जी, आर्यिकाश्री सुज्ञान मति माता जी की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से उड़ीसा, झारखंड, पश्चिम बंगाल के विभिन्न अंचलों में आयोजन हो रहा है। भुवनेश्वर से पढ़िए, यह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के 70 वें अवतरण दिवस के अवसर पर आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज, आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी, आर्यिका श्री आर्ष मति माता जी, आर्यिकाश्री सुज्ञान मति माता जी की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से उड़ीसा, झारखंड, पश्चिम बंगाल के विभिन्न अंचलों में आयोजन हो रहा है। <span style="color: #ff0000">भुवनेश्वर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> भुवनेश्वर।</strong> आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के 70 वें अवतरण दिवस के अवसर पर आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज, आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी, आर्यिका श्री आर्ष मति माता जी, आर्यिकाश्री सुज्ञान मति माता जी की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से उड़ीसा, झारखंड, पश्चिम बंगाल के विभिन्न अंचलों में आयोजन हो रहा है। उड़ीसा प्रांत के भुवनेश्वर पुरी जिले के विभिन्न स्थानों पर 5 से 10 मई तक चले शिक्षण शिविरों का समापन कार्यक्रमों के साथ हुआ। ब्र.मंजुला दीदी, ब्र. मनीष भैया के निर्देशन में ग्रीष्मकालीन ज्ञान संस्कार बाल शिक्षण शिविरों का समापन विशिष्ट जनों की उपस्थिति में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ संपन्न हुआ। आचार्य ज्ञानसागर जी के चित्र के समग्र दीप प्रज्वलन, मंगलाचरण के साथ कार्यक्रम का प्रारंभ हुआ। स्थानीय शिविर सहयोगियों का सम्मान, बच्चों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गई। ज्ञान दर्पण भाग 1,2, पूजन प्रशिक्षण,मेहंदी, ड्राइंग, सिलाई में प्रथम, द्वितीय,तृतीय पुरस्कार दिए गए एवं सभी शिविरार्थीओं को सांत्वना पुरस्कार दिए गए। इसके साथ ही कक्षा 10वीं एवं 12वीं में अच्छे अंक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को प्रमाण पत्र, मेडल, स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया गया। शिक्षण शिविरों अध्यापन कराने के लिए शिविर मुख्य संयोजक मनीष शास्त्री विद्यार्थी सागर, संहसंयोजक पं. जयकुमार दुर्ग, पं. राजकुमार शास्त्री कर्द, पं. शिखरचंद्र जैन भिलाई,राखी जैन का सम्मान सराक ट्रस्ट द्वारा किया गया।</p>
<p><strong>ऐसे आयोजन से धर्म की प्रभावना</strong></p>
<p>शिक्षण शिविरों के विषय में जैनम फाउंडेशन दिल्ली के सत्येंद्र जैन ने कहा कि ऐसे आयोजन से धर्म की प्रभावना होती है और यह हमेशा होते रहने चाहिए, शीतकालीन शिविरों के लिए अभी से हम लोगों का आमंत्रण है, हम सभी आपका सहयोग करेंगे। केंद्र कार्यकर्ता हेमंत जैन सराक ने कहा हमें आगे के कार्यक्रम के लिए अभी से तैयारी करनी पड़ेगी, तब जाकर हम बहुत अच्छे तरीके से कार्यक्रम कर सकेंगे। शिविर संयोजक मनीष शास्त्री विद्यार्थी ने कहा कि ऐसे आयोजन में अगर स्थानीय समाज सहयोग करती है तो कार्यक्रम निश्चित ही सफल होते हैं और आप लोगों का हमें सहयोग मिलेगा तो हम शीतकालीन शिविरों का भव्य आयोजन करेंगे। जिससे पूरे सराक क्षेत्र में शिक्षण शिविरों का सफलतम आयोजन हो सकें। शिक्षण शिविरों की आयोजक भारतवर्षीय दिगंबर जैन सराक ट्रस्ट दिल्ली एवं पश्चिम बंगाल, झारखंड उड़ीसा स्थानीय सराक ट्रस्ट के सहयोग से आयोजित ज्ञान संस्कार बाल शिक्षण शिविरों का सफलतम कार्यक्रम संपन्न हो सका।</p>
