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	<title>Artificial Intelligence &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Artificial Intelligence &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>मॉडर्न ड्रग रिसर्च में फार्माकोकाइनेटिक्स का रोल महत्वपूर्ण : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हर्बल ज्ञान ट्रांसलेशनल साइंस पर विशेषज्ञ व्याख्यान  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 09 Jan 2026 15:16:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ फार्मेसी में बोत्स्वाना मेडिसिन एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी, दक्षिण अफ्रीका के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.फरात अली का ड्रग मेटाबॉलिज़्म एवं फार्माकोकाइनेटिक्स में नवाचारः आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हर्बल ज्ञान एवम् ट्रांसलेशनल साइंस पर विशेषज्ञ व्याख्यान हुए। मुरादाबाद। बोत्स्वाना मेडिसिन एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी, दक्षिण अफ्रीका के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.फरात अली बोले, आधुनिक औषधि खोज [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ फार्मेसी में बोत्स्वाना मेडिसिन एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी, दक्षिण अफ्रीका के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.फरात अली का ड्रग मेटाबॉलिज़्म एवं फार्माकोकाइनेटिक्स में नवाचारः आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हर्बल ज्ञान एवम् ट्रांसलेशनल साइंस पर विशेषज्ञ व्याख्यान हुए।</strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरादाबाद</strong>। बोत्स्वाना मेडिसिन एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी, दक्षिण अफ्रीका के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.फरात अली बोले, आधुनिक औषधि खोज एवम् विकास में ड्रग मेटाबॉलिज़्म और फार्माकोकाइनेटिक्स की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मॉडलिंग, औषधियों के वैज्ञानिक मूल्यांकन और अकादमिक-उद्योग समन्वय पर विशेष प्रकाश डालते हुए छात्रों को नवाचार एवं अनुसंधान के लिए प्रेरित किया। डॉ. फरात ने डीएमपीके की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए उत्पाद रसायन और अवशोषण, वितरण, मेटाबोलिज्म, और निष्कासन- एडीएमई के बारे में विस्तार से समझाया। डॉ. फरात तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ फार्मेसी में इंस्टीट्यूशन्स इन्नोवेशन काउंसिल-आईआईसी के तत्वावधान में ड्रग मेटाबॉलिज़्म एवम् फार्माकोकाइनेटिक्स में नवाचारः आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हर्बल ज्ञान एवम् ट्रांसलेशनल साइंस पर आयोजित विशेषज्ञ व्याख्यान में बतौर एक्सपर्ट बोल रहे थे। इससे पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. फरात अली, फार्मेसी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. आशु मित्तल एवं उप-प्राचार्य प्रो. मयूर पोरवाल आदि ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित करके कार्यक्रम का शुभारंभ किया।</p>
<p><strong>विट्रो मॉडल्स पर चर्चा कर दी उपयोगी जानकारी </strong></p>
