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	<title>Aryaka Shri Swastibhushan Mataji &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>शिक्षा के साथ संस्कारों के बीजारोपण की आवश्यकता : मां स्वस्ति इंटरनेशनल स्कूल में वार्षिकोत्सव में बच्चों ने दी प्रभावी प्रस्तुति  </title>
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		<pubDate>Mon, 22 Dec 2025 13:42:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शिक्षा के साथ संस्कारों का होना अतिआवश्यक है। बच्चों को किताबी ज्ञान मिलता है, लेकिन वे संस्कारों से दूर रहे हैं। होना यह चाहिए कि स्कूलों में किताबी ज्ञान के साथ संस्कारों का बीजारोपण भी किया जाए। यह उद्गार मां स्वस्ति इंटरनेशनल स्कूल के वार्षिकोत्सव के अवसर आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने वर्जुअल व्यक्त किए। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>शिक्षा के साथ संस्कारों का होना अतिआवश्यक है। बच्चों को किताबी ज्ञान मिलता है, लेकिन वे संस्कारों से दूर रहे हैं। होना यह चाहिए कि स्कूलों में किताबी ज्ञान के साथ संस्कारों का बीजारोपण भी किया जाए। यह उद्गार मां स्वस्ति इंटरनेशनल स्कूल के वार्षिकोत्सव के अवसर आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने वर्जुअल व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> शिक्षा के साथ संस्कारों का होना अतिआवश्यक है। वर्तमान में स्कूली शिक्षा में बच्चों को किताबी ज्ञान मिलता है, लेकिन वे संस्कारों से दूर होते जा रहे हैं। होना यह चाहिए कि स्कूलों में किताबी ज्ञान के साथ साथ बच्चों में संस्कारों का बीजारोपण भी किया जाए। यह उद्गार मां स्वस्ति इंटरनेशनल स्कूल के वार्षिकोत्सव के अवसर आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने वर्जुअल व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि स्कूली शिक्षा ज्ञान और कौशल सिखाती है, जबकि संस्कार नैतिक मूल्य, सही आचरण और जीवन जीने का तरीका सिखाते हैं। ये दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं और एक सभ्य, सफल और जिम्मेदार व्यक्ति तथा समाज के निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं क्योंकि, व्यक्ति शिक्षा के बिना अज्ञानी और संस्कारों के बिना चरित्रहीन हो सकता है। उन्होंने कहा कि जीवन में शिक्षा और संस्कार दोनों का महत्व है। शिक्षा और संस्कार एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। शिक्षा दिशा देती है और संस्कार उस दिशा में चलने की प्रेरणा और शक्ति देते हैं। आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी ने कहा कि केवल किताबी शिक्षा से व्यक्ति जीवन में भटक सकता है, लेकिन शिक्षा के साथ संस्कार मिलने से जीवन सरल और सफल बनता है। एक शिक्षित व्यक्ति बुद्धिमान हो सकता है, लेकिन एक संस्कारवान व्यक्ति ही देश, समाज के लिए उपयोगी और अच्छा इंसान बन सकता है। इसलिए, बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ नैतिक मूल्यों और अच्छे आचरण की शिक्षा देना बहुत ज़रूरी है, ताकि वे एक उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर सकें। देश, धर्म, समाज और परिवार के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ साथ संस्कारवान होना भी जरूरी है।</p>
<p><strong> नौ रसों का प्रभावशाली प्रदर्शन </strong></p>
<p>विगत दिवस मां स्वस्ति इंटरनेशनल स्कूल में वार्षिक उत्सव सांस्कृतिक गरिमा के साथ मनाया गया। इस वर्ष के वार्षिक समारोह की थीम ‘नवरस: जीवन के नौ भाव’ पर आधारित थी। जिसके माध्यम से विद्यार्थियों ने मानव जीवन की विविध भावनाओं को मंच पर सजीव रूप में प्रस्तुत किया। इस अवसर जैन छात्रावास के बच्चों ने वाद्ययंत्रों के माध्यम से सुंदर प्रस्तुति दी। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई। विद्यार्थियों ने नृत्य, नाट्य एवं संगीत प्रस्तुतियों के माध्यम से श्रृंगार, हास्य, करुणा, रौद्र, वीर, भयानक, वीभत्स, अद्भुत एवं शांत इन नौ रसों का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। बच्चों की भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।</p>
<p><strong>नवरस थीम बच्चों को भारतीय संस्कृति से जोड़ने में सहायक </strong></p>
<p>विद्यालय के डायरेक्टर्स ने पालकों और विद्यार्थियों से कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन बच्चों के आत्मविश्वास, रचनात्मकता और नैतिक मूल्यों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सभी विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के प्रयासों की सराहना की। विद्यालय के प्रधानाचार्य ने कहा कि नवरस जैसी थीम बच्चों को भारतीय संस्कृति से जोड़ने के साथ-साथ उनके सर्वांगीण विकास में सहायक है। उन्होंने विद्यालय की प्रगति रिपोर्ट के साथ साथ आगामी कार्य योजना भी प्रस्तुत की। कार्यक्रम के अंत में अभिभावकों एवं अतिथियों ने विद्यार्थियों की प्रतिभा की मुक्तकंठ से प्रशंसा की और विद्यालय परिवार को इस सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।</p>