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		<title>प्रथम बार सराक जैन प्रतिभाओं का हुआ सम्मान : ओड़िसा में शिक्षण शिविरों का हुआ समापन </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 10 May 2026 13:26:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के 70 वें अवतरण दिवस के अवसर पर आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज, आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी, आर्यिका श्री आर्ष मति माता जी, आर्यिकाश्री सुज्ञान मति माता जी की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से उड़ीसा, झारखंड, पश्चिम बंगाल के विभिन्न अंचलों में आयोजन हो रहा है। भुवनेश्वर से पढ़िए, यह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के 70 वें अवतरण दिवस के अवसर पर आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज, आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी, आर्यिका श्री आर्ष मति माता जी, आर्यिकाश्री सुज्ञान मति माता जी की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से उड़ीसा, झारखंड, पश्चिम बंगाल के विभिन्न अंचलों में आयोजन हो रहा है। <span style="color: #ff0000">भुवनेश्वर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> भुवनेश्वर।</strong> आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के 70 वें अवतरण दिवस के अवसर पर आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज, आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी, आर्यिका श्री आर्ष मति माता जी, आर्यिकाश्री सुज्ञान मति माता जी की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से उड़ीसा, झारखंड, पश्चिम बंगाल के विभिन्न अंचलों में आयोजन हो रहा है। उड़ीसा प्रांत के भुवनेश्वर पुरी जिले के विभिन्न स्थानों पर 5 से 10 मई तक चले शिक्षण शिविरों का समापन कार्यक्रमों के साथ हुआ। ब्र.मंजुला दीदी, ब्र. मनीष भैया के निर्देशन में ग्रीष्मकालीन ज्ञान संस्कार बाल शिक्षण शिविरों का समापन विशिष्ट जनों की उपस्थिति में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ संपन्न हुआ। आचार्य ज्ञानसागर जी के चित्र के समग्र दीप प्रज्वलन, मंगलाचरण के साथ कार्यक्रम का प्रारंभ हुआ। स्थानीय शिविर सहयोगियों का सम्मान, बच्चों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गई। ज्ञान दर्पण भाग 1,2, पूजन प्रशिक्षण,मेहंदी, ड्राइंग, सिलाई में प्रथम, द्वितीय,तृतीय पुरस्कार दिए गए एवं सभी शिविरार्थीओं को सांत्वना पुरस्कार दिए गए। इसके साथ ही कक्षा 10वीं एवं 12वीं में अच्छे अंक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को प्रमाण पत्र, मेडल, स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया गया। शिक्षण शिविरों अध्यापन कराने के लिए शिविर मुख्य संयोजक मनीष शास्त्री विद्यार्थी सागर, संहसंयोजक पं. जयकुमार दुर्ग, पं. राजकुमार शास्त्री कर्द, पं. शिखरचंद्र जैन भिलाई,राखी जैन का सम्मान सराक ट्रस्ट द्वारा किया गया।</p>
<p><strong>ऐसे आयोजन से धर्म की प्रभावना</strong></p>
<p>शिक्षण शिविरों के विषय में जैनम फाउंडेशन दिल्ली के सत्येंद्र जैन ने कहा कि ऐसे आयोजन से धर्म की प्रभावना होती है और यह हमेशा होते रहने चाहिए, शीतकालीन शिविरों के लिए अभी से हम लोगों का आमंत्रण है, हम सभी आपका सहयोग करेंगे। केंद्र कार्यकर्ता हेमंत जैन सराक ने कहा हमें आगे के कार्यक्रम के लिए अभी से तैयारी करनी पड़ेगी, तब जाकर हम बहुत अच्छे तरीके से कार्यक्रम कर सकेंगे। शिविर संयोजक मनीष शास्त्री विद्यार्थी ने कहा कि ऐसे आयोजन में अगर स्थानीय समाज सहयोग करती है तो कार्यक्रम निश्चित ही सफल होते हैं और आप लोगों का हमें सहयोग मिलेगा तो हम शीतकालीन शिविरों का भव्य आयोजन करेंगे। जिससे पूरे सराक क्षेत्र में शिक्षण शिविरों का सफलतम आयोजन हो सकें। शिक्षण शिविरों की आयोजक भारतवर्षीय दिगंबर जैन सराक ट्रस्ट दिल्ली एवं पश्चिम बंगाल, झारखंड उड़ीसा स्थानीय सराक ट्रस्ट के सहयोग से आयोजित ज्ञान संस्कार बाल शिक्षण शिविरों का सफलतम कार्यक्रम संपन्न हो सका।</p>