<p>डॉ.फरात अली ने बताया कि एडीएमई गुणों की अपर्याप्त समझ और मूल्यांकन दवा उम्मीदवारों की विफलता के प्रमुख कारणों में से एक है। उन्होंने व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से बताया कि एडीएमई अध्ययन का प्रारंभिक एकीकरण नई रासायनिक इकाइयों की प्रभावशीलता, खुराक निर्धारण, और सुरक्षा सीमाओं के निर्धारण के लिए आवश्यक है। साथ ही मेटाबोलिज्म अध्ययन के लिए उपयोग किए जाने वाले विट्रो मॉडल्स पर चर्चा करते हुए बताया कि एलसी-एम/एस तकनीक मेटाबोलाइट पहचान और क्वांटिफिकेशन में महत्वपूर्ण है। अतिथि व्याख्यान से पूर्व मुख्य अतिथि को पौधा भेंट करके स्वागत किया गया। प्रशस्ति पत्र प्रदान करके सम्मानित किया गया।</p>
<p><strong>छात्र-छात्राएं मौजूद रहीं</strong></p>
<p>फार्मेसी कॉलेज के आईआईसी एम्बेसडर एवम् कार्यक्रम समन्वयक डॉ. आशीष सिंघई ने वोट ऑफ थैंक्स दिया। कार्यक्रम में डॉ. राजेश शर्मा, डॉ अनुराधा पवार, डॉ प्रेमशंकर, मोहित, अनुज्ञा के संग-संग रिसर्च स्कॉलर्स, फार्मेसी कॉलेज के बी. फार्मा, एम. फार्मा स्टूडेंट्स मौजूद रहे। संचालन छात्र संदेश सराफ ने किया।</p>
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		<title>संस्कृत मानव सभ्यता की अद्भुत धरोहर: रोहिणी जैन ने कहा संस्कृत का पुनर्जीवन वैश्विक पहचान बना सकता है  </title>
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		<pubDate>Mon, 01 Sep 2025 08:00:10 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[संस्कृत केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि भविष्य की संभावना है। यह प्राचीन ज्ञान और आधुनिक तकनीक का सेतु है। यह विचार व्याख्यानमाला में रोहिणी जैन ने रखे। उन्होंने कहा कि संस्कृत हजारों वर्षों से ज्ञान, विज्ञान, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में पथप्रदर्शक है। टीकमगढ़ से पढ़िए, यह खबर&#8230; टीकमगढ़। संस्कृत केवल अतीत की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>संस्कृत केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि भविष्य की संभावना है। यह प्राचीन ज्ञान और आधुनिक तकनीक का सेतु है। यह विचार व्याख्यानमाला में रोहिणी जैन ने रखे। उन्होंने कहा कि संस्कृत हजारों वर्षों से ज्ञान, विज्ञान, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में पथप्रदर्शक है। <span style="color: #ff0000">टीकमगढ़ से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टीकमगढ़।</strong> संस्कृत केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि भविष्य की संभावना है। यह प्राचीन ज्ञान और आधुनिक तकनीक का सेतु है। यह विचार रविवार को आयोजित व्याख्यानमाला में विदुषी रोहिणी जैन ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि संस्कृत हजारों वर्षों से ज्ञान, विज्ञान, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में पथप्रदर्शक की भूमिका निभाती आ रही है। यह विश्व की सबसे प्राचीन, सुव्यवस्थित और वैज्ञानिक भाषाओं में से एक है। जैन ने बताया कि संस्कृत की सबसे बड़ी विशेषता इसकी व्याकरणिक संरचना है। पाणिनि का अष्टाध्यायी विश्व की सबसे सटीक और तार्किक व्याकरणिक रचना मानी जाती है। यही कारण है कि आधुनिक कम्प्यूटर भाषाओं के निर्माण में भी इसे आदर्श माना जा सकता है।</p>
<p><strong>तकनीक से जुड़ाव जरूरी </strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि जहां अंग्रेज़ी सहित अन्य भाषाओं में असंगतियां देखने को मिलती हैं, वहीं संस्कृत में पूर्ण स्पष्टता और तार्किकता है। यही कारण है कि जब विश्व में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का दौर शुरू हुआ, तब शोधकर्ताओं ने पाया कि संस्कृत इन तकनीकों को विकसित करने में अत्यंत उपयोगी हो सकती है।</p>
<p><strong>वैश्विक रुचि जागृत करनी होगी </strong></p>
