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	<title>Aryika Agam Mati Mataji &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Aryika Agam Mati Mataji &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>मुनि श्री विशोध सागर जी का हुआ मंगल आगमन : अगवानी में उमड़ पड़ी त्यागियों की नगरी </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 18 Mar 2026 13:39:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[त्यागियों की नगरी में मुनि श्री विशोध सागर जी महाराज का मंगल प्रवेश बुधवार प्रातःकाल की मंगल बेला में हुआ। आचार्य श्री आर्जवसागर जी महाराज  के शिष्य मुनि श्री विशोधसागर जी का मंगल विहार खंडवा से सनावद में हुआ। सनावद से पढ़िए, यह खबर&#8230; सनावद। त्यागियों की नगरी में मुनि श्री विशोध सागर जी महाराज [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>त्यागियों की नगरी में मुनि श्री विशोध सागर जी महाराज का मंगल प्रवेश बुधवार प्रातःकाल की मंगल बेला में हुआ। आचार्य श्री आर्जवसागर जी महाराज  के शिष्य मुनि श्री विशोधसागर जी का मंगल विहार खंडवा से सनावद में हुआ। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> त्यागियों की नगरी में मुनि श्री विशोध सागर जी महाराज का मंगल प्रवेश बुधवार प्रातःकाल की मंगल बेला में हुआ। मीडिया प्रभारी सन्मति जैन काका ने बताया कि आचार्य श्री आर्जवसागर जी महाराज  के शिष्य मुनि श्री विशोधसागर जी का मंगल विहार खंडवा से सनावद में हुआ। नगर में पूर्व से विराजमान आर्यिका आगम मति माताजी सहित सभी समाजजनों ने ढकलगांव फाटा खंडवा रोड पर पहुंचकर मुनि श्री की अगवानी की। सभी समाज जन सम्मिलित होकर धर्म प्रभावना में सहयोगी बने। मुनि श्री ने नगर के जिन मंदिरों के दर्शन किए एवं श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर में आचार्य श्री कुमुद नंदी जी महाराज एवं मुनि श्री विप्रणत सागर जी महाराज से प्रति नमोस्तु किया।</p>
<p>इसके बाद आपस में आचार्य श्री एवं मुनि श्री के बीच आध्यात्मिक चर्चा हुई। बड़े मंदिर के हॉल में प्रवचन सभा का शुभारंभ संगीता पाटोदी के मंगलाचरण से हुई। जिसमें सर्वप्रथम आर्यिका आगम मति माताजी ने अपनी देशना में कहा कि जिस पर गुरु की कृपा बनी रहती है, उसका बाल भी बांका नहीं हो सकता है। सदैव</p>
<p>बड़े बन के नही रहना सदैव छोटे बनकर ही अपना जीवन निर्वाह करना और अपनी आत्मा से परमात्मा बनना है।</p>
<p><strong>साधु के दर्शन पुण्य से मिलते हैं</strong></p>
<p>अगले क्रम में आचार्य श्री कुमुद नंदी जी महाराज ने कहा कि जिस मनुष्य में ईमानदारी, वफादारी, समझदारी, जवाबदारी ये चारों गुण जिस मनुष्य में है। उसका जीवन सार्थक है एवं आचार्य श्री विप्रणत सागर जी महाराज ने दिव्य देशना में कहा कि साधुओं के दर्शन भाग्य से मिलते हैं। साधु के दर्शन पुण्य से मिलते हैं। साधुओं के वंदना करने के भाव पुण्यात्मा जीवों के हुआ करते हैं। भगवान के प्रति नमोकार के प्रति तीर्थो के प्रति गुरुओं के प्रति हमारा जैसा समर्पण हुआ करता है, उसे अनुसार फल की प्राप्ति होती है।</p>
<p><strong>इनको मिला आहारदान का सौभाग्य</strong></p>
<p>इस अवसर पर सभी समाजजन उपस्थित थे। आचार्य श्री कुमुद नंदी महाराज एवं आगम मति माताजी को आहार दान का सौभाग्य पाटनी ब्रदर्स परिवार एवं आचार्य श्री विप्रणत सागर जी एवं मुनि श्री विशोध सागर जी महाराज को आहारदान का सौभाग्य अरुणकुमार जैन खरगोन वाले परिवार को प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>मुनि श्री का हुआ मंगल विहार</strong></p>
<p>मुनि श्री विशोध सागर जी महाराज का मंगल विहार शाम को बेड़ियां के लिए हुआ। रात्रि विश्राम सताजना में है एवं बेड़ियां में मंगल प्रवेश 19 मार्च की प्रातः काल की मंगल बेला में होगा।</p>