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		<title>नवागढ़ अतिशय क्षेत्र पर मनाया मोक्ष सप्तमी पर्व : अतिशयकारी भगवान अरनाथ स्वामी का अभिषेक एवं शांतिधारा हुई </title>
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		<pubDate>Fri, 01 Aug 2025 08:01:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्रागैतिहासिक नवागढ़ अतिशय क्षेत्र में श्री पारसनाथ भगवान का निर्वाण महोत्सव संगीतमय विधान के साथ गुरुकुलम के बच्चों के साथ मनाया गया। इस कार्यक्रम में विशेष सानिध्य ब्रह्मचारी श्री जय कुमार निशांत जी का रहा। नवागढ़ से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230; नवागढ़। प्रागैतिहासिक नवागढ़ अतिशय क्षेत्र में श्री पारसनाथ भगवान का निर्वाण [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>प्रागैतिहासिक नवागढ़ अतिशय क्षेत्र में श्री पारसनाथ भगवान का निर्वाण महोत्सव संगीतमय विधान के साथ गुरुकुलम के बच्चों के साथ मनाया गया। इस कार्यक्रम में विशेष सानिध्य ब्रह्मचारी श्री जय कुमार निशांत जी का रहा। <span style="color: #ff0000">नवागढ़ से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नवागढ़।</strong> प्रागैतिहासिक नवागढ़ अतिशय क्षेत्र में श्री पारसनाथ भगवान का निर्वाण महोत्सव संगीतमय विधान के साथ गुरुकुलम के बच्चों के साथ मनाया गया। इस कार्यक्रम में विशेष सानिध्य ब्रह्मचारी श्री जय कुमार निशांत जी का रहा। कार्यक्रम का प्रारंभ सातवीं सदी के भोंयरे के साथ भू गर्भ से प्रकटित मनोकामनापूर्ण अतिशयकारी भगवान अरनाथ स्वामी के अभिषेक एवं शांतिधारा के साथ हुआ। इसमें गुरुकुलम के बच्चों ने उत्साह पूर्वक अपनी-अपनी सामर्थ्य के अनुसार श्रद्धा राशि समर्पित करके भगवान अरनाथ जी कि शांतिधारा की एवं दैनिक पूजन के साथ भगवान पारसनाथ स्वामी का विधान हुआ।</p>
<p><strong>सौजन्य एवं पुण्यार्जन इनका रहा</strong></p>
<p>इस अवसर पर राजेंद्र कुमार कुसुम लता जैन सपरिवार ग्वालियर द्वारा निर्वाण लाडू समर्पित किया गया एवं दिनेश कुमार जैन खजांची सपरिवार ग्वालियर वालों द्वारा वात्सल्य भोज का आयोजन किया गया।</p>
<p><strong>निर्वाण महोत्सव की जानकारी दी</strong></p>
<p>कार्यक्रम के समापन पर क्षेत्र महामंत्री वीरचंद्र नैकोरा एवं क्षेत्र निर्देशक ब्रह्मचारी जय निशांत भैयाजी द्वारा तीर्थंकर भगवान् पार्श्वनाथ के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कमठ द्वारा किए गए उपसर्ग एवं पारसनाथ भगवान की सहनशीलता एवं क्षमाशीलता के बारे में बताते हुए गुरुकुलम के सभी छात्रों को पारसनाथ भगवान के निर्माण महोत्सव की विशेष जानकारी दी गई।</p>
<p>आर्यिका स्वस्ति भूषण जी का मिल रहा आशीर्वाद महामंत्री वीरचंद ने नवागढ़ क्षेत्र के इतिहास एवं गुरुकुलम के बारे में जानकारी देते हुए सभी लोगों को आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज के द्वारा किए गए पंचकल्याणक उनके आशीर्वाद एवं भारत गौरव गणिनी आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी का विशेष आशीर्वाद नवागढ़ को प्राप्त हो रहा है। अवगत कराते हुए आचार्य श्री ज्ञान सागर जी एवं स्वस्तिभूषण माताजी के प्रति अपना विनम्र भाव निवेदित किया।</p>