<p>आज जर्मनी, अमेरिका और ब्रिटेन सहित अनेक देशों के विश्वविद्यालयों में संस्कृत का गहन अध्ययन हो रहा है। जर्मनी के कम से कम 14 विश्वविद्यालयों में संस्कृत पाठ्यक्रम चल रहे हैं, जहां इसे केवल धार्मिक या दार्शनिक दृष्टि से नहीं बल्कि आधुनिक विज्ञान और तकनीक के परिप्रेक्ष्य में भी पढ़ाया जाता है।</p>
<p><strong>भविष्य की भाषा है संस्कृत </strong></p>
<p>रोहिणी जैन ने कहा कि संस्कृत की शब्द संरचना और व्याकरणिक नियम कंप्यूटरों के लिए अत्यंत उपयुक्त हैं, क्योंकि इसमें प्रत्येक शब्द और वाक्य का निश्चित और स्पष्ट अर्थ होता है। यही कारण है कि कई शोध संस्थान संस्कृत को भविष्य की तकनीकी भाषा मान रहे हैं। उन्होंने आह्वान किया कि “संस्कृत का पुनर्जीवन भारत को ज्ञान और तकनीक की दिशा में विश्व का नेतृत्वकर्ता बना सकता है। यह भाषा हमारी सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए आधुनिकता के साथ तालमेल बैठाने में सक्षम है। संस्कृत को विज्ञान और तकनीक का सेतु बनाया जाए, यही भारत के स्वर्णिम भविष्य की आधारशिला सिद्ध होगी।</p>
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		<title>युवाओं को गांव में लौटाया जाएः एक गौ माता से 30 एकड़ भूमि में खेती हो सकती है-पद्मश्री सुभाष पालेकर </title>
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		<pubDate>Tue, 08 Apr 2025 19:02:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[एक गौ माता से 30 एकड़ भूमि में कृषि का भरपूर उत्पादन लिया जा सकता है। आज का युवा गांव छोड़कर भाग रहा है। हरित क्रांति से उत्पादन तो बढ़ा है गांव में बहुत बड़े और अच्छे आधुनिक मकान भी बने हैं लेकिन युवा गांव में नहीं है उन्हें वापस गांव में लौटना होगा, अन्यथा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>एक गौ माता से 30 एकड़ भूमि में कृषि का भरपूर उत्पादन लिया जा सकता है। आज का युवा गांव छोड़कर भाग रहा है। हरित क्रांति से उत्पादन तो बढ़ा है गांव में बहुत बड़े और अच्छे आधुनिक मकान भी बने हैं लेकिन युवा गांव में नहीं है उन्हें वापस गांव में लौटना होगा, अन्यथा देश की स्थिति बहुत भयावह हो जाएगी। उक्त विचार भारत सरकार द्वारा 2016 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित सुभाष पालेकर ने कहीं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेंद्र महावीर से सनावद की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> निमाड़ क्षेत्र में चिकनी काली उपजाऊ मिट्टी है, निमाड़ी गोवंश खेती के लिए बहुत उपयोगी है। एक गौ माता से 30 एकड़ भूमि में कृषि का भरपूर उत्पादन लिया जा सकता है। आज का युवा गांव छोड़कर भाग रहा है। हरित क्रांति से उत्पादन तो बढ़ा है गांव में बहुत बड़े और अच्छे आधुनिक मकान भी बने हैं लेकिन युवा गांव में नहीं है उन्हें वापस गांव में लौटना होगा, अन्यथा देश की स्थिति बहुत भयावह हो जाएगी। उक्त विचार भारत सरकार द्वारा 2016 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित सुभाष पालेकर ने बासवा में समाजसेवी शिक्षक राजेंद्र महावीर के साथ हुई चर्चा में व्यक्त किए।</p>
<p><strong>युवाओं को गांव में लौटाया जाए </strong></p>
<p>इस चर्चा में पद्मश्री सुभाष पालेकरजी ने अनेक बिंदुओं को छूते हुए प्रश्नों का निराकरण भी किया, उन्होंने कहा की ग्लोबल वार्मिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यह दो ऐसे भस्मासुर हैं जो पूरी दुनिया को नष्ट कर सकते हैं, संपूर्ण विश्व का इकोसिस्टम समाप्त हो रहा है इसका एक ही उपाय है कि युवाओं को गांव में लौटाया जाए और सुभाष पालेकर कृषि मॉडल से शून्य बजट प्राकृतिक खेती की जाए।</p>