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		<title>आर्यिका आगम मति माताजी के सानिध्य में बाहुबली भगवान को निर्वाण लाडू अर्पण : मोक्ष कल्याणक पर भक्ति में लीन रहे सनावद नगर के समाजजन </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 15 Feb 2026 12:34:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[नगर के गौरव वात्सल्य वारिधी पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के आशीर्वाद से 23 वर्ष पूर्व स्थापित हुए दिगंबर जैन श्री क्षेत्र सिद्धाचल पोदनपुरम में भगवान बाहुबली का प्रतिष्ठापना महोत्सव एवं भगवान बाहुबली को निर्वाण लाड़ू आर्यिका आगममति माता जी सानिध्य में अर्पण किया गया। सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>नगर के गौरव वात्सल्य वारिधी पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के आशीर्वाद से 23 वर्ष पूर्व स्थापित हुए दिगंबर जैन श्री क्षेत्र सिद्धाचल पोदनपुरम में भगवान बाहुबली का प्रतिष्ठापना महोत्सव एवं भगवान बाहुबली को निर्वाण लाड़ू आर्यिका आगममति माता जी सानिध्य में अर्पण किया गया। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद</strong>। नगर के गौरव वात्सल्य वारिधी पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के आशीर्वाद से 23 वर्ष पूर्व स्थापित हुए दिगंबर जैन श्री क्षेत्र सिद्धाचल पोदनपुरम में भगवान बाहुबली का प्रतिष्ठापना महोत्सव एवं भगवान बाहुबली को निर्वाण लाड़ू आर्यिका आगममति माता जी सानिध्य में अर्पण किया गया।</p>
<p>सन्मति जैन काका ने बताया कि आचार्य सुनील सागर जी महाराज की शिष्या आर्यिका आगममति माताजी के सानिध्य में प्रातः सर्वप्रथम भगवान बाहुबली का पंचामृत चरणा अभिषेक वारिश जैन, हेमंत काका, संदीप जैन, प्रशांत चौधरी,सुधीर जैन ने किया।</p>
<p><strong>भगवान बाहुबली का महापूजन किया</strong></p>
<p>भगवान बाहुबली का महापूजन किया गया जिसमें अलग-अलग परिवारों के द्वारा अर्घ्य समर्पित किए। इस अवसर पर शांति धारा करने का अवसर मुन्ना लाल जी सागर रजनीश कुमार जैन को प्राप्त हुआ वही भगवान को मुख्य निर्वाण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य सार्थक प्रफुल्ल सलीत कुमार जैन परिवार को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर आर्यिका माताजी ने कहा कि भगवान बाहुबली जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) के पुत्र और भरत चक्रवर्ती के छोटे भाई थे, जिन्हें अहिंसा और महान तपस्या का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने अपने भाई से युद्ध के बाद सांसारिक जीवन त्यागकर 1 वर्ष तक कायोत्सर्ग मुद्रा में ध्यान किया, जिससे वे &#8216;केवली&#8217; (सर्वज्ञ) बने।</p>
<p><strong>अत्यंत कठिन तपस्या के बाद वे मोक्षगामी बने</strong></p>
<p>वे अयोध्या के राजा थे और उनकी दो रानियां थीं। एक रानी से 99 पुत्र और एक पुत्री तथा दूसरी से गोम्मटेश्वर भगवान बाहुबली तथा एक पुत्री सुंदरी थी, बाहुबली का अपने ही भाई भरत से उनके शासन, सत्ता के लोभ तथा चक्रवर्ती बनने की इच्छा के कारण दृष्टि युद्ध, जल युद्ध और मल्ल युद्ध हुआ था.इसमें बाहुबली विजयी रहे, लेकिन उनका मन ग्लानि से भर गया और उन्होंने सब कुछ त्यागकर तप करने का निर्णय लिया अत्यंत कठिन तपस्या के बाद वे मोक्षगामी बने. जैन धर्म में भगवान बाहुबली को पहला मोक्षगामी माना जाता है। उन्होंने एक वर्ष तक स्थिर खड़े होकर (कायोत्सर्ग) ध्यान किया, जिस दौरान उनके शरीर पर लताएं और सर्पों ने वामियां (बांबी) बना ली थीं।</p>
<p><strong>23 वर्ष पूर्व हुई सिद्धाचल पोदनपुरम की स्थापना </strong></p>
<p>क्षेत्र ट्रस्टी वारिश जैन ,संजय जैन एमपीईबी ने बताया की सिद्धाचल पोदनपुरम की स्थापना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में आज से 23 वर्ष पूर्व भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा करवा</p>
<p>कर की गई थी। शैलेन्द्र जैन रक्षित जैन ने बताया की बाहुबली भगवान का शास्त्रों में निर्वाण तिथी का कोई भी उल्लेख नही है इस लिये पूरे भारत देश सिर्फ सिद्धाचल पोदनपुरम में प्रतिष्ठापना दिवस के दिन ही बाहुबली भगवान को यहाँ निर्वाण लाड़ू चढ़ाया जाता है।</p>
<p><strong>कार्यक्रम में यह रहे मौजूद</strong></p>
<p>इस अवसर पर इंजी.मनोज जैन, हेमंत काका, लवीश पाटनी, आशीष जैन, अक्षय जैन, अश्विन जैन ,संयम जटाले, हितेश जैन,प्रदीप पंचोलिया, मुन्ना भाईजैन,विशाल जैन, बब्लू जैन,सुनील जैन, कुसुम काका,आशीष झांझरी ,अंजू पाटनी, संगीता पाटोदी, स्वाति जैन, पूर्णिमा जैन प्रियकां पंचोलिया, पुष्पा लाठिया, हिनल पारिख,दीप्ति जैन, रागिनी जैन,सहित सनावद मंडलेश्वर, बडवाह ,इंदौर के सभी समाजजन उपस्थित थे। इस मंगल अवसर पर आर्यिका माताजी को आहारदान देने का सौभाग्य पुष्पा सुनील पावणा परिवार को प्राप्त हुआ इस मौके पर अमर ज्योति बस परिवार के द्वारा निशुल्क बस व्यवस्था रखी गई थी।</p>
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