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		<title>श्रद्धा से पाषाण में भी परमात्मा नजर आते हैं - स्वस्तिभूषण माताजी : कल्पद्रुम महामंडल विधान में 800 अर्घ्य किए अर्पित </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 06 May 2025 07:47:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बोहरा कॉलोनी स्थित शिवम वाटिका में आचार्य श्री इंद्रनंदी जी महाराज ससंघ एवं आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी के सानिध्य एवं विधानाचार्य कपिल भैया के निर्देशन में कल्पद्रुम महामंडल विधान जारी है। समवशरण में विराजित चतुर्दिशा में विराजमान श्रीजी का प्रातः जिनाभिषेक, शांतिधारा मुनि आर्यिका ससंघ के सानिध्य में की गई। कल्पतरु महामंडल विधान के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p>बोहरा कॉलोनी स्थित शिवम वाटिका में आचार्य श्री इंद्रनंदी जी महाराज ससंघ एवं आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी के सानिध्य एवं विधानाचार्य कपिल भैया के निर्देशन में कल्पद्रुम महामंडल विधान जारी है। समवशरण में विराजित चतुर्दिशा में विराजमान श्रीजी का प्रातः जिनाभिषेक, शांतिधारा मुनि आर्यिका ससंघ के सानिध्य में की गई। कल्पतरु महामंडल विधान के 800 अर्घ्य श्रीफल सहित श्रीजी को समर्पित किए गए। केकड़ी से पढ़िए, <strong><span style="color: #ff0000">अभिषेक जैन लुहाड़िया और रमेश बंसल पारस की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>केकड़ी</strong>। जब भक्ति की लहर आत्मा में उमड़ती है तो सब कुछ भूल जाते हैं। बाह्य प्रक्रिया उसे बिल्कुल भी नजर नहीं आती है। श्रद्धा से पाषाण में भी परमात्मा नजर आते हैं। श्री कल्पतरु महामंडल विधान तीर्थंकर महावीर के अद्वितीय महिमा मंडल मंगल अर्घ्याें द्वारा पवित्र पूजा करने का एक मात्र उपाय है। बोहरा कॉलोनी स्थित शिवम वाटिका में आचार्य श्री इंद्रनंदी जी महाराज ससंघ एवं आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी के सानिध्य एवं विधानाचार्य कपिल भैया के निर्देशन में मय संगीत एवं साज बाज के साथ चल रहे कल्पद्रुम महामंडल विधान के अंतर्गत विधान में चौबीस तीर्थकरों की स्तुति करने पर ऐसा लगता है की संपूर्ण जैन दर्शन की आत्मा का सुख अनुभव हो रहा है इस अवसर पर आर्यिका माताजी ने कहा कि एक-एक नाम के मंत्र का जाप करने से कर्मों के बंधन ढीले पड़ते हैं। प्रातः जिनाभिषेक एवं शांतिधारा एवं समवशरण में विराजित चतुर्दिशा में विराजमान श्री जी का अभिषेक मुनिश्री तथा आर्यिका ससंघ के सानिध्य में किए गए। मीडिया प्रभारी रमेश बंसल ने बताया कि कल्पतरु महामंडल विधान के 800 अर्घ्य श्रीफल सहित श्री जी के समर्पित किए गए। समाज के अमरचंद चौरूका ने बताया कि मंगलवार को प्रातः आचार्य मुनि आर्यिका ससंघ के सानिध्य में कल्पतरु महामंडल विधान का समापन पूर्णाहुति एवं विश्व शांति कामना महायज्ञ होगा। शाम को आरती भक्ति आनंद यात्रा सहित प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम का संचालन कपिल भैया द्वारा किया गया।</p>
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		<title>विख्यात विद्वान व लेखक डॉ. कपूर चंद्र जैन स्मृति ग्रन्थ का हुआ भव्य लोकार्पण : देशभर के शताधिक विद्वानों की उपस्थिति में हुआ भव्य आयोजन </title>