<p><strong>रासायनिक और जैविक दोनों कृषि से बढ़ती है ग्लोबल वार्मिंग</strong></p>
<p>पद्मश्री सुभाष पालेकर ने कहा कि प्राकृतिक खेती नाम की कोई व्यवस्था नहीं है रासायनिक और जैविक कृषि दोनों ही घातक है वास्तव में किसानों को खेती के बारे में पूर्ण जानकारी नहीं है इसलिए वे आधुनिक भ्रमजाल में उलझ कर खेती की जमीन और खुद का स्वास्थ्य खराब कर रहा है। किसानों को रासायनिक, जैविक नहीं सुभाष पालेकर कृषि मॉडल पर कार्य करना चाहिए ।</p>
<p><strong>पालेकर कृषि कैंसर डायबिटीज से मुक्त कराकर डेढ़ गुना ज्यादा दाम दिलाएगी</strong></p>
<p>पद्मश्री सुभाष पालेकर ने कहा कि मेरे द्वारा जो मॉडल विकसित किया गया है वह जीव, जमीन, पानी, पर्यावरण विनाश को रोकता है और भूमि सरंक्षण संवर्धन करता है। हम अगली पीढ़ी को ऐसी भूमि बनाकर देते हैं, जिसमें कोई खाद नहीं डालना है इससे उत्पादन घटेगा नहीं, लागत बढ़ेगी नहीं और उपज का दाम डेढ़ गुना तक बढ़ जाएगा। हमारे मॉडल से जो कृषि उपज होगी वह कैंसर और डायबिटीज से मुक्त होगी। किसान एक देसी गाय के गोबर से और गोमूत्र से 30 एकड़ खेती में उत्पादन ले सकता है।</p>
<p><strong>प्रधानमंत्री की इच्छा है सुभाष पालेकर कृषि से किसानों आय दोगुना</strong></p>
<p>सन 2016 में भारत सरकार के नागरिक सम्मान पद्मश्री सम्मानित सुभाष पालेकर कृषि विशेषज्ञ हैं। जिन्होंने शून्य बजट प्राकृतिक खेती को लोकप्रिय बनाकर कई किताबें भी लिखी है। अभी तक 40 लाख से अधिक किसानों को अपनी शिक्षा व प्राकृतिक खेती से उन्होंने लाभान्वित किया हैं। पद्मश्री पालेकर ने पुआल का उपयोग गाय के गोबर, गो मूत्र के मिश्रण का छिड़काव करने व पांच परतों में फसल उगाने का शिविर सनावद में लगाया। जिसमें 350 कृषको ने सुभाष पालेकर कृषि करने का प्रशिक्षण लिया। श्री पालेकर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदीजी चाहते हैं कि किसानों की आय दोगुना हो। इस हेतु शून्य बजट खेती को जन आंदोलन बनाना होगा। जिससे उनके स्वप्न को ग्राम ग्राम तक पहुंचाया जा सके।</p>
<p><strong>मॉडल बनाने के लिए प्रेरित किया</strong></p>
<p>पद्मश्री सुभाष पालेकर से प्रभावित सेवानिवृत प्रोफेसर मणि शंकर डोंगरे, बासवा निवासी आईआईटी कानपुर के छात्र हरिओम बिरला ने कहा कि वह अपने खेतों में पालेकर कृषि मॉडल बनाकर कृषि करेंगे। श्री पालेकर ने बासवा के बीच स्थित नंदराम बिरला के खेत का अवलोकन कर मॉडल बनाने के लिए प्रेरित किया।</p>
<p><strong>गांव में मॉडल खड़ा होना चाहिए</strong></p>
<p>पद्मश्री सुभाष पालेकरजी का स्वागत राजेंद्र जैन महावीर, दिनेश राठौर, बालकराम रावत, गणेश बिरला, अनोखीलाल सेजगाया, राकेश बिरला, अंकित रेवापाटी, मानकचंद रेवापाटी, दंदू मलगाया आदि ने किया। उल्लेखनीय पद्मश्री पालेकर संपूर्ण देश में कृषि मॉडल का प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं उनका मानना है कि नई पीढ़ी बदलाव लाएगी और खेतों में मॉडल बनेगा तो उसे देखकर किसान समझ सकेंगे, इस हेतु हर गांव में मॉडल खड़ा होना चाहिए।</p>
<p><strong>कृषि करने के तरीकों में बदलाव लायें </strong></p>
<p>किसान मित्रों को यह समझना चाहिए कि कोई कानून नहीं है कि वह खेतों में रासायनिक खाद डालें, किसान भ्रम में है और वह भ्रमित होकर कृषि में वे सब प्रयोग कर लेते है, जो उसे नहीं करना चाहिए। किसान को अपना निर्णय स्वयं करना होगा। हमें प्रकृति को जीवित रखना है और ग्लोबल वार्मिंग से बचाना है तो हमें कृषि करने के तरीकों में भी बदलाव लाना पड़ेगा।</p>
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