<p><strong>गुरुमां स्वस्तिभूषण ने सभी को दिया शुभाशीष</strong></p>
<p>कार्यक्रम के मध्य वर्जुअल माध्यम से आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी ने समस्त बच्चों, पालकों एवं स्टाफ को शुभाशीष प्रदान किया। जैसे ही गुरुमां ने शुभाशीष के लिए हाथ उठाया। संपूर्ण सभा मंडप तालियों की गड़गड़ाहट और उनके जय जयकारों से गूंज उठा। सभी के चेहरे पर प्रसन्नता और खुशी के भाव दृष्टिगोचर हो रहे थे।</p>
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		<title>मानव जीवन में संस्कारों का विशेष महत्व है: आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी के सानिध्य में रजत कलशों से अभिषेक  </title>
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		<pubDate>Thu, 24 Apr 2025 08:09:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बोहरा कॉलोनी स्थित शिवम वाटिका में आयोजित त्रि-दिवसीय श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान के जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव मनाया गया। इसका समापन बुधवार को हुआ। धर्मसभा में आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी ने उपदेश दिए। भगवान मुनिसुव्रतनाथ का पूजन व धार्मिक क्रियाएं आर्यिका ससंघ, पंडित कपिल भैया तथा पंडित निकेत शास्त्री के निर्देशन में हुई। रिद्धि-सिद्धि [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बोहरा कॉलोनी स्थित शिवम वाटिका में आयोजित त्रि-दिवसीय श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान के जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव मनाया गया। इसका समापन बुधवार को हुआ। धर्मसभा में आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी ने उपदेश दिए। भगवान मुनिसुव्रतनाथ का पूजन व धार्मिक क्रियाएं आर्यिका ससंघ, पंडित कपिल भैया तथा पंडित निकेत शास्त्री के निर्देशन में हुई। रिद्धि-सिद्धि मंत्रों से 1008 रजत कलशों से मस्तिकाभिषेक हुआ। <span style="color: #ff0000">केकड़ी से पढ़िए अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>केकड़ी।</strong> मानव जीवन में संस्कारों का विशेष महत्व है। जीवन में अच्छे संस्कार के लिए जिनागम के रहस्य को समझना आवश्यक है। बोहरा कॉलोनी स्थित शिवम वाटिका में आयोजित त्रि-दिवसीय श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान के जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव के समापन अवसर पर धर्म सभा में आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी ने अपने धर्माेपदेश में कहे। उन्होंने कहा कि तीर्थंकरों के कल्याणक महोत्सव पुण्यशाली जीव ही मना सकते हैं। जिनधर्म की प्रभावना के लिए 24 ही तीर्थंकरों के कल्याणक धूमधाम से धार्मिक कार्यों के साथ मनाना चाहिए। प्रातः आर्यिका माताजी ससंघ श्री मुनिसुव्रत नाथ मंदिर पहुंचीं तथा वहां से भागचंद ज्ञानचंद जैनम कुमार विनय कुमार सावर परिवार जिन प्रतिमा लेकर शिवम वाटिका जुलूस के साथ पहुंचे।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-79723" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250424-WA0014.jpg" alt="" width="1263" height="853" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250424-WA0014.jpg 1263w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250424-WA0014-300x203.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250424-WA0014-1024x692.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250424-WA0014-768x519.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250424-WA0014-990x669.jpg 990w" sizes="(max-width: 1263px) 100vw, 1263px" />1008 रजत कलशों से किया महामस्तकाभिषेक</strong></p>
<p>भगवान मुनिसुव्रतनाथ का पूजन व धार्मिक क्रियाएं आर्यिका ससंघ, पंडित कपिल भैया तथा पंडित निकेत शास्त्री के निर्देशन में हुई। रिद्धि-सिद्धि मंत्रों से 1008 रजत कलशों से महामस्तकाभिषेक हुआ। जिसमें प्रथम कलश का सौभाग्य टीकमचंद, विपिनकुमार, जितेंद्रकुमार, सानिध्य परिवार और शांतिधारा का पुण्यार्जन महावीरप्रसाद पदमचंद अक्षत बीजवाड़ परिवार ने प्राप्त किया। भगवान महावीर और आचार्य श्री का चित्र अनावरण और दीप प्रज्जवलन उपखंड अधिकारी सुभाष हेमानी तथा तहसीलदार बंटी राजपूत ने किया। भाजपा नगर अध्यक्ष रितेश जैन मौजूद रहे। समाज के गणमान्यों ने अतिथियों का स्वागत सम्मान किया। इस अवसर पर उपखंड अधिकारी तथा तहसीलदार ने माताजी का आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि आर्यिका माताजी की प्रेरणा से जहाजपुर में एक ऐसा जहाज मंदिर बनाया है। जो विश्व प्रसिद्ध हो गया है। उन्होंने महिलाओं से कहा कि आज की महिला सर्वशक्तिमान हैं। जैन धर्म की प्रासंगिकता तथा जन-जन को जिन धर्म का महत्व बताया। माताजी के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य टीकमचंद मोनू कुमार रामथला परिवार ने किया।</p>
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