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		<pubDate>Tue, 06 Jun 2023 10:19:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[&#160; श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र सोनागिर जी में मूर्धन्य मनीषी श्रद्धेय डॉ. कपूरचंद जैन खतौली के स्मृति ग्रन्थ का भव्य विमोचन समारोह पूज्य मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज ससंघ व गणनी आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी के ससंघ सान्निध्य में शास्त्री परिषद के अध्यक्ष डॉ. श्रेयांस कुमार जी जैन बड़ौत की अध्यक्षता में भारत [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र सोनागिर जी में मूर्धन्य मनीषी श्रद्धेय डॉ. कपूरचंद जैन खतौली के स्मृति ग्रन्थ का भव्य विमोचन समारोह पूज्य मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज ससंघ व गणनी आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी के ससंघ सान्निध्य में शास्त्री परिषद के अध्यक्ष डॉ. श्रेयांस कुमार जी जैन बड़ौत की अध्यक्षता में भारत सरकार के पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य के विशिष्ट आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए डॉ सुनील जैन संचय की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>सोनागिर (दतिया)।</strong> श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र सोनागिर जी में मूर्धन्य मनीषी श्रद्धेय डॉ. कपूरचंद जैन खतौली के स्मृति ग्रन्थ का भव्य विमोचन समारोह पूज्य मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज ससंघ व गणनी आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी के ससंघ सान्निध्य में शास्त्री परिषद के अध्यक्ष डॉ. श्रेयांस कुमार जी जैन बड़ौत की अध्यक्षता में भारत सरकार के पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य के विशिष्ट आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। सर्व प्रथम ज्योति जैन झांसी व पंडित पवन दीवान मुरैना एवं डॉ कपूर चंद्र जी खतौली के परिजनों ने मंगलाचरण किया। इसके बाद विद्वानों, अतिथियों आदि ने चित्र अनावरण व दीप प्रज्वलन किया।</p>
<p><strong>दशों दिशाएं सुगंधित कीं</strong></p>
<p>इस मौके पर मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज ने कहा कि डॉ. कपूर चंद्र जी खतौली ने कपूर की तरह दशों दिशाएं सुगंधित कीं।भले ही वे हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनके कार्य उन्हें सदैव जीवंत बनाए रखेंगे। वे चिंतन शील मनीषी थे। गणनी आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी ने कहा कि डॉ. कपूर चंद्र जी जितने दिन जिए शान जिए। वे मूर्धन्य मनीषी तथा अद्भुत प्रतिभा के धनी थे। वे विविध विद्याओं में पारंगत, अनोखे विषय पर अनोखे कार्य करने वाले मनीषी थे।</p>
<p><strong>शोध पीठ की हो स्थापना</strong></p>
<p>प्रारंभ में डॉ जय कुमार जैन मुज्जफरनगर ने डॉ कपूर चंद्र जी का खतौली का परिचय देते हुए उनके जीवन से जुड़े संस्मरण सुनाए। विशिष्ट अतिथि पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य झांसी ने डॉ. कपूर चंद्र जी के अवदान को ऐतिहासिक बताया तथा उनकी स्मृति में बुंदेलखंड विश्विद्यालय झांसी में एक शोध पीठ स्थापना की बात कही। समारोह का संचालन पंडित विनोद जैन रजवांस व राजेन्द्र महावीर सनावद ने संयुक्त रूप से किया। आभार डॉ. ज्योति जैन खतौली ने व्यक्त किया। डॉ. कपूर चंद्र जैन के भाई सुमत जैन सीए झांसी ने अपने अनेक संस्मरण सुनाते हुए उन्हें जीवन निर्माता बताया।</p>
<p><strong>नई विधाओं पर किए कार्य</strong></p>
<p>शास्त्री परिषद के अध्यक्ष डॉ. श्रेयांस कुमार जैन बड़ौत ने कहा कि अपने को तिल-तिल गलाकर साहित्य साधना करने वाले सरस्वती के वरद पुत्र डॉ कपूर चंद्र जैन के द्वारा नयी-नयी विधाओं पर कार्य किए गए। डॉ. शीतल चंद्र जैन प्राचार्य जयपुर ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में जैन उनकी 700 पृष्ठों की कृति ऐतिहासिक दस्तावेज बन गयी है। इस पुस्तक को तैयार करने में उन्होंने अथक श्रम किया है।</p>
<p><strong>सहज-सरल मनीषी थे</strong></p>
<p>शास्त्री परिषद के महामंत्री ब्र. जय कुमार जी निशांत भैया टीकमगढ़ ने कहा कि वे सहज- सरल मनीषी थे इसलिए उनका इसलिए कोई विरोधी नहीं था। शास्त्रि परिषद के वे उपाध्यक्ष व पुरस्कार संयोजक रहे।  वे पूरे जीवन प्रभावना व साहित्य सपर्या में संलग्न रहे। प्राचार्य अरुण जैन सांगानेर ने कहा कि मध्यप्रदेश के दतिया मंडल के वरधुआ नामक छोटे से गांव में जन्में डॉ. जैन ने शिक्षा और समाज के क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए जो सदैव स्मरणीय रहेंगे।.डॉ. सुरेन्द्र जैन भारती बुरहानपुर ने कहा कि उनके साथ मेरा भाई जैसा संबंध था। वे सरल और सहज थे। वे आज भी याद हैं और कभी भूलेंगे भी नहीं।</p>
<p><strong>अक्षय आहार योजना थी महत्त्वपूर्ण</strong></p>
<p>प्रोफेसर विजय कुमार जैन लखनऊ ने डॉ. जैन को बड़ा भाई बताते हुए उनकी साहित्यिक यात्रा को याद किया, साथ ही प्रोफेसर वृषभ प्रसाद जी लखनऊ के अवदान को रेखांकित करते हुए उनके द्वारा कोरोना काल में चलाई गई अक्षय आहार की योजना को महत्वपूर्ण बताया। डॉ. ब्र. राकेश भैया सागर ने विलक्षण प्रतिभा के धनी डॉ. कपूर चंद्र जी ने जैन विद्या शोध संदर्भ पुस्तक तैयार कर महत्वपूर्ण कार्य किया, यह पुस्तक शोधार्थियों के लिए वरदान साबित हुई।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-45626" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-06-at-3.39.20-PM.jpeg" alt="" width="1504" height="1004" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-06-at-3.39.20-PM.jpeg 1504w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-06-at-3.39.20-PM-300x200.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-06-at-3.39.20-PM-1024x684.jpeg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-06-at-3.39.20-PM-768x513.jpeg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-06-at-3.39.20-PM-414x276.jpeg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-06-at-3.39.20-PM-470x313.jpeg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-06-at-3.39.20-PM-640x426.jpeg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-06-at-3.39.20-PM-130x86.jpeg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-06-at-3.39.20-PM-187x124.jpeg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-06-at-3.39.20-PM-990x661.jpeg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-06-at-3.39.20-PM-1320x881.jpeg 1320w" sizes="(max-width: 1504px) 100vw, 1504px" /></p>
<p><strong>सरलता की थे प्रतिमूर्ति</strong></p>
<p>दैनिक विश्व परिवार के संपादक प्रवीण जैन झांसी ने कहा कि ज्ञान यज्ञ में अनूठी आहुति देने वाले  डॉ साब सरलता की प्रतिमूर्ति थे। डॉ. सुनील संचय ललितपुर ने कहा कि डॉ. कपूर चंद्र जी की कृतियाँ श्रम साध्य, व्यय साध्य और समय साध्य थीं। वे अजातशत्रु थे। उनकी कालजयी कृतियां ऐतिहासिक दस्तावेज हैं, जिनसे वे सदैव अमर रहेंगे। इस अवसर पर जसवीर राणा, डॉ. ज्योति जैन खतौली, डॉ. चंद्र मोहन जैन,  कार्तिक जैन, अनिकेत जैन, विभु जैन, वैभव जैन आदि वक्ताओं ने अपने विचार रखे। स्मृति ग्रंथ का विमोचन मंचासीन अतिथियों, विद्वानों एवं परिजनों ने किया।</p>
<p><strong>इन्हें किया गया सम्मानित</strong></p>
<p>स्मृति ग्रंथ के प्रधान संपादक डॉ. श्रेयांस कुमार जैन बड़ौत, संपादक मंडल ब्र. जय कुमार निशांत जी, पंडित विनोद कुमार जैन रजवांस, डॉ. सुरेन्द्र जैन भारती, ब्र. जिनेश मलैया, प्रबंध संपादक सुमत चंद्र जैन सीए, डॉ. ज्योति जैन, सह संपादक राजेन्द्र जैन महावीर, डॉ. सुनील संचय, डॉ. चंद्रमोहन जैन, जसवीर राणा, परामर्श मंडल के डॉ. शीतल चंद्र जैन, डॉ. जय कुमार जैन,  प्राचार्य अरुण जैन एवं संयोजक मंडल के नीरज जैन, कार्तिक जैन, अनिकेत जैन, विभु जैन, वैभव जैन आदि को सम्मानित किया गया।</p>
<p><strong>पत्नी ज्योति जैन का योगदान</strong></p>
<p>उल्लेखनीय है कि अनेक पुरस्कारों से अलंकृत डॉ कपूरचंद जी खतौली ने स्वतंत्रता संग्राम में जैन, प्राकृत एवं जैन विद्या शोध संदर्भ, संविधान विषयक जैन अवधारणाएं, धवल कीर्तिमान, जैन विरासत जैसी कालजयी कृतियों का प्रणयन कर अमूल्य योगदान दिया है। उनकी धर्मपत्नी डॉ. ज्योति जैन भी एक विदुषी हैं। उन्होंने छाया की तरह उनके कार्यों में योगदान दिया। डॉ. साब के जाने के बाद वे निरंतर सक्रिय होकर डॉ. साब के पद चिह्नों पर चल रहीं हैं।</p>
<p><strong>ये रहे मौजूद</strong></p>
<p>इस अवसर पर देश भर के विभिन्न अंचलों से आमंत्रित 125 विद्वानों की गरिमामयी उपस्थिति रही। समारोह में डॉ कपूरचंद जैन खतौली के जीवनवृत्त पर एलईडी के माध्यम से उनके जीवन के विविध पक्षों को दिखाया गया। इस मौके पर कमल चंद जी अहमदाबाद, नरेंद्र भंडारी, अमित भंडारी ,रसम भंडारी, सुमित कुमार सीए ,संजीव कुमार, अमित कुमार, आशीष कुमार, प्रमोद कुमार हैदराबाद, संजीव कुमार खंडवा, श्रीमती कल्पना, बेबी, श्रुति ,अनंत ,रोमी, प्रियंका ,ऋषि, राखी, रेसी, दीपू ,उदित ,कार्तिक, अनिकेत, पंडित वीरेश कानपुर, आमोद कानपुर , प्रकाशजी झांसी , मीहिका जैन, अरहम जैन आदि परिजन प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-45624" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-06-at-3.39.20-PM-2.jpeg" alt="" width="1280" height="732" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-06-at-3.39.20-PM-2.jpeg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-06-at-3.39.20-PM-2-300x172.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-06-at-3.39.20-PM-2-1024x586.jpeg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-06-at-3.39.20-PM-2-768x439.jpeg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-06-at-3.39.20-PM-2-990x566.jpeg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<p><strong>प्रोफेसर वृषभ प्रसाद जी लखनऊ स्मृति विशेषांक &#8216;बुलेटिन&#8217; का हुआ विमोचन</strong></p>
<p>इस मौके पर शास्त्री परिषद के उपाध्यक्ष रहे प्रोफेसर वृषभ प्रसाद जी लखनऊ स्मृति विशेषांक &#8216;बुलेटिन&#8217; का भी विमोचन किया गया। इस मौके पर विद्वानों ने कहा कि प्रोफेसर वृषभ प्रसाद जी लखनऊ भाषा शास्त्र के बहुत बड़े विद्वान थे। उनका अवदान भी अविस्मरणीय है। इन्होंने भाषा के विकास में अतुलनीय योगदान दिया है। आपका जन्म एटा में 2 जनवरी 1959 को हुआ। आप प्रसिद्ध विद्वान बाबू कामता प्रसाद जी के सुपौत्र थे। मंत्र विज्ञान और ज्योतिष के भी अच्छे विद्वान थे। कोरोना काल में आपने अक्षय योजना के माध्यम से जो रसोई संचालित कराई उससे हजारों लोग लाभान्वित हुए। अनेक बार विदेश जाकर प्रभावना की। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का स्नेह और वात्सल्य उन्हें विशेष रूप से मिलता रहा। उन्होंने अनेक कृतियों का प्रणयन किया। उनके असामयिक निधन से अपूरणीय क्षति हुई है। इस मौके पर प्रोफेसर वृषभ प्रसाद जी की धर्मपत्नी एवं प्रोफेसर विजय कुमार जैन, डॉ. राका जैन, डॉ. पत्रिका जैन आदि उनके परिजन प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।</p